1439 – इंग्लैंड में बीमारी फैलने के डर से चुंबन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
1465 – फ्रांस के मोंटलहेरी में युद्ध छिड़ा।
1519 – मार्टिन लूथर और धार्मिक चिंतक जॉन ऐक के बीच लेपजिग के प्लेसिनबर्ग कैसल में सार्वजनिक बहस शुरू।
1661 – स्वीडिश बैंक ने यूरोप में पहला नोट जारी किया।
1769 - फादर जूनिपेरो सेरा कैलिफोर्निया में पहला मिशन, मिशन सैन डिएगो पाया।
1779 - जनरल एंथोनी वेन की अगुआई वाली संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ब्रिटिश सैनिकों से स्टॉनी पॉइंट, न्यूयॉर्क पर कब्जा कर लिया।
1790 – अमेरिकी कांग्रेस ने कोलंबिया राज्य की स्थापना को मंजूरी दी।
1798 – अमेरिका में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा विभाग बना और अमेरिकी मरीन अस्पताल अधिकृत।
1856 – हिंदू विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता मिली।
1890 – पार्किंसस नामक एक डॉक्टर ने पार्किंसस बीमारी और उसके अस्तित्व में आने की प्रक्रिया के बारे में अपनी जॉच पूरी की। उन्हीं के नाम पर बीमारी का नाम पार्किन्सन्स रखा गया।
1894 – जापान और इंग्लैंड के बीच आओकि-किम्बरली की संधि पर हस्ताक्षर हुए।
1900 – रूस ने मंचूरिया में चीनी लोगों के खिलाफ आक्रामक अभियान शुरू किया।
1925 – इराक में राजा फैसल ने बगदाद में पहली संसद स्थापित की।
1926 – नेशनल जियोग्राफिक ने पहली बार समुद्र के भीतर के दृश्यों का प्राकृतिक रंगीन फोटों निकाली।
1929 - भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) की स्थापना हुई।
1935 – अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में पहला ऑटोमैटिक पार्किंग मीटर लगा।
1942 – फ्रांस की राजधानी पेरिस में पुलिस ने 13,152 यहूदियों को गिरफ्तार किया।
1942 - संयुक्त राज्य अमेरिका ने फिनलैंड के साथ राजनयिक संबंध ख़तम किया।
1945 – अमरीका ने परमाणु बम का पहला परीक्षण किया।
1950 – फुटबॉल विश्व कप के चौथे संस्करण के फाइनल में ब्राजील को हरा उरुगवे चैंपियन बना।
1951 – एशिया का देश नेपाल, ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ।
1969 – अपोलो-11 यान से चंद्रमा पर पहुंचने वाले बज एल्ड्रिन पहले व्यक्ति बने और उनके चांद पर पहले कदम की फोटो प्रसारित हुई।
1970 – इराक में संविधान लागू हुआ।
1981 – भारत ने परमाणु परीक्षण किया।
1988 - पडी एशडाउन ब्रिटेन में लिबरल डेमोक्रेट के नेता बने।
1990 – फिलीपींस में 7.7 की तीव्रता के भूकंप में 400 लोग मारे गये।
1990 – यूक्रेन ने स्वतंत्रता की घोषणा की।
1993 – ब्रिटेन की खुफिया सेवा, एमआई5 के किसी सदस्य ने फोटो खिंचवा कर पहली बार औपचारिक रूप से जनता के सामने अपनी पहचान खोली।
1999 - जॉन एफ़. कैनेडी के पुत्र जॉन एफ़. कैनेडी जूनियर की विमान दुर्घटना में मृत्यु।
2001 - जैक्स रोगे (बेल्जियम) अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के आठवें अध्यक्ष बने।
2002 - पराग्वे में आपातकाल की घोषणा।
2003 - पाकिस्तान, सऊदी अरब और 53 अन्य इस्लामी देश, इस्रायल को 2005 तक मान्यता देने पर राजी।
2004 - चीन ने उत्तरी चीन के सबसे बड़े तटीय शहर त्यानचिन में पहला आनलाइन वायु सुरक्षा अभ्यास किया।
2006 - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोरिया पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित।
2007 - बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना वाजिद को धन वसूली के एक मामले में गिरफ़्तार किया गया।
2007 – जापान के निगाटा तट पर 6.8 तीव्रता के आए भूकंप आने से आठ लोगों की जानें गई और 800 लोग घायल हुए। एक परमाणु ऊर्जा केंद्र भी ध्वस्त हो गया।
2008 - ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने गाजा क्षेत्र की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द की।
2008 - अमेरिका ने अगले पांच सालों में पाकिस्तान को साढ़े सात अरब डॉलर की असैनिक मदद के लिए एक विधेयक पेश किया।
2011- देश में पिछले एक दशक में गांवों की तुलना में शहरी आबादी ढाई गुना से भी अधिक तेज़ी से बढ़ी । 2011 - भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक में देश की जनसंख्या में 17.64 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है। यह वृद्धि गांवों में 12.18 और शहरी क्षेत्रों में 31.80 प्रतिशत की रही है।
2015 – वैज्ञानिकों ने प्लूटाे ग्रह की क्लोज़-अप तस्वीरें जारी कीं।
