टेक्नोलॉजी

Big Discounts on iPhone 17

पुराने फोन के बदले सस्ता मिल रहा iPhone 17, Croma सेल में भारी डिस्काउंट

surbhi मई 16, 2026 0
Apple iPhone 17 displayed during Croma sale with exchange and discount offers on smartphones
iPhone-17-Croma-Sale-Discount

Croma की “Everything Apple Sale Phase 2” अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और इस सेल में iPhone 17 समेत कई Apple डिवाइसेज पर बड़े ऑफर्स दिए जा रहे हैं। एक्सचेंज बोनस, बैंक डिस्काउंट और Tata Neu Coins के जरिए कई प्रोडक्ट्स की कीमत में भारी कटौती देखने को मिल रही है।

सबसे ज्यादा चर्चा iPhone 17 की हो रही है, जिसकी प्रभावी कीमत कुछ मामलों में 45 हजार रुपये से भी कम तक पहुंच रही है। यही वजह है कि Apple यूजर्स और अपग्रेड की सोच रहे ग्राहकों के बीच यह सेल तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

iPhone 17 पर कैसे मिल रहा इतना बड़ा डिस्काउंट

iPhone 17 के 256GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये बताई गई है। लेकिन Croma पुराने स्मार्टफोन पर 23,500 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू दे रहा है। इसके अलावा चुनिंदा डिवाइसेज पर 8,000 रुपये तक का अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस भी शामिल किया गया है।

अगर ग्राहक डिस्काउंट कूपन और Tata Neu Coins का फायदा भी जोड़ते हैं, तो इस फोन की प्रभावी कीमत करीब 44,768 रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि अंतिम कीमत पुराने फोन की कंडीशन, शहर और स्टॉक उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

पुराने iPhone मॉडल्स पर भी शानदार डील

इस सेल में सिर्फ iPhone 17 ही नहीं, बल्कि पुराने iPhone मॉडल्स पर भी भारी बचत का मौका मिल रहा है।

  • iPhone 15 128GB की प्रभावी कीमत करीब 36 हजार रुपये तक पहुंच रही है
  • iPhone 16 लगभग 40 हजार रुपये की शुरुआती प्रभावी कीमत में मिल सकता है

कम बजट वाले यूजर्स के लिए ये मॉडल्स अभी भी काफी मजबूत विकल्प माने जा रहे हैं।

MacBook और iPad खरीदने वालों के लिए भी मौका

MacBook Air M5 पर स्टूडेंट और टीचर ऑफर्स के साथ अतिरिक्त डिस्काउंट दिया जा रहा है। एक्सचेंज और बोनस ऑफर्स जोड़ने के बाद इसकी प्रभावी कीमत 75 हजार रुपये से नीचे पहुंच सकती है।

वहीं iPad 11th Gen और iPad Air M4 पर भी अच्छी कीमत कटौती देखने को मिल रही है। यही कारण है कि यह सेल स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी खास मानी जा रही है।

AirPods और Apple Watch पर भी ऑफर्स

सेल के दौरान AirPods Pro 3 और AirPods 4 पर भी डिस्काउंट मिल रहा है। इसके अलावा Apple Watch SE 3 को भी कम कीमत में खरीदा जा सकता है।

