Bengal Politics

CAPF personnel deployed in West Bengal for law and order duties after elections under central government approval.
बंगाल में 20 जून तक तैनात रहेंगी CAPF की 500 कंपनियां, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी

पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की 500 कंपनियां फिलहाल राज्य में तैनात रहेंगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने गृह मंत्रालय से 180 दिनों तक केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने फिलहाल 20 जून तक इसकी मंजूरी दी है। चुनाव के बाद भी तैनात रखे गए थे केंद्रीय बल विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पश्चिम बंगाल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएपीएफ की 500 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया था। पिछले चुनावों के बाद हुई हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार मतदान खत्म होने के बाद भी केंद्रीय बलों को नहीं हटाया गया था। गत सप्ताह राज्य की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद गृह मंत्रालय ने इन बलों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। पहले चरण में 100 कंपनियों यानी करीब 10 हजार जवानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। गृह मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब 20 जून तक राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी। आदेश में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न बलों की कुल 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में मौजूद रहेंगी। इनमें: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियां सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 150 कंपनियां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 50 कंपनियां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 50 कंपनियां सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 50 कंपनियां शामिल हैं। राज्य सरकार को करनी होगी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बलों की तैनाती के दौरान ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जवानों के ठहरने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी। साथ ही बलों की सभी ऑपरेशनल जरूरतों का भी ध्यान रखने को कहा गया है। पहले चरण में हटनी थीं 100 कंपनियां गृह मंत्रालय ने पहले चरण में 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला लिया था। इनमें CRPF की 40, BSF की 30, CISF की 10, ITBP की 10 और SSB की 10 कंपनियां शामिल थीं। आदेश के मुताबिक 15 मई से इन कंपनियों को कानून व्यवस्था ड्यूटी से हटाया जाना था। सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया फैसला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल गृह विभाग और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए थे। खुफिया एजेंसियों से भी विशेष रिपोर्ट मांगी गई थी। समीक्षा में बताया गया कि चुनाव के बाद फिलहाल राज्य में स्थिति शांतिपूर्ण है और बड़े राजनीतिक प्रदर्शन या हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं। वहीं बांग्लादेश सीमा से लगने वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल घुसपैठ रोकने के लिए लगातार सतर्क है और कई इलाकों में फेंसिंग का काम भी शुरू किया जा रहा है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Voters standing in queues at Falta polling booths during peaceful re-polling under tight security in West Bengal.
Falta Re-Polling: फालता में दोबारा मतदान जारी, वोटरों ने कहा- इस बार बिना डर के डाला वोट

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान जारी है। दक्षिण 24 परगना जिले की 144-फलता सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर री-पोलिंग कराई जा रही है। पिछली वोटिंग के दौरान ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने मतदान रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया था। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा ले रहे हैं। वोटों की गिनती 24 मई को होगी। वोटरों ने कहा- इस बार माहौल शांतिपूर्ण मतदाता देबाशीष घोष ने कहा कि इस बार मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और लोग बिना किसी डर के वोट डाल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पिछली बार लोगों को घर-घर जाकर तय समय पर वोट डालने के लिए कहा जा रहा था और इलाके में डर का माहौल था, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से मतदाता खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीजेपी ने जीत का किया दावा भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा कि इलाके में मतदान शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा माहौल है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी बड़ी जीत दर्ज करेगी। पांडा ने कहा कि लोग आराम से वोट डाल रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि उनकी पार्टी डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल करेगी। उन्होंने टीएमसी नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें पहले ही हार का अंदाजा हो गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजाम राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, इस बार हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के आठ जवान तैनात किए गए हैं। पिछली वोटिंग में प्रत्येक बूथ पर केवल चार जवान मौजूद थे। फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 35 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की गई हैं। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पांस टीम भी बनाई गई हैं। टीएमसी उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था। हालांकि पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय तक वाम दलों का प्रभाव रहा है, इसलिए मुकाबले में वामपंथी दलों की भूमिका को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले मतदान में क्या हुआ था? 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों से ईवीएम पर इत्र और चिपकने वाला टेप लगाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था।  

surbhi मई 21, 2026 0
Students in a West Bengal madrasa singing Vande Mataram during morning assembly after new government directive.
बंगाल के मदरसों में अब अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। सरकार के नए आदेश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों को सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा। इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पहले स्कूलों के लिए जारी हुआ था आदेश इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने कहा था कि सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाने से छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे व्यापक रूप से गाने की बात कही गई थी। नए आदेश में राज्य गीत को लेकर स्थिति साफ नहीं बंगाल में पहले से स्कूलों की सुबह की सभा में ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गीत गाना अनिवार्य था। हालांकि नए आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य गीत को अब भी जारी रखा जाएगा या नहीं। कुछ स्कूल प्रबंधन ने इस फैसले को लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। स्कूल प्रमुखों का कहना है कि राष्ट्रगान पहले से अनिवार्य है और अब ‘वंदे मातरम्’ जोड़े जाने के बाद अगर राज्य गीत भी जारी रहता है तो प्रार्थना सभा का समय काफी बढ़ जाएगा। स्कूलों ने शुरू किया पालन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल निर्देश केवल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी किया गया है। विभाग ने साफ किया कि स्कूल प्रार्थना में राष्ट्रगीत को शामिल करना जरूरी होगा, जबकि राज्य गीत पर कोई अलग निर्देश नहीं दिया गया है। कई स्कूलों ने इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है। जादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक पार्थ प्रतिम बैद्य ने बताया कि उनके स्कूल में पिछले सप्ताह से राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा है। राजनीतिक बहस तेज मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष और कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।  

surbhi मई 21, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee during cabinet meeting on revised OBC reservation policy
बंगाल में OBC आरक्षण में बड़ा बदलाव: 17% से घटकर 7% हुआ कोटा, अब सिर्फ 66 जातियां होंगी शामिल

