ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति के बाद अब क्वाड्रिलियन डॉलर की चर्चा दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति Elon Musk एक बार फिर अपने बड़े और भविष्यवादी विचारों को लेकर सुर्खियों में हैं। दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के बाद अब मस्क ने कहा है कि किसी व्यक्ति का क्वाड्रिलियनेयर बनना भी असंभव नहीं है। हालांकि इसके लिए मानव सभ्यता को पृथ्वी से आगे बढ़कर चंद्रमा और मंगल ग्रह पर औद्योगिक विस्तार करना होगा। मस्क की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ रही है। आखिर कितनी होती है क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति? मस्क की मौजूदा अनुमानित संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है। लेकिन क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति का मतलब है 1,000 ट्रिलियन डॉलर यानी 1,000,000,000,000,000 डॉलर। तुलना करें तो वर्ष 2026 में पूरी दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था (Global GDP) लगभग 120 ट्रिलियन डॉलर के आसपास मानी जाती है। ऐसे में एक क्वाड्रिलियनेयर की संपत्ति दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन से कई गुना अधिक होगी। जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि मस्क को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अभी करीब 998.9 ट्रिलियन डॉलर और चाहिए, तो उन्होंने जवाब दिया, "Not impossible." चांद और मंगल पर फैक्ट्रियां होंगी तो बनेगा नया आर्थिक युग मस्क ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संपत्ति हासिल करने का रास्ता पृथ्वी पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में है। उन्होंने कहा कि इसके लिए चंद्रमा और मंगल ग्रह पर फैक्ट्रियों की जरूरत होगी। मस्क लंबे समय से मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की वकालत करते रहे हैं। उनकी कंपनी SpaceX का प्रमुख लक्ष्य भी भविष्य में बड़े पैमाने पर इंसानों और सामान को मंगल तक पहुंचाना है। मस्क का मानना है कि यदि मंगल और चंद्रमा पर औद्योगिक उत्पादन शुरू होता है, तो अंतरग्रहीय व्यापार (Interplanetary Commerce) की शुरुआत होगी, जिससे मानव इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक क्रांति देखने को मिल सकती है। भविष्य में डॉलर नहीं, ‘द्रव्यमान और ऊर्जा’ होगी असली मुद्रा! मस्क ने भविष्य को लेकर एक और दिलचस्प दावा किया। उनका कहना है कि जब यह सब संभव होगा, तब शायद डॉलर जैसी पारंपरिक मुद्रा का अस्तित्व ही न रहे। उनके मुताबिक, भविष्य की अर्थव्यवस्था में "Mass and Energy" यानी द्रव्यमान और ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स दुनिया को इतना बदल देंगे कि पैसों की मौजूदा अवधारणा अप्रासंगिक हो सकती है। AI और रोबोट बदल देंगे पूरी अर्थव्यवस्था मस्क पहले भी कई बार कह चुके हैं कि आने वाले दशकों में AI और रोबोट अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करेंगे। इससे उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और कई क्षेत्रों में मानव श्रम की आवश्यकता घट सकती है। उनका मानना है कि जब मशीनें लगभग हर काम इंसानों से बेहतर और सस्ते तरीके से करने लगेंगी, तब वेतन, रोजगार और धन जैसी पारंपरिक आर्थिक अवधारणाओं में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। आखिर एलन मस्क की संपत्ति कहां से आती है? दक्षिण अफ्रीका में जन्मे एलन मस्क की संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा उनकी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX से जुड़ा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Tesla, न्यूरोटेक कंपनी Neuralink और The Boring Company में उनकी हिस्सेदारी भी उनकी संपत्ति का बड़ा स्रोत है। वर्ष 2022 में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) का अधिग्रहण भी किया था, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बना दिया। क्या सचमुच संभव है क्वाड्रिलियनेयर बनना? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति का क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति तक पहुंचना बेहद कठिन है। लेकिन यदि अंतरिक्ष उद्योग, AI और स्वचालित उत्पादन भविष्य में मस्क की कल्पना के अनुसार विकसित होते हैं, तो आज असंभव लगने वाले आर्थिक आंकड़े भी वास्तविकता बन सकते हैं।
