नई दिल्ली, एजेंसियां। चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL के मौजूदा सीजन में लगातार दूसरी जीत दर्ज की। टीम ने मंगलवार को खेले गए मैच में दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट से हराया। अरुण जेटली मैदान पर दिल्ली ने टॉस जीतकर बैटिंग करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 155 रन बनाए। चेन्नई ने 156 रन का टारगेट 17.3 ओवर में 2 विकेट पर हासिल कर लिया।
इस जीत के बाद चेन्नई के 10 मैचों में 10 पॉइट्स हो गए हैं। वहीं, दिल्ली की यह 10 मैचों में छठी हार है। चेन्नई के लिए संजू सैमसन ने 52 गेंद पर नाबाद 87 रनों की पारी खेली। संजू ने इस सीजन में दूसरी फिफ्टी लगाई है। संजू की इस पारी में 7 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। सैमसन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
संजू के अलावा कार्तिक शर्मा ने नाबाद 41 रन बनाए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए नाबाद 114 रन की पार्टनरशिप हुई। दिल्ली के लिए लुंगी एनगिडी और अक्षर पटेल को 1-1 विकेट मिला।
दिल्ली के लिए समीर रिजवी ने नाबाद 40 रन की पारी खेली। उनके अलावा, ट्रिस्टन स्टब्स 38, पथुम निसांका 19, नीतीश राणा 15, आशुतोष शर्मा 14, करुण नायर 13 और केएल राहुल 12 रन बनाए। रिजवी और स्टब्स के बीच छठे विकेट के लिए 65 रन की साझेदारी हुई। चेन्नई की ओर से नूर अहमद ने सबसे ज्यादा 2 विकेट लिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब खिताबी मुकाबला एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में नहीं खेला जाएगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बेंगलुरु से फाइनल की मेजबानी वापस लेकर अहमदाबाद को सौंप दी है। इस फैसले के पीछे फ्री टिकटों को लेकर हुआ विवाद बड़ी वजह बताया जा रहा है। फ्री टिकटों की मांग बनी विवाद की जड़ बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के अनुसार कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) ने नियमों से ज्यादा फ्री टिकटों की मांग की थी। प्रोटोकॉल के मुताबिक किसी भी राज्य क्रिकेट संघ को केवल 15 प्रतिशत फ्री टिकट दिए जाते हैं, लेकिन KSCA ने करीब 10,000 अतिरिक्त टिकटों की मांग कर दी। बताया जा रहा है कि ये टिकट आम दर्शकों के लिए नहीं, बल्कि मंत्रियों, अधिकारियों और वीआईपी मेहमानों के लिए मांगे गए थे। बीसीसीआई ने इसे आईपीएल के नियमों और प्रोफेशनल व्यवस्था के खिलाफ माना। बोर्ड का कहना है कि लीग में राजनीतिक दबाव या वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। अब अहमदाबाद में होगा फाइनल विवाद बढ़ने के बाद बीसीसीआई ने बेंगलुरु से फाइनल की मेजबानी छीनने का फैसला लिया। अब आईपीएल 2026 का फाइनल 31 मई को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके अलावा प्लेऑफ मुकाबलों का नया शेड्यूल भी जारी किया गया है। क्वालीफायर-1 धर्मशाला में 26 मई को होगा, जबकि एलिमिनेटर और क्वालीफायर-2 पंजाब के मुल्लांपुर स्टेडियम में खेले जाएंगे। फैंस में निराशा बेंगलुरु के क्रिकेट फैंस के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। Royal Challengers Bengaluru का घरेलू मैदान होने के बावजूद शहर को फाइनल की मेजबानी नहीं मिल पाई। माना जा रहा है कि KSCA की अतिरिक्त मांगों के कारण हजारों स्थानीय दर्शकों को अपने शहर में आईपीएल फाइनल देखने का मौका नहीं मिलेगा।
