राजनीति

VD Satheesan Sworn In as Kerala CM

वीडी सतीशन बने केरल के नए मुख्यमंत्री, 10 साल बाद सत्ता में लौटा UDF गठबंधन

surbhi मई 18, 2026 0
VD Satheesan takes oath as Kerala Chief Minister with UDF leaders and Congress leaders at ceremony.
VD Satheesan Sworn In as Kerala CM

VD Satheesan ने सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया। कांग्रेस नीत United Democratic Front ने 2026 विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर दस साल बाद सत्ता में वापसी की है।

Rajendra Vishwanath Arlekar ने सतीशन और उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।

राहुल गांधी ने गले लगाकर दी बधाई

समारोह में Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और KC Venugopal शामिल हुए।

इसके अलावा Siddaramaiah, DK Shivakumar, Revanth Reddy और Sukhvinder Singh Sukhu भी कार्यक्रम में पहुंचे।

शपथ लेने के बाद राहुल गांधी ने वीडी सतीशन को गले लगाकर बधाई दी। दोनों नेताओं की बातचीत की तस्वीरें और वीडियो सोशल Media पर भी चर्चा का विषय बने रहे।

छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक का सफर

1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे वीडी सतीशन पेशे से वकील हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और बाद में यूथ कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई।

2021 विधानसभा चुनाव के बाद वे केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने और लेफ्ट सरकार के खिलाफ UDF के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।

2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने परावुर सीट से लगातार छठी बार जीत हासिल की। उन्होंने CPI उम्मीदवार ईटी टायसन मास्टर को 20,600 वोटों से हराया।

“24 घंटे में सरकार गठन ऐतिहासिक”

शपथ ग्रहण के बाद सतीशन ने कहा कि केरल के इतिहास में पहली बार इतनी तेजी से सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद 24 घंटे के भीतर मंत्रिमंडल का गठन कर लिया गया।

सतीशन ने कहा कि कैबिनेट गठन में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व, महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय को विशेष महत्व दिया गया है।

20 सदस्यीय कैबिनेट ने ली शपथ

नई सरकार में कांग्रेस और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। मंत्रिमंडल में Ramesh Chennithala, K Muraleedharan और Sunny Joseph जैसे नेताओं को शामिल किया गया है।

वहीं Indian Union Muslim League के नेताओं पीके कुन्हालिकुट्टी, पीके बशीर, एन समसुद्दीन और केएम शाजी को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।

विधानसभा अध्यक्ष और डिप्टी स्पीकर के नाम तय

मुख्यमंत्री सतीशन ने घोषणा की कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता Thiruvanchoor Radhakrishnan विधानसभा अध्यक्ष होंगे, जबकि Shanimol Usman को उपाध्यक्ष बनाया जाएगा।

सरकार ने विधायक अपू जॉन जोसेफ को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त किया है।

कांग्रेस की 5 गारंटी लागू करने का दावा

शपथ ग्रहण से पहले रमेश चेन्निथला ने कहा कि नई सरकार चुनाव के दौरान किए गए सभी प्रमुख वादों को पूरा करेगी। कांग्रेस की प्रमुख गारंटी में शामिल हैं:

  • महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा
  • कॉलेज छात्राओं को हर महीने 1000 रुपये सहायता
  • 3000 रुपये सामाजिक पेंशन
  • हर परिवार को 25 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा
  • छोटे कारोबारियों को 5 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राजनीति

View more
Radhakrishna Kishore
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नई तस्वीरों से सियासी हलचल, सुरक्षा लौटाने के बाद शूटिंग रेंज में दिखे

