नई दिल्ली/केरल: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान युद्ध की आड़ में पाकिस्तान कोई “गलत हरकत” करता है, तो भारत उसे पहले से भी ज्यादा कड़ा और निर्णायक जवाब देगा। “पड़ोसी देश साजिश कर सकता है” केरल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा: “मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी देश साजिश कर सकता है, लेकिन भारत पूरी तरह तैयार है।” ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की दिलाई याद राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की याद दिलाते हुए कहा: भारतीय सेना ने सिर्फ 22 मिनट में जवाबी कार्रवाई की थी पाकिस्तान के अंदर घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को सीज़फायर की मांग करनी पड़ी यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले (25 पर्यटकों की मौत) के बाद शुरू हुआ था। ऊर्जा संकट पर भी दिया भरोसा रक्षा मंत्री ने साफ किया कि: देश में ईंधन और गैस की कोई कमी नहीं है भारत किसी भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तैयार है होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर उन्होंने बताया कि: भारतीय नौसेना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा कर रही है सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय भारत राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं। पाकिस्तान के दावों पर सवाल पाकिस्तान खुद को अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थ बता रहा है लेकिन ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया, जिससे पाकिस्तान की स्थिति कमजोर दिख रही है
नई दिल्ली,एजेंसियां। देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी कार्यालयों को बम धमकी भेजकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और स्थानीय टीम ने संयुक्त अभियान में आरोपी को उसके किराए के मकान से दबोचा। आरोपी की पहचान 47 वर्षीय श्रीनिवास लुइस के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला है। जांच में क्या आया सामने ? जांच में सामने आया है कि आरोपी ने ईमेल और अन्य माध्यमों से 1,100 से अधिक फर्जी बम धमकी संदेश भेजे थे। इन धमकियों के कारण देश के कई राज्यों में हड़कंप मच गया था और स्कूलों, अदालतों व सरकारी कार्यालयों को खाली कराना पड़ा। अलग-अलग राज्यों में इस मामले में कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, आरोपी स्नातकोत्तर तक पढ़ा हुआ है, लेकिन फिलहाल बेरोजगार था और अपनी मां के साथ रहता था, जो सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने खुद ही देशभर में धमकी भरे संदेश भेजने की बात स्वीकार की। दिल्ली पुलिस आरोपी के डिजिटल उपकरणों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई और व्यक्ति या नेटवर्क तो नहीं था। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपी के मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी ध्यान दे रही हैं। पुलिस क्या है कहना ? पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों को झेलनी पड़ी दहशत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि फर्जी धमकियों के इस मामले का पैमाना असामान्य रूप से बड़ा था।
रांची। झारखंड समेत देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी दफ्तरों को बम धमकी देने वाले 47 वर्षीय आरोपी श्रीनिवास लुईस से पूछताछ के लिए झारखंड पुलिस दिल्ली रवाना हो गई है। आरोपी को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया था। अब डिजिटल साक्ष्यों और धमकी संदेशों की विस्तृत जांच की जा रही है। धमकी देकर आतंक का माहौल बनाता थाः दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जिसने देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की झूठी धमकियां देकर आतंक का माहौल बनाने की कोशिश की। आरोपी 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया, जहां से उसने 1,000 से भी अधिक फर्जी धमकी भरे ई मेल और मैसेज भेजे थे। जांच में पता चला है कि उसने कई हाईकोर्ट, स्कूल, सरकारी कार्यालय और संवेदनशील संस्थानों को ई मेल तथा अन्य माध्यमों से धमकियां दीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को विस्तृत जांच और सतर्कता बरतनी पड़ी। इन धमकियों के कारण कई स्थानों पर सुरक्षा उपाय कड़े किए गए और जांच टीमों को सक्रिय रहना पड़ा। झारखंड पुलिस की एक टीम आरोपी से पूछताछ के लिए दिल्ली के लिए गई है, ताकि इस तकनीकी अपराध के पीछे की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
रांची। नया वित्त वर्ष बुधवार यानि 1 अप्रैल से शुरू हो गया है। बैंकिंग, इनकम टैक्स, रेलवे टिकट और फास्टैग से जुड़ी कई व्यवस्थाओं के नियम बुधवार से बदल गये हैं। भुवनेश्वर-धनबाद-भुवनेश्वर स्पेशल 1 अप्रैल से और हटिया-दुर्ग-हटिया स्पेशल द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन नियमित एक्सप्रेस के रूप में 2 अप्रैल से चलेंगी। एक अप्रैल से टोल में भी लगभग 3-7% तक वृद्धि होगी, जबकि कई टोल प्लाजा पर यह बढ़ोतरी करीब 5% के आसपास रहेगी। जमशेदपुर-रांची हाईवे पर कार का टोल 120 रुपए से बढ़कर 125 रुपए हो जाएगा। पैन कार्ड के साथ देना होगा अतिरिक्त दस्तावेजः एक अप्रैल से पैन कार्ड बनवाने के लिए पैन कार्ड के साथ आधार कार्ड के अलावा एक अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। अब 20 लाख रुपए तक की संपत्ति रजिस्ट्री में पैन कार्ड जरूरी