असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच इस बार एक नया राजनीतिक प्रयोग चर्चा में है– Jharkhand Mukti Morcha (JMM) की एंट्री। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी ने पहली बार असम में चुनाव लड़कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। ‘एकला चलो’ रणनीति पर JMM कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत असफल रहने के बाद Hemant Soren ने ‘एकला चलो रे’ की रणनीति अपनाई। पार्टी ने शुरुआत में 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई थी, लेकिन नामांकन के दौरान तकनीकी कारणों से 5 उम्मीदवारों के पर्चे रद्द हो गए। इसके बाद अब 16 सीटों पर JMM के उम्मीदवार मैदान में हैं। चाय जनजाति और ST दर्जा– सबसे बड़ा चुनावी दांव JMM ने असम के करीब 70 लाख चाय बागान श्रमिकों (चाय जनजाति) को अपना मुख्य वोट बैंक बनाने की कोशिश की है। ये समुदाय मूल रूप से झारखंड और छोटानागपुर क्षेत्र से जुड़े हैं। चुनाव प्रचार के दौरान Hemant Soren ने इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। पार्टी को उम्मीद है कि यह भावनात्मक और सामाजिक मुद्दा उसे असम में मजबूत पकड़ बनाने में मदद करेगा। नामांकन में झटका, फिर भी उम्मीद कायम JMM को बोकाजान सीट पर बड़ा झटका लगा, जहां उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया। इसके बावजूद पार्टी ने कई सीटों पर मजबूत चेहरे उतारे हैं, जिनमें: सोनारी: बलदेव तेली चबुआ: भुबेन मुरारी डुमडुमा: रत्नाकर तांती डिगबोई: भरत नायक तिंगखोंग: महाबीर बास्के नहरकटिया: संजय बाघ माकुम: मुना कर्माकर मजबत: प्रीति रेखा बारला इन सीटों पर चाय बागान श्रमिकों और झारखंडी मूल के मतदाताओं की अच्छी संख्या है, जिससे JMM को उम्मीदें हैं। क्या बनेगा ‘किंगमेकर’? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM भले ही सीधे सत्ता की दौड़ में न हो, लेकिन कुछ सीटें जीतकर ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है। अगर चुनाव परिणाम त्रिशंकु विधानसभा की ओर जाते हैं, तो JMM की भूमिका अहम हो सकती है। राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में बड़ा कदम यह चुनाव JMM के लिए सिर्फ सीटें जीतने का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका भी है। अगर पार्टी असम में प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है, तो पूर्वोत्तर भारत में उसके विस्तार का रास्ता खुल सकता है।
गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक अनोखी और भावुक खबर सामने आई है। राज्य के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के प्रति लोगों के प्यार ने उन्हें चुनावी दस्तावेजों में भी “अमर” बना दिया है। वोटर लिस्ट में ‘जिंदा’ रहे जुबीन गर्ग गुवाहाटी की दिसपुर विधानसभा सीट के एक मतदान केंद्र पर मतदाता सूची में जुबीन गर्ग का नाम अब भी मौजूद SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बावजूद नाम नहीं हटाया गया BLO ने लिख दिया-‘अमर रहें’ मतदाता सूची अपडेट के दौरान जब नाम हटाने की बारी आई संबंधित BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) भावुक हो गए नाम काटने की जगह लिख दिया-“जुबीन गर्ग अमर रहें” इस मानवीय पहल की हर तरफ सराहना हो रही है पोलिंग बूथ पर दिखा सम्मान मतदान केंद्र के बाहर जुबीन गर्ग की तस्वीर लगाई गई फैंस और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी यह बूथ चर्चा का केंद्र बन गया असम चुनाव 2026: बड़े चेहरे मैदान में राज्य की 126 सीटों पर वोटिंग जारी है और करीब 2.5 करोड़ मतदाता 722 उम्मीदवारों की किस्मत तय कर रहे हैं। प्रमुख उम्मीदवार हिमंता बिस्वा सरमा (जालुकबाड़ी) गौरव गोगोई (जोरहाट) बदरुद्दीन अजमल (बिन्नाकांडी) अखिल गोगोई (सिबसागर) लुरिनज्योति गोगोई (खोवांग) अतुल बोरा (बोकाखाट)
गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज (9 अप्रैल) सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए हो रहे इस चुनाव में खराब मौसम के बावजूद मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बारिश के बीच भी वोटिंग का जोश कई इलाकों में भारी बारिश के बावजूद लोग वोट डालने निकल रहे पोलिंग स्टेशन के बाहर लंबी-लंबी कतारें मतदाता लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे चुनाव की बड़ी बातें कुल 126 सीटों पर एक ही चरण में मतदान 722 उम्मीदवार मैदान में 2.50 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र 1.25 करोड़ महिलाएं 318 थर्ड जेंडर मतदाता 