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अब अंडों पर भी होगी एक्सपायरी डेट, 1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 18, 2026 0
अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखी हुई दिखाई दे रही है
अंडों पर एक्सपायरी डेट नियम

लखनऊएजेंसियां। अंडा खाने वालों के लिए एक बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अंडों की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है। अब बाजार में बिकने वाले हर अंडे पर उसकी एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा।

 

हर अंडे पर लिखनी होगी दो जरूरी तारीख

नए नियम के तहत अंडा उत्पादकों और विक्रेताओं को हर अंडे पर दो अहम जानकारियां लिखनी होंगी—

अंडा देने की तारीख (Production Date)

एक्सपायरी डेट (Best Before Date)

इससे ग्राहक आसानी से यह पहचान सकेंगे कि अंडा कितना ताजा है और खाने के लिए सुरक्षित है या नहीं।

 

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

सरकार ने साफ कर दिया है कि इस नियम का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई दुकानदार बिना एक्सपायरी डेट के अंडे बेचता पाया गया, तो उसके उत्पाद को नष्ट किया जा सकता है।

इसके अलावा, ऐसे अंडों पर “मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त” का लेबल भी लगाया जा सकता है। इससे बाजार में खराब और बासी अंडों की बिक्री पर रोक लगेगी।

 

क्यों जरूरी हुआ यह नियम?

अंडा एक बेहद पौष्टिक खाद्य पदार्थ है, लेकिन अगर यह पुराना या खराब हो जाए तो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, सामान्य तापमान पर अंडे लगभग 10 से 14 दिनों तक सुरक्षित रहते हैं, जबकि ठंडे तापमान में इन्हें अधिक समय तक स्टोर किया जा सकता है।

अक्सर देखा गया है कि कई दुकानदार सही कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में यह नियम उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

 

अंडे खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

अंडे खरीदते वक्त कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

अंडे का छिलका टूटा या गंदा नहीं होना चाहिए

ताजे अंडे का छिलका हल्का खुरदरा और मैट फिनिश का होता है

ज्यादा चमकदार अंडे पुराने हो सकते हैं

घर पर जांच के लिए अंडे को पानी में डालें ताजा अंडा नीचे बैठ जाएगा, जबकि खराब अंडा तैरने लगेगा

 

उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा

इस नए नियम से ग्राहकों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे अब अंडों की गुणवत्ता खुद जांच सकेंगे। इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को ताजे व सुरक्षित अंडे मिल पाएंगे।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए आगे आया भारत, भेजी बड़ी राहत सामग्री

प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए भारत ने एक बार फिर मानवता का परिचय दिया है। बाढ़ और भूकंप के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां के लोगों की सहायता के लिए मानवीय मदद और आपदा राहत (HADR) सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हाल ही में आई बाढ़ और भूकंप की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के लोग भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में भारत ने तुरंत सहायता पहुंचाने का फैसला लिया और राहत सामग्री भेजी। भारत द्वारा भेजी गई इस सहायता में रोज़मर्रा के इस्तेमाल की कई जरूरी चीजें शामिल हैं। इनमें किचन सेट, सफ़ाई का सामान, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। ये सभी सामान खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हैं, जिनके घर या बुनियादी सुविधाएं आपदा में प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी राहत सामग्री न केवल प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रहने और सामान्य जीवन की ओर लौटने में भी मदद करती है। तिरपाल और प्लास्टिक शीट जैसे सामान अस्थायी आश्रय बनाने में मददगार होते हैं, वहीं स्लीपिंग बैग और किचन सेट रोजमर्रा के जीवन को सुगम बनाते हैं। भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और भारत समय-समय पर वहां के लोगों की मदद करता रहा है। इससे पहले भी भारत ने खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य आवश्यक सहायता भेजी है। रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है और इस चुनौतीपूर्ण समय में हर संभव मानवीय सहायता और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर भारत आगे भी मदद जारी रख सकता है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देता है।  

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नए लेबर कोड से करोड़ों कर्मचारियों को राहत, जानिए क्या हैं? और कब से हुआ लागू?