नहीं होगा, पहले यह सीमा 10 लाख थी। सभी प्रकार की इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट अनिवार्यः झारखंड के सरकारी स्कूलों में नए सेशन की शुरुआत पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि पहले आकलन फिर पढ़ाई के फॉर्मूले पर होगी। इसके तहत पहली से 12वीं तक के हर छात्र की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का आकलन कर उसी स्तर के अनुसार दो महीने पढ़ाई कराने का प्लान है। जेईपीसी ने आधारभूत आरंभिक कक्षाओं को लेकर गाइडलाइन भी जारी किया है। राज्य परियोजना निदेशक द्वारा सीएम एक्सीलेंस समेत राज्य के सभी जिलों दिए गए निर्देश में कहा है कि 4 अप्रैल तक सभी छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट अनिवार्य रुप से तैयार कर लेना है। कोलकाता के लिए 2 फ्लाइट फिर शुरूः रांची एयरपोर्ट ने समर शेड्यूल के तहत विमानों की नई समय सारिणी जारी की है। इसके तहत कई उड़ानों के आगमन और प्रस्थान समय में 10 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का बदलाव किया गया है। इंडिगो की कोलकाता जाने वाली दो फ्लाइट्स, जो क्राइसिस के दौरान बंद कर दी गई थीं, उन्हें फिर से शुरू किया गया है। दोपहर में हैदराबाद और बेंगलुरु जाने वाली उड़ानों में करीब दो घंटे की देरी की गई है। इसके अलावा शाम के समय दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए उड़ानों के समय में भी बदलाव किया गया है। कुछ बदलाव 29 मार्च से ही लागू हो गए हैं। आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया सरल : एक अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू हो जाएगा। टैक्स दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। नई टैक्स व्यवस्था को जारी रखा गया है। इसके अलावा, आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया गया है और संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
नई दिल्ली। देश की प्रीमियम ट्रेन सेवा वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर खाने की गुणवत्ता को लेकर विवादों में आ गई है। पटना-टाटानगर रूट पर चलने वाली इस ट्रेन में एक यात्री को परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने का मामला सामने आने के बाद रेल मंत्रालय ने कड़ा एक्शन लिया है। वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप यह मामला 15 मार्च 2026 का है, जब पटना के कंटेंट क्रिएटर रितेश कुमार सिंह ने ट्रेन में परोसे गए खाने का वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में दही के कटोरे में साफ तौर पर कीड़े दिखाई दे रहे थे। उन्होंने तुरंत ट्रेन मैनेजर को शिकायत भी दर्ज कराई। दूसरे वीडियो में रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करते नजर आए। टॉर्च की रोशनी में दही की बारीकी से जांच की गई, जबकि आसपास मौजूद अन्य यात्री भी इस घटना को देखकर हैरान रह गए। यात्रियों में नाराजगी, सोशल मीडिया पर उठा मुद्दा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया। सहयात्रियों ने भी मौके पर शिकायत दर्ज कराने और मामले को सार्वजनिक करने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। रेलवे का सख्त रुख मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाते हुए उसका कॉन्ट्रैक्ट भी समाप्त करने का आदेश दिया गया। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल यह घटना एक बार फिर ट्रेन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम ट्रेनों में इस तरह की घटनाएं यात्रियों के भरोसे को कमजोर कर सकती हैं।
नई दिल्ली/वडोदरा। आगामी अमरनाथ यात्रा से पहले एक गंभीर चुनौती सामने आई है। वडोदरा के लंगर आयोजक रसोई गैस की भारी कमी से जूझ रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सेवा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था हेतु कम से कम 1000 एलपीजी सिलेंडरों की तत्काल आवश्यकता है, जबकि मौजूदा आपूर्ति बेहद सीमित है। आस्था के बीच बढ़ी अनिश्चितता हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस कठिन यात्रा पर निकलते हैं। इस दौरान विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए लंगर श्रद्धालुओं के लिए जीवनरेखा साबित होते हैं। लेकिन इस बार स्थिति अलग है—भक्ति के साथ चिंता भी जुड़ गई है। एक लंगर आयोजक ने बताया कि बिना पर्याप्त गैस आपूर्ति के चाय, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था करना संभव नहीं होगा। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने की अपील की है। ठंड में भोजन की कमी बन सकती है खतरा अमरनाथ यात्रा के दौरान ऊंचाई, कठिन मार्ग और कड़ाके की ठंड में गर्म भोजन और पानी अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में गैस की कमी केवल सेवा को प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है। एक श्रद्धालु ने चिंता जताते हुए कहा कि उनकी यात्रा सरकार के फैसलों पर निर्भर है और उम्मीद है कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार से विशेष कोटा की मांग स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोजकों ने राज्य और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अमरनाथ यात्रा को विशेष श्रेणी में रखते हुए एलपीजी सिलेंडरों का अलग कोटा सुनिश्चित किया जाए, ताकि लंगर सेवा निर्बाध रूप से जारी रह सके। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन समय रहते समाधान न निकलने पर यह संकट यात्रा की व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।
देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रयागराज से लेकर हैदराबाद तक लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कमी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन और रसोई गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। अफवाहों से बढ़ी भीड़, सरकार ने की अपील सरकार के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के कारण लोग घबराहट में पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं और एलपीजी की पैनिक बुकिंग कर रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक भीड़ न लगाएं। अधिकारियों का कहना है कि देश की सभी रिफाइनरी पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और सप्लाई चेन पूरी तरह सुचारू है। PNG कनेक्शन पर सरकार का बड़ा फैसला सरकार ने एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। जिन क्षेत्रों में PNG उपलब्ध है, वहां एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई सीमित की जा सकती है ग्राहकों को नोटिस देकर 3 महीने में PNG कनेक्शन लेना अनिवार्य किया जा सकता है आवासीय क्षेत्रों में 3 दिन के भीतर PNG कनेक्शन देने का निर्देश गैस एजेंसियों को 48 घंटे में कनेक्शन देने की बाध्यता इस कदम का उद्देश्य गैस वितरण प्रणाली को अधिक सुचारू और सुरक्षित बनाना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात में भी सुधार हुआ है। ईरान ने भारत सहित कई देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है। इससे खाड़ी देशों से भारत को तेल और गैस की सप्लाई में किसी बड़े संकट की आशंका फिलहाल टल गई है। कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई बढ़ी, कार्रवाई भी तेज होटल और रेस्टोरेंट के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50% तक बढ़ाई गई पैनिक बुकिंग 85 लाख से घटकर 50-55 लाख पर आई जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ 2700 से अधिक छापे 2000 सिलेंडर जब्त, 155 गिरफ्तारियां सरकार का कहना है कि हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम के पास गुरुवार तड़के एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। यात्रियों से भरी एक निजी ट्रैवल बस और तेज रफ्तार ट्रक के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर के बाद बस आग के गोले में तब्दील हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 12 लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 20 यात्री घायल हो गए हैं। कैसे हुआ हादसा? प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस तेलंगाना के जगित्याल/निर्मल इलाके से नेल्लोर की ओर जा रही थी। सुबह करीब 5:45 बजे, रेयावरम के पास एक तेज रफ्तार ट्रक से इसकी सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में तुरंत आग लग गई, जिससे कई यात्री अंदर ही फंस गए और बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। 20 यात्रियों ने बचाई जान हादसे के बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। करीब 20 यात्रियों ने किसी तरह खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जांच के आदेश एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों से तत्काल स्थिति की जानकारी ली और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। साथ ही, हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश भी दिए हैं। वहीं, राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने भी घटना पर शोक जताते हुए कहा कि यात्रियों का इस तरह जलकर मौत का शिकार होना बेहद दुखद है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।
बेंगलुरू, एजेंसियां। साउथ सिनेमा के चर्चित स्टार कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी फिल्म या शादी नहीं, बल्कि एक प्यारी सी फैन के लिए किया गया खास gesture है। दोनों कलाकारों ने अपनी एक नन्ही फैन की ख्वाहिश पूरी कर उसे अपने घर लंच पर आमंत्रित किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ हो रही है। वायरल वीडियो से शुरू हुई कहानी दरअसल, “Urs Lucky Thalli” नाम के इंस्टाग्राम चैनल पर एक छोटी बच्ची ने 8 मार्च को एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उसने रश्मिका और विजय को शादी की बधाई दी, लेकिन साथ ही उन्हें शादी में न बुलाने की क्यूट शिकायत भी कर डाली। बच्ची का यह मासूम वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लाखों लोगों का दिल जीत लिया। सितारों ने निभाया वादा जब यह वीडियो रश्मिका और विजय तक पहुंचा, तो उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए बच्ची को अपने घर पर लंच के लिए आमंत्रित किया। हाल ही में सामने आए वीडियो में देखा गया कि दोनों स्टार्स ने न सिर्फ बच्ची का गर्मजोशी से स्वागत किया, बल्कि उसे उसका पसंदीदा खाना भी खिलाया।वीडियो में रश्मिका मंदाना बच्ची को लड्डू खिलाते हुए नजर आ रही हैं, वहीं विजय देवरकोंडा उसे गोद में उठाकर खेलते दिखाई दे रहे हैं। इस भावुक और प्यारे पल ने फैंस का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना इस वीडियो के सामने आने के बाद फैंस लगातार इस स्टार कपल की तारीफ कर रहे हैं। लोग इसे स्टार्स का डाउन-टू-अर्थ व्यवहार और अपने फैंस के प्रति सम्मान का शानदार उदाहरण बता रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “दिल जीत लेने वाला पल” और “सच्चा स्टारडम” कहा। दोस्ती से शादी तक का सफर रश्मिका और विजय की जोड़ी लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनों की दोस्ती 2018 की सुपरहिट फिल्म गीता गोविंदम के दौरान शुरू हुई थी, जो बाद में प्यार में बदल गई। कई सालों तक रिलेशनशिप में रहने के बाद इस कपल ने 26 फरवरी 2026 को शादी कर ली।