Asaduddin Owaisi

Asaduddin Owaisi reacts to Bhojshala High Court verdict comparing it with Babri Masjid case
भोजशाला फैसले पर ओवैसी ने उठाए सवाल, बोले- ‘यह बाबरी मस्जिद केस जैसा फैसला’

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। Asaduddin Owaisi ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसकी तुलना बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद से की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और इससे भविष्य में नए धार्मिक विवाद पैदा हो सकते हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया था। अदालत ने परिसर को राजा भोज से जुड़ा स्थल भी माना है। ‘एक धर्म को प्राथमिकता दी गई’ हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने कहा कि भोजशाला पर आया फैसला बाबरी मस्जिद मामले में दिए गए निर्णय की तरह दिखाई देता है। उन्होंने कहा, “यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में भी एक धर्म को प्राथमिकता दी गई थी, जबकि दूसरे समुदाय के पूजा के अधिकार कमजोर कर दिए गए थे।” ओवैसी ने आगे कहा कि ऐसे फैसलों से भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता को चुनौती देने का रास्ता खुल सकता है। प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का किया जिक्र ओवैसी ने न्यायपालिका के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) से जोड़ चुका है, लेकिन अब उसी सिद्धांत को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक बना दिया गया है।” ‘बाबरी मस्जिद केस जैसा साबित हुआ फैसला’ ओवैसी ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले का फैसला भविष्य में ऐसे कई विवादों का आधार बन सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि बाबरी मस्जिद पर फैसला केवल आस्था के आधार पर दिया गया था। उस समय मैंने कहा था कि इससे आगे कई विवाद खड़े होंगे और आज वही हो रहा है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष लंबे समय से वहां नमाज अदा करता रहा है। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने के दिए संकेत इस बीच Khalid Rashid Firangi Mahli ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय में निराशा जरूर है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास ऐतिहासिक दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भोजशाला विवाद को बाबरी मस्जिद मामले से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को दिया पूजा का अधिकार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को भी आंशिक रूप से निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। हिंदू पक्ष के वकील Vishnu Shankar Jain ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब परिसर में केवल हिंदू पूजा होगी और स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार के पास रहेगी। क्या है भोजशाला विवाद? धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्षों से यह मामला अदालत में लंबित था।  

surbhi मई 16, 2026 0
Mamata Banerjee addressing a rally amid discussions on Muslim voter dynamics in West Bengal elections
बंगाल चुनाव 2026: क्या ममता बनर्जी से दूर हो रहा मुस्लिम वोट बैंक? 160 सीटों का बड़ा समीकरण

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ‘मुस्लिम वोट बैंक’ को सत्ता की चाबी माना जा रहा है, लेकिन इस बार यह समीकरण तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, 2011 से लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़ा यह वोट बैंक अब बदलते संकेत दे रहा है। सागरदीघी उपचुनाव: पहला बड़ा संकेत मुस्लिम बहुल सागरदीघी सीट पर TMC की हार को एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। करीब 64% मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर कांग्रेस की जीत ने यह संकेत दिया कि अल्पसंख्यक मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि बाद में विजेता विधायक को TMC में शामिल करा लिया गया, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ था—वोटर अब एकतरफा नहीं रहे। पड़ोसी राज्यों का असर बंगाल के सीमावर्ती राज्यों के चुनावी रुझान भी असर डाल रहे हैं: बिहार (सीमांचल): किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, अररिया में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पारंपरिक समीकरण बदले असम (धुबरी मॉडल): AIUDF के बदरुद्दीन अजमल की हार और कांग्रेस की जीत से संकेत मिला कि मुस्लिम वोट ‘विजयी विकल्प’ की ओर शिफ्ट हो सकता है महाराष्ट्र (मालेगांव): यहां भी मुस्लिम वोटों का बंटवारा देखने को मिला इन रुझानों ने बंगाल में TMC की चिंता बढ़ा दी है। 160 सीटों का बड़ा गणित पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से लगभग 160 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कुछ प्रमुख जिलों का समीकरण: मुर्शिदाबाद (66% मुस्लिम आबादी) मालदा (51%) उत्तर दिनाजपुर (करीब 50%) बीरभूम उत्तर 24 परगना 2021 में TMC ने इन इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2026 में मुकाबला कड़ा दिख रहा है। कांग्रेस और ओवैसी फैक्टर TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और AIMIM का उभार है। मालदा में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती दिख रही है असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से मुस्लिम वोटों में बंटवारे की आशंका हुमायूं कबीर जैसे स्थानीय नेताओं के साथ नए समीकरण बन रहे हैं इससे खासकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की करीब 49 सीटों पर TMC की स्थिति कमजोर हो सकती है। BJP की बढ़ती चुनौती दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। 2014 में 17% वोट से बढ़कर अब 278 सीटों पर सीधी टक्कर महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर आक्रामक रणनीति अमित शाह का “महिला सुरक्षा” फोकस यह TMC के लिए दोहरी चुनौती बन गया है—एक तरफ वोट बैंक में संभावित सेंध, दूसरी तरफ भाजपा का विस्तार। क्या है TMC की चिंता? मुस्लिम वोटों का बंटवारा कांग्रेस और AIMIM का उभार पड़ोसी राज्यों के बदले रुझान भाजपा की आक्रामक रणनीति

