आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

Hemant Soren
मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक आयोजित होगा कृषि व्यापार मेला, मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन

रांची। झारखंड सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से रांची के मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला आयोजित करने जा रही है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे।   आयोजन का उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श कर सकें।   देशभर से आएंगे विशेषज्ञ और लगेंगे आधुनिक कृषि स्टॉल कृषि व्यापार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान, कंपनियां और संगठन अपने स्टॉल लगाएंगे। मेले में 50 से अधिक वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। किसानों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस आयोजन का लाभ उठा सकें।   कृषि विभाग के अनुसार मेले में आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, जैविक कृषि और कृषि व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों से भी अवगत कराया जाएगा।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष फोकस मेले का प्रमुख आकर्षण कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और उनके लाभों की जानकारी देंगे।   सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी सजेगा आयोजन कृषि व्यापार मेला केवल तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। शाम के समय झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नृत्य और गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रगतिशील किसान और अन्य राज्यों के सफल कृषि विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे किसानों को नई प्रेरणा और सीख मिलेगी। यह मेला कृषि क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान और अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
AI Job Impact
AI के बढ़ते इस्तेमाल से बदलेगी नौकरी की दुनिया? एक्सपर्ट्स ने बताई बड़ी बात

नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल आजकल तेजी से हो रहा है और इसका असर अब लगभग हर सेक्टर में दिखाई देने लगा है। टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एजुकेशन, बैंकिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में AI आधारित टूल्स के बढ़ते उपयोग ने नौकरी के भविष्य को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। समय और लागत दोनों कम करने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि AI सिर्फ काम करने के तरीके को नहीं बदल रहा, बल्कि कई पारंपरिक नौकरियों की प्रकृति को भी प्रभावित कर रहा है। कंपनियां अब ऑटोमेशन और AI टूल्स का इस्तेमाल कर समय और लागत दोनों कम करने की कोशिश कर रही हैं। किन नौकरियों पर पड़ सकता है ज्यादा असर? रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा एंट्री, बेसिक कस्टमर सपोर्ट, रिपिटेटिव ऑफिस वर्क और कुछ प्रशासनिक भूमिकाओं पर AI का असर ज्यादा देखा जा सकता है। वहीं, AI से जुड़े नए रोल्स भी तेजी से उभर रहे हैं। नए अवसर भी बना रहा AI जानकारों का कहना है कि AI सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि नए अवसर भी बना रहा है। AI Specialist Data Analyst Prompt Engineer Cyber Security Expert Machine Learning Engineer नई स्किल्स अपनाना जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीकी कौशल, समस्या समाधान क्षमता और डिजिटल स्किल्स ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगी। इसलिए लगातार सीखना और नई स्किल्स अपनाना जरूरी माना जा रहा है। क्या पूरी तरह बदल जाएगी नौकरी की दुनिया? एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI कई कामों को आसान और तेज जरूर बना सकता है, लेकिन पूरी तरह इंसानी भूमिका को खत्म करना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा। AI और इंसानों के साथ मिलकर काम करने का मॉडल ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्तेमाल नौकरी की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसे चुनौती के साथ-साथ अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में वही लोग आगे रह सकते हैं, जो नई तकनीकों के साथ खुद को तेजी से ढाल पाएंगे।