शादी के बाद भी दोनों अपने काम में व्यस्त हैं, लेकिन इस घटना ने दिखा दिया कि वे अपने फैंस के लिए कितना खास स्थान रखते हैं। फैंस के लिए खास संदेश इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित किया कि सच्ची लोकप्रियता केवल फिल्मों से नहीं, बल्कि इंसानियत और फैंस के प्रति सम्मान से भी मिलती है। रश्मिका और विजय का यह कदम उनके लाखों चाहने वालों के लिए एक यादगार पल बन गया है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। भारत में 1 अप्रैल 2026 से एक नए वित्तीय और प्रशासनिक दौर की शुरुआत होने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लागू किए जा रहे ये बदलाव आम लोगों, व्यापारियों और नौकरीपेशा वर्ग की जिंदगी पर सीधा असर डालेंगे। सबसे बड़ा बदलाव Income Tax Act 2025 के रूप में सामने आ रहा है, जो दशकों पुराने कानून की जगह लेगा। नया आयकर कानून और टैक्स सिस्टम में बदलाव 1961 से लागू पुराने आयकर कानून की जगह अब नया और सरल टैक्स सिस्टम लागू होगा। इसमें धाराओं की संख्या घटाकर नियमों को समझना आसान बनाया गया है। इसके साथ ही शेयर बायबैक को अब कैपिटल गेन्स माना जाएगा, जिससे निवेशकों को केवल मुनाफे पर टैक्स देना होगा। शेयर बाजार और निवेश पर असर शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी, क्योंकि सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है। वहीं सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में टैक्स छूट अब केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने सीधे सरकार से बॉन्ड खरीदे हैं। PAN कार्ड से जुड़े नए नियम सरकार ने PAN Card को लेकर भी कई अहम बदलाव किए हैं। अब 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन, 20 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी खरीद, और महंगी गाड़ियों की खरीद पर पैन अनिवार्य होगा। वहीं होटल बिल की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। टोल प्लाजा पर कैश खत्म देशभर के नेशनल हाईवे पर अब कैश पेमेंट पूरी तरह बंद हो जाएगा। सभी टोल प्लाजा पर केवल FASTag या UPI के जरिए भुगतान करना होगा। इससे ट्रैफिक जाम और लंबी कतारों में कमी आने की उम्मीद है। विदेश यात्रा और पढ़ाई सस्ती विदेश यात्रा और शिक्षा पर राहत देते हुए सरकार ने TCS (Tax Collected at Source) की दर घटाकर 2% कर दी है। इससे विदेश घूमने, पढ़ाई और इलाज का खर्च कम होगा। सामाजिक और राज्य स्तर के बदलाव दिव्यांगों और शहीदों के परिवारों को टैक्स में राहत दी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में अंडों पर एक्सपायरी डेट अनिवार्य होगी। राजस्थान में मजदूरी नियमों को पारदर्शी बनाया जाएगा, जबकि मध्य प्रदेश में नई फैमिली पेंशन योजना लागू होगी। डिजिटल और पर्यावरणीय सुधार सरकार ने Solid Waste Management Rules 2026 लागू कर कचरा प्रबंधन को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाया है। कंपनियों को अब हर प्रक्रिया की ऑनलाइन जानकारी देनी होगी। आम आदमी पर असर इन सभी बदलावों से साफ है कि सरकार का फोकस डिजिटल इकोनॉमी, पारदर्शिता और सरल नियमों पर है। जहां एक ओर टैक्स सिस्टम आसान होगा, वहीं डिजिटल भुगतान और नए नियमों से आम लोगों की दिनचर्या में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बोर्ड ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी झिझक के अपनी जरूरतों का ध्यान रख सकें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया निर्णय यह फैसला Supreme Court of India के 20 जनवरी 2026 के आदेश के बाद लिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना हर लड़की का मौलिक अधिकार है। इन सुविधाओं की कमी से छात्राओं की पढ़ाई और आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सेंटर में मिलेंगी जरूरी सुविधाएं मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर में छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा और इस्तेमाल किए गए नैपकिन के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था भी होगी। कुछ स्कूलों में इन केंद्रों को MHM (Menstrual Hygiene Management) कॉर्नर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जाएगी। जागरूकता और शिक्षा पर जोर CBSE ने केवल सुविधाएं देने तक ही सीमित न रहते हुए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। स्कूलों को नियमित रूप से हेल्थ सेशन, प्यूबर्टी एजुकेशन और जेंडर सेंसिटिव चर्चाएं आयोजित करनी होंगी। इसका उद्देश्य छात्रों के बीच मेंस्ट्रुएशन से जुड़ी झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना है। रिपोर्टिंग सिस्टम भी लागू बोर्ड ने इस पहल की निगरानी के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम भी लागू किया है। स्कूलों को हर महीने अपनी तैयारियों और सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। पहली रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक और दूसरी 30 अप्रैल 2026 तक जमा करनी होगी। सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल की ओर कदम यह पहल स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां लड़कियां खुलकर अपनी जरूरतों के बारे में बात कर सकें और बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा जारी रख सकें।
