Digital India

Government Notice
सरकार ने WhatsApp के बाद Telegram और Signal को भी यूजरनेम फीचर पर भेजा नोटिस

नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर अपनी सख्ती बढ़ाते हुए WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal को भी उनके यूजरनेम (Username) फीचर के संबंध में नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दोनों प्लेटफॉर्म से इस फीचर से जुड़े सुरक्षा उपायों और संभावित जोखिमों पर विस्तृत जानकारी मांगी है।   यूजरनेम फीचर पर सरकार की बढ़ी चिंता   सरकार का कहना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग में मोबाइल नंबर छिपा रहता है, जिससे फर्जी पहचान , ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण कंपनियों से पूछा गया है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं।   WhatsApp को पहले ही दिया जा चुका है निर्देश   इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को निर्देश दिया था कि भारत में WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर का रोलआउट फिलहाल रोका जाए। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर इस फीचर और इसके सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जवाब मांगा गया था।   Telegram और Signal से भी मांगी गई रिपोर्ट   सरकारी सूत्रों के अनुसार, Telegram और Signal से भी पूछा गया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से मौजूद यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं। दोनों कंपनियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।   डिजिटल सुरक्षा पर सरकार की नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने और साइबर अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब सभी की नजर कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Aadhaar Update
1 जुलाई से मुफ्त में आधार से जोड़ें Email ID, UIDAI ने शुरू की नई सुविधा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड धारकों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि 1 जुलाई 2026 से आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने की सुविधा पूरी तरह मुफ्त होगी। यह सुविधा नए Aadhaar ऐप के माध्यम से उपलब्ध होगी और 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। वर्तमान में आधार में ईमेल आईडी जोड़ने या अपडेट कराने के लिए 75 रुपये का शुल्क लिया जाता है, लेकिन छह महीने तक नागरिकों को यह सेवा बिना किसी शुल्क के मिलेगी।   नए ऐप से घर बैठे होगा अपडेट   UIDAI के नए Aadhaar ऐप के जरिए उपयोगकर्ता बिना आधार सेवा केंद्र गए अपने मोबाइल फोन से ही ईमेल आईडी अपडेट कर सकेंगे। इसके लिए यूजर को ऐप में आधार नंबर और आधार से पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद 'Verify Email Address' विकल्प चुनकर अनुरोध सबमिट किया जा सकेगा।   फेस ऑथेंटिकेशन और QR सुविधा   नया Aadhaar ऐप आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। इसमें फेस ऑथेंटिकेशन, बायोमीट्रिक लॉक और QR-आधारित पहचान सत्यापन जैसी सुविधाएं दी गई हैं। सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, होटलों और अन्य संस्थानों में पहचान सत्यापित करने के लिए यह ऐप अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प प्रदान करता है। इसके अलावा एक ही पंजीकृत मोबाइल नंबर से अधिकतम पांच आधार प्रोफाइल जोड़ी जा सकती हैं, जिससे बच्चों के आधार की जानकारी भी आसानी से एक्सेस की जा सकेगी।   ऐसे डाउनलोड करें नया Aadhaar ऐप   नया Aadhaar ऐप Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध है। डाउनलोड करने के बाद उपयोगकर्ता अपनी पसंदीदा भाषा चुनेंगे, मोबाइल नंबर दर्ज करेंगे, ओटीपी से सत्यापन करेंगे और फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करने के बाद ऐप का उपयोग शुरू कर सकेंगे।   UIDAI का कहना है कि आधार से ईमेल आईडी लिंक होने पर नागरिकों को आधार से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं और अपडेट समय पर प्राप्त होते रहेंगे। वर्ष 2009 में शुरू हुई आधार परियोजना आज दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बन चुकी है और अब तक देश में 144 करोड़ से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं।

anjali kumari जून 29, 2026 0
PFRDA launches AI-powered Pension Sahayak platform for faster pension grievance redressal in multiple Indian languages.
PFRDA ने लॉन्च किया AI आधारित 'पेंशन सहायक', अब चुटकियों में होगी पेंशन से जुड़ी शिकायतों का समाधान

PFRDA Pension Sahayak: पेंशनधारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने 'पेंशन सहायक' नाम से एक नया AI-आधारित शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह नया सिस्टम पुराने Central Grievance Management System (CGMS) की जगह लेगा और पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बनाएगा। यह आधुनिक प्लेटफॉर्म वेब, मोबाइल और व्हाट्सऐप जैसी सेवाओं को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में जोड़ता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा। 22 भारतीय भाषाओं में मिलेगी सुविधा 'पेंशन सहायक' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें Bhashini AI का इंटीग्रेशन किया गया है। इसके जरिए यूजर्स 22 भारतीय भाषाओं में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इतना ही नहीं, जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा और ऑडियो फॉर्मेट में भी सुना जा सकेगा। 'पेंशन सहायक' की 5 बड़ी खूबियां 1. PRAN और पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं अब यूजर्स सिर्फ अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP के जरिए लॉगिन कर सकेंगे। इसके लिए PRAN या पासवर्ड की आवश्यकता नहीं होगी। 2. एक मोबाइल नंबर से जुड़े सभी अकाउंट एक साथ दिखेंगे अगर किसी व्यक्ति के एक ही मोबाइल नंबर से कई PRAN जुड़े हैं, तो लॉगिन के बाद सभी अकाउंट्स एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगे। अटल पेंशन योजना (APY) के वे सदस्य जिन्होंने अपना PRAN नंबर भूल गए हैं, वे भी आसानी से उसे खोज सकेंगे। 3. स्थानीय भाषा में वॉइस कमांड से शिकायत दर्ज करने की सुविधा यूजर्स अपनी पसंदीदा भाषा में बोलकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसी भाषा में जवाब भी प्राप्त कर सकते हैं। 4. शिकायत का स्वतः एस्केलेशन यदि तय समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो सिस्टम स्वतः ही मामले को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा देगा। 5. समाधान से असंतुष्ट होने पर एक क्लिक में आगे बढ़ेगा मामला अगर यूजर दिए गए समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह केवल एक क्लिक के जरिए मामले को ओम्बड्समैन या NPS ट्रस्ट के पास भेज सकता है। साथ ही समाधान की गुणवत्ता को रेटिंग देने की सुविधा भी उपलब्ध है। पुराने सिस्टम से कितना अलग है नया प्लेटफॉर्म? पुराना CGMS सिस्टम अपेक्षाकृत पारंपरिक था और उपयोगकर्ताओं को तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती थी। वहीं नया 'पेंशन सहायक' पूरी तरह AI-संचालित, वॉइस-सक्षम और यूजर-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म है। अब पेंशनधारकों को सिर्फ अपनी समस्या बतानी होगी, बाकी का काम सिस्टम खुद संभालेगा। इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान बनने की उम्मीद है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Illustration showing internet root servers and India's push for stronger digital infrastructure and cyber security.
इंटरनेट संप्रभुता की दिशा में बड़ा कदम, भारत में रूट सर्वर लगाने की मांग; ICANN ले सकता है अहम फैसला