Unknown जून 7, 2026 0
Google Layoffs
Google में फिर छंटनी: क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी टीम पर गिरी गाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google ने एक बार फिर कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो सप्ताह के दौरान कंपनी ने अपने क्लाउड डिवीजन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कई टीमों में कर्मचारियों की संख्या घटाई है। इस कदम ने टेक सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। क्लाउड और थ्रेट इंटेलिजेंस टीम हुई प्रभावित मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, छंटनी का असर गूगल क्लाउड की कई इकाइयों पर पड़ा है। इनमें कंपनी का गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप (GTIG) भी शामिल है, जो वैश्विक साइबर हमलों और हैकिंग गतिविधियों पर शोध कर रिपोर्ट तैयार करता है। यह टीम साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में गूगल की महत्वपूर्ण इकाइयों में गिनी जाती है। इसके अलावा, साइबर सिक्योरिटी कंपनी Mandiant से जुड़े कुछ कर्मचारियों को भी नौकरी गंवानी पड़ी है। गूगल ने वर्ष 2022 में Mandiant का लगभग 5.4 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था, जिससे कंपनी ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की थी। कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव छंटनी की पुष्टि उस समय और मजबूत हुई जब प्रभावित कर्मचारियों में से कुछ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पोस्ट साझा की। एक कर्मचारी ने बताया कि उनकी पूरी टीम में कई लोगों को नौकरी से निकाला गया है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ समय का ब्रेक लेने के बाद वे नई नौकरी की तलाश शुरू करेंगे। AI पर बढ़ा फोकस, बदले जा रहे संसाधन सूत्रों के अनुसार, गूगल अपने संसाधनों को तेजी से विकसित हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर रहा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI उसके कारोबार का प्रमुख आधार बनने वाला है। इसी कारण कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम कर संसाधनों का पुनर्गठन किया जा रहा है। कंपनी ने क्या कहा? गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी समय-समय पर अपने आंतरिक ढांचे की समीक्षा करती है ताकि ग्राहकों और व्यवसाय की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को बेहतर बना सके। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि कुल कितने कर्मचारियों को निकाला गया है। टेक सेक्टर में जारी है पुनर्गठन विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के कारण दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अपने कार्यबल और निवेश रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। गूगल की यह ताजा छंटनी भी उसी व्यापक बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है, जहां कंपनियां पारंपरिक क्षेत्रों से संसाधन हटाकर AI और ऑटोमेशन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Young man uses AI to locate 25 ancestral land plots through digital records and mapping tools
AI की मदद से युवक ने खोज निकाली 25 पुश्तैनी जमीनें, वायरल हुई अनोखी कहानी

