मुंबई के करी रोड इलाके में स्थित जैन मंदिर में हुई 1.75 करोड़ रुपये के गहनों की चोरी के मामले को पुलिस ने महज 48 घंटे में सुलझाकर बड़ी सफलता हासिल की है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया, जो नेपाल भागने की फिराक में था। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की तड़के सुबह आरोपी ने सुनसान का फायदा उठाते हुए कालाचौकी जैन मंदिर में घुसकर भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के आभूषण और हीरे जड़ा टीका चोरी कर लिया। सुबह मंदिर खुलने पर घटना का खुलासा हुआ, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। CCTV और एक गलती ने पकड़ा दिया आरोपी जांच के दौरान पुलिस ने 200 से 300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। आरोपी की मूवमेंट धीरे-धीरे ट्रेस की गई एक होटल में बैठकर की गई ऑनलाइन पेमेंट सबसे बड़ा सुराग बनी ट्रांजैक्शन से मोबाइल नंबर मिला कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से लोकेशन ट्रैक हुई इन्हीं तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। नेपाल भागने की थी पूरी प्लानिंग पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी मध्य प्रदेश पहुंच चुका था और नेपाल भागने की तैयारी कर रहा था। आरोपी अपनी बहन के घर पर छिपा था पुलिस ने इलाके को घेर लिया आरोपी ने छत से कूदकर भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड गिरफ्तार आरोपी मध्य प्रदेश के भिंड जिले का रहने वाला है और चंबल क्षेत्र का शातिर अपराधी बताया जा रहा है। 18 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट के केस शामिल चोरी का पूरा माल बरामद पुलिस की बड़ी कामयाबी मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। महज 48 घंटे में केस सुलझाना और आरोपी को पकड़ना पुलिस की तेज और तकनीकी जांच का उदाहरण है। निष्कर्ष यह मामला दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और सतर्क जांच के जरिए बड़े से बड़े अपराध को भी कम समय में सुलझाया जा सकता है। साथ ही यह भी साफ है कि अपराधी कितनी भी योजना बना ले, एक छोटी सी गलती उसे पकड़वा सकती है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी कार्यालयों को बम धमकी भेजकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और स्थानीय टीम ने संयुक्त अभियान में आरोपी को उसके किराए के मकान से दबोचा। आरोपी की पहचान 47 वर्षीय श्रीनिवास लुइस के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला है। जांच में क्या आया सामने ? जांच में सामने आया है कि आरोपी ने ईमेल और अन्य माध्यमों से 1,100 से अधिक फर्जी बम धमकी संदेश भेजे थे। इन धमकियों के कारण देश के कई राज्यों में हड़कंप मच गया था और स्कूलों, अदालतों व सरकारी कार्यालयों को खाली कराना पड़ा। अलग-अलग राज्यों में इस मामले में कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, आरोपी स्नातकोत्तर तक पढ़ा हुआ है, लेकिन फिलहाल बेरोजगार था और अपनी मां के साथ रहता था, जो सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने खुद ही देशभर में धमकी भरे संदेश भेजने की बात स्वीकार की। दिल्ली पुलिस आरोपी के डिजिटल उपकरणों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई और व्यक्ति या नेटवर्क तो नहीं था। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपी के मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी ध्यान दे रही हैं। पुलिस क्या है कहना ? पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों को झेलनी पड़ी दहशत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि फर्जी धमकियों के इस मामले का पैमाना असामान्य रूप से बड़ा था।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। 3 युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया। तीनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद परिजनों ने थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सुनसान जगह पर वारदातः जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की शाम बारलोंग इलाके के एक सुनसान स्थान पर इस वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़िता के साथ तीन युवकों ने जबरदस्ती की। घटना के बाद युवती ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपी गिरफ्तारः मामला सामने आते ही रजरप्पा थाना पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और चितरपुर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कौन हैं आरोपीः पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अयान अनवर (निवासी रहमत नगर, लाइनपार, चितरपुर), मो. तौफिक (निवासी ईदगाह मोहल्ला, चितरपुर) और मो. असफाक (निवासी एलबी रोड, चितरपुर) के रूप में हुई है।
