Digital India

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

भारत को वैश्विक आईटी सुरक्षा क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। India ने कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड (CCDB) का अध्यक्ष पद संभाल लिया है। यह जिम्मेदारी अप्रैल 2026 से अप्रैल 2028 तक के लिए भारत को सौंपी गई है। इसे अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा मानकों के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और तकनीकी क्षमता का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला 14 से 16 अप्रैल 2026 के बीच जापान की राजधानी Tokyo में आयोजित कॉमन क्राइटेरिया रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) की पहली तिमाही बैठक में लिया गया। क्या है CCRA? कॉमन क्राइटेरिया रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसके तहत आईटी सुरक्षा प्रमाणपत्रों को सदस्य देशों के बीच आपसी मान्यता दी जाती है। इसका उद्देश्य सुरक्षित आईटी उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाना और वैश्विक सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है। CCRA के तहत मूल्यांकित और प्रमाणित उत्पादों को सदस्य देशों में दोबारा प्रमाणन की जरूरत नहीं पड़ती। इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों और आईटी उद्योग को बड़ा फायदा मिलता है। CCDB की क्या है भूमिका? कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड यानी CCDB, CCRA का तकनीकी केंद्र माना जाता है। यह बोर्ड आईटी सुरक्षा मूल्यांकन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों और मूल्यांकन प्रक्रिया को संचालित करता है। CCDB का मुख्य काम कॉमन क्राइटेरिया (CC) और कॉमन इवैल्यूएशन मेथडोलॉजी (CEM) के लिए वैश्विक तकनीकी कार्यक्रम तैयार करना और उन्हें अपडेट करना है। यह संस्था दुनिया भर में सुरक्षित आईटी उत्पादों के लिए मानक तय करने में अहम भूमिका निभाती है। 2013 से सक्रिय सदस्य है भारत भारत 16 सितंबर 2013 से CCRA का सक्रिय सदस्य रहा है। देश में यह काम Ministry of Electronics and Information Technology और STQC महानिदेशालय के जरिए किया जाता है, जो आईटी सुरक्षा मूल्यांकन के लिए अधिकृत प्रमाणन संस्था है। फिलहाल CCRA में 20 सर्टिफिकेट-अथॉराइजिंग देश और 18 सर्टिफिकेट-कंज्यूमिंग देश शामिल हैं। ये सभी मिलकर वैश्विक आईटी सुरक्षा मानकों और प्रमाणन प्रणाली को मजबूत बनाने का काम करते हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? विशेषज्ञों के मुताबिक, CCDB की अध्यक्षता मिलने से भारत अब वैश्विक साइबर सुरक्षा और आईटी सुरक्षा मानकों को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे भारत को उभरती तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने में प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा। दो साल की इस अवधि में भारत वैश्विक आईटी सुरक्षा प्रमाणन व्यवस्था के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में निर्णायक भूमिका निभा सकेगा। इसे डिजिटल और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।  

surbhi मई 15, 2026 0
satellite communication concept showing LEO satellites and global internet connectivity network
रिलायंस का बड़ा दांव: सैटेलाइट कम्युनिकेशन में अरबों डॉलर निवेश की तैयारी, खुद लीड कर रहे Mukesh Ambani