स्पेसएक्स IPO के बाद एलन मस्क की संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेक उद्यमी Elon Musk ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के बहुचर्चित आईपीओ (IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की ओर बढ़ गए हैं। हालांकि अपनी रिकॉर्ड संपत्ति को लेकर चर्चा के बीच मस्क का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पैसे की मौजूदा अहमियत खत्म हो जाएगी। AI और रोबोट बदल देंगे दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 एबंडेंस समिट के दौरान बातचीत में मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत रोबोटिक्स मानव समाज को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन इतना अधिक होगा कि पारंपरिक आर्थिक मॉडल बदल जाएंगे। मस्क के अनुसार, AI आधारित मशीनें इतनी बड़ी मात्रा में काम कर सकेंगी कि इंसानों के लिए पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को केवल न्यूनतम आय नहीं, बल्कि "यूनिवर्सल हाई इनकम" (UHI) जैसी व्यवस्था मिल सकती है। “पैसे की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी” बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि भविष्य में पैसे का महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। उनका मानना है कि जब AI और रोबोट लगभग हर वस्तु और सेवा को सस्ती और आसानी से उपलब्ध करा देंगे, तब लोगों की जीवनशैली बेहतर होगी और आर्थिक संसाधनों का वितरण अलग तरीके से होगा। मस्क के इस बयान पर मंच पर मौजूद उद्यमी Peter Diamandis ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि जैसे ही आप ट्रिलियनेयर बन रहे हैं, उसी समय पैसा कम महत्वपूर्ण हो रहा है? इस पर मस्क ने हंसते हुए जवाब दिया, "हां, लगभग ऐसा ही है।" यूनिवर्सल हाई इनकम क्या है? मस्क ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) से आगे बढ़कर यूनिवर्सल हाई इनकम (UHI) की अवधारणा पेश की। उनका कहना है कि AI के कारण उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और लोगों को केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करने के बजाय उच्च जीवन स्तर का लाभ मिल सकेगा। इस मॉडल में स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती हैं। भविष्य में सबसे मूल्यवान क्या होगा? मस्क के अनुसार भविष्य की अर्थव्यवस्था में केवल मुद्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा और भौतिक संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI सिस्टम डॉलर या अन्य मुद्राओं की परवाह नहीं करेंगे। उनके लिए असली महत्व बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, फैक्ट्रियों और कच्चे माल जैसे संसाधनों का होगा। सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में आर्थिक ताकत का निर्धारण बैंक बैलेंस से ज्यादा ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी क्षमता और संसाधनों पर नियंत्रण से हो सकता है। विशेषज्ञों के बीच बहस तेज मस्क के इस दृष्टिकोण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी प्रगति की स्वाभाविक दिशा मानते हैं, जबकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूरी तरह से "पैसारहित" अर्थव्यवस्था की कल्पना अभी काफी दूर की बात है। फिलहाल इतना तय है कि AI और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव ने भविष्य की नौकरियों, आय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
