भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। सोमवार को शुरुआती भारी गिरावट के बाद बाजार ने जिस तरह वापसी की थी, उसी तेजी को आज भी जारी रखा गया। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 400 अंकों की मजबूती के साथ 75,700 के ऊपर कारोबार करता नजर आया, जबकि NIFTY 50 100 अंकों की तेजी के साथ 23,750 के पार पहुंच गया। बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखा। आईटी शेयरों में लगातार खरीदारी आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मजबूती आईटी सेक्टर में देखने को मिली। Nifty IT इंडेक्स के शेयरों में जोरदार खरीदारी जारी रही। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशक आईटी कंपनियों के लंबे समय के ग्रोथ आउटलुक को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। इसी वजह से इस सेक्टर में लगातार निवेश बढ़ रहा है। हालांकि दूसरी तरफ Nifty Private Bank इंडेक्स पर दबाव बना रहा। प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख एशियाई बाजारों से मिले संकेत पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। Hang Seng Index में 0.24% की बढ़त दर्ज की गई। Nikkei 225 में 0.64% की गिरावट रही। KOSPI में 3% से ज्यादा की बड़ी कमजोरी देखने को मिली। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती बनाए रखी। अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार बीती रात अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average 160 अंक चढ़कर बंद हुआ। Nasdaq Composite में गिरावट रही। S&P 500 लगभग सपाट बंद हुआ। टेक शेयरों में दबाव और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता अमेरिकी बाजारों पर असर डालती दिखी। विदेशी निवेशकों की वापसी बनी बड़ा सहारा भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों की वापसी मानी जा रही है। काफी समय से लगातार बिकवाली कर रहे Foreign Institutional Investors (FII/FPI) सोमवार को खरीदारी करते नजर आए। निवेशकों की स्थिति कैटेगरी सोमवार की स्थिति FII/FPI ₹1,329 करोड़ की खरीदारी DII ₹1,959 करोड़ की बिकवाली हालांकि पिछले 30 दिनों में विदेशी निवेशक अब भी बिकवाल बने हुए हैं, लेकिन हालिया खरीदारी ने बाजार को बड़ा समर्थन दिया है। निवेशकों की नजर अब किस पर? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: वैश्विक बाजारों का रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत विदेशी निवेशकों का फ्लो आईटी और बैंकिंग सेक्टर की चाल भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार में लौटती मजबूती ने निवेशकों का भरोसा जरूर बढ़ाया है।
घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताते हुए लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी है। 24 घंटे में यह उनकी दूसरी ऐसी अपील मानी जा रही है। दो दिन में 2,000 अंक टूटा Sensex मंगलवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 850 अंक तक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 860.48 अंक यानी 1.13% गिरकर 75,154.80 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226.75 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,589.10 पर पहुंच गया। सोमवार को भी सेंसेक्स 1312.91 अंक गिरा था। इस तरह दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक टूट चुका है। रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.2 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? Infosys में सबसे ज्यादा 2.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा: Tech Mahindra Tata Consultancy Services HCL Technologies Asian Paints HDFC Bank Bajaj Finserv Titan Company जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Tata Steel और UltraTech Cement के शेयरों में तेजी रही। निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान लगातार गिरावट के कारण Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 462 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 1.03% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.34% टूट गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में Saudi Aramco की चेतावनी के बाद तेल बाजार में चिंता और बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कुवैत और अन्य देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
