लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस और बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी अपराधी संजय उर्फ संजीव मारा गया। पुलिस के अनुसार, संजय 27 मई 2026 को पीजीआई थाना क्षेत्र में हुए चर्चित बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर था और लंबे समय से फरार चल रहा था। मुठभेड़ लखनऊ के इंदिरा नहर रोड पर हुई, जहां पुलिस ने उसे घेर लिया। जवाबी कार्रवाई में संजय मारा गया। पुलिस ने मौके से हथियार और अन्य सामान भी बरामद किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का था मुख्य आरोपी पुलिस के मुताबिक, संजय उर्फ संजीव 27 मई 2026 को पीजीआई थाना क्षेत्र में हुए बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर था। घटना के बाद से ही वह फरार था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी। उसकी सूचना देने पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। कई जिलों में दर्ज थे गंभीर आपराधिक मामले पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजय के खिलाफ अंबेडकर नगर, बस्ती, अयोध्या सहित कई जिलों में हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों के कई मामले दर्ज थे। वह लंबे समय से संगठित अपराध की गतिविधियों में सक्रिय था। संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, संजय का संबंध अंबेडकर नगर के कुख्यात अपराधियों दिलीप वर्मा और खान मुबारक के आपराधिक नेटवर्क से भी था। पुलिस का कहना है कि वह इस गिरोह के लिए कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका था। पुलिस ने बताया बड़ी सफलता उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि संजय के मारे जाने से प्रदेश में सक्रिय संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है। पुलिस अब उसके अन्य सहयोगियों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है।
पुणे: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल ने दावा किया है कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह विग पहनता था। पुलिस का कहना है कि सिया के बयान और उसके मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं। पूछताछ में सिया ने बताई शादी से इनकार की वजह मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को हुई पूछताछ में सिया गोयल ने पुलिस को बताया कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसके सिर पर बाल नहीं थे और वह विग पहनता था। सिया ने यह भी कहा कि उसने परिवार की नाराजगी के डर से शादी से इनकार नहीं किया। पुलिस के अनुसार, दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी और नवंबर में शादी प्रस्तावित थी। विवाह समारोह के लिए राजस्थान के एक पैलेस की बुकिंग भी की जा चुकी थी, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च होने थे। मोबाइल चैट ने सिया के दावों पर खड़े किए सवाल लोनावला ग्रामीण पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान सिया ने दावा किया कि उसने पहले ही केतन को शादी न करने की इच्छा बता दी थी। उसके अनुसार, केतन हर बार कहता था कि अब बहुत देर हो चुकी है और रिश्ता तोड़ना संभव नहीं है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए दोनों के मोबाइल फोन से मिली चैट इस दावे का समर्थन नहीं करती। शुरुआती जांच में दोनों के बीच सामान्य मंगेतर की तरह बातचीत और प्रेमपूर्ण संदेश मिले हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सिया के मौजूदा बयान पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लग रहे हैं। सभी बयानों का इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से मिलान किया जा रहा है। हर एंगल से जांच कर रही है पुलिस पुलिस का कहना है कि जांच किसी एक पहलू तक सीमित नहीं है। डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, आरोपियों के बयान और तकनीकी सबूतों का विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। 18 जून को हुई थी केतन अग्रवाल की मौत जानकारी के अनुसार, 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन अग्रवाल की मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा माना गया, लेकिन बाद में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सिया गोयल अपनी जिंदगी के इस दौर में शादी नहीं करना चाहती थी और परिवार के दबाव में उसने यह रिश्ता स्वीकार किया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। सिया गोयल और चेतन चौधरी पुलिस हिरासत में मामले में पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और उसके दोस्त चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल 29 जून तक पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच जारी है। जांच जारी, अभी आरोप साबित होना बाकी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
