Assam News

Assam elections 2026
असम में BJP की मजबूत बढ़त, शुरुआती रुझानों में NDA आगे

दिसपुर, एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने मजबूत बढ़त बना ली है। 126 सीटों पर जारी गिनती में BJP 47 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 13 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके अलावा Bodoland People's Front 7, Asom Gana Parishad 6, Assam Jatiya Parishad 3 और All India United Democratic Front 1 सीट पर आगे है। इन आंकड़ों से NDA गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही है।   जोरहाट सीट पर हाई-वोल्टेज मुकाबला राज्य की चर्चित सीट जोरहाट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां BJP उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी शुरुआती राउंड में आगे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस के Gaurav Gogoi पीछे हैं। हालांकि कई राउंड की गिनती अभी बाकी है, जिससे मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ है।   दिग्गज नेताओं की साख दांव पर इस चुनाव में कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, जिनमें मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, गौरव गोगोई, Akhil Gogoi और Badruddin Ajmal शामिल हैं। सभी की नजरें अब अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।   उच्च मतदान ने बढ़ाई दिलचस्पी इस बार असम में करीब 85.96% मतदान दर्ज किया गया, जो काफी अधिक माना जा रहा है। खासकर महिला वोटरों की भागीदारी ने चुनाव को और रोचक बना दिया है।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Assam Elections 2026
असम चुनाव 2026: चाय जनजातियों का 'ST दर्जा' कार्ड, क्या असम फतह कर पाएंगे JMM के 16 सूरमा?

दिसपुर, एजेंसियां। JMM  ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में पहली बार दमदार एंट्री करते हुए मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत विफल होने के बाद मुख्यमंत्री Hemant Soren ने ‘एकला चलो’ की रणनीति अपनाई। पार्टी ने शुरुआत में 21 सीटों पर दावेदारी की थी, लेकिन तकनीकी कारणों से 5 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द हो गए। अब JMM के 16 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।   चाय जनजातियों पर टिकी उम्मीदें JMM ने असम में करीब 70 लाख चाय बागान श्रमिकों यानी ‘चाय जनजातियों’ को अपना मुख्य वोट बैंक बनाने की कोशिश की है। ये समुदाय मूल रूप से झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र से जुड़ा माना जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन ने इन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, जिससे पार्टी को भावनात्मक समर्थन मिलने की उम्मीद है।   नामांकन में झटके, फिर भी मजबूत दावेदारी नामांकन प्रक्रिया के दौरान बोकाजान सीट पर प्रत्याशी प्रताप सिंह रोंगफर का पर्चा रद्द होना पार्टी के लिए बड़ा झटका रहा। इसके बावजूद सोनारी से बलदेव तेली, चबुआ से भुबेन मुरारी और डुमडुमा से रत्नाकर तांती जैसे उम्मीदवारों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। इन क्षेत्रों में झारखंडी मूल के मतदाताओं की अच्छी संख्या है।   राष्ट्रीय विस्तार की ओर बड़ा कदम राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव JMM के लिए केवल सीट जीतने का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का मौका है। अगर पार्टी चाय बागान क्षेत्रों में प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है, तो पूर्वोत्तर में उसकी पकड़ मजबूत हो सकती है।

Anjali Kumari मई 4, 2026 0
Police investigation at Assam village after shocking murder case involving daughter and mother crime scene
असम में सनसनी: 19 वर्षीय बेटी ने मां की हत्या की, रातभर कटा सिर लेकर घूमती रही

असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 19 वर्षीय एक युवती ने कथित तौर पर अपनी मां की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसने अपनी मां का सिर धड़ से अलग कर दिया और पूरी रात उसे अपने साथ रखा। इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मां की हत्या, पिता और बहन पर भी हमला यह घटना डेरामुख लालुंग गांव की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूजा मलंग ने धारदार हथियार 'दाओ' से अपनी 42 वर्षीय मां अनुमाई मलंग पर हमला किया। हमले में मां की मौके पर ही मौत हो गई। जब पिता प्रेमेंद्र मलंग और बहन ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो पूजा ने उन पर भी हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। कटा सिर लेकर रातभर रही फरार हत्या के बाद पूजा अपनी मां का कटा हुआ सिर लेकर मौके से फरार हो गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की तलाश के बाद उसे अगली सुबह गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय भी उसके पास कटा हुआ सिर मौजूद था, जिससे हर कोई स्तब्ध रह गया। काला जादू और नशे के एंगल से जांच स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों ने काला जादू से जुड़े होने की आशंका जताई है, जबकि कुछ का मानना है कि युवती नशे के प्रभाव में हो सकती थी। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूजा सामग्री और हथियार बरामद पुलिस ने आरोपी के पास से एक हंसिया, कैंची, तेल, सिंदूर और मिट्टी का बर्तन समेत पूजा-पाठ से जुड़ी कई वस्तुएं बरामद की हैं। इन बरामद सामानों के आधार पर पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। हत्या के कारणों की तलाश जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार में पहले किसी विवाद की जानकारी नहीं मिली थी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ हत्या और घातक हथियार से हमला करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Portrait of Assamese singer Zubeen Garg displayed at polling booth during Assam Elections 2026.
Assam Election 2026: ‘जुबीन गर्ग अमर रहें’-वोटर लिस्ट में नाम बरकरार, भावनाओं ने जीता दिल

