चीन की दिग्गज टेक कंपनी Xiaomi ने अपने स्मार्ट होम पोर्टफोलियो को और मजबूत करते हुए नया प्रीमियम रेफ्रिजरेटर Xiaomi Mijia Refrigerator Pro Premium Cross-Door 508L लॉन्च किया है। यह फ्रिज एडवांस टेक्नोलॉजी, बड़ी स्टोरेज और स्मार्ट फीचर्स के साथ आता है, जिसे खासतौर पर मॉडर्न किचन जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
कंपनी ने इस फ्रिज की कीमत करीब 9999 युआन (लगभग 1.3–1.4 लाख रुपये) रखी है। फिलहाल इसे चीन में लॉन्च किया गया है और यह Ice Crystal White, Star Silver और Apricot Glass जैसे प्रीमियम कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।
इस फ्रिज में कुल 508 लीटर कैपेसिटी मिलती है, जिसमें:
अलग-अलग स्टोरेज जोन होने से खाने-पीने की चीजों को व्यवस्थित तरीके से रखना आसान हो जाता है।
डुअल कूलिंग सिस्टम
इसमें डुअल कूलिंग टेक्नोलॉजी दी गई है, जिसमें फ्रिज और फ्रीजर के लिए अलग-अलग सिस्टम काम करते हैं।
फ्रिज में Ion Purification 4.0 टेक्नोलॉजी दी गई है, जो:
55 मिनट में आइस मेकिंग
इसमें ऑटोमैटिक आइस मेकिंग सिस्टम दिया गया है, जो:
स्मार्ट फीचर्स और कनेक्टिविटी
केवल 31dB नॉइज लेवल, यानी बेहद शांत ऑपरेशन
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
क्लीन एनर्जी के लिए भी साझेदारी नई दिल्ली, एजेंसियां। मेटा भारत में अपना पहला एआई-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ साझेदारी कर रही है। इस पार्टनरशिप के तहत गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर तैयार किया जाएगा, जिसे दो साल के भीतर डिलीवर करने का लक्ष्य है। इस साझेदारी के तहत रिलायंस जामनगर में डेटा सेंटर को पूरी तरह से विकसित करेगी। रिलायंस प्रोजेक्ट के लिए डिजाइन, कंस्ट्रक्शन, यूटिलिटी मैनेजमेंट, रिन्यूएबल पावर, नेटवर्क कनेक्टिविटी और मैनेज्ड सर्विसेज सहित एंड-टू-एंड सर्विसेज देगी। भारत वैश्विक एआई क्रांति में सबसे आगे रहने को तैयार रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा, "मेटा के साथ यह साझेदारी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बदलावकारी पल है। मेटा का भारत का पहला बिल्ट-टू-सूट डेटा सेंटर बनाना यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक एआई क्रांति में सबसे आगे रहने के लिए तैयार है। जामनगर हाइपरस्केल एआई कंप्यूटिंग के लिए एक लैंडमार्क डेस्टिनेशन बनेगा।" मेटा के फाउंडर और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा, "हमें भारत में अपना पहला एआई-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने के लिए रिलायंस के साथ काम करने पर गर्व है। जामनगर की यह वर्ल्ड-क्लास फैसिलिटी हमें ग्लोबल लेवल पर अपने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और भारत की इकोनॉमी में हमारे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को गहरा करने में मदद करेगी।"
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे अगस्त 2026 से अपने लगभग 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को बदलने जा रहा है। वर्ष 1986 में शुरू किया गया यह सिस्टम अब आधुनिक तकनीक से लैस नए प्लेटफॉर्म की जगह लेगा। रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में इस परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। ऑनलाइन टिकट बुकिंग को मिलेगा बड़ा फायदा वर्तमान में देश के करीब 88 प्रतिशत रेल यात्री ऑनलाइन माध्यम से टिकट बुक करते हैं। त्योहारों और पीक सीजन के दौरान पुराने सिस्टम पर अधिक दबाव के कारण सर्वर स्लो होने या तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं। नया सिस्टम इन चुनौतियों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे भारी ट्रैफिक के बावजूद बुकिंग प्रक्रिया सुचारू बनी रहेगी। RailOne ऐप बना यात्रियों की पहली पसंद रेलवे के डिजिटल बदलाव में RailOne ऐप की महत्वपूर्ण भूमिका है। जुलाई 2025 में लॉन्च हुए इस ऐप को अब तक 3.5 करोड़ से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं। ऐप के माध्यम से यात्री टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन, लाइव ट्रेन स्टेटस, प्लेटफॉर्म जानकारी, कोच पोजिशन और शिकायत दर्ज करने जैसी कई सुविधाओं का लाभ एक ही जगह