Economy News

Bank documents and financial assets symbolizing government efforts to track loan defaulters' properties.
लोन डिफॉल्टरों की संपत्ति ट्रैक करना अब होगा आसान, जानिए क्या है सरकार का नया प्लान

Loan Default News: कर्ज लेकर भुगतान नहीं करने वाले बड़े डिफॉल्टरों पर सरकार अब शिकंजा कसने की तैयारी में है। बैंकों की रिकवरी प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार एक नया सिस्टम विकसित कर रही है, जिससे डिफॉल्टरों की चल संपत्तियों का पता लगाना पहले के मुकाबले कहीं अधिक आसान हो जाएगा। सरकार का उद्देश्य उन मामलों में तेजी लाना है, जहां कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल (Debt Recovery Tribunal - DRT) संपत्ति जब्त करने के आदेश जारी करता है, लेकिन संपत्तियों की जानकारी जुटाने में लंबा समय लग जाता है। अभी कैसे होती है वसूली प्रक्रिया? वर्तमान व्यवस्था में बैंक डिफॉल्टरों की चल संपत्तियों जैसे वाहन, मशीनरी और अन्य परिसंपत्तियों की जानकारी जुटाने के लिए DRT के रिकवरी अधिकारियों की मदद लेते हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से संपत्ति अटैच करने के आदेश जारी किए जाते हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली मानी जाती है। क्या है सबसे बड़ी समस्या? बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल ऐसी कोई एकीकृत व्यवस्था (Single Window System) मौजूद नहीं है, जहां डिफॉल्टरों की सभी चल संपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध हो। अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाने में काफी समय खर्च होता है, जिससे वसूली प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। सरकार का नया प्लान क्या है? सरकार और बैंक मिलकर एक सेंट्रलाइज्ड रिकॉर्ड सिस्टम तैयार कर रहे हैं। इसके तहत डिफॉल्टरों की चल संपत्तियों का एक साझा डेटाबेस बनाया जाएगा, जिससे जरूरत पड़ने पर बैंक तेजी से जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा बैंक आपस में भी सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित कर रहे हैं, ताकि पारदर्शिता बढ़े और मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सके। लंबित मामलों को जल्द निपटाने पर जोर हाल ही में सरकार ने DRT और DRAT (Debt Recovery Appellate Tribunal) के अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों के तेजी से निपटारे पर चर्चा की थी। वित्त मंत्रालय के अनुसार: ट्रिब्यूनल्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सफल DRT मॉडल को अन्य ट्रिब्यूनलों में भी अपनाया जाएगा। बड़े कर्जदारों पर रहेगा खास फोकस सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे बड़े ऋण वाले मामलों को प्राथमिकता दें, ताकि अधिकतम राशि की वसूली हो सके। इसके साथ ही विवादों के निपटारे के लिए लोक अदालतों के अधिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। 2026 में लगेंगी विशेष लोक अदालतें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वर्ष 2026 में DRT और DRAT में लंबित मामलों के समाधान के लिए चार विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक, लंबित मामलों में करीब 71 प्रतिशत ऐसे हैं जिनमें बकाया राशि 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। डिफॉल्टरों के लिए बढ़ेगी मुश्किल सरकार की इस नई पहल के बाद बड़े कर्जदारों की संपत्तियों को छिपाना आसान नहीं होगा। यदि नया सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो बैंकों की रिकवरी क्षमता में सुधार होगा और वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।  

surbhi जून 18, 2026 0
Oil storage tanks symbolizing India's plan to strengthen crude reserves and fuel security.
अब नहीं मचेगा पेट्रोल-डीजल और LPG पर हाहाकार? चीन की राह पर चल सकता है भारत, सरकार बना रही बड़ी रणनीति