खूंटी। झारखंड के खूंटी जिले में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस को खुली चुनौती देते हुए हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रनिया थाना क्षेत्र में एक युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। घटना ऐसे समय सामने आई, जब पुलिस एक अन्य हत्याकांड के आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेजकर लौटी थी। लगातार हो रही हत्याओं ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या है मामला? सोमवार सुबह रनिया थाना पुलिस को तांबा रोड के किनारे एक व्यक्ति का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती तौर पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हुआ, लेकिन घटनास्थल और शव का बारीकी से निरीक्षण करने पर हत्या की आशंका स्पष्ट हो गई। मृतक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान मिले, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि अपराधियों ने भारी पत्थर से हमला कर उसकी हत्या की और सबूत छिपाने के लिए शव को सड़क किनारे छोड़ दिया। जांच के दौरान मृतक की पहचान तोरपा निवासी 40 वर्षीय राधेश्याम साहू के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि वह पिछले करीब पांच वर्षों से रनिया में मोटर गैराज चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे। उनकी हत्या की खबर से परिवार और स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल है। जमीन विवाद समेत सभी एंगल पर जांच तोरपा के डीएसपी विजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस आपसी रंजिश, व्यक्तिगत दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है। संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर लिया जाएगा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं से खूंटी जिले में लोगों के बीच भय का माहौल है। स्थानीय लोग अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले की मसलिया थाना पुलिस ने दो वर्षों से फरार चल रहे पॉक्सो एक्ट के आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में फरार आरोपी उस्मान शेख को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और मोबाइल में सिम कार्ड का इस्तेमाल भी नहीं करता था, लेकिन सोशल मीडिया पर उसकी गतिविधियां ही पुलिस के लिए अहम सुराग बन गईं। नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण का था मामला मसलिया थाना में दर्ज मामले के अनुसार आरोपी के खिलाफ नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया था। घटना के बाद से वह फरार था और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रह रहा था। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी, लेकिन उसके मोबाइल सिम का इस्तेमाल नहीं करने के कारण उसकी लोकेशन ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। इंस्टाग्राम से मिला अहम सुराग पुलिस ने तकनीकी सेल की मदद से आरोपी की सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच शुरू की। इसी दौरान इंस्टाग्राम से मिले इनपुट के आधार पर पता चला कि आरोपी पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पायकर थाना क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के संपर्क में रहता है। इसके बाद पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी। तीन दिन तक चली छापेमारी मसलिया थाना प्रभारी राजेश रंजन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार तीन दिनों तक पश्चिम बंगाल में छापेमारी अभियान चलाया। आखिरकार बीरभूम जिले के अमुदा गांव स्थित उसकी बुआ के घर से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। तकनीकी जांच से मिली सफलता डीएसपी संदीप भगत ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच, सोशल मीडिया विश्लेषण और पुलिस टीम की सतर्कता के कारण दो वर्षों से फरार आरोपी को कानून के शिकंजे में लाया जा सका। इस अभियान में मसलिया थाना पुलिस, तकनीकी सेल और अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के दौरान नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही खुफिया निगरानी और जांच के आधार पर की गई। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की थी साजिश प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर आईएसआई और अंडरवर्ल्ड से जुड़े तत्वों के निर्देश पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, उनका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाना था। पूछताछ में यह भी जानकारी मिली है कि संदिग्ध पावर प्लांट, न्यूक्लियर प्लांट, बिजली घर, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर हमले की योजना बना रहे थे। खुफिया सूचना के बाद चला विशेष अभियान अधिकारियों ने बताया कि इस मॉड्यूल की गतिविधियों पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी। संदिग्धों के नेटवर्क, संपर्कों और गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने के बाद एक समन्वित अभियान चलाया गया, जिसके तहत सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का मानना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया। नेटवर्क और फंडिंग की जांच जारी गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां उनके पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों, फंडिंग स्रोतों और बरामद हथियारों व विस्फोटकों की सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही विदेश में बैठे कथित संचालकों और सीमा पार कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
