नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जल्द ही कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड (Phase-2) परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकता है। हालांकि बोर्ड ने अभी तक रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की है, लेकिन छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर ही अपडेट देखें और किसी भी फर्जी लिंक या अफवाह से बचें। 6.69 लाख से अधिक छात्रों को रिजल्ट का इंतजार इस वर्ष करीब 6.69 लाख छात्रों ने CBSE की सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की है जिन्होंने अपने अंकों में सुधार के लिए परीक्षा दी, जबकि कई छात्रों ने कम्पार्टमेंट श्रेणी के तहत परीक्षा दी थी। Phase-2 परीक्षा 15 से 21 मई के बीच आयोजित की गई थी। इन वेबसाइटों पर सबसे पहले मिलेगा रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड इन आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे: cbseresults.nic.in results.cbse.nic.in cbse.gov.in DigiLocker UMANG App रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्मतिथि की आवश्यकता होगी। फर्जी लिंक और अफवाहों से बचने की सलाह CBSE ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया या अनधिकृत वेबसाइटों पर वायरल हो रहे रिजल्ट लिंक पर भरोसा न करें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परिणाम केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही जारी किए जाएंगे। फिलहाल रिजल्ट की तारीख घोषित नहीं हुई है और छात्र नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान कक्षा 10 (2026 बोर्ड बैच) के छात्रों पर नया नियम लागू नहीं होगा, ताकि उनकी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो सके। छात्रों को क्या राहत मिली? CBSE ने कहा है कि जो छात्र अभी कक्षा 10 में हैं, उन्हें बीच सत्र में भाषा बदलने या तीसरी भाषा का नया नियम अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कक्षा 7 से 9 के लिए भी मिली राहत बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 7, 8 और 9 के वर्तमान छात्रों को भी सत्र के बीच में अपनी भाषा बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी मौजूदा भाषा व्यवस्था जारी रख सकेंगे और उन्हें तत्काल बदलाव नहीं करना होगा। नई नीति का उद्देश्य CBSE के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी दक्षता विकसित करना है। नई व्यवस्था के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि किसी छात्र को नुकसान न हो। स्कूलों को दिए गए निर्देश बोर्ड ने संबद्ध स्कूलों से कहा है कि वे नई भाषा नीति को लागू करते समय छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखें और किसी भी छात्र को बीच सत्र में भाषा बदलने के लिए मजबूर न करें। विस्तृत क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश स्कूलों को अलग से उपलब्ध कराए गए हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई भाषा नीति को लेकर कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। सूत्रों के अनुसार, तीन-भाषा नीति के तहत जिन छात्रों ने दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुना है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। यानी नई भाषा नीति मौजूदा छात्रों पर पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं होगी। भविष्य के छात्रों पर लागू होंगे नए नियम जानकारी के मुताबिक, नई व्यवस्था केवल उन विद्यार्थियों पर लागू होगी जो भविष्य में कक्षा 6 में प्रवेश लेंगे। ऐसे छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इससे पहले से अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषय चयन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विद्यार्थियों और अभिभावकों को मिली राहत इस फैसले से उन छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने पहले से विदेशी भाषाओं के साथ अपना शैक्षणिक संयोजन तय कर लिया है। यदि नई नीति तत्काल लागू होती, तो उन्हें बीच सत्र में विषय बदलने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था। आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार हालांकि, इस संबंध में अभी तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। बोर्ड की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद नई भाषा नीति के क्रियान्वयन और इसके विस्तृत दिशा-निर्देश स्पष्ट होंगे। फिलहाल, कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थी अपने मौजूदा भाषा संयोजन के साथ बिना किसी बदलाव के कक्षा 10 तक पढ़ाई जारी रख सकेंगे, जबकि नई भाषा नीति का प्रभाव आगामी शैक्षणिक सत्रों में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर दिखाई देगा।