2019 - सुश्री अनुसुइया उइके छत्तीसगढ़ और श्री बिस्वा भूषण हरिचंदन आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बने।
2019 - पाकिस्तान ने 139 दिन बाद भारतीय समेत अन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस खोल दिया।
2020 - भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, जर्मनी और फ्रांस के साथ “एयर बबल” बनाया। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की कि भारत फ्रांस और अमेरिका के साथ अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन को फिर से शुरू करेगा।
2021 - महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक हेलीकॉप्टर क्रैश होने से फ्लाइट इंस्ट्रक्टर की मौत व एक महिला पायलट गंभीर रूप से घायल हुई।
2021 - भोपाल से 120 KM दूर विदिशा जिले के गंजबसौदा हादसे में 24 घंटे बाद कुएं में गिरे लोगों काे निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हूआ , 11 लोगों की मौत हुई व 20 लोग सुरक्षित बचाए गए।
2022 - ब्रिटेन में, पहली बार भीषण गर्मी पड़ने का रेड अलर्ट जारी होने के बाद देश में आपातकाल की घोषणा की गई।
2022 - गुजरात में रिक्टर स्केल पर मापी गई 3.2 की तीव्रता का भूकम्प आया।
2022 - रूस ने यूक्रेन के ज्यादातर हिस्सों में रॉकेट हमले तेज किए , 16 नागरिकों की मौत हुई।
2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश का दौरा कर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया।
2022 - आईएनएस सिंधुध्वज (पनडुब्बी) ने 35 साल की शानदार अवधि तक अपनी सेवाएं देने के बाद भारतीय नौसेना को अलविदा कहा।
2023 - शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री श्री लॉरेंस वोंग ने तीसरे सिंगापुर - भारत हैकथॉन के विजेताओं को गुजरात के गांधीनगर में सम्मानित किया।
2023 - भारत और इंडोनेशिया ने भारत-इंडोनेशिया आर्थिक व वित्तीय संवाद शुरू करने की घोषणा की।
2023 - चीन में अब तक का सबसे अधिक तापमान 52.2 डिग्री सेल्सियस (126 डिग्री फारेनहाइट) शिनजियांग के तुरपान डिप्रेशन के सानबाओ कस्बे में दर्ज किया गया व ईरान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित फ़ारस की खाड़ी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दोपहर 12:30 बजे तापमान 152 डिग्री फ़ारेनहाइट (66.7 डिग्री सेल्सियस) तक पहुँच गया।
2023 - जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने जापान सागर में संयुक्त नौसैनिक मिसाइल रक्षा अभ्यास किया।
2024 - मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर से तीर्थयात्रियों की बस टकराने से बस 20 फीट गहरी खाई में गिरी, 5 की मौत व 7 गंभीर घायल हुए।
2024 - डोडा जिले के देसा के जंगलों में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना के एक कैप्टन, नायक समेत चार जवान बलिदान हुए।
1896 - ट्रीगवी ली - प्रसिद्ध मजदूर नेता, राजकीय अधिकारी, नॉर्वीयन राजनीतिज्ञ तथा जानेमाने लेखक थे।
1909 - अरुणा आसफ़ अली - 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' में योगदान देने वाली प्रमुख महिलाओं में से एक।
1917 - जगदीशचन्द्र माथुर - प्रसिद्ध नाटककार।
1923 - के. वी. कृष्ण राव - भारतीय थल सेना के भूतपूर्व प्रमुख।
1937 - राजिन्दर कुमार धवन - राज्य सभा सांसद थे। इंदिरा गांधी के निजी सचिव व उनकी हत्या के वे प्रत्यक्षदर्शी रहे।
1939 - लाइबेरिया की प्रथम महिला राष्ट्रपति: रूथ पेरी।
1956 - भागवत कराद भारतीय केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री बने।
1968 - धनराज पिल्लै - भारत के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी ।
1984 - कटरीना कैफ - बालीवुड अभिनेत्री।
1988 - अंशा सयद एक भारतीय अभिनेत्री।
2005 – के. वी. सुबन्ना- प्रसिद्ध कन्नड़ नाटककार।
2013 - बारुन डे - भारतीय इतिहासकार (कन्फर्म नहीं)।
2017 - नर बहादुर भण्डारी सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री।
2019 - चरमपंथी समूह दलित पैंथर के संस्थापकों में से एक राजा ढाले का उनके आवास पर निधन।
2019 - 1971 के युद्ध के नायक लेफ्टिनेंट जनरल घरया का निधन।
2020 - भारत के अर्जुन पुरस्कार विजेता और दिग्गज पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी रमेश टीकाराम की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई।
2020 - महाराष्ट्र की पहली महिला चुनाव आयुक्त बनकर इतिहास रचने वालीं नीला सत्यनारायण का कोरोना के कारण निधन हुआ।
2021 - सुरेखा सीकरी हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थीं।