नई दिल्ली,एजेंसियां। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में 25 से 31 मार्च तक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस फिल्म फेस्टिवल में देश-विदेश की बेहतरीन फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह आयोजन Bharat Mandapam में होगा, जहां सिनेमा जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी। दुनिया भर से आईं हजारों फिल्में इस फिल्म फेस्टिवल में 100 से अधिक देशों से कुल 2,187 फिल्में एंट्री के रूप में आई हैं। इनमें 1,372 अंतरराष्ट्रीय और 815 भारतीय फीचर व नॉन-फीचर फिल्में शामिल हैं। यह आयोजन फिल्म प्रेमियों के लिए एक बड़ा मंच साबित होगा, जहां विविध संस्कृतियों और कहानियों को देखने का मौका मिलेगा। दिग्गज कलाकारों को मिलेगा सम्मान फेस्टिवल के दौरान सिनेमा के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। खास तौर पर दिग्गज अभिनेत्री Sharmila Tagore को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मान दिया जाएगा।शर्मिला टैगोर ने इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फिल्म फेस्टिवल ऐसे मंच होते हैं, जहां दुनिया भर की कहानियां एक साथ आती हैं। उन्होंने इस आयोजन का हिस्सा बनने को अपने लिए गर्व की बात बताया। सिनेमा प्रेमियों के लिए खास मौका यह फेस्टिवल न केवल फिल्म निर्माताओं के लिए बल्कि दर्शकों के लिए भी खास रहेगा। यहां विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विषयों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन होगा। साथ ही फिल्म से जुड़े चर्चाएं, इंटरैक्शन और विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शानदार रहा है शर्मिला टैगोर का करियर Sharmila Tagore ने हिंदी और बंगाली सिनेमा में कई यादगार फिल्में दी हैं। उनके अभिनय की विरासत को उनके बच्चे Saif Ali Khan और Soha Ali Khan आगे बढ़ा रहे हैं।दिल्ली में होने वाला यह इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सिनेमा प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होने वाला है, जहां कला, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी एक बार फिर कानूनी परेशानी में हैं। गुरुवार को वे दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मुख्यालय पहुंचे, जहां रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े हाई-प्रोफाइल लोन मामले में उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई। जानकारी के अनुसार, CBI ने अनिल अंबानी को 19 और 20 मार्च के लिए समन भेजा था। इस पूछताछ ने बैंकिंग सेक्टर में हलचल मचा दी है। क्या है मामला? यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत से शुरू हुआ। आरोप है कि RCom ने बैंकों के कंसोर्टियम से भारी लोन लिया, लेकिन लोन का सही इस्तेमाल नहीं किया गया और नियमों का उल्लंघन किया गया। क्या है आरोप नियमों का उल्लंघन: लोन लेने की प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। फंड का डाइवर्जन: लोन की रकम का इस्तेमाल मंजूर काम के लिए नहीं किया गया और इसे अन्य कंपनियों या निजी उद्देश्यों के लिए डाइवर्ट किया गया। गलत जानकारी देना: कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति और प्रोजेक्ट्स की सही जानकारी नहीं दी, जिससे बैंक को नुकसान हुआ। अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी से भी हाल ही में रिलायंस होम फाइनेंस से जुड़े मामले में पूछताछ की जा चुकी है। अब इस लोन मामले में अनिल अंबानी खुद CBI के समक्ष पेश हुए हैं, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने के मूड में हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में जनगणना 2027 अगले महीने से शुरू हो रही है। यह प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक “हाउस लिस्टिंग” होगा, जिसमें मकानों और उनकी सुविधाओं की गिनती की जाएगी। दूसरा चरण अगले साल 9 फरवरी से फरवरी अंत तक लोगों की संख्या की गणना करेगा। कुछ राज्यों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह गिनती इस साल अक्टूबर में पहले ही कर दी जाएगी। महिला आरक्षण: संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था, जो संसद और विधानसभाओं में 33% महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान करता है। यह कानून जनगणना 2027 के आंकड़े आने के बाद लागू होगा। महिला आरक्षण लागू होने पर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो सकती है। दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर प्रभाव: दक्षिणी राज्यों (तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक) को चिंता है कि 2027 की जनगणना परिसीमन के आधार के रूप में इस्तेमाल होने पर उनका संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। उनके अनुसार उत्तर भारत में जनसंख्या अधिक होने के कारण वहां के राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। इसलिए दक्षिण के कुछ राज्य 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने की मांग कर रहे हैं। जाति जनगणना का महत्व: इस बार की जनगणना में जातियों की भी गिनती की संभावना है। इसका सबसे बड़ा फायदा ओबीसी वर्ग को होगा, क्योंकि इससे उनकी वास्तविक जनसंख्या का पता चलेगा और वे आरक्षण