ICANN Domestic Root Servers: डिजिटल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने वैश्विक इंटरनेट संस्था ICANN (Internet Corporation for Assigned Names and Numbers) से भारत में मुख्य रूट सर्वर स्थापित करने की मांग की है। इस कदम का उद्देश्य देश की इंटरनेट सुरक्षा को मजबूत करना और विदेशी नेटवर्क पर निर्भरता को कम करना है। भारत ने क्यों उठाई रूट सर्वर की मांग? इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार वाले देशों में शामिल भारत के पास अपना मजबूत और सुरक्षित इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। उनका मानना है कि घरेलू रूट सर्वर से देश की डिजिटल संप्रभुता को और मजबूती मिलेगी। क्या होते हैं रूट सर्वर? रूट सर्वर इंटरनेट की बुनियादी संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। जब कोई यूजर किसी वेबसाइट को खोलता है या ईमेल भेजता है, तो डोमेन नेम सिस्टम (DNS) के जरिए रूट सर्वर उस वेबसाइट का सही पता खोजने में मदद करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो रूट सर्वर इंटरनेट की "डायरेक्टरी" की तरह काम करते हैं, जो यूजर्स को सही वेबसाइट तक पहुंचाने में सहायता करते हैं। फिलहाल कहां मौजूद हैं ये सर्वर? वर्तमान में ICANN के नेटवर्क से जुड़े प्रमुख रूट सर्वरों की मौजूदगी अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर, मिस्र और केन्या जैसे देशों में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और ICANN के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है। बताया जा रहा है कि भारत को सभी 13 मुख्य रूट सर्वरों को मिरर करने वाले करीब 18 सर्वरों का एक पूरा क्लस्टर मिल सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल और लंबी मानी जा रही है। क्या होंगे इसके फायदे? यदि भारत में रूट सर्वर स्थापित होते हैं, तो इसके कई महत्वपूर्ण लाभ सामने आ सकते हैं: इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी। साइबर हमलों और मैलवेयर खतरों से निपटने में तेजी आएगी। इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के स्तर पर ही संभावित खतरों को रोका जा सकेगा। देश के महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी। तकनीकी निवेश और डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। भारत डिजिटल रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा। वैश्विक स्तर पर संतुलित इंटरनेट ढांचे की जरूरत रिपोर्ट्स के मुताबिक, सचिव एस. कृष्णन ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इंटरनेट का बुनियादी ढांचा दुनिया भर में संतुलित तरीके से वितरित होना चाहिए। उनका मानना है कि भारत में रूट सर्वर स्थापित होने से न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि तकनीकी नवाचार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो इसे भारत की डिजिटल संप्रभुता और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा सकता है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Illustration of 5G connectivity and smartphone users as India moves toward widespread 5G adoption.
2031 तक हर 10 में 8 भारतीय करेंगे 5G का इस्तेमाल, डेटा खपत होगी दोगुनी: एरिक्सन रिपोर्ट