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्य मुकाबला बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधी टक्कर बीजेपी तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में कांग्रेस 2016 के बाद फिर से सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में बड़े उम्मीदवार मैदान में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल नेता अखिल गोगोई AJP के लुरिनज्योति गोगोई नेताओं की अपील हिमंता बिस्वा सरमा वोट डालने के लिए घर से निकले प्रियंका गांधी ने लोगों से अपील की- “अपने राज्य, जमीन और भविष्य के लिए वोट करें” पोलिंग बूथ पर खास इंतजाम मेडिकल सुविधा उपलब्ध शिशुओं के लिए पालना और स्तनपान कक्ष दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर इमरजेंसी के लिए एम्बुलेंस तैनात
दिसपुर, एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने बुधवार को असम के चबुआ विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर पार्टी प्रत्याशी भूबेन मुरारी के समर्थन में जोरदार प्रचार अभियान चलाया। उनके दौरे ने इलाके में चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। कल्पना सोरेन और जोबा माझी प्रचार के दौरान कल्पना सोरेन के साथ सांसद जोबा माझी भी मौजूद रहीं। दोनों नेताओं ने चबुआ के चाय बागान क्षेत्रों का दौरा किया और वहां काम कर रहे मजदूरों से सीधे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मजदूरों की रोजमर्रा की परेशानियों को करीब से समझने की कोशिश की। मजदूरों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखीं। इनमें कम मजदूरी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, खराब आवास व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का अभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। कल्पना सोरेन ने कहा कल्पना सोरेन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि झामुमो सिर्फ चुनावी वादों की राजनीति नहीं करती, बल्कि जमीन से जुड़े मुद्दों को उठाने में विश्वास रखती है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे भूबेन मुरारी को भारी मतों से जीताकर विधानसभा भेजें, ताकि क्षेत्र के विकास और मजदूर वर्ग की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित हो सके।इस मौके पर झामुमो नेताओं ने यह भी साफ किया कि पार्टी असम में स्थानीय और जनजीवन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। खासकर चाय बागान मजदूरों, गरीब तबकों और वंचित समुदायों के अधिकारों को लेकर पार्टी अपनी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। कल्पना सोरेन और जोबा माझी के इस दौरे से साफ है कि झामुमो असम चुनाव में भी ग्राउंड कनेक्ट बनाने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के दौरे के साथ चुनाव प्रचार और तेज होने की संभावना है।
दिसपुर,एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बुधवार को एक अलग और सहज अंदाज देखने को मिला। जनसभाओं से पहले वे अचानक डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान पहुंचे, जहां उन्होंने महिला श्रमिकों के साथ मिलकर चाय की पत्तियां तोड़ीं और उनसे बातचीत की। हाथों में टोकरी और चेहरे पर मुस्कान के साथ उनकी तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। इस दौरे को चुनावी माहौल के बीच एक प्रतीकात्मक और जनसंपर्क वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। महिला श्रमिकों से की बातचीत, बागान में बिताया समय प्रधानमंत्री ने चाय बागान में कुछ समय रुककर वहां काम कर रही महिलाओं से बातचीत की और उनके कामकाज को करीब से देखा। असम की पहचान चाय उद्योग से जुड़ी रही है, ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह देखा गया। आज असम में दो बड़ी चुनावी रैलियां चाय बागान दौरे के बाद पीएम मोदी का असम में चुनावी कार्यक्रम भी काफी व्यस्त है। वे पहले धेमाजी के गोगामुख में एक रैली को संबोधित करेंगे। इसके बाद उनका विश्वनाथ जिले में दोपहर करीब एक बजे जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। इन रैलियों के जरिए भाजपा चुनावी माहौल को और धार देने की कोशिश में है। भाजपा उम्मीदवारों के लिए करेंगे प्रचार पीएम मोदी की पहली रैली में रानोज पेगू और नबा कुमार डोले के समर्थन में प्रचार किया जाएगा। वहीं दूसरी सभा में वे पल्लब लोचन दास के लिए जनसमर्थन जुटाएंगे। असम चुनाव में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, और प्रधानमंत्री का यह दौरा उसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। तस्वीरों ने खींचा लोगों का ध्यान राजनीतिक भाषणों से अलग चाय बागान में पीएम मोदी की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचा है। चुनावी मौसम में यह विजुअल अपील भाजपा के लिए जनसंपर्क का मजबूत संदेश भी माना जा रहा है।