रांची। झारखंड समेत देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी दफ्तरों को बम धमकी देने वाले 47 वर्षीय आरोपी श्रीनिवास लुईस से पूछताछ के लिए झारखंड पुलिस दिल्ली रवाना हो गई है। आरोपी को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया था। अब डिजिटल साक्ष्यों और धमकी संदेशों की विस्तृत जांच की जा रही है। धमकी देकर आतंक का माहौल बनाता थाः दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जिसने देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की झूठी धमकियां देकर आतंक का माहौल बनाने की कोशिश की। आरोपी 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया, जहां से उसने 1,000 से भी अधिक फर्जी धमकी भरे ई मेल और मैसेज भेजे थे। जांच में पता चला है कि उसने कई हाईकोर्ट, स्कूल, सरकारी कार्यालय और संवेदनशील संस्थानों को ई मेल तथा अन्य माध्यमों से धमकियां दीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को विस्तृत जांच और सतर्कता बरतनी पड़ी। इन धमकियों के कारण कई स्थानों पर सुरक्षा उपाय कड़े किए गए और जांच टीमों को सक्रिय रहना पड़ा। झारखंड पुलिस की एक टीम आरोपी से पूछताछ के लिए दिल्ली के लिए गई है, ताकि इस तकनीकी अपराध के पीछे की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
नई दिल्ली,एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स सेल ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और करीब 1.10 करोड़ रुपये की साइकोट्रोपिक ड्रग्स बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और उसकी एंटी-नारकोटिक्स यूनिट्स राजधानी में ड्रग नेटवर्क्स पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 120.18 ग्राम कोकीन और 36.86 ग्राम MDMA बरामद हुई है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1.10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ड्रग सप्लाई में इस्तेमाल की जा रही दो स्कूटी भी जब्त की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से एक स्कूटी चोरी की थी और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एक सप्लायर, एक कैरियर और लोकल पेडलर्स की भूमिका तय थी। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद हसन, रजिया और दो अफ्रीकी नागरिक—डिओफ सोलोमन उर्फ ऑस्कर और बेमाह शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर में नशे की सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। डीसीपी राजीव कुमार ने कहा डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई “जीरो टॉलरेंस ऑन ड्रग्स” अभियान के तहत की गई है। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी बरामदगी से एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है और अब पुलिस की प्राथमिकता ड्रग्स के असली सोर्स तक पहुंचकर पूरे सिंडिकेट को खत्म करना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 29 मार्च को दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं बरामद कर एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इससे साफ है कि राजधानी में नशे के कारोबार पर पुलिस ने शिकंजा और कड़ा कर दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स सेल ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और करीब 1.10 करोड़ रुपये की साइकोट्रोपिक ड्रग्स बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और उसकी एंटी-नारकोटिक्स यूनिट्स राजधानी में ड्रग नेटवर्क्स पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 120.18 ग्राम कोकीन और 36.86 ग्राम MDMA बरामद हुई है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1.10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ड्रग सप्लाई में इस्तेमाल की जा रही दो स्कूटी भी जब्त की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से एक स्कूटी चोरी की थी और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एक सप्लायर, एक कैरियर और लोकल पेडलर्स की भूमिका तय थी। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद हसन, रजिया और दो अफ्रीकी नागरिक—डिओफ सोलोमन उर्फ ऑस्कर और बेमाह शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर में नशे की सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। डीसीपी राजीव कुमार ने कहा डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई “जीरो टॉलरेंस ऑन ड्रग्स” अभियान के तहत की गई है। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी बरामदगी से एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है और अब पुलिस की प्राथमिकता ड्रग्स के असली सोर्स तक पहुंचकर पूरे सिंडिकेट को खत्म करना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 29 मार्च को दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं बरामद कर एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इससे साफ है कि राजधानी में नशे के कारोबार पर पुलिस ने शिकंजा और कड़ा कर दिया है।
