बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और चल रही परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे। कैमूर और रोहतास में कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह के समय कैमूर जिले पहुंचेंगे, जहां वे विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर में उनका कार्यक्रम रोहतास जिले में निर्धारित है, जहां वे विकास कार्यों की समीक्षा के साथ नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। जनता से सीधा संवाद करेंगे CM इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोनों जिलों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इन सभाओं के माध्यम से वे आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। विकास कार्यों की होगी समीक्षा ‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जिलों में चल रही योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना है। नीतीश कुमार अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दोनों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। जिलों को मिलेंगी नई योजनाओं की सौगात इस दौरे के दौरान कैमूर और रोहतास जिले को कई नई विकास योजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
68.41 करोड़ की लागत से तैयार होगा आधुनिक बाजार, ई-नाम से जुड़कर देश-विदेश तक पहुंचेगा उत्पाद पटना: बिहार के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजधानी पटना के मुसल्लहपुर कृषि उत्पादन बाजार प्रांगण को अब हाईटेक मंडी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद किसानों और व्यापारियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस एक सुव्यवस्थित बाजार मिलेगा। 68 करोड़ से होगा आधुनिकरण कृषि विभाग की ओर से इस प्रोजेक्ट के लिए 68.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। निर्माण कार्य बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के जरिए कराया जा रहा है। इस हाईटेक मंडी में पेयजल, शौचालय, बिजली, सुरक्षा, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और गोदाम जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ई-नाम से जुड़ेगा बाजार इस मंडी को ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को अपने उत्पाद देश और विदेश की मंडियों में बेचने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें फसल का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी। किसानों और व्यापारियों को मिलेंगी खास सुविधाएं मंडी के आधुनिकीकरण के बाद यहां- कोल्ड स्टोरेज की सुविधा संतरा भंडारण के लिए विशेष चैंबर प्रदर्शनी हॉल जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा किसानों की गाड़ियों के आवागमन को आसान बनाने के लिए भी विशेष मांगें उठाई गई हैं। निर्माण कार्य 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्माण एजेंसी के अनुसार, इस परियोजना को साल 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद यह मंडी पूरी तरह आधुनिक स्वरूप में काम करने लगेगी। जमीन सीमांकन में आ रही दिक्कत हालांकि, बाजार परिसर के लगभग तीन-चौथाई हिस्से का सीमांकन अब तक पूरा नहीं हुआ है, जिससे चहारदीवारी निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को जल्द इस प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया है।
6500 करोड़ की मेगा परियोजना से पटना के जाम से मिलेगी राहत, बिहार की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव पटना: बिहार की राजधानी पटना में ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जेपी गंगा पथ के विस्तार कार्य की शुरुआत हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दीघा से कोईलवर तक का 36 किलोमीटर का सफर महज 30 मिनट में तय किया जा सकेगा। 36 किलोमीटर लंबा मेगा प्रोजेक्ट यह फोरलेन सड़क दीघा जेपी सेतु से शुरू होकर शेरपुर-बिहटा होते हुए कोईलवर पुल तक जाएगी। कुल 36 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में 18 किमी एलिवेटेड (ऊपर) और 18 किमी जमीन पर सड़क बनाई जाएगी। पथ निर्माण विभाग के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत लगभग 6500 करोड़ रुपये है, जो इसे बिहार की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल करता है। जाम से मिलेगी बड़ी राहत फिलहाल पटना से कोईलवर जाने के लिए लोगों को मनेर या खगौल-बिहटा रोड से होकर गुजरना पड़ता है, जहां अक्सर भारी जाम लगता है और सफर में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग जाता है। नई सड़क बनने के बाद यह दूरी आधे घंटे में पूरी हो सकेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। पहली बार अपनाया गया हाइब्रिड मॉडल इस परियोजना में ‘हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल’ का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बिहार में इस स्तर पर पहली बार लागू हो रहा है। इस मॉडल के तहत सड़क बनाने वाली एजेंसी को ही अगले 15 वर्षों तक इसका रखरखाव भी करना होगा, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी। बिहार के लिए बनेगा नया कनेक्टिविटी कॉरिडोर यह सड़क शेरपुर के पास प्रस्तावित छह लेन पुल से भी जुड़ेगी, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार होगा। इसका फायदा सारण, वैशाली, आरा और बक्सर जैसे इलाकों को सीधे मिलेगा। साथ ही, दानापुर और बिहटा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम होगा। तय समय में पूरा करने का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य हैदराबाद की कंपनी विश्व समुद्रा द्वारा किया जा रहा है और अधिकांश हिस्सों में जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा हो चुका है।