2021 - दानिश सिद्दीकी भारतीय फोटो जर्नलिस्ट थे, जो राष्ट्रीय रॉयटर्स मल्टीमीडिया टीम का नेतृत्व करते थे।
2022 - पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर निर्मल सिंह काहलों (79) का निधन हुआ।
2023 - अंग्रेजी - फ्रेंच गायिका और अभिनेत्री जेन मैलोरी बिर्किन (76) का निधन हुआ।
2024 - ऑस्ट्रेलियाई रग्बी लीग HOF प्रसारक डेविड मोरो (71) का कैंसर से निधन हुआ।
2024 - डच पत्रकार, रंगमंच समीक्षक और टीवी व्यक्तित्व जैक्स डी'एंकोना (86) का निधन हुआ।
श्री रामजीबाबा पुण्यतिथी - मोर्शी (अमरावती)।
स्वतन्त्रता सेनानी अरुणा आसफ़ अली जयन्ती।
श्री धनराज पिल्लै जन्म दिवस।
श्री नर बहादुर भण्डारी स्मृति दिवस।
साझा सेवा केंद्र (सीएससी) दिवस।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) स्थापना दिवस (97वां)।
विश्व सर्प दिवस (World Snake Day)।
कृपया ध्यान दें
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।" आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।
कानपुर, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित पनकी रेलवे स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। यह उद्घाटन देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों के एक साथ लोकार्पण कार्यक्रम का हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री पंजाब के जालंधर कैंट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ पनकी स्टेशन करीब ₹24.5 करोड़ की लागत से विकसित पनकी रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। स्टेशन पर नया भवन, बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक टिकटिंग व्यवस्था, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, लिफ्ट, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल सूचना प्रणाली, आकर्षक फसाड और यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिलेगा। कानपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मिलेगा लाभ रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन के आधुनिकीकरण से पनकी और आसपास के औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्रों के लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए स्टेशन पर बेहतर आवागमन और सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। अमृत भारत स्टेशन योजना का हिस्सा पनकी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास केंद्र सरकार की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य देशभर के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और उन्हें स्थानीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप विकसित करना है। आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री देश के विभिन्न राज्यों के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का भी वर्चुअल उद्घाटन करेंगे।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई ने विशेष अदालत में बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे ने एक छात्र के परिवार से 5 लाख रुपये लेकर परीक्षा से पहले ही उसे लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र दिखाया था। यह जानकारी सीबीआई ने आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने रखी। दो अन्य डॉक्टरों को भी नेटवर्क से जोड़ने का आरोप सीबीआई का कहना है कि डॉ. शिरुरे ने इस कथित पेपर लीक नेटवर्क में दो अन्य डॉक्टरों की मुलाकात सह-आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से कराई थी। जांच के अनुसार, इन दोनों डॉक्टरों के बच्चों को भी लीक हुए प्रश्नपत्र का लाभ मिला और परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध कराया गया था। अप्रैल में ही दिखाया गया था प्रश्नपत्र जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. शिरुरे ने सह-आरोपी शिवराज मोटेगांवकर के बेटे आदित्य मोटेगांवकर को मई में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा से पहले, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में ही केमिस्ट्री का मूल प्रश्नपत्र दिखाया था। सीबीआई का आरोप है कि छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर परीक्षा की तैयारी कराई गई, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिल सके। जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।