रांची। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में रेलवे सिग्नलिंग केबल चोरी मामले का रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने खुलासा कर दिया है। आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से करीब 20 मीटर लंबा 12 कोर रेलवे सिग्नलिंग केबल बरामद किया गया है, जिसकी कीमत लगभग दो हजार रुपये बताई जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में रेलवे संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहन डे (50 वर्ष), राहुल कुमार (18 वर्ष) और गौतम कुमार (20 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी पतरातू के सौंदा बगीचा क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। आरपीएफ ने सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लोकेशन बॉक्स से काटा गया था सिग्नलिंग केबल आरपीएफ पतरातू पोस्ट के अनुसार, 23 मई की रात करीब आठ बजे पतरातू प्वाइंट संख्या-305 के पास स्थित लोकेशन बॉक्स से 2×12 कोर सिग्नलिंग केबल काटकर चोरी कर लिया गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद 24 मई को संयुक्त जांच रिपोर्ट तैयार कर मामले की जांच शुरू की गई। जूट की बोरी में ले जा रहे थे चोरी का सामान शनिवार को जांच के दौरान आरपीएफ टीम पतरातू बस्ती क्षेत्र से लौट रही थी। इसी दौरान ईस्ट केबिन के पास तीन युवक जूट की बोरी में भारी सामान ले जाते दिखाई दिए। संदेह होने पर टीम ने उन्हें रोककर तलाशी ली, जिसमें बोरी से तीन टुकड़ों में करीब 20 मीटर रेलवे सिग्नलिंग केबल बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला जुर्म आरपीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसों के लालच में 23 मई की रात केबल काटकर पास के एक टूटे केबिन में छिपा दिया था। बाद में वे उसे बेचने के लिए ले जा रहे थे। आरोपियों के पास रेलवे संपत्ति ले जाने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। मामले में उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार की शिकायत पर आरपी (यूपी) एक्ट की धारा-3 और रेलवे अधिनियम की धारा-147 के तहत केस दर्ज किया गया है। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि सिग्नलिंग केबल कटने से ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता था और इससे बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बन सकती थी।
रांची। रांची के टाटीसिलवे थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है। 21 वर्षीय युवती ने एक डॉक्टर पर दांत के इलाज के दौरान अश्लील हरकत और छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इलाज के दौरान डॉक्टर ने की अश्लील हरकत जानकारी के अनुसार यह घटना टाटीसिलवे बैंक मोड़ स्थित एक क्लिनिक की बताई जा रही है। अनगड़ा क्षेत्र की रहने वाली युवती इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंची थी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने मर्यादा की सीमाएं पार करते हुए उसके साथ गलत व्यवहार किया और आपत्तिजनक सवाल पूछे। जोर-जोर से चिल्लाने लगी पीड़िता के अनुसार उसने डॉक्टर की हरकतों का विरोध किया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर वह घबरा गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी। शोर सुनकर डॉक्टर ने उसे छोड़ दिया। इसके बाद युवती किसी तरह क्लिनिक से बाहर निकली और घर पहुंचकर परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। फिर युवती अपने परिवार के साथ टाटीसिलवे थाना पहुंची और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है। पुलिस जुटी मामले की जांच मे टाटीसिलवे थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे बड़े राजदार मेजर उर्फ सैफी की गिरफ्तारी के बाद अब धनबाद पुलिस के रडार पर प्रिंस खान का भाई गोपी है। पुलिस ने प्रिंस खान के पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर लीहै। पूछताछ में सैफी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि प्रिंस खान अब दुबई छोड़कर पाकिस्तान में आतंकियों की पनाह में पहुंच चुका है। अब उसका भाई गोपी खान दुबई से ही बैठकर इस पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा है। प्रिंस का साला रितिक और आदिल भी इस समय दुबई में ही मौजूद हैं। प्रिंस खान के परिवार और करीबियों पर शिकंजा इस नए इनपुट के बाद पुलिस अब प्रिंस खान के परिवार और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने जा रही है। सैफी ने कबूला है कि रंगदारी से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम को प्रिंस ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया है। इस खुलासे के बाद गैंग को आर्थिक रूप से मदद करने वाले तमाम रिश्तेदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता के बयानों पर पुलिस को शक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीते दिनों प्रिंस के माता-पिता से करीब 5 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि उनका अपने बेटों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस को उनके इस बयान पर भरोसा नहीं है। पुलिस कमिश्नर और संबंधित एजेंसियां सैफी से मिले इनपुट्स के आधार