West Bengal सरकार ने राज्य की OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए आरक्षण को 17% से घटाकर 7% कर दिया है। नई सूची के अनुसार अब केवल 66 जातियां ही OBC आरक्षण के दायरे में रहेंगी। इसके साथ ही धर्म आधारित वर्गीकरण की व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि यह फैसला Calcutta High Court के 2024 के आदेश के आधार पर लिया गया है। हाईकोर्ट ने 2010 से 2012 के बीच OBC सूची में 77 अतिरिक्त जातियों को शामिल करने की प्रक्रिया को अवैध और असंवैधानिक बताया था। हालांकि, 2010 से पहले OBC सूची में शामिल जातियों का दर्जा बरकरार रहेगा। साथ ही, पहले से OBC कोटे के तहत नौकरी पा चुके लोगों की नियुक्तियों पर भी इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। ममता सरकार की OBC-A और OBC-B व्यवस्था खत्म Mamata Banerjee सरकार ने पहले OBC आरक्षण को दो वर्गों में बांटा था। OBC-A को 10% और OBC-B को 7% आरक्षण दिया जा रहा था। इसी दौरान कई नई जातियों को भी सूची में शामिल किया गया था। इसी व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2024 में फैसला सुनाया था। कोर्ट के आदेश के बाद 2010 के बाद जारी करीब 12 लाख OBC प्रमाणपत्र रद्द हो गए थे। नई सूची में किन जातियों को मिला स्थान नई OBC सूची में कपाली, कुर्मी, सुध्राधार, कर्मकार, सूत्रधार, स्वर्णकार, नाई, तांती, धनुक, कसाई, खंडायत, तुरहा, देवांग और गोआला जैसी जातियां शामिल हैं। वहीं पहाड़िया, हज्जाम और चौधुली जैसे तीन मुस्लिम समुदायों को भी सूची में रखा गया है। राज्य मंत्री Agnimitra Paul ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि सरकार OBC ढांचे की नई समीक्षा करेगी। इसके लिए जांच समिति बनाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कुछ समूहों को दोबारा सूची में शामिल किया जा सकता है। बंगाल कैबिनेट के 7 बड़े फैसले सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा 5 साल बढ़ी राज्य कैबिनेट ने सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 5 साल बढ़ाने का फैसला किया है। अब ग्रुप-A पदों के लिए उम्र सीमा 41 साल, ग्रुप-B के लिए 44 साल और ग्रुप C-D के लिए 45 साल होगी। यह नियम 11 मई से लागू होगा। भ्रष्टाचार जांच के लिए रिटायर्ड जज की कमेटी सरकार ने संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए Justice Bishwajit Basu की अध्यक्षता में जांच पैनल बनाने को मंजूरी दी है। यह कमेटी सरकारी योजनाओं, निर्माण कार्यों और सेवा वितरण में कथित घोटालों की जांच करेगी। महिलाओं और बच्चियों पर अत्याचार की जांच महिलाओं, बच्चियों, SC-ST और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मामलों की जांच के लिए Justice Samapti Chatterjee की अध्यक्षता में दूसरी कमेटी बनाई जाएगी। शिकायत दर्ज कराने के लिए पोर्टल, ईमेल और व्हाट्सऐप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। धार्मिक आधार पर मिलने वाला मानदेय बंद राज्य सरकार ने 1 जून से इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले सरकारी मानदेय को बंद करने का फैसला लिया है। अभी तक इमामों को 3000 रुपए और मुअज्जिन तथा पुजारियों को 2000 रुपए मासिक सहायता दी जाती थी। महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए कैबिनेट ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी दी है। इसके तहत महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना का लाभ सीधे बैंक खातों में भेजा जाएगा। महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा 1 जून से महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। हालांकि सरकार ने फिलहाल बसों की संख्या बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की है। 7वें वेतन आयोग को मंजूरी राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन संशोधन के लिए 7वें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इसका लाभ सरकारी कर्मचारियों के साथ नगर निकायों और सरकारी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को भी मिलेगा।  

surbhi मई 20, 2026 0
Mamata Banerjee addresses TMC leaders after Bengal election defeat at her Kalighat residence meeting
बंगाल में हार के बाद पहली बार बोलीं ममता बनर्जी, कहा- ‘जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो स्वतंत्र हैं’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’  ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
Humayun Kabir Bengal Assembly
बंगाल विधानसभा में बदले-बदले दिखे हुमायूं कबीर, CM सुवेंदु को गले लगाकर बांटी मिठाइयां

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को उस समय दिलचस्प माहौल देखने को मिला, जब आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और नवादा विधायक हुमायूं कबीर मिठाइयों के साथ सदन पहुंचे। विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को गले लगाया और उनकी खुलकर तारीफ की। राजनीतिक गलियारों में इसे हुमायूं कबीर के “360 डिग्री बदलाव” के रूप में देखा जा रहा है।   500 चनाबारा और 150 मनोहरा लेकर पहुंचे विधायक हुमायूं कबीर अपने साथ मुर्शिदाबाद की प्रसिद्ध मिठाई “चनाबारा” के 500 पीस और हुगली की मशहूर “मनोहरा” मिठाई के 150 पीस लेकर विधानसभा पहुंचे थे। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं को मिठाइयां बांटी। हुमायूं ने कहा कि चुनाव और राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान काफी तनाव और विवाद हुए, इसलिए अब माहौल में मिठास घोलने की जरूरत है।   CM सुवेंदु अधिकारी की जमकर तारीफ सदन में हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सराहना करते हुए कहा कि वह अच्छे इंसान हैं और राज्य के लिए बेहतर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि नई सरकार को बिना किसी बाधा के काम करने का मौका मिलना चाहिए ताकि जनता को फायदा हो सके। इस दौरान मुर्शिदाबाद के कुछ अन्य विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उनका समर्थन जताया।   दो सीटों से जीतकर चर्चा में आए हुमायूं हुमायूं कबीर इस चुनाव में नवादा और रेजिनगर दोनों सीटों से जीत दर्ज कर चुके हैं। चुनाव से पहले उनका एक कथित वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भाजपा से कथित डील की बात सामने आई थी। इस विवाद के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने उनसे गठबंधन तोड़ लिया था। इसके बावजूद उन्होंने चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया।   बाबरी मस्जिद बयान को लेकर भी रहे विवादों में चुनाव प्रचार के दौरान हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद मुद्दे को लेकर भी कई बयान दिए थे। उन्होंने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल में नई मस्जिद निर्माण कराया जाएगा। वहीं भाजपा नेताओं ने उनके बयानों का कड़ा विरोध किया था। अब विधानसभा में उनका नरम और सौहार्दपूर्ण रवैया राजनीतिक हलकों में नई चर्चा का विषय बन गया है।