गुवाहाटी, 31 मार्च 2026: आगामी चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम के लिए 31 बड़े चुनावी वादों का ऐलान किया है। इस घोषणापत्र में सुरक्षा, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं पर खास जोर दिया गया है। पार्टी ने अवैध घुसपैठ पर सख्ती, समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने और ‘लव जिहाद’ व ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ मजबूत कानून बनाने का वादा किया है। सुरक्षा और कानून पर सख्त रुख राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कहा कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जमीन से जुड़े मामलों में सख्त नीति अपनाई जाएगी। इसके साथ ही UCC लागू करने और विवादित मुद्दों पर कानून लाने का भी ऐलान किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर में 5 लाख करोड़ निवेश भाजपा ने असम में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े निवेश का वादा किया है। करीब 5 लाख करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश 18,000 करोड़ रुपये से बाढ़ नियंत्रण योजना (पहले 2 साल में) रोजगार और शिक्षा पर बड़ा फोकस घोषणापत्र में युवाओं के लिए बड़े वादे किए गए हैं: 10 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य हर जिले में यूनिवर्सिटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज महिलाओं और गरीबों के लिए योजनाएं 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य Orunodoi Scheme के तहत महिलाओं को करीब ₹3,000 सहायता गरीब परिवारों को मुफ्त आवश्यक वस्तुएं चाय बागान मजदूरों के लिए बड़े वादे असम की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले चाय बागान श्रमिकों के लिए भी कई घोषणाएं की गईं: सभी मजदूरों को भूमि पट्टा मजदूरी बढ़ाकर ₹500 प्रतिदिन करने का लक्ष्य आवास योजनाओं का विस्तार क्या है राजनीतिक संदेश? भाजपा का यह घोषणापत्र स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी विकास के साथ-साथ सुरक्षा और पहचान की राजनीति को भी चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दे रही है। हालांकि, विपक्ष ने इन वादों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और तेज होने के संकेत हैं।
असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी तस्वीर अब साफ होती नजर आ रही है। झारखंड में साथ मिलकर सरकार चला रहे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब असम में आमने-सामने होंगे। लंबे समय से जारी सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने के बाद झामुमो ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ सम्मानजनक समझौता नहीं हो सका, इसलिए अब झामुमो 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा, जबकि एक सीट वाम दलों के लिए छोड़ी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन पाई। दिल्ली से रांची तक चली बातचीत, लेकिन नहीं बनी बात झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद दिल्ली जाकर कांग्रेस नेतृत्व से मिले थे। वहीं असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई रांची पहुंचकर वार्ता कर चुके थे। इसके बावजूद सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस झामुमो को पांच से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं थी, जबकि झामुमो ज्यादा हिस्सेदारी चाहता था। आदिवासी और टी-ट्राइब वोट पर झामुमो की नजर असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। झामुमो अपनी रणनीति इन्हीं सीटों पर केंद्रित कर रहा है। पार्टी का मानना है कि झारखंड में आदिवासी राजनीति का अनुभव असम में भी असर दिखा सकता है। साथ ही, चाय बागान (टी-ट्राइब) समुदाय को साधने की भी कोशिश की जा रही है, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ‘तीर-कमान’ के साथ चुनावी मैदान में निर्वाचन आयोग से झामुमो को असम में भी उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ मिल चुका है। फिलहाल राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। झामुमो नेताओं का दावा है कि वे इस चुनाव में मजबूती से उतरेंगे और असम की राजनीति में अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।