टेक्नोलॉजी

Apple C1X Hits X80 Level

Apple का C1X चिप बना गेम चेंजर, Qualcomm X80 के बराबर पहुंची परफॉर्मेंस

surbhi मार्च 24, 2026 0
Apple C1X chip vs Qualcomm X80 modem performance comparison on iPhone Air and iPhone 17 devices
Apple C1X vs Qualcomm X80 Performance

टेक्नोलॉजी की दुनिया में Apple ने एक बार फिर अपनी ताकत साबित करने की कोशिश की है। कंपनी के नए इन-हाउस नेटवर्क चिप C1X को लेकर आई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है कि यह अब दिग्गज चिपमेकर Qualcomm के फ्लैगशिप मॉडेम X80 के बराबर प्रदर्शन करने लगा है।

C1X चिप ने दिखाई दमदार परफॉर्मेंस

नेटवर्क एनालिटिक्स फर्म Ookla की रिपोर्ट के अनुसार, Apple का C1X नेटवर्क चिप “रियल-वर्ल्ड” टेस्टिंग में Qualcomm X80 मॉडेम के बराबर प्रदर्शन करता है।

यह चिप फिलहाल iPhone Air और iPhone 17e में इस्तेमाल हो रहा है। रिपोर्ट बताती है कि यह चिप अलग-अलग नेटवर्क कंडीशंस-चाहे आदर्श हों या चुनौतीपूर्ण-दोनों में संतुलित प्रदर्शन देने में सक्षम है।

Latency में iPhone Air ने मारी बाजी

रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि iPhone Air ने कई मामलों में iPhone 17 Pro Max को भी पीछे छोड़ दिया, जो Qualcomm X80 मॉडेम पर चलता है।

डेटा के मुताबिक, 22 में से 19 मार्केट्स में iPhone Air ने latency के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया। इसका मुख्य कारण Apple का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच बेहतर इंटीग्रेशन माना जा रहा है।

Upload Speed में अभी पीछे Apple

हालांकि, हर मामले में Apple आगे नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • Qualcomm X80 मॉडेम upload speed में अब भी आगे है
  • कुछ मामलों में यह 32% तक बेहतर प्रदर्शन करता है

इसका कारण Qualcomm की UL-CA (Uplink Carrier Aggregation) टेक्नोलॉजी को माना गया है, जो फिलहाल इंडस्ट्री बेंचमार्क बनी हुई है।

Apple के लिए बड़ा गेम चेंजर

रिपोर्ट में कहा गया है कि C1X चिप अब कोई “समझौता” नहीं रहा, बल्कि यह परफॉर्मेंस के मामले में बराबरी का खिलाड़ी बन चुका है।
यह Apple के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि कंपनी अब धीरे-धीरे अपने डिवाइस में थर्ड-पार्टी चिप्स पर निर्भरता कम कर रही है।

मार्केट में iPhone Air की बढ़ती लोकप्रियता

रिपोर्ट के अनुसार, iPhone Air की डिमांड Plus मॉडल्स से ज्यादा देखी जा रही है।
खासतौर पर दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोप के कुछ बाजारों में इस फोन को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि Qualcomm जल्द ही अपने नए X85 मॉडेम के साथ बाजार में आने वाला है, जो परफॉर्मेंस को और बेहतर बना सकता है। ऐसे में Apple और Qualcomm के बीच यह तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज होने वाली है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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OpenAI ने पेश किया 'Codex Micro, AI प्रोग्रामिंग को आसान बनाने वाला नया हार्डवेयर डिवाइस चर्चा में

नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की अग्रणी कंपनी OpenAI ने डेवलपर्स और प्रोग्रामर्स के लिए 'Codex Micro' नाम का नया AI हार्डवेयर डिवाइस पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस कोड लिखने, डिबगिंग, प्रोजेक्ट विश्लेषण और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़े कई कार्यों को पहले से अधिक तेज और आसान बनाएगा। लॉन्च के बाद से यह डिवाइस वैश्विक टेक इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है।   डेवलपर्स के लिए खास AI डिवाइस   'Codex Micro' को विशेष रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह प्राकृतिक भाषा में दिए गए निर्देशों को समझकर कोड तैयार करने, उसमें सुधार करने और संभावित त्रुटियों की पहचान करने में सक्षम है। इससे डेवलपर्स का समय बचेगा और उत्पादकता बढ़ेगी।   AI आधारित कोडिंग को मिलेगी नई रफ्तार   विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिवाइस AI-संचालित सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को नई दिशा दे सकता है। इससे जटिल प्रोग्रामिंग कार्यों को सरल बनाने, टीमों के बीच सहयोग बढ़ाने और एप्लिकेशन डेवलपमेंट की गति तेज करने में मदद मिल सकती है।   टेक इंडस्ट्री की नजर अगले कदम पर   OpenAI के इस नए उत्पाद को लेकर वैश्विक टेक कंपनियों और डेवलपर समुदाय में उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में AI आधारित हार्डवेयर और डेवलपमेंट टूल्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। फिलहाल कंपनी ने इसे चुनिंदा डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया है और चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार किए जाने की संभावना है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता OnePlus को लेकर एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक टेक बाजार में हलचल मचा दी है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी अमेरिका और यूरोप में अपना कारोबार बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है और वर्ष 2027 तक भारत समेत अन्य वैश्विक बाजारों से भी बाहर निकलने की योजना बना सकती है। हालांकि, इस दावे की अब तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह योजना लागू होती है तो OnePlus भविष्य में केवल अपने घरेलू बाजार चीन में ही सक्रिय रह सकता है।   Oppo की री-स्ट्रक्चरिंग से जुड़ा बताया जा रहा फैसला रिपोर्ट के मुताबिक, यह संभावित फैसला OnePlus की मूल कंपनी Oppo Group की व्यापक पुनर्गठन (री-स्ट्रक्चरिंग) रणनीति का हिस्सा है। बताया गया है कि स्मार्टफोन कारोबार में बढ़ती वित्तीय चुनौतियों और लागत कम करने के उद्देश्य से समूह अपने वैश्विक संचालन में बदलाव कर रहा है। हाल ही में OnePlus India के सीईओ रॉबिन लियू के इस्तीफे के बाद भी कंपनी के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई थीं।   गिरती बिक्री और कमजोर प्रदर्शन का हवाला रिपोर्ट में दावा किया गया है कि OnePlus की वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 2024 के दौरान लगभग 17 मिलियन यूनिट से घटकर 13–14 मिलियन यूनिट रह गई। भारत के प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी भी कम होने की बात कही गई है। इसके अलावा अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में भी ब्रांड की पकड़ कमजोर पड़ने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में अमेरिका स्थित कार्यालय में कटौती, यूरोपीय परिचालन में कमी, कुछ उत्पादों के रद्द होने और सीमित मार्केटिंग गतिविधियों को भी इस संभावित बदलाव के संकेत बताया गया है।   आधिकारिक बयान का इंतजार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Oppo की री-स्ट्रक्चरिंग का असर Realme पर भी पड़ सकता है। हालांकि, OnePlus और Oppo के प्रवक्ताओं ने इस संबंध में कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है। ऐसे में फिलहाल यह रिपोर्ट दावों पर आधारित है और कंपनी की आधिकारिक घोषणा आने तक भारत या अन्य बाजारों से OnePlus के बाहर होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल कंपनी अपने उत्पादों की बिक्री और सर्विस सामान्य रूप से जारी रखे हुए है।

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OnePlus Exit: क्या भारत से विदा होगा वनप्लस? अमेरिका-यूरोप के बाद भारतीय बाजार से भी एग्जिट की चर्चा, जानें पूरी रिपोर्ट

स्मार्टफोन बाजार में अपनी पहचान बनाने वाला लोकप्रिय ब्रांड OnePlus एक बार फिर सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कंपनी अमेरिका और यूरोप में अपना कारोबार समेटने की तैयारी कर रही है। इसके बाद भारत समेत अन्य वैश्विक बाजारों से भी चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कंपनी की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में इन खबरों को फिलहाल रिपोर्ट्स और अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अमेरिका और यूरोप से कारोबार समेटने की चर्चा एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, OnePlus की मूल कंपनी Oppo अपने वैश्विक कारोबार में बड़े स्तर पर पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) कर रही है। इसी प्रक्रिया के तहत अमेरिका और यूरोप में OnePlus के परिचालन को सीमित या बंद करने की योजना पर काम किया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Oppo समूह के दूसरे ब्रांड Realme की अंतरराष्ट्रीय रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत से एग्जिट की अटकलें क्यों? रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में OnePlus का कारोबार फिलहाल जारी रहेगा और कंपनी अगले कुछ समय तक नए स्मार्टफोन और अन्य डिवाइस लॉन्च करती रहेगी। भारत, चीन के बाद OnePlus के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक माना जाता है। हाल ही में ई-कॉमर्स सेल के दौरान OnePlus के कई स्मार्टफोन अच्छी बिक्री दर्ज करने में सफल रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय बाजार में ब्रांड की मौजूदगी अभी भी मजबूत है। आखिर क्यों मुश्किल दौर से गुजर रहा है OnePlus? रिपोर्ट्स में कई संभावित कारण बताए गए हैं— वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा। कई प्रमुख बाजारों में अपेक्षा के अनुरूप कारोबार नहीं बढ़ पाना। सह-संस्थापक कार्ल पेई के कंपनी छोड़ने के बाद ब्रांड की पहचान में बदलाव। OxygenOS में बदलाव के बाद पुराने यूज़र्स की नाराजगी। अन्य प्रीमियम और मिड-रेंज स्मार्टफोन ब्रांड्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा। कुछ बाजारों में कानूनी और व्यावसायिक चुनौतियां। क्या भारत में नए फोन लॉन्च होंगे? एग्जिट की चर्चाओं के बीच OnePlus भारत में अपने नए स्मार्टफोन OnePlus N6x को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने इसका टीज़र भी जारी किया है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल भारतीय बाजार में कंपनी की उत्पाद रणनीति जारी है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल OnePlus या उसकी मूल कंपनी Oppo की ओर से अमेरिका, यूरोप या भारत से कारोबार बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि भविष्य में कंपनी इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा करती है, तो उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि OnePlus वास्तव में किन बाजारों में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा और किन देशों से बाहर निकलेगा।  

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