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से एक बेहद सनसनीखेज और परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला कुछ हद तक चर्चित श्रद्धा वॉकर हत्याकांड की याद दिलाता है, हालांकि हर मामला अपने संदर्भ और परिस्थितियों में अलग होता है। क्या है पूरा मामला? पुलिस के मुताबिक, आरोपी रविंद्र, जो पहले से शादीशुदा है, का 29 वर्षीय महिला मोनिका के साथ संबंध था। यह घटना उस समय हुई, जब उसकी पत्नी घर पर मौजूद नहीं थी। बताया जा रहा है कि: आरोपी ने महिला को अपने घर बुलाया दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ गुस्से में आकर आरोपी ने महिला की हत्या कर दी घटना के बाद आरोपी ने सबूत छिपाने की कोशिश की, लेकिन बाद में खुद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। कैसे खुला मामला? इस केस का खुलासा तब हुआ जब आरोपी खुद पुलिस स्टेशन पहुंचा और अपराध कबूल किया। इसके बाद पुलिस जब उसके घर पहुंची, तो वहां से कई अहम सबूत बरामद हुए। घर से शव के अवशेष मिले कुछ हिस्से अलग-अलग स्थानों पर फेंके जाने की आशंका एक विशेष टीम बाकी सबूतों की तलाश में जुटी पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हत्या अचानक हुई या पहले से योजना बनाई गई थी। जांच में क्या सामने आ रहा है? जांच एजेंसियां कई पहलुओं पर काम कर रही हैं: दोनों के बीच संबंधों की प्रकृति विवाद की असली वजह क्या यह हत्या पूर्व-नियोजित थी आरोपी का आपराधिक इतिहास यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि व्यक्तिगत रिश्तों में बढ़ता तनाव किस हद तक खतरनाक हो सकता है। समाज के लिए चेतावनी इस तरह की घटनाएं केवल अपराध की कहानी नहीं होतीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी होती हैं। रिश्तों में संवाद, धैर्य और समझ की कमी कई बार दुखद परिणामों तक पहुंचा देती है।
धनबाद। कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। उसकी गैंग में कई लड़कियां हैं, जो इस तस्करी को अंजाम दे रही हैं। रांची के रेस्टोरेंट में 7 मार्च की फायरिंग में पकड़े गए प्रिंस खान के हैंडलर अमन सिंह उर्फ कुबेर से धनबाद पुलिस की पूछताछ में कई और नए चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि रंगदारी के लिए फायरिंग और हत्याएं कराने के लिए गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। प्रिंस खान ने कई हथियार भेजे पुलिस को जानकारी मिली है कि फरवरी में प्रिंस खान ने पाकिस्तान से पठान नामक अपराधी को दो हथियार देकर अमृतसर के रास्ते तरन तारन भेजा था। उससे हथियार रिसीव करने के लिए पलामू का कृष कुमार सिंह उर्फ आयुष वहां गया था। हालांकि, वहां किसी कारण डिलीवरी नहीं मिलने पर वह खाली हाथ रांची लौट गया था। फिर प्रिंस ने उसे 8 फरवरी को मध्यप्रदेश के बुरहानपुर भेजा था, जहां उसे 3 पिस्टल सौंपी गई थी। 20 फरवरी को वही पिस्टल रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के पास कुबेर और कृष ने शूटरों को दी थीं। उन्हीं से धनबाद में फहीम खान के बेटे इकबाल खान को गोली मारने का फरमान पाकिस्तान से प्रिंस ने जारी किया था। हालांकि, गोली इकबाल के ड्राइवर को लगी थी। फिर 7 मार्च की रात रांची में एयरपोर्ट थाना क्षेत्र की फैमिली रेस्टोंरेंट में भी उन्हीं हथियारों से फायरिंग की गई थी, जिसमें वेटर मनीष की मौत हो गई थी। बाद में 16 मार्च को भागाबांध में मुठभेड़ के बाद कृष पकड़ा गया था और तभी से धनबाद जेल में बंद है। इकबाल की हत्या के लिए रांची से एक लड़की लाई थी हथियार पुलिस को यह भी पता चला कि प्रिंस खान अपने गिरोह के गुर्गों तक हथियार पहुंचाने के लिए लड़कियों का भी इस्तेमाल कर रहा है। गैंग में कई लड़कियां स्पीलर सेल के रूप में शामिल होकर काम कर रही है। उनके जरिए प्रिंस कारोबारियों की जानकारी भी हासिल करता है। पूछताछ में पता चला कि इकबाल को मारने के लिए रांची में अफजल उर्फ बाबर से एक लड़की ही हथियार लेकर धनबाद आई थी। सुधीश को धनबाद-बोकारो, कुबेर को रांची-पलामू की कमान रंगदारी वसूली के लिए प्रिंस खान ने झारखंड में तीन जोन बना रखे हैं। वहां फायरिंग कराने और रुपए वसूलने के लिए एजेंट भी बना रखे हैं, जिनमें कई लड़कियां हैं। धनबाद और बोकारों में सुधीश ओझा, रांची और पलामू में कुबेर और हजारीबाग में अमन खान को उसने इस काम में लगाया है। अमन कुछ माह पहले ही गैंग से जुड़ा है। पलामू में एक रिसार्ट में काम करनेवाले अभिषेक को भी रंगदारी वसूली में लगाया गया था। गैंग के गुर्गों के संपर्क में रहता है प्रिंस खान प्रिंस खान अपने गिरोह के अपराधियों से 4 मोबाइल एप के जरिए संपर्क में रहता है। इनमें वॉट्सएप और मैसेंजर के साथ जंगी एप भी शामिल है। इन एप के जरिए प्रिंस गिरोह के अपराधियों को निर्देश देता है। पुलिस अब टेक्निकल टीम की मदद से इन एप की डिटेल खंगाल रही है। दुबई गए थे सफेदपोश, अब पुलिस पूछेगी जाने का मकसद पुलिस को पता चला है कि दुबई में प्रिंस खान से मिलने के लिए धनबाद और रांची से कई सफेदपोश गए थे। उनमें वासेपुर के कुछ लोग भी शामिल हैं। संदेह है कि वे प्रिंस को कारोबारियों की जानकारी देते हैं और रंगदारी के पैसे के ट्रांजेक्शन में भी मददगार हैं। उन सबका पता लगाया जा रहा है। उनसे दुबई जाने का मकसद पूछा जाएगा।