भारत में 5G तकनीक का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव और व्यापक होने वाला है। दूरसंचार उपकरण निर्माता एरिक्सन की ताजा मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2031 तक देश में 5G उपयोगकर्ताओं की संख्या 110 करोड़ से अधिक पहुंच सकती है। इसका मतलब होगा कि भारत के कुल मोबाइल कनेक्शनों में लगभग 81 प्रतिशत हिस्सेदारी 5G की होगी। सस्ते 5G स्मार्टफोन्स, तेजी से बढ़ता नेटवर्क कवरेज और हाई-स्पीड इंटरनेट की बढ़ती मांग इस बदलाव को गति दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 5G केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 2025 के अंत तक 43 करोड़ पहुंच सकते हैं 5G ग्राहक एरिक्सन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के आखिर तक भारत में 5G ग्राहकों की संख्या करीब 43 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो कुल मोबाइल कनेक्शनों का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा होगी। अगले छह वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 110 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग सभी जिलों तक 5G नेटवर्क का विस्तार हो चुका है। बेहतर नेटवर्क अनुभव और किफायती स्मार्टफोन लोगों को तेजी से नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मोबाइल डेटा खपत में दुनिया के अग्रणी देशों में भारत भारत पहले से ही प्रति स्मार्टफोन डेटा उपयोग के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। वर्तमान में एक भारतीय उपयोगकर्ता औसतन हर महीने लगभग 37 जीबी डेटा खर्च करता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकता है। वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एप्लिकेशन और हाई-रिजॉल्यूशन कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता इसके पीछे प्रमुख कारण मानी जा रही है। 4G की हिस्सेदारी धीरे-धीरे होगी कम हालांकि 5G तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन फिलहाल 4G भारत की सबसे बड़ी मोबाइल तकनीक बनी हुई है। वर्तमान में कुल मोबाइल कनेक्शनों में 4G की हिस्सेदारी लगभग 46 प्रतिशत है। अनुमान है कि 2025 में 4G ग्राहकों की संख्या करीब 57 करोड़ होगी, लेकिन 2031 तक यह घटकर लगभग 16 करोड़ रह सकती है क्योंकि अधिकतर उपयोगकर्ता 5G नेटवर्क की ओर शिफ्ट होंगे। 5G नेटवर्क में जुड़ रहे हैं नए फीचर्स रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत की एक प्रमुख टेलीकॉम कंपनी ने अपने पोस्टपेड 5G ग्राहकों के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग आधारित सेवाएं शुरू की हैं। यह तकनीक अलग-अलग जरूरतों के अनुसार नेटवर्क को अनुकूलित करने में सक्षम बनाती है। भविष्य में यही तकनीक इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस्ड डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने में मदद करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस जैसी तकनीकें देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। डिजिटल इंडिया को मिलेगा बड़ा फायदा एरिक्सन इंडिया के अनुसार, भारत में 5G अपनाने की रफ्तार दुनिया के कई बड़े बाजारों से तेज है। मजबूत और सुरक्षित 5G इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल समावेशन, ई-गवर्नेंस और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। आने वाले वर्षों में यही तकनीक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगी।  

surbhi जून 17, 2026 0
Indian currency notes with digital misinformation alert and RBI fact check verification notice.
Fact Check: क्या 30 जून से भारत में चलेंगे प्लास्टिक के नोट? RBI ने वायरल दावों की बताई सच्चाई

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 से भारत में कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक करेंसी शुरू कर दी जाएगी। वीडियो में यह भी कहा गया है कि 10, 20, 50 और 100 रुपये के मौजूदा नोट धीरे-धीरे बंद कर दिए जाएंगे। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इन दावों को पूरी तरह फर्जी बताया है। सोशल मीडिया पर क्या किया जा रहा है दावा? वायरल वीडियो में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार और RBI जल्द ही पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने वाले हैं और 30 जून 2026 तक पुराने कागजी नोटों को बदल दिया जाएगा। वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित आवाज का भी इस्तेमाल किया गया है। क्या है वायरल दावे की सच्चाई? इन दावों के सामने आने के बाद प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने फैक्ट चेक जारी कर स्थिति स्पष्ट की। RBI के हवाले से बताया गया कि फिलहाल कागज के नोटों को वापस लेने या उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी लाने की कोई योजना नहीं है। PIB ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो डिजिटल रूप से एडिट किया गया है और उसमें किए गए दावे भ्रामक हैं। लोगों से क्या अपील की गई? सरकार ने लोगों से अपील की है कि नोटों और बैंकिंग से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी संदेश या वीडियो को बिना जांचे-परखे साझा न करें। अगर किसी को सरकार से जुड़ा कोई संदिग्ध या फर्जी कंटेंट दिखाई देता है, तो उसकी शिकायत @PIBFactCheck के माध्यम से की जा सकती है। किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट? दुनिया के कई देशों में पॉलीमर आधारित नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। प्लास्टिक के नोट कैसे बनते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, ये नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बल्कि पॉलीमर सामग्री, विशेष रूप से पॉलीप्रोपलीन से बनाए जाते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं तथा जल्दी खराब नहीं होते।  

surbhi जून 11, 2026 0
MGM Medical College
जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव मिली मंजूरी

रांची। झारखंड में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान रिम्स रांची में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में रिम्स प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है।   केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए प्रति सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत रिम्स में UG सीटों को 180 से बढ़ाकर 250, PG सीटों को 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटों को 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है।   MGM और धनबाद मेडिकल कॉलेज को मिल चुकी मंजूरी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, धनबाद मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 100 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 19 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को भी भारत सरकार की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।   PPP मॉडल पर बनेंगे नए छात्रावास रिम्स-टू परियोजना के तहत छात्रावास निर्माण के लिए नई रणनीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हॉस्टल निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के वायबिलिटी गैप फंड (VGF) से सहायता लेने की योजना है। इससे सरकारी खर्च कम होगा और छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।   चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम सीटों में बढ़ोतरी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से झारखंड में मेडिकल शिक्षा को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे राज्य के छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Young man uses AI to locate 25 ancestral land plots through digital records and mapping tools
AI की मदद से युवक ने खोज निकाली 25 पुश्तैनी जमीनें, वायरल हुई अनोखी कहानी