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Asaduddin Owaisi addressing a rally after AIMIM announced contesting West Bengal elections independently.
AIMIM ने तोड़ा गठबंधन, बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी

West Bengal Elections 2026: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) से गठबंधन तोड़ दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अब अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। क्यों टूटा गठबंधन? AIMIM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि: हुमायूं कबीर के बयान पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाते ऐसे बयानों से मुस्लिम समुदाय की छवि पर सवाल उठते हैं पार्टी ने कहा कि वह किसी भी विवादित या समुदाय को नुकसान पहुंचाने वाले बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती। बंगाल में अकेले लड़ने का ऐलान AIMIM ने स्पष्ट किया: अब किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ा जाएगा पार्टी ने यह भी कहा कि बंगाल के मुसलमान आज भी सबसे गरीब और उपेक्षित वर्गों में हैं, और उनके लिए ठोस काम नहीं हुआ है। कौन हैं हुमायूं कबीर? पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता दिसंबर में पार्टी से निष्कासित इसके बाद बनाई जनता उन्नयन पार्टी हाल ही में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर मस्जिद की नींव रखने को लेकर चर्चा में विवादों में कबीर TMC ने एक वीडियो साझा कर दावा किया कि हुमायूं कबीर ने कथित तौर पर अल्पसंख्यकों को गुमराह करने के लिए BJP से पैसे लेने की बात कही हालांकि: BJP ने इस वीडियो से पल्ला झाड़ लिया हुमायूं कबीर ने भी सफाई देते हुए आरोपों को खारिज किया चुनाव की तारीखें 23 और 29 अप्रैल: मतदान 4 मई: नतीजे

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Priyanka Gandhi attacks BJP in Assam rally as H.S. Phoolka joins BJP amid 2026 state elections.
Assembly Elections 2026 Live: प्रियंका गांधी का BJP पर बड़ा हमला, फूलका भाजपा में शामिल

पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी रैलियों से लेकर दल-बदल तक, कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रियंका गांधी का हमला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने असम के शिवसागर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मोदी जी अमेरिका के गुलाम हैं… और असम के मुख्यमंत्री उनके गुलाम हैं।” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डर और दबाव की राजनीति कर रही है और इससे देश को नुकसान हो रहा है।   ओवैसी का मुर्शिदाबाद में बयान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि:   अगर जनता का अपना नेता नहीं होगा, तो उनकी आवाज दबा दी जाएगी ममता बनर्जी और मोदी सरकार पर एक जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया   उन्होंने लोगों से अपनी “स्वतंत्र लीडरशिप” चुनने की अपील की।   बड़ा राजनीतिक बदलाव   वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता एच. एस. फूलका बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। फूलका 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं 2014 में AAP में शामिल हुए थे, 2019 में पार्टी छोड़ दी थी   महाराष्ट्र उपचुनाव अपडेट   भाजपा ने महाराष्ट्र के राहुरी विधानसभा उपचुनाव के लिए अक्षय शिवाजीराव कर्डिले को उम्मीदवार घोषित किया है   अहम तारीखें:   नामांकन की अंतिम तारीख:6 अप्रैल जांच:7 अप्रैल नाम वापसी:9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल मतगणना: 4 मई   यह सीट ग्रामीण और कृषि प्रधान है, जहां मराठा, ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं।   चुनावी माहौल गरम   देश के पांच राज्यों में चुनाव के बीच:   नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज दल-बदल की राजनीति जारी क्षेत्रीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Asaduddin Owaisi addressing press with political leaders amid Bengal election alliance announcement
बंगाल चुनाव में AIMIM की एंट्री, भाजपा का तंज-‘ओवैसी घुसने की कोशिश में’; ओवैसी बोले- देंगे नया विकल्प

