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Fighter jets and military drones amid reports of heavy US losses in alleged Iran conflict
ईरान युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान: 42 विमान तबाह होने के दावे से मचा हड़कंप

Iran और United States के बीच कथित युद्ध को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी संसद से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि ईरान पर 40 दिनों तक चले सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका के 42 विमान या तो नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इस दावे के बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सैन्य क्षमता, युद्ध रणनीति और अभियान की वास्तविक कीमत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। क्या कहा गया रिपोर्ट में? रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और Israel ने मिलकर ईरान के खिलाफ कथित “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” चलाया था। इस अभियान के तहत हवाई, समुद्री और मिसाइल हमले किए गए। बताया गया कि इस संघर्ष में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में जिन सैन्य संसाधनों के नुकसान का दावा किया गया, उनमें शामिल हैं: चार F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, एक F-35A लाइटनिंग द्वितीय लड़ाकू विमान, एक ए-10 थंडरबोल्ट द्वितीय हमला विमान, सात KC-135 स्ट्रैटोटैंकर ईंधन भरने वाले विमान, एक E-3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान, दो एमसी-130जे कमांडो द्वितीय विशेष अभियान विमान, एक एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन द्वितीय हेलीकॉप्टर, 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल हैं.  रिपोर्ट में कहा गया कि आंकड़े आगे बदल सकते हैं क्योंकि कई सूचनाएं अब भी गोपनीय हैं। 29 अरब डॉलर तक पहुंची युद्ध लागत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग की सुनवाई में पेंटागन के कार्यवाहक कंट्रोलर Jules W. Hurst III ने कहा कि ईरान में सैन्य अभियान की लागत लगभग 29 अरब डॉलर तक पहुंच गई। ईरान ने क्या कहा? ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इस रिपोर्ट को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने खुद अपने भारी नुकसान को स्वीकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि: “ईरान की सेना दुनिया की पहली सेना बनी जिसने F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया।” अराघची ने दावा किया कि ईरान ने इस युद्ध से कई रणनीतिक सबक सीखे हैं और भविष्य में दुनिया को “और बड़े सरप्राइज” देखने को मिल सकते हैं। F-35 को गिराने का दावा कितना बड़ा? F-35 Lightning II को दुनिया के सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर जेट्स में गिना जाता है। यदि किसी देश द्वारा इसे मार गिराने का दावा सही साबित होता है, तो यह आधुनिक सैन्य इतिहास की बड़ी घटनाओं में शामिल हो सकता है। हालांकि अमेरिका की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी नुकसान की विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही हैं, तो यह मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और आधुनिक हवाई युद्ध की रणनीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Police vehicles outside Islamic Center of San Diego after deadly shooting near mosque premises.
सैन डिएगो की सबसे बड़ी मस्जिद के बाहर गोलीबारी, 2 संदिग्ध समेत 5 की मौत

अमेरिका के San Diego में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद Islamic Center of San Diego के बाहर हुई गोलीबारी की घटना में कुल पांच लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल है। स्थानीय पुलिस और Federal Bureau of Investigation (FBI) मामले की संयुक्त जांच कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद के पास हुई फायरिंग में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में पुलिस को घटनास्थल के करीब खड़े एक वाहन में दो किशोर संदिग्ध मृत अवस्था में मिले। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि दोनों ने खुद को गोली मारी। 17 और 19 साल के थे संदिग्ध सैन डिएगो पुलिस प्रमुख Scott Wahl ने बताया कि मृत पाए गए दोनों युवकों की उम्र 17 और 19 वर्ष थी। उन्होंने कहा कि मस्जिद परिसर में मौजूद बच्चे और अन्य लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों संदिग्धों की मौत संभवतः आत्मघाती गोलीबारी के कारण हुई है। अधिकारियों ने अभी तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है। FBI ने शुरू की गहन जांच FBI के सैन डिएगो कार्यालय के विशेष एजेंट Mark Remley ने कहा कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि हमले के पीछे कोई व्यापक साजिश या अन्य लोग शामिल थे या नहीं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मारे गए तीन लोगों में मस्जिद का एक सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल है। हथियार पर मिले घृणास्पद संदेश जांच एजेंसियों के मुताबिक, संदिग्धों में से एक युवक अपने माता-पिता के घर से हथियार लेकर निकला था। अधिकारियों को एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें नस्लीय श्रेष्ठता और घृणा से जुड़े विचार लिखे गए थे। इसके अलावा घटना में इस्तेमाल किए गए एक हथियार पर आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाले शब्द लिखे मिले हैं। इसी वजह से जांच एजेंसियां इस घटना को संभावित “हेट क्राइम” के तौर पर भी देख रही हैं। मस्जिद और आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद मस्जिद और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस इलाके की निगरानी कर रही है और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में मामले से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।  

surbhi मई 19, 2026 0
Donald Trump announces joint US-Nigeria operation killing senior ISIS commander in Nigeria
नाइजीरिया में ISIS का बड़ा आतंकी ढेर, ट्रंप बोले- मेरे निर्देश पर चला ऑपरेशन

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि आतंकवादी संगठन Islamic State के वैश्विक स्तर के दूसरे सबसे बड़े कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी को अमेरिकी और नाइजीरियाई सेनाओं के संयुक्त ऑपरेशन में मार गिराया गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा कि यह मिशन उनके निर्देश पर बेहद गुप्त और जटिल तरीके से अंजाम दिया गया। ‘अफ्रीका में छिपने की कोशिश कर रहा था’ ट्रंप ने कहा कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी अफ्रीका में छिपकर ISIS के वैश्विक नेटवर्क को संचालित करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों और लोकेशन को ट्रैक कर लिया। उन्होंने लिखा, “दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादियों में से एक को खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना और नाइजीरिया की सशस्त्र सेनाओं ने बेहद सटीक और कठिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।” ISIS के ग्लोबल ऑपरेशन को बड़ा झटका ट्रंप के अनुसार, अबू-बिलाल अल-मिनुकी ISIS के वैश्विक संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था और वह अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की साजिशों में भी शामिल था। उन्होंने कहा, “उसकी मौत के बाद ISIS के वैश्विक ऑपरेशन को बड़ा नुकसान पहुंचा है।” नाइजीरिया सरकार को दिया धन्यवाद ट्रंप ने इस अभियान में सहयोग के लिए Nigeria सरकार और वहां की सेना का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। लंबे समय से तलाश में था आतंकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबू-बिलाल अल-मिनुकी लंबे समय से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी में था। वह अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि वह ISIS के नेटवर्क को फिर से संगठित करने और नए हमलों की योजना बनाने में जुटा हुआ था। वैश्विक आतंकवाद पर अमेरिका का बड़ा संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति के तहत एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। मध्य पूर्व और अफ्रीका में ISIS की गतिविधियों को लेकर हाल के महीनों में चिंता बढ़ी थी। ऐसे में इस कार्रवाई को आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Donald Trump speaking about Xi Jinping’s remarks while criticizing Joe Biden’s administration