उत्तर प्रदेश के एक युवक की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस युवक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी 25 पुश्तैनी जमीनों की सटीक लोकेशन खोज निकाली। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि AI अब केवल चैटिंग, कंटेंट लिखने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान भी कर सकता है। मोहम्मदपुर गांव से जुड़े इस मामले में जाहिद खान नाम के युवक को अपने परिवार की विरासत में मिली जमीनों की सही जानकारी नहीं थी। जमीनें उनके परदादा से दादा, फिर पिता और बाद में उन्हें मिली थीं, लेकिन समय के साथ रिकॉर्ड्स इतने बिखर गए कि उनकी सटीक पहचान करना मुश्किल हो गया। सरकारी रिकॉर्ड्स बने बड़ी चुनौती जाहिद के अनुसार, जमीन से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध थे। इनमें तकनीकी शब्दावली और जटिल हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिसे समझना आसान नहीं था। इसके अलावा उन्होंने गांव में बहुत कम समय बिताया था, इसलिए जमीनों की वास्तविक स्थिति का भी कोई स्पष्ट अंदाजा नहीं था। हालांकि रिकॉर्ड्स डिजिटल रूप में मौजूद थे, लेकिन उन्हें समझना और आपस में जोड़ना आम व्यक्ति के लिए बेहद कठिन काम था। Claude AI ने संभाली जिम्मेदारी इस समस्या का समाधान निकालने के लिए जाहिद ने AI असिस्टेंट Claude का उपयोग किया। Claude के "Computer Use" फीचर की मदद से AI ने स्वयं सरकारी वेबसाइटों पर जाकर रिकॉर्ड्स खंगालना शुरू किया। AI ने हिंदी ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड का उपयोग करते हुए उनके पिता का नाम दर्ज किया और उससे जुड़े भूमि रिकॉर्ड्स की खोज की। इसके बाद परिवार के नाम पर दर्ज 25 अलग-अलग जमीनों के गाटा नंबर निकाल लिए। जटिल मैपिंग डेटा को बनाया आसान असल चुनौती तब सामने आई जब जमीनों की लोकेशन UTM (Universal Transverse Mercator) कोऑर्डिनेट्स में उपलब्ध थी। सामान्य व्यक्ति के लिए इन आंकड़ों को समझना लगभग असंभव था। लेकिन AI ने इन कोऑर्डिनेट्स को प्रोसेस कर उन्हें सामान्य GPS लोकेशन में बदल दिया। इसके बाद सभी जमीनों की सीमाओं और लोकेशन को जोड़कर एक विस्तृत डिजिटल नक्शा तैयार किया गया। Google Maps पर दिखीं सभी जमीनें AI ने सभी जमीनों की सीमा रेखाओं को पहचानकर KML फाइल तैयार की। इस फाइल को Google My Maps पर अपलोड किया गया, जिससे हर जमीन की सटीक GPS लोकेशन और उसकी सीमा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी। जाहिद का कहना है कि यदि AI की सहायता नहीं मिलती, तो उन्हें पुराने दस्तावेजों, स्थानीय लोगों और सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते। लेकिन AI ने यह पूरा काम बेहद कम समय में आसान बना दिया। सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया जैसे ही जाहिद ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की, यह तेजी से वायरल हो गई। हजारों लोगों ने इसे AI के सबसे उपयोगी और व्यावहारिक उपयोगों में से एक बताया। कई यूजर्स का कहना है कि भारत में लाखों लोग जमीन, राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की जटिल प्रक्रियाओं से जूझते हैं। ऐसे में AI आम नागरिकों के लिए एक बड़ी मदद साबित हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में AI सरकारी रिकॉर्ड्स, भूमि दस्तावेजों, भाषा संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं यह घटना दर्शाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल मनोरंजन या कंटेंट निर्माण का साधन नहीं रह गया है। सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर यह लोगों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है और जटिल डिजिटल सिस्टम्स को आम नागरिकों के लिए आसान बना सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Microsoft highlights India’s rising role in AI innovation and global technology development
AI का अगला सुपरपावर बन सकता है भारत, Microsoft ने बताया क्यों दुनिया की नजर अब इंडियन टेक पर

Microsoft के एक वरिष्ठ अधिकारी के हालिया बयान ने भारत को लेकर ग्लोबल टेक इंडस्ट्री की सोच को नई दिशा दी है। कंपनी का मानना है कि भारत आने वाले समय में दुनिया में AI तैनाती के अगले दौर का नेतृत्व कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश का विशाल डेवलपर बेस, तेजी से बढ़ता AI एडॉप्शन और मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम है। अब भारत केवल आईटी सर्विस देने वाला देश नहीं रह गया, बल्कि ग्लोबल AI इनोवेशन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। भारतीय डेवलपर्स का दुनिया में बढ़ता प्रभाव Jay Parikh, जो माइक्रोसॉफ्ट के Core-AI डिविजन में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हैं, ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े ओपन-सोर्स योगदान देने वाले देशों में शामिल हो चुका है। उनके मुताबिक, भारतीय डेवलपर्स AI प्रोजेक्ट्स में 75 लाख से ज्यादा योगदान दे चुके हैं। यही वजह है कि भारत में विकसित कई ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म और टूल्स अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। भारतीय प्रोजेक्ट्स की बढ़ रही ग्लोबल लोकप्रियता भारत के कई टेक प्रोजेक्ट्स अब इंटरनेशनल डेवलपर कम्युनिटी में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें Hyperswitch, ERPNext, ToolJet और Bruno जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स की सफलता यह दिखाती है कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी बनाने और दुनिया को दिशा देने वाला देश बनता जा रहा है। AI Deployment में भारत क्यों आगे? माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि आने वाले समय में AI की असली ताकत केवल बड़े मॉडल तैयार करने में नहीं, बल्कि उन्हें बड़े स्तर पर तेज और भरोसेमंद तरीके से लागू करने में होगी। इस मामले में भारत काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप कल्चर और सरकारी डिजिटल पहल ने टेक्नोलॉजी अपनाने की गति को काफी तेज किया है। यही कारण है कि भारतीय कंपनियां तेजी से AI आधारित ऑटोमेशन और स्मार्ट टूल्स अपना रही हैं। AI अपनाने में भारत दुनिया में सबसे आगे Deloitte के 2026 एंटरप्राइज AI सर्वे के मुताबिक, बड़े स्तर पर AI अपनाने के मामले में भारत 15 देशों में पहले स्थान पर है। इसका मतलब है कि भारत की कंपनियां अब AI को सिर्फ प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि बिजनेस ऑपरेशन का अहम हिस्सा बना रही हैं। बैंकिंग, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स, एजुकेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। भारत को क्या मिलेगा फायदा? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत इसी रफ्तार से AI इकोसिस्टम को मजबूत करता रहा, तो आने वाले वर्षों में देश ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में और बड़ी भूमिका निभा सकता है। इससे स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और टेक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही भारत AI आधारित प्रोडक्ट्स और सेवाओं का बड़ा एक्सपोर्टर भी बन सकता है। भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता इंटरनेट इस्तेमाल और मजबूत टेक्निकल टैलेंट इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत माने जा रहे हैं। आने वाले समय में AI सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार दोनों को नई दिशा दे सकता है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

