Jharkhand में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कहीं तेज गर्मी लोगों को परेशान कर रही है तो कई जिलों में आंधी, बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने 20 मई के लिए कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग के अनुसार 20 मई को: Bokaro Giridih Dhanbad Deoghar Jamtara Dumka Godda Sahibganj Pakur में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने, वज्रपात और बारिश की संभावना है। रांची समेत कई जिलों में बारिश के आसार Ranchi सहित: Hazaribagh Koderma Chatra Ramgarh Khunti Saraikela Jamshedpur West Singhbhum में बादल छाए रहने, 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। 21 और 22 मई को लू का अलर्ट मौसम विभाग ने 21 मई को: Garhwa Palamu Chatra Latehar में लू चलने की संभावना जताई है। हालांकि बाकी जिलों में दोपहर बाद मौसम बदल सकता है और कहीं-कहीं बारिश भी हो सकती है। 22 मई को भी मौसम का यही पैटर्न बने रहने की संभावना है। 23 मई को फिर तेज आंधी-बारिश की चेतावनी 23 मई को: रांची रामगढ़ हजारीबाग बोकारो चतरा कोडरमा गिरिडीह धनबाद जामताड़ा देवघर दुमका पाकुड़ साहिबगंज में दोपहर बाद तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की आशंका है। हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने फिर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा राज्य के बाकी हिस्सों में भी तेज हवा और बारिश की संभावना बनी हुई है। विभाग ने 25 मई तक पूरे झारखंड में येलो अलर्ट जारी किया है। रांची और मेदिनीनगर का तापमान पिछले 24 घंटों में: रांची का अधिकतम तापमान 1.2 डिग्री बढ़कर 37.4°C दर्ज किया गया Medininagar का तापमान 42.4°C रहा जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 40.4°C रिकॉर्ड किया गया वहीं सरायकेला में 7 मिमी बारिश दर्ज की गई और खूंटी समेत कई इलाकों में तेज हवा चली।
बोकारो। बोकारो पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नया मोड़ बस स्टैंड से 47 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर इस अवैध गांजा की खेप को बस के माध्यम से बिहार भेजने की तैयारी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में गांजा जब्त कर लिया गया, जबकि तस्कर मौके से फरार हो गए। बरामद गांजा की कीमत लगभग 5 से 7 लाख रुपये आंकी गई है। गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष टीम सिटी डीएसपी Alok Ranjan ने बताया कि 9 मई की शाम पुलिस अधीक्षक Nathu Singh Meena को सूचना मिली थी कि बीएस सिटी थाना क्षेत्र स्थित नया मोड़ बस स्टैंड से अवैध गांजा बिहार भेजा जाने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। दो प्लास्टिक बोरों से मिला गांजा छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने पवनसुत बस पड़ाव के चबूतरे पर संदिग्ध अवस्था में रखे दो प्लास्टिक के बोरों की तलाशी ली। जांच में दोनों बोरों से 47 पैकेट में बंद करीब 47 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक तस्कर इसे बस के जरिए बिहार भेजने की फिराक में थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज इस मामले में बीएस सिटी थाना कांड संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान दो संदिग्ध तस्करों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
रांची। झारखंड के बोकारो जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है। यह विवाद पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र में एक ही साथ 28 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को निलंबित किए जाने के बाद उपजा है। एसोसिएशन ने इस सामूहिक निलंबन को पूरी तरह से अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसपी की कार्यशैली पर सवाल और निलंबन का विरोध झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने जिले के पुलिस कप्तान की प्रशासनिक क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का मानना है कि पिंड्राजोरा थाना कांड की समीक्षा करने और समय रहते उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने में बोकारो एसपी पूरी तरह विफल रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि एसपी जिले में अपना नियंत्रण खो चुके हैं और अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए उन्होंने निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर गाज गिराई है। एसोसिएशन के अनुसार, एक ही थाने के 28 कर्मियों को एक साथ सस्पेंड करना यह दर्शाता है कि वरिष्ठ अधिकारियों में सामंजस्य की कमी है। अध्यक्ष ने दो-टूक शब्दों में कहा कि एसोसिएशन अपने सदस्यों के साथ हो रहे किसी भी अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा और न्याय पाने के लिए सरकार या किसी भी सक्षम प्राधिकार के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखेगा। क्या है पूरा मामला: बच्ची की गुमशुदगी और हाई कोर्ट का दखल इस पूरे विवाद की जड़ बोकारो