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Apple प्रोडक्ट्स पर इतने बड़े संयुक्त ऑफर्स कम ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में जो ग्राहक लंबे समय से Apple डिवाइस अपग्रेड करने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह अच्छा मौका हो सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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'Zoho का नाम सुनते ही Microsoft ने 90% घटा दिए दाम', श्रीधर वेम्बु का दावा; बोले- बाजार में विकल्प होंगे तभी ग्राहकों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: भारतीय SaaS कंपनी Zoho के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उनके एक ग्राहक ने सिर्फ Zoho का नाम लेकर Microsoft से भारी डिस्काउंट हासिल कर लिया। वेम्बु ने इस घटना को वर्तमान AI प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी बाजार में मजबूत विकल्प (Competition) होना बेहद जरूरी है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा ही ग्राहकों के हितों की रक्षा करती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि उनके एक भारतीय ग्राहक को Microsoft Office लाइसेंस रिन्यू कराने के दौरान अचानक काफी अधिक कीमत चुकाने के लिए कहा गया। लेकिन जैसे ही ग्राहक ने Microsoft को बताया कि वह Zoho Office Suite पर शिफ्ट होने पर विचार कर रहा है, कंपनी ने कथित तौर पर लाइसेंस की कीमत में लगभग 90 प्रतिशत तक की कटौती कर दी। हालांकि, इस दावे पर Microsoft की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्राहक ने सिर्फ Zoho का नाम लिया और बदल गई कीमत श्रीधर वेम्बु के मुताबिक, संबंधित ग्राहक पहले से Zoho के कुछ अन्य प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहा था। जब Microsoft Office के लाइसेंस का नवीनीकरण कराने का समय आया, तो उसे पहले की तुलना में काफी अधिक कीमत बताई गई। इसके बाद ग्राहक ने Microsoft के प्रतिनिधियों से कहा कि वह Zoho Office Suite को विकल्प के रूप में देख रहा है। वेम्बु का दावा है कि इतना सुनते ही Microsoft ने अपने लाइसेंस की कीमत में करीब 90% तक की कमी कर दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ग्राहक ने बाद में उन्हें धन्यवाद देते हुए बताया कि "Zoho खरीदे बिना ही उसके काफी पैसे बच गए।" AI की प्रतिस्पर्धा से जोड़ा पूरा मामला श्रीधर वेम्बु ने इस उदाहरण का इस्तेमाल मौजूदा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रतिस्पर्धा को समझाने के लिए किया। उनका कहना था कि आज अमेरिकी AI कंपनियों को चीनी ओपन-सोर्स AI मॉडल्स से कड़ी चुनौती मिल रही है और यही प्रतिस्पर्धा पूरे उद्योग के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। उन्होंने इशारा किया कि जब किसी बड़ी कंपनी को मजबूत विकल्पों का सामना करना पड़ता है, तो उसे अपने उत्पादों की कीमत, गुणवत्ता और सेवाओं में सुधार करना पड़ता है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है। "अगली बार Zoho का नाम जरूर लेना" अपने पोस्ट में वेम्बु ने हल्के-फुल्के अंदाज में सलाह भी दी कि अगर कोई Microsoft Office का लाइसेंस रिन्यू करा रहा है, तो उसे Zoho का जिक्र जरूर करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रतिस्पर्धा कई बार ग्राहकों के लिए बेहतर डील दिलाने में मददगार साबित होती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल यह दिखाना था कि बाजार में विकल्प मौजूद होना क्यों जरूरी है। एकाधिकार पर उठाए सवाल वेम्बु ने अपने पोस्ट में पुराने एंटी-ट्रस्ट मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी का बाजार पर अत्यधिक नियंत्रण ग्राहकों के हित में नहीं होता। उनके अनुसार, जब किसी सेक्टर में सिर्फ एक या दो बड़ी कंपनियां हावी हो जाती हैं, तो वे कीमतें और शर्तें अपनी सुविधा के अनुसार तय कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत प्रतिस्पर्धा कंपनियों को जवाबदेह बनाती है और उपभोक्ताओं को बेहतर कीमत, बेहतर सेवा और अधिक विकल्प उपलब्ध कराती है। भारतीय AI को लेकर जताया भरोसा श्रीधर वेम्बु ने भारत के AI इकोसिस्टम को लेकर भी आशावादी रुख अपनाया। उनका कहना है कि भारतीय विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों में तेजी से AI पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि AI मॉडल्स को ट्रेन करने की लागत लगातार कम हो रही है और आने वाले वर्षों में भारतीय AI मॉडल्स भी वैश्विक स्तर पर मजबूत प्रतिस्पर्धा पेश कर सकते हैं। वेम्बु के मुताबिक, भारत को AI की दौड़ में पीछे मानने की जरूरत नहीं है। यदि निवेश, रिसर्च और नवाचार इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो भारतीय कंपनियां भी दुनिया के बड़े AI खिलाड़ियों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच सकती हैं।  