भारत को वैश्विक आईटी सुरक्षा क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। India ने कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड (CCDB) का अध्यक्ष पद संभाल लिया है। यह जिम्मेदारी अप्रैल 2026 से अप्रैल 2028 तक के लिए भारत को सौंपी गई है। इसे अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा मानकों के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और तकनीकी क्षमता का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला 14 से 16 अप्रैल 2026 के बीच जापान की राजधानी Tokyo में आयोजित कॉमन क्राइटेरिया रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) की पहली तिमाही बैठक में लिया गया। क्या है CCRA? कॉमन क्राइटेरिया रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (CCRA) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसके तहत आईटी सुरक्षा प्रमाणपत्रों को सदस्य देशों के बीच आपसी मान्यता दी जाती है। इसका उद्देश्य सुरक्षित आईटी उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाना और वैश्विक सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है। CCRA के तहत मूल्यांकित और प्रमाणित उत्पादों को सदस्य देशों में दोबारा प्रमाणन की जरूरत नहीं पड़ती। इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों और आईटी उद्योग को बड़ा फायदा मिलता है। CCDB की क्या है भूमिका? कॉमन क्राइटेरिया डेवलपमेंट बोर्ड यानी CCDB, CCRA का तकनीकी केंद्र माना जाता है। यह बोर्ड आईटी सुरक्षा मूल्यांकन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों और मूल्यांकन प्रक्रिया को संचालित करता है। CCDB का मुख्य काम कॉमन क्राइटेरिया (CC) और कॉमन इवैल्यूएशन मेथडोलॉजी (CEM) के लिए वैश्विक तकनीकी कार्यक्रम तैयार करना और उन्हें अपडेट करना है। यह संस्था दुनिया भर में सुरक्षित आईटी उत्पादों के लिए मानक तय करने में अहम भूमिका निभाती है। 2013 से सक्रिय सदस्य है भारत भारत 16 सितंबर 2013 से CCRA का सक्रिय सदस्य रहा है। देश में यह काम Ministry of Electronics and Information Technology और STQC महानिदेशालय के जरिए किया जाता है, जो आईटी सुरक्षा मूल्यांकन के लिए अधिकृत प्रमाणन संस्था है। फिलहाल CCRA में 20 सर्टिफिकेट-अथॉराइजिंग देश और 18 सर्टिफिकेट-कंज्यूमिंग देश शामिल हैं। ये सभी मिलकर वैश्विक आईटी सुरक्षा मानकों और प्रमाणन प्रणाली को मजबूत बनाने का काम करते हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? विशेषज्ञों के मुताबिक, CCDB की अध्यक्षता मिलने से भारत अब वैश्विक साइबर सुरक्षा और आईटी सुरक्षा मानकों को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे भारत को उभरती तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने में प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा। दो साल की इस अवधि में भारत वैश्विक आईटी सुरक्षा प्रमाणन व्यवस्था के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में निर्णायक भूमिका निभा सकेगा। इसे डिजिटल और साइबर सुरक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।  

surbhi मई 15, 2026 0
satellite communication concept showing LEO satellites and global internet connectivity network
रिलायंस का बड़ा दांव: सैटेलाइट कम्युनिकेशन में अरबों डॉलर निवेश की तैयारी, खुद लीड कर रहे Mukesh Ambani

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा कदम रखने जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलहाल Elon Musk की कंपनी Starlink का दबदबा है। लेकिन अब रिलायंस इस गेम को बदलने की तैयारी में है–और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कमान खुद मुकेश अंबानी ने संभाल रखी है। क्या है रिलायंस का प्लान? सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस सैटकॉम सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। यह प्रोजेक्ट Jio Platforms के तहत संचालित होगा, जो कंपनी के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को संभालती है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो इन क्षेत्रों पर काम कर रही हैं: सैटेलाइट डिजाइन लॉन्च सिस्टम पेलोड यूजर टर्मिनल नेटवर्क इंटीग्रेशन लो अर्थ ऑर्बिट पर फोकस रिलायंस की नजर खासतौर पर Low Earth Orbit (LEO) सेगमेंट पर है, जहां कम ऊंचाई पर सैटेलाइट तैनात कर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं। यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक और अन्य वैश्विक कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। सरकार और ग्लोबल रेस भारत सरकार भी चाहती है कि देश सैटकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बने, ताकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके। इसी के तहत रिलायंस International Telecommunication Union (ITU) में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में जुटी है। मुकाबले में कौन-कौन? इस सेक्टर में पहले से कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं: Starlink (एलन मस्क) Amazon Kuiper (अमेजन) Eutelsat OneWeb AST SpaceMobile Sateliot भारत की तरफ से Sunil Mittal के भारती ग्रुप की भी Eutelsat में बड़ी हिस्सेदारी है। पार्टनरशिप और रणनीति रिलायंस पहले ही मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कंपनी SES के साथ साझेदारी कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ–यानी किसी मौजूदा सैटेलाइट कंपनी के अधिग्रहण–पर भी विचार कर रही है, ताकि तेजी से इस सेक्टर में प्रवेश किया जा सके। भारत के लिए क्या मायने? अगर रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो: भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क मिल सकता है ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बेहतर होगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी निर्भरता कम होगी क्या संकेत देता है यह कदम? यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टेलीकॉम की लड़ाई अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। रिलायंस का यह कदम न सिर्फ बिजनेस, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Person making secure UPI payment on smartphone with warning icons about online fraud risks
Digital Payment Alert: बढ़ते डिजिटल ट्रांजेक्शन के बीच ठगी से बचने के लिए NPCI की 5 जरूरी सलाह

भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां करीब 23,834 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या 28,000 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में National Payments Corporation of India (NPCI) ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए 5 अहम सुझाव दिए हैं। 1. पेमेंट से पहले नाम जरूर जांचें किसी भी भुगतान से पहले स्क्रीन पर दिख रहे नाम को ध्यान से देखें। सुनिश्चित करें कि पैसा सही व्यक्ति या व्यापारी को ही जा रहा है। कुछ सेकंड की सावधानी आपको बड़ी गलती से बचा सकती है। 2. भरोसेमंद ऐप और वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें हमेशा विश्वसनीय पेमेंट ऐप या आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि यही फ्रॉड का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं। 3. PIN और OTP कभी साझा न करें आपका UPI PIN, OTP और बैंक डिटेल पूरी तरह गोपनीय होती हैं। कोई भी व्यक्ति–चाहे वह खुद को बैंक या सरकारी अधिकारी बताए–इन जानकारियों को मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और जानकारी साझा न करें। 4. जल्दबाजी में निर्णय न लें अगर कोई आपसे तुरंत पैसे भेजने या जानकारी देने का दबाव बनाता है, तो सावधान रहें। ऐसे मामलों में समय लें, जानकारी की जांच करें और जरूरत पड़े तो संबंधित व्यक्ति या संस्था से खुद संपर्क करें। 5. ट्रांजेक्शन अलर्ट पर रखें नजर अपने बैंक खाते में SMS और ऐप नोटिफिकेशन को एक्टिव रखें। हर लेनदेन की जानकारी तुरंत मिलने से आप किसी भी संदिग्ध गतिविधि को जल्दी पकड़ सकते हैं और तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। डिजिटल पेमेंट जितना सुविधाजनक है, उतना ही सतर्क रहने की भी जरूरत है। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से आप ऑनलाइन ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Citizen filling digital census form on mobile phone for India Census 2027 self-enumeration process
जनगणना 2027: अब खुद भर सकेंगे 33 सवाल, 17 अप्रैल से शुरू सेल्फ-इन्युमरेशन प्रक्रिया

  पटना: देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। जनगणना 2027 के तहत अब लोगों को जनगणना कर्मी का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि वे खुद घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। 17 अप्रैल से 1 मई तक भर सकेंगे जानकारी जनगणना के पहले चरण में 17 अप्रैल से 1 मई तक सेल्फ-इन्युमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा शुरू की जा रही है। नागरिक पोर्टल पर जाकर 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खुद भर सकेंगे इसके लिए मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा डेटा सबमिट करने के बाद एक यूनिक आईडी जेनरेट होगी जब 2 मई से जनगणना कर्मी घर आएंगे, तो बस यह आईडी दिखानी होगी और प्रक्रिया तुरंत पूरी हो जाएगी। कैसे काम करेगा पूरा प्रोसेस? पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी भरें 33 सवालों के जवाब दें सबमिट करने के बाद यूनिक आईडी प्राप्त करें आईडी को सुरक्षित रखें जनगणना कर्मी को दिखाकर प्रक्रिया पूरी करें ‘एक घर, कई चूल्हे’ = अलग परिवार इस बार जनगणना में परिवार की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया गया है। अगर एक ही मकान में अलग-अलग चूल्हे (रसोई) हैं, तो उन्हें अलग-अलग परिवार माना जाएगा घर खाली मिलने पर उसे खाली मकान के रूप में दर्ज किया जाएगा क्या-क्या जानकारी देनी होगी? जनगणना में आपसे कई अहम सवाल पूछे जाएंगे, जैसे: मकान का मालिकाना हक दीवार और छत की सामग्री कमरों की संख्या परिवार के सदस्य विवाहित जोड़ों की जानकारी बाहर रहने वालों के लिए भी सुविधा बिहार के जो लोग राज्य से बाहर रह रहे हैं, वे भी पोर्टल के जरिए अपने मूल निवास (Native Place) की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। डेटा सबमिट करने से पहले उसे एडिट करने का विकल्प भी मिलेगा। फरवरी 2027 में होगी असली गिनती यह चरण केवल मकानों की सूची और प्रारंभिक डेटा के लिए है। देशभर में लोगों की वास्तविक गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। क्यों है यह बदलाव खास? डिजिटल जनगणना से: प्रक्रिया तेज और आसान होगी डेटा ज्यादा सटीक मिलेगा सरकारी योजनाओं और नीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें और सही जानकारी दर्ज करें, ताकि देश के विकास की योजना मजबूत आधार पर तैयार की जा सके।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Tender scam
Tender scam: आरोपी इंजीनियर को सरेंडर के बाद मिली बेल