जनसंवाद के साथ विकास परियोजनाओं की समीक्षा, कई योजनाओं का होगा लोकार्पण और शिलान्यास बिहार में विकास कार्यों को रफ्तार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ जारी है। इस यात्रा के चौथे चरण के दूसरे दिन बुधवार को मुख्यमंत्री जमुई और नवादा जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोनों जिलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। जमुई को 914 करोड़ की 370 परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्रम जमुई जिले में होगा, जहां वे कुल 914 करोड़ रुपये की 370 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 602 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 181 परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 312 करोड़ रुपये की 189 नई योजनाओं का शिलान्यास होगा। इससे जिले में आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सिकंदरा में जनसंवाद, विकास कार्यों की समीक्षा जमुई के सिकंदरा में मुख्यमंत्री का जनसंवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। यहां वे स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इसके साथ ही नवादा जिले में भी वे विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लेंगे और नई योजनाओं की घोषणा करेंगे। पहले दिन भागलपुर और बांका को मिली सौगात ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण की शुरुआत मंगलवार से हुई थी। पहले दिन मुख्यमंत्री ने भागलपुर और बांका जिले का दौरा किया। इस दौरान भागलपुर में 441.32 करोड़ रुपये की 144 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया, जबकि बांका में करीब 708 करोड़ रुपये की 497 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ। 20 मार्च तक तय कार्यक्रम, बढ़ सकती है अवधि आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार ‘समृद्धि यात्रा’ का यह चरण 20 मार्च तक चलना है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा की अवधि बढ़ाकर 30 मार्च तक किए जाने की संभावना है। इससे राज्य के अन्य जिलों में भी विकास योजनाओं की समीक्षा और घोषणाएं की जा सकती हैं। आगे की राजनीतिक हलचल पर नजर सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। वहीं 14 अप्रैल के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की भी चर्चा तेज हो गई है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। विकास और संवाद पर फोकस ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए मुख्यमंत्री का जोर विकास कार्यों को जमीन पर उतारने और आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर है। इस पहल से राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को मिलेगा लाभ, सड़क किनारे लगेंगे हजारों फलदार पेड़ बिहार में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले से जहां हरियाली बढ़ेगी, वहीं स्थानीय किसानों को भी आर्थिक फायदा मिलने की उम्मीद है। 65 किलोमीटर क्षेत्र में लगेंगे 21,500 पौधे इस परियोजना के तहत गया वन प्रमंडल के अंतर्गत लगभग 65 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 से 2028-29 के बीच करीब 21 हजार 500 पौधे लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि सड़क के दोनों किनारों पर फलदार और छायादार पेड़ लगाए जाएंगे, जिससे पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ आय के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों को दी जाएगी ट्रेनिंग और प्रोत्साहन राशि सरकार इस योजना में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है। इसके लिए किसानों को पौधारोपण और देखभाल की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें यह भी बताया जाएगा कि किस तरह पौधों से आर्थिक लाभ लिया जा सकता है। इसके साथ ही किसानों को प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि वे इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित हों। मंत्री प्रमोद कुमार ने दिए सख्त निर्देश पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रमोद कुमार ने इस योजना को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षेत्र का निरीक्षण कर उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाए और कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। इस परियोजना के लिए हरियाली मिशन के निदेशक को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। 19 मार्च को होगी अहम बैठक इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए 19 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें हरियाली और पर्यावरण क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में कॉरिडोर के विकास को लेकर सुझाव लिए जाएंगे, ताकि इसे और बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। इन फलदार पेड़ों से सजेगा ग्रीन कॉरिडोर ग्रीन कॉरिडोर के तहत लगभग 5 किलोमीटर के अंतराल में विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पेड़ लगाए जाएंगे। इनमें अमरूद, लीची, बेल, नींबू, आम, कटहल, सहजन, बरगद, पीपल, नीम और आंवला जैसे पौधे शामिल हैं। इससे न केवल सड़क की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। पर्यावरण और विकास का संतुलन पटना-गया-डोभी एनएच को ग्रीन कॉरिडोर में बदलने की यह पहल राज्य में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना बिहार के लिए एक मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।