मुंबई, एजेंसियां। चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझानों के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। BSE Sensex खुलते ही करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के पार पहुंच गया और कुछ ही देर में 900 अंकों से ज्यादा उछल गया। वहीं Nifty 50 भी करीब 193 अंकों की तेजी के साथ 24,190 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में जोरदार खरीदारी बाजार में तेजी का असर अलग-अलग सेक्टरों में भी देखने को मिला। Nifty Bank करीब 325 अंक चढ़कर 55,188 पर पहुंच गया, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। ऑटो सेक्टर में 2% से ज्यादा की तेजी रही, वहीं FMCG शेयर भी 1% से अधिक ऊपर कारोबार करते नजर आए। चुनावी रुझानों का असर विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में सत्तारूढ़ दल को बढ़त मिलने के संकेत से बाजार में सकारात्मक माहौल बना। राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे खरीदारी में तेजी आई। अधिकांश शेयर हरे निशान में शेयर बाजार में आज व्यापक तेजी देखने को मिली। कुल 903 शेयरों में ट्रेडिंग शुरू हुई, जिनमें से 742 शेयर बढ़त में रहे, जबकि केवल 107 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 69 शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए, जो बाजार में मजबूत रुझान का संकेत है। तेजी के संकेत बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चुनावी नतीजे इसी दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो बाजार में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांक BSE Sensex 494.12 अंक गिरकर 78,779.21 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी 142.2 अंक टूटकर 24,434.40 पर आ गया। इससे पहले मंगलवार को बाजार में तेज बढ़त दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 753 अंक चढ़कर 79,273 के करीब बंद हुआ था। आईटी और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली बाजार में गिरावट का मुख्य कारण आईटी और बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली रही। प्रमुख कंपनियों जैसे इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला। एचसीएल टेक के कमजोर तिमाही संकेतों के बाद उसके शेयरों में भी करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई। रुपये पर दबाव, 31 पैसे कमजोर विदेशी बाजारों में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे गिरकर 93.75 पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा सत्र था जब रुपया दबाव में रहा। वैश्विक बाजार और कच्चे तेल का असर एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल के वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 98.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। पश्चिम एशिया में तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने तेल बाजार को प्रभावित किया। निवेशकों में सतर्कता का माहौल विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और कॉरपोरेट नतीजों की अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं। इसके चलते बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 20 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की। BSE Sensex और NSE Nifty 50 दोनों ही हरे निशान पर खुले, जिससे निवेशकों में उत्साह देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 139 अंकों की बढ़त के साथ करीब 78,632 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 लगभग 38 अंकों की तेजी के साथ 24,391 के पार पहुंच गया। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद संभला बाजार हालांकि बाजार में शुरुआत के कुछ मिनटों में हल्की गिरावट भी देखी गई, लेकिन जल्द ही रिकवरी हो गई। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 55 अंकों की बढ़त के साथ 78,549 पर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 24,360 के आसपास ट्रेड करता दिखा। इससे साफ है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल बीएसई के प्रमुख शेयरों में ट्रेंट, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, अडानी पोर्ट्स और एलएंडटी टॉप गेनर्स रहे। वहीं, एचडीएफसी बैंक, कोटक बैंक, रिलायंस और टाटा स्टील जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से बैंकिंग, ऑटो, एफएमसीजी और मिडकैप शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि आईटी सेक्टर थोड़ा दबाव में रहा। पिछले सत्र का असर भी दिखा इससे पहले शुक्रवार (17 अप्रैल) को भी बाजार में जोरदार तेजी