धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे बड़े राजदार मेजर उर्फ सैफी की गिरफ्तारी के बाद अब धनबाद पुलिस के रडार पर प्रिंस खान का भाई गोपी है। पुलिस ने प्रिंस खान के पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर लीहै। पूछताछ में सैफी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि प्रिंस खान अब दुबई छोड़कर पाकिस्तान में आतंकियों की पनाह में पहुंच चुका है। अब उसका भाई गोपी खान दुबई से ही बैठकर इस पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा है। प्रिंस का साला रितिक और आदिल भी इस समय दुबई में ही मौजूद हैं। प्रिंस खान के परिवार और करीबियों पर शिकंजा इस नए इनपुट के बाद पुलिस अब प्रिंस खान के परिवार और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने जा रही है। सैफी ने कबूला है कि रंगदारी से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम को प्रिंस ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया है। इस खुलासे के बाद गैंग को आर्थिक रूप से मदद करने वाले तमाम रिश्तेदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता के बयानों पर पुलिस को शक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीते दिनों प्रिंस के माता-पिता से करीब 5 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि उनका अपने बेटों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस को उनके इस बयान पर भरोसा नहीं है। पुलिस कमिश्नर और संबंधित एजेंसियां सैफी से मिले इनपुट्स के आधार पर शहर में सक्रिय गैंग के स्लीपर सेल और अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी और कड़ियों का सत्यापन कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेगी धनबाद पुलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खान के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनआईए या सीबीआई) की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि दुबई में बैठा गोपी खान नेटवर्क को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। गोपी के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और धमकी देने के 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपी के खिलाफ सख्त इंटरनेशनल एक्शन के लिए धनबाद पुलिस जल्द ही पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजेगी। बंटी और गॉडविन पर पुलिस की नजर हाल के दिनों में कई नए मुकदमों में नामजद होने के बावजूद प्रिंस का भाई बंटी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी अपने भाइयों की तरह देश छोड़कर भागने की फिराक में हो सकता है, लिहाजा उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। वहीं, चाईबासा जेल में बंद गॉडविन पर भी कड़ी नजर है, क्योंकि पुलिस को शक है कि वह जेल के भीतर से ही नए अपराधियों को प्रिंस के गैंग में शामिल करने का खेल रच रहा है। जेल प्रशासन से गॉडविन से मिलने आने वाले हर शख्स का ब्योरा मांगा गया है। व्यवसायी ने खुद को गैंग से अलग बताया इधर, वासेपुर-भूली रोड के रहने वाले कबाड़ गोदाम संचालक सैयद मोहम्मद आरिफ खान उर्फ गोल्डन ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से खुद पर लग रहे आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे प्रिंस के गुर्गे नहीं हैं, बल्कि एक साधारण व्यवसायी हैं, जो कड़ी मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनका इस आपराधिक सिंडिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।
जामताड़ा। जामताड़ा पुलिस ने अपराध नियंत्रण और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। हत्या, लूट और ठगी जैसे गंभीर मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक Shambhu Kumar Singh ने कार्रवाई की जानकारी दी। पेट्रोल पंप लूट और हत्या मामले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार एसपी ने बताया कि 22 मार्च 2025 को फतेहपुर थाना क्षेत्र स्थित नायरा पेट्रोल पंप में लूट और हत्या की बड़ी वारदात हुई थी। इस मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुस्तकीम अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से कानून से बचता फिर रहा था और कई जिलों में सक्रिय था। कई जिलों में दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुस्तकीम अंसारी पर लूट, डकैती, अपहरण और हत्या जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। जामताड़ा, देवघर और गिरिडीह सहित कई जिलों में वह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। नाला एसडीपीओ मनोज कुमार महतो और जामताड़ा एसडीपीओ विकास आनंद लागोरी के नेतृत्व में पुलिस ने लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच की, जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। ठगी मामले में भी मिली सफलता पुलिस ने वर्ष 2023 के एक ठगी मामले में भी कार्रवाई करते हुए मोहम्मद असमुद्दीन अंसारी उर्फ समीर को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और धमकी देने के आरोप हैं। पुलिस का कहना है कि जिले में अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अपराधियों में मचा हड़कंप एसपी ने कहा कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। लगातार हो रही कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 19 वर्षीय एक युवती ने कथित तौर पर अपनी मां