Anjali Kumari मई 13, 2026 0
West Bengal CM Suvendu Adhikari addressing cabinet meeting on border security and anti-cattle smuggling measures.
शुभेंदु अधिकारी ने गौ-तस्करी पर कस दिया शिकंजा, पहली कैबिनेट में लिया बड़ा फैसला

Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनते ही West Bengal में कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा को लेकर बड़े फैसलों का दौर शुरू हो गया है। अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में शुभेंदु सरकार ने गौ-तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया। सरकार ने Border Security Force (BSF) को बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी (Fencing) के लिए जमीन हस्तांतरण की मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि जब तक सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय गौ-तस्करी और घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल रहेगा। गौ-तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि बंगाल में अब तस्करों और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान सीमा पर बाड़बंदी का काम लंबे समय तक अटका रहा, जिसकी वजह से तस्करी का नेटवर्क मजबूत होता गया। अब सरकार का दावा है कि BSF को जमीन मिलने के बाद सीमा पर तेजी से बाड़ लगाने का काम पूरा किया जाएगा, जिससे तस्करी के प्रमुख रास्ते बंद हो सकेंगे। ‘नार्को-टेरर’ और तस्करी के गठजोड़ पर नजर राज्य सरकार का कहना है कि गौ-तस्करी से आने वाला पैसा सिर्फ अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा हो रहे हैं। इसी को देखते हुए गृह विभाग को निर्देश दिया गया है कि तस्करी में शामिल बड़े नेटवर्क और कथित सरगनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मान रही है। सीमावर्ती जिलों पर खास फोकस कैबिनेट बैठक में सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते जनसंख्या पैटर्न को भी गंभीर विषय बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा मजबूत करना राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है। भूमि एवं राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि BSF को जमीन सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए ताकि बाड़बंदी के काम में और देरी न हो। केंद्र के साथ संयुक्त अभियान की तैयारी राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाने की तैयारी में भी है। इसके तहत सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसके अलावा जनगणना और केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को तेजी से लागू करने का फैसला भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक संदेश भी साफ भाजपा सरकार के इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने लगातार सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और गौ-तस्करी को बड़ा मुद्दा बनाया था। अब सत्ता में आने के बाद सरकार ने पहली कैबिनेट में ही इस दिशा में बड़ा फैसला लेकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि बंगाल में कानून-व्यवस्था और सीमा प्रबंधन को लेकर नई नीति अपनाई जाएगी।  

surbhi मई 12, 2026 0
Suvendu Adhikari
West Bengal: शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला, जब शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने इसे यादगार बना दिया। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस चुनाव में 80 सीटों तक सिमट गई।   प्रधानमंत्री मोदी समेत कई बड़े नेता रहे मौजूद शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूरे समारोह के दौरान ब्रिगेड ग्राउंड भाजपा समर्थकों के नारों और उत्साह से गूंजता रहा। सुरक्षा के लिहाज से कोलकाता में व्यापक इंतजाम किए गए थे और हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।   भाजपा ने बताया नए राजनीतिक दौर की शुरुआत भाजपा नेताओं ने इस जीत को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में नए राजनीतिक युग की शुरुआत बताया। पार्टी का कहना है कि यह जनादेश राज्य में बदलाव और विकास की राजनीति के समर्थन का प्रतीक है। भाजपा अब बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है।   कांग्रेस से भाजपा तक का सफर शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में की थी, लेकिन बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर राज्य के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। वर्ष 2020 में ममता बनर्जी से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर वह राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बने थे।   ग्रामीण पृष्ठभूमि से उभरे नए मुख्यमंत्री पूर्व मेदिनीपुर जिले से आने वाले शुभेंदु अधिकारी पिछले पांच दशकों में बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं, जो कोलकाता से बाहर किसी जिले की ग्रामीण पृष्ठभूमि से उभरकर सत्ता तक पहुंचे हैं।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari oath ceremony preparations at Brigade Parade Ground amid speculation over Mamata Banerjee’s attendance
Suvendu Adhikari Oath: क्या शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण में शामिल होंगी ममता बनर्जी?

Suvendu Adhikari Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है. भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी 9 मई 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है. इसी बीच सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह बना हुआ है कि क्या निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगी या नहीं. क्या कहता है प्रोटोकॉल? संवैधानिक रूप से ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी निवर्तमान मुख्यमंत्री को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बाध्य करता हो. यह पूरी तरह राजनीतिक परंपरा, शिष्टाचार और व्यक्तिगत-राजनीतिक संबंधों पर निर्भर करता है. भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में कई बार सत्ता छोड़ने वाले मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नए नेतृत्व के शपथ समारोह में शामिल होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान जताते रहे हैं. हालांकि कई मामलों में राजनीतिक मतभेदों या तनावपूर्ण रिश्तों के कारण पूर्व मुख्यमंत्री समारोह से दूरी भी बनाते रहे हैं. अभी तक नहीं आया कोई आधिकारिक बयान फिलहाल तृणमूल कांग्रेस या ममता बनर्जी की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया चुनावी मुकाबले और भाजपा-टीएमसी के बीच बढ़े तीखे टकराव को देखते हुए ममता बनर्जी के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना कम दिखाई दे रही है. बंगाल में गरमाया राजनीतिक माहौल शपथ ग्रहण से पहले पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है. 7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग करने की अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई. हालांकि ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया था, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के तहत नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक भूमिका में मानी जा रही हैं. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में तैयारियां पूरी भाजपा इस शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने में जुटी हुई है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल मंच, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं. कार्यक्रम में लाखों समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है. ड्रोन निगरानी, नो-फ्लाई जोन और कई ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए गए हैं.  