रही थी। सेंसेक्स 504 अंकों की छलांग लगाकर 78,493 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 156 अंकों की बढ़त के साथ 24,353 के स्तर पर क्लोज हुआ था। इस सकारात्मक ट्रेंड का असर सोमवार के कारोबार में भी देखने को मिला। निवेशकों की नजर आगे की चाल पर विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई: बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को जबरदस्त उतार-चढ़ाव का सामना कराया। कभी तेज़ी तो कभी गिरावट–बाजार का रुख पूरी तरह रोलर कोस्टर जैसा रहा। इस दौरान जहां BSE Sensex ने महज लगभग 0.80% रिटर्न दिया, वहीं BSE 100 और BSE 500 ने क्रमशः 3.29% और 5.01% का सीमित रिटर्न ही निवेशकों को मिला। लेकिन इस अस्थिर माहौल में भी एक म्यूचुअल फंड स्कीम ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है। Mahindra Manulife Value Fund ने पिछले एक साल में करीब 16.39% का रिटर्न देकर निवेशकों को चौंका दिया है। लॉन्च के पहले साल में ही शानदार प्रदर्शन यह इक्विटी म्यूचुअल फंड 3 मार्च 2025 को लॉन्च हुआ था और अपने पहले ही साल में इसने मजबूत प्रदर्शन दिखाया। खास बात यह रही कि यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई जब वैश्विक और घरेलू बाजार भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता से जूझ रहे थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दौरान निवेशकों ने उन कंपनियों में ज्यादा भरोसा दिखाया जिनका कैश फ्लो मजबूत, वैल्यूएशन संतुलित और कमाई की स्पष्टता थी–यही इस फंड की रणनीति का आधार रहा। अन्य वैल्यू फंड्स से भी बेहतर ICRA Analytics के आंकड़ों के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 तक: Mahindra Manulife Value Fund: 16.39% DSP Value Fund: 15.66% LIC Value Fund: 15.29% Quant Value Fund: 14.53% वैल्यू फंड कैटेगरी का औसत रिटर्न लगभग 9.35% रहा, यानी इस फंड ने औसत से काफी बेहतर प्रदर्शन किया। क्यों सफल रही वैल्यू स्ट्रेटेजी? बीते वर्ष वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा बाजार की अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क बना दिया। ऐसे में निवेशकों ने महंगे स्टॉक्स से दूरी बनाकर मजबूत फंडामेंटल वाले सस्ते शेयरों की ओर रुख किया। यही कारण रहा कि वैल्यू आधारित निवेश रणनीति ने इस कठिन दौर में बेहतर प्रदर्शन किया और जोखिम को संतुलित रखते हुए रिटर्न दिया। कहां किया गया निवेश? इस फंड का पोर्टफोलियो मुख्य रूप से इक्विटी आधारित है: इक्विटी निवेश: 95.97% अन्य निवेश: 4.03% सेक्टर के हिसाब से सबसे ज्यादा निवेश: फाइनेंशियल सेक्टर: 17.11% एनर्जी: 13.14% हेल्थकेयर: 9.93% कैपिटल गुड्स: 9.62% ऑटोमोबाइल: 9.49% फंड मैनेजमेंट इस फंड को कृष्ण सांघवी और विशाल जाजू मैनेज कर रहे हैं, जिन्हें फरवरी 2025 में इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निवेशकों के लिए क्या संकेत? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता के दौर में वैल्यू फंड निवेशकों को स्थिरता और संतुलित रिटर्न देने में मदद करते हैं। ये रणनीति न सिर्फ जोखिम को कम करती है बल्कि लंबे समय में बेहतर अवसर भी प्रदान करती है।
नई दिल्ली: मार्च 2026 में बाजार की तेज गिरावट के बीच म्यूचुअल फंड हाउसों ने बड़ी रणनीतिक चाल चलते हुए अपने कैश रिजर्व का इस्तेमाल शेयर बाजार में निवेश के लिए किया। इसका असर यह हुआ कि म्यूचुअल फंड्स की कुल कैश होल्डिंग 16 महीनों के निचले स्तर पर आ गई। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में म्यूचुअल फंड्स की कैश होल्डिंग घटकर 1.86 लाख करोड़ रुपये रह गई, जो फरवरी के 2.1 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 24,319 करोड़ रुपये या 12 प्रतिशत कम है। यह स्तर दिसंबर 2024 के बाद सबसे निचला है। गिरते बाजार में खरीदारी का मौका वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारतीय बाजारों में दबाव बना रहा। इस दौरान कई शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गए। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों में करीब 11.