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक अनोखी और भावुक खबर सामने आई है। राज्य के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के प्रति लोगों के प्यार ने उन्हें चुनावी दस्तावेजों में भी “अमर” बना दिया है। वोटर लिस्ट में ‘जिंदा’ रहे जुबीन गर्ग गुवाहाटी की दिसपुर विधानसभा सीट के एक मतदान केंद्र पर मतदाता सूची में जुबीन गर्ग का नाम अब भी मौजूद SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बावजूद नाम नहीं हटाया गया BLO ने लिख दिया-‘अमर रहें’ मतदाता सूची अपडेट के दौरान जब नाम हटाने की बारी आई संबंधित BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) भावुक हो गए नाम काटने की जगह लिख दिया-“जुबीन गर्ग अमर रहें” इस मानवीय पहल की हर तरफ सराहना हो रही है पोलिंग बूथ पर दिखा सम्मान मतदान केंद्र के बाहर जुबीन गर्ग की तस्वीर लगाई गई फैंस और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी यह बूथ चर्चा का केंद्र बन गया असम चुनाव 2026: बड़े चेहरे मैदान में राज्य की 126 सीटों पर वोटिंग जारी है और करीब 2.5 करोड़ मतदाता 722 उम्मीदवारों की किस्मत तय कर रहे हैं। प्रमुख उम्मीदवार हिमंता बिस्वा सरमा (जालुकबाड़ी) गौरव गोगोई (जोरहाट) बदरुद्दीन अजमल (बिन्नाकांडी) अखिल गोगोई (सिबसागर) लुरिनज्योति गोगोई (खोवांग) अतुल बोरा (बोकाखाट)

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
चाय बागान में महिला श्रमिकों के साथ चाय पत्तियां तोड़ते पीएम नरेंद्र मोदी
चाय बागान में दिखा पीएम मोदी का अलग अंदाज, चुनावी प्रचार से पहले महिलाओं संग तोड़ीं पत्तियां

दिसपुर,एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  का बुधवार को एक अलग और सहज अंदाज देखने को मिला। जनसभाओं से पहले वे अचानक डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान पहुंचे, जहां उन्होंने महिला श्रमिकों के साथ मिलकर चाय की पत्तियां तोड़ीं और उनसे बातचीत की। हाथों में टोकरी और चेहरे पर मुस्कान के साथ उनकी तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। इस दौरे को चुनावी माहौल के बीच एक प्रतीकात्मक और जनसंपर्क वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।   महिला श्रमिकों से की बातचीत, बागान में बिताया समय प्रधानमंत्री ने चाय बागान में कुछ समय रुककर वहां काम कर रही महिलाओं से बातचीत की और उनके कामकाज को करीब से देखा। असम की पहचान चाय उद्योग से जुड़ी रही है, ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह देखा गया।   आज असम में दो बड़ी चुनावी रैलियां चाय बागान दौरे के बाद पीएम मोदी का असम में चुनावी कार्यक्रम भी काफी व्यस्त है। वे पहले धेमाजी के गोगामुख में एक रैली को संबोधित करेंगे। इसके बाद उनका विश्वनाथ जिले में दोपहर करीब एक बजे जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। इन रैलियों के जरिए भाजपा चुनावी माहौल को और धार देने की कोशिश में है।   भाजपा उम्मीदवारों के लिए करेंगे प्रचार पीएम मोदी की पहली रैली में रानोज पेगू और नबा कुमार डोले के समर्थन में प्रचार किया जाएगा। वहीं दूसरी सभा में वे पल्लब लोचन दास के लिए जनसमर्थन जुटाएंगे। असम चुनाव में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, और प्रधानमंत्री का यह दौरा उसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।   तस्वीरों ने खींचा लोगों का ध्यान राजनीतिक भाषणों से अलग चाय बागान में पीएम मोदी की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचा है। चुनावी मौसम में यह विजुअल अपील भाजपा के लिए जनसंपर्क का मजबूत संदेश भी माना जा रहा है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addressing a public rally during development projects launch in Silchar, Assam.
असम दौरे पर PM मोदी का कांग्रेस पर हमला, बोले- युवाओं को गुमराह कर हिंसा की ओर धकेला; BJP ने विकास और नौकरियों के रास्ते खोले