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा कदम रखने जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलहाल Elon Musk की कंपनी Starlink का दबदबा है। लेकिन अब रिलायंस इस गेम को बदलने की तैयारी में है–और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कमान खुद मुकेश अंबानी ने संभाल रखी है। क्या है रिलायंस का प्लान? सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस सैटकॉम सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। यह प्रोजेक्ट Jio Platforms के तहत संचालित होगा, जो कंपनी के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को संभालती है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो इन क्षेत्रों पर काम कर रही हैं: सैटेलाइट डिजाइन लॉन्च सिस्टम पेलोड यूजर टर्मिनल नेटवर्क इंटीग्रेशन लो अर्थ ऑर्बिट पर फोकस रिलायंस की नजर खासतौर पर Low Earth Orbit (LEO) सेगमेंट पर है, जहां कम ऊंचाई पर सैटेलाइट तैनात कर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं। यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक और अन्य वैश्विक कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। सरकार और ग्लोबल रेस भारत सरकार भी चाहती है कि देश सैटकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बने, ताकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके। इसी के तहत रिलायंस International Telecommunication Union (ITU) में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में जुटी है। मुकाबले में कौन-कौन? इस सेक्टर में पहले से कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं: Starlink (एलन मस्क) Amazon Kuiper (अमेजन) Eutelsat OneWeb AST SpaceMobile Sateliot भारत की तरफ से Sunil Mittal के भारती ग्रुप की भी Eutelsat में बड़ी हिस्सेदारी है। पार्टनरशिप और रणनीति रिलायंस पहले ही मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कंपनी SES के साथ साझेदारी कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ–यानी किसी मौजूदा सैटेलाइट कंपनी के अधिग्रहण–पर भी विचार कर रही है, ताकि तेजी से इस सेक्टर में प्रवेश किया जा सके। भारत के लिए क्या मायने? अगर रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो: भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क मिल सकता है ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बेहतर होगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी निर्भरता कम होगी क्या संकेत देता है यह कदम? यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टेलीकॉम की लड़ाई अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। रिलायंस का यह कदम न सिर्फ बिजनेस, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Person making secure UPI payment on smartphone with warning icons about online fraud risks
Digital Payment Alert: बढ़ते डिजिटल ट्रांजेक्शन के बीच ठगी से बचने के लिए NPCI की 5 जरूरी सलाह

भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां करीब 23,834 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या 28,000 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में National Payments Corporation of India (NPCI) ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए 5 अहम सुझाव दिए हैं। 1. पेमेंट से पहले नाम जरूर जांचें किसी भी भुगतान से पहले स्क्रीन पर दिख रहे नाम को ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि पैसा सही व्यक्ति या व्यापारी को ही जा रहा है। कुछ सेकंड की सावधानी आपको बड़ी गलती से बचा सकती है। 2. भरोसेमंद ऐप और वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें हमेशा विश्वसनीय पेमेंट ऐप या आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि यही फ्रॉड का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं। 3. PIN और OTP कभी साझा न करें आपका UPI PIN, OTP और बैंक डिटेल पूरी तरह गोपनीय होती हैं। कोई भी व्यक्ति–चाहे वह खुद को बैंक या सरकारी अधिकारी बताए–इन जानकारियों को मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और जानकारी साझा न करें। 4. जल्दबाजी में निर्णय न लें अगर कोई आपसे तुरंत पैसे भेजने या जानकारी देने का दबाव बनाता है, तो सावधान रहें। ऐसे मामलों में समय लें, जानकारी की जांच करें और जरूरत पड़े तो संबंधित व्यक्ति या संस्था से खुद संपर्क करें। 5. ट्रांजेक्शन अलर्ट पर रखें नजर अपने बैंक खाते में SMS और ऐप नोटिफिकेशन को एक्टिव रखें। हर लेनदेन की जानकारी तुरंत मिलने से आप किसी भी संदिग्ध गतिविधि को जल्दी पकड़ सकते हैं और तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। डिजिटल पेमेंट जितना सुविधाजनक है, उतना ही सतर्क रहने की भी जरूरत है। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से आप ऑनलाइन ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Citizen filling digital census form on mobile phone for India Census 2027 self-enumeration process
जनगणना 2027: अब खुद भर सकेंगे 33 सवाल, 17 अप्रैल से शुरू सेल्फ-इन्युमरेशन प्रक्रिया