दो स्कूटी पर आए छह बदमाश, कर्मचारियों से मारपीट कर हथियार के बल पर की लूट; पुलिस जांच में जुटी रांची: झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आए। शहर के पुंदाग इलाके में स्थित दीना पेट्रोल पंप पर रविवार शाम हथियारबंद बदमाशों ने लूट की बड़ी घटना को अंजाम दिया। करीब साढ़े सात बजे हुई इस वारदात में छह अपराधी दो स्कूटी पर सवार होकर पहुंचे और पेट्रोल पंप कर्मियों को डराकर करीब 59 हजार रुपये नकद लूटकर फरार हो गए। हथियार के बल पर लूट, कर्मचारियों से मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बदमाशों ने पहले पेट्रोल पंप पर काम कर रहे कर्मचारियों के साथ मारपीट की और फिर हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया। पेट्रोल पंप की कर्मी सुजाता कुमारी ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचीं तो देखा कि अपराधी कर्मचारियों को हथियार दिखाकर डरा रहे थे। इस दौरान एक अन्य कर्मचारी ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने चाकू और हथियार दिखाकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। CCTV में कैद हुई पूरी घटना पूरी वारदात पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बदमाश किस तरह से आए और घटना को अंजाम देकर फरार हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पेट्रोल पंप पर पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे इलाके में डर का माहौल है। पुलिस ने शुरू की जांच, जल्द गिरफ्तारी का दावा घटना की सूचना मिलते ही पुंदाग ओपी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बड़ी वारदात की साजिश नाकाम, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से टला खतरा हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के 8 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में होने वाली संभावित बड़ी घटना को समय रहते टाल दिया गया। बड़ी साजिश की थी तैयारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उग्रवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर संदिग्ध इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया गया। फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़े गए आरोपी कार्रवाई के दौरान उरीमारी ओपी क्षेत्र के कोलियरी इलाके में एक संदिग्ध बोलेरो वाहन नजर आया। पुलिस को देखते ही चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर आसवा और गुडकुवा गांव के बीच पुल और पेड़ से टकरा गया। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन में सवार सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। हथियारों के साथ पकड़े गए उग्रवादी तलाशी के दौरान दो आरोपियों के हाथ में इंसास राइफल मिली, जिससे उनके इरादों की गंभीरता साफ हो गई। पुलिस ने मौके से- 2 इंसास राइफल भारी मात्रा में जिंदा कारतूस 1 देसी पिस्टल 1 बोलेरो वाहन 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। लातेहार और रांची के रहने वाले आरोपी गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान सुनील मुंडा, विरेंद्र मुंडा, सुरेंद्र मुंडा, लालमोहन मुंडा, अनिल मुंडा, रविंद्र गंझू उर्फ रिंकू, सत्येंद्र गंझू उर्फ संतु और संजय मुंडा के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी लातेहार और रांची जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी टीएसपीसी संगठन से जुड़े हैं और इलाके में सक्रिय होकर वसूली और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