‘100% सही थे शी जिनपिंग’, अमेरिका की हालत पर ट्रंप का बयान; बाइडेन पर साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने तेज़ प्रगति की, जबकि देश की गिरावट बाइडेन प्रशासन के दौरान हुई। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के उस बयान का जिक्र किया जिसमें अमेरिका को “गिरावट की ओर बढ़ता देश” बताया गया था। ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग की बात से “100 फीसदी सहमत” हैं, लेकिन यह टिप्पणी उनके कार्यकाल पर नहीं बल्कि बाइडेन सरकार के दौर पर लागू होती है। ‘बाइडेन के समय देश कमजोर हुआ’ ट्रंप ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों में अमेरिका को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि खुली सीमाओं, ज्यादा टैक्स, गलत व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध ने देश को कमजोर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी और DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन) नीतियों की भी आलोचना की। ‘मेरे नेतृत्व में अमेरिका ने जबरदस्त उछाल देखा’ ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने केवल 16 महीनों में बड़ी आर्थिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, 401K निवेश मजबूत हुए और अमेरिका फिर से आर्थिक ताकत के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली बनी रही और ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया। ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ रिश्तों में सुधार और रिकॉर्ड निवेश आने का भी दावा किया। ‘शी जिनपिंग ने दी थी बधाई’ ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में रोजगार के अवसर बढ़े और कई नीतिगत बदलावों ने अमेरिका को मजबूत बनाया। हालांकि ट्रंप के इन दावों पर विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 15, 2026 0
US passport and legal documents symbolizing Trump administration’s crackdown on unpaid child support dues
अमेरिका में ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला, चाइल्ड सपोर्ट नहीं चुकाने वालों के पासपोर्ट होंगे रद्द

अमेरिका में Donald Trump प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. अब उन अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट रद्द किए जाएंगे, जिन पर बच्चों की देखभाल के लिए दिए जाने वाले “चाइल्ड सपोर्ट” का भारी बकाया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि यह कार्रवाई उन लोगों पर केंद्रित होगी जो लंबे समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं. क्या है नया नियम? अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिन माता-पिता पर 2,500 डॉलर (करीब 2.36 लाख रुपये) से ज्यादा का चाइल्ड सपोर्ट बकाया है, उनका पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है. यह कार्रवाई अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) के साथ मिलकर की जाएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है और हजारों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं. क्या होता है चाइल्ड सपोर्ट? अमेरिका में तलाक या अलग रहने की स्थिति में अदालत यह तय करती है कि बच्चे की पढ़ाई, इलाज, खाना, कपड़े और दूसरी जरूरतों के लिए माता-पिता में से किसे कितनी आर्थिक सहायता देनी होगी. इसी भुगतान को “चाइल्ड सपोर्ट” कहा जाता है. अगर कोई अभिभावक लंबे समय तक यह राशि नहीं देता, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी कानून के तहत पासपोर्ट पाने या बनाए रखने के लिए चाइल्ड सपोर्ट से जुड़े दायित्वों का पालन करना जरूरी है. मंत्रालय के मुताबिक: 2,500 डॉलर से ज्यादा बकाया होने पर पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है बकाया चुकाए बिना नया पासपोर्ट जारी नहीं होगा रद्द पासपोर्ट यात्रा के लिए मान्य नहीं रहेगा सरकार का कहना है कि यह कदम माता-पिता को बच्चों के प्रति अपनी “कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी” निभाने के लिए प्रेरित करेगा. विदेश में फंसे लोगों के साथ क्या होगा? अगर किसी व्यक्ति का पासपोर्ट उस समय रद्द किया जाता है जब वह अमेरिका से बाहर हो, तो उसे अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क करना होगा. वहां से उसे केवल अमेरिका लौटने के लिए एक इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्युमेंट दिया जाएगा. पहले क्या नियम था? अब तक आमतौर पर यह कार्रवाई केवल तब होती थी जब कोई व्यक्ति अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने की कोशिश करता था. लेकिन नए फैसले के बाद सरकार सीधे सक्रिय होकर ऐसे लोगों के पासपोर्ट रद्द कर सकती है, जिन पर बड़ा बकाया है. लोगों को क्या सलाह दी गई? अमेरिकी अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को सलाह दी है कि वे संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर जल्द भुगतान व्यवस्था तय करें, ताकि पासपोर्ट रद्द होने जैसी कार्रवाई से बचा जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम बच्चों के आर्थिक अधिकारों को मजबूत करने और बकाया भुगतान वसूलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Donald Trump speaks amid NATO tensions over Iran, with US troop cuts in Italy and Spain under discussion