और कल्याण योजनाओं में बढ़ोतरी की मांग कर सकते हैं। वर्तमान में ओबीसी को 27% आरक्षण मिलता है, जबकि उनका दावा है कि उनकी जनसंख्या करीब 50% है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता, लेकिन तमिलनाडु में यह 69% है। शहरीकरण और गांवों का आंकलन: पिछले वर्षों में गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ा है। इससे शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा है। पहले चरण में मकानों, वहां रहने वालों और उनकी स्थिति का डेटा जुटाया जाएगा। यह आंकड़ा कल्याणकारी योजनाओं और विकास की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। जनगणना 2027 के आंकड़े आने के बाद समाज में आरक्षण, संसदीय प्रतिनिधित्व, महिला सशक्तिकरण और शहरी-ग्रामीण विकास योजनाओं में बड़े बदलाव की संभावना है।
जमशेदपुर। टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। ग्रेड रिवीजन समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और आज इस पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। 1 अप्रैल से लागू हो सकता है नया समझौता सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन और यूनियन के बीच लगभग सभी प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। यह नया वेतन समझौता 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है। इससे प्लांट के 7321 स्थायी कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। 20 हजार रुपये बोनस की उम्मीद अगर समझौता 31 मार्च 2026 तक पूरा हो जाता है, तो कर्मचारियों को 20,000 रुपये का एकमुश्त बोनस मिल सकता है। वर्ष 2022 में भी समय पर समझौता होने पर यह लाभ दिया गया था। सैलरी बढ़ोतरी 20-23 हजार तक संभव जानकारों के अनुसार इस बार वेतन वृद्धि 20,000 से 23,000 रुपये के बीच हो सकती है। पिछली बार 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार भी इसे चार चरणों में लागू किए जाने की संभावना है। जियो ग्रेड कर्मचारियों पर फोकस यूनियन इस बार खास तौर पर जियो ग्रेड कर्मचारियों के वेतन ढांचे में सुधार चाहती है। नए कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) में कमी को दूर करना इस समझौते की बड़ी चुनौती मानी जा रही है। अन्य प्रमुख मांगें भी शामिल गंभीर बीमारियों के लिए मेडिकल खर्च की सीमा बढ़ाना रिटायरमेंट के बाद मेडिकल इंश्योरेंस में सुधार त्योहारों पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को वाहन भत्ता यूनियन का बयान टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह ने कहा कि प्रबंधन के साथ बातचीत सकारात्मक रही है और जल्द ही सम्मानजनक समझौता होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ग्राहकों के लिए एक अहम सूचना सामने आई है। बैंक ने नोटिस जारी कर बताया है कि जिन खातों में पिछले 3 साल से कोई लेन-देन नहीं हुआ है और जिनका बैलेंस शून्य है, ऐसे खातों को 16 अप्रैल 2026 से बंद किया जा सकता है। इनऑपरेटिव खातों पर कार्रवाई PNB के अनुसार, लंबे समय से निष्क्रिय (इनऑपरेटिव) पड़े खातों को बिना अलग नोटिस के बंद किया जा सकता है। ऐसे में ग्राहकों को 15 अप्रैल 2026 तक जरूरी कार्रवाई करनी होगी। क्या करना होगा ग्राहकों को? खाता बंद होने से बचाने के लिए अपने खाते में कम से कम एक ट्रांजैक्शन करें या अपना KYC (Know Your Customer) अपडेट कराएं। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो खाता स्थायी रूप से बंद हो सकता है। क्यों लिया गया फैसला? बैंक का कहना है कि यह कदम नियमों के तहत उठाया गया है। इससे निष्क्रिय खातों को हटाने, बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने और धोखाधड़ी के मामलों को कम करने में मदद मिलेगी। क्यों जरूरी है KYC अपडेट? खाता एक्टिव रहता है सभी बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिलता है भविष्य में खाता बंद होने की समस्या से बचा जा सकता है कैसे करें KYC अपडेट? 1. बैंक ब्रांच में जाकर: नजदीकी PNB शाखा में आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसे दस्तावेज जमा करें। 2. ऑनलाइन माध्यम से: PNB ONE ऐप या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ‘KYC Update’ सेक्शन में जाकर OTP से वेरिफिकेशन करें। 3. पोस्ट या ईमेल से: जरूरी दस्तावेज अपने होम ब्रांच में डाक या ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। समय रहते करें जरूरी काम अगर आपका PNB में खाता है और लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो तुरंत KYC अपडेट कराएं या छोटा सा ट्रांजैक्शन करें। अंतिम तारीख 15 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके बाद खाता बंद हो सकता है।