रांची। ग्रामीण विकास विभाग में हुए टेंडर घोटाला मामले के आरोपी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर संतोष कुमार को बेल मिल गई है। उसने बुधवार को ही रांची स्थित PMLA की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर किया था। सरेंडर के बाद कोर्ट ने संतोष कुमार को बेल दे दी। उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके, पासपोर्ट जमा करने और बिना अनुमति देश नहीं छोड़ने की शर्त पर बेल मिली है। 14 आरोपियों के खिलाफ समनः इस मामले में ED  ने हाल ही में प्रमोद कुमार सहित 14 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया है। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों के विरुद्ध समन जारी कर दिया है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब तक कई आरोपियों ने सरेंडर किया है और उन्हें बेल मिल गई है।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
Woman updating Aadhaar and PAN details online after marriage using a laptop at home.
शादी के बाद Aadhaar और PAN में नाम बदलना हुआ आसान, अब घर बैठे करें पूरा अपडेट

भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने अब सरकारी प्रक्रियाओं को पहले से कहीं अधिक सरल बना दिया है। शादी के बाद महिलाओं के लिए अपने आधिकारिक दस्तावेजों में नाम या उपनाम (सरनेम) बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन पहले यह काफी जटिल और समय लेने वाला काम माना जाता था। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है, जिससे आप बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए घर बैठे ही अपने Aadhaar और PAN कार्ड में नाम अपडेट कर सकती हैं। क्यों जरूरी है नाम अपडेट करना? शादी के बाद अगर आपने अपना सरनेम बदला है, तो बैंकिंग, टैक्स, पासपोर्ट, और अन्य सरकारी सेवाओं में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए आधार और पैन में सही नाम होना बेहद जरूरी है। PAN कार्ड में नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया PAN कार्ड में नाम अपडेट करने के लिए आप Protean (NSDL) या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं NSDL (Protean) या UTIITSL पोर्टल खोलें। एप्लीकेशन टाइप चुनें ‘Changes or Correction in existing PAN data’ विकल्प पर क्लिक करें। व्यक्तिगत जानकारी भरें अपना मौजूदा PAN नंबर, नया नाम (विवाहित नाम), जन्म तिथि और मोबाइल नंबर दर्ज करें। टोकन नंबर प्राप्त करें फॉर्म सबमिट करने के बाद एक टोकन नंबर मिलेगा, जिसे सुरक्षित रखें। दस्तावेज अपलोड करें पहचान प्रमाण और मैरिज सर्टिफिकेट की स्कैन कॉपी अपलोड करें। फीस का भुगतान करें लगभग ₹100-110 का ऑनलाइन भुगतान करें। अपडेटेड e-PAN प्राप्त करें कुछ दिनों में e-PAN ईमेल पर मिल जाएगा, जबकि फिजिकल कार्ड 2-3 हफ्तों में आपके पते पर पहुंचेगा। Aadhaar में नाम अपडेट करने की प्रक्रिया Aadhaar में नाम बदलने के लिए आपको UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: myAadhaar पोर्टल पर लॉग-इन करें वेबसाइट पर जाकर ‘Login’ पर क्लिक करें। OTP के जरिए सत्यापन करें आधार नंबर डालें और OTP से लॉग-इन करें। अपडेट सेक्शन में जाएं ‘Name/Gender/Date of Birth & Address Update’ पर क्लिक करें। नाम (Name) विकल्प चुनें ‘Update Aadhaar Online’ में जाकर Name चुनें। नया नाम दर्ज करें अपना नया विवाहित नाम सही स्पेलिंग के साथ भरें। मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करें जरूरी दस्तावेज के रूप में मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करें। ₹50 का भुगतान करें ऑनलाइन फीस जमा करें। स्टेटस ट्रैक करें SRN नंबर से आप अपने आवेदन की स्थिति चेक कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बातें जो ध्यान रखें नाम की स्पेलिंग बिल्कुल सही दर्ज करें मैरिज सर्टिफिकेट साफ और वैध होना चाहिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक्टिव होना जरूरी है PAN और Aadhaar में एक जैसा नाम होना चाहिए

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Digital toll collection system with FASTag and UPI payment at highway toll plaza in India
1 अप्रैल से टोल टैक्स के नियम में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ डिजिटल पेमेंट, कैश पूरी तरह बंद

भारत में राजमार्ग यात्रा को अधिक तेज, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 1 अप्रैल 2026 से टोल टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। अब देशभर के सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान (कैश) पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यात्रियों को केवल डिजिटल माध्यम जैसे FASTag और UPI के जरिए ही भुगतान करना होगा। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाना और भ्रष्टाचार तथा देरी को कम करना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा बल्कि यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत भी करेगा। क्या बदला है नए नियम में? अब हाईवे और एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए FASTag अनिवार्य हो गया है। जिन वाहनों में FASTag नहीं होगा या जिनके FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा, उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ मामलों में वाहन को टोल प्लाजा पर रोका भी जा सकता है। हालांकि, यात्रियों की सुविधा के लिए एक विकल्प रखा गया है। यदि FASTag काम नहीं कर रहा या बैलेंस खत्म हो गया है, तो यात्री टोल बूथ पर लगे QR कोड को स्कैन कर UPI के माध्यम से तुरंत भुगतान कर सकते हैं। क्या होगा इसका फायदा? पूरी तरह डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने से टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में काफी कमी आने की उम्मीद है। इससे वाहनों की आवाजाही तेज होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। इसके अलावा, वाहनों के कम रुकने से ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी। यात्रियों के लिए जरूरी सलाह यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका FASTag सक्रिय है, बैंक खाते से लिंक है और उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद है। साथ ही, स्मार्टफोन में एक सक्रिय UPI ऐप रखना भी जरूरी है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान किया जा सके। हालांकि, नेटवर्क की समस्या वाले इलाकों में डिजिटल भुगतान में थोड़ी परेशानी आ सकती है, इसलिए पहले से तैयारी करना जरूरी है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Vodafone Idea 5G network expansion
Vi 5G Expansion: दो महीनों में 90 नए शहरों तक पहुंचेगा नेटवर्क, 133 शहरों में होगी कवरेज