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी थीं। महंगे तेल के कारण देश का आयात बिल बढ़ा, चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ा और रुपये की कमजोरी भी देखने को मिली। अब भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए भारत चीन की तर्ज पर बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार घरेलू रिफाइनरियों को अधिक मात्रा में कच्चे तेल का भंडार तैयार करने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने की नीति पर काम कर सकती है। चीन की रणनीति से मिला सबक ईरान संकट के दौरान चीन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीदने के बजाय अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) का इस्तेमाल किया। इससे उसे कीमतों में उछाल का असर कम झेलना पड़ा। अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में सप्लाई बाधित होने या कीमतों में अचानक वृद्धि की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों। फिलहाल सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखती हैं रिफाइनरियां वर्तमान में भारतीय रिफाइनरियां अपनी परिचालन जरूरतों के लिए लगभग 15 दिनों का कच्चा तेल स्टोर करती हैं। नई योजना के तहत इस क्षमता को बढ़ाकर लगभग 30 दिनों की मांग के बराबर किया जा सकता है। इसके लिए करीब 150 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होगी, क्योंकि भारत की दैनिक खपत लगभग 5 मिलियन बैरल है। 60 हजार करोड़ रुपये तक का खर्च यदि रिफाइनरियों को अपने भंडार को दोगुना करना पड़ता है, तो मौजूदा कीमतों के आधार पर केवल अतिरिक्त कच्चे तेल की खरीद पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा: नए स्टोरेज टैंक बनाने होंगे। हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। इसी कारण कुछ रिफाइनरियां इस प्रस्ताव को लेकर चिंता भी जता सकती हैं। पोर्ट्स के पास बनाए जा सकते हैं स्टोरेज विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार रिफाइनरियों को बंदरगाहों के पास स्टोरेज सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का व्यापार आसान होगा। भारत भविष्य में क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। सिंगापुर का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि विशाल तेल भंडारण क्षमता ने उसे एशिया के प्रमुख तेल व्यापारिक केंद्रों में शामिल कर दिया है। रणनीतिक भंडार में भारत अभी काफी पीछे यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक विभिन्न देशों के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार इस प्रकार थे: चीन: 1,397 मिलियन बैरल अमेरिका: 413 मिलियन बैरल जापान: 263 मिलियन बैरल भारत: केवल 21 मिलियन बैरल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत अभी कई बड़े देशों से काफी पीछे है। क्या इससे पेट्रोल और LPG की कीमतों पर असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार होगा, तो अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान देश को तुरंत महंगा तेल खरीदने की मजबूरी कम होगी। इससे: पेट्रोल और डीजल की सप्लाई स्थिर रह सकती है। LPG की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। आयात बिल और रुपये पर दबाव कम किया जा सकेगा। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि, यह एक दीर्घकालिक योजना है और इसके परिणाम आने में समय लग सकता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Samrat Chaudhary
पटना नहीं, अब पाटलीपुत्र कहिए जनाब, बिहार के सीएम ने कर दिया ऐलान

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना का नाम अब पाटलीपुत्र होगा। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। हालांकि यह नया नाम नहीं है, बल्कि राजधानी पटना को पहले पाटलीपुत्र के नाम से ही जाना जाता था। 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान पाटलीपुत्र से बदलकर पटना किया गया। भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी मुख्यमंत्री ने फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित प्रखंड सहयोग सह जनकल्याण शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बिहार के विकास, कानून-व्यवस्था, उद्योग, किसानों के हित और राजधानी पटना के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 'बड़ा पटना' की अवधारणा पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजधानी का विकास केवल वर्तमान शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके ऐतिहासिक गौरव को भी नई पहचान दी जाएगी। साथ ही नए और आधुनिक टाउनशिप विकसित कर आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों, उद्योग और कानून-व्यवस्था पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अधिक मुआवजा देने के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने बताया कि आपदा, संकट या शादी-विवाह जैसी परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं।  बिहार में अपराधियों के लिए जगह नही कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उद्योगों के विस्तार, नए टाउनशिप और बढ़ते बजट के कारण बिहार तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में राज्य की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Government raises windfall tax on diesel and ATF exports amid West Asia tensions
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और ATF निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स

डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर बढ़ी अतिरिक्त उत्पाद शुल्क दर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) यानी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर लगने वाला शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं ATF निर्यात पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें 16 जून 2026 से लागू हो गई हैं। पेट्रोल निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से निर्यात शुल्क लागू रहेगा। इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल डीजल और विमानन ईंधन की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना चाहती है, जबकि पेट्रोल के मामले में मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है। आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को तत्काल किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना होगा। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विंडफॉल टैक्स व्यवस्था को फिर से लागू किया था। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। सरकार हर पंद्रह दिन में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा कर निर्यात शुल्क में बदलाव करती रही है। 16 मई 2026 को पेट्रोल निर्यात को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया गया था। घरेलू ईंधन आपूर्ति सुरक्षित रखना है लक्ष्य सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तब रिफाइनरी कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इसी वजह से सरकार अतिरिक्त शुल्क लगाकर अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना चाहती है। रिफाइनर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल और ATF निर्यात शुल्क बढ़ने से रिफाइनिंग कंपनियों के निर्यात लाभ में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में सरकार संतुलन बनाते हुए घरेलू जरूरतों और वैश्विक व्यापार दोनों पर नजर बनाए हुए है। आगे क्या होगा? विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा आने वाले दिनों में सरकार की कर नीति को प्रभावित कर सकती है। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो विंडफॉल टैक्स में आगे भी संशोधन देखने को मिल सकता है।  

surbhi जून 16, 2026 0
RBI Governor announcing MPC policy decision amid expectations of unchanged repo rate and stable loan EMIs
RBI MPC Meeting: आज तय होगी आपकी EMI की दिशा, रेपो रेट पर क्या हो सकता है फैसला?

देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन धारकों की नजर आज भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra आज सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति की घोषणा करेंगे, जबकि दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए फैसलों की विस्तृत जानकारी देंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू महंगाई के जोखिमों को देखते हुए RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता। ऐसे में लोन की EMI में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। क्या रेपो रेट 5.25% पर ही रहेगा? अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, RBI इस बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। पिछली MPC बैठक में भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके साथ ही: स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00% पर रह सकती है। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50% पर बरकरार रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। महंगाई को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? हालांकि खुदरा महंगाई दर फिलहाल 3.48 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है, लेकिन कई ऐसे कारक हैं जो आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में संभावित तेजी रुपये में कमजोरी मानसून से जुड़ी अनिश्चितताएं विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए RBI भविष्य की महंगाई को लेकर सतर्क रुख बनाए रख सकता है। अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी है? वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार और घरेलू मांग देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। RBI के पिछले अनुमानों के अनुसार: FY26 में GDP वृद्धि दर 7.6% रहने का अनुमान है। FY27 में GDP ग्रोथ 6.9% रहने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक विकास और महंगाई दोनों को ध्यान में रखते हुए RBI संतुलित नीति अपनाने की कोशिश करेगा। आज किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान निवेशकों और आम लोगों की नजरें सिर्फ रेपो रेट पर ही नहीं, बल्कि RBI के भविष्य के संकेतों पर भी रहेंगी। खास तौर पर इन मुद्दों पर ध्यान रहेगा: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर RBI का दृष्टिकोण रुपये की कमजोरी से निपटने की रणनीति पश्चिम एशिया में तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव महंगाई और विकास दर को लेकर संशोधित अनुमान आने वाले महीनों के लिए केंद्रीय बैंक का रुख EMI पर क्या होगा असर? यदि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाता है, तो अधिकांश फ्लोटिंग रेट लोन की EMI फिलहाल जस की तस रह सकती है। हालांकि बैंकों की आंतरिक नीतियों और फंडिंग लागत के आधार पर कुछ मामलों में मामूली बदलाव संभव हैं। आज की MPC बैठक का फैसला आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi जून 5, 2026 0
South Korea’s stock market surges on AI and semiconductor growth, overtaking India in global rankings
AI बूम का असर: भारत नहीं, दक्षिण कोरिया बना दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार

भारत को पीछे छोड़ दक्षिण कोरिया ने बनाई नई पहचान वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत को एक और झटका लगा है। कुछ दिन पहले ताइवान के भारत से आगे निकलने के बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी भारतीय बाजार को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बनने का दर्जा हासिल कर लिया है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई जबरदस्त तेजी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का शानदार प्रदर्शन माना जा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों ने निवेशकों का भरोसा जीतते हुए बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा दक्षिण कोरिया का बाजार ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में दक्षिण कोरिया की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार का कुल मूल्य घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। दिलचस्प बात यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया की तुलना में दोगुने से भी अधिक आकार की है, लेकिन शेयर बाजार मूल्यांकन के मामले में दक्षिण कोरिया फिलहाल आगे निकल गया है। AI और चिप कंपनियों ने बदली तस्वीर दक्षिण कोरिया की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों का रहा है। दोनों कंपनियां AI डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण इन कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल आया है। इस तेजी ने दक्षिण कोरिया के प्रमुख शेयर सूचकांक Kospi को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ताइवान के बाद दक्षिण कोरिया को भी मिला फायदा AI क्रांति का लाभ केवल दक्षिण कोरिया को ही नहीं मिला है। हाल ही में ताइवान भी भारत को पीछे छोड़कर वैश्विक शेयर बाजार रैंकिंग में आगे निकल गया था। ताइवान की सफलता के पीछे Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) जैसी चिप निर्माण दिग्गज कंपनी का बड़ा योगदान रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि AI से जुड़ी वैश्विक दौड़ में सेमीकंडक्टर उद्योग वाले देशों को सबसे अधिक लाभ मिल रहा है। घरेलू सुधारों ने भी निभाई भूमिका AI सेक्टर की मजबूती के अलावा दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट गवर्नेंस सुधारों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। राष्ट्रपति Lee Jae Myung द्वारा शुरू किए गए सुधारों को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। इससे विदेशी निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिला है। भारत क्यों पिछड़ रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार भारत के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रुपये में कमजोरी बढ़ती तेल कीमतें महंगाई का दबाव कॉर्पोरेट आय वृद्धि में सुस्ती रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 26 अरब डॉलर की निकासी की है। इसके अलावा भारत में अभी ऐसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां अपेक्षाकृत कम हैं जो सीधे AI इंफ्रास्ट्रक्चर या वैश्विक चिप सप्लाई चेन से जुड़ी हों। फिर भी मजबूत है भारत की दीर्घकालिक कहानी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता बरकरार है। भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और घरेलू खपत (Consumption Story) इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। युवाओं की बड़ी आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को फिर मजबूती दे सकते हैं। AI युग में निवेशकों की नई पसंद 2026 में वैश्विक निवेशकों का फोकस उन देशों पर अधिक दिखाई दे रहा है जो AI तकनीक, डेटा सेंटर और चिप निर्माण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान इस ट्रेंड के सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे हैं, जबकि भारत फिलहाल अल्पकालिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि AI और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर भारत भी भविष्य में इस दौड़ में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।  

surbhi जून 2, 2026 0
RBI headquarters building as the central bank reports record gains from foreign exchange operations
RBI के लिए वरदान बनी रुपये की गिरावट! विदेशी मुद्रा कारोबार से हुई ₹1.69 लाख करोड़ की कमाई

भारतीय रुपये में आई कमजोरी और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने आम लोगों और आयातकों की चिंता बढ़ाई, लेकिन यही स्थिति Reserve Bank of India (RBI) के लिए बड़ी कमाई का जरिया बन गई। वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से रिकॉर्ड 1.69 लाख करोड़ रुपये का विनिमय लाभ अर्जित किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 52 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में यह लाभ 1.11 लाख करोड़ रुपये था, जबकि एक साल बाद यह बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रुपये को बचाने के लिए RBI ने बेचे रिकॉर्ड डॉलर पिछले वित्त वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में करीब 9.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रुपये पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI ने बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने स्पॉट मार्केट में रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर की बिक्री की। यह डॉलर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से निकाले गए थे। डॉलर की इस बिक्री से RBI को विनिमय दरों के अंतर के कारण बड़ा लाभ हुआ, जिसने उसकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। कैसे हुई RBI की कमाई? जब केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता है और डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले अधिक होती है, तो उसे विनिमय लाभ (Exchange Gain) प्राप्त होता है। सरल शब्दों में समझें तो: डॉलर महंगा हुआ। RBI ने अपने रिजर्व से डॉलर बेचे। बिक्री से अधिक रुपये प्राप्त हुए। इस अंतर ने RBI की आय बढ़ा दी। इसी वजह से विदेशी मुद्रा लेनदेन से RBI की आय बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ तक पहुंच गई। विदेशी स्रोतों से कुल आय 3.28 लाख करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, निवेश और अन्य विदेशी स्रोतों से RBI की कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में 27 प्रतिशत बढ़कर 3.28 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की विदेशी संपत्तियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड सरप्लस RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर करने का फैसला किया है। यह राशि सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे राजकोषीय प्रबंधन, विकास योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। RBI की बैलेंस शीट भी हुई मजबूत 31 मार्च 2026 तक RBI की कुल बैलेंस शीट का आकार बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.72 लाख करोड़ रुपये अधिक है। परिसंपत्तियों में वृद्धि के प्रमुख कारण: घरेलू निवेश में 44.9% की बढ़ोतरी स्वर्ण भंडार में 63.8% की वृद्धि विदेशी निवेश में 7.9% की बढ़ोतरी RBI की कुल परिसंपत्तियों में: 29.1% घरेलू परिसंपत्तियां 70.9% विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना और विदेशी वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण शामिल हैं कुल आय में भी बड़ी छलांग वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की कुल आय बढ़कर 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 26 प्रतिशत अधिक है। वहीं केंद्रीय बैंक का कुल अधिशेष (Surplus) बढ़कर 2,86,588 करोड़ रुपये हो गया, जो एक वर्ष पहले 2,68,590 करोड़ रुपये था। क्या है इसका अर्थ? रुपये की कमजोरी आम तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती मानी जाती है क्योंकि इससे आयात महंगे हो जाते हैं। लेकिन जब केंद्रीय बैंक के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो वह बाजार में हस्तक्षेप कर मुद्रा को स्थिर रखने के साथ-साथ विनिमय लाभ भी अर्जित कर सकता है। इस बार RBI ने रुपये को संभालने के लिए जो डॉलर बेचे, वही उसके लिए रिकॉर्ड कमाई का कारण बन गए।  