लखनऊ, एजेंसियां। अंडा खाने वालों के लिए एक बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अंडों की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है। अब बाजार में बिकने वाले हर अंडे पर उसकी एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा। हर अंडे पर लिखनी होगी दो जरूरी तारीख नए नियम के तहत अंडा उत्पादकों और विक्रेताओं को हर अंडे पर दो अहम जानकारियां लिखनी होंगी— • अंडा देने की तारीख (Production Date) • एक्सपायरी डेट (Best Before Date) इससे ग्राहक आसानी से यह पहचान सकेंगे कि अंडा कितना ताजा है और खाने के लिए सुरक्षित है या नहीं। नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने साफ कर दिया है कि इस नियम का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई दुकानदार बिना एक्सपायरी डेट के अंडे बेचता पाया गया, तो उसके उत्पाद को नष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, ऐसे अंडों पर “मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त” का लेबल भी लगाया जा सकता है। इससे बाजार में खराब और बासी अंडों की बिक्री पर रोक लगेगी। क्यों जरूरी हुआ यह नियम? अंडा एक बेहद पौष्टिक खाद्य पदार्थ है, लेकिन अगर यह पुराना या खराब हो जाए तो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, सामान्य तापमान पर अंडे लगभग 10 से 14 दिनों तक सुरक्षित रहते हैं, जबकि ठंडे तापमान में इन्हें अधिक समय तक स्टोर किया जा सकता है। अक्सर देखा गया है कि कई दुकानदार सही कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में यह नियम उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए अहम कदम माना जा रहा है। अंडे खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान अंडे खरीदते वक्त कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है: • अंडे का छिलका टूटा या गंदा नहीं होना चाहिए • ताजे अंडे का छिलका हल्का खुरदरा और मैट फिनिश का होता है • ज्यादा चमकदार अंडे पुराने हो सकते हैं • घर पर जांच के लिए अंडे को पानी में डालें ताजा अंडा नीचे बैठ जाएगा, जबकि खराब अंडा तैरने लगेगा उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा इस नए नियम से ग्राहकों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वे अब अंडों की गुणवत्ता खुद जांच सकेंगे। इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को ताजे व सुरक्षित अंडे मिल पाएंगे।
नई दिल्ली,एजेंसियां। खाड़ी देश में चल रही जंग का असर भारत के आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाकर ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को ठप कर दिया है। मिडिल ईस्ट जो तेल और गैस का बड़ा उत्पादक और सप्लायर है वो युद्ध की चपेट में है। तेल और गैस रिफाइनरियों पर मिसाइलें दागीं जा रही हैं, जिसकी वजह से आयात-निर्यात का संतुलन बिगड़ गया है। पहले LPG गैस की किल्लत ने लोगों को परेशान किया, और अब डेयरी सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। डेयरी कंपनियों के अनुसार, उनके पास दूध पैकेजिंग का स्टॉक सिर्फ 10 दिनों के लिए बचा है, जिससे आने वाले समय में दूध की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे डेयरी सेक्टर में चिंता बढ़ रही है। LPG संकट से डेयरी सेक्टर पर दबाव बता दे डेयरी उद्योग में दूध को सुरक्षित रखने के लिए पाश्चुरीकरण (Pasteurization) प्रक्रिया बेहद जरूरी होती है, जिसमें उच्च तापमान पर दूध को गर्म किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में LPG गैस की जरूरत होती है। इसके अलावा, प्लास्टिक पैकेजिंग और कार्टन बनाने में भी गैस का उपयोग होता है। गैस की कमी के कारण ये सभी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। डेयरी कंपनियों का कहना है कि LPG संकट के कारण दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है और अगर ये संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो आने वाले 10 दिन में स्थिति भयानक हो सकती है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में डेयरी सेक्टर पहले से दबाव में है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल तैयार करने में भी गैस का उपयोग होता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। बता दे इस संकट की जड़ है Strait of Hormuz, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है। ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य पर रोक लगाने के बाद वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कैसे बिगड़े हालात ? दरअसल भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। वो 40 से ज्यादा देशों से तेल खरीदता है और मिडिल ईस्ट से गैस की खरीद करता है। भारत अपनी जरूरत का 88 फीसदी कच्चा तेल, 50 फीसदी प्राकृतिक गैस और 60 फीसदी एलपीजी इंपोर्ट से पूरा करता है। 28 फरवरी को इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई जंग के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इस रास्ते से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 20 फीसदी और भारत के तेल और गैस का 50 से 55 फीसदी हिस्सा गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने के बाद से भारत गैस और तेल का आयात नहीं कर पा रहा है, जिसकी वजह से रिजर्व स्टॉक पर निर्भरता बढ़ गई है और देश में गैस का संकट पैदा हो गया है। भारत की ओर से गैस से लदे जहाजों को होर्मुज से निकलवाने के लिए ईरान से बातचीत चल रही है। LPG से लदे दो जहाज शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंच गए हैं। बाकी जहाजों को भी होर्मुज पार कर भारतीय पोत तक जाने की तैयारी चल रही है। मिडिल ईस्ट से आता है। ऐसे में इस मार्ग के बाधित होने से भारत में गैस और तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। आम जनता पर संभावित असर अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में पैकेट वाला दूध बाजार में कम हो सकता है। इससे कीमतें बढ़ने और सप्लाई बाधित होने की आशंका है। खासतौर पर शहरों में रहने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है, जहां पैक्ड दूध पर निर्भरता अधिक होती है।