ईरान जंग पर सहयोग न मिलने से भड़के ट्रंप: इटली-स्पेन से अमेरिकी फौज हटाने की चेतावनी, NATO में बढ़ी हलचल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अपने ही सहयोगी देशों पर सख्त रुख अपना लिया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे इटली और स्पेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम कर सकते हैं। इस बयान के बाद नाटो के भीतर हलचल तेज हो गई है। “साथ नहीं देंगे तो क्यों रखें फौज?” ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि अगर सहयोगी देश ईरान मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं देते, तो वहां अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी पर सवाल उठना लाजिमी है। उन्होंने कहा, “शायद मैं ऐसा करूंगा… आखिर क्यों नहीं?” ट्रंप का आरोप है कि: इटली ने ईरान संकट में कोई खास सहयोग नहीं किया स्पेन का रवैया “बहुत खराब” रहा ईरान जंग से बढ़ी दरार यह विवाद तब गहराया जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। नाटो के कई सदस्य देश इस युद्ध में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं, जिससे ट्रंप नाराज हैं। ट्रंप चाहते हैं कि सहयोगी देश खासतौर पर: होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करें समुद्री सुरक्षा और तेल सप्लाई बहाल करने में भूमिका निभाएं यूरोप में अमेरिकी सेना की मौजूदगी ताजा आंकड़ों (31 दिसंबर 2025) के अनुसार: जर्मनी: 36,436 अमेरिकी सैनिक इटली: 12,662 सैनिक स्पेन: 3,814 सैनिक ट्रंप का कहना है कि ये देश अपनी रक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे और अमेरिका पर निर्भर हैं। मेलोनी पर सीधा हमला ट्रंप ने जॉर्जिया मेलोनी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मेलोनी में ईरान मामले पर “साहस की कमी” है। वहीं, स्पेन को लेकर नाराजगी इतनी ज्यादा बताई जा रही है कि कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिका द्वारा उसे नाटो से बाहर करने के विकल्पों पर विचार की बात कही गई है (हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है)। जर्मनी से भी टकराव ट्रंप ने फ्रेडरिक मर्ज पर भी सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जर्मनी को दूसरे देशों के मामलों में टिप्पणी करने के बजाय अपने देश की ऊर्जा और इमिग्रेशन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। जर्मन नेतृत्व ने हालांकि साफ किया है कि: वे अमेरिका के साथ साझेदारी बनाए रखना चाहते हैं लेकिन सैन्य कार्रवाई के तरीके पर उनके अलग विचार हो सकते हैं यूरोप की प्रतिक्रिया जोहान वेडफुल ने कहा कि वे अमेरिकी सैनिकों की संभावित कटौती के लिए तैयार हैं और इस मुद्दे पर नाटो के भीतर चर्चा जारी है। यूरोपीय देशों का रुख फिलहाल संतुलन बनाए रखने का है–वे अमेरिका से दूरी भी नहीं बनाना चाहते और युद्ध में सीधे कूदने से भी बच रहे हैं। वैश्विक असर: तेल और बाजार पर दबाव ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण: वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है कीमतों में तेजी देखी जा रही है ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ी है इसके अलावा स्पेन ने गाजा के लिए जा रहे सहायता जहाजों को रोकने पर इजरायल की आलोचना भी की है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद और बढ़ गए हैं। क्या बदल सकता है NATO समीकरण? यह पूरा घटनाक्रम नाटो के अंदर नई दरारों की ओर इशारा करता है। अगर अमेरिका सच में यूरोप से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करता है, तो: यूरोप को अपनी सुरक्षा रणनीति बदलनी पड़ेगी नाटो की एकजुटता पर असर पड़ सकता है वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव आ सकता है

surbhi मई 1, 2026 0
JD Vance questions Pentagon briefings on Iran war amid tensions with Defense Secretary Pete Hegseth
ईरान युद्ध पर ट्रंप को गलत जानकारी? जेडी वेंस को अपने ही रक्षा मंत्री पर शक