सहरसा के युवक ने देहरादून में दिया वारदात को अंजाम देहरादून में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सहरसा के रहने वाले एक युवक ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। आरोपी ने न सिर्फ गला दबाकर पत्नी को मौत के घाट उतारा, बल्कि चार दिनों तक शव को घर में रजाई के नीचे छिपाकर रखा। पास ही रोती रही 11 महीने की बच्ची इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस घर में महिला का शव छिपा था, उसी घर में उसकी 11 महीने की मासूम बच्ची मौजूद थी। आरोपी पिता उसी दौरान बच्ची को दूध पिलाता रहा, जबकि पास के कमरे में उसकी मां की लाश पड़ी थी। विवाद के बाद की गई हत्या पुलिस के अनुसार, आरोपी रंजीत शर्मा का अपनी पहली पत्नी रूपा (32) से अक्सर विवाद होता था। दूसरी पत्नी को लेकर भी दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी विवाद के दौरान गुस्से में आकर आरोपी ने पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी। 4 दिन तक रजाई में छिपाया शव हत्या के बाद आरोपी ने शव को घर में ही छिपाकर रखा। चार दिनों तक वह उसी मकान में रहा, जहां एक कमरे में लाश रखी थी और दूसरे कमरे में वह अपनी बच्ची के साथ रह रहा था। बाद में दूसरी पत्नी के आने पर दोनों ने मिलकर शव को प्लास्टिक के कट्टे में पैक किया। बाइक से 5 किमी दूर जंगल में फेंका शव आरोपी ने शव को बाइक पर बांधकर करीब 5 किलोमीटर दूर मांडूवाला जंगल में फेंक दिया। 11 मार्च को शीतला माता मंदिर परिसर के पास बोरे में शव मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 2500 CCTV फुटेज से खुला राज यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था। लेकिन देहरादून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए: 2500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले 30 से अधिक बस्तियों में 5000 लोगों से पूछताछ की जांच के दौरान एक मजदूर की पत्नी के अचानक गायब होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस का शक आरोपी पर गया। आरोपी गिरफ्तार, मामले का खुलासा आखिरकार पुलिस ने आरोपी रंजीत शर्मा को भाटोवाला इलाके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक ठेकेदार की साइट पर मजदूरी करता था और वहीं अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। पहले भी जटिल था पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है कि आरोपी की पहली शादी 2009 में हुई थी। कुछ साल पहले पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी, जिसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली। करीब एक महीने पहले पहली पत्नी अपनी बच्ची के साथ वापस आई थी, जिससे घर में तनाव बढ़ गया।
कैरलीबार पंचायत में सनसनीखेज घटना चतरा जिले के वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कैरलीबार पंचायत में एक ईंट भट्ठा मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान 30 वर्षीय विनोद गंझू के रूप में हुई है, जो करमा पंचायत के मदनपुर गांव का रहने वाला था। काम के लिए गया, घर नहीं लौटा परिजनों के अनुसार, विनोद गंझू गुरुवार को कैरलीबार पंचायत के निमियाटांड़ स्थित एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने गया था। यह भट्ठा विनोद भारती और सोनू भारती नामक दो भाइयों का बताया जा रहा है। काम के सिलसिले में वह वहीं रुक गया, लेकिन रात में घर वापस नहीं लौटा। पार्टी के बाद गायब हुआ मजदूर स्थानीय जानकारी के मुताबिक, भट्ठा जलाने के बाद रात में मजदूरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान शराब और मुर्गा की पार्टी भी हुई, जिसमें विनोद गंझू शामिल था। इसके बाद वह अचानक लापता हो गया। सुबह गड्ढे में मिला शव शुक्रवार सुबह विनोद गंझू का शव भट्ठे के पास एक गड्ढेनुमा जगह से बरामद हुआ। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप मृतक की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों ने ईंट भट्ठा मालिकों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या है। परिजन दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। परिजन वशिष्ठ नगर थाना में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया भी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज फिलहाल यह मामला संदिग्ध मौत का माना जा रहा है, लेकिन परिजनों के आरोपों ने इसे हत्या का मामला बना दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा और कार्यस्थल की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई सामने आ सके।
मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सोमवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में दो कुख्यात बदमाश मारे गए, जबकि एक STF जवान शहीद हो गए। यह एनकाउंटर चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गांव में रात करीब 2:30 बजे हुआ, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। धमकी के बाद एक्शन में आई पुलिस पुलिस के मुताबिक, कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ने चकिया थाने के अपर थानाध्यक्ष को नेपाल के नंबर से फोन कर खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि “शहर अब उनकी गुंडई देखेगा” और 10-15 पुलिसकर्मियों की हत्या की धमकी भी दी थी। इसी कॉल को ट्रेस करते हुए STF और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रामडीहा गांव में घेराबंदी की। घेराबंदी होते ही शुरू हुई ताबड़तोड़ फायरिंग जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, अपराधियों ने सरेंडर करने के बजाय अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला, जिससे मुठभेड़ तेज हो गई। इस दौरान STF के जवान श्रीराम यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी शहादत से पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है। जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश ढेर पुलिस की जवाबी फायरिंग में कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मौके पर ही मारे गए। दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि, अंधेरे का फायदा उठाकर उनके कुछ साथी मौके से फरार होने में सफल रहे। घटनास्थल से हथियार और अन्य संदिग्ध सामान बरामद होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। DIG और SP के नेतृत्व में पूरे चकिया क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खत्म किया जाएगा। नेपाल सीमा से जुड़ा अपराध का नेटवर्क मोतिहारी का यह इलाका नेपाल सीमा के करीब होने के कारण संवेदनशील माना जाता है। अक्सर अपराधी वारदात को अंजाम देकर सीमा पार फरार हो जाते हैं, जिससे पुलिस के लिए चुनौती बढ़ जाती है। कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश इस एनकाउंटर को पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि STF जवान श्रीराम यादव की शहादत ने इस सफलता को दर्दनाक बना दिया है। पुलिस ने साफ किया है कि अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
धनबाद। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के खिलाफ रांची और धनबाद पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। धनबाद में सोमवार सुबह पुलिस और गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 3 अपराधी घायल हो गये। ये तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। घायल तीनों आरोपियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। धनबाद में एनकाउंटरः धनबाद के पुटकी थाना क्षेत्र के भागाबांध ओपी इलाके में रांची और धनबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के गिरोह के दो अपराधियों को पैर में गोली लगी है, जबकि एक अन्य भागने के क्रम में पैर टूटने से घायल हो गया। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान कुबेर, विक्की डोम और अमन अफजल के रूप में हुई है, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्चुअल नंबरों से मांग रहा रंगदारीः राजधानी रांची में प्रिंस खान के नाम पर वर्चुअल नंबरों से कॉल के जरिए मांगी जा रही रंगदारी और एक रेस्टोरेंट में गोलीबारी की घटना के बाद रांची और धनबाद पुलिस ने यह ऑपरेशन शुरू किया है। तकनीकी जांच में पता चला कि कुबेर नाम का बदमाश धनबाद में छिपकर रांची के व्यवसायियों को धमका रहा था। दो को लगी गोली, एक का पैर टूटाः सूचना की पुष्टि होते ही रांची और धनबाद पुलिस की विशेष टीम ने भागाबांध इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरा देख अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में कुबेर और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि भागने की कोशिश में अमन अफजल का पैर टूट गया। होटल स्टाफ हत्याकांड का भी खुलासाः पुलिस सूत्रों का दावा है कि इन गिरफ्तारियों के साथ ही हाल में रांची के एयरपोर्ट क्षेत्र स्थित होटलकर्मी की हत्याकांड का भी खुलासा हो गया है। मुठभेड़ के बाद पूरा भागाबांध इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। धनबाद के एसएसपी स्वयं मौके पर मौजूद हैं। पुलिस को पूछताछ के दौरान प्रिंस खान गिरोह के अगले मंसूबों और उनके मददगारों के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि गिरोह के किसी अन्य छिपे हुए सदस्यों को दबोचा जा सके। पुलिस अब अपराधियों के पास से बरामद मोबाइल और अन्य दस्तावेज के जरिए प्रिंस खान के अंतरराष्ट्रीय लिंक और स्थानीय नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है। एक सप्ताह के अंदर दूसरी मुठभेड़ः बता दें कि धनबाद पुलिस और प्रिंस खान के गुर्गों के साथ एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी मुठभेड़ है। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने धनबाद के भुईफोड़ स्थित फायरिंग जोन में प्रिंस खान के एक गुर्गे के साथ मुठभेड़ हुई थी। जिसमें पुलिस एनकाउंटर में एक गुर्गे को पैर में गोली लगी थी। दूसरा गुर्गा फरार हो गया था। जिसे बाद में कुछ घंटों के अंदर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था ।