पर शहर में सक्रिय गैंग के स्लीपर सेल और अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी और कड़ियों का सत्यापन कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेगी धनबाद पुलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खान के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनआईए या सीबीआई) की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि दुबई में बैठा गोपी खान नेटवर्क को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। गोपी के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और धमकी देने के 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपी के खिलाफ सख्त इंटरनेशनल एक्शन के लिए धनबाद पुलिस जल्द ही पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजेगी। बंटी और गॉडविन पर पुलिस की नजर हाल के दिनों में कई नए मुकदमों में नामजद होने के बावजूद प्रिंस का भाई बंटी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी अपने भाइयों की तरह देश छोड़कर भागने की फिराक में हो सकता है, लिहाजा उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। वहीं, चाईबासा जेल में बंद गॉडविन पर भी कड़ी नजर है, क्योंकि पुलिस को शक है कि वह जेल के भीतर से ही नए अपराधियों को प्रिंस के गैंग में शामिल करने का खेल रच रहा है। जेल प्रशासन से गॉडविन से मिलने आने वाले हर शख्स का ब्योरा मांगा गया है। व्यवसायी ने खुद को गैंग से अलग बताया इधर, वासेपुर-भूली रोड के रहने वाले कबाड़ गोदाम संचालक सैयद मोहम्मद आरिफ खान उर्फ गोल्डन ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से खुद पर लग रहे आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे प्रिंस के गुर्गे नहीं हैं, बल्कि एक साधारण व्यवसायी हैं, जो कड़ी मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनका इस आपराधिक सिंडिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।
जामताड़ा। जामताड़ा पुलिस ने अपराध नियंत्रण और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। हत्या, लूट और ठगी जैसे गंभीर मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक Shambhu Kumar Singh ने कार्रवाई की जानकारी दी। पेट्रोल पंप लूट और हत्या मामले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार एसपी ने बताया कि 22 मार्च 2025 को फतेहपुर थाना क्षेत्र स्थित नायरा पेट्रोल पंप में लूट और हत्या की बड़ी वारदात हुई थी। इस मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुस्तकीम अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से कानून से बचता फिर रहा था और कई जिलों में सक्रिय था। कई जिलों में दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुस्तकीम अंसारी पर लूट, डकैती, अपहरण और हत्या जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। जामताड़ा, देवघर और गिरिडीह सहित कई जिलों में वह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। नाला एसडीपीओ मनोज कुमार महतो और जामताड़ा एसडीपीओ विकास आनंद लागोरी के नेतृत्व में पुलिस ने लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच की, जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। ठगी मामले में भी मिली सफलता पुलिस ने वर्ष 2023 के एक ठगी मामले में भी कार्रवाई करते हुए मोहम्मद असमुद्दीन अंसारी उर्फ समीर को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और धमकी देने के आरोप हैं। पुलिस का कहना है कि जिले में अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अपराधियों में मचा हड़कंप एसपी ने कहा कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। लगातार हो रही कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 19 वर्षीय एक युवती ने कथित तौर पर अपनी मां की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसने अपनी मां का सिर धड़ से अलग कर दिया और पूरी रात उसे अपने साथ रखा। इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मां की हत्या, पिता और बहन पर भी हमला यह घटना डेरामुख लालुंग गांव की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूजा मलंग ने धारदार हथियार 'दाओ' से अपनी 42 वर्षीय मां अनुमाई मलंग पर हमला किया। हमले में मां की मौके पर ही मौत हो गई। जब पिता प्रेमेंद्र मलंग और बहन ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो पूजा ने उन पर भी हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। कटा सिर लेकर रातभर रही फरार हत्या के बाद पूजा अपनी मां का कटा हुआ सिर लेकर मौके से फरार हो गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की तलाश के बाद उसे अगली सुबह गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय भी उसके पास कटा हुआ सिर मौजूद था, जिससे हर कोई स्तब्ध रह गया। काला जादू और नशे के एंगल से जांच स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों ने काला जादू से जुड़े होने की आशंका जताई है, जबकि कुछ का मानना है कि युवती नशे के प्रभाव में हो सकती थी। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूजा सामग्री और हथियार बरामद पुलिस ने आरोपी के पास से एक हंसिया, कैंची, तेल, सिंदूर और मिट्टी का बर्तन समेत पूजा-पाठ से जुड़ी कई वस्तुएं बरामद की हैं। इन बरामद सामानों के आधार पर पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। हत्या के कारणों की तलाश जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार में पहले किसी विवाद की जानकारी नहीं मिली थी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ हत्या और घातक हथियार से हमला करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