बंद कमरे की बैठकों में उठाए गंभीर सवाल अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को आशंका है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध की वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि निजी बैठकों में वेंस ने सवाल उठाया कि क्या पेंटागन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की वास्तविक स्थिति बता रहा है या केवल सकारात्मक तस्वीर पेश की जा रही है। मिसाइल भंडार को लेकर बढ़ी चिंता वेंस की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी मिसाइल भंडार को लेकर है। उनका मानना है कि ईरान युद्ध में बड़ी मात्रा में हथियार खर्च हो रहे हैं, जिससे भविष्य में चीन, रूस या उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिका कमजोर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने यह चिंता सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने भी रखी है। हेगसेथ पर सीधे आरोप से बच रहे वेंस हालांकि, जेडी वेंस ने अब तक सार्वजनिक रूप से पीट हेगसेथ की आलोचना नहीं की है। उन्होंने कई मौकों पर रक्षा मंत्री की तारीफ भी की है। सूत्रों का कहना है कि वेंस इस मुद्दे को व्यक्तिगत टकराव में बदलने से बचना चाहते हैं। लेकिन उनके करीबी मानते हैं कि पेंटागन की तरफ से पेश की जा रही तस्वीर जरूरत से ज्यादा आशावादी है। खुफिया रिपोर्ट और दावों में अंतर पीट हेगसेथ लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और रक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन आंतरिक खुफिया आकलनों में तस्वीर कुछ अलग बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब भी अपनी वायुसेना और मिसाइल क्षमता का बड़ा हिस्सा बचाने में सफल रहा है। 2028 की राजनीति पर भी असर विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का राजनीतिक भविष्य भी इस युद्ध के नतीजों से जुड़ा हुआ है। यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है या अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो इसका असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में वेंस की संभावनाओं पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन में बढ़ सकती है खींचतान ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर मतभेद सामने आने से साफ है कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष स्तर पर रणनीति को लेकर एकराय नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति की चिंताओं को कितना महत्व देते हैं और पेंटागन की रणनीति में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
King Charles III arrive in Washington for high-stakes US state visit
अमेरिका पहुंचे किंग चार्ल्स, व्हाइट हाउस शूटिंग और ईरान विवाद के बीच अहम दौरा

ब्रिटेन के सम्राट Charles III और महारानी Camilla चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंच गए हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हाल ही में व्हाइट हाउस संवाददाता डिनर में गोलीबारी हुई और ईरान को लेकर अमेरिका-ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। ऐतिहासिक दौरा यह किंग चार्ल्स के शासनकाल का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण विदेशी दौरा माना जा रहा है। यह यात्रा अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। ब्रिटिश सम्राट की यह अमेरिका यात्रा पिछले दो दशकों में पहली है। ट्रंप से निजी मुलाकात वॉशिंगटन पहुंचने के बाद किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने राष्ट्रपति Donald Trump और प्रथम महिला Melania Trump से निजी मुलाकात की। ट्रंप लंबे समय से ब्रिटिश शाही परिवार के प्रशंसक रहे हैं। कार्यक्रम में क्या खास? अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे व्हाइट हाउस में भव्य राजकीय भोज न्यूयॉर्क में 9/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि वर्जीनिया में पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं का दौरा किंग चार्ल्स अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले इतिहास के केवल दूसरे ब्रिटिश सम्राट बनेंगे। सुरक्षा के बीच जारी दौरा हाल ही में White House Correspondents' Association Dinner में हुई गोलीबारी के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। Buckingham Palace ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ समीक्षा के बाद यात्रा को तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने का फैसला किया। ईरान मुद्दे पर तनाव ईरान को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हालिया मतभेदों ने इस यात्रा को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख पर सार्वजनिक नाराजगी जताई थी, हालांकि हाल के दिनों में उनके बयान कुछ नरम पड़े हैं। कैंसर उपचार के बीच सक्रियता 77 वर्षीय किंग चार्ल्स कैंसर का इलाज करा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने सार्वजनिक दायित्वों को निभा रहे हैं। "स्पेशल रिलेशनशिप" की परीक्षा ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार इस दौरे को अमेरिका और ब्रिटेन के बीच "स्पेशल रिलेशनशिप" को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