surbhi मई 9, 2026 0
Amit Shah addressing BJP leaders in Kolkata after Suvendu Adhikari’s victory over Mamata Banerjee in Bhabanipur
अमित शाह का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, बोले- शुभेंदु दा ने घर में घुसकर हराया

Amit Shah on Mamata Banerjee Bhabanipur Loss: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार के बाद बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घुसकर हराया है. “नंदीग्राम में गई थीं चुनौती देने, अब भवानीपुर में मिली हार” कोलकाता में भाजपा नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का जिक्र किया. शाह ने कहा कि 2021 में ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने गई थीं और इसे अपनी राजनीतिक ताकत बताया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दीदी कहती थीं कि वह शुभेंदु के गढ़ में जाकर लड़ रही हैं. लेकिन इस बार शुभेंदु दा ने उनके अपने घर भवानीपुर में जाकर उन्हें हरा दिया.” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान अमित शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भाजपा समर्थक इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी समर्थकों ने शाह के बयान को राजनीतिक उकसावे वाला करार दिया है. भवानीपुर में कैसे बदला चुनावी समीकरण? भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. मतगणना के शुरुआती राउंड में ममता बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के चरणों में शुभेंदु अधिकारी लगातार आगे निकलते गए और अंत में निर्णायक जीत दर्ज की. “भ्रष्टाचार और परिवारवाद से तंग आ चुकी है जनता” अमित शाह ने दावा किया कि भवानीपुर की जनता ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ वोट दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है. “शेरनी से भीगी बिल्ली” वाले बयान पर बढ़ा विवाद अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद को बंगाल की “शेरनी” बताती थीं, अब हार के बाद “भीगी बिल्ली” बन गई हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. टीएमसी नेताओं ने शाह की भाषा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे चुनावी जवाब बता रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari addressing supporters after defeating Mamata Banerjee in a key Bengal election battle
कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी? जिन्होंने 2 बार ममता बनर्जी को हराकर बदल दी बंगाल की राजनीति

Who is Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है. भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इसके साथ ही बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं. नंदीग्राम से शुरू हुआ ‘जायंट किलर’ का सफर शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति में ‘जायंट किलर’ कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी दो बड़ी चुनावी जीत हैं. 2021: नंदीग्राम में ममता को दी मात साल 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश को चौंका दिया था. यह चुनाव बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बना था. 2026: भवानीपुर में फिर हराया इसके बाद 2026 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर भी हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. भवानीपुर को ममता का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन शुभेंदु ने वहां भी जीत दर्ज कर टीएमसी के अभेद्य किले को ढहा दिया. छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर जिले के कारकुली गांव में जन्मे शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. शुभेंदु ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोंटाई में की और बाद में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया. उन्होंने छात्र राजनीति के जरिए अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. शुरुआती दौर में वे कांग्रेस छात्र संगठन से जुड़े रहे. 1995 में वे पहली बार पार्षद बने और धीरे-धीरे बंगाल की राजनीति में अपनी पहचान मजबूत करते गए. आरएसएस से मिला संगठन और अनुशासन का प्रशिक्षण कम लोग जानते हैं कि शुभेंदु अधिकारी ने युवावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में भी प्रशिक्षण लिया था. माना जाता है कि इसी दौरान उनके भीतर संगठन क्षमता और अनुशासन की मजबूत नींव पड़ी, जिसने आगे चलकर उनकी राजनीतिक शैली को आकार दिया. नंदीग्राम आंदोलन ने बना दिया बड़ा चेहरा 2007 का नंदीग्राम आंदोलन शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए इस आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और देखते ही देखते वे बंगाल की राजनीति के बड़े नेता बन गए. इसी आंदोलन ने उन्हें जमीनी नेता की पहचान दिलाई. क्यों टूटा ममता बनर्जी से रिश्ता? एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. वे टीएमसी सरकार में परिवहन और पर्यावरण मंत्री भी रहे. लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ने लगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका और परिवारवाद की राजनीति से शुभेंदु नाराज थे. आखिरकार 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. भाजपा में आने के बाद वे बंगाल में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे. विपक्ष के नेता के रूप में लगातार रहे आक्रामक भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष के नेता के रूप में ममता सरकार को लगातार घेरा. एसएससी भर्ती घोटाला, संदेशखाली विवाद और आरजी कर अस्पताल मामले जैसे मुद्दों पर उन्होंने सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन किया. कई बार विधानसभा में हंगामे के कारण उन्हें निलंबन का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद को बंगाल में भाजपा के सबसे आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया. बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत भाजपा नेतृत्व लंबे समय से बंगाल में ऐसे चेहरे की तलाश में था, जिसकी जड़ें बंगाल की मिट्टी से जुड़ी हों और जो राज्य की संस्कृति को समझता हो. शुभेंदु अधिकारी इस कसौटी पर पूरी तरह फिट बैठे. अब मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में भाजपा सरकार को स्थिर और मजबूत बनाना होगी. शुभेंदु की ताजपोशी को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
West Bengal Madhyamik Result 2026 declared with Abhirup Bhadra securing top rank in board exams
WB Board 10th Result 2026 Out:86.83% छात्र पास, अभिरूप भद्रा बने टॉपर