पटना: राजधानी पटना को आधुनिक और टेक्नोलॉजी से लैस शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पटना नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 2914 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। यह बैठक मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाने और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बदलेगा पटना का चेहरा इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ‘स्मार्ट सिटी’ की अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है। अब पटना की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें खुद-ब-खुद जलेंगी और बुझेंगी। इसके लिए IoT आधारित सेंसर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अंधेरा होते ही लाइटें अपने आप चालू हो जाएंगी और सुबह होते ही बंद हो जाएंगी। सेंसर लाइट और सेंट्रल कमांड सेंटर की व्यवस्था नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, शहर की मौजूदा करीब 82 हजार स्ट्रीट लाइटों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट लाइट में बदला जाएगा। नई कॉलोनियों और गलियों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए सर्वे कराया जाएगा। इन सभी लाइटों की निगरानी एक सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर से होगी, जहां से खराबी की तुरंत जानकारी मिल सकेगी और मरम्मत में तेजी आएगी। पैदल यात्रियों के लिए ‘डिमांड लाइट’ सिस्टम बजट में आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘डिमांड ट्रैफिक लाइट’ सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत सड़क पार करने के लिए पैदल यात्री को केवल एक बटन दबाना होगा, जिसके बाद सिग्नल लाल हो जाएगा और वाहनों की आवाजाही रुक जाएगी। हालांकि, ट्रैफिक जाम से बचने के लिए इस सुविधा के उपयोग के बीच 20 मिनट का अंतर रखा गया है। जीआईएस मैपिंग से बढ़ेगा नगर निगम का राजस्व नगर निगम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शहर की सभी संपत्तियों की GIS मैपिंग कराई जाएगी। इससे होल्डिंग टैक्स की चोरी पर रोक लगेगी और राजस्व में इजाफा होगा। इस वित्तीय वर्ष में होल्डिंग टैक्स से 137 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है। अन्य सुविधाएं भी होंगी बेहतर इस बजट में आम लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। शहर के सभी छह अंचलों में शव वाहन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जरूरतमंद परिवारों को आसानी से सेवा मिल सके। इसके अलावा, पटना में प्रवेश करने वाले सात प्रमुख मार्गों पर आकर्षक प्रवेश द्वार भी बनाए जाएंगे। आधुनिक पटना की ओर बड़ा कदम कुल मिलाकर, पटना नगर निगम का यह बजट शहर को तकनीकी रूप से उन्नत और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर शहर की यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और जीवनशैली पर साफ तौर पर दिखाई देगा।
तीसरे चरण की यात्रा का अंतिम दिन बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की चल रही “समृद्धि यात्रा” का शनिवार को आखिरी दिन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Begusarai और Sheikhpura जिलों का दौरा करेंगे। दौरे के दौरान वे दोनों जिलों में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। इस दौरान मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, जिनके साथ योजनाओं की प्रगति को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। बेगूसराय में सैकड़ों योजनाओं की शुरुआत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के तहत बेगूसराय जिले में 109 करोड़ रुपये की लागत से 189 नई योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। इसके अलावा लगभग 165 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी 211 योजनाओं का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री के हाथों होगा। इन योजनाओं के जरिए सड़क, आधारभूत ढांचा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। शेखपुरा को भी मिलेगा विकास का बड़ा पैकेज बेगूसराय के बाद मुख्यमंत्री शेखपुरा जिले का दौरा करेंगे। यहां 144 करोड़ रुपये की लागत से 120 योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, जबकि 62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 196 योजनाओं का उद्घाटन होगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर सकते हैं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे सकते हैं। जनसंवाद कार्यक्रम में लोगों से करेंगे बातचीत इस यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary और Vijay Kumar Sinha भी मौजूद रहेंगे। बेगूसराय में मुख्यमंत्री मेडिकल कॉलेज और कुछ औद्योगिक इकाइयों का भी निरीक्षण कर सकते हैं। इसके बाद शेखपुरा में विभिन्न परियोजनाओं का जायजा लिया जाएगा। दोनों जिलों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जीविका दीदियों और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे। सहरसा और खगड़िया में भी हुई थी विकास योजनाओं की शुरुआत समृद्धि यात्रा के तहत शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने Saharsa और Khagaria जिलों का दौरा किया था। इस दौरान भी कई करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया और पूर्व की सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। वहीं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सहरसा एयरपोर्ट के लिए अगले महीने टेंडर जारी करने की घोषणा की।