के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र की एक पुरानी घटना है। यहाँ से एक नाबालिग बच्ची लापता हो गई थी, जिसके बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। परिजनों का आरोप था कि सहयोग करने के बजाय पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। न्याय न मिलता देख पीड़ित परिवार ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पिछले सप्ताह पुलिस ने एक नरकंकाल बरामद किया और दावा किया कि यह वही लापता बच्ची है। इस पूरे प्रकरण में हुई लापरवाही और कोर्ट की फटकार के बीच शनिवार को एसपी हरविंदर सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत पूरे 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इसी कदम ने अब पुलिस महकमे के भीतर ही एक आंतरिक युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। पारदर्शिता और बहाली की मांग झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि निलंबित किए गए निर्दोष पुलिस अधिकारियों और जवानों को तुरंत बहाल किया जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि कानून सम्मत कार्रवाई के बजाय एकतरफा निलंबन से पुलिस बल का मनोबल गिरता है। इसके साथ ही, जिले में होने वाले पुलिसकर्मियों के तबादलों और पोस्टिंग में पारदर्शिता बरतने की भी पुरजोर वकालत की गई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और 'अक्षम' अधिकारियों को नहीं हटाया गया, तो वे अपने सदस्यों के हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। आने वाले दिनों में यह मामला तूल पकड़ सकता है, जिससे जिले की पुलिसिंग और प्रशासनिक छवि पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Central Board of Secondary Education ने स्कूलों के लिए एक अहम सर्कुलर जारी करते हुए कक्षा 6 से “तीसरी भाषा (R3)” पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। यह नई व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी। यह फैसला National Education Policy 2020 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाना और उनकी संवाद क्षमता को बेहतर करना है। स्कूलों को 7 दिन में करना होगा लागू CBSE ने साफ निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में अभी तक तीसरी भाषा नहीं पढ़ाई जा रही है, वे इसे 7 दिनों के भीतर लागू करें। बोर्ड ने कहा है कि इस प्रक्रिया में देरी स्वीकार नहीं होगी और सभी स्कूलों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। भाषा चयन में स्कूलों को छूट बोर्ड ने स्कूलों को यह स्वतंत्रता दी है कि वे भारत की किसी भी मान्यता प्राप्त भाषा को तीसरी भाषा के रूप में चुन सकते हैं। स्कूलों को यह जानकारी अपने क्षेत्रीय कार्यालय और OASIS पोर्टल पर अपडेट करनी होगी, ताकि बोर्ड निगरानी कर सके। एक बार चुनी भाषा आगे तक रहेगी जारी सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 6 में चुनी गई तीसरी भाषा कक्षा 9 और 10 तक जारी रहेगी। ऐसे में स्कूलों को भाषा का चयन सोच-समझकर करना होगा, क्योंकि इसका सीधा असर छात्रों की आगे की पढ़ाई पर पड़ेगा। बच्चों के समग्र विकास पर फोकस तीसरी भाषा का उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं, बल्कि बोलना, समझना और लिखना भी है। इसके तहत छात्रों को रोजमर्रा की बातचीत, कहानी और कविता समझने, सही उच्चारण के साथ पढ़ने और अपने विचार लिखने की ट्रेनिंग दी जाएगी। निगरानी भी करेगा बोर्ड CBSE ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय अधिकारी स्कूलों से जानकारी लेकर यह सुनिश्चित करेंगे कि नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि सही तरीके से लागू भी हों।
बोकारो। बोकारो में सामने आए ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासन और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। शुरुआत में यह गड़बड़ी 3.15 करोड़ रुपये बताई गई थी, जो बाद में 4.29 करोड़ तक पहुंची और अब जांच में यह रकम 6 करोड़ रुपये से अधिक होने के संकेत मिले हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, घोटाले का असली आकार सामने आता जा रहा है। 2016 से चल रहा था फर्जी निकासी का खेल उपायुक्त अजय नाथ झा के अनुसार, कोषागार से अवैध निकासी का यह मामला वर्ष 2016 से चल रहा था। पुलिस विभाग के एक लेखपाल द्वारा इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। जांच में कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें राम नरेश सिंह, उपेंद्र सिंह और एस कुमार शामिल हैं। इन लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से राशि निकाली गई। राज्य और जिला स्तर पर जांच तेज मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। इसके अलावा राज्य स्तर पर भी अलग से जांच जारी है, ताकि किसी भी पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई प्रशासन ने इस मामले को “जीरो टॉलरेंस” श्रेणी में रखा है। उपायुक्त ने साफ कहा है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आगे और बड़े खुलासे संभव अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस घोटाले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल प्रशासन और पुलिस दोनों मिलकर मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटे हैं, ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