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फोन की मेमोरी हो गई है फुल? इन 3 आसान ट्रिक्स से बिना फोटो डिलीट किए मिनटों में खाली करें स्टोरेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए स्टोरेज फुल होना एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। अक्सर लोग जगह खाली करने के लिए अपनी जरूरी और यादगार फोटो-वीडियो डिलीट करने लगते हैं, लेकिन अब बिना किसी फोटो को हटाए भी फोन में कई GB तक स्पेस खाली किया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ तीन आसान सेटिंग्स और ट्रिक्स को अपनाने की जरूरत है, जो फोन की मेमोरी को तेजी से क्लीन कर सकती हैं।   Play Store की अनइंस्टॉल्ड ऐप हिस्ट्री हटाएं गूगल प्ले स्टोर में उन ऐप्स की हिस्ट्री सेव रहती है, जिन्हें आपने पहले इंस्टॉल करके बाद में डिलीट कर दिया था। यह डेटा अनावश्यक रूप से स्टोरेज घेरता है। इसे हटाने के लिए Play Store खोलकर प्रोफाइल आइकन पर जाएं, “Manage apps & device” में जाकर “Not installed” सेक्शन चुनें और पुराने ऐप्स की पूरी लिस्ट डिलीट कर दें। इससे काफी स्टोरेज खाली हो जाता है।   WhatsApp के ‘Manage Storage’ से हटाएं भारी फाइलें व्हाट्सएप पर आने वाली इमेज, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स अक्सर फोन की स्टोरेज का बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं। बिना चैट डिलीट किए सेटिंग्स में जाकर “Storage and data” और फिर “Manage storage” विकल्प चुनें। यहां 5MB से बड़ी फाइलें अलग दिखाई देती हैं, जिन्हें आप आसानी से हटाकर स्पेस खाली कर सकते हैं, जबकि जरूरी चैट और फोटो सुरक्षित रहते हैं।   Auto Archive Apps फीचर से बढ़ेगी मेमोरी Play Store में मौजूद “Automatically archive apps” फीचर को ऑन करने से लंबे समय तक इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स ऑटोमैटिकली कम स्टोरेज में बदल जाते हैं। इससे बिना ऐप डिलीट किए भी फोन की मेमोरी बचाई जा सकती है और परफॉर्मेंस बेहतर रहती है। इन तीन आसान तरीकों को अपनाकर यूजर्स अपनी जरूरी फाइलें सुरक्षित रखते हुए फोन की स्टोरेज बढ़ा सकते हैं और बार-बार “स्टोरेज फुल” की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

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Prabhjit Singh OpenAI
OpenAI ने भारत में पहली बार नियुक्त किया मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रभजीत सिंह संभालेंगे कमान

नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही OpenAI ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ChatGPT विकसित करने वाली कंपनी ने उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख प्रभजीत सिंह को भारत का पहला मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह पहली बार है जब OpenAI ने भारत में शीर्ष स्तर पर नेतृत्व नियुक्त किया है।   भारत में बिजनेस विस्तार की जिम्मेदारी OpenAI के अनुसार, प्रभजीत सिंह भारत में कंपनी के सभी प्रमुख कारोबारी संचालन की कमान संभालेंगे। वह एशिया-प्रशांत (APAC) प्रमुख किरन मणी को रिपोर्ट करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में भारत में कंज्यूमर ग्रोथ बढ़ाना, विभिन्न उद्योगों में AI के उपयोग को विस्तार देना, सरकारी नीतियों के साथ समन्वय स्थापित करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना शामिल होगा।   OpenAI के लिए क्यों अहम है भारत भारत OpenAI के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा यूजर मार्केट बन चुका है। देश में शिक्षा, शोध, कोडिंग और पेशेवर कार्यों में ChatGPT का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और साझेदारियों को और मजबूत करना चाहती है। आईआईटी खड़गपुर और आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई कर चुके प्रभजीत सिंह को भारतीय बाजार और कॉर्पोरेट जगत का व्यापक अनुभव है, जिसका लाभ OpenAI को मिलने की उम्मीद है।   उबर में 11 साल का सफल कार्यकाल प्रभजीत सिंह ने OpenAI में शामिल होने से पहले उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उबर में लगभग 11 वर्षों तक काम किया और उनके नेतृत्व में कंपनी ने महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों तक कैब, ऑटो और बाइक सेवाओं का विस्तार किया।   उबर ने जताया आभार उबर ने प्रभजीत सिंह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक बना रहेगा। कंपनी ने भरोसा जताया कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद भारत में इनोवेशन और मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार लगातार जारी रहेगा। वहीं, OpenAI की यह नियुक्ति भारतीय AI बाजार में उसके दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक विस्तार का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।

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