पश्चिम बंगाल बोर्ड ने जारी किया 10वीं का रिजल्ट (WBBSE) ने माध्यमिक यानी 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से परिणाम घोषित किए। इस साल कुल 86.83 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं। करीब 9 लाख से अधिक छात्रों को रिजल्ट का इंतजार था, जो अब खत्म हो गया है। छात्र सुबह 10:15 बजे से आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। अभिरूप भद्रा ने किया टॉप इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में अभिरूप भद्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.71 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। टॉपर्स की सूची में कई छात्रों ने बेहतरीन अंक दर्ज किए हैं। WB Madhyamik Result 2026 टॉपर्स लिस्ट रैंक नाम प्रतिशत 1 अभिरूप भद्रा 99.71% 2 प्रियतोष मुखर्जी 99.43% 3 सौर्य जाना 99.29% 3 अंकन कुमार जाना 99.29% 3 मैनाक मंडल 99.29% 4 अरिजीत कर 99.14% इन वेबसाइट्स पर देखें रिजल्ट छात्र नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं: wbresults.nic.in WBBSE Official Website ऐसे करें WB Board 10th Result 2026 चेक सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। “WB Madhyamik Result 2026” लिंक पर क्लिक करें। अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा। मार्कशीट डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें। कब मिलेगी ओरिजिनल मार्कशीट? बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रिजल्ट जारी होने के कुछ दिनों बाद छात्रों को उनकी स्कूलों के माध्यम से ओरिजिनल मार्कशीट उपलब्ध कराई जाएगी। आगे की पढ़ाई और एडमिशन प्रक्रिया के लिए यह मार्कशीट बेहद जरूरी होगी। फरवरी में हुई थी परीक्षा पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा 2026 का आयोजन 2 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक किया गया था। परीक्षा ऑफलाइन मोड में एक ही शिफ्ट में सुबह 10:45 बजे से दोपहर 2 बजे तक हुई थी। इस वर्ष राज्यभर के 2,682 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 9.71 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें 5.44 लाख छात्राएं, 4.26 लाख छात्र और एक ट्रांसजेंडर उम्मीदवार शामिल थे।

surbhi मई 8, 2026 0
Security forces inspect alleged bombs recovered from TMC office in Sabang amid rising political tension in West Bengal
TMC कार्यालय में डिब्बों में मिले बम, सबंग में भारी तनाव; CAPF तैनात

West Bengal के Paschim Medinipur जिले के सबंग इलाके में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय पार्टी कार्यालय से कथित तौर पर भारी मात्रा में बम बरामद होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. शपथ ग्रहण से पहले सामने आई इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. विष्णुपुर इलाके में मचा हड़कंप जानकारी के मुताबिक, सबंग ब्लॉक के 13 नंबर विष्णुपुर क्षेत्र स्थित All India Trinamool Congress के स्थानीय कार्यालय में विस्फोटक होने की सूचना भाजपा कार्यकर्ताओं को मिली थी. खबर फैलते ही इलाके में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और तनाव का माहौल बन गया. स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय पुलिस और Central Armed Police Forces की टीम मौके पर पहुंची. सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कथित तौर पर डिब्बों में रखे कई ताजा बम बरामद किए गए. बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया घटना की गंभीरता को देखते हुए बम निरोधक दस्ता मौके पर बुलाया गया. पुलिस के अनुसार विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए विशेष सावधानी बरती गई. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि: बम वहां कैसे पहुंचे इन्हें किस मकसद से रखा गया था विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप Bharatiya Janata Party ने इस घटना को लेकर टीएमसी पर बड़ा हमला बोला है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि चुनाव के बाद राजनीतिक बदले और डर का माहौल बनाने के लिए पार्टी कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा था. भाजपा ने कहा कि यह लोकतांत्रिक राजनीति नहीं बल्कि “आतंक फैलाने की कोशिश” है. TMC ने आरोपों को किया खारिज वहीं All India Trinamool Congress ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. पार्टी का कहना है कि उन्हें बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गई है और संभव है कि विस्फोटक बाहर से रखे गए हों. इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद पूरे विष्णुपुर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पुलिस और केंद्रीय बल लगातार गश्त कर रहे हैं. जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के जरिए मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार सामने आ रही हिंसा और विस्फोटक बरामदगी की घटनाओं ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Suvendu Adhikari addressing BJP workers in Nandigram after Bengal election victory in 2026
ममता के गढ़ में जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बोले- BJP का वोट शेयर 60% तक ले जाएंगे

Suvendu Adhikari Mission 60 Percent Vote: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है. नंदीग्राम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा आने वाले समय में बंगाल में अपना वोट शेयर 46 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जायेगी. बंगाल में विकास की राजनीति का दावा शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब विकास की राजनीति को नई गति मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में ऐसा विकास होगा कि भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को करीब 46 प्रतिशत वोट मिले हैं और आने वाले वर्षों में यह समर्थन 60 प्रतिशत के पार पहुंच सकता है. शुभेंदु ने इसे भाजपा के “दीर्घकालिक राजनीतिक मिशन” का हिस्सा बताया. 10 दिन में छोड़ेंगे एक सीट भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत दर्ज करने के बाद अब शुभेंदु अधिकारी को नियम के मुताबिक एक सीट छोड़नी होगी. इस पर उन्होंने कहा कि वे अगले 10 दिनों के भीतर एक सीट से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा कि किस सीट को बरकरार रखा जायेगा, इसका फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा. शुभेंदु ने कहा कि वे दोनों क्षेत्रों की जनता के आभारी हैं और किसी भी क्षेत्र की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे. “2011 के परिवर्तन का हिस्सा था, अब असली परिवर्तन होगा” अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने 2011 के राजनीतिक बदलाव का भी जिक्र किया, जब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभायी थी. उन्होंने कहा कि वह 2011 के परिवर्तन का हिस्सा थे, लेकिन अब बंगाल में “वास्तविक परिवर्तन” का दौर शुरू होगा. शुभेंदु ने दावा किया कि भाजपा ऐसा काम करेगी कि राज्य में पार्टी की सरकार “100 साल तक” बनी रहे. कार्यकर्ताओं से शांति बनाये रखने की अपील भाजपा नेता ने पार्टी कार्यकर्ताओं से फिलहाल विजय जुलूस और उत्सव से दूरी बनाये रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही आधिकारिक रूप से जश्न मनाया जाये. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अनुशासन और शांति बनाये रखने को कहा. साथ ही टीएमसी शासन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. नंदीग्राम में पूजा और शहीद कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. इसके अलावा उन्होंने चुनावी हिंसा में मारे गये भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य के हर वर्ग और क्षेत्र तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाया जायेगा. शुभेंदु के “मिशन-60” बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गयी है और विपक्षी दलों में हलचल बढ़ गयी है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Suvendu Adhikari celebrating Bhabanipur victory with BJP supporters, waving flags and addressing cheering crowd
‘टारगेट अचीवर’ बने शुभेंदु अधिकारी, भवानीपुर जीत के बाद पहली प्रतिक्रिया आई सामने