बोकारो। रामनवमी जुलूस के दौरान झारखंड के बोकारो जिले में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको गांव में शोभायात्रा और अखाड़ा मिलन के दौरान धार्मिक ध्वज (महावीरी पताका) 1 लाख 33 हजार वोल्ट की हाई टेंशन लाइन की चपेट में आ गया, जिससे छह लोग झुलस गए। इनमें दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार स्थानीय लोगों के अनुसार, रामनवमी के मौके पर गांव में विभिन्न अखाड़ों द्वारा पारंपरिक जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस समाप्त होने के बाद धार्मिक ध्वज स्थापित करने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान ध्वज का लंबा डंडा ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन के बेहद करीब पहुंच गया और अचानक उसमें करंट दौड़ गया। इसके संपर्क में आने से मौके पर मौजूद छह लोग झुलस गए। महावीरी पताका बना हादसे की वजह प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब अखाड़ा मिलन के बाद महावीरी पताका को खड़ा किया जा रहा था। ध्वज का डंडा ऊंचा होने के कारण वह 1,33,000 वोल्ट की लाइन के संपर्क में आ गया। करंट का तेज झटका लगते ही आसपास मौजूद लोग चीख-पुकार करने लगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। गांव के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर बीटीपीएस डीवीसी और जारंगडीह जनता अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल रेफर किया गया। दो की हालत गंभीर, बाकी खतरे से बाहर घायलों में दो लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, हालांकि डॉक्टरों ने सभी को फिलहाल खतरे से बाहर बताया है। हादसे के बाद घायलों के परिजन और ग्रामीण अस्पताल में बड़ी संख्या में जुट गए। स्थानीय मुखिया साबिर अंसारी ने बताया कि प्रशासन द्वारा पहले ही 220, 440 और 11,000 वोल्ट की लाइन कटवा दी गई थी, ताकि जुलूस के दौरान कोई दुर्घटना न हो। लेकिन लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऊपर से 1,33,000 वोल्ट की हाई टेंशन लाइन भी गुजर रही है, जिसकी चपेट में आने से यह हादसा हो गया। प्रशासन और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही बेरमो एसडीएम मुकेश कुमार मछुआ, एसडीपीओ वशिष्ठ नारायण सिंह, पेटरवार बीडीओ संतोष महतो और थाना प्रभारी राजू कुमार मुंडा सहित प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया।
बोकारो। Steel Authority of India Limited (SAIL) में नए चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक के चयन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस अहम पद के लिए 10 उम्मीदवारों का ऑनलाइन इंटरव्यू 28 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक आयोजित किया जाएगा। 28 मार्च को ऑनलाइन इंटरव्यू SAIL के शीर्ष पद के लिए तय इस इंटरव्यू प्रक्रिया में सभी 10 दावेदार हिस्सा लेंगे। साक्षात्कार समाप्त होने के बाद Public Enterprises Selection Board (PESB) चयनित नाम को आगे की मंजूरी के लिए भेजेगा। कुछ ही घंटों में आ सकता है फैसला सूत्रों के मुताबिक इंटरव्यू के तुरंत बाद ही नतीजों की घोषणा की जा सकती है। इसके बाद चयनित नाम को कैबिनेट कमेटी के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही नए चेयरमैन पदभार संभालेंगे। अंदर और बाहर के उम्मीदवारों में मुकाबला इस बार कुल 10 उम्मीदवारों में 6 SAIL के भीतर से हैं, जबकि 4 उम्मीदवार बाहरी संगठनों और रेलवे पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी से चयन प्रक्रिया और रोचक हो गई है। प्रमुख दावेदारों के नाम एके पांडा (निदेशक, वित्त) मनीष राज गुप्ता (निदेशक, माइनिंग) आलोक वर्मा (निदेशक प्रभारी, राउरकेला स्टील प्लांट) अनीश दासगुप्ता (ईडी, प्रोजेक्ट, बोकारो स्टील प्लांट) एमपी सिंह और विपिन कुमार गिरी (SAIL माइंस ग्रुप) कृष्ण गोपाल अग्रवाल (निदेशक, वित्त, RITES Limited) अनूप कुमार सतपति और डॉ. पुड़ी हरिप्रसाद (रेलवे पृष्ठभूमि) चेतन प्रकाश जैन (सीएमडी, Central Electronics Limited) नए चेयरमैन के सामने चुनौतियां नए प्रमुख के सामने कंपनी की विस्तार और आधुनिकीकरण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाले इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। अंतरिम व्यवस्था पर विचार पूर्व चेयरमैन अमरेंदु प्रकाश के इस्तीफे के बाद पद खाली है। ऐसे में Ministry of Steel अंतरिम कार्यवाहक चेयरमैन नियुक्त करने पर भी विचार कर रहा है, ताकि कामकाज प्रभावित न हो। पांच साल का होगा कार्यकाल बता दें नए चेयरमैन का कार्यकाल पांच वर्षों का होगा। सरकार ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर सके और SAIL को नई ऊंचाइयों तक ले जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।