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के तहत अब कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने या निकाल दिए जाने के बाद अपनी मेहनत की पूरी कमाई पाने के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नए नियमों के अनुसार, कंपनियों को 2 वर्किंग डेज के भीतर फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट करना होगा।   नया नियम क्या कहता है और कब से लागू होगा ‘कोड ऑन वेजेस 2019’ की धारा 17(2) के तहत यह प्रावधान बनाया गया है। पहले कंपनियां फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के लिए आमतौर पर 45 से 90 दिन तक का समय लेती थीं, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था। अब 1 अप्रैल 2026 से यह नियम प्रभावी हो गया है, और कर्मचारी को इस्तीफा देने या निकाले जाने के दूसरे वर्किंग दिन तक पूरा बकाया पैसा मिल जाना चाहिए।   फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में क्या-क्या शामिल होगा F&F सेटलमेंट केवल अंतिम महीने की सैलरी तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल हैं: • बकाया वेतन: अंतिम दिनों की पूरी सैलरी।  • लीव एनकैशमेंट: बची हुई छुट्टियों के बदले पैसा।  • बोनस और इंसेंटिव: पिछले बकाया बोनस।  • ग्रेच्युटी: कंपनी में बिताए गए समय के आधार पर सेवा लाभ।  • प्रतिपूर्ति (Reimbursement): यात्रा या ऑफिस खर्चों का बकाया।    ग्रेच्युटी के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव नए लेबर कोड का सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्युटी में हुआ है। अब तक कर्मचारी केवल 5 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी का हकदार थे। नए नियम के अनुसार फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह अवधि घटकर 1 साल कर दी गई है, और कंपनी को यह राशि 30 दिनों के भीतर चुकानी होगी।   कर्मचारियों को फायदा और कंपनियों की चुनौती इस बदलाव से उन युवाओं को सबसे अधिक फायदा होगा जो जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं। पहले फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में देरी के कारण कर्मचारी घर का किराया, लोन या ईएमआई समय पर नहीं भर पाते थे। अब 2 दिन की समय सीमा कंपनियों को अनुशासन में रखेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को अपने पेरोल और आईटी सिस्टम को अपग्रेड करना होगा ताकि इतनी जल्दी सेटलमेंट संभव हो सके।

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घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसे दही के कबाब, जानें बनाने के आसान रेसिपी

नई दिल्ली, एजेंसियां। अगर आप कुछ ऐसा स्नैक बनाना चाहते हैं जो हल्का भी हो, स्वादिष्ट भी और देखने में भी एकदम रेस्टोरेंट स्टाइल लगे, तो दही के कबाब आपके लिए शानदार विकल्प हैं। ये कबाब बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से इतने सॉफ्ट व क्रीमी होते हैं कि मुंह में जाते ही घुल जाते हैं। खास बात यह है कि इन्हें बनाने में ज्यादा समय या मेहनत नहीं लगती, फिर भी इनका स्वाद किसी बढ़िया रेस्टोरेंट डिश से कम नहीं होता। शाम की चाय, घर आए मेहमानों या वीकेंड स्नैक के लिए यह एक परफेक्ट रेसिपी है।   क्या-क्या लगेगा बनाने में? दही के कबाब बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज है हंग कर्ड (गाढ़ा दही)। इसके लिए आपको चाहिए डेढ़ कप हंग कर्ड, एक चुटकी काला नमक, आधा टेबलस्पून कटा अदरक, 2 टेबलस्पून कटा धनिया स्टेम, 2 टीस्पून भुना जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक, 2 टेबलस्पून कटा प्याज, 1 कटी हरी मिर्च, 3 टेबलस्पून फ्राइड प्याज, एक-तिहाई कप कद्दूकस किया पनीर, 2 कप ब्रेड क्रम्ब्स और तलने के लिए तेल।   ऐसे तैयार करें कबाब का क्रीमी मिश्रण   सबसे पहले एक बड़े बाउल में हंग कर्ड लें। इसमें काला नमक, अदरक, धनिया स्टेम, भुना जीरा पाउडर, नमक, प्याज, हरी मिर्च, फ्राइड प्याज और कद्दूकस किया हुआ पनीर डालें। अब इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रखें कि दही ज्यादा पतला न हो, वरना कबाब बनाते समय मिश्रण ढीला पड़ सकता है।इस मिश्रण की खुशबू और टेक्सचर ही दही के कबाब को खास बनाते हैं। इसमें दही की क्रीमीनेस, पनीर की सॉफ्टनेस और मसालों का बैलेंस शानदार स्वाद देता है।   कबाब बनाना और फ्राई करना है बेहद आसान अब अपने हाथों पर थोड़ा सा तेल लगाएं और तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे कबाब का आकार दें। इसके बाद इन्हें ब्रेड क्रम्ब्स में अच्छी तरह रोल करें, ताकि बाहर की परत फ्राई होने पर कुरकुरी बने और कबाब टूटे नहीं। अब इन कबाब को 15 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें। यह स्टेप बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे कबाब अच्छे से सेट हो जाते हैं और तलते समय अपना आकार बनाए रखते हैं। इसके बाद एक कढ़ाही में तेल गरम करें और कबाब को मध्यम आंच पर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लें।   ऐसे करें सर्व तैयार दही के कबाब को गरमागरम हरी चटनी, इमली की चटनी या टमाटर सॉस के साथ परोसें। इनका स्वाद इतना शानदार होता है कि एक बार खाने के बाद हर कोई इसकी रेसिपी जरूर पूछेगा।

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