दुनिया के सबसे अमीर उद्यमियों में शामिल Elon Musk ने भारत की घटती प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भारत की जन्म दर अब उस स्तर से नीचे पहुंच चुकी है, जो किसी देश की आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है। मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत की जनसंख्या संरचना और भविष्य की जनसांख्यिकीय चुनौतियों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो रही है। सोशल मीडिया पोस्ट पर मस्क की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत की प्रजनन दर से जुड़े आंकड़े साझा किए गए थे, जिनमें बताया गया कि आने वाले दशकों में देश की जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए एलन मस्क ने लिखा कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के सबसे अधिक शिक्षित वर्गों में यह गिरावट कई वर्ष पहले ही देखने को मिल चुकी थी। क्या होता है रिप्लेसमेंट लेवल? जनसंख्या विज्ञान के अनुसार किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रति महिला औसतन 2.1 बच्चों की प्रजनन दर आवश्यक मानी जाती है। इसे ही रिप्लेसमेंट लेवल कहा जाता है। हालिया अनुमानों के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) लगभग 1.9 बच्चे प्रति महिला रह गई है। कुछ बड़े शहरी क्षेत्रों में यह दर और भी कम है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में फर्टिलिटी रेट करीब 1.2 तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भविष्य में जनसंख्या वृद्धि धीमी हो सकती है और बाद के वर्षों में आबादी घटने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। क्यों घट रही है भारत की जन्म दर? विशेषज्ञों के अनुसार भारत में फर्टिलिटी रेट में गिरावट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक बदलाव जिम्मेदार हैं। इनमें शामिल हैं— महिलाओं की शिक्षा में बढ़ोतरी शहरीकरण की तेज रफ्तार महिलाओं की कार्यक्षेत्र में बढ़ती भागीदारी देर से विवाह की प्रवृत्ति बच्चों की परवरिश और शिक्षा की बढ़ती लागत करियर को प्राथमिकता देने वाला जीवन दृष्टिकोण महानगरों में आवास और जीवन-यापन का बढ़ता खर्च इन कारणों से युवा दंपत्ति पहले की तुलना में छोटे परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्या तुरंत घटने लगेगी भारत की आबादी? विशेषज्ञों का कहना है कि फर्टिलिटी रेट के रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे जाने का मतलब यह नहीं है कि भारत की आबादी तुरंत कम होने लगेगी। भारत की आबादी अभी भी अपेक्षाकृत युवा है और बड़ी संख्या में लोग प्रजनन आयु वर्ग में हैं। इसी कारण अगले कई दशकों तक कुल जनसंख्या बढ़ती रह सकती है। जनसंख्या वृद्धि की गति धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। भविष्य में सामने आ सकती हैं ये चुनौतियां यदि जन्म दर लगातार कम बनी रहती है तो भारत को भविष्य में कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है— बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ना कार्यशील आयु वर्ग की संख्या में कमी श्रमबल की संभावित कमी स्वास्थ्य और पेंशन पर सरकारी खर्च में वृद्धि सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव ऐसी चुनौतियां पहले से ही Japan, South Korea और कई यूरोपीय देशों में देखी जा रही हैं। भारत के लिए आगे की राह जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अभी भी "जनसांख्यिकीय लाभांश" (Demographic Dividend) के दौर में है, क्योंकि देश के पास बड़ी युवा आबादी मौजूद है। लेकिन आने वाले वर्षों में बदलती जनसंख्या संरचना को ध्यान में रखते हुए रोजगार, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीतियों में बदलाव करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बड़ी आबादी होना आर्थिक शक्ति की गारंटी नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि देश अपनी युवा आबादी को उत्पादक कार्यबल में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाता है और भविष्य में वृद्ध होती आबादी की जरूरतों को कैसे पूरा करता है।
पाकिस्तान के चर्चित मोटरवे गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए दो आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। वर्ष 2020 में हुई इस घटना ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर दिया था और देशभर में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। रात के सफर के दौरान बच्चों के सामने हुई थी दरिंदगी 9 सितंबर 2020 को फ्रांसीसी-पाकिस्तानी मूल की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे से गुजर रही थी। देर रात कार का ईंधन खत्म होने के कारण परिवार सड़क किनारे फंस गया। इसी दौरान दो हमलावर वहां पहुंचे, कार का शीशा तोड़ा और महिला को जबरन बाहर खींच लिया। आरोपियों ने बच्चों के सामने हथियार के बल पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उन्होंने नकदी, गहने और बैंक कार्ड लूटकर मौके से फरार हो गए। डीएनए और मोबाइल डेटा बने गिरफ्तारी की सबसे बड़ी कड़ी घटना के बाद पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की। मोबाइल फोन लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से मिले डीएनए नमूनों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। जांच के दौरान पीड़िता ने भी दोनों आरोपियों की पहचान की थी। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी शफकत अली ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना अपराध स्वीकार करने वाला बयान भी दिया था। 2021 में सुनाई गई थी मौत की सजा मामले की सुनवाई के बाद मार्च 2021 में आतंकवाद निरोधक अदालत ने आबिद अली और शफकत अली को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, डकैती और आतंकवाद से जुड़े अपराधों में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें अन्य मामलों में भी लंबी जेल की सजा दी गई थी। पुलिस अधिकारी के बयान ने भी खड़ा किया था विवाद घटना के बाद उस समय के लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख का बयान भी विवादों में आ गया था। उन्होंने महिला के रात में यात्रा करने और दूसरा रास्ता न चुनने को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान की देशभर में आलोचना हुई और इसे पीड़िता को दोषी ठहराने की कोशिश बताया गया। बचाव पक्ष की दलीलें अदालत ने नहीं मानीं हाई कोर्ट में अपील करते हुए दोषियों के वकीलों ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभास हैं और प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि डीएनए रिपोर्ट, डिजिटल सबूत और गवाहियों के आधार पर आरोप पूरी तरह साबित होते हैं। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मस्क की प्रतिक्रिया चर्चा में लाहौर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद अमेरिकी उद्योगपति Elon Musk ने सोशल मीडिया पर इसकी सराहना की। उन्होंने एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान को बधाई दी और कहा कि पश्चिमी देशों में भी ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। फैसले ने फिर छेड़ी सख्त सजा बनाम सुधार की बहस इस फैसले के बाद एक बार फिर अपराधियों को कठोर दंड देने और सुधारात्मक न्याय की अवधारणा पर बहस तेज हो गई है। जहां पाकिस्तान में अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी, वहीं कई पश्चिमी देशों में मृत्युदंड समाप्त किया जा चुका है और वहां अपराधियों के पुनर्वास पर अधिक जोर दिया जाता है।
अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन को बड़ा झटका लगा है। कंपनी के न्यू ग्लेन रॉकेट में टेस्टिंग के दौरान लॉन्चपैड पर विस्फोट हो गया। हादसे का वीडियो सामने आने के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। फुटेज में देखा जा सकता है कि धमाके के बाद रॉकेट आग के बड़े गोले में तब्दील हो गया। फ्लोरिडा के लॉन्चपैड पर हुआ हादसा ब्लू ओरिजिन के मुताबिक, यह हादसा अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेरल लॉन्च कॉम्प्लेक्स में गुरुवार रात करीब 9 बजे हुआ। कंपनी न्यू ग्लेन रॉकेट का “हॉटफायर टेस्ट” कर रही थी, तभी तकनीकी गड़बड़ी के कारण विस्फोट हो गया। यह टेस्ट आने वाले अंतरिक्ष मिशन की तैयारी के तहत किया जा रहा था। क्या होता है हॉटफायर टेस्ट? हॉटफायर टेस्ट किसी भी रॉकेट लॉन्च से पहले की बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इस दौरान रॉकेट को लॉन्चपैड पर क्लैम्प्स की मदद से मजबूती से बांध दिया जाता है और उसके इंजनों को पूरी क्षमता से चालू करके उनकी कार्यक्षमता जांची जाती है। इस परीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि लॉन्च के दौरान इंजन सही तरीके से काम करें। जेफ बेजोस बोले- “फिर से बनाएंगे और उड़ान भरेंगे” हादसे के बाद ब्लू ओरिजिन के संस्थापक जेफ बेजोस ने बयान जारी करते हुए कहा कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा, “आज का दिन बेहद कठिन रहा। हम हादसे की वजह का पता लगाने में जुटे हैं। जिस भी चीज को दोबारा बनाने की जरूरत होगी, हम उसे फिर बनाएंगे और उड़ान पर वापस लौटेंगे।” अमेरिकी स्पेस फोर्स और अधिकारी जांच में जुटे ब्रेवार्ड काउंटी इमरजेंसी मैनेजमेंट ने कहा कि लॉन्चपैड पर हुए विस्फोट से आम जनता को कोई खतरा नहीं है। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने जानकारी दी कि इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं और अब अधिकारी उपलब्ध डेटा की जांच कर हादसे के सटीक कारण का पता लगाने में जुटे हैं। स्पेस फोर्स ब्लू ओरिजिन के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही है। नासा ने कहा- स्पेसफ्लाइट आसान नहीं नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड इसाकमैन ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “स्पेसफ्लाइट किसी को माफ नहीं करती। हैवी-लिफ्ट लॉन्च क्षमता विकसित करना बेहद कठिन काम है।” उन्होंने कहा कि नासा इस घटना की पूरी जांच का समर्थन करेगा और भविष्य के मिशनों पर इसके प्रभावों का आकलन करेगा। पिछले महीने भी सामने आई थी तकनीकी समस्या ब्लू ओरिजिन के लिए हाल के महीनों में यह दूसरी बड़ी समस्या है। पिछले महीने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एक असफल सैटेलाइट लॉन्चिंग से जुड़े मामले में जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद न्यू ग्लेन रॉकेट को अस्थायी रूप से ग्राउंडेड किया गया था। नवंबर में मिली थी बड़ी सफलता हालांकि पिछले साल नवंबर में ब्लू ओरिजिन ने न्यू ग्लेन रॉकेट की सफल लॉन्चिंग कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उस मिशन के दौरान कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर की सफल लैंडिंग भी कराई थी। ब्लू ओरिजिन ने लगभग 10 साल और अरबों डॉलर खर्च करके न्यू ग्लेन रॉकेट को विकसित किया है। 29 मंजिला इमारत जितना बड़ा है न्यू ग्लेन न्यू ग्लेन रॉकेट करीब 29 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है। इसका पहला चरण दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी यह रीयूजेबल रॉकेट तकनीक पर आधारित है। इसे खास तौर पर इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के फॉल्कन रॉकेट्स और स्टारशिप को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। स्टारलिंक को टक्कर देने की तैयारी थी दिलचस्प बात यह है कि हादसे से ठीक एक दिन पहले ब्लू ओरिजिन ने घोषणा की थी कि वह न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए अमेजन के 48 लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। अमेजन इन सैटेलाइट्स की मदद से वैश्विक ब्रॉडबैंड इंटरनेट नेटवर्क तैयार करना चाहता है, जो सीधे तौर पर इलॉन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क को चुनौती देगा। इलॉन मस्क ने जताई प्रतिक्रिया रॉकेट विस्फोट का वीडियो सामने आने के बाद स्पेसएक्स के प्रमुख इलॉन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट्स बनाना और उनका संचालन करना वाकई बेहद कठिन काम है।” अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा ब्लू ओरिजिन के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन निजी अंतरिक्ष उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनी जल्द वापसी की कोशिश करेगी। अमेजन, स्पेसएक्स और अन्य निजी कंपनियों के बीच सैटेलाइट इंटरनेट और अंतरिक्ष तकनीक को लेकर मुकाबला लगातार तेज होता जा रहा है।
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट माने जाने वाले स्टारशिप के नए और अपग्रेडेड वर्जन Starship V3 का पहला टेस्ट लॉन्च सफलता और चुनौतियों का मिला-जुला उदाहरण बन गया। अमेरिकी कंपनी SpaceX ने भारतीय समयानुसार 23 मई की सुबह टेक्सास स्थित स्टारबेस लॉन्च साइट से इसका 12वां टेस्ट लॉन्च किया। लॉन्च के दौरान रॉकेट के एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे मिशन पर खतरा मंडराने लगा। इसके बावजूद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट लगभग एक घंटे की उड़ान के बाद हिंद महासागर में सफलतापूर्वक लैंड करने में कामयाब रहा। यह पहली बार था जब SpaceX ने अपने न्यू जनरेशन Starship V3 सिस्टम का इस्तेमाल किया। 