की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसने अपनी मां का सिर धड़ से अलग कर दिया और पूरी रात उसे अपने साथ रखा। इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मां की हत्या, पिता और बहन पर भी हमला यह घटना डेरामुख लालुंग गांव की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूजा मलंग ने धारदार हथियार 'दाओ' से अपनी 42 वर्षीय मां अनुमाई मलंग पर हमला किया। हमले में मां की मौके पर ही मौत हो गई। जब पिता प्रेमेंद्र मलंग और बहन ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो पूजा ने उन पर भी हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। कटा सिर लेकर रातभर रही फरार हत्या के बाद पूजा अपनी मां का कटा हुआ सिर लेकर मौके से फरार हो गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की तलाश के बाद उसे अगली सुबह गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय भी उसके पास कटा हुआ सिर मौजूद था, जिससे हर कोई स्तब्ध रह गया। काला जादू और नशे के एंगल से जांच स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों ने काला जादू से जुड़े होने की आशंका जताई है, जबकि कुछ का मानना है कि युवती नशे के प्रभाव में हो सकती थी। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूजा सामग्री और हथियार बरामद पुलिस ने आरोपी के पास से एक हंसिया, कैंची, तेल, सिंदूर और मिट्टी का बर्तन समेत पूजा-पाठ से जुड़ी कई वस्तुएं बरामद की हैं। इन बरामद सामानों के आधार पर पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। हत्या के कारणों की तलाश जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार में पहले किसी विवाद की जानकारी नहीं मिली थी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ हत्या और घातक हथियार से हमला करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
महाराष्ट्र के Pune से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने शादी के रिश्ते पाने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताकर झूठी कहानी गढ़ ली। लेकिन उसकी यह चाल ज्यादा दिन नहीं चल सकी और अब उस पर कानूनी कार्रवाई हो रही है। शादी के लिए रची पूरी साजिश 26 वर्षीय ऋषिकेश राजू जाधव, जो पेशे से सब्जी विक्रेता है, ने खुद को पुलिस में चयनित दिखाने के लिए शहरभर में पोस्टर और फ्लेक्स बैनर लगवा दिए। इतना ही नहीं, उसने पुलिस की वर्दी पहनकर अपनी तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें व्हाट्सऐप स्टेटस पर भी साझा किया, ताकि लोगों को उसकी “नौकरी” पर यकीन हो जाए। पुलिस के अनुसार, वह शादी न होने से परेशान था और इसी कारण उसने यह झूठा नाटक रचा। जांच में खुली पोल मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने शहर में अवैध पोस्टर और बैनरों के खिलाफ अभियान चलाया। इसी दौरान अधिकारियों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी, जिनमें युवक खुद को पुलिसकर्मी बताता दिख रहा था। जांच के बाद पता चला कि वह Maharashtra Police में चयनित नहीं हुआ था, बल्कि लोगों को गुमराह कर रहा था। बचपन से था पुलिस बनने का सपना पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवक बचपन से ही पुलिस में भर्ती होना चाहता था और उसने कई बार कोशिश भी की, लेकिन ऊंचाई की शर्त पूरी न होने के कारण चयन नहीं हो सका। इसी बीच परिवार ने उसकी शादी के लिए रिश्ते ढूंढने शुरू किए, जिससे वह दबाव में आ गया और अपनी मां से झूठ बोल दिया कि उसकी नौकरी लग गई है। मिठाई बांटी, घर के बाहर लगाया बैनर अपने झूठ को सच साबित करने के लिए उसने मोहल्ले में मिठाई तक बांटी और घर के बाहर बड़ा बैनर भी लगवाया, जिस पर पुलिस का लोगो और उसकी “भर्ती” की बधाई लिखी गई थी। अब कानूनी कार्रवाई फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सार्वजनिक सेवक की पहचान का दुरुपयोग करने का मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कोई भी व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी न कर सके।
एक रात में दो अपराध, देश को झकझोर देने वाली घटना दिल्ली और राजस्थान से सामने आई इस सनसनीखेज घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। 23 वर्षीय आरोपी राहुल मीणा ने कथित तौर पर 12 घंटे के भीतर दो जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। पहले उसने Alwar में अपनी पड़ोसी महिला के साथ दुष्कर्म किया, और इसके कुछ घंटों बाद Delhi पहुंचकर अपने पूर्व नियोक्ता के घर में उनकी 22 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। अलवर में पहली वारदात, धमकी देकर फरार पुलिस के अनुसार, आरोपी ने रात करीब 10:30 बजे पड़ोसी के घर में घुसकर महिला के साथ मारपीट की और फिर दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गया। इस मामले में अलवर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली में दूसरी वारदात, घर में घुसकर हत्या अगली सुबह आरोपी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में स्थित अपने पूर्व नियोक्ता के घर पहुंचा। उस समय घर में युवती अकेली थी। करीब एक घंटे के भीतर उसने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गया। जब युवती के माता-पिता घर लौटे, तो उन्होंने अपनी बेटी को खून से लथपथ हालत में पाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवती के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या