  पटना: देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। जनगणना 2027 के तहत अब लोगों को जनगणना कर्मी का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि वे खुद घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। 17 अप्रैल से 1 मई तक भर सकेंगे जानकारी जनगणना के पहले चरण में 17 अप्रैल से 1 मई तक सेल्फ-इन्युमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा शुरू की जा रही है। नागरिक पोर्टल पर जाकर 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खुद भर सकेंगे इसके लिए मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा डेटा सबमिट करने के बाद एक यूनिक आईडी जेनरेट होगी जब 2 मई से जनगणना कर्मी घर आएंगे, तो बस यह आईडी दिखानी होगी और प्रक्रिया तुरंत पूरी हो जाएगी। कैसे काम करेगा पूरा प्रोसेस? पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी भरें 33 सवालों के जवाब दें सबमिट करने के बाद यूनिक आईडी प्राप्त करें आईडी को सुरक्षित रखें जनगणना कर्मी को दिखाकर प्रक्रिया पूरी करें ‘एक घर, कई चूल्हे’ = अलग परिवार इस बार जनगणना में परिवार की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया गया है। अगर एक ही मकान में अलग-अलग चूल्हे (रसोई) हैं, तो उन्हें अलग-अलग परिवार माना जाएगा घर खाली मिलने पर उसे खाली मकान के रूप में दर्ज किया जाएगा क्या-क्या जानकारी देनी होगी? जनगणना में आपसे कई अहम सवाल पूछे जाएंगे, जैसे: मकान का मालिकाना हक दीवार और छत की सामग्री कमरों की संख्या परिवार के सदस्य विवाहित जोड़ों की जानकारी बाहर रहने वालों के लिए भी सुविधा बिहार के जो लोग राज्य से बाहर रह रहे हैं, वे भी पोर्टल के जरिए अपने मूल निवास (Native Place) की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। डेटा सबमिट करने से पहले उसे एडिट करने का विकल्प भी मिलेगा। फरवरी 2027 में होगी असली गिनती यह चरण केवल मकानों की सूची और प्रारंभिक डेटा के लिए है। देशभर में लोगों की वास्तविक गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। क्यों है यह बदलाव खास? डिजिटल जनगणना से: प्रक्रिया तेज और आसान होगी डेटा ज्यादा सटीक मिलेगा सरकारी योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें और सही जानकारी दर्ज करें, ताकि देश के विकास की योजना मजबूत आधार पर तैयार की जा सके।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Tender scam
Tender scam: आरोपी इंजीनियर को सरेंडर के बाद मिली बेल

रांची। ग्रामीण विकास विभाग में हुए टेंडर घोटाला मामले के आरोपी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर संतोष कुमार को बेल मिल गई है। उसने बुधवार को ही रांची स्थित PMLA की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर किया था। सरेंडर के बाद कोर्ट ने संतोष कुमार को बेल दे दी। उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके, पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ने की शर्त पर बेल मिली है। 14 आरोपियों के खिलाफ समनः इस मामले में ED  ने हाल ही में प्रमोद कुमार सहित 14 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया है। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों के विरुद्ध समन जारी कर दिया है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब तक कई आरोपियों ने सरेंडर किया है और उन्हें बेल मिल गई है।

Anjali Kumari अप्रैल 15, 2026 0
Woman updating Aadhaar and PAN details online after marriage using a laptop at home.
शादी के बाद Aadhaar और PAN में नाम बदलना हुआ आसान, अब घर बैठे करें पूरा अपडेट

भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने अब सरकारी प्रक्रियाओं को पहले से कहीं अधिक सरल बना दिया है। शादी के बाद महिलाओं के लिए अपने आधिकारिक दस्तावेजों में नाम या उपनाम (सरनेम) बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन पहले यह काफी जटिल और समय लेने वाला काम माना जाता था। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है, जिससे आप बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए घर बैठे ही अपने Aadhaar और PAN कार्ड में नाम अपडेट कर सकती हैं। क्यों जरूरी है नाम अपडेट करना? शादी के बाद अगर आपने अपना सरनेम बदला है, तो बैंकिंग, टैक्स, पासपोर्ट, और अन्य सरकारी सेवाओं में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए आधार और पैन में सही नाम होना बेहद जरूरी है। PAN कार्ड में नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया PAN कार्ड में नाम अपडेट करने के लिए आप Protean (NSDL) या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं NSDL (Protean) या UTIITSL पोर्टल खोलें। एप्लीकेशन टाइप चुनें ‘Changes or Correction in existing PAN data’ विकल्प पर क्लिक करें। व्यक्तिगत जानकारी भरें अपना मौजूदा PAN नंबर, नया नाम (विवाहित नाम), जन्म तिथि और मोबाइल नंबर दर्ज करें। टोकन नंबर प्राप्त करें फॉर्म सबमिट करने के बाद एक टोकन नंबर मिलेगा, जिसे सुरक्षित रखें। दस्तावेज अपलोड करें पहचान प्रमाण और मैरिज सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी अपलोड करें। फीस का भुगतान करें लगभग ₹100-110 का ऑनलाइन भुगतान करें। अपडेटेड e-PAN प्राप्त करें कुछ दिनों में e-PAN ईमेल पर मिल जाएगा, जबकि फिजिकल कार्ड 2-3 हफ्तों में आपके पते पर पहुंचेगा। Aadhaar में नाम अपडेट करने की प्रक्रिया Aadhaar में नाम बदलने के लिए आपको UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: myAadhaar पोर्टल पर लॉग-इन करें वेबसाइट पर जाकर ‘Login’ पर क्लिक करें। OTP के जरिए सत्यापन करें आधार नंबर डालें और OTP से लॉग-इन करें। अपडेट सेक्शन में जाएं ‘Name/Gender/Date of Birth & Address Update’ पर क्लिक करें। नाम (Name) विकल्प चुनें ‘Update Aadhaar Online’ में जाकर Name चुनें। नया नाम दर्ज करें अपना नया विवाहित नाम सही स्पेलिंग के साथ भरें। मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करें जरूरी दस्तावेज के रूप में मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करें। ₹50 का भुगतान करें ऑनलाइन फीस जमा करें। स्टेटस ट्रैक करें SRN नंबर से आप अपने आवेदन की स्थिति चेक कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बातें जो ध्यान रखें नाम की स्पेलिंग बिल्कुल सही दर्ज करें मैरिज सर्टिफिकेट साफ और वैध होना चाहिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक्टिव होना जरूरी है PAN और Aadhaar में एक जैसा नाम होना चाहिए