उत्तर प्रदेश के एक युवक की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस युवक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी 25 पुश्तैनी जमीनों की सटीक लोकेशन खोज निकाली। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि AI अब केवल चैटिंग, कंटेंट लिखने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान भी कर सकता है। मोहम्मदपुर गांव से जुड़े इस मामले में जाहिद खान नाम के युवक को अपने परिवार की विरासत में मिली जमीनों की सही जानकारी नहीं थी। जमीनें उनके परदादा से दादा, फिर पिता और बाद में उन्हें मिली थीं, लेकिन समय के साथ रिकॉर्ड्स इतने बिखर गए कि उनकी सटीक पहचान करना मुश्किल हो गया। सरकारी रिकॉर्ड्स बने बड़ी चुनौती जाहिद के अनुसार, जमीन से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध थे। इनमें तकनीकी शब्दावली और जटिल हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिसे समझना आसान नहीं था। इसके अलावा उन्होंने गांव में बहुत कम समय बिताया था, इसलिए जमीनों की वास्तविक स्थिति का भी कोई स्पष्ट अंदाजा नहीं था। हालांकि रिकॉर्ड्स डिजिटल रूप में मौजूद थे, लेकिन उन्हें समझना और आपस में जोड़ना आम व्यक्ति के लिए बेहद कठिन काम था। Claude AI ने संभाली जिम्मेदारी इस समस्या का समाधान निकालने के लिए जाहिद ने AI असिस्टेंट Claude का उपयोग किया। Claude के "Computer Use" फीचर की मदद से AI ने स्वयं सरकारी वेबसाइटों पर जाकर रिकॉर्ड्स खंगालना शुरू किया। AI ने हिंदी ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड का उपयोग करते हुए उनके पिता का नाम दर्ज किया और उससे जुड़े भूमि रिकॉर्ड्स की खोज की। इसके बाद परिवार के नाम पर दर्ज 25 अलग-अलग जमीनों के गाटा नंबर निकाल लिए। जटिल मैपिंग डेटा को बनाया आसान असल चुनौती तब सामने आई जब जमीनों की लोकेशन UTM (Universal Transverse Mercator) कोऑर्डिनेट्स में उपलब्ध थी। सामान्य व्यक्ति के लिए इन आंकड़ों को समझना लगभग असंभव था। लेकिन AI ने इन कोऑर्डिनेट्स को प्रोसेस कर उन्हें सामान्य GPS लोकेशन में बदल दिया। इसके बाद सभी जमीनों की सीमाओं और लोकेशन को जोड़कर एक विस्तृत डिजिटल नक्शा तैयार किया गया। Google Maps पर दिखीं सभी जमीनें AI ने सभी जमीनों की सीमा रेखाओं को पहचानकर KML फाइल तैयार की। इस फाइल को Google My Maps पर अपलोड किया गया, जिससे हर जमीन की सटीक GPS लोकेशन और उसकी सीमा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी। जाहिद का कहना है कि यदि AI की सहायता नहीं मिलती, तो उन्हें पुराने दस्तावेजों, स्थानीय लोगों और सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते। लेकिन AI ने यह पूरा काम बेहद कम समय में आसान बना दिया। सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया जैसे ही जाहिद ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की, यह तेजी से वायरल हो गई। हजारों लोगों ने इसे AI के सबसे उपयोगी और व्यावहारिक उपयोगों में से एक बताया। कई यूजर्स का कहना है कि भारत में लाखों लोग जमीन, राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की जटिल प्रक्रियाओं से जूझते हैं। ऐसे में AI आम नागरिकों के लिए एक बड़ी मदद साबित हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में AI सरकारी रिकॉर्ड्स, भूमि दस्तावेजों, भाषा संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं यह घटना दर्शाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल मनोरंजन या कंटेंट निर्माण का साधन नहीं रह गया है। सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर यह लोगों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है और जटिल डिजिटल सिस्टम्स को आम नागरिकों के लिए आसान बना सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Futuristic smart car with AI dashboard and 5G connectivity showcasing the future of connected automobile technology.
AI और 5G से बदल जाएगी ऑटो इंडस्ट्री, अब कार नहीं ‘स्मार्ट कंप्यूटर’ खरीदेंगे लोग

दुनिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब कारें सिर्फ इंजन, गियरबॉक्स और मेटल बॉडी तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि तेजी से “कंप्यूटर ऑन व्हील्स” में बदलती जा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G, क्लाउड कंप्यूटिंग, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर अब भविष्य की गाड़ियों की पहचान बनने वाले हैं। यही वजह है कि टेक कंपनियां और ऑटो कंपनियां मिलकर ऐसे व्हीकल तैयार कर रही हैं, जो खुद अपडेट होंगे, ड्राइवर की आदतों को समझेंगे और आने वाले समय में बिना ड्राइवर के भी चल सकेंगे। बदल रही है ऑटो इंडस्ट्री की पूरी परिभाषा पहले कार कंपनियों की पहचान उनके इंजन, डिजाइन और माइलेज से होती थी, लेकिन अब मुकाबला डिजिटल एक्सपीरियंस, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी पर आ गया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, कनेक्टेड कार, ऑटोनॉमस ड्राइविंग और शेयर मोबिलिटी जैसे ट्रेंड्स पूरी इंडस्ट्री को नई दिशा दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स इसे CASE ट्रांसफॉर्मेशन कहते हैं, यानी Connected, Autonomous, Shared और Electric मॉडल। आज कई ऑटो कंपनियां बड़ी टेक कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही हैं। Google, Microsoft, NVIDIA, Qualcomm और Ericsson जैसी कंपनियां अब कारों के डिजिटल भविष्य को तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भारत में भी MG Motor की MG Hector जैसी गाड़ियों में इंटरनेट बेस्ड फीचर्स, AI सपोर्ट और क्लाउड कनेक्टिविटी पहले ही देखने को मिल चुकी है। वहीं Tata Motors अपने कनेक्टेड व्हीकल्स में AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा रही है। 5G और AI बदल देंगे ड्राइविंग का अनुभव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में 5G तकनीक ड्राइविंग एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल सकती है। हाई-स्पीड इंटरनेट की मदद से गाड़ियां रियल टाइम डेटा शेयर करेंगी, लाइव ट्रैफिक अपडेट लेंगी और कई फैसले खुद ले पाएंगी। ऑटोनॉमस यानी सेल्फ-ड्राइविंग कारों में भी 5G की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। Volvo और Ericsson ने 5G सपोर्टेड सिस्टम पर टेस्टिंग भी की है, जहां गाड़ियों को लगातार लाइव मैप डेटा मिलता रहा। इससे भविष्य में सेल्फ-ड्राइविंग कारों की सुरक्षा और सटीकता बेहतर हो सकती है। अब कार कंपनियों को टेक कंपनी की तरह सोचना होगा ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कार की असली वैल्यू सिर्फ उसके हार्डवेयर से तय नहीं होगी, बल्कि उसमें मिलने वाले सॉफ्टवेयर, AI फीचर्स और डिजिटल सर्विसेज ज्यादा अहम होंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक भविष्य में कारों में हार्डवेयर का हिस्सा घटकर करीब 40 प्रतिशत तक रह सकता है, जबकि सॉफ्टवेयर और कंटेंट की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी। यानी ग्राहक अब सिर्फ इंजन और माइलेज नहीं, बल्कि OTA अपडेट, ऐप कंट्रोल, AI बेस्ड सिस्टम और स्मार्ट फीचर्स भी देखेंगे। Tesla, Xiaomi और Apple क्यों बदल रहे हैं भविष्य? Tesla ने दुनिया को दिखाया कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल का कॉम्बिनेशन कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। अब Xiaomi, Sony और Apple जैसी कंपनियां भी EV और स्मार्ट मोबिलिटी सेक्टर में तेजी से दिलचस्पी दिखा रही हैं। भारत में Ather Energy और Ola Electric जैसे स्टार्टअप्स टेक बेस्ड मोबिलिटी मॉडल पर फोकस कर रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि बड़े स्तर पर भरोसेमंद कार मैन्युफैक्चरिंग अब भी आसान काम नहीं है। टेक कंपनियों के पास सॉफ्टवेयर और AI की ताकत जरूर है, लेकिन बड़े पैमाने पर सुरक्षित और भरोसेमंद वाहन बनाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। भविष्य में कार नहीं, मोबिलिटी सर्विस खरीदेंगे लोग ऑटो इंडस्ट्री तेजी से “Car as a Service” मॉडल की तरफ बढ़ रही है। यानी भविष्य में लोग गाड़ी खरीदने के बजाय जरूरत के हिसाब से उसका इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद कर सकते हैं। कारें स्मार्ट डिवाइस की तरह काम करेंगी, जहां एंटरटेनमेंट, सब्सक्रिप्शन सर्विस, ऐप बेस्ड फीचर्स और डेटा सर्विस नई कमाई का जरिया बनेंगी। हालांकि इसके साथ साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। क्योंकि जितनी ज्यादा कारें इंटरनेट से जुड़ेंगी, उतना ही डेटा चोरी और नेटवर्क सिक्योरिटी का खतरा भी बढ़ सकता है। भारत में क्यों अहम है यह बदलाव? भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटो मार्केट्स में शामिल है और यहां टेक्नोलॉजी तेजी से अपनाई जा रही है। कनेक्टेड कार, ADAS, ऐप कंट्रोल और EV फीचर्स अब धीरे-धीरे आम ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। आने वाले दशक में भारतीय सड़कों पर ऐसी गाड़ियां दिखाई दे सकती हैं, जो लगातार इंटरनेट से जुड़ी रहेंगी, खुद अपडेट होंगी और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल देंगी।  

