भारतीय उद्योग जगत में कुछ कहानियां सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि प्रेरणा की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है Shiv Ratan Agarwal की, जिन्होंने सीमित पढ़ाई के बावजूद अपने दम पर एक ग्लोबल फूड ब्रांड खड़ा किया। बीकानेर की गलियों से निकलकर उन्होंने Bikaji Foods International को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज इसका मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये है और यह 50 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। विरासत छोड़कर चुना अपना रास्ता शिव रतन अग्रवाल का परिवार दशकों से स्नैक्स कारोबार से जुड़ा रहा है। उनके दादा गंगाबिशन अग्रवाल ने मशहूर Haldiram's की नींव रखी थी। जहां उनके भाई पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ा रहे थे, वहीं शिव रतन ने अलग पहचान बनाने का फैसला किया। 1993 में उन्होंने ‘बीकाजी’ ब्रांड की शुरुआत की–एक ऐसा कदम जिसने उन्हें अलग मुकाम दिलाया। सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई, लेकिन बड़ा विजन शिव रतन अग्रवाल ने सिर्फ 8वीं तक ही पढ़ाई की थी। लेकिन उन्होंने किताबों से ज्यादा अनुभव को महत्व दिया। कम उम्र में ही वह भुजिया बनाने की कला में माहिर हो गए थे। 1986 में उन्होंने ‘शिवदीप प्रोडक्ट्स’ शुरू किया, जो बाद में ‘बीकाजी’ के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने इस ब्रांड का नाम बीकानेर के संस्थापक राव बीकाजी के सम्मान में रखा। मार्केटिंग से बनाई अलग पहचान बीकाजी को घर-घर तक पहुंचाने में उनकी मार्केटिंग रणनीति ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बॉलीवुड के महानायक Amitabh Bachchan को ब्रांड एंबेसडर बनाया, जिससे ब्रांड की पहचान तेजी से बढ़ी। आज बीकाजी न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहा है। शेयर बाजार में मजबूत पकड़ बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल 2022 में लिस्ट हुई और आज BSE और NSE दोनों पर मजबूती से ट्रेड कर रही है। 23 अप्रैल 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप 17,282 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इसकी लगातार बढ़ती सफलता को दर्शाता है। प्रेरणा बन गया सफर 74 वर्ष की उम्र में शिव रतन अग्रवाल का निधन हो गया, लेकिन उनका सफर आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। सीमित संसाधनों और कम पढ़ाई के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि विजन, मेहनत और जोखिम लेने का साहस किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय उद्योगपति Gautam Adani ने एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद उनकी संपत्ति में जबरदस्त उछाल आया है, जिसके बाद वह पहली बार Bill Gates से आगे निकल गए हैं। 106 अरब डॉलर पहुंची नेटवर्थ ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, गौतम अडानी की कुल संपत्ति अब 106 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। सिर्फ एक दिन में उनकी नेटवर्थ में करीब 7.16 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे वह दुनिया के अमीरों की सूची में 17वें स्थान पर पहुंच गए हैं। इस उपलब्धि के साथ अडानी ने एक बार फिर 100 अरब डॉलर क्लब में अपनी जगह बना ली है। गेट्स को पीछे छोड़ा जहां अडानी की संपत्ति में इस साल 21.4 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है, वहीं बिल गेट्स की नेटवर्थ में 12.7 अरब डॉलर की गिरावट आई है। इसी वजह से गेट्स 104 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ 18वें स्थान पर खिसक गए हैं। अंबानी की नेटवर्थ में गिरावट दूसरी ओर, Mukesh Ambani की संपत्ति में गिरावट देखने को मिली है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन की नेटवर्थ घटकर 90.2 अरब डॉलर रह गई है, जिससे वह अमीरों की सूची में 20वें स्थान पर हैं। टॉप 10 में कौन-कौन दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में Elon Musk अब भी पहले स्थान पर बने हुए हैं, जिनकी नेटवर्थ 645 अरब डॉलर है। इसके बाद: Larry Page – दूसरे स्थान पर Jeff Bezos – तीसरे स्थान पर Sergey Brin – चौथे स्थान पर Mark Zuckerberg – पांचवें स्थान पर Larry Ellison – छठे स्थान पर क्या संकेत देता है यह उछाल? अडानी की संपत्ति में यह तेजी बताती है कि उनके ग्रुप के शेयरों में निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हुआ है। बाजार में गिरावट के बावजूद उनकी कंपनियों का प्रदर्शन निवेशकों को आकर्षित कर रहा है, जो इस उछाल का मुख्य कारण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय उद्योग जगत के लिए 17 अप्रैल 2026 का दिन खास रहा, जब गौतम अडानी एक बार फिर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया। नेटवर्थ में तेज उछाल रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर 92.6 बिलियन डॉलर हो गई है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं मुकेश अंबानी 90.8 बिलियन डॉलर के साथ 20वें स्थान पर खिसक गए। एक ही दिन में अडानी की संपत्ति में 3.56 बिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार में तेजी का परिणाम है। शेयर बाजार में तेजी बना मुख्य कारण अडानी समूह की कंपनियों Adani Total Gas, Adani Ports और Adani Power के शेयरों में लगातार मजबूती देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसके विपरीत, Reliance Industries के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के कारण अंबानी की संपत्ति में इस साल 16.9 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। वैश्विक अमीरों की सूची में स्थिति वैश्विक स्तर पर एलन मस्क 656 बिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं। उनके बाद लैरी पेज और जेफ बेजोस का स्थान है। वहीं बर्नार्ड अरनॉल्ट को इस वर्ष सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। भारतीय उद्योगपतियों की मजबूत मौजूदगी भारतीय अरबपतियों में लक्ष्मी मित्तल, शिव नाडर और सावित्री जिंदल भी वैश्विक सूची में मजबूत स्थिति में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अडानी और अंबानी के बीच संपत्ति का अंतर केवल 1.8 बिलियन डॉलर है। ऐसे में आने वाले समय में बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ यह प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प हो सकती है।
फार्मा सेक्टर की प्रमुख कंपनी Lupin Limited के शेयरों में 2 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में करीब 2–2.5% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय आई जब कंपनी ने अपनी सहायक इकाई के जरिए फिलीपींस की कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। Multicare Pharma में 43.38% हिस्सेदारी खरीदेगी कंपनी कंपनी की नीदरलैंड्स स्थित पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Nanomi B.V. ने Multicare Pharmaceuticals Philippines Inc. (MPPI) में 43.38% हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है। कुल 1,17,94,497 शेयर खरीदे जाएंगे डील की वैल्यू लगभग 39.6 मिलियन डॉलर तक हो सकती है यह अधिग्रहण मई 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है यह कदम Lupin के इंटरनेशनल बिजनेस विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। VISUfarma का अधिग्रहण पूरा एक अन्य अपडेट में कंपनी ने बताया कि Nanomi B.V. ने VISUfarma B.V. का पूर्ण अधिग्रहण पूरा कर लिया है। 1 अप्रैल 2026 से VISUfarma और उसकी सभी सब्सिडियरी Nanomi की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयां बन गई हैं USFDA से मिली मंजूरी, पाइपलाइन मजबूत हाल ही में कंपनी को US Food and Drug Administration (USFDA) से दो दवाओं के लिए अस्थायी मंजूरी मिली- Sugammadex Injection Pitolisant Tablets Pitolisant टैबलेट्स का उत्पादन नागपुर स्थित प्लांट में किया जाएगा, जिससे कंपनी की प्रोडक्ट पाइपलाइन और मजबूत होगी। शेयर प्रदर्शन और बाजार स्थिति पिछले कारोबारी सत्र में Lupin का शेयर ₹2,273.60 पर बंद हुआ, जो ₹39.10 (1.69%) की गिरावट दर्शाता है। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹2,376 52 हफ्ते का निचला स्तर: ₹1,774 वर्तमान स्तर: हाई से 4.31% नीचे, लो से 28.16% ऊपर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.04 लाख करोड़ है। गिरावट के पीछे क्या कारण? विशेषज्ञों का मानना है कि- विदेशी अधिग्रहण पर शुरुआती लागत और अनिश्चितता निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली शॉर्ट टर्म में जोखिम की आशंका इन वजहों से शेयर में दबाव देखने को मिला है, हालांकि लॉन्ग टर्म में यह डील फायदेमंद साबित हो सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी कलेक्शन 2,00,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च 2025 के 1,83,845 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.8% अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत ट्रेंड पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष 20.55 लाख करोड़ रुपये से 8.3% ज्यादा है। मार्च में दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत माना जा रहा है। घरेलू और आयात जीएसटी में वृद्धि आंकड़ों के अनुसार, घरेलू जीएसटी राजस्व मार्च में 5.9% बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो देश में स्थिर खपत और घरेलू कारोबार की मजबूती को दर्शाता है। वहीं, आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन में 17.8% की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़ती आयात गतिविधियों और बेहतर कस्टम्स कलेक्शन को इंगित करता है। विशेषज्ञों का विश्लेषण विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में उच्च जीएसटी संग्रह का मुख्य कारण साल के अंत में व्यवसायों द्वारा करों का समय पर जमा करना और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि है। इससे सरकार की तिजोरी में अतिरिक्त राजस्व जमा हुआ, जो विकास और सार्वजनिक खर्चों के लिए उपयोगी होगा। नतीजा मौजूदा आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारत में जीएसटी प्रणाली अब स्थिर और प्रभावी रूप से काम कर रही है। वित्त वर्ष के अंत में उच्च संग्रह यह भी संकेत देता है कि कर अनुपालन में सुधार हुआ है और अर्थव्यवस्था में गतिविधियां सामान्य से अधिक गति से चल रही हैं।
रांची। नया वित्त वर्ष बुधवार यानि 1 अप्रैल से शुरू हो गया है। बैंकिंग, इनकम टैक्स, रेलवे टिकट और फास्टैग से जुड़ी कई व्यवस्थाओं के नियम बुधवार से बदल गये हैं। भुवनेश्वर-धनबाद-भुवनेश्वर स्पेशल 1 अप्रैल से और हटिया-दुर्ग-हटिया स्पेशल द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन नियमित एक्सप्रेस के रूप में 2 अप्रैल से चलेंगी। एक अप्रैल से टोल में भी लगभग 3-7% तक वृद्धि होगी, जबकि कई टोल प्लाजा पर यह बढ़ोतरी करीब 5% के आसपास रहेगी। जमशेदपुर-रांची हाईवे पर कार का टोल 120 रुपए से बढ़कर 125 रुपए हो जाएगा। पैन कार्ड के साथ देना होगा अतिरिक्त दस्तावेजः एक अप्रैल से पैन कार्ड बनवाने के लिए पैन कार्ड के साथ आधार कार्ड के अलावा एक अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। अब 20 लाख रुपए तक की संपत्ति रजिस्ट्री में पैन कार्ड जरूरी नहीं होगा, पहले यह सीमा 10 लाख थी। सभी प्रकार की इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट अनिवार्यः झारखंड के सरकारी स्कूलों में नए सेशन की शुरुआत पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि पहले आकलन फिर पढ़ाई के फॉर्मूले पर होगी। इसके तहत पहली से 12वीं तक के हर छात्र की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का आकलन कर उसी स्तर के अनुसार दो महीने पढ़ाई कराने का प्लान है। जेईपीसी ने आधारभूत आरंभिक कक्षाओं को लेकर गाइडलाइन भी जारी किया है। राज्य परियोजना निदेशक द्वारा सीएम एक्सीलेंस समेत राज्य के सभी जिलों दिए गए निर्देश में कहा है कि 4 अप्रैल तक सभी छात्रों का बेसलाइन असेसमेंट अनिवार्य रुप से तैयार कर लेना है। कोलकाता के लिए 2 फ्लाइट फिर शुरूः रांची एयरपोर्ट ने समर शेड्यूल के तहत विमानों की नई समय सारिणी जारी की है। इसके तहत कई उड़ानों के आगमन और प्रस्थान समय में 10 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का बदलाव किया गया है। इंडिगो की कोलकाता जाने वाली दो फ्लाइट्स, जो क्राइसिस के दौरान बंद कर दी गई थीं, उन्हें फिर से शुरू किया गया है। दोपहर में हैदराबाद और बेंगलुरु जाने वाली उड़ानों में करीब दो घंटे की देरी की गई है। इसके अलावा शाम के समय दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए उड़ानों के समय में भी बदलाव किया गया है। कुछ बदलाव 29 मार्च से ही लागू हो गए हैं। आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया सरल : एक अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट लागू हो जाएगा। टैक्स दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। नई टैक्स व्यवस्था को जारी रखा गया है। इसके अलावा, आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया गया है और संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। महावीर जयंती के कारण मंगलवार को बाजार बंद रहने के बाद आज निवेशकों ने मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,899.53 अंक चढ़कर 73,847.08 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 572.55 अंक की उछाल के साथ 22,903.95 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर 94.70 पर पहुंच गया। बाजार में तेजी की बड़ी वजह बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के जल्द खत्म होने की उम्मीद रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से संकट खत्म करने के संकेतों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों में साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों में तेजी आज की तेजी की खास बात यह रही कि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर हरे निशान में रहे। इनमें ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिला सपोर्ट वैश्विक बाजारों में भी तेजी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7%, जापान का निक्केई 225 चार फीसदी से अधिक, जबकि हैंग सेंग और शंघाई सूचकांक भी मजबूती में रहे। अमेरिकी बाजार में भी मंगलवार को नैस्डैक 3.83%, एसएंडपी 500 2.91% और डाउ जोन्स 2.49% चढ़ा था। तेल की कीमतें और निवेशकों की सतर्कता हालांकि बाजार में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जो चिंता का विषय बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव से सप्लाई बाधित होने का खतरा है। उधर, सोमवार को एफआईआई ने 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 14,894 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank इन दिनों नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर चर्चा में है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच, बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, इन सभी घटनाओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा को लेकर हो रही है, जिन्हें अब संगठन में और बड़ी भूमिका मिलने के संकेत दिए गए हैं। तीन दशक का अनुभव, गहरी पकड़ कैजाद भरूचा का HDFC बैंक के साथ जुड़ाव करीब 30 साल पुराना है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1986 में SBI कमर्शियल एंड इंटरनेशनल बैंक से की थी और 1995 में HDFC बैंक से जुड़े। तब से लेकर आज तक उन्होंने बैंक के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। फिलहाल भरूचा बैंक के एसेट बिजनेस को संभाल रहे हैं, जिसमें लोन और अन्य क्रेडिट गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड और मैनेजमेंट दोनों स्तरों पर उनकी मजबूत पकड़ और अनुभव उन्हें बैंक के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल करता है। RBI की मंजूरी, तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2026 में Reserve Bank of India (RBI) ने कैजाद भरूचा की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी थी। अप्रैल 2026 से वे अगले तीन वर्षों तक पूर्णकालिक निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। यह कदम बैंक के नेतृत्व में स्थिरता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। लगातार बढ़ता कद पिछले एक दशक में कैजाद भरूचा का कद लगातार बढ़ा है। 2014 में उन्हें एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया होलसेल और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग की जिम्मेदारी दी गई 2023 में उन्हें डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (DMD) बनाया गया यह पद पिछले पांच वर्षों से खाली था, जिसे भरूचा को सौंपना बैंक के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव का संकेत माना गया। DMD बनने के बाद उन्हें रिटेल बैंकिंग की जिम्मेदारी भी दी गई, जिससे उनका दायरा और व्यापक हो गया। संकट के दौर में भरोसे का चेहरा बैंक के शीर्ष स्तर पर हुए बदलावों के बीच, केकी मिस्त्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा की जा रही है और कैजाद भरूचा को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वे इस चुनौतीपूर्ण दौर में बैंक के लिए “संकटमोचक” की भूमिका निभा सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी एक बार फिर कानूनी परेशानी में हैं। गुरुवार को वे दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मुख्यालय पहुंचे, जहां रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े हाई-प्रोफाइल लोन मामले में उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई। जानकारी के अनुसार, CBI ने अनिल अंबानी को 19 और 20 मार्च के लिए समन भेजा था। इस पूछताछ ने बैंकिंग सेक्टर में हलचल मचा दी है। क्या है मामला? यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत से शुरू हुआ। आरोप है कि RCom ने बैंकों के कंसोर्टियम से भारी लोन लिया, लेकिन लोन का सही इस्तेमाल नहीं किया गया और नियमों का उल्लंघन किया गया। क्या है आरोप नियमों का उल्लंघन: लोन लेने की प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। फंड का डाइवर्जन: लोन की रकम का इस्तेमाल मंजूर काम के लिए नहीं किया गया और इसे अन्य कंपनियों या निजी उद्देश्यों के लिए डाइवर्ट किया गया। गलत जानकारी देना: कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति और प्रोजेक्ट्स की सही जानकारी नहीं दी, जिससे बैंक को नुकसान हुआ। अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी से भी हाल ही में रिलायंस होम फाइनेंस से जुड़े मामले में पूछताछ की जा चुकी है। अब इस लोन मामले में अनिल अंबानी खुद CBI के समक्ष पेश हुए हैं, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने के मूड में हैं।
कर्मचारियों के लिए शेयर आवंटन को बोर्ड की मंजूरी रिटेल सेक्टर की प्रमुख कंपनी Vishal Mega Mart Limited ने अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से Employee Stock Options Plan (ESOP) 2019 के तहत 1,15,000 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कंपनी के बोर्ड की सिक्योरिटीज़ अलॉटमेंट कमेटी ने 6 मार्च 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह शेयर कंपनी और उसकी सहायक इकाई के पात्र कर्मचारियों द्वारा स्टॉक ऑप्शन एक्सरसाइज करने के बाद जारी किए गए। दो अलग-अलग कीमतों पर जारी हुए शेयर कंपनी ने कर्मचारियों द्वारा एक्सरसाइज किए गए स्टॉक ऑप्शंस के आधार पर दो अलग-अलग कीमतों पर शेयर जारी किए हैं। यह कीमतें उस समय के अनुसार तय की गई थीं जब कर्मचारियों को ऑप्शन दिए गए थे। पहला ट्रांच: 16,500 शेयर – ₹18.07 प्रति शेयर दूसरा ट्रांच: 98,500 शेयर – ₹65 प्रति शेयर कुल आवंटन: 1,15,000 इक्विटी शेयर इन स्टॉक ऑप्शंस के माध्यम से कंपनी को कुल ₹67,00,655 की राशि प्राप्त हुई है। प्रत्येक स्टॉक ऑप्शन को ₹10 फेस वैल्यू वाले एक पूर्ण रूप से चुकता इक्विटी शेयर में बदला गया। कंपनी की पूंजी संरचना में बदलाव नए शेयर जारी होने के बाद कंपनी की पेड-अप शेयर कैपिटल और कुल शेयरों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है। आवंटन से पहले: पेड-अप कैपिटल – ₹46,73,00,28,060 कुल इक्विटी शेयर – 4,67,30,02,806 आवंटन के बाद: पेड-अप कैपिटल – ₹46,73,11,78,060 कुल इक्विटी शेयर – 4,67,31,17,806 SEBI नियमों के तहत पूरी प्रक्रिया कंपनी ने यह पूरा आवंटन SEBI (Share Based Employee Benefits and Sweat Equity) Regulations, 2021 के नियमों के अनुसार किया है। इसके लिए कंपनी ने आवश्यक जानकारी NSE और BSE में पहले ही दाखिल कर दी थी। नए शेयरों को मिलेंगे सभी अधिकार कंपनी द्वारा जारी किए गए नए इक्विटी शेयरों को पुराने शेयरों के समान सभी अधिकार मिलेंगे। इनमें डिविडेंड का अधिकार भी शामिल है और ये शेयर बाजार में स्वतंत्र रूप से ट्रेड किए जा सकेंगे। इन शेयरों पर किसी तरह का लॉक-इन पीरियड लागू नहीं है। कर्मचारियों को प्रेरित करने का अहम साधन Vishal Mega Mart Employees Stock Options Plan 2019 के तहत कर्मचारियों को दिए गए ऑप्शंस को जारी होने की तारीख से 10 वर्षों के भीतर एक्सरसाइज किया जा सकता है। कंपनी का मानना है कि ESOP योजना कर्मचारियों को कंपनी के विकास से सीधे जोड़ने और उन्हें लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम है। शेयर प्रदर्शन पर एक नजर हाल के समय में कंपनी के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 1 दिन: -1.75% 5 दिन: -11.63% 1 महीना: -8.41% 6 महीने: -26.09% 1 साल: +7.20% 5 साल: +0.69%
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।