403 फीट ऊंचा है स्टारशिप सिस्टम स्टारशिप सिस्टम दो हिस्सों से मिलकर बना है - ऊपरी हिस्सा Starship spacecraft और निचला हिस्सा Super Heavy Booster। दोनों को मिलाकर कुल ऊंचाई करीब 403 फीट है। इसे पूरी तरह reusable बनाया गया है, ताकि भविष्य में एक ही रॉकेट को कई बार इस्तेमाल किया जा सके। बूस्टर की कंट्रोल्ड लैंडिंग नहीं हो पाई लॉन्च के बाद Super Heavy Booster ने अपना “boost back burn” पूरी तरह पूरा नहीं किया। यह वही प्रक्रिया होती है जिसके जरिए बूस्टर वापस पृथ्वी पर नियंत्रित तरीके से उतरता है। तकनीकी गड़बड़ी के कारण बूस्टर समुद्र में पूरी तरह नियंत्रित तरीके से लैंड नहीं कर सका। छह में से सिर्फ पांच इंजन चालू हुए स्टेज सेपरेशन के बाद Starship spacecraft के छह इंजनों में से केवल पांच ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट नहीं होने के कारण रॉकेट तय ऑर्बिटल पाथ तक नहीं पहुंच सका। हालांकि इसकी उड़ान “suborbital trajectory” के भीतर बनी रही, जिससे मिशन पूरी तरह विफल होने से बच गया। इंजन फेल होने की वजह से अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का परीक्षण भी नहीं हो सका। इसके बावजूद टीम ने स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से हिंद महासागर में उतार लिया। क्या था इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य इस मिशन का लक्ष्य था: Starship V3 को सफलतापूर्वक लॉन्च करना Super Heavy Booster और Starship का सफल separation अंतरिक्ष में इंजन दोबारा चालू करने का परीक्षण स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतारना SpaceX का कहना है कि इस टेस्ट से मिले डेटा का इस्तेमाल भविष्य के मिशनों और मंगल अभियान की तैयारी में किया जाएगा। पिछले टेस्टों में क्या हुआ था 11वां टेस्ट: पहली बार 8 डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े गए 14 अक्टूबर 2025 को हुए इस मिशन में पहली बार Starship ने आठ Starlink simulator satellites अंतरिक्ष में छोड़े। Super Heavy Booster की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग हुई, जबकि Starship हिंद महासागर में उतरा। मिशन करीब 1 घंटे 6 मिनट तक चला। 10वां टेस्ट: सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट और इंजन टेस्ट सफल 27 अगस्त 2025 को हुए टेस्ट में Starship ने सफलतापूर्वक Starlink simulator satellites deploy किए। इस मिशन में इंजन रीस्टार्ट और स्पेसक्राफ्ट कंट्रोल सिस्टम के कई अहम परीक्षण पूरे हुए। 29 जून 2025: स्टैटिक फायर टेस्ट में ब्लास्ट 10वें टेस्ट से पहले 29 जून 2025 को स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान Starship में जोरदार विस्फोट हो गया था। टेस्ट के दौरान रॉकेट को जमीन पर खड़ा रखकर इंजन चालू किए गए थे, तभी ऊपरी हिस्से में धमाका हो गया और पूरा सिस्टम आग की लपटों में घिर गया। 9वां टेस्ट: स्पेसक्राफ्ट ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए नौवें लॉन्च के लगभग 30 मिनट बाद Starship ने कंट्रोल खो दिया था। पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश करते समय स्पेसक्राफ्ट नष्ट हो गया, हालांकि बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। 8वां टेस्ट: हवा में ही ब्लास्ट हुई Starship 7 मार्च 2025 को हुए इस मिशन में Super Heavy Booster सफलतापूर्वक लॉन्च पैड पर लौट आया था। लेकिन Starship के छह इंजनों में से चार बंद हो गए, जिससे स्पेसक्राफ्ट असंतुलित हो गया। बाद में ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने इसे हवा में ही नष्ट कर दिया। 7वां टेस्ट: ऑक्सीजन लीक से हुआ विस्फोट 17 जनवरी 2025 को Starship का सातवां टेस्ट हुआ। बूस्टर सफलतापूर्वक लॉन्च पैड पर वापस आ गया, लेकिन ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन लीक के कारण स्पेसक्राफ्ट हवा में ही फट गया। 6वां टेस्ट: लॉन्च पैड पर कैचिंग रद्द करनी पड़ी 20 नवंबर 2024 को हुए इस टेस्ट को देखने के लिए Donald Trump भी स्टारबेस पहुंचे थे। मिशन के दौरान सभी पैरामीटर सही न मिलने पर बूस्टर को लॉन्च पैड पर कैच करने की बजाय समुद्र में उतारा गया। वहीं Starship ने अंतरिक्ष में इंजन रीस्टार्ट टेस्ट पूरा किया। 