नई दिल्ली: परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 13 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। परीक्षाओं में गड़बड़ी का लगाया आरोप बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि नीट (NEET), सीबीएसई (CBSE) और सीयूईटी (CUET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है और सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। दीपके ने कहा कि युवा वर्ग अब अपनी समस्याओं को लेकर मुखर हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है। 13 जून तक का समय, फिर शुरू होगा आंदोलन सीजेपी के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को 13 जून तक इस्तीफा देने का समय दिया गया है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगा। दीपके ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत पुणे से की जाएगी, जहां 11 जून को शाम चार बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद लखनऊ, अमृतसर, जयपुर, बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। 20 जून को दिल्ली कूच की तैयारी संगठन ने 20 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की है। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो देशभर से छात्र और युवा दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने दावा किया कि वह स्वयं इस अभियान का नेतृत्व करेंगे और छात्रों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील करेंगे। "एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित" अभिजीत दीपके ने दावा किया कि विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई समस्याओं के कारण एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है और संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जंतर-मंतर प्रदर्शन का भी किया जिक्र सीजेपी संस्थापक ने बताया कि 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस अल्टीमेटम और आंदोलन की घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, संगठन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों ने बड़ा प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक Abhijeet Dipke ने किया, जो अमेरिका से लौटने के बाद सीधे प्रदर्शन में शामिल हुए। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच हुए इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सबसे प्रमुख प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। उनका आरोप है कि नीट पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और विभिन्न परीक्षा प्रणालियों में लगातार सामने आ रही समस्याओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। जंतर-मंतर पर युवाओं ने "परीक्षा में पारदर्शिता" और "जवाबदेही तय करने" की मांग को जोरदार ढंग से उठाया। ये हैं आंदोलन की पांच प्रमुख मांगें CJP ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET, CUET, CBSE और SSC जैसी परीक्षाओं में निष्पक्ष एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना, डिजिटल शिक्षा प्रणाली को लागू करने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत करना, मणिपुर में सामान्य शैक्षणिक माहौल बहाल करना तथा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहायता तंत्र विकसित करना शामिल है। मणिपुर और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन में मणिपुर के छात्रों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिभागियों का कहना था कि अशांत क्षेत्रों में पढ़ाई प्रभावित होने से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। वहीं छात्रों में बढ़ते तनाव और आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली की मांग की गई। प्रदर्शन के दौरान कई लोग कॉकरोच मास्क पहनकर पहुंचे। अभिजीत दीपके ने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में रखने की अपील की। इस प्रदर्शन ने संकेत दिया कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं की नाराजगी अब सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुकी है।
रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों को मिला दूसरा मौका केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2026 के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और मार्क्स वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने 2 जून को ऑनलाइन पोर्टल सक्रिय कर दिया, जिसके जरिए छात्र अपने प्राप्त अंकों की दोबारा जांच और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। CBSE ने इस संबंध में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए छात्रों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने की सलाह दी है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कर सकेंगे आवेदन अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए एक विशेष पोर्टल उपलब्ध कराया है, जहां उम्मीदवार आवश्यक विवरण भरकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन की सुविधा उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्हें लगता है कि उनके अंकों में किसी प्रकार की त्रुटि हो सकती है या उनकी उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं हुआ है। आवेदन प्रक्रिया समझाने के लिए जारी किया वीडियो छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए CBSE ने एक विस्तृत वीडियो गाइड भी जारी किया है। इस वीडियो में आवेदन की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से समझाई गई है। बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले वीडियो को ध्यानपूर्वक देखें ताकि फॉर्म भरते समय किसी प्रकार की गलती न हो। क्या है मार्क्स वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन? मार्क्स वेरिफिकेशन के दौरान बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि उत्तर पुस्तिका में दिए गए सभी अंकों का सही तरीके से जोड़ किया गया है या नहीं और कोई उत्तर जांच से छूटा तो नहीं है। वहीं री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में संबंधित प्रश्नों के उत्तरों का दोबारा मूल्यांकन किया जाता है। इससे छात्रों को अपने परिणाम की निष्पक्ष समीक्षा का अवसर मिलता है। आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान CBSE ने छात्रों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले पात्रता नियम, निर्धारित शुल्क और अंतिम तिथि की जानकारी अवश्य जांच लें। सभी निर्देश बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। छात्रों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आवेदन प्रक्रिया समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाए, क्योंकि निर्धारित तिथि के बाद किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। छात्रों के लिए राहत भरा कदम शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की यह सुविधा उन छात्रों के लिए राहत लेकर आती है जो अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं। इससे उन्हें अपने अंकों की पारदर्शी समीक्षा कराने का अवसर मिलता है और मूल्यांकन प्रक्रिया पर विश्वास भी मजबूत होता है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की पोस्ट-रिजल्ट फीस व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में होने वाली संभावित त्रुटियों को सुधारने के लिए भी छात्रों से शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यदि सीबीएसई की ओर से मूल्यांकन में गलती होती है तो उसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने लिखा कि स्कैन कॉपी, री-टोटलिंग और री-इवैल्यूएशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए छात्रों से अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा है। फीस व्यवस्था पर उठाए सवाल राहुल गांधी के अनुसार, डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए प्रति विषय 100 रुपये, री-टोटलिंग के लिए प्रति पेपर 100 रुपये और री-इवैल्यूएशन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये शुल्क निर्धारित है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने के लिए करीब 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि लाखों छात्र पुनर्मूल्यांकन और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इससे बोर्ड को कितनी आय प्राप्त हो रही है। 'शिक्षा को व्यवसाय बनाया जा रहा' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय के रूप में संचालित किया जाता है तो व्यवस्थागत त्रुटियों का बोझ छात्रों पर डाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि उनके समय, आत्मविश्वास और भविष्य पर भी असर पड़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में होने वाली संभावित त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को अपने अंकों की दोबारा जांच कराने की आवश्यकता पड़ती है। CBSE ने दिया स्पष्टीकरण इस बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच सीबीएसई ने कहा है कि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। बोर्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में चिन्हित तकनीकी कमजोरियों की निगरानी की जा रही है और विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम सिस्टम को और मजबूत बनाने में जुटी है। सीबीएसई के अनुसार, पहचानी गई कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और पोर्टल की सुरक्षा को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया जारी है। बोर्ड ने संभावित खामियों की जानकारी देने वाले जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स का भी आभार व्यक्त किया है। शिक्षा व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद परीक्षा मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन शुल्क और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्ष जहां छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा उठा रहा है, वहीं सीबीएसई का कहना है कि वह मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रहा है।