surbhi मई 30, 2026 0
Economist Montek Singh Ahluwalia discussing RBI policy and Indian rupee exchange rate trends
रुपये को कमजोर होने देना सही फैसला था? पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने RBI का किया समर्थन

भारतीय रुपये में हाल के महीनों में आई कमजोरी को लेकर चल रही बहस के बीच वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष Montek Singh Ahluwalia ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि रुपये की विनिमय दर को बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार चलने देना चाहिए और हर हाल में उसे एक निश्चित स्तर पर बनाए रखने की कोशिश उचित नहीं होती। रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव? पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपये पर कई वैश्विक और घरेलू कारणों से दबाव बढ़ा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने भी रुपये को कमजोर किया। ‘रुपये का कमजोर होना लगभग तय था’ मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपये पर दबाव आना स्वाभाविक था। उनके अनुसार, जब बाजार की परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाएं तो विनिमय दर में कुछ गिरावट आने देना आर्थिक रूप से गलत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को विदेशी पूंजी निवेश के जरिए आसानी से संभालता रहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पूंजी प्रवाह की गति धीमी पड़ने से स्थिति बदल गई है। ऐसे में केवल विदेशी मुद्रा भंडार खर्च कर रुपये को बचाने की रणनीति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। कमजोर रुपया निर्यात के लिए फायदेमंद अहलूवालिया ने यह भी कहा कि रुपये में नियंत्रित गिरावट का एक सकारात्मक पहलू भी है। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। जब घरेलू मुद्रा कमजोर होती है तो विदेशों में भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना रहती है। उनका मानना है कि मध्यम अवधि में यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। RBI की रणनीति पर जारी है बहस हाल के समय में कई अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हुई है कि क्या RBI को रुपये की रक्षा के लिए आक्रामक हस्तक्षेप करना चाहिए या फिर बाजार को अपनी दिशा तय करने देनी चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वैश्विक झटकों के दौरान किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखने की कोशिश आर्थिक रूप से महंगी और अस्थिर साबित हो सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियां रुपये के मुद्दे पर बात करते हुए मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कुछ संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि निजी निवेश और निर्यात की धीमी रफ्तार कई वर्षों से चिंता का विषय रही है। उनके मुताबिक भारत को निवेश आकर्षित करने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए और अधिक सुधारों की जरूरत है। साथ ही वैश्विक निवेशकों को स्पष्ट और भरोसेमंद नीति संकेत देने होंगे। व्यापार समझौतों पर जोर अहलूवालिया ने सुझाव दिया कि भारत को एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना चाहिए। उनका मानना है कि वैश्विक व्यापार वृद्धि में एशिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भारत को इसका लाभ उठाने के लिए नए व्यापार समझौतों और आर्थिक साझेदारियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए निवेश संरक्षण से जुड़े ढांचों को मजबूत करना आवश्यक है। आगे क्या रहेगा रुपये की दिशा? हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच रुपये में हल्की रिकवरी देखने को मिली है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रुपये की चाल मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करेगी -  कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें विदेशी निवेश प्रवाह अमेरिकी ब्याज दरें पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति भारत की आर्थिक वृद्धि और निर्यात प्रदर्शन फिलहाल, मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप रुपये को समायोजित होने देना एक व्यावहारिक और संतुलित आर्थिक नीति का हिस्सा है।  