US execution chamber with electric chair, gas mask setup, and firing squad illustration
अमेरिका में फांसी के नए तरीके मंजूर, अब गोली, गैस और बिजली से होगी संघीय स्तर पर सजा-ए-मौत

ट्रंप प्रशासन ने बदली मृत्युदंड नीति United States में संघीय स्तर पर मृत्युदंड को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने अब फायरिंग स्क्वॉड, गैस एस्फिक्सिएशन और इलेक्ट्रोक्यूशन को भी फेडरल एक्जीक्यूशन के वैकल्पिक तरीकों में शामिल करने का निर्देश दिया है। न्याय विभाग ने जारी किया नया मेमो 48 पन्नों के आधिकारिक मेमो में कहा गया है कि इस कदम से मृत्युदंड प्रणाली और मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि इससे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगेगा, पीड़ितों को न्याय मिलेगा और उनके परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित संतोष प्राप्त होगा। United States Department of Justice ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव भविष्य में किसी एक विशेष दवा की अनुपलब्धता की स्थिति से निपटने के लिए भी जरूरी है। बाइडेन ने लगाई थी रोक पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden ने अपने कार्यकाल में अधिकांश संघीय फांसियों पर रोक लगा दी थी। पद छोड़ने से पहले उन्होंने 40 में से 37 संघीय मौत की सजा पाए कैदियों की सजा को कम कर दिया था। ट्रंप ने लौटते ही बदला फैसला राष्ट्रपति Donald Trump लंबे समय से मृत्युदंड के समर्थक रहे हैं। जनवरी 2025 में सत्ता में वापसी के पहले ही दिन उन्होंने न्याय विभाग को फिर से संघीय स्तर पर मृत्युदंड लागू करने का निर्देश दिया था। उनका आदेश विशेष रूप से आतंकवादियों, बच्चों के हत्यारों और पुलिसकर्मियों की हत्या करने वालों पर केंद्रित है। लीथल इंजेक्शन रहेगा मुख्य तरीका हालांकि, पेंटोबार्बिटल के जरिए लीथल इंजेक्शन अब भी प्राथमिक तरीका बना रहेगा। न्याय विभाग ने इसे "गोल्ड स्टैंडर्ड" बताया है। लेकिन दवा की उपलब्धता और इसकी मानवीयता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर Dick Durbin ने इस फैसले को क्रूर, अनैतिक और भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका के इतिहास पर एक काला धब्बा साबित होगा। कई राज्यों में पहले से लागू अमेरिका के कई राज्यों में पहले से वैकल्पिक मृत्युदंड के तरीके अपनाए जा रहे हैं। 2024 में Alabama नाइट्रोजन गैस से फांसी देने वाला पहला राज्य बना था। वहीं, पांच राज्यों में फायरिंग स्क्वॉड की व्यवस्था पहले से मौजूद है। यह फैसला अमेरिका में मृत्युदंड पर जारी बहस को और तेज कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Donald Trump facing political pressure after Iran conflict ceasefire amid resignation demands in US politics
ईरान जंग के बाद बढ़ा सियासी दबाव, ट्रंप से इस्तीफे की मांग तेज

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव और हालिया संघर्षविराम के बाद अब अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर विपक्षी दबाव तेजी से बढ़ रहा है, जहां 85 से अधिक सांसदों ने उनके इस्तीफे की मांग कर दी है। क्यों उठी इस्तीफे की मांग? रिपोर्ट्स के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों का आरोप है कि: ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर बार-बार अपनी रणनीति बदली उनकी भाषा और सार्वजनिक बयानबाजी पर सवाल उठे हालिया सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी विवाद बढ़ा सांसदों का कहना है कि इन परिस्थितियों में राष्ट्रपति की निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं। 40 दिन के युद्ध के बाद सीजफायर अमेरिका-ईरान के बीच करीब 40 दिन तक चले तनाव के बाद संघर्षविराम हुआ। हालांकि इस दौरान: अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा वैश्विक स्तर पर तेल और सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रही युद्ध खत्म होने के बाद भी अमेरिका के भीतर राजनीतिक माहौल शांत नहीं हुआ है। क्या है 25वां संशोधन? ट्रंप को हटाने के लिए अमेरिकी संविधान के 25वां संशोधन की चर्चा तेज हो गई है। इसकी धारा-4 के तहत: उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत राष्ट्रपति को “असमर्थ” घोषित कर सकते हैं इसके बाद उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बन सकता है अंतिम निर्णय के लिए कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है क्या सच में जा सकती है कुर्सी? विशेषज्ञों के अनुसार: सिर्फ 85 सांसदों की मांग से राष्ट्रपति को हटाना आसान नहीं है इसके लिए उपराष्ट्रपति और कैबिनेट का समर्थन जरूरी है साथ ही कांग्रेस में भारी बहुमत चाहिए इसलिए फिलहाल ट्रंप की कुर्सी पर तत्काल खतरा नहीं माना जा रहा, लेकिन राजनीतिक दबाव जरूर बढ़ गया है। आगे क्या? आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति में टकराव बढ़ सकता है अगर विपक्ष और मजबूत होता है, तो संवैधानिक प्रक्रिया तेज हो सकती है फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है 