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। हाल ही में अपनी सरकारी सुरक्षा और एस्कॉर्ट वाहन लौटाने के बाद अब उनकी रांची के शूटिंग रेंज में निशानेबाजी का अभ्यास करते हुए तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद राज्य की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।   सुरक्षा लौटाने के बाद फिर चर्चा में मंत्री   कुछ दिन पहले राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षाकर्मियों और सरकारी एस्कॉर्ट वाहनों को वापस करने का फैसला लिया था। हालांकि, पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को उनके सरकारी आवास पर तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद से सरकार के भीतर मतभेदों की अटकलें तेज हो गई थीं।   शूटिंग रेंज में अभ्यास, बोले- यह सिर्फ एक खेल   वायरल तस्वीरों में वित्त मंत्री रांची के एक शूटिंग सेंटर में निशानेबाजी का अभ्यास करते नजर आ रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि शूटिंग उनके लिए केवल एक खेल है, जो एकाग्रता, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, उनके इस कदम को सुरक्षा लौटाने की घटना से जोड़कर भी देखा जा रहा है।   राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल   विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को राज्य सरकार के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं। इस बीच राधाकृष्ण किशोर बिना बॉडीगार्ड सचिवालय भी पहुंचे और संकेत दिया कि वह "चार दिन बाद" इस पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। वहीं, विपक्षी नेताओं ने भी सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
MODI Cabinet

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा तेज, नए चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी

TMC Headquarter

TMC मुख्यालय पर सियासी संग्राम तेज, बागी गुट के कब्जे के बाद बढ़ा विवाद

AAP leaders address a press conference in Goa as the party explores a possible opposition alliance ahead of the 2027 Assembly elections.

गोवा में AAP-कांग्रेस गठबंधन के संकेत, 2027 चुनाव से पहले भाजपा को घेरने की रणनीति

Channi Raja Warring
पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बाद बैठकों का दौर तेज, चन्नी खेमे ने नेतृत्व पर उठाए सवाल

चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। नए संगठन की घोषणा के बाद वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार बैठकें हो रही हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग उठाई है, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।   चन्नी समर्थकों ने नेतृत्व परिवर्तन की उठाई मांग   मोरिंडा में आयोजित बैठक में चन्नी समर्थकों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पार्टी हाईकमान से संगठनात्मक फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। समर्थकों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है।   हाईकमान फिलहाल बदलाव के पक्ष में नहीं   कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में संगठनात्मक बदलाव करते हुए राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि मौजूदा व्यवस्था के साथ ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।   2027 विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी   पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी के भीतर उभर रहे मतभेदों ने नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में हाईकमान की अगली रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Amit Shah Sukhjinder Singh

पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह के बीच अमित शाह से मिले सांसद रंधावा, बोले- मुलाकात पूरी तरह गैर-राजनीतिक थी

Prashant Kishore

बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं प्रशांत किशोर, जन सुराज में जल्द होगा अंतिम फैसला

Samajwadi Party MP Jaya Bachchan meets TMC chief Mamata Banerjee at her Kalighat residence in Kolkata, with TMC MP Derek O'Brien also present.

जया बच्चन ने कोलकाता में ममता बनर्जी से की मुलाकात, विपक्षी एकजुटता पर फिर शुरू हुई चर्चा

Hemant Soren Babulal Marandi
जमशेदपुर घटना पर गरजे बाबूलाल, बोले - इसके जिम्मेदार हेमंत सरकार

गिरिडीह। झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) व्यवस्था पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके सामने बेबस नजर आते हैं।   जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर सरकार पर निशाना बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर में हुई करणी सेना के एक नेता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। उनके अनुसार, मामले में सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में हत्या होती है तो जवाबदेही भी पुलिस की तय होनी चाहिए।   एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद होटल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक बदलाव से कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा।   सरकार से जवाबदेही की मांग नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।   गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर में एक बार के बाहर चाकूबाजी की घटना में घायल हुए हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Salman Ali Khurshid

खामेनेई के अंतिम संस्कार में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करेंगे सलमान खुर्शीद, तेहरान जाएंगे वरिष्ठ नेता

TMC MP Mahua Moitra speaks in a video after alleging that protesters threw eggs and rotten brinjals outside her residence or office premises in Kolkata.

महुआ मोइत्रा ने घर पर अंडे और सड़े बैंगन फेंके जाने का लगाया आरोप, सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया

Ritabrata Banerjee

बागी टीएमसी विधायक दल आज चुनाव आयोग से करेगा मुलाकात, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ठोक सकता है दावा

0 Comments

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?