गुप्त सूचना पर पुलिस का ऑपरेशन झारखंड के धनबाद में पुलिस ने कुख्यात अपराधी प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके तीन गुर्गों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई भागाबांध ओपी क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस और अपराधियों के बीच हुई गोलीबारी में तीनों बदमाश घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि प्रिंस खान गिरोह के कुछ सदस्य इलाके में मौजूद हैं और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही धनबाद पुलिस ने इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू किया और संदिग्धों की घेराबंदी कर दी। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने की फायरिंग पुलिस की घेराबंदी के दौरान जब संदिग्ध अपराधियों ने पुलिस को अपने करीब आते देखा, तो उन्होंने मौके से भागने की कोशिश की। इसी दौरान अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस कार्रवाई में गिरोह के तीन बदमाश घायल हो गए। पुलिस ने तुरंत उन्हें पकड़कर अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। दो को गोली लगी, एक का पैर टूटा पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान दो अपराधियों को गोली लगी, जबकि तीसरा बदमाश भागने के दौरान घायल हो गया। बताया जा रहा है कि एक आरोपी छत से कूदकर भागने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान उसका पैर टूट गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घायल आरोपियों की पहचान पुलिस ने मुठभेड़ में घायल हुए तीनों अपराधियों की पहचान कर ली है। इनमें अमन सिंह उर्फ कुबेर (पलामू निवासी) विक्की डोम (धनबाद निवासी) अफजल उर्फ अमन (वासेपुर निवासी) शामिल हैं। इनमें अमन सिंह और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि अफजल उर्फ अमन का पैर गिरने से टूट गया। घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके की तलाशी ली। इस दौरान आरोपियों के पास से हथियार और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन हथियारों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल पहले किन-किन अपराधों में किया गया था। प्रिंस खान गिरोह से जुड़े हैं आरोपी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी धनबाद के वासेपुर इलाके के फरार अपराधी प्रिंस खान के करीबी बताए जा रहे हैं। प्रिंस खान लंबे समय से फरार है और उस पर धनबाद व आसपास के क्षेत्रों में रंगदारी, धमकी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। गिरोह के नेटवर्क की तलाश में पुलिस फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से गिरोह के नेटवर्क और अन्य सदस्यों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस ने गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
मधुबनी/कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में बिहार के एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान मधुबनी जिले के पाली गांव निवासी आसिफ अली के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मामूली विवाद के बाद एक नाबालिग ने उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। काम के सिलसिले में मध्य प्रदेश गए थे आसिफ परिजनों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आसिफ अली पेशे से इलेक्ट्रीशियन थे और दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करते थे। हाल ही में वे अपने दो साथियों के साथ काम के सिलसिले में दिल्ली से मध्य प्रदेश के कटनी जिले के बरगवां इलाके में आए थे, जहां पिछले कुछ दिनों से वे विद्युत कार्य कर रहे थे। सड़क पर थूकने को लेकर शुरू हुआ विवाद बताया जा रहा है कि रविवार देर रात आसिफ पास के एक होटल से खाना लेने गए थे। उसी दौरान सड़क पर खड़े एक युवक ने थूक दिया, जिसकी कुछ छींटें आसिफ पर पड़ गईं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर गुस्से में आए नाबालिग ने अपने पास मौजूद चाकू से आसिफ पर कई वार कर दिए। हमले में गंभीर रूप से घायल आसिफ मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़े। अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत आसिफ के साथ दिल्ली से आए उनके साथी अभिषेक और अमित ने जब उन्हें घायल अवस्था में देखा, तो स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। लेकिन देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शुरू की आरोपी की तलाश घटना की सूचना मिलते ही रंगनाथनगर थाना प्रभारी अरुण पाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान कर ली गई है, जो रंगनाथ नगर क्षेत्र का ही रहने वाला है। हालांकि घटना के बाद से वह फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ आसिफ अली अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी मौत की खबर मिलते ही मधुबनी जिले के उनके गांव पाली में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन इस घटना से गहरे सदमे में हैं और गांव में मातम का माहौल है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज