Tamil Nadu TVK Manifesto: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK की शानदार जीत के बाद अब पार्टी के चुनावी वादों पर जनता की नजर टिक गई है। अभिनेता से नेता बने विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है, ऐसे में उनके घोषणापत्र में किए गए बड़े-बड़े वादे चर्चा में हैं।
महिलाओं के लिए बड़े ऐलान
TVK ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। पार्टी ने 60 साल से कम उम्र की महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की सहायता देने का वादा किया है। इसके अलावा, शादी के समय दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और अच्छी गुणवत्ता की रेशमी साड़ी देने की भी घोषणा की गई है।
महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण देने का वादा भी किया गया है।
शिक्षा पर फोकस, बच्चों के अभिभावकों को ₹15,000
घोषणापत्र में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता को सालाना ₹15,000 देने का वादा किया गया है, ताकि ड्रॉपआउट दर कम की जा सके।
इसके साथ ही के कामराज के नाम पर 100 विशेष आवासीय स्कूल खोलने और उच्च शिक्षा के लिए ₹20 लाख तक का लोन देने की बात कही गई है।
AI से लेकर रोजगार तक बड़े प्लान
विजय ने राज्य में AI मंत्रालय, AI यूनिवर्सिटी और AI सिटी बनाने की भी घोषणा की है। युवाओं के लिए 5 लाख सरकारी नौकरियां और उतने ही प्रशिक्षण अवसर देने का वादा किया गया है।
बेरोजगार स्नातकों को हर महीने ₹4,000 की आर्थिक सहायता देने की भी योजना है।
किसानों के लिए राहत पैकेज
घोषणापत्र में किसानों के लिए भी बड़े वादे किए गए हैं। 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों का पूरा फसल ऋण माफ किया जाएगा, जबकि इससे अधिक जमीन वाले किसानों को 50% तक राहत दी जाएगी।
धान के लिए ₹3,500 प्रति क्विंटल और गन्ने के लिए ₹4,500 प्रति टन न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का भी वादा किया गया है।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा
TVK ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़े सुधारों का वादा किया है। हर साल मुफ्त स्वास्थ्य जांच, अस्पतालों का आधुनिकीकरण और ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा देने की योजना शामिल है।
बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को ₹3,000 प्रति माह पेंशन, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और हर घर में पाइप से पानी पहुंचाने का भी वादा किया गया है।
चुनावी स्थिति
निर्वाचन आयोग के अनुसार, TVK अब तक 14 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है और 94 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े के करीब है।
अब असली चुनौती–वादों को पूरा करना
TVK की जीत के साथ ही अब सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को जमीन पर उतारने की होगी। जनता को उम्मीद है कि विजय अपने घोषणापत्र के वादों को पूरा कर राज्य में नई राजनीति की शुरुआत करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Suvendu Adhikari Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है. भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी 9 मई 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है. इसी बीच सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह बना हुआ है कि क्या निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगी या नहीं. क्या कहता है प्रोटोकॉल? संवैधानिक रूप से ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी निवर्तमान मुख्यमंत्री को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बाध्य करता हो. यह पूरी तरह राजनीतिक परंपरा, शिष्टाचार और व्यक्तिगत-राजनीतिक संबंधों पर निर्भर करता है. भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में कई बार सत्ता छोड़ने वाले मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नए नेतृत्व के शपथ समारोह में शामिल होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान जताते रहे हैं. हालांकि कई मामलों में राजनीतिक मतभेदों या तनावपूर्ण रिश्तों के कारण पूर्व मुख्यमंत्री समारोह से दूरी भी बनाते रहे हैं. अभी तक नहीं आया कोई आधिकारिक बयान फिलहाल तृणमूल कांग्रेस या ममता बनर्जी की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया चुनावी मुकाबले और भाजपा-टीएमसी के बीच बढ़े तीखे टकराव को देखते हुए ममता बनर्जी के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना कम दिखाई दे रही है. बंगाल में गरमाया राजनीतिक माहौल शपथ ग्रहण से पहले पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है. 7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग करने की अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई. हालांकि ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया था, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के तहत नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक भूमिका में मानी जा रही हैं. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में तैयारियां पूरी भाजपा इस शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने में जुटी हुई है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल मंच, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं. कार्यक्रम में लाखों समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है. ड्रोन निगरानी, नो-फ्लाई जोन और कई ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए गए हैं.
Suvendu Adhikari Cabinet List Viral: पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. इसी बीच उनके संभावित मंत्रिमंडल को लेकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. वायरल हो रही एक कथित कैबिनेट लिस्ट में कई बड़े भाजपा नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाए जाने की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी वायरल सूची के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि उन्हें पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ पश्चिमांचल उन्नयन मामलों की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है. दिलीप घोष ने इस बार खड़गपुर सदर सीट से जीत दर्ज की है. वहीं भाजपा की फायरब्रांड नेता अग्निमित्रा पॉल को भी डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है. संभावित सूची में उनके पास उद्योग, वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग जाने की बात कही जा रही है. अग्निमित्रा पॉल आसनसोल दक्षिण सीट से लगातार दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं. स्पीकर पद के लिए राहुल सिन्हा का नाम चर्चा में सोशल मीडिया पर वायरल सूची में भाजपा नेता राहुल सिन्हा को विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर बनाए जाने की संभावना जताई गई है. वहीं तापस रॉय को डिप्टी स्पीकर बनाया जा सकता है. हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल सिन्हा को हाल ही में राज्यसभा भेजा गया है, ऐसे में उनके स्पीकर बनने की संभावना कम नजर आती है. कई नए चेहरों को मिल सकता है मौका सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस बार अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल तैयार करना चाहती है. उत्तर बंगाल, जंगलमहल और दक्षिण बंगाल से कई नेताओं को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. महिला नेताओं और युवा चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा भव्य शपथ ग्रहण शुभेंदु अधिकारी शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं. भाजपा इसे बंगाल की राजनीति में “नए युग की शुरुआत” के रूप में पेश कर रही है. हालांकि, अब तक भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में वायरल हो रही सूची की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव तय हो गया है। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है और अब वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। पार्टी के सभी विधायकों ने उनके नाम पर सहमति जताई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई इस अहम बैठक के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। राज्यपाल से औपचारिक न्योता मिलने के बाद शनिवार सुबह 11 बजे कोलकाता में भव्य शपथग्रहण समारोह आयोजित होगा, जहां शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पश्चिम बंगाल में यह पहली बार होगा जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 293 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज कर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है।