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Digital toll collection system with FASTag and UPI payment at highway toll plaza in India
1 अप्रैल से टोल टैक्स के नियम में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ डिजिटल पेमेंट, कैश पूरी तरह बंद

भारत में राजमार्ग यात्रा को अधिक तेज, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 1 अप्रैल 2026 से टोल टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। अब देशभर के सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान (कैश) पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यात्रियों को केवल डिजिटल माध्यम जैसे FASTag और UPI के जरिए ही भुगतान करना होगा। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाना और भ्रष्टाचार तथा देरी को कम करना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा बल्कि यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत भी करेगा। क्या बदला है नए नियम में? अब हाईवे और एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए FASTag अनिवार्य हो गया है। जिन वाहनों में FASTag नहीं होगा या जिनके FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा, उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ मामलों में वाहन को टोल प्लाजा पर रोका भी जा सकता है। हालांकि, यात्रियों की सुविधा के लिए एक विकल्प रखा गया है। यदि FASTag काम नहीं कर रहा या बैलेंस खत्म हो गया है, तो यात्री टोल बूथ पर लगे QR कोड को स्कैन कर UPI के माध्यम से तुरंत भुगतान कर सकते हैं। क्या होगा इसका फायदा? पूरी तरह डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने से टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में काफी कमी आने की उम्मीद है। इससे वाहनों की आवाजाही तेज होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। इसके अलावा, वाहनों के कम रुकने से ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी। यात्रियों के लिए जरूरी सलाह यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका FASTag सक्रिय है, बैंक खाते से लिंक है और उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद है। साथ ही, स्मार्टफोन में एक सक्रिय UPI ऐप रखना भी जरूरी है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान किया जा सके। हालांकि, नेटवर्क की समस्या वाले इलाकों में डिजिटल भुगतान में थोड़ी परेशानी आ सकती है, इसलिए पहले से तैयारी करना जरूरी है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Vodafone Idea 5G network expansion
Vi 5G Expansion: दो महीनों में 90 नए शहरों तक पहुंचेगा नेटवर्क, 133 शहरों में होगी कवरेज