भारत सरकार इस संकट को कम करने के लिए वैकल्पिक रास्तों और आपूर्ति के उपायों पर काम कर रही है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एलपीजी से भरा भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से गुजरात के Vadinar Port पहुंच गया है। यह जहाज लगभग 46,500 मीट्रिक टन तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आया है, जो देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। खतरनाक समुद्री मार्ग पार कर पहुंचा जहाज ‘नंदा देवी’ दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचा है। इस क्षेत्र में Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। पहले भी पहुंच चुका है एक जहाज इससे पहले एक अन्य जहाज ‘शिवालिक’ भी एलपीजी लेकर Mundra Port पहुंच चुका है। लगातार दो जहाजों का सुरक्षित आगमन यह दर्शाता है कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में सफलता हासिल की है। ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% और कच्चे तेल का करीब 88% आयात करता है। इनका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बना रहता है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। नाविकों की सुरक्षा पर भी फोकस हालांकि दो जहाज सुरक्षित पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई भारतीय जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार और नौसेना लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। आगे की रणनीति पर टिकी नजरें विशेषज्ञों का मानना है कि ‘नंदा देवी’ का सफल आगमन भारत की मजबूत रणनीतिक योजना और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। अब आने वाले दिनों में अन्य जहाजों के सुरक्षित आगमन पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली,एजेंसियां। नई दिल्ली में एक संवेदनशील और अहम मामले में 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। All India Institute of Medical Sciences (एम्स) में डॉक्टरों की निगरानी में यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। हरीश पिछले 13 वर्षों से कोमा की स्थिति में थे। पहले चरण में बंद किया गया कृत्रिम पोषण एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती हरीश राणा को ट्यूब के माध्यम से दिया जा रहा पोषण बंद कर दिया गया है। यह इच्छामृत्यु प्रक्रिया का पहला चरण है। आने वाले चरणों में उन्हें पानी देना भी बंद किया जाएगा। डॉक्टरों की टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि अंतिम समय में उन्हें किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो, इसके लिए विशेष देखभाल दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद शुरू हुई प्रक्रिया हरीश राणा के पिता द्वारा दायर याचिका पर SC ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि तय मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत जीवन रक्षक सहायता को धीरे-धीरे हटाया जाए। इसके बाद एम्स प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समिति गठित की। पहले से तय है मेडिकल प्रोटोकॉल एम्स में निष्क्रिय इच्छामृत्यु के लिए पहले से ही प्रोटोकॉल मौजूद है, जिसे Indian Council of Medical Research (आईसीएमआर) से मंजूरी मिली हुई है। इसी के तहत पूरी प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक लागू किया जा रहा है। 13 साल पहले हादसे के बाद कोमा में थे हरीश करीब 13 साल पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हरीश राणा चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और वे तब से कोमा में थे। इतने लंबे समय तक उनके माता-पिता ने उनकी देखभाल की, जिसके बाद अब यह कठिन फैसला लिया गया है।
भुवनेश्वर, एजेंसियां। ओडिशा के कटक स्थित SCB Medical College and Hospital में सोमवार तड़के भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। अस्पताल के ट्रॉमा केयर विभाग के ICU में लगी आग में अब तक 10 मरीजों की मौत हो गई, जबकि बचाव कार्य के दौरान 11 अस्पताल कर्मचारी झुलस गए।अधिकारियों के अनुसार आग सोमवार सुबह करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने ICU और आसपास के वार्डों को अपनी चपेट में ले लिया। उस समय ICU में कई गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा था, जिससे अफरा-तफरी मच गई। ट्रॉमा ICU से भड़की आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग ट्रॉमा केयर विभाग के ICU से भड़की थी। आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान अस्पताल के कर्मचारियों, पुलिस और मरीजों के परिजनों ने भी राहत और बचाव कार्य में मदद की। 23 मरीजों को तुरंत किया गया शिफ्ट आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती 23 मरीजों को तत्काल दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया गया। बचाव अभियान के दौरान 11 अस्पताल कर्मचारी झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री हादसे की जानकारी मिलते ही ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi और स्वास्थ्य मंत्री Mukesh Mahaling अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि आग लगने की शुरुआती वजह शॉर्ट-सर्किट मानी जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार सात गंभीर मरीजों की मौत दूसरे वार्ड में शिफ्टिंग के दौरान हुई, जबकि तीन अन्य मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घायल मरीजों के इलाज में किसी तरह की कमी न हो। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।