प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 9.29 लाख टिकट इसी ऐप के जरिए बुक किए जा रहे हैं। AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना नए सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता एआई आधारित वेटिंग लिस्ट प्रेडिक्शन फीचर है। टिकट बुक करते समय यात्रियों को यह जानकारी मिल जाएगी कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार, इस तकनीक की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर 94 प्रतिशत कर दिया गया है। रेल यात्रा का अनुभव होगा बेहतर अगस्त से नया रिजर्वेशन सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद टिकट बुकिंग तेज होगी, सर्वर पर दबाव कम होगा और यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। रेलवे का यह कदम देश में डिजिटल और स्मार्ट रेल सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
तकनीक की दुनिया में एक और बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के शोधकर्ताओं ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है, जो भविष्य में रोबोटिक्स की तस्वीर बदल सकता है। अब सिर्फ एक स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में मौजूद रोबोटिक हाथों (Robotic Arms) को नियंत्रित किया जा सकेगा। अमेरिका के Georgia Institute of Technology के शोधकर्ताओं ने COBALT नाम का एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसका उद्देश्य रोबोटिक्स को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ और आसान बनाना है। स्मार्टफोन बनेगा रोबोट का कंट्रोलर COBALT सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह स्मार्टफोन को मोशन कंट्रोलर में बदल देता है। यूजर जैसे ही अपने फोन को किसी दिशा में हिलाता है, उसी प्रकार रोबोटिक आर्म भी रियल टाइम में मूवमेंट दोहराता है। इस तकनीक की मदद से उपयोगकर्ता दूर बैठे-बैठे वस्तुओं को उठाने, रखने और अन्य बुनियादी कार्यों को आसानी से अंजाम दे सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान या रोबोटिक्स अनुभव की आवश्यकता नहीं होती। बिना अनुभव वाले लोगों ने भी किया सफल इस्तेमाल शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम का परीक्षण कई देशों के लोगों पर किया। भारत, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के प्रतिभागियों ने बिना किसी रोबोटिक्स अनुभव के अपने स्मार्टफोन के जरिए जॉर्जिया टेक में मौजूद रोबोटिक आर्म्स को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया। यह परिणाम दर्शाते हैं कि भविष्य में रोबोटिक्स तकनीक आम लोगों तक पहुंच सकती है और इसे सीखना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी मिलेगा बड़ा फायदा COBALT केवल रोबोट कंट्रोल करने तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हाल ही में शोधकर्ताओं ने हाई स्कूल के छात्रों को इसका डेमो दिखाया, जहां छात्रों ने अपने स्मार्टफोन से दूर स्थित रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया। इससे उन स्कूलों और संस्थानों को फायदा मिल सकता है जहां महंगे रोबोटिक्स उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। फैक्टरियों और घरों में बदल सकती है काम करने की शैली विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक फैक्टरियों, गोदामों, अस्पतालों और घरों में काम करने वाले रोबोट्स को अधिक उपयोगी बना सकती है। भविष्य में रोबोट सामान्य कार्य स्वयं कर सकेंगे और किसी जटिल परिस्थिति में इंसानों से रिमोट सहायता मांग सकेंगे। इससे कार्यक्षमता बढ़ेगी और मानव हस्तक्षेप की जरूरत कम होगी। WebRTC तकनीक पर आधारित है COBALT यह पूरा सिस्टम WebRTC तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म में भी किया जाता है। इसकी मदद से डेटा ट्रांसमिशन में देरी बेहद कम होती है और रोबोट की गतिविधियां लगभग तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, उपयोगकर्ताओं ने वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, कीबोर्ड और पारंपरिक कंट्रोलर्स की तुलना में स्मार्टफोन आधारित नियंत्रण को अधिक सहज और सुविधाजनक पाया। COBALT भविष्य में रोबोटिक्स को आम लोगों तक पहुंचाने और रिमोट ऑटोमेशन को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।