भारत में 5G की रेस तेज होती जा रही है और अब Vodafone Idea (Vi) ने भी बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अगले दो महीनों में अपने 5G नेटवर्क को 90 नए शहरों तक विस्तार देगी, जिससे कुल कवरेज 133 शहरों तक पहुंच जाएगी। 43 से 133 शहरों तक का सफर फिलहाल Vi का 5G नेटवर्क 17 सर्किल्स के 43 शहरों में उपलब्ध है। कंपनी का लक्ष्य मई 2026 तक इसे बढ़ाकर 133 शहरों तक पहुंचाना है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब Vi को Bharti Airtel और Reliance Jio से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने पहले ही देशभर में 5G नेटवर्क तेजी से फैलाया है। किन क्षेत्रों में होगा विस्तार? Vi का यह विस्तार 15 प्रमुख सर्किल्स में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश (ईस्ट और वेस्ट), हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़। कंपनी खासतौर पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, हाई डेटा कंजंप्शन वाले इलाकों और तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों पर फोकस कर रही है। इन शहरों को मिलेगा 5G आने वाले समय में जिन प्रमुख शहरों में Vi 5G सेवा शुरू होगी, उनमें Chennai, Hyderabad, Varanasi, Goa, Gandhinagar और Kolhapur जैसे शहर शामिल हैं। इसके अलावा प्रयागराज, पुडुचेरी, सीकर, दुर्गापुर, हरिद्वार और ग्वालियर जैसे शहरों में भी 5G नेटवर्क पहुंचाया जाएगा। टेक्नोलॉजी पार्टनर्स का सहयोग Vi ने अपने 5G नेटवर्क विस्तार के लिए Nokia, Ericsson और Samsung के साथ साझेदारी की है। इन कंपनियों की मदद से Vi उन इलाकों में नेटवर्क मजबूत कर रहा है जहां 5G डिवाइस का इस्तेमाल और डेटा की मांग तेजी से बढ़ रही है। क्यों अहम है यह विस्तार? Vi का यह कदम भारत में 5G प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। इससे यूजर्स को बेहतर नेटवर्क स्पीड, कम लेटेंसी और बेहतर डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है। हालांकि, Vi के लिए यह विस्तार बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तेजी से नेटवर्क बढ़ाना होगा।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Smart street lights and digital traffic system in Patna city showcasing modern urban infrastructure upgrades
पटना बनेगा ‘स्मार्ट सिटी’: खुद जलेंगी स्ट्रीट लाइटें, बटन दबाते ही रुकेगा ट्रैफिक, 2914 करोड़ का बजट पास

पटना: राजधानी पटना को आधुनिक और टेक्नोलॉजी से लैस शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पटना नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 2914 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। यह बैठक मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाने और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।   स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बदलेगा पटना का चेहरा इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ‘स्मार्ट सिटी’ की अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है। अब पटना की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें खुद-ब-खुद जलेंगी और बुझेंगी। इसके लिए IoT आधारित सेंसर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अंधेरा होते ही लाइटें अपने आप चालू हो जाएंगी और सुबह होते ही बंद हो जाएंगी।   सेंसर लाइट और सेंट्रल कमांड सेंटर की व्यवस्था नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, शहर की मौजूदा करीब 82 हजार स्ट्रीट लाइटों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट लाइट में बदला जाएगा। नई कॉलोनियों और गलियों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए सर्वे कराया जाएगा। इन सभी लाइटों की निगरानी एक सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर से होगी, जहां से खराबी की तुरंत जानकारी मिल सकेगी और मरम्मत में तेजी आएगी।   पैदल यात्रियों के लिए ‘डिमांड लाइट’ सिस्टम बजट में आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘डिमांड ट्रैफिक लाइट’ सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत सड़क पार करने के लिए पैदल यात्री को केवल एक बटन दबाना होगा, जिसके बाद सिग्नल लाल हो जाएगा और वाहनों की आवाजाही रुक जाएगी। हालांकि, ट्रैफिक जाम से बचने के लिए इस सुविधा के उपयोग के बीच 20 मिनट का अंतर रखा गया है।   जीआईएस मैपिंग से बढ़ेगा नगर निगम का राजस्व नगर निगम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शहर की सभी संपत्तियों की GIS मैपिंग कराई जाएगी। इससे होल्डिंग टैक्स की चोरी पर रोक लगेगी और राजस्व में इजाफा होगा। इस वित्तीय वर्ष में होल्डिंग टैक्स से 137 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है।   अन्य सुविधाएं भी होंगी बेहतर इस बजट में आम लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। शहर के सभी छह अंचलों में शव वाहन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे जरूरतमंद परिवारों को आसानी से सेवा मिल सके। इसके अलावा, पटना में प्रवेश करने वाले सात प्रमुख मार्गों पर आकर्षक प्रवेश द्वार भी बनाए जाएंगे।   आधुनिक पटना की ओर बड़ा कदम कुल मिलाकर, पटना नगर निगम का यह बजट शहर को तकनीकी रूप से उन्नत और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर शहर की यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और जीवनशैली पर साफ तौर पर दिखाई देगा।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0