surbhi मई 21, 2026 0
Meta Muse Spark AI model announcement showcasing advanced multimodal AI competing with ChatGPT and Claude
Meta का बड़ा दांव: Muse Spark AI लॉन्च, ChatGPT और Claude को टक्कर देने का दावा

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में बड़ा कदम उठाते हुए अपना नया AI मॉडल Muse Spark लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह अब तक का उनका सबसे एडवांस्ड मॉडल है, जो आसपास की दुनिया को समझने और जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम है। Meta Superintelligence Labs की पहली पेशकश Muse Spark, Meta Superintelligence Labs (MSL) द्वारा विकसित पहला मॉडल है, जिसकी अगुवाई Alexandr Wang कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस मॉडल को महज 9 महीनों में तैयार किया गया है। Meta के CEO Mark Zuckerberg ने AI सेक्टर में बढ़त हासिल करने के लिए इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया था। क्या है Muse Spark की खासियत? Muse Spark एक छोटा लेकिन तेज (small and fast) LLM है, जिसे खासतौर पर मल्टीमॉडल रीजनिंग और एजेंट-आधारित टास्क के लिए डिजाइन किया गया है। जटिल साइंस, मैथ और हेल्थ से जुड़े सवाल हल करने में सक्षम एक साथ कई AI एजेंट्स को मैनेज कर सकता है यूजर के व्यवहार और बातचीत के आधार पर जवाब देने की क्षमता Meta का दावा है कि यह मॉडल कुछ मामलों में Claude Opus 4.6 और GPT-5.4 जैसे एडवांस मॉडल्स को टक्कर दे सकता है। Meta AI को करेगा पावर Muse Spark अब Meta AI के नए वर्जन को पावर देगा, जो जल्द ही Facebook, Instagram, WhatsApp और Messenger जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगा। इसके साथ ही एक नया शॉपिंग मोड भी जोड़ा गया है, जो यूजर्स को उनके पसंदीदा क्रिएटर्स और ब्रांड्स के आधार पर सुझाव देगा। ओपन-सोर्स नहीं है Muse Spark जहां Meta के पहले Llama मॉडल्स ओपन-सोर्स थे, वहीं Muse Spark को फिलहाल क्लोज्ड-सोर्स रखा गया है। अभी यह सीमित पार्टनर्स के लिए API प्रीव्यू में उपलब्ध है, हालांकि कंपनी ने भविष्य में इसे ओपन-सोर्स करने के संकेत दिए हैं। AI रेस में बढ़ी प्रतिस्पर्धा Muse Spark के लॉन्च के साथ ही AI की दुनिया में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। Meta अब OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों को सीधी चुनौती दे रही है।  

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Google Gemini AI Notebooks interface showing organized chats, documents, and AI workflow integration.
Google Gemini में ‘Notebooks’ फीचर लॉन्च, अब चैट, फाइल और AI वर्कफ्लो एक जगह होंगे मैनेज

टेक दिग्गज Google ने अपने AI प्लेटफॉर्म Gemini में एक नया और अहम फीचर ‘Notebooks’ लॉन्च किया है। यह फीचर यूजर्स को लंबे समय तक चलने वाले चैट्स, डॉक्यूमेंट्स और AI वर्कफ्लो को एक ही जगह व्यवस्थित करने की सुविधा देगा। कंपनी के मुताबिक, यह फीचर खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो रिसर्च, कंटेंट क्रिएशन, प्रोजेक्ट प्लानिंग या स्टडी जैसे जटिल कामों में AI का इस्तेमाल करते हैं। क्या है Notebooks फीचर? Gemini का Notebooks फीचर एक पर्सनल नॉलेज हब की तरह काम करता है, जहां यूजर्स- नई और पुरानी चैट्स को एक जगह सेव कर सकते हैं PDF और अन्य डॉक्यूमेंट अपलोड कर सकते हैं AI के लिए कस्टम निर्देश सेट कर सकते हैं इससे Gemini यूजर के कंटेंट और संदर्भ को बेहतर तरीके से समझकर ज्यादा सटीक और प्रासंगिक जवाब देता है। NotebookLM के साथ स्मार्ट इंटीग्रेशन यह फीचर NotebookLM के साथ पूरी तरह इंटीग्रेटेड है। यानी Gemini में बनाए गए नोटबुक्स अपने आप NotebookLM में सिंक हो जाएंगे। उदाहरण के तौर पर, यूजर Gemini में स्टडी मटेरियल अपलोड कर सकता है, NotebookLM में उसका एनालिसिस या विजुअल ओवरव्यू बना सकता है, और फिर उसी डेटा से Gemini में नोट्स या आर्टिकल तैयार कर सकता है। किसे मिलेगा यह फीचर? फिलहाल यह फीचर Gemini AI Ultra, Pro और Plus सब्सक्राइबर्स के लिए वेब पर रोलआउट किया जा रहा है। आने वाले समय में इसे मोबाइल यूजर्स और फ्री यूजर्स के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। AI वर्कफ्लो होगा और आसान Google का कहना है कि Notebooks फीचर मल्टी-स्टेप टास्क जैसे एग्जाम प्रिपरेशन, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और कंटेंट डेवलपमेंट को काफी आसान बना देगा। यूजर्स को बार-बार कॉन्टेक्स्ट डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी। प्रतिस्पर्धा में नई चाल विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फीचर OpenAI के “Projects” फीचर को टक्कर देने के लिए लाया गया है, जो यूजर्स को चैट्स और फाइल्स को व्यवस्थित करने की सुविधा देता है। Gemini का Notebooks फीचर AI के इस्तेमाल को और ज्यादा संगठित, स्मार्ट और प्रोडक्टिव बना सकता है। खासतौर पर स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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