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत अररिया जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे करीब 545 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और कार्यारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा जिले में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेयरी क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। सुबह 10 बजे से शुरू होगा कार्यक्रम मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सुबह करीब 10 बजे न्यू पुलिस लाइन (हरियाबाड़ा) से शुरू होगा। यहां वे लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक पुलिस लाइन भवन का उद्घाटन करेंगे। करीब 35 एकड़ क्षेत्र में फैले इस परिसर में प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र, अस्पताल, स्कूल, महिला और पुरुष बैरक, पारिवारिक आवास, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवास तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिए भी आवासीय सुविधा विकसित की गई है। परिसर में मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड भी बनाया गया है। इससे जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। ANM-GNM नर्सिंग संस्थान का करेंगे उद्घाटन इसके बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से अररिया आरएस पहुंचेंगे, जहां वे 29.6 करोड़ रुपये की लागत से बने ANM-GNM प्रशिक्षण संस्थान (नर्सिंग कॉलेज) का उद्घाटन करेंगे। इस संस्थान का शिलान्यास वर्ष 2017 में किया गया था और अब इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यहां हर साल करीब 200 छात्र-छात्राओं को नर्सिंग प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार और करियर के नए अवसर मिलेंगे। अररिया कॉलेज स्टेडियम में समीक्षा बैठक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अररिया कॉलेज स्टेडियम में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। इसके साथ ही वे जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विकास योजनाओं के स्टॉलों का निरीक्षण भी करेंगे। 545 करोड़ की योजनाओं का होगा शुभारंभ मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कुल 545 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। इसमें 330.60 करोड़ रुपये की 6 योजनाओं का शिलान्यास 157.16 करोड़ रुपये की 60 योजनाओं का उद्घाटन 58.12 करोड़ रुपये की 2 योजनाओं का कार्यारंभ शामिल है। इन योजनाओं में अररिया आरएस स्थित मिल्क चिलिंग प्लांट के नवीकरण की महत्वपूर्ण परियोजना भी शामिल है। वर्तमान में इस प्लांट की क्षमता 21 हजार लीटर प्रतिदिन है, जिसे बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। इससे लगभग 350 सहकारी समितियों से दूध संग्रह की व्यवस्था और मजबूत होगी तथा डेयरी से जुड़े किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। दोपहर 1:30 बजे किशनगंज के लिए होंगे रवाना मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं की पूरी तैयारी कर ली है। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1:30 बजे बाजार समिति हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से किशनगंज के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा अररिया जिले में विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।
बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण को मजबूत बनाने के लिए सरकार का ब्लू प्रिंट तैयार बिहार सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अगले पांच वर्षों में लगभग 78,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना तैयार की गई है। इस संबंध में ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें Confederation of Indian Industry (CII) के प्रतिनिधि, ऊर्जा विभाग के अधिकारी और Bihar State Power Holding Company Limited (BSPHCL) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में 2026 से 2031 के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाओं और योजनाओं पर चर्चा की गई। औद्योगिक विकास के लिए मजबूत बिजली ढांचा जरूरी बैठक के दौरान ऊर्जा सचिव ने कहा कि आने वाले समय में बिहार एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकता है। इसके लिए राज्य में बिजली ढांचे को और मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित तकनीकों को और बेहतर किया जाएगा। इससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और निगरानी दोनों में सुधार होगा। निवेशकों को दिया भरोसा बैठक में निवेशकों को आश्वस्त किया गया कि Bihar State Power Holding Company Limited और उसकी सहयोगी कंपनियां निवेशकों के साथ मिलकर काम करेंगी। सरकार का लक्ष्य राज्य में बिजली क्षेत्र को और अधिक मजबूत और आधुनिक बनाना है। बिजली क्षेत्र में तेजी से हुआ सुधार पिछले कुछ वर्षों में बिहार के बिजली क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। राज्य में बिजली क्षेत्र का राजस्व संग्रह 2020 में 8,598 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 17,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही AT&C हानि 35.12 प्रतिशत से घटकर 15.54 प्रतिशत रह गई है, जो बिजली वितरण प्रणाली में सुधार को दर्शाता है। दस वर्षों में 75 हजार करोड़ से अधिक निवेश पिछले एक दशक में बिहार के बिजली क्षेत्र में 75,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 2013 के 1,802 मेगावाट से बढ़कर 2025 में 8,752 मेगावाट तक पहुंच गई है। इस बैठक में South Bihar Power Distribution Company Limited के अधिकारी, CII के प्रतिनिधि और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी देश की कई प्रमुख कंपनियों के करीब 17 प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सरकार का मानना है कि प्रस्तावित निवेश से बिहार में ऊर्जा क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और उद्योगों को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।