West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार शुभेंदु अधिकारी एक बड़े ‘टारगेट  अचीवर’ के रूप में उभरे हैं। नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर में भी उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो उनकी पिछली नंदीग्राम जीत (1956 वोट) से कहीं ज्यादा है। जीत के बाद भावुक हुए शुभेंदु अपनी जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने इसे भाजपा कार्यकर्ताओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन 300 कार्यकर्ताओं की है, जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपनी जान गंवाई। उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें हिंदू, जैन और सिख समुदायों का भरपूर समर्थन मिला, जिससे यह जीत संभव हो सकी। मोदी-शाह को दिया श्रेय शुभेंदु अधिकारी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया था। वहीं, अमित शाह ने भी जीत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए भवानीपुर की जनता को बधाई दी और इसे बदलाव का संकेत बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाजपा की जीत पर कहा कि “बंगाल बदल गया है, एक नए युग की शुरुआत हुई है।” भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न शुभेंदु अधिकारी की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कोलकाता सहित कई इलाकों में जश्न का माहौल रहा और समर्थक सड़कों पर उतरकर खुशी मनाते नजर आए। राजनीतिक संदेश साफ भवानीपुर जैसी सीट पर जीत को भाजपा के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की मजबूती को दिखाता है, बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का भी संकेत देता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Bengal Election 2026
महा-जनादेश 2026: बीजेपी की बल्ले-बल्ले भगवा लहर में ढहे क्षेत्रीय दुर्ग, बंगाल में 'खेला' खत्म

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में मई 2026 का यह हफ्ता एक युगांतकारी मोड़ के रूप में दर्ज किया गया है। पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने न केवल सत्ता के समीकरण बदले हैं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा को भी एक नई परिभाषा दी है। पूर्व से दक्षिण तक चली 'प्रो-इंकंबेंसी' और 'परिवर्तन' की लहर ने कई मिथकों को तोड़ दिया है। इस महा-संग्राम का सबसे बड़ा केंद्र रहा पश्चिम बंगाल, जहां 15 साल के ममता बनर्जी के शासन का सूर्यास्त हो गया है। वहीं, दक्षिण में तमिलनाडु ने एक नए सुपरस्टार राजनेता के उदय के साथ इतिहास रचा है, तो केरल में वामपंथ का आखिरी किला भी ढह गया है।  बंगाल: 'दीदी' की विदाई और भाजपा का ऐतिहासिक उदय पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम सबसे चौंकाने वाले और ऐतिहासिक रहे। साल 2011 में वामपंथ को उखाड़ फेंकने वाली ममता बनर्जी को खुद 'परिवर्तन' के उसी नारे का सामना करना पड़ा। सत्ता परिवर्तन: भ्रष्टाचार के आरोपों, संदेशखाली जैसी घटनाओं और एंटी-इंकंबेंसी ने टीएमसी के 'मां, माटी, मानुष' के किले में सेंध लगा दी। भाजपा ने भारी बहुमत के साथ राज्य में पहली बार सत्ता हासिल की है। रणनीति की जीत भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के 'बूथ चलो' अभियान ने ग्रामीण बंगाल में टीएमसी के वर्चस्व को चुनौती दी। महिलाओं के साइलेंट वोटर टर्नआउट ने इस जीत में निर्णायक भूमिका निभाई। इनका सूपड़ा साफ कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन एक बार फिर शून्य पर सिमट गया, जिससे मुकाबला पूरी तरह से द्विध्रुवीय हो गया।   तमिलनाडु: थलपति विजय का 'धमाका' दक्षिण भारत की राजनीति हमेशा से फिल्मी सितारों और द्रविड़ विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन, 2026 में एक्टर विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने जो कर दिखाया, उसने स्थापित दिग्गजों—डीएमके और एआईएडीएमके—की नींद उड़ा दी। तीसरा विकल्प विजय ने न केवल युवाओं के वोट बटोरे, बल्कि एक विश्वसनीय तीसरे विकल्प के रूप में खुद को स्थापित किया। उनकी पार्टी ने दोहरे अंकों में सीटें जीतकर राज्य की राजनीति को त्रिकोणीय बना दिया है। द्रविड़ राजनीति में बदलाव हालांकि डीएमके ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन विजय के उदय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु का युवा अब पारंपरिक राजनीति से आगे देखना चाहता है।   वामपंथ का अंत: केरल में लाल किला ध्वस्त इस चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खियों में से एक है भारत से वामपंथ का पूरी तरह सफाया। केरल, जो दशकों से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच झूलता रहा था, वहां इस बार जनता ने एक अलग रास्ता चुना। केरल में कांग्रेस की वापसी शुरुआती रुझानों और नतीजों के अनुसार, केरल में कांग्रेस नीत गठबंधन ने शानदार वापसी की है। वामपंथ सूपड़ा साफ त्रिपुरा और बंगाल के बाद अब केरल से भी वामपंथी सरकार की विदाई ने भारतीय राजनीति में 'कम्युनिज्म' के भविष्य पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देश के किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं बची है।   असम में भाजपा की हैट्रिक और JMM का प्रवेश असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता का स्वाद चखा है। विकास बनाम विरासत भाजपा के विकास कार्ड और घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख ने मतदाताओं को एकजुट किया। JMM का प्रदर्शन दिलचस्प बात यह रही कि झारखंड की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी असम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। मजबात और डिगबोई जैसी सीटों पर JMM के उम्मीदवारों ने दूसरे स्थान पर रहकर सबको हैरान कर दिया, जिससे पता चलता है कि चाय बागान क्षेत्रों में पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है।   क्या कहते हैं ये नतीजे? इन पांच राज्यों के नतीजों ने प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के 'अजेय' होने के नैरेटिव को और मजबूत किया है। बंगाल जैसी बड़ी जीत 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ है। क्षेत्रीय क्षत्रपों का कमजोर होना ममता बनर्जी की हार ने यह साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय पहचान और करिश्मा तब तक ही काम करता है, जब तक सुशासन और पारदर्शिता बनी रहे। टीएमसी का यह पतन अन्य क्षेत्रीय दलों के लिए एक चेतावनी है। 'न्यू इंडिया' का नया वोट बैंक इन चुनावों ने दिखाया है कि अब जाति और धर्म के साथ-साथ 'लाभार्थी वर्ग' (Beneficiary Class) एक नया वोट बैंक बन चुका है। मुफ्त राशन, आवास योजना और महिला सशक्तिकरण की योजनाओं ने भाषा और भूगोल की सीमाओं को पार कर भाजपा को जीत दिलाई है।  पुराने ढर्रे की राजनीति अब नहीं चलेगी 2026 के ये चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति के "री-एलाइनमेंट" (पुनर्गठन) का संकेत हैं। जहां एक ओर भाजपा अपने वैचारिक और सांगठनिक विस्तार के चरम पर है, वहीं विपक्ष को अब नए चेहरों और नई विचारधारा के साथ खुद को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। एक्टर विजय का तमिलनाडु में उदय और केरल से वामपंथ की विदाई बताती है कि भारत की जनता अब पुराने ढर्रे की राजनीति से ऊब चुकी है और स्पष्ट परिणाम चाहती है।अगला पड़ाव अब दिल्ली है, लेकिन आज की जीत का जश्न कोलकाता से लेकर गुवाहाटी तक गूंज रहा है।