लखनऊ, एजेंसियां। लखनऊ सुपर जायंट्स ने IPL में लगातार 6 हार के बाद जीत हासिल की है। उसने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 9 रन से हराया। इकाना स्टेडियम में बारिश के कारण 19-19 ओवर का मैच खेला गया। टॉस हारकर बैटिंग कर रही लखनऊ ने तय ओवर में 3 विकेट पर 209 रन बनाए। टारगेट को रिवाइज्ड करके 213 रन कर दिया गया। जवाब में बेंगलुरु 6 विकेट पर 203 रन ही बना सकी। मिचेल मार्श ने 111 रन की पारी खेली प्लेयर ऑफ द मैच मिचेल मार्श ने 111 रन की शतकीय पारी खेली। उन्होंने 9 चौके और 9 छक्के लगाए। निकोलस पूरन ने 38 और कप्तान ऋषभ पंत ने नाबाद 32 रन बनाए। बेंगलुरु की ओर से जोश हेजलवुड, क्रुणाल पंड्या और रसिख सलाम को एक-एक विकेट मिले। कप्तान पाटीदार की फिफ्टी, टीम हारी रन चेज में बेंगलुरु की शुरुआत धीमी रही। टीम 5.4 ओवर के पावरप्ले में 40 रन बनाने में जैकब बेथेल और विराट कोहली के विकेट गंवा दिए। यहां से कप्तान रजत पाटीदार ने तीसरे विकेट के लिए देवदत्त पडिक्कल के साथ 53 बॉल पर 95 रन की साझेदारी करके टीम को गेम में बनाए रखा। आखिरी में टिम डेविड (17 बॉल पर 40 रन) , क्रुणाल पंड्या (16 बॉल पर नाबाद 28 रन) और रोमारियो शेफर्ड (15 बॉल पर नाबाद 23 रन) की तेज पारियां टीम को जीत नहीं दिला सकीं। प्रिंस यादव ने 3 विकेट झटके लखनऊ की ओर से प्रिंस यादव ने 3 विकेट झटके। उन्होंने विराट कोहली (जीरो), जितेश शर्मा (एक रन) और देवदत्त पडिक्कल (34 रन) को पवेलियन भेजा। शहबाज अहमद को 2 और शमी को एक विकेट मिला।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंडिया A और ऑस्ट्रेलिया A के बीच होने वाली बहु-प्रारूप सीरीज का शेड्यूल जारी कर दिया है। यह सीरीज सितंबर से अक्टूबर 2026 के बीच पुडुचेरी में खेली जाएगी। इसमें दो चार दिवसीय (मल्टी डे) मैच और तीन वनडे मुकाबले शामिल हैं। पहला चार दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर, जबकि दूसरा 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक खेला जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर से वनडे सीरीज शुरू होगी, जिसमें 6, 9 और 11 अक्टूबर को मुकाबले होंगे। वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका IPL 2026 में शानदार प्रदर्शन कर रहे युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इंडिया A टीम में शामिल किए जाने की संभावना है। पिछले साल इमर्जिंग एशिया कप में उन्होंने 239 रन 243.87 की स्ट्राइक रेट से बनाए थे और टूर्नामेंट के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में शामिल रहे थे। उनके प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ता उन्हें ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ वनडे सीरीज में मौका दे सकते हैं। हालांकि, मल्टी डे मैचों में उनकी भागीदारी को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। महिला टीम की सीरीज का भी ऐलान BCCI ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के आगामी घरेलू शेड्यूल की भी घोषणा की है। जिम्बाब्वे की महिला टीम अक्टूबर में भारत दौरे पर आएगी, जहां तीन T20 और तीन वनडे मैच खेले जाएंगे। रायपुर और वडोदरा में होंगे मुकाबले T20 सीरीज के सभी मुकाबले रायपुर में 16, 18 और 20 अक्टूबर को होंगे। इसके बाद वनडे सीरीज वडोदरा में खेली जाएगी, जिसमें मैच 23, 25 और 28 अक्टूबर को निर्धारित हैं। यह सीरीज भारत की महिला टीम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परखने का मौका मिलेगा। युवा प्रतिभाओं पर नजर इंडिया A सीरीज और महिला टीम की घरेलू सीरीज दोनों ही BCCI की भविष्य की योजना का हिस्सा हैं, जिसमें युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने पर जोर दिया जा रहा है। वैभव सूर्यवंशी जैसे उभरते सितारे इस मंच पर अपनी क्षमता साबित कर सकते हैं।