महाराष्ट्र के Pune से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने शादी के रिश्ते पाने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताकर झूठी कहानी गढ़ ली। लेकिन उसकी यह चाल ज्यादा दिन नहीं चल सकी और अब उस पर कानूनी कार्रवाई हो रही है। शादी के लिए रची पूरी साजिश 26 वर्षीय ऋषिकेश राजू जाधव, जो पेशे से सब्जी विक्रेता है, ने खुद को पुलिस में चयनित दिखाने के लिए शहरभर में पोस्टर और फ्लेक्स बैनर लगवा दिए। इतना ही नहीं, उसने पुलिस की वर्दी पहनकर अपनी तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें व्हाट्सऐप स्टेटस पर भी साझा किया, ताकि लोगों को उसकी “नौकरी” पर यकीन हो जाए। पुलिस के अनुसार, वह शादी न होने से परेशान था और इसी कारण उसने यह झूठा नाटक रचा। जांच में खुली पोल मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने शहर में अवैध पोस्टर और बैनरों के खिलाफ अभियान चलाया। इसी दौरान अधिकारियों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी, जिनमें युवक खुद को पुलिसकर्मी बताता दिख रहा था। जांच के बाद पता चला कि वह Maharashtra Police में चयनित नहीं हुआ था, बल्कि लोगों को गुमराह कर रहा था। बचपन से था पुलिस बनने का सपना पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवक बचपन से ही पुलिस में भर्ती होना चाहता था और उसने कई बार कोशिश भी की, लेकिन ऊंचाई की शर्त पूरी न होने के कारण चयन नहीं हो सका। इसी बीच परिवार ने उसकी शादी के लिए रिश्ते ढूंढने शुरू किए, जिससे वह दबाव में आ गया और अपनी मां से झूठ बोल दिया कि उसकी नौकरी लग गई है। मिठाई बांटी, घर के बाहर लगाया बैनर अपने झूठ को सच साबित करने के लिए उसने मोहल्ले में मिठाई तक बांटी और घर के बाहर बड़ा बैनर भी लगवाया, जिस पर पुलिस का लोगो और उसकी “भर्ती” की बधाई लिखी गई थी। अब कानूनी कार्रवाई फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सार्वजनिक सेवक की पहचान का दुरुपयोग करने का मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कोई भी व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी न कर सके।
एक रात में दो अपराध, देश को झकझोर देने वाली घटना दिल्ली और राजस्थान से सामने आई इस सनसनीखेज घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। 23 वर्षीय आरोपी राहुल मीणा ने कथित तौर पर 12 घंटे के भीतर दो जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। पहले उसने Alwar में अपनी पड़ोसी महिला के साथ दुष्कर्म किया, और इसके कुछ घंटों बाद Delhi पहुंचकर अपने पूर्व नियोक्ता के घर में उनकी 22 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। अलवर में पहली वारदात, धमकी देकर फरार पुलिस के अनुसार, आरोपी ने रात करीब 10:30 बजे पड़ोसी के घर में घुसकर महिला के साथ मारपीट की और फिर दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गया। इस मामले में अलवर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली में दूसरी वारदात, घर में घुसकर हत्या अगली सुबह आरोपी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में स्थित अपने पूर्व नियोक्ता के घर पहुंचा। उस समय घर में युवती अकेली थी। करीब एक घंटे के भीतर उसने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गया। जब युवती के माता-पिता घर लौटे, तो उन्होंने अपनी बेटी को खून से लथपथ हालत में पाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवती के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या की गई। CCTV से खुला राज, 15 टीमों ने किया गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए 15 टीमें बनाई थीं। CCTV फुटेज के जरिए आरोपी की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया। फुटेज में आरोपी को घर में प्रवेश और बाहर निकलते हुए अलग-अलग कपड़ों में देखा गया। ऑटो चालक की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। पहले नौकरी से निकाला गया था आरोपी आरोपी पहले पीड़िता के घर में काम करता था, लेकिन उसे कथित वित्तीय गड़बड़ी और सट्टेबाजी की आदत के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। जांच में सामने आया है कि वह पैसे के लिए धोखाधड़ी करता था और कर्ज में डूबा हुआ था। कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू कर्मचारियों के वेरिफिकेशन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और सुरक्षा उपायों की तत्काल जरूरत है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के पंडरा इलाके में मंगलवार सुबह एक सनसनीखेज वारदात में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। बिहार में ठगी के आरोप, बदलकर रखा था नाम जानकारी के अनुसार, मृतक भार्गव सिंह का असली