Anjali Kumari मई 5, 2026 0
BJP supporters celebrating massive election victory in West Bengal with party flags and cheering crowds
बंगाल में सत्ता परिवर्तन: भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत, तृणमूल कांग्रेस का किला ढहा

West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार ऐतिहासिक नतीजे सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाने की ओर निर्णायक बढ़त बना ली है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 148 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए भाजपा 190 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। करीब 15 साल से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में लड़ी गई इस लड़ाई में कई दिग्गज नेता अपने-अपने क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी के जनाधार में गिरावट साफ नजर आई। कैसे बदला बंगाल का राजनीतिक समीकरण 2011 में जहां भाजपा का खाता तक नहीं खुला था, वहीं 2016 में उसने 3 सीटें जीतीं और 2021 में 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बनकर उभरी। इस बार पार्टी ने 40% से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर ग्रामीण, आदिवासी और औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली। इन इलाकों में भाजपा की बड़ी बढ़त चुनाव नतीजों से साफ है कि भाजपा ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में पार्टी को भारी जनसमर्थन मिला, जबकि टीएमसी शहरी इलाकों और कुछ पारंपरिक सीटों तक सिमटती नजर आई। भाजपा की जीत के बड़े कारण भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कई अहम वजहें रहीं। पार्टी का मजबूत संगठन, आक्रामक चुनाव प्रचार और बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत इसके प्रमुख कारण बने। इसके अलावा सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों में गहरी पैठ बनाना भी भाजपा के लिए निर्णायक साबित हुआ। सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कमजोर रणनीति ने भी भाजपा को फायदा पहुंचाया। टीएमसी की हार के कारण तृणमूल कांग्रेस की हार के पीछे सत्ता विरोधी माहौल, संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के खिलाफ बढ़ता असंतोष प्रमुख कारण रहे। कई मंत्री अपने ही क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर साबित हुई। कल्याणकारी योजनाएं भी इस बार मतदाताओं को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर सकीं। नया राजनीतिक अध्याय शुरू इस चुनाव परिणाम के साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। वामपंथ और कांग्रेस के बाद टीएमसी का दौर खत्म होता दिख रहा है और अब भाजपा के नेतृत्व में राज्य में नई राजनीतिक दिशा तय होती नजर आ रही है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Vote counting in West Bengal with Mamata Banerjee and Suvendu Adhikari tight contest updates
West Bengal Election Results 2026 LIVE: भवानीपुर में कांटे की टक्कर, VIP सीटों पर उलटफेर के संकेत