रांची। झारखंड इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। रांची स्थित मौसम केंद्र के अनुसार पलामू प्रमंडल सबसे ज्यादा गर्म इलाका बना हुआ है। डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 45.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब 5 डिग्री अधिक है। इसके अलावा जमशेदपुर में 41.6 डिग्री, चाईबासा में 42 डिग्री, सरायकेला में 43 डिग्री और बोकारो थर्मल में 42.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। देवघर, गुमला, हजारीबाग और लोहरदगा समेत कुल 10 जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। रांची में भी गर्मी से लोग बेहाल राजधानी रांची में भी तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कांके में तापमान 40 डिग्री, हिंदपीढ़ी में 39.8 डिग्री और एयरपोर्ट क्षेत्र में 39.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार रांची में अगले दो दिनों के दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट संभव है। इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट मौसम विभाग ने गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों में हीटवेव जैसी स्थिति बनने की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों में दिन के समय तेज गर्म हवाएं और प्रचंड धूप लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। कुछ इलाकों में बदल सकता है मौसम दूसरी ओर धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग और कोडरमा में गरज के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना है। हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश और बादल छाने की संभावना जताई गई है। हालांकि हल्की बारिश के बावजूद राज्य के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का असर बरकरार है।
Central Board of Secondary Education यानी सीबीएसई की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के एक छात्र ने दावा किया था कि बोर्ड द्वारा भेजी गई फिजिक्स की स्कैन आंसरशीट उसकी नहीं है। अब बोर्ड ने छात्र के दावे को सही मानते हुए उसे सही उत्तरपुस्तिका भेज दी है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है। छात्र का दावा निकला सही 12वीं के छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया था कि फिजिक्स विषय में कम अंक आने के बाद उसने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत स्कैन कॉपी मंगवाई थी, लेकिन जो उत्तरपुस्तिका उसे भेजी गई, वह उसकी नहीं थी। छात्र ने कहा था कि उत्तरपुस्तिका में लिखावट उसकी नहीं थी और केवल रोल नंबर उसका दिखाई दे रहा था। उसने यह भी कहा कि इंग्लिश की उत्तरपुस्तिका में उसकी खुद की हैंडराइटिंग साफ नजर आ रही थी, जबकि फिजिक्स की कॉपी पूरी तरह अलग थी। इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग शुरू कर दी। CBSE ने भेजी सही आंसरशीट मामला बढ़ने के बाद Central Board of Secondary Education ने छात्र से संपर्क किया और जांच के बाद सही उत्तरपुस्तिका उसके पंजीकृत ईमेल पते पर भेज दी। सीबीएसई ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा कि छात्र की शिकायत की समीक्षा की गई और सही उत्तरपुस्तिका भेज दी गई है। बोर्ड ने यह भी कहा कि जहां आवश्यक होगा वहां परिणाम अपडेट करने की प्रक्रिया भी की जाएगी। छात्र वेदांत ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि बोर्ड ने उसे सही आंसरशीट भेज दी है और उसका दावा सही साबित हुआ। री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पर उठे सवाल इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों ने Central Board of Secondary Education की री-इवैल्यूएशन और स्कैनिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर एक छात्र की कॉपी बदल सकती है, तो अन्य छात्रों के साथ भी ऐसी गलती संभव है। वेदांत ने बोर्ड से ऑन-स्क्रीन मार्किंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग की है। छात्र का कहना है कि पूरे साल मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी ऐसी गलतियां बेहद गंभीर हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर बढ़ी बहस सीबीएसई इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए कर रहा है। इसमें उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा जाता है। हालांकि इस घटना के बाद अब इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रक्रिया में छोटी सी चूक भी छात्रों के परिणाम पर बड़ा असर डाल सकती है। छात्रों में बढ़ी चिंता री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया था। ऐसे में यह मामला सामने आने के बाद कई छात्र अब अपनी उत्तरपुस्तिकाओं को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। फिलहाल Central Board of Secondary Education ने मामले को सुधारने की कार्रवाई कर दी है, लेकिन इस घटना ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBSE ने क्लास 9वीं के मैथ्स सिलेबस में बड़ा बदलाव किया है। 2026-27 सत्र से अब 12 की जगह 15 चैप्टर पढ़ाए जाएंगे, और 2027 की परीक्षा इसी नए पैटर्न पर होगी। क्या बदला है सिलेबस में? नए सिलेबस में कई अहम टॉपिक्स जोड़े गए हैं: नंबर सिस्टम सिक्वेंसेस और प्रोग्रेशन अरिथमेटिक आइडेंटिटीज यूक्लिड ज्योमेट्री एक्सिओम और पोस्टुलेट ट्राएंगल कांग्रुएंस थ्योरम क्वाड्रिलेटरल और मेंसुरेशन कुल मिलाकर अब स्टूडेंट्स को ज्यादा गहराई और विविधता के साथ मैथ्स पढ़ना होगा। बदलाव का मकसद क्या है? यह बदलाव NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) के तहत किया गया है, जिसमें फोकस है: रटने की बजाय समझने पर जोर लॉजिकल और क्रिटिकल थिंकिंग बढ़ाना प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को मजबूत करना मैथ्स को रियल लाइफ से जोड़ना भारतीय गणितज्ञ भी सिलेबस में अब स्टूडेंट्स पढ़ेंगे: आर्यभट्ट ब्रह्मगुप्त बौधायन इससे छात्रों को गणित में भारत के योगदान और इतिहास की जानकारी मिलेगी। एग्जाम और मार्किंग में बदलाव 80 मार्क्स: लिखित परीक्षा 20 मार्क्स: इंटरनल असेसमेंट 10 मार्क्स: पेन-पेपर टेस्ट 10 मार्क्स: प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो, लैब एक्टिविटी फायदा या दबाव? फायदे: कॉन्सेप्ट क्लियर होंगे रियल लाइफ एप्लिकेशन समझ आएगा प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद चुनौतियां: सिलेबस बढ़ने से स्टडी लोड बढ़ सकता है कमजोर बेस वाले छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 11वीं और 12वीं कक्षा का नया करिकुलम जारी कर दिया है। इस नए सिलेबस के साथ स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों के लिए नए अकादमिक सत्र की तैयारी का रास्ता साफ हो गया है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए पूरा करिकुलम डाउनलोड कर सकते हैं और अपने विषयों की योजना पहले से तैयार कर सकते हैं। NEP 2020 और NCF 2023 का असर नया करिकुलम National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework 2023 के तहत तैयार किया गया है। इसका मकसद छात्रों के सीखने के तरीके को ज्यादा व्यावहारिक, स्किल-आधारित और इंटरएक्टिव बनाना है। कब जारी होगा बाकी क्लास का सिलेबस? 11वीं-12वीं का करिकुलम: 1 अप्रैल 2026 को जारी 9वीं-10वीं का करिकुलम: 2 अप्रैल 2026 को दोपहर 3 बजे जारी इस तरह CBSE सभी कक्षाओं का नया सिलेबस एक साथ लागू कर रहा है। कैसे करें CBSE नया करिकुलम डाउनलोड? छात्र और शिक्षक इन आसान स्टेप्स से सिलेबस डाउनलोड कर सकते हैं: CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं ‘Curriculum’ सेक्शन में जाएं “Curriculum for Academic Year 2026-27” पर क्लिक करें “Secondary Curriculum: Part-II (XI-XII)” चुनें अपनी जरूरत के अनुसार: Languages (Group-L) Academic Electives (Group-A) Internal Assessment Subjects PDF डाउनलोड करें और प्रिंट निकाल लें नए करिकुलम में क्या खास? सभी विषयों की स्टडी स्कीम और सिलेबस अपडेट इंटरनल असेसमेंट पर ज्यादा फोकस स्किल-बेस्ड और कॉन्सेप्ट क्लियर करने वाली पढ़ाई स्टूडेंट्स के लर्निंग एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने पर जोर यह करिकुलम स्कूलों और शिक्षकों को भी बेहतर अकादमिक प्लानिंग में मदद करेगा। CBSE वेबिनार: आज 3 बजे CBSE आज (2 अप्रैल 2026) दोपहर 3 बजे एक अहम वेबिनार आयोजित कर रहा है, जिसमें नए करिकुलम, स्टडी स्कीम और अन्य बदलावों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। छात्र और शिक्षक इसे यूट्यूब पर लाइव देख सकते हैं। क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण? यह नया करिकुलम छात्रों को सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे शिक्षा प्रणाली ज्यादा आधुनिक और उपयोगी बनेगी।