नाम अंकित सिंह बताया जा रहा है। वह पहले पटना में रहता था और खुद को बिहार विधानसभा का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगता था। नौकरी और एडमिशन दिलाने के नाम पर उसने कई लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे। बताया जाता है कि पुलिस उसकी तलाश में थी, लेकिन प्रभाव और संपर्क के कारण वह गिरफ्त से बचता रहा। पटना से भागकर रांची में शुरू किया नया धंधा सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में वह पटना से भागकर रांची आ गया और यहां जमीन कारोबार शुरू किया। इस दौरान उसने कई लोगों के साथ जमीन के नाम पर भी धोखाधड़ी की। धीरे-धीरे उसने राजनीतिक संपर्क भी बना लिए और एक विधायक के करीबी के रूप में जाना जाने लगा। जमीन विवाद बना हत्या की वजह? प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में हुरहुरी इलाके की जमीन को लेकर उसका विजय हेंड्रिक टेटे नामक व्यक्ति से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच कुछ दिन पहले झगड़ा भी हुआ था, जिसमें जान से मारने की धमकी दी गई थी। हालांकि, पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, जिसमें पारिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है। जांच में जुटी पुलिस, कारणों की तलाश जारी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
होमस्टे में घटी गंभीर वारदात कर्नाटक के कोडागु जिले से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक अमेरिकी महिला पर्यटक के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। पुलिस के मुताबिक, यह घटना एक होमस्टे में हुई, जहां महिला ठहरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी होमस्टे का एक कर्मचारी और मालिक शामिल हैं। तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने महिला के कमरे में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलने के बावजूद होमस्टे मालिक ने पीड़िता की मदद नहीं की। इसके बजाय, उस पर आरोप है कि उसने महिला को करीब तीन दिनों तक कमरे में बंद रखा, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और उसे धमकाया ताकि वह शिकायत दर्ज न करा सके। मैसूर पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत घटना लगभग एक सप्ताह पहले की बताई जा रही है। किसी तरह वहां से निकलने के बाद पीड़िता मैसूर पहुंची, जहां उसने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया और पूरी घटना की जानकारी दी। अमेरिकी दूतावास से सूचना मिलने के बाद कर्नाटक पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में कोडागु के पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें 3 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
धनबाद। झारखंड के आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी कोलकाता नहीं बल्कि दुबई में हुई है। दुबई में उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया। मेजर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसे विदेश से भारत लाने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद लेकर आई। प्रिंस खान को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग और प्रिंस खान के ठिकानों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सूचना मिली है। करीब चार साल पहले दुबई भागने और इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर है। प्रिंस खान से जुड़ी कुछ अहम जानकारिया धनबाद में कई सालों से प्रिंस खान ने दहशत फैला रखी है अर्से से झारखंड पुलिस को प्रिंस खान की तलाश है 2021 में प्रिंस खान पुलिस से बचने के लिए दुबई भाग गया अब वह दुबई से पाकिस्तान भाग गया है प्रिंस खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में छिपा है पुलिस प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश में है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा ताजा खुफिया इनपुट के अनुसार, प्रिंस खान ने अपना ठिकाना दुबई से बदलकर अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बना लिया है। वह वहीं से रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर के बड़े कारोबारियों को वर्चुअल नंबरों के जरिए रंगदारी के लिए धमकाता है। कभी वासेपुर की गलियों से अपराध शुरू करने वाला प्रिंस खान अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। प्रिंस खान को घोषित किया जाएगा आतंकवादी पाकिस्तान से गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना के बाद झारखंड पुलिस अब उसे 'आतंकवादी' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान के सिंडिकेट को न केवल अपराधी, बल्कि कई 'व्हाइट कॉलर' लोग और जमीन कारोबारी भी हथियार और धन की आपूर्ति कर समर्थन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रिंस ने दुबई में एक आंतकी संगठन की मदद से पनाह ली है। और वह झारखंड से वसूले गये रंगदारी के पैसे में उस आतंकी संगठन को कमीशन भी दे रहा है। मेजर की गिरफ्तारी प्रिंस खान के अंत की शुरुआत मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान के साम्राज्य के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। धनबाद पुलिस के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों की पुलिस भी मेजर को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जहां-जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रिंस खान के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जमीन को लेकर एक बार फिर गोली चली है। अपराधियों ने पंडरा थाना क्षेत्र में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मार दी है। उसे अस्तपताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। इधर पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के अंदर इस गोलीबारी के मास्टर माइंड विजय टेटे को गिरफ्तार कर लिया है। मामला हुरहुरी जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। बाइक पर आये अपराधियों ने चलाई गोली मंगलवार की सुबह पंडरा ओपी क्षेत्र के ओटीसी (OTC) मैदान के पास बाइक सवार अपराधियों ने जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मार दी। घटना सुबह करीब 8:00 बजे की है, जब भार्गव सिंह मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। रेकी कर अपराधियों ने बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, बैंक कॉलोनी निवासी भार्गव सिंह ‘गोल्डन सिटी इंडिया’ नाम से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते हैं। वह हर मंगलवार को बजरंगबली के मंदिर में पूजा करने जाते थे। अपराधियों ने पहले उनकी रेकी की और मंगलवार सुबह जैसे ही वह मंदिर के पास पहुंचे, एक बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन पर फायरिंग कर दी। अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर गोलीबारी के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भार्गव सिंह के दाएं तरफ सीने में गोली लगी है। उन्हें तुरंत पास के सिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पारस हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हुरहुरि में जमीन विवाद की बात आई सामने जानकारी के मुताबिक भार्गव सिंह हुरहुरि में नये प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान जमीन को लेकर उसका विवाद विजय हेंड्रिक टेटे से हुआ था। विजय और भार्गव में जमीन को लेकर कहासुनी भी हुई थी। हालांकि, भार्गव सिंह को यह अनुमान नहीं था कि विजय हेंड्रिक टेटे उस पर हमला करवा सकता है। लेकिन, मंगलवार की सुबह सुबह बाइक सवार अपराधी ने उस पर फायरिंग कर दी। फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
मुंबई के करी रोड इलाके में स्थित जैन मंदिर में हुई 1.75 करोड़ रुपये के गहनों की चोरी के मामले को पुलिस ने महज 48 घंटे में सुलझाकर बड़ी सफलता हासिल की है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया, जो नेपाल भागने की फिराक में था। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की तड़के सुबह आरोपी ने सुनसान का फायदा उठाते हुए कालाचौकी जैन मंदिर में घुसकर भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के आभूषण और हीरे जड़ा टीका चोरी कर लिया। सुबह मंदिर खुलने पर घटना का खुलासा हुआ, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। CCTV और एक गलती ने पकड़ा दिया आरोपी जांच के दौरान पुलिस ने 200 से 300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। आरोपी की मूवमेंट धीरे-धीरे ट्रेस की गई एक होटल में बैठकर की गई ऑनलाइन पेमेंट सबसे बड़ा सुराग बनी ट्रांजैक्शन से मोबाइल नंबर मिला कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से लोकेशन ट्रैक हुई इन्हीं तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। नेपाल भागने की थी पूरी प्लानिंग पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी मध्य प्रदेश पहुंच चुका था और नेपाल भागने की तैयारी कर रहा था। आरोपी अपनी बहन के घर पर छिपा था पुलिस ने इलाके को घेर लिया आरोपी ने छत से कूदकर भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड गिरफ्तार आरोपी मध्य प्रदेश के भिंड जिले का रहने वाला है और चंबल क्षेत्र का शातिर अपराधी बताया जा रहा है। 18 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट के केस शामिल चोरी का पूरा माल बरामद पुलिस की बड़ी कामयाबी मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। महज 48 घंटे में केस सुलझाना और आरोपी को पकड़ना पुलिस की तेज और तकनीकी जांच का उदाहरण है। निष्कर्ष यह मामला दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और सतर्क जांच के जरिए बड़े से बड़े अपराध को भी कम समय में सुलझाया जा सकता है। साथ ही यह भी साफ है कि अपराधी कितनी भी योजना बना ले, एक छोटी सी गलती उसे पकड़वा सकती है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी कार्यालयों को बम धमकी भेजकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और स्थानीय टीम ने संयुक्त अभियान में आरोपी को उसके किराए के मकान से दबोचा। आरोपी की पहचान 47 वर्षीय श्रीनिवास लुइस के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला है। जांच में क्या आया सामने ? जांच में सामने आया है कि आरोपी ने ईमेल और अन्य माध्यमों से 1,100 से अधिक फर्जी बम धमकी संदेश भेजे थे। इन धमकियों के कारण देश के कई राज्यों में हड़कंप मच गया था और स्कूलों, अदालतों व सरकारी कार्यालयों को खाली कराना पड़ा। अलग-अलग राज्यों में इस मामले में कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, आरोपी स्नातकोत्तर तक पढ़ा हुआ है, लेकिन फिलहाल बेरोजगार था और अपनी मां के साथ रहता था, जो सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने खुद ही देशभर में धमकी भरे संदेश भेजने की बात स्वीकार की। दिल्ली पुलिस आरोपी के डिजिटल उपकरणों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई और व्यक्ति या नेटवर्क तो नहीं था। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपी के मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी ध्यान दे रही हैं। पुलिस क्या है कहना ? पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों को झेलनी पड़ी दहशत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि फर्जी धमकियों के इस मामले का पैमाना असामान्य रूप से बड़ा था।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। 3 युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया। तीनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद परिजनों ने थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सुनसान जगह पर वारदातः जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की शाम बारलोंग इलाके के एक सुनसान स्थान पर इस वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़िता के साथ तीन युवकों ने जबरदस्ती की। घटना के बाद युवती ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपी गिरफ्तारः मामला सामने आते ही रजरप्पा थाना पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और चितरपुर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कौन हैं आरोपीः पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अयान अनवर (निवासी रहमत नगर, लाइनपार, चितरपुर), मो. तौफिक (निवासी ईदगाह मोहल्ला, चितरपुर) और मो. असफाक (निवासी एलबी रोड, चितरपुर) के रूप में हुई है।
रांची। झारखंड समेत देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी दफ्तरों को बम धमकी देने वाले 47 वर्षीय आरोपी श्रीनिवास लुईस से पूछताछ के लिए झारखंड पुलिस दिल्ली रवाना हो गई है। आरोपी को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया था। अब डिजिटल साक्ष्यों और धमकी संदेशों की विस्तृत जांच की जा रही है। धमकी देकर आतंक का माहौल बनाता थाः दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जिसने देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की झूठी धमकियां देकर आतंक का माहौल बनाने की कोशिश की। आरोपी 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया, जहां से उसने 1,000 से भी अधिक फर्जी धमकी भरे ई मेल और मैसेज भेजे थे। जांच में पता चला है कि उसने कई हाईकोर्ट, स्कूल, सरकारी कार्यालय और संवेदनशील संस्थानों को ई मेल तथा अन्य माध्यमों से धमकियां दीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को विस्तृत जांच और सतर्कता बरतनी पड़ी। इन धमकियों के कारण कई स्थानों पर सुरक्षा उपाय कड़े किए गए और जांच टीमों को सक्रिय रहना पड़ा। झारखंड पुलिस की एक टीम आरोपी से पूछताछ के लिए दिल्ली के लिए गई है, ताकि इस तकनीकी अपराध के पीछे की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
नई दिल्ली,एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स सेल ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और करीब 1.10 करोड़ रुपये की साइकोट्रोपिक ड्रग्स बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और उसकी एंटी-नारकोटिक्स यूनिट्स राजधानी में ड्रग नेटवर्क्स पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 120.18 ग्राम कोकीन और 36.86 ग्राम MDMA बरामद हुई है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1.10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ड्रग सप्लाई में इस्तेमाल की जा रही दो स्कूटी भी जब्त की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से एक स्कूटी चोरी की थी और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एक सप्लायर, एक कैरियर और लोकल पेडलर्स की भूमिका तय थी। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद हसन, रजिया और दो अफ्रीकी नागरिक—डिओफ सोलोमन उर्फ ऑस्कर और बेमाह शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर में नशे की सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। डीसीपी राजीव कुमार ने कहा डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई “जीरो टॉलरेंस ऑन ड्रग्स” अभियान के तहत की गई है। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी बरामदगी से एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है और अब पुलिस की प्राथमिकता ड्रग्स के असली सोर्स तक पहुंचकर पूरे सिंडिकेट को खत्म करना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 29 मार्च को दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं बरामद कर एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इससे साफ है कि राजधानी में नशे के कारोबार पर पुलिस ने शिकंजा और कड़ा कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।