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 10 प्रतिशत तक टूटे। इस गिरावट को म्यूचुअल फंड्स ने अवसर के रूप में देखा। करीब 60 प्रतिशत फंड हाउसों ने अपने कैश का इस्तेमाल कर शेयरों में निवेश बढ़ाया, जबकि बाकी ने अपनी कैश पोजिशन को बनाए रखा या थोड़ा बढ़ाया। कैश अनुपात भी घटा एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के मुकाबले कैश का अनुपात भी घटकर 4.73 प्रतिशत रह गया, जो फरवरी में 4.86 प्रतिशत और पिछले साल 5.76 प्रतिशत था। यह चार महीने का निचला स्तर है। किन फंड हाउसों ने घटाई कैश होल्डिंग बाजार में खरीदारी के चलते कई बड़े फंड हाउसों ने अपने कैश रिजर्व में कटौती की: SBI Mutual Fund: ₹34,704 करोड़ से घटकर ₹27,464 करोड़ ICICI Prudential Mutual Fund: ₹23,876 करोड़ से ₹17,290 करोड़ Motilal Oswal Mutual Fund: ₹6,722 करोड़ से ₹3,124 करोड़ HDFC Mutual Fund: ₹23,579 करोड़ से ₹21,352 करोड़ Quant Mutual Fund: ₹13,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ इसके अलावा Aditya Birla Mutual Fund, Tata Mutual Fund, Invesco Mutual Fund और DSP Mutual Fund जैसे फंड हाउसों ने भी कैश घटाया। किन्होंने बढ़ाई कैश पोजिशन हालांकि कुछ फंड हाउस सतर्क नजर आए और उन्होंने कैश होल्डिंग बढ़ाई: Nippon India Mutual Fund: ₹6,158 करोड़ से ₹7,811 करोड़ Axis Mutual Fund: ₹15,296 करोड़ से ₹16,470 करोड़ Edelweiss Mutual Fund: ₹1,147 करोड़ से ₹1,505 करोड़ इसके अलावा Baroda BNP Paribas, Canara Robeco, Abakkus और LIC Mutual Fund ने भी अपनी कैश पोजिशन में इजाफा किया।
मुंबई, एजेंसियां। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा कमजोरी के बावजूद BSE Sensex इस साल दिसंबर तक 95,000 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो करीब 24% की संभावित बढ़त को दर्शाता है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में आगे मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है। लॉन्ग टर्म में और बड़ा टारगेट ब्रोकरेज ने लंबी अवधि के लिए और भी अधिक आशावादी अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, सेंसेक्स 1,07,000 के स्तर तक भी पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 40% की बढ़त को दिखाता है। यह तेजी कई आर्थिक और कॉर्पोरेट फैक्टर्स पर आधारित मानी जा रही है। किन शर्तों पर टिकेगी बाजार की चाल रिपोर्ट के अनुसार बाजार की दिशा कुछ अहम शर्तों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं और वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच कंपनियों की कमाई में लगभग 19% सालाना वृद्धि होती है, तो बाजार में तेजी बनी रह सकती है। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों में गिरावट भी संभव है। ब्रोकरेज ने बेयर केस में सेंसेक्स के लिए 76,000 का टारगेट दिया है। ऐसा तब हो सकता है जब तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली जाएं और Reserve Bank of India सख्त मौद्रिक नीति अपनाए। किन सेक्टरों में दिख रहा मौका रिपोर्ट में बताया गया है कि फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और इंडस्ट्रियल सेक्टर में निवेश के अच्छे अवसर बन सकते हैं। वहीं एनर्जी, यूटिलिटीज और हेल्थकेयर सेक्टर में फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सुधार और नए ट्रेंड देंगे सपोर्ट सरकारी सुधार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ता निवेश और कंपनियों के बायबैक जैसे कारक बाजार को मजबूती दे सकते हैं। कुल मिलाकर, मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए भविष्य उम्मीदों से भरा नजर आ रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 885.32 अंक चढ़कर 74,953.77 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 307.65 अंक की बढ़त के साथ 23,220.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। रुपये में गिरावट शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 93.96 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में सतर्क आशावाद बना हुआ है। निवेशक फिलहाल भू-राजनीतिक हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक घटनाओं का असर मिडिल ईस्ट में तनाव, खासकर इज़राइल और ईरान के बीच जारी टकराव और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। हालांकि संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ सहारा दिया है। एशियाई बाजारों में तेजी एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान, सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल और सोने-चांदी का हाल ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जिससे वैश्विक बाजारों को राहत मिली। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई—24 कैरेट सोना 3.37% उछलकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4.82% बढ़कर 2,34,542 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। हफ्ते की शुरुआत में आई भारी गिरावट के बाद बाजार ने आज मजबूत वापसी की है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1500 अंकों से ज्यादा उछलकर 74,200 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से अधिक चढ़कर 22,850 के स्तर के ऊपर कारोबार करता दिखा। सोमवार की गिरावट के बाद तेज रिकवरी सोमवार को बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 1800 अंकों से ज्यादा टूटकर बंद हुआ था और निफ्टी भी 600 अंकों से अधिक लुढ़क गया था। हालांकि, आज निवेशकों का भरोसा लौटने के साथ बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी शुरुआती कारोबार में Shriram Finance, Eicher Motors, Asian Paints और IndiGo के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा HDFC Bank के शेयरों में भी रिकवरी देखने को मिली। हर सेक्टर में दिखी हरियाली आज के कारोबार में ऑटो, बैंकिंग, फार्मा, एनर्जी और पीएसयू बैंक जैसे लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। ज्यादातर सेक्टरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे बाजार की मजबूती साफ नजर आई। तेजी की बड़ी वजहें बाजार में तेजी की मुख्य वजह वैश्विक संकेत रहे। डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर संभावित हमले को टालने के बयान से वैश्विक तनाव कम हुआ है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में 14 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत है। निवेशकों के लिए संकेत विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक हालात स्थिर रहने और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहने पर बाजार में आगे भी तेजी बनी रह सकती है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex करीब 1,556 अंक टूटकर 72,977 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty भी लगभग 480 अंक गिरकर 22,634 पर आ गया। वहीं, भारतीय रुपया Indian Rupee अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। विशेषज्ञों ने बताया विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तनाव खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अल्टीमेटम ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है। निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा—एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (18 मार्च 2026) को भी तेजी का सिलसिला जारी रहा। लगातार तीसरे दिन बाजार हरे निशान में खुला, जिससे निवेशकों में उत्साह देखा गया। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में मजबूत बढ़त सुबह 9:16 बजे के आसपास: Nifty 50 23,683 के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब 102 अंकों (0.43%) की बढ़त है BSE Sensex 76,389 के स्तर पर रहा, जिसमें 319 अंकों (0.42%) की तेजी दर्ज की गई इससे पहले मंगलवार को भी बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ था। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा बाजार की इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय संकेतों का बड़ा योगदान रहा: अमेरिकी बाजारों में बढ़त, खासकर ट्रैवल सेक्टर में खरीदारी एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख कच्चे तेल की कीमतों में नरमी विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब वैश्विक तनाव के बावजूद स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? वी के विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, Geojit Investments Limited के अनुसार: बाजार में अनिश्चितता के बावजूद रिकवरी देखने को मिल रही है कच्चा तेल $120 के पार नहीं गया, इससे राहत मिली आगे बाजार अच्छे और बुरे खबरों पर सीमित प्रतिक्रिया देगा सेक्टर में बदल रहा निवेश का रुख रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक अब कुछ सेक्टरों में अपनी रणनीति बदल रहे हैं: IT और महंगे FMCG से पैसा निकल रहा है टेलीकॉम, फार्मा, डिफेंस और फाइनेंशियल सेक्टर में निवेश बढ़ रहा है इससे टेलीकॉम जैसे सेक्टर में मजबूती देखी जा रही है। FII-DII का अलग-अलग रुख मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार: विदेशी निवेशक (FII) ने ₹4,741 करोड़ की बिकवाली की घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने ₹5,225 करोड़ की खरीदारी की यानी घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया। तेल और सोने का हाल कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट अमेरिका में क्रूड स्टॉक बढ़ने के संकेत सोने की कीमतें स्थिर, निवेशक सतर्क आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि: बाजार में फिलहाल हल्की सकारात्मक धारणा बनी रह सकती है वैश्विक घटनाओं और फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर रहेगी निवेशक सतर्क रहकर ही निवेश कर रहे हैं