surbhi मई 26, 2026 0
Taiwan stock market surges past India as AI and semiconductor stocks drive growth.
भारत को पीछे छोड़ दुनिया का 5वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बना ताइवान, AI और चिप सेक्टर ने बदली तस्वीर

दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का दर्जा अब भारत के पास नहीं रहा। ताइवान ने बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) के मामले में भारत को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। भारत से आगे निकला ताइवान हालिया आंकड़ों के अनुसार, ताइवान के शेयर बाजार का कुल मूल्य लगभग 4.95 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है, जबकि भारत का बाजार पूंजीकरण 4.92 ट्रिलियन डॉलर के आसपास रह गया। इसके साथ ही ताइवान अब अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है, जबकि ताइवान की जनसंख्या करीब 2.3 करोड़ है। भारत में सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या भी ताइवान की तुलना में कहीं अधिक है। AI बूम बना ताइवान की सबसे बड़ी ताकत ताइवान की इस छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर उद्योग और AI से जुड़ी बढ़ती वैश्विक मांग है। विशेष रूप से Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। TSMC दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माण कंपनी है और AI क्रांति का प्रमुख लाभार्थी मानी जा रही है। कंपनी के बनाए चिप्स का उपयोग NVIDIA, Apple, Advanced Micro Devices और Qualcomm जैसी दिग्गज कंपनियां करती हैं। AI आधारित तकनीकों की मांग बढ़ने के साथ TSMC के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है, जिससे ताइवान के पूरे शेयर बाजार का मूल्य बढ़ गया। भारत के सामने अलग तरह की चुनौतियां जहां ताइवान को AI और चिप सेक्टर का फायदा मिला, वहीं भारत फिलहाल कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, कॉरपोरेट मुनाफे की धीमी वृद्धि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर दबाव ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों की कमी है जो वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर या सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाती हों। इसी वजह से AI थीम पर निवेश करने वाले विदेशी फंड ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विदेशी निवेशकों ने बढ़ाई चिंता भारतीय शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी भी बाजार पूंजीकरण पर असर डाल रही है। निवेशकों की चिंता के प्रमुख कारण हैं: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये में कमजोरी कॉरपोरेट आय में सुस्ती कुछ सेक्टरों में ऊंचा वैल्यूएशन भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव और महंगे होते कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। फिर भी मजबूत बनी हुई है भारत की कहानी विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान का भारत से आगे निकलना भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता पर सवाल नहीं उठाता। भारत में अभी भी लाखों निवेशक हर महीने SIP के जरिए निवेश कर रहे हैं और घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था बैंकिंग, आईटी सेवाओं, विनिर्माण, उपभोक्ता खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों पर आधारित है, जबकि ताइवान का बाजार मुख्य रूप से तकनीक और चिप निर्माण पर केंद्रित है। वैश्विक निवेश का नया ट्रेंड ताइवान की सफलता यह दिखाती है कि फिलहाल दुनिया भर की पूंजी AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यदि भारत भी चिप निर्माण और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी उपस्थिति मजबूत करता है, तो वैश्विक निवेश का बड़ा हिस्सा आकर्षित कर सकता है। फिलहाल ताइवान की बढ़त यह संकेत देती है कि वैश्विक बाजारों में AI आधारित उद्योग सबसे बड़ा निवेश आकर्षण बन चुके हैं।  

surbhi मई 26, 2026 0
Customers checking gold jewellery at an Indian jewellery store after import duty hike announcement
सोना खरीदना अब पड़ेगा महंगा, सरकार ने गोल्ड-चांदी पर इंपोर्ट टैक्स 6% से बढ़ाकर 15% किया