भारत में 5G की रेस तेज होती जा रही है और अब Vodafone Idea (Vi) ने भी बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अगले दो महीनों में अपने 5G नेटवर्क को 90 नए शहरों तक विस्तार देगी, जिससे कुल कवरेज 133 शहरों तक पहुंच जाएगी। 43 से 133 शहरों तक का सफर फिलहाल Vi का 5G नेटवर्क 17 सर्किल्स के 43 शहरों में उपलब्ध है। कंपनी का लक्ष्य मई 2026 तक इसे बढ़ाकर 133 शहरों तक पहुंचाना है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब Vi को Bharti Airtel और Reliance Jio से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने पहले ही देशभर में 5G नेटवर्क तेजी से फैलाया है। किन क्षेत्रों में होगा विस्तार? Vi का यह विस्तार 15 प्रमुख सर्किल्स में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश (ईस्ट और वेस्ट), हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़। कंपनी खासतौर पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, हाई डेटा कंजंप्शन वाले इलाकों और तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों पर फोकस कर रही है। इन शहरों को मिलेगा 5G आने वाले समय में जिन प्रमुख शहरों में Vi 5G सेवा शुरू होगी, उनमें Chennai, Hyderabad, Varanasi, Goa, Gandhinagar और Kolhapur जैसे शहर शामिल हैं। इसके अलावा प्रयागराज, पुडुचेरी, सीकर, दुर्गापुर, हरिद्वार और ग्वालियर जैसे शहरों में भी 5G नेटवर्क पहुंचाया जाएगा। टेक्नोलॉजी पार्टनर्स का सहयोग Vi ने अपने 5G नेटवर्क विस्तार के लिए Nokia, Ericsson और Samsung के साथ साझेदारी की है। इन कंपनियों की मदद से Vi उन इलाकों में नेटवर्क मजबूत कर रहा है जहां 5G डिवाइस का इस्तेमाल और डेटा की मांग तेजी से बढ़ रही है। क्यों अहम है यह विस्तार? Vi का यह कदम भारत में 5G प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। इससे यूजर्स को बेहतर नेटवर्क स्पीड, कम लेटेंसी और बेहतर डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है। हालांकि, Vi के लिए यह विस्तार बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तेजी से नेटवर्क बढ़ाना होगा।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Smart street lights and digital traffic system in Patna city showcasing modern urban infrastructure upgrades
पटना बनेगा ‘स्मार्ट सिटी’: खुद जलेंगी स्ट्रीट लाइटें, बटन दबाते ही रुकेगा ट्रैफिक, 2914 करोड़ का बजट पास

पटना: राजधानी पटना को आधुनिक और टेक्नोलॉजी से लैस शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पटना नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 2914 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। यह बैठक मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाने और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।   स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बदलेगा पटना का चेहरा इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ‘स्मार्ट सिटी’ की अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है। अब पटना की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें खुद-ब-खुद जलेंगी और बुझेंगी। इसके लिए IoT आधारित सेंसर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अंधेरा होते ही लाइटें अपने आप चालू हो जाएंगी और सुबह होते ही बंद हो जाएंगी।   सेंसर लाइट और सेंट्रल कमांड सेंटर की व्यवस्था नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, शहर की मौजूदा करीब 82 हजार स्ट्रीट लाइटों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट लाइट में बदला जाएगा। नई कॉलोनियों और गलियों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए सर्वे कराया जाएगा। इन सभी लाइटों की निगरानी एक सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर से होगी, जहां से खराबी की तुरंत जानकारी मिल सकेगी और मरम्मत में तेजी आएगी।   पैदल यात्रियों के लिए ‘डिमांड लाइट’ सिस्टम बजट में आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘डिमांड ट्रैफिक लाइट’ सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत सड़क पार करने के लिए पैदल यात्री को केवल एक बटन दबाना होगा, जिसके बाद सिग्नल लाल हो जाएगा और वाहनों की आवाजाही रुक जाएगी। हालांकि, ट्रैफिक जाम से बचने के लिए इस सुविधा के उपयोग के बीच 20 मिनट का अंतर रखा गया है।   जीआईएस मैपिंग से बढ़ेगा नगर निगम का राजस्व नगर निगम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शहर की सभी संपत्तियों की GIS मैपिंग कराई जाएगी। इससे होल्डिंग टैक्स की चोरी पर रोक लगेगी और राजस्व में इजाफा होगा। इस वित्तीय वर्ष में होल्डिंग टैक्स से 137 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है।   अन्य सुविधाएं भी होंगी बेहतर इस बजट में आम लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। शहर के सभी छह अंचलों में शव वाहन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जरूरतमंद परिवारों को आसानी से सेवा मिल सके। इसके अलावा, पटना में प्रवेश करने वाले सात प्रमुख मार्गों पर आकर्षक प्रवेश द्वार भी बनाए जाएंगे।   आधुनिक पटना की ओर बड़ा कदम कुल मिलाकर, पटना नगर निगम का यह बजट शहर को तकनीकी रूप से उन्नत और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर शहर की यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और जीवनशैली पर साफ तौर पर दिखाई देगा।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0