कोलकाता, 4 मई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों ने राज्य की सियासत को बेहद रोमांचक बना दिया है। सबसे ज्यादा नजर भवानीपुर सीट पर है, जहां Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला चल रहा है। भवानीपुर: ममता vs शुभेंदु भवानीपुर सीट पर शुरुआती रुझानों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पहले Mamata Banerjee आगे थीं, लेकिन बाद में Suvendu Adhikari ने बढ़त बना ली। इससे साफ है कि यह सीट अंत तक बेहद करीबी मुकाबले वाली रहने वाली है। बहरामपुर: कांग्रेस vs TMC बहरामपुर सीट पर Adhir Ranjan Chowdhury और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर है। शुरुआती रुझानों में कभी कांग्रेस तो कभी TMC आगे नजर आ रही है, जिससे यह सीट भी हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। आसनसोल दक्षिण: BJP की मजबूत बढ़त आसनसोल दक्षिण सीट पर भाजपा की Agnimitra Paul ने शुरुआती राउंड में ही बड़ी बढ़त बना ली है। अग्निमित्रा पॉल: 10,055 वोट TMC के तापस बनर्जी: 3,784 वोट CPM उम्मीदवार तीसरे स्थान पर यहां भाजपा ने शुरुआती बढ़त के साथ विपक्ष पर दबाव बना दिया है। नंदीग्राम: शुभेंदु का दबदबा नंदीग्राम सीट पर Suvendu Adhikari 3000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं। यह सीट पहले भी काफी चर्चा में रही है और इस बार भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। अन्य VIP सीटों का हाल सोनारपुर दक्षिण: भाजपा की Rupa Ganguly आगे श्यामपुकुर: भाजपा उम्मीदवार बढ़त पर, TMC पीछे कोलकाता पोर्ट: Firhad Hakim की सीट पर कड़ी नजर दमदम और दमदम उत्तर: कांटे की टक्कर सिलीगुड़ी, खड़गपुर सदर और भांगड़: सभी सीटों पर कड़ा मुकाबला जारी क्या कहते हैं शुरुआती संकेत? शुरुआती रुझानों से साफ है कि इस बार पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद करीबी है। All India Trinamool Congress, Bharatiya Janata Party, Indian National Congress, Communist Party of India (Marxist) और Indian Secular Front के बीच बहुकोणीय लड़ाई देखने को मिल रही है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Mamata Banerjee campaigns in West Bengal amid tough electoral battle to retain power
ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह सबसे कठिन? ‘नबान्न’ बचाने की जंग में 5 बड़े फैक्टर बने चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य की राजनीति अपने चरम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी कर पाएंगी या इस बार बदलाव की हवा ‘नबान्न’ तक पहुंच जाएगी। करीब 15 वर्षों से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने इस बार बहुस्तरीय चुनौतियां खड़ी हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। 1. भ्रष्टाचार के आरोप: छवि पर गहरा असर इस चुनाव में टीएमसी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाला राशन घोटाला कोयला तस्करी मामला इन मामलों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) व केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की लगातार कार्रवाई ने सरकार की साख को चोट पहुंचाई है। विपक्ष ने इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” बताकर जनता के बीच मजबूत नैरेटिव बनाया है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 2. महिला सुरक्षा और संदेशखाली जैसे विवाद महिला वोट बैंक टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस आधार को कमजोर करने की कोशिश की है। संदेशखाली विवाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े आरोप इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। 3. एंटी-इन्कम्बेंसी: 15 साल की सत्ता का असर लगातार तीन कार्यकाल तक सत्ता में रहने के बाद एंटी-इन्कम्बेंसी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की दबंगई के आरोप ‘सिंडिकेट राज’ की शिकायतें स्थानीय प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप हालांकि, राज्य सरकार की योजनाएं–जैसे महिला और गरीब वर्ग के लिए आर्थिक सहायता–अब भी लोकप्रिय हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर असंतोष चुनावी समीकरण बदल सकता है। 4. भाजपा का उभार और बदला राजनीतिक संतुलन पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का तेजी से उभार टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 2011 में मामूली मौजूदगी 2021 में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बूथ स्तर तक मजबूत संगठन उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है। धार्मिक ध्रुवीकरण और हिंदुत्व की राजनीति ने पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। 5. युवाओं की नाराजगी और रोजगार संकट भर्ती घोटालों और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में निराशा पैदा की है। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता पर सवाल निजी क्षेत्र में सीमित अवसर औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार हालांकि ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं गरीब और महिला मतदाताओं को जोड़ने में सफल रही हैं, लेकिन शिक्षित युवा वर्ग बदलाव की तलाश में नजर आ रहा है। ममता बनर्जी का ‘फाइटर’ फैक्टर इन तमाम चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ है। संघर्षशील नेता की पहचान सीधे जनता से संवाद कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक असर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी आखिरी समय में चुनावी बाजी पलटने की क्षमता रखती हैं। 4 मई का फैसला तय करेगा भविष्य अब नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब चुनावी नतीजे सामने आएंगे। क्या ‘दीदी’ एक बार फिर सत्ता बचा लेंगी? या बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू होगा?

surbhi मई 2, 2026 0
Supreme Court amid legal battle over West Bengal election counting
WB Polls 2026: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC, क्या रुक सकती है मतगणना?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से ठीक पहले सियासी घमासान अब अदालत तक पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले पर शनिवार को विशेष सुनवाई होनी है, जिससे 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले सस्पेंस और बढ़ गया है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की जड़ चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े हाईकोर्ट के निर्देश हैं। अदालत ने हाल ही में मतगणना केंद्रों की सुरक्षा, केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती और कुछ याचिकाओं (जैसे पुनर्मतदान) पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। इससे पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने निर्देश दिया था कि हर काउंटिंग सेंटर पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। TMC ने इस फैसले का विरोध किया और इसे पक्षपातपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। TMC की दलील क्या है? TMC का कहना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस तरह के निर्देशों से मतगणना प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी का आरोप है कि इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं न्यायिक हस्तक्षेप से प्रशासनिक प्रक्रिया जटिल हो सकती है इससे चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है इन्हीं तर्कों के आधार पर पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्यों अहम? शनिवार को होने वाली सुनवाई कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है, तो TMC को बड़ी राहत मिलेगी अगर रोक नहीं लगती, तो हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ही मतगणना होगी यह मामला चुनाव के दौरान अदालत की भूमिका को लेकर एक नई नजीर भी पेश कर सकता है क्या रुक सकती है मतगणना? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मतगणना (4 मई) पर रोक लगने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। आमतौर पर अदालतें चुनाव प्रक्रिया में अंतिम चरण में दखल देने से बचती हैं, जब तक कि कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी समस्या न हो। इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि: मतगणना तय समय पर होगी सुप्रीम कोर्ट केवल प्रक्रिया या निर्देशों में बदलाव कर सकता है विपक्ष का क्या कहना है? अन्य राजनीतिक दल, खासकर बीजेपी, TMC के इस कदम को हार के डर से उठाया गया कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम से पहले कानूनी विवाद खड़ा करना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सुरक्षा और हिंसा पर पहले से सख्ती गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पहले ही चुनाव बाद हिंसा को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। राज्य में सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, ताकि मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।  

surbhi मई 2, 2026 0
BJP leader reacting to Mamata Banerjee's EVM allegations ahead of Bengal vote counting
ममता बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार, बोली– TMC पहले से बना रही हार के बहाने

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ईवीएम में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा जवाब दिया है। बीजेपी का पलटवार बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि एग्जिट पोल के बाद साफ दिख रहा है कि बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी संभावित हार से घबराकर पहले से ही बहाने बना रही है और ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी नेता राम कृपाल यादव ने भी ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने टीएमसी को नकार दिया है और चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हुए हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की तारीफ करते हुए कहा कि उसने पूरी ईमानदारी से चुनाव प्रक्रिया को अंजाम दिया है। ममता बनर्जी ने क्या कहा? इससे पहले ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया था। वह करीब चार घंटे तक वहां रहीं और रात 12 बजे के बाद बाहर निकलीं। उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “जनता के वोट पूरी तरह सुरक्षित रहने चाहिए,” उन्होंने कहा। पारदर्शिता की मांग ममता बनर्जी ने सुझाव दिया कि मतगणना केंद्रों पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मीडिया के लिए सीसीटीवी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षाबलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, हालांकि बाद में उन्हें प्रवेश की अनुमति दे दी गई। 4 मई से पहले बढ़ा सियासी तनाव 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी इन आरोपों को बेबुनियाद बता रही है। अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0