भारत में सोना खरीदना अब आम लोगों के लिए और महंगा हो सकता है। केंद्र सरकार ने 13 मई को बड़ा फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया है। सरकार के इस फैसले का असर आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार और ज्वेलरी इंडस्ट्री पर साफ दिखाई देने की संभावना है। नई दरों के तहत अब आयातित सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया जाएगा। इससे विदेशों से आने वाला सोना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ेगा। सरकार ने क्यों बढ़ाया टैक्स? भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में शामिल है और देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। भारी मात्रा में सोने का आयात होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और चालू खाता घाटा (CAD) भी प्रभावित होता है। सरकार का मानना है कि अगर सोने की खरीद कम होगी तो विदेशों में जाने वाला पैसा बचेगा और रुपये को मजबूती मिल सकती है। हाल के महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी सरकार के लिए चिंता का विषय रही है। ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सरकार गोल्ड इंपोर्ट को नियंत्रित करना चाहती है। ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा असर टैक्स बढ़ने का सबसे बड़ा असर ज्वेलरी की कीमतों पर पड़ेगा। पहले से रिकॉर्ड स्तर पर चल रहे सोने और चांदी के दाम अब और ऊपर जा सकते हैं। शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में खरीदारी करने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची कीमतों के कारण बाजार में मांग कमजोर पड़ सकती है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवार और छोटे खरीदार सोने की खरीद को टाल सकते हैं। क्या फिर बढ़ेगी गोल्ड स्मगलिंग? इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों ने सरकार के इस फैसले पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी से अवैध तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। साल 2024 में जब सरकार ने ड्यूटी घटाई थी, तब गोल्ड स्मगलिंग के मामलों में कमी देखने को मिली थी। लेकिन अब टैक्स बढ़ने से वैध आयात महंगा हो जाएगा, जिससे तस्करों को ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इससे ग्रे मार्केट फिर से सक्रिय होने का खतरा जताया जा रहा है। पीएम मोदी ने भी की थी अपील हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सोने के आयात में देश का बड़ा पैसा विदेश चला जाता है। प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” पर जोर देते हुए लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने की बात कही थी, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों को मजबूती मिल सके। अब आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें ऊंची रहीं, तो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना और कठिन हो सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Stock market traders monitoring falling Sensex and weak Indian rupee amid global economic tensions
Share Market Crash: दो दिन में करीब 2,000 अंक टूटा Sensex, रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर

घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताते हुए लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी है। 24 घंटे में यह उनकी दूसरी ऐसी अपील मानी जा रही है। दो दिन में 2,000 अंक टूटा Sensex मंगलवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 850 अंक तक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 860.48 अंक यानी 1.13% गिरकर 75,154.80 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226.75 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,589.10 पर पहुंच गया। सोमवार को भी सेंसेक्स 1312.91 अंक गिरा था। इस तरह दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक टूट चुका है। रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.2 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? Infosys में सबसे ज्यादा 2.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा: Tech Mahindra Tata Consultancy Services HCL Technologies Asian Paints HDFC Bank Bajaj Finserv Titan Company जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Tata Steel और UltraTech Cement के शेयरों में तेजी रही। निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान लगातार गिरावट के कारण Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 462 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 1.03% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.34% टूट गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में Saudi Aramco की चेतावनी के बाद तेल बाजार में चिंता और बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कुवैत और अन्य देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।  

surbhi मई 12, 2026 0
Indian rupee notes placed beside US dollar bills as rupee falls to record low against the dollar
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें

भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.57 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान टूटकर 95.63 के ऑल टाइम लो तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपये ने निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल में उछाल से बढ़ा दबाव रुपये में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। Saudi Aramco ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार काफी कम हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में OPEC देशों का उत्पादन साल 2000 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण कुवैत और इराक जैसे देश तेल निर्यात में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। ईरान संकट शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ। शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 525 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 में भी 164 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्यों गिर रहा है रुपया? डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली शेयर बाजार में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता आम लोगों पर क्या होगा असर? रुपये में गिरावट का सीधा असर आयात पर पड़ता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान, विदेश यात्रा और आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।  