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पूर्व टीएमसी नेता हुमांयु कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया है। बुधवार को दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। भाजपा का हमला इस गठबंधन पर भाजपा नेता दिलीप घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “ओवैसी लंबे समय से बंगाल में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। कई पार्टियां अन्य राज्यों में सफल रही हैं, लेकिन बंगाल के लोग किसी को आसानी से स्वीकार नहीं करते। यहां काम करना पड़ता है, संघर्ष करना पड़ता है, तभी जनता अपनाती है।” ओवैसी का जवाब भाजपा के आरोपों पर ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा, “बंगाल के लोगों का यहां दम घुट रहा है। उन्हें एक नए विकल्प की जरूरत है और हम उन्हें वही विकल्प देने आए हैं।” उन्होंने दावा किया कि उनका गठबंधन राज्य में बदलाव की राजनीति को आगे बढ़ाएगा और जनता को नया विकल्प देगा। चुनावी समीकरण पर असर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIMIM और आम जनता उन्नयन पार्टी का गठबंधन कुछ सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है, जिसका असर सीधे तौर पर सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा दोनों पर पड़ सकता है। तमिलनाडु में चुनाव बहिष्कार का ऐलान इधर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के थिरुप्पराईथुराई गांव में 50 से ज्यादा परिवारों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले 16 साल से बुनियादी सुविधाओं-बिजली, पानी और शौचालय-के बिना जीवन बिता रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए इस बार उन्होंने वोट न देने का फैसला किया है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Tejashwi Yadav amid Bihar Rajya Sabha fifth seat battle.
राज्यसभा चुनाव: बिहार में 5वीं सीट पर सियासी शह-मात तेज, तेजस्वी से मिले AIMIM नेता, आज NDA की अहम बैठक

  बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में बुधवार को AIMIM विधायक दल के नेता अख्तरुल ईमान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख असादुदीन ओवैसी के स्तर पर लिया जाएगा. वहीं दूसरी ओर गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर NDA विधायकों की अहम बैठक होने वाली है, जिसमें राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर रणनीति तय किए जाने की संभावना है.   5वीं सीट पर दिलचस्प राजनीतिक गणित बिहार विधानसभा में राज्यसभा की इस सीट को जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं. ऐसे में उसे उम्मीद है कि AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक का समर्थन मिलने पर उसके उम्मीदवार की जीत का रास्ता साफ हो सकता है. इसी कारण इस सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को साधने में लगे हुए हैं.   तेजस्वी से मुलाकात के बाद ‘पॉजिटिव’ संकेत तेजस्वी यादव के बुलावे पर उनके आवास पहुंचे अख्तरुल ईमान ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है और इसी दिशा में बातचीत आगे बढ़ी है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समर्थन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और असदुद्दीन ओवैसी के स्तर पर लिया जाएगा.   इफ्तार डिप्लोमेसी से बढ़ेगी सियासी नजदीकी सियासी रिश्तों को मजबूत करने के लिए तेजस्वी यादव ने इफ्तार डिप्लोमेसी का सहारा लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह 15 मार्च को अख्तरुल ईमान की इफ्तार पार्टी में शामिल होंगे। इसे AIMIM को साधने की बड़ी राजनीतिक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.   NDA की रणनीति पर टिकी नजर उधर NDA भी इस सीट को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर होने वाली बैठक में सभी NDA विधायकों को बुलाया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में पांचवीं सीट को लेकर अंतिम रणनीति तय की जाएगी. इस बीच RJD और महागठबंधन के नेताओं ने अपने उम्मीदवार की जीत का भरोसा जताया है, जिससे बिहार की राजनीति में इस सीट को लेकर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है.  

surbhi मार्च 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0