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
अमेरिका में सनसनीखेज खुलासा: पाकिस्तानी कारोबारी ने कबूला – ईरान की गार्ड ने ट्रंप-बाइडेन की हत्या की साजिश में किया भर्ती

न्यूयॉर्क कोर्ट में गवाही, कहा– ‘परिवार को धमकी मिली, मजबूरी में माना काम’ अमेरिका की एक संघीय अदालत में चल रहे आतंकी साजिश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पाकिस्तान के एक कारोबारी ने दावा किया है कि उसे ईरान की अर्धसैनिक संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) के एक हैंडलर ने वर्ष 2024 में अमेरिका के शीर्ष नेताओं की हत्या की साजिश के लिए भर्ती किया था। आरोपी आसिफ मर्चेंट ने अदालत में कहा कि उसका परिवार खतरे में था और उसके पास इस काम को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। किन नेताओं को बनाया गया निशाना? अदालत में दी गई गवाही के अनुसार, साजिश के निशाने पर अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति Donald Trump, तत्कालीन राष्ट्रपति Joe Biden और पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत Nikki Haley थे। गौरतलब है कि आईआरजीसी को अमेरिका पहले ही “विदेशी आतंकी संगठन” घोषित कर चुका है। यह संगठन ईरान के सर्वोच्च नेता रहे Ayatollah Ali Khamenei के कार्यकाल में काफी प्रभावशाली बना। हाल ही में अमेरिका-इजराइल हमलों में खामेनेई की मौत की खबरों के बीच यह मामला और संवेदनशील हो गया है। अदालत में क्या बोला आरोपी? 47 वर्षीय आसिफ मर्चेंट ने न्यूयॉर्क की अदालत में उर्दू दुभाषिए के माध्यम से जूरी के सामने बयान दिया। उसने कहा, “मेरे परिवार को धमकी दी गई थी, इसलिए मुझे यह करना पड़ा।” मर्चेंट को 12 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उसने अदालत में यह भी दावा किया कि उसे पहले से अंदेशा था कि वह पकड़ा जाएगा और वह बाद में अमेरिकी एजेंसियों के साथ सहयोग करने की योजना बना चुका था। एफबीआई के अंडरकवर एजेंट बने ‘सुपारी किलर’ मर्चेंट ने खुद किसी नेता की हत्या करने की योजना नहीं बनाई थी, बल्कि वह कथित रूप से योजना तैयार करने और गतिविधियों की जानकारी जुटाने का काम कर रहा था। उसने ट्रंप की रैलियों और उनकी आवाजाही की जानकारी जुटाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसने दो ‘सुपारी किलर’ तय किए थे और उन्हें 5,000 डॉलर देने की व्यवस्था भी की थी। लेकिन जिन लोगों को वह हत्यारा समझ रहा था, वे वास्तव में Federal Bureau of Investigation (एफबीआई) के अंडरकवर एजेंट निकले। इसी वजह से पूरी साजिश नाकाम हो गई। अभियोजन पक्ष का तर्क सरकारी वकील नीना गुप्ता ने जिरह के दौरान मर्चेंट से सीधे सवाल किया कि क्या वह अमेरिका किसी राजनेता की हत्या के लिए माफिया से संपर्क करने आया था। इस पर मर्चेंट ने “हां” में जवाब दिया। हालांकि अभियोजन पक्ष का कहना है कि अगर मर्चेंट सचमुच मजबूर था, तो उसने गिरफ्तारी से पहले कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क क्यों नहीं किया। इस पर आरोपी ने कहा कि उसे लगा एजेंसियां उसकी बात पर विश्वास नहीं करेंगी, क्योंकि उन्हें शक था कि वह “कोई सुपर जासूस” है। दो देशों में परिवार, लंबा कारोबारी करियर अदालत में बताया गया कि मर्चेंट का पाकिस्तान में 20 साल का बैंकिंग करियर रहा है। वह कपड़ा कारोबार, कार बिक्री, केला निर्यात और इंसुलेशन आयात जैसे कई व्यवसायों से जुड़ा रहा है। उसके दो परिवार हैं-एक पाकिस्तान में और दूसरा ईरान में। मर्चेंट का दावा है कि ईरान में उसके परिवार को खतरे में डालकर उस पर दबाव बनाया गया। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी गंभीरता यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। मध्य पूर्व के कई देशों में हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरें आ रही हैं। ऐसे में यह साजिश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकती है।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0