5वां टेस्ट: पहली बार लॉन्च पैड पर बूस्टर कैच 13 अक्टूबर 2024 को SpaceX ने इतिहास रच दिया। पहली बार Super Heavy Booster को “Mechazilla” नाम की विशाल मैकेनिकल आर्म्स ने लॉन्च पैड पर पकड़ लिया। Starship ने पृथ्वी के वातावरण में री-एंट्री कर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग की। 4वां टेस्ट: री-एंट्री टेस्ट सफल रहा 6 जून 2024 को हुए चौथे टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि Starship पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान सुरक्षित रह सकता है या नहीं। कई हीट टाइल्स के नुकसान के बावजूद स्पेसक्राफ्ट ने समुद्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। 3वां टेस्ट: री-एंट्री के दौरान संपर्क टूटा 14 मार्च 2024 को हुए तीसरे टेस्ट में Starship ने पहली बार payload door खोलने और बंद करने का परीक्षण किया। इसके अलावा तरल ऑक्सीजन ट्रांसफर सिस्टम भी टेस्ट किया गया। हालांकि री-एंट्री के दौरान पृथ्वी से संपर्क टूट गया। 2वां टेस्ट: स्टेज सेपरेशन सफल, लेकिन दोनों हिस्से नष्ट 18 नवंबर 2023 को हुए दूसरे टेस्ट में पहली बार “hot staging” तकनीक का इस्तेमाल किया गया। Super Heavy Booster और Starship सफलतापूर्वक अलग हुए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद दोनों में तकनीकी खराबी आ गई और उन्हें नष्ट करना पड़ा। पहला टेस्ट: लॉन्च के 4 मिनट बाद विस्फोट 20 अप्रैल 2023 को Starship का पहला ऑर्बिटल टेस्ट लॉन्च किया गया था। उड़ान के करीब चार मिनट बाद रॉकेट में विस्फोट हो गया था। हालांकि Elon Musk ने इसे भी बड़ी सीख बताया था, क्योंकि पहली बार इतना विशाल रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च पैड से उड़ान भरने में कामयाब रहा था। मंगल मिशन के लिए अहम है Starship Elon Musk लंबे समय से Starship को मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने वाले मिशन का आधार बताते रहे हैं। NASA भी अपने Artemis Moon Mission के लिए Starship के एक modified version का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही Starship V3 का यह टेस्ट पूरी तरह सफल नहीं रहा, लेकिन इंजन फेल होने के बावजूद सुरक्षित लैंडिंग SpaceX के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जाएगी।
SpaceX एक बार फिर दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट सिस्टम Starship की नई टेस्ट फ्लाइट के लिए तैयार है। कंपनी 21 मई 2026 को Starship की 12वीं इंटीग्रेटेड टेस्ट फ्लाइट लॉन्च करने जा रही है। यह लॉन्च टेक्सास स्थित Starbase फैसिलिटी से किया जाएगा। यह मिशन सिर्फ SpaceX के लिए ही नहीं, बल्कि NASA और पूरी स्पेस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। Starship को भविष्य में इंसानों को चांद और मंगल तक पहुंचाने के सबसे बड़े माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। Starship V3 में क्या है नया? SpaceX इस बार Starship के अपग्रेडेड V3 कॉन्फिगरेशन को टेस्ट कर सकता है। कंपनी के मुताबिक इस नए वर्जन में इंजन सिस्टम, स्ट्रक्चर और हीट प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया गया है। करीब 120 मीटर ऊंचे इस विशाल रॉकेट सिस्टम में दो हिस्से शामिल हैं: Super Heavy Booster Starship Upper Stage इसमें इस्तेमाल होने वाले Raptor इंजन लिक्विड मीथेन और लिक्विड ऑक्सीजन पर आधारित हैं। यही इंजन भविष्य के Moon और Mars मिशनों की रीढ़ माने जा रहे हैं। इस टेस्ट फ्लाइट में क्या होगा खास? यह लॉन्च किसी सैटेलाइट मिशन के लिए नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की क्षमता जांचने के लिए किया जा रहा है। इंजीनियर्स लॉन्च के दौरान कई अहम स्टेज पर नजर रखेंगे, जिनमें शामिल हैं: रॉकेट टेकऑफ स्टेज सेपरेशन बूस्टर की वापसी कंट्रोल्ड डिसेंट री-एंट्री सिस्टम इस बार सबसे ज्यादा फोकस Super Heavy Booster की सुरक्षित वापसी पर रहेगा। SpaceX भविष्य में लॉन्च टावर के मैकेनिकल आर्म्स की मदद से हवा में ही बूस्टर पकड़ने की तकनीक विकसित कर रहा है। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो स्पेस मिशनों की लागत में भारी कमी आ सकती है। वहीं Starship Upper Stage की री-एंट्री भी मिशन का बड़ा हिस्सा होगी। इसमें लगे हजारों सिरेमिक टाइल्स वाले हीट शील्ड को बेहद उच्च तापमान में