नई दिल्ली,एजेंसियां। देशभर के लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने के करीब है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जल्द ही कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स और बोर्ड से जुड़े संकेतों के आधार पर माना जा रहा है कि CBSE 10वीं रिजल्ट 2026 लगभग 14 अप्रैल के आसपास जारी हो सकता है। हालांकि, CBSE ने अभी तक आधिकारिक रूप से कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है, इसलिए छात्रों को सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट और बोर्ड की सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए। इस बार 10वीं और 12वीं के परिणाम एक साथ आने की संभावना कम मानी जा रही है। वजह साफ है—कक्षा 10वीं की परीक्षाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं, जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षा प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चलने की जानकारी बोर्ड से जुड़े शेड्यूल में दिखाई दे रही है। ऐसे में मूल्यांकन और रिजल्ट प्रोसेस अलग-अलग चरणों में होने की संभावना है। यही कारण है कि बोर्ड पहले 10वीं का परिणाम जारी कर सकता है, ताकि छात्र समय पर अपने अगले शैक्षणिक विकल्प चुन सकें। ऐसे चेक करें CBSE 10वीं रिजल्ट 2026 छात्र अपना रिजल्ट जारी होने के बाद CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in और रिजल्ट पोर्टल results.cbse.nic.in पर जाकर देख सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर, जन्म तिथि, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड में दी गई जरूरी जानकारी भरनी होगी। सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट भी किया जा सकेगा। DigiLocker से भी मिलेगी डिजिटल मार्कशीट CBSE छात्रों के लिए DigiLocker एक अहम विकल्प बना हुआ है। बोर्ड की DigiLocker सेवा के अनुसार, छात्र 6 अंकों के एक्सेस कोड की मदद से अपना अकाउंट एक्टिवेट कर सकते हैं और रिजल्ट जारी होने के बाद वहीं अपनी डिजिटल मार्कशीट और प्रमाणपत्र देख सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर OTP के जरिए वेरिफाई करना होता है। डॉक्यूमेंट बाद में “Issued Documents” सेक्शन में उपलब्ध होते हैं। छात्रों के लिए जरूरी सलाह छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फर्जी रिजल्ट डेट्स या अनऑफिशियल लिंक से बचें। बोर्ड की वेबसाइट, स्कूल और DigiLocker जैसे आधिकारिक माध्यमों पर ही नजर रखें। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 14 अप्रैल की तारीख संभावित है, अंतिम नहीं। जैसे ही CBSE आधिकारिक घोषणा करेगा, रिजल्ट लिंक सक्रिय कर दिया जाएगा।
राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को अधिक छात्र-हितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने घोषणा की है कि अब नए शैक्षणिक सत्र से बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। यह बदलाव केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तर्ज पर किया जा रहा है। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 12वीं कक्षा के परिणाम जारी होने के बाद इस अहम फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस पहल से छात्रों पर परीक्षा का मानसिक दबाव कम होगा और उन्हें अपने प्रदर्शन को सुधारने का एक और अवसर मिलेगा। क्यों लिया गया यह फैसला? शिक्षा मंत्री के अनुसार, साल में दो बार परीक्षा होने से छात्रों को एक ही मौके पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यदि किसी कारणवश वे पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं, तो दूसरी परीक्षा में अपने अंक सुधार सकते हैं। इससे परीक्षा का तनाव कम होगा और शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली बनेगी। इतिहास में पहली बार मार्च में जारी हुआ रिजल्ट इस वर्ष राजस्थान बोर्ड ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। 12वीं कक्षा का रिजल्ट 31 मार्च 2026 को जारी किया गया, जो अब तक का सबसे जल्दी घोषित किया गया परिणाम है। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि मार्च महीने में ही बोर्ड का रिजल्ट घोषित किया गया। इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए अधिक समय मिल सकेगा। रिजल्ट में कैसा रहा प्रदर्शन? 10वीं कक्षा का रिजल्ट 24 मार्च को जारी किया गया कुल पास प्रतिशत: 94.23% लड़कों का पास प्रतिशत: 93.63% लड़कियों का पास प्रतिशत: 94.20% 12वीं कक्षा के तीनों स्ट्रीम (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स) का रिजल्ट एक साथ जारी किया गया, जो पारदर्शिता और दक्षता का संकेत माना जा रहा है। छात्रों के लिए अन्य अहम घोषणाएं सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने की बात कही है कि: सभी छात्रों तक समय पर पाठ्यपुस्तकें पहुंचें यूनिफॉर्म के लिए DBT के जरिए सीधे खातों में राशि भेजी जाए शिक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राजस्थान के शिक्षा सिस्टम को आधुनिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।