की गई। CCTV से खुला राज, 15 टीमों ने किया गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए 15 टीमें बनाई थीं। CCTV फुटेज के जरिए आरोपी की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया। फुटेज में आरोपी को घर में प्रवेश और बाहर निकलते हुए अलग-अलग कपड़ों में देखा गया। ऑटो चालक की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। पहले नौकरी से निकाला गया था आरोपी आरोपी पहले पीड़िता के घर में काम करता था, लेकिन उसे कथित वित्तीय गड़बड़ी और सट्टेबाजी की आदत के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। जांच में सामने आया है कि वह पैसे के लिए धोखाधड़ी करता था और कर्ज में डूबा हुआ था। कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू कर्मचारियों के वेरिफिकेशन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और सुरक्षा उपायों की तत्काल जरूरत है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के पंडरा इलाके में मंगलवार सुबह एक सनसनीखेज वारदात में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। बिहार में ठगी के आरोप, बदलकर रखा था नाम जानकारी के अनुसार, मृतक भार्गव सिंह का असली नाम अंकित सिंह बताया जा रहा है। वह पहले पटना में रहता था और खुद को बिहार विधानसभा का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगता था। नौकरी और एडमिशन दिलाने के नाम पर उसने कई लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे। बताया जाता है कि पुलिस उसकी तलाश में थी, लेकिन प्रभाव और संपर्क के कारण वह गिरफ्त से बचता रहा। पटना से भागकर रांची में शुरू किया नया धंधा सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में वह पटना से भागकर रांची आ गया और यहां जमीन कारोबार शुरू किया। इस दौरान उसने कई लोगों के साथ जमीन के नाम पर भी धोखाधड़ी की। धीरे-धीरे उसने राजनीतिक संपर्क भी बना लिए और एक विधायक के करीबी के रूप में जाना जाने लगा। जमीन विवाद बना हत्या की वजह? प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में हुरहुरी इलाके की जमीन को लेकर उसका विजय हेंड्रिक टेटे नामक व्यक्ति से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच कुछ दिन पहले झगड़ा भी हुआ था, जिसमें जान से मारने की धमकी दी गई थी। हालांकि, पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, जिसमें पारिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है। जांच में जुटी पुलिस, कारणों की तलाश जारी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
होमस्टे में घटी गंभीर वारदात कर्नाटक के कोडागु जिले से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक अमेरिकी महिला पर्यटक के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। पुलिस के मुताबिक, यह घटना एक होमस्टे में हुई, जहां महिला ठहरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपी होमस्टे का एक कर्मचारी और मालिक शामिल हैं। तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने महिला के कमरे में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलने के बावजूद होमस्टे मालिक ने पीड़िता की मदद नहीं की। इसके बजाय, उस पर आरोप है कि उसने महिला को करीब तीन दिनों तक कमरे में बंद रखा, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और उसे धमकाया ताकि वह शिकायत दर्ज न करा सके। मैसूर पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत घटना लगभग एक सप्ताह पहले की बताई जा रही है। किसी तरह वहां से निकलने के बाद पीड़िता मैसूर पहुंची, जहां उसने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क किया और पूरी घटना की जानकारी दी। अमेरिकी दूतावास से सूचना मिलने के बाद कर्नाटक पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में कोडागु के पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें 3 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
धनबाद। झारखंड के आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी कोलकाता नहीं बल्कि दुबई में हुई है। दुबई में उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया। मेजर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसे विदेश से भारत लाने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद लेकर आई। प्रिंस खान को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग और प्रिंस खान के ठिकानों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सूचना मिली है। करीब चार साल पहले दुबई भागने और इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर है। प्रिंस खान से जुड़ी कुछ अहम जानकारिया धनबाद में कई सालों से प्रिंस खान ने दहशत फैला रखी है अर्से से झारखंड पुलिस को प्रिंस खान की तलाश है 2021 में प्रिंस खान पुलिस से बचने के लिए दुबई भाग गया अब वह दुबई से पाकिस्तान भाग गया है प्रिंस खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में छिपा है पुलिस प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश में है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा ताजा खुफिया इनपुट के अनुसार, प्रिंस खान ने अपना ठिकाना दुबई से बदलकर अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बना लिया है। वह वहीं से रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर के बड़े कारोबारियों को वर्चुअल नंबरों के जरिए रंगदारी के लिए धमकाता है। कभी वासेपुर की गलियों से अपराध शुरू करने वाला प्रिंस खान अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। प्रिंस खान को घोषित किया जाएगा आतंकवादी पाकिस्तान से गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना के बाद झारखंड पुलिस अब उसे 'आतंकवादी' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान के सिंडिकेट को न केवल अपराधी, बल्कि कई 'व्हाइट कॉलर' लोग और जमीन कारोबारी भी हथियार और धन की आपूर्ति कर समर्थन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रिंस ने दुबई में एक आंतकी संगठन की मदद से पनाह ली है। और वह झारखंड से वसूले गये रंगदारी के पैसे में उस आतंकी संगठन को कमीशन भी दे रहा है। मेजर की गिरफ्तारी प्रिंस खान के अंत की शुरुआत मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान के साम्राज्य के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। धनबाद पुलिस के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों की पुलिस भी मेजर को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जहां-जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रिंस खान के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जमीन को लेकर एक बार फिर गोली चली है। अपराधियों ने पंडरा थाना क्षेत्र में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मार दी है। उसे अस्तपताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। इधर पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के अंदर इस गोलीबारी के मास्टर माइंड विजय टेटे को गिरफ्तार कर लिया है। मामला हुरहुरी जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। बाइक पर आये अपराधियों ने चलाई गोली मंगलवार की सुबह पंडरा ओपी क्षेत्र के ओटीसी (OTC) मैदान के पास बाइक सवार अपराधियों ने जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मार दी। घटना सुबह करीब 8:00 बजे की है, जब भार्गव सिंह मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। रेकी कर अपराधियों ने बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, बैंक कॉलोनी निवासी भार्गव सिंह ‘गोल्डन सिटी इंडिया’ नाम से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते हैं। वह हर मंगलवार को बजरंगबली के मंदिर में पूजा करने जाते थे। अपराधियों ने पहले उनकी रेकी की और मंगलवार सुबह जैसे ही वह मंदिर के पास पहुंचे, एक बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन पर फायरिंग कर दी। अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर गोलीबारी के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भार्गव सिंह के दाएं तरफ सीने में गोली लगी है। उन्हें तुरंत पास के सिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पारस हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हुरहुरि में जमीन विवाद की बात आई सामने जानकारी के मुताबिक भार्गव सिंह हुरहुरि में नये प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान जमीन को लेकर उसका विवाद विजय हेंड्रिक टेटे से हुआ था। विजय और भार्गव में जमीन को लेकर कहासुनी भी हुई थी। हालांकि, भार्गव सिंह को यह अनुमान नहीं था कि विजय हेंड्रिक टेटे उस पर हमला करवा सकता है। लेकिन, मंगलवार की सुबह सुबह बाइक सवार अपराधी ने उस पर फायरिंग कर दी। फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
मुंबई के करी रोड इलाके में स्थित जैन मंदिर में हुई 1.75 करोड़ रुपये के गहनों की चोरी के मामले को पुलिस ने महज 48 घंटे में सुलझाकर बड़ी सफलता हासिल की है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी को मध्य प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया, जो नेपाल भागने की फिराक में था। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की तड़के सुबह आरोपी ने सुनसान का फायदा उठाते हुए कालाचौकी जैन मंदिर में घुसकर भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के आभूषण और हीरे जड़ा टीका चोरी कर लिया। सुबह मंदिर खुलने पर घटना का खुलासा हुआ, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। CCTV और एक गलती ने पकड़ा दिया आरोपी जांच के दौरान पुलिस ने 200 से 300 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। आरोपी की मूवमेंट धीरे-धीरे ट्रेस की गई एक होटल में बैठकर की गई ऑनलाइन पेमेंट सबसे बड़ा सुराग बनी ट्रांजैक्शन से मोबाइल नंबर मिला कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से लोकेशन ट्रैक हुई इन्हीं तकनीकी सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। नेपाल भागने की थी पूरी प्लानिंग पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी मध्य प्रदेश पहुंच चुका था और नेपाल भागने की तैयारी कर रहा था। आरोपी अपनी बहन के घर पर छिपा था पुलिस ने इलाके को घेर लिया आरोपी ने छत से कूदकर भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड गिरफ्तार आरोपी मध्य प्रदेश के भिंड जिले का रहने वाला है और चंबल क्षेत्र का शातिर अपराधी बताया जा रहा है। 