मुंबई, एजेंसियां। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिला है। 27 फरवरी से ही वैश्विक बाजारों का सेंटीमेंट कमजोर होना शुरू हो गया था और इसके बाद निवेशकों में भारी घबराहट देखने को मिली। इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा, जहां प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। भारतीय बाजार में 9% से ज्यादा की गिरावट BSE Sensex और Nifty 50 में 26 फरवरी के बाद से 9 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। सेंसेक्स 82,248 अंकों से गिरकर करीब 74,563 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 25,496 अंकों से घटकर लगभग 23,151 अंक पर पहुंच गया। शुक्रवार को भी बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स करीब 1,470 अंक टूट गया। अमेरिकी बाजार भी दबाव में वैश्विक असर से अमेरिकी शेयर बाजार भी अछूते नहीं रहे ।नैस्डेक में लगभग 3.38%, S&P 500 में करीब 4% और Dow Jones Industrial Average में लगभग 6% तक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है। भारतीय निवेशकों को भारी नुकसान भारतीय बाजार में गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक 26 फरवरी के बाद से बीएसई का मार्केट कैप करीब 39 लाख करोड़ रुपये घट गया है। यानी इतने बड़े पैमाने पर निवेशकों की संपत्ति कम हो गई है। कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का असर विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 88% तेल आयात करता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये में कमजोरी और महंगाई बढ़ने की आशंका भी बाजार में गिरावट की बड़ी वजह बन रही है।
पिछले कारोबारी दिन की तेज गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसी कारण शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत शुरुआत बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 809.57 अंकों की तेजी के साथ 78,375.73 पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी 252.75 अंक बढ़कर 24,280.80 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले सत्र में सेंसेक्स 77,566.16 और निफ्टी 24,028.05 पर बंद हुए थे। मिडकैप में तेजी, स्मॉलकैप में दबाव शुरुआती कारोबार में व्यापक बाजार का रुख मिश्रित रहा। बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स में करीब 1.29 प्रतिशत की तेजी देखी गई, जबकि स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसी बीच बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स लगभग 12 प्रतिशत तक नीचे आया। इन शेयरों में दिखी तेजी सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो जैसे शेयर बढ़त में कारोबार करते नजर आए। इंडिगो शुरुआती कारोबार में लगभग 3.84 प्रतिशत चढ़कर सबसे ज्यादा लाभ में रहा। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज में हल्की गिरावट देखी गई। बाजार की चौड़ाई कमजोर एनएसई में बाजार की चौड़ाई फिलहाल नकारात्मक रही। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान करीब 870 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,601 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं 28 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। निवेशकों के लिए अहम स्तर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,000 से 23,900 के बीच का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर बना रहता है तो आगे 24,200 से 24,300 तक की तेजी संभव है। वहीं इन स्तरों के नीचे फिसलने पर बिकवाली बढ़ सकती है। गिफ्ट निफ्टी से मिले सकारात्मक संकेत गिफ्ट निफ्टी ने भी बाजार को मजबूत शुरुआत का संकेत दिया। यह लगभग 319 अंकों की बढ़त के साथ 24,335 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार सातवें सत्र में बिकवाली करते दिखे। 9 मार्च को उन्होंने करीब 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 9,013 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। जापान का निक्केई सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक चढ़ा, जबकि हांगकांग, दक्षिण कोरिया और चीन के बाजारों में भी बढ़त दर्ज की गई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।