  असम: प्रधानमंत्री Narendra Modi के असम दौरे का शनिवार को दूसरा दिन है। PM सुबह Silchar पहुंचे, जहां उन्होंने करीब ₹23,550 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। अपने संबोधन में उन्होंने असम के विकास, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। PM मोदी ने कहा कि सिलचर को बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है, जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर एक अनोखी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यहां बांग्ला, असमिया और विभिन्न जनजातीय परंपराओं की आवाज सुनाई देती है और यही विविधता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है।   कांग्रेस पर तीखा हमला प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि Indian National Congress ने लंबे समय तक असम और नॉर्थ ईस्ट को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों ने यहां के युवाओं को गुमराह किया और उन्हें हिंसा व आतंकवाद के रास्ते पर धकेल दिया। PM ने कहा कि भाजपा की सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों, स्कॉलरशिप और कौशल विकास के नए अवसर खोले हैं। उनके मुताबिक, आज असम विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है और भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी अहम भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।   “कांग्रेस झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री चला रही” प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सोशल मीडिया के जरिए गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने “झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री” खोल रखी है। उन्होंने युवाओं से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि कांग्रेस के पास देश के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं है।   नॉर्थ ईस्ट को मिला नया कनेक्शन मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से दूर रखा था, लेकिन भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से मजबूती से जोड़ा है। उनके मुताबिक आज नॉर्थ ईस्ट दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला सेतु बनता जा रहा है।   किसानों और चाय बागान श्रमिकों का जिक्र प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के विकास में किसानों और चाय बागान श्रमिकों का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत असम के किसानों को अब तक हजारों करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि चाय बागानों में काम करने वाले हजारों परिवारों को भूमि अधिकार देकर उन्हें सुरक्षा और सम्मान देने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।   बराक वैली बनेगी विकास का नया केंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले समय में बराक वैली केवल कृषि उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि कृषि शिक्षा और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। यहां नए एग्रीकल्चर कॉलेज के निर्माण की शुरुआत की गई है, जिससे युवाओं को कृषि स्टार्टअप और आधुनिक खेती के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में रेलवे कनेक्टिविटी और इलेक्ट्रिफिकेशन पर तेजी से काम हो रहा है और इसका बड़ा फायदा बराक घाटी को मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र टूरिज्म, उद्योग और कृषि विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Assam CM Himanta Biswa Sarma announcing ₹9000 Arunodoi scheme transfer to women beneficiaries before elections
असम में ‘बिहार मॉडल’ का दांव? चुनाव से पहले अरुणोदय योजना के तहत 40 लाख महिलाओं के खातों में ₹9,000 ट्रांसफर

  असम: देश की राजनीति में हाल के वर्षों में महिलाओं को केंद्र में रखकर शुरू की गई कल्याणकारी योजनाएं चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती रही हैं। कई राज्यों में ऐसी योजनाओं ने सरकारों की वापसी का रास्ता आसान किया है। इसी पृष्ठभूमि में असम में भी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। असम सरकार ने मंगलवार को अरुणोदय (Arunodoi) योजना के तहत करीब 40 लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹9,000 की एकमुश्त सहायता राशि ट्रांसफर की। यह राज्य में अब तक की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पहलों में से एक मानी जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत करीब ₹3,600 करोड़ सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए।   चुनाव से पहले बड़ा कदम, लेकिन सरकार का दावा-राजनीति से नहीं जुड़ा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार के उस मॉडल से मिलता-जुलता है, जिसमें चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देकर सरकार ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस योजना को चुनाव से जोड़ने से साफ इनकार किया है। गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित ज्योति-बिष्णु अंतर्राष्ट्रीय कला मंदिर ऑडिटोरियम से वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से लाभार्थियों को यह राशि जारी करते हुए सरमा ने कहा कि अरुणोदय योजना कई वर्षों से चल रही है और इसका उद्देश्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि राज्य सरकार की दीर्घकालिक सामाजिक कल्याण नीति का हिस्सा है।   चार महीने की सहायता और बिहू बोनस शामिल सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि में चार महीनों की वित्तीय सहायता के साथ-साथ महिलाओं के लिए दिया जाने वाला विशेष बिहू बोनस भी शामिल है। राज्य सरकार का कहना है कि त्योहारों के समय आर्थिक मदद से गरीब परिवारों को राहत मिलती है और उनकी जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलती है।   किन लोगों को मिलता है योजना का लाभ मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, अरुणोदय योजना खासतौर पर समाज के कमजोर वर्गों की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं- विधवा महिलाएं   तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाएं   गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवार   आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद घर-परिवार   सरकार का कहना है कि लाभ केवल उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो निर्धारित मानकों के आधार पर वास्तव में इसके पात्र हैं।   महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने इस पहल को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 40 लाख परिवारों को सहायता मिल रही है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। नियोग के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने गरीब परिवारों और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और समाज में उनका सम्मान बढ़ाना है।   लाभार्थियों में खुशी योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से लाभार्थियों में उत्साह देखा गया। सोनापुर की शिवानी बोरो डेका ने बताया कि ₹9,000 की सहायता मिलने से उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि वह इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने में करेंगी। वहीं एक अन्य लाभार्थी राधिका मंडल ने कहा कि यह आर्थिक सहायता उनके लिए छोटा व्यवसाय शुरू करने और रोजगार के नए अवसर तलाशने में मददगार साबित हो सकती है।   राजनीतिक और सामाजिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली साबित होती हैं। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में असम सरकार की इस पहल पर राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0