surbhi मई 12, 2026 0
Aircraft refueling with rising jet fuel prices impacting aviation industry and airfares
Jet Fuel Price Hike: ईरान युद्ध का असर, ATF पहली बार ₹2 लाख के पार, हवाई यात्रा होगी महंगी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran से जुड़े युद्ध हालात का असर अब भारत के एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते विमान ईंधन यानी ATF (एविएशन टरबाइन फ्यूल) की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने के संकेत मिल रहे हैं। 100% से ज्यादा बढ़ी ATF की कीमत सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अप्रैल महीने के लिए ATF की कीमतों में भारी इजाफा किया है। घरेलू उड़ानों के लिए कीमत में करीब 115% की बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 107% तक वृद्धि नई दरों के अनुसार, New Delhi में ATF की कीमत बढ़कर ₹2,07,341.22 प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने ₹96,638.14 थी। यह पहली बार है जब दिल्ली समेत Kolkata और Chennai में ATF ₹2 लाख के पार पहुंचा है। वहीं Mumbai में इसकी कीमत बढ़कर ₹1,94,968.67 हो गई है। इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमत पहली बार 1000 डॉलर प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई है। दिल्ली में यह बढ़कर 1,690.81 डॉलर हो गई पहले यह 816.91 डॉलर थी एयरलाइंस पर बढ़ा दबाव एविएशन इंडस्ट्री में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 40–45% तक होती है। ऐसे में इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत को सीधे प्रभावित किया है। कमजोर होते रुपये (करीब 95 प्रति डॉलर) ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। टिकट हो सकते हैं महंगे विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस इस अतिरिक्त बोझ को यात्रियों पर डाल सकती हैं। हाल ही में IndiGo, Air India और Akasa Air ने फ्यूल सरचार्ज लगाया था, जिसे अब और बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही: फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं यात्रियों की मांग प्रभावित हो सकती है कुछ रूट्स पर उड़ानों की संख्या घट सकती है छोटी एयरलाइंस पर खतरा इस तेज बढ़ोतरी से खासकर छोटी एयरलाइंस पर बड़ा असर पड़ सकता है। लागत बढ़ने से उनके लिए संचालन जारी रखना मुश्किल हो सकता है। सरकार के फैसले का भी असर सरकार ने हाल ही में घरेलू उड़ानों पर किराया सीमा (₹18,000 कैप) हटा दी थी। ऐसे में एयरलाइंस के पास किराए बढ़ाने की पूरी गुंजाइश है, जिसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Stock market screen showing sharp Sensex fall and rupee weakening against dollar amid global tension
ग्लोबल तनाव से बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1500+ अंक लुढ़का, रुपया पहली बार 93.80 के पार

ईरान-अमेरिका तनाव का असर, शेयर बाजार में भारी बिकवाली; निवेशक डॉलर की ओर भागे हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही BSE Sensex करीब 1,556 अंक टूटकर 72,977 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी लगभग 480 अंक फिसलकर 22,634 के स्तर पर आ गया। इसी के साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में आ गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर पहली बार 93.80 के पार पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। निवेशकों में घबराहट, सेफ एसेट की ओर रुख बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, मौजूदा हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों में लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी मनी मार्केट फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट 8 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो इस “सेफ्टी फ्लाइट” को दर्शाता है। 48 घंटे के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने से हालात और बिगड़ गए हैं। इस अल्टीमेटम में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी गई है, जो फिलहाल अपनी सामान्य क्षमता के बेहद कम स्तर पर चल रहा है। ऐसा नहीं होने पर ईरान के पावर ग्रिड पर कार्रवाई की बात कही गई है। कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव वैश्विक तनाव का असर कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखा। Brent Crude करीब 112 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude Oil लगभग 98.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। सप्लाई बाधित होने की आशंका और मांग घटने के डर से कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तनाव के बीच सोना क्यों गिरा? आमतौर पर वैश्विक संकट के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार उलटा रुझान देखने को मिला। सोने की कीमत करीब 2% गिर गई। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक मार्जिन कॉल के दबाव में अपने गोल्ड निवेश बेचकर शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली कमजोर वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखा। जापान का Nikkei 225 4% से ज्यादा गिरा हांगकांग का Hang Seng Index 3% से ज्यादा टूटा दक्षिण कोरिया का KOSPI 6% से अधिक लुढ़का इसके अलावा सिंगापुर और ताइवान के बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी दबाव में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए थे। Dow Jones Industrial Average करीब 1% गिरा S&P 500 में 1.5% की गिरावट Nasdaq Composite लगभग 2% टूटा

surbhi मार्च 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0