18 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट के केस शामिल चोरी का पूरा माल बरामद पुलिस की बड़ी कामयाबी मुंबई पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। महज 48 घंटे में केस सुलझाना और आरोपी को पकड़ना पुलिस की तेज और तकनीकी जांच का उदाहरण है। निष्कर्ष यह मामला दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और सतर्क जांच के जरिए बड़े से बड़े अपराध को भी कम समय में सुलझाया जा सकता है। साथ ही यह भी साफ है कि अपराधी कितनी भी योजना बना ले, एक छोटी सी गलती उसे पकड़वा सकती है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी कार्यालयों को बम धमकी भेजकर दहशत फैलाने वाले आरोपी को दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और स्थानीय टीम ने संयुक्त अभियान में आरोपी को उसके किराए के मकान से दबोचा। आरोपी की पहचान 47 वर्षीय श्रीनिवास लुइस के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला है। जांच में क्या आया सामने ? जांच में सामने आया है कि आरोपी ने ईमेल और अन्य माध्यमों से 1,100 से अधिक फर्जी बम धमकी संदेश भेजे थे। इन धमकियों के कारण देश के कई राज्यों में हड़कंप मच गया था और स्कूलों, अदालतों व सरकारी कार्यालयों को खाली कराना पड़ा। अलग-अलग राज्यों में इस मामले में कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, आरोपी स्नातकोत्तर तक पढ़ा हुआ है, लेकिन फिलहाल बेरोजगार था और अपनी मां के साथ रहता था, जो सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने खुद ही देशभर में धमकी भरे संदेश भेजने की बात स्वीकार की। दिल्ली पुलिस आरोपी के डिजिटल उपकरणों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई और व्यक्ति या नेटवर्क तो नहीं था। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपी के मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी ध्यान दे रही हैं। पुलिस क्या है कहना ? पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों को झेलनी पड़ी दहशत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि फर्जी धमकियों के इस मामले का पैमाना असामान्य रूप से बड़ा था।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। 3 युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया। तीनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद परिजनों ने थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सुनसान जगह पर वारदातः जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की शाम बारलोंग इलाके के एक सुनसान स्थान पर इस वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़िता के साथ तीन युवकों ने जबरदस्ती की। घटना के बाद युवती ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपी गिरफ्तारः मामला सामने आते ही रजरप्पा थाना पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और चितरपुर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कौन हैं आरोपीः पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अयान अनवर (निवासी रहमत नगर, लाइनपार, चितरपुर), मो. तौफिक (निवासी ईदगाह मोहल्ला, चितरपुर) और मो. असफाक (निवासी एलबी रोड, चितरपुर) के रूप में हुई है।
रांची। झारखंड समेत देशभर के स्कूल, अदालत और सरकारी दफ्तरों को बम धमकी देने वाले 47 वर्षीय आरोपी श्रीनिवास लुईस से पूछताछ के लिए झारखंड पुलिस दिल्ली रवाना हो गई है। आरोपी को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया था। अब डिजिटल साक्ष्यों और धमकी संदेशों की विस्तृत जांच की जा रही है। धमकी देकर आतंक का माहौल बनाता थाः दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जिसने देशभर में स्कूलों, अदालतों और सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की झूठी धमकियां देकर आतंक का माहौल बनाने की कोशिश की। आरोपी 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस को कर्नाटक के मैसूर से गिरफ्तार किया गया, जहां से उसने 1,000 से भी अधिक फर्जी धमकी भरे ई मेल और मैसेज भेजे थे। जांच में पता चला है कि उसने कई हाईकोर्ट, स्कूल, सरकारी कार्यालय और संवेदनशील संस्थानों को ई मेल तथा अन्य माध्यमों से धमकियां दीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को विस्तृत जांच और सतर्कता बरतनी पड़ी। इन धमकियों के कारण कई स्थानों पर सुरक्षा उपाय कड़े किए गए और जांच टीमों को सक्रिय रहना पड़ा। झारखंड पुलिस की एक टीम आरोपी से पूछताछ के लिए दिल्ली के लिए गई है, ताकि इस तकनीकी अपराध के पीछे की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
नई दिल्ली,एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स सेल ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और करीब 1.10 करोड़ रुपये की साइकोट्रोपिक ड्रग्स बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और उसकी एंटी-नारकोटिक्स यूनिट्स राजधानी में ड्रग नेटवर्क्स पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 120.18 ग्राम कोकीन और 36.86 ग्राम MDMA बरामद हुई है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1.10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ड्रग सप्लाई में इस्तेमाल की जा रही दो स्कूटी भी जब्त की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से एक स्कूटी चोरी की थी और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एक सप्लायर, एक कैरियर और लोकल पेडलर्स की भूमिका तय थी। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद हसन, रजिया और दो अफ्रीकी नागरिक—डिओफ सोलोमन उर्फ ऑस्कर और बेमाह शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर में नशे की सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। डीसीपी राजीव कुमार ने कहा डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई “जीरो टॉलरेंस ऑन ड्रग्स” अभियान के तहत की गई है। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी बरामदगी से एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है और अब पुलिस की प्राथमिकता ड्रग्स के असली सोर्स तक पहुंचकर पूरे सिंडिकेट को खत्म करना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 29 मार्च को दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं बरामद कर एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इससे साफ है कि राजधानी में नशे के कारोबार पर पुलिस ने शिकंजा और कड़ा कर दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स सेल ने कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और करीब 1.10 करोड़ रुपये की साइकोट्रोपिक ड्रग्स बरामद की हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और उसकी एंटी-नारकोटिक्स यूनिट्स राजधानी में ड्रग नेटवर्क्स पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 120.18 ग्राम कोकीन और 36.86 ग्राम MDMA बरामद हुई है। बरामद ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1.10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ड्रग सप्लाई में इस्तेमाल की जा रही दो स्कूटी भी जब्त की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से एक स्कूटी चोरी की थी और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें एक सप्लायर, एक कैरियर और लोकल पेडलर्स की भूमिका तय थी। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद हसन, रजिया और दो अफ्रीकी नागरिक—डिओफ सोलोमन उर्फ ऑस्कर और बेमाह शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर में नशे की सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। डीसीपी राजीव कुमार ने कहा डीसीपी राजीव कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई “जीरो टॉलरेंस ऑन ड्रग्स” अभियान के तहत की गई है। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी बरामदगी से एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है और अब पुलिस की प्राथमिकता ड्रग्स के असली सोर्स तक पहुंचकर पूरे सिंडिकेट को खत्म करना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 29 मार्च को दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं बरामद कर एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इससे साफ है कि राजधानी में नशे के कारोबार पर पुलिस ने शिकंजा और कड़ा कर दिया है।
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से एक बेहद सनसनीखेज और परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला कुछ हद तक चर्चित श्रद्धा वॉकर हत्याकांड की याद दिलाता है, हालांकि हर मामला अपने संदर्भ और परिस्थितियों में अलग होता है। क्या है पूरा मामला? पुलिस के मुताबिक, आरोपी रविंद्र, जो पहले से शादीशुदा है, का 29 वर्षीय महिला मोनिका के साथ संबंध था। यह घटना उस समय हुई, जब उसकी पत्नी घर पर मौजूद नहीं थी। बताया जा रहा है कि: आरोपी ने महिला को अपने घर बुलाया दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ गुस्से में आकर आरोपी ने महिला की हत्या कर दी घटना के बाद आरोपी ने सबूत छिपाने की कोशिश की, लेकिन बाद में खुद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। कैसे खुला मामला? इस केस का खुलासा तब हुआ जब आरोपी खुद पुलिस स्टेशन पहुंचा और अपराध कबूल किया। इसके बाद पुलिस जब उसके घर पहुंची, तो वहां से कई अहम सबूत बरामद हुए। घर से शव के अवशेष मिले कुछ हिस्से अलग-अलग स्थानों पर फेंके जाने की आशंका एक विशेष टीम बाकी सबूतों की तलाश में जुटी पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हत्या अचानक हुई या पहले से योजना बनाई गई थी। जांच में क्या सामने आ रहा है? जांच एजेंसियां कई पहलुओं पर काम कर रही हैं: दोनों के बीच संबंधों की प्रकृति विवाद की असली वजह क्या यह हत्या पूर्व-नियोजित थी आरोपी का आपराधिक इतिहास यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि व्यक्तिगत रिश्तों में बढ़ता तनाव किस हद तक खतरनाक हो सकता है। समाज के लिए चेतावनी इस तरह की घटनाएं केवल अपराध की कहानी नहीं होतीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी होती हैं। रिश्तों में संवाद, धैर्य और समझ की कमी कई बार दुखद परिणामों तक पहुंचा देती है।
धनबाद। कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। उसकी गैंग में कई लड़कियां हैं, जो इस तस्करी को अंजाम दे रही हैं। रांची के रेस्टोरेंट में 7 मार्च की फायरिंग में पकड़े गए प्रिंस खान के हैंडलर अमन सिंह उर्फ कुबेर से धनबाद पुलिस की पूछताछ में कई और नए चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि रंगदारी के लिए फायरिंग और हत्याएं कराने के लिए गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान से भारत में हथियारों की सप्लाई कर रहा है। प्रिंस खान ने कई हथियार भेजे पुलिस को जानकारी मिली है कि फरवरी में प्रिंस खान ने पाकिस्तान से पठान नामक अपराधी को दो हथियार देकर अमृतसर के रास्ते तरन तारन भेजा था। उससे हथियार रिसीव करने के लिए पलामू का कृष कुमार सिंह उर्फ आयुष वहां गया था। हालांकि, वहां किसी कारण डिलीवरी नहीं मिलने पर वह खाली हाथ रांची लौट गया था। फिर प्रिंस ने उसे 8 फरवरी को मध्यप्रदेश के बुरहानपुर भेजा था, जहां उसे 3 पिस्टल सौंपी गई थी। 20 फरवरी को वही पिस्टल रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के पास कुबेर और कृष ने शूटरों को दी थीं। उन्हीं से धनबाद में फहीम खान के बेटे इकबाल खान को गोली मारने का फरमान पाकिस्तान से प्रिंस ने जारी किया था। हालांकि, गोली इकबाल के ड्राइवर को लगी थी। फिर 7 मार्च की रात रांची में एयरपोर्ट थाना क्षेत्र की फैमिली रेस्टोंरेंट में भी उन्हीं हथियारों से फायरिंग की गई थी, जिसमें वेटर मनीष की मौत हो गई थी। बाद में 16 मार्च को भागाबांध में मुठभेड़ के बाद कृष पकड़ा गया था और तभी से धनबाद जेल में बंद है। इकबाल की हत्या के लिए रांची से एक लड़की लाई थी हथियार पुलिस को यह भी पता चला कि प्रिंस खान अपने गिरोह के गुर्गों तक हथियार पहुंचाने के लिए लड़कियों का भी इस्तेमाल कर रहा है। गैंग में कई लड़कियां स्पीलर सेल के रूप में शामिल होकर काम कर रही है। उनके जरिए प्रिंस कारोबारियों की जानकारी भी हासिल करता है। पूछताछ में पता चला कि इकबाल को मारने के लिए रांची में अफजल उर्फ बाबर से एक लड़की ही हथियार लेकर धनबाद आई थी। सुधीश को धनबाद-बोकारो, कुबेर को रांची-पलामू की कमान रंगदारी वसूली के लिए प्रिंस खान ने झारखंड में तीन जोन बना रखे हैं। वहां फायरिंग कराने और रुपए वसूलने के लिए एजेंट भी बना रखे हैं, जिनमें कई लड़कियां हैं। धनबाद और बोकारों में सुधीश ओझा, रांची और पलामू में कुबेर और हजारीबाग में अमन खान को उसने इस काम में लगाया है। अमन कुछ माह पहले ही गैंग से जुड़ा है। पलामू में एक रिसार्ट में काम करनेवाले अभिषेक को भी रंगदारी वसूली में लगाया गया था। गैंग के गुर्गों के संपर्क में रहता है प्रिंस खान प्रिंस खान अपने गिरोह के अपराधियों से 4 मोबाइल एप के जरिए संपर्क में रहता है। इनमें वॉट्सएप और मैसेंजर के साथ जंगी एप भी शामिल है। इन एप के जरिए प्रिंस गिरोह के अपराधियों को निर्देश देता है। पुलिस अब टेक्निकल टीम की मदद से इन एप की डिटेल खंगाल रही है। दुबई गए थे सफेदपोश, अब पुलिस पूछेगी जाने का मकसद पुलिस को पता चला है कि दुबई में प्रिंस खान से मिलने के लिए धनबाद और रांची से कई सफेदपोश गए थे। उनमें वासेपुर के कुछ लोग भी शामिल हैं। संदेह है कि वे प्रिंस को कारोबारियों की जानकारी देते हैं और रंगदारी के पैसे के ट्रांजेक्शन में भी मददगार हैं। उन सबका पता लगाया जा रहा है। उनसे दुबई जाने का मकसद पूछा जाएगा।
दो स्कूटी पर आए छह बदमाश, कर्मचारियों से मारपीट कर हथियार के बल पर की लूट; पुलिस जांच में जुटी रांची: झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आए। शहर के पुंदाग इलाके में स्थित दीना पेट्रोल पंप पर रविवार शाम हथियारबंद बदमाशों ने लूट की बड़ी घटना को अंजाम दिया। करीब साढ़े सात बजे हुई इस वारदात में छह अपराधी दो स्कूटी पर सवार होकर पहुंचे और पेट्रोल पंप कर्मियों को डराकर करीब 59 हजार रुपये नकद लूटकर फरार हो गए। हथियार के बल पर लूट, कर्मचारियों से मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बदमाशों ने पहले पेट्रोल पंप पर काम कर रहे कर्मचारियों के साथ मारपीट की और फिर हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया। पेट्रोल पंप की कर्मी सुजाता कुमारी ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचीं तो देखा कि अपराधी कर्मचारियों को हथियार दिखाकर डरा रहे थे। इस दौरान एक अन्य कर्मचारी ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने चाकू और हथियार दिखाकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। CCTV में कैद हुई पूरी घटना पूरी वारदात पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बदमाश किस तरह से आए और घटना को अंजाम देकर फरार हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पेट्रोल पंप पर पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे इलाके में डर का माहौल है। पुलिस ने शुरू की जांच, जल्द गिरफ्तारी का दावा घटना की सूचना मिलते ही पुंदाग ओपी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कर्मचारियों से पूछताछ की। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बड़ी वारदात की साजिश नाकाम, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से टला खतरा हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के 8 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में होने वाली संभावित बड़ी घटना को समय रहते टाल दिया गया। बड़ी साजिश की थी तैयारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उग्रवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर संदिग्ध इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया गया। फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़े गए आरोपी कार्रवाई के दौरान उरीमारी ओपी क्षेत्र के कोलियरी इलाके में एक संदिग्ध बोलेरो वाहन नजर आया। पुलिस को देखते ही चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर आसवा और गुडकुवा गांव के बीच पुल और पेड़ से टकरा गया। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन में सवार सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। हथियारों के साथ पकड़े गए उग्रवादी तलाशी के दौरान दो आरोपियों के हाथ में इंसास राइफल मिली, जिससे उनके इरादों की गंभीरता साफ हो गई। पुलिस ने मौके से- 2 इंसास राइफल भारी मात्रा में जिंदा कारतूस 1 देसी पिस्टल 1 बोलेरो वाहन 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। लातेहार और रांची के रहने वाले आरोपी गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान सुनील मुंडा, विरेंद्र मुंडा, सुरेंद्र मुंडा, लालमोहन मुंडा, अनिल मुंडा, रविंद्र गंझू उर्फ रिंकू, सत्येंद्र गंझू उर्फ संतु और संजय मुंडा के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी लातेहार और रांची जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी टीएसपीसी संगठन से जुड़े हैं और इलाके में सक्रिय होकर वसूली और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
सहरसा के युवक ने देहरादून में दिया वारदात को अंजाम देहरादून में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां सहरसा के रहने वाले एक युवक ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। आरोपी ने न सिर्फ गला दबाकर पत्नी को मौत के घाट उतारा, बल्कि चार दिनों तक शव को घर में रजाई के नीचे छिपाकर रखा। पास ही रोती रही 11 महीने की बच्ची इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस घर में महिला का शव छिपा था, उसी घर में उसकी 11 महीने की मासूम बच्ची मौजूद थी। आरोपी पिता उसी दौरान बच्ची को दूध पिलाता रहा, जबकि पास के कमरे में उसकी मां की लाश पड़ी थी। विवाद के बाद की गई हत्या पुलिस के अनुसार, आरोपी रंजीत शर्मा का अपनी पहली पत्नी रूपा (32) से अक्सर विवाद होता था। दूसरी पत्नी को लेकर भी दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी विवाद के दौरान गुस्से में आकर आरोपी ने पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी। 4 दिन तक रजाई में छिपाया शव हत्या के बाद आरोपी ने शव को घर में ही छिपाकर रखा। चार दिनों तक वह उसी मकान में रहा, जहां एक कमरे में लाश रखी थी और दूसरे कमरे में वह अपनी बच्ची के साथ रह रहा था। बाद में दूसरी पत्नी के आने पर दोनों ने मिलकर शव को प्लास्टिक के कट्टे में पैक किया। बाइक से 5 किमी दूर जंगल में फेंका शव आरोपी ने शव को बाइक पर बांधकर करीब 5 किलोमीटर दूर मांडूवाला जंगल में फेंक दिया। 11 मार्च को शीतला माता मंदिर परिसर के पास बोरे में शव मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 2500 CCTV फुटेज से खुला राज यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था। लेकिन देहरादून पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए: 2500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले 30 से अधिक बस्तियों में 5000 लोगों से पूछताछ की जांच के दौरान एक मजदूर की पत्नी के अचानक गायब होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस का शक आरोपी पर गया। आरोपी गिरफ्तार, मामले का खुलासा आखिरकार पुलिस ने आरोपी रंजीत शर्मा को भाटोवाला इलाके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक ठेकेदार की साइट पर मजदूरी करता था और वहीं अपनी पत्नी के साथ रह रहा था। पहले भी जटिल था पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है कि आरोपी की पहली शादी 2009 में हुई थी। कुछ साल पहले पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी, जिसके बाद उसने दूसरी शादी कर ली। करीब एक महीने पहले पहली पत्नी अपनी बच्ची के साथ वापस आई थी, जिससे घर में तनाव बढ़ गया।
कैरलीबार पंचायत में सनसनीखेज घटना चतरा जिले के वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कैरलीबार पंचायत में एक ईंट भट्ठा मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान 30 वर्षीय विनोद गंझू के रूप में हुई है, जो करमा पंचायत के मदनपुर गांव का रहने वाला था। काम के लिए गया, घर नहीं लौटा परिजनों के अनुसार, विनोद गंझू गुरुवार को कैरलीबार पंचायत के निमियाटांड़ स्थित एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने गया था। यह भट्ठा विनोद भारती और सोनू भारती नामक दो भाइयों का बताया जा रहा है। काम के सिलसिले में वह वहीं रुक गया, लेकिन रात में घर वापस नहीं लौटा। पार्टी के बाद गायब हुआ मजदूर स्थानीय जानकारी के मुताबिक, भट्ठा जलाने के बाद रात में मजदूरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान शराब और मुर्गा की पार्टी भी हुई, जिसमें विनोद गंझू शामिल था। इसके बाद वह अचानक लापता हो गया। सुबह गड्ढे में मिला शव शुक्रवार सुबह विनोद गंझू का शव भट्ठे के पास एक गड्ढेनुमा जगह से बरामद हुआ। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप मृतक की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों ने ईंट भट्ठा मालिकों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या है। परिजन दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। परिजन वशिष्ठ नगर थाना में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया भी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज फिलहाल यह मामला संदिग्ध मौत का माना जा रहा है, लेकिन परिजनों के आरोपों ने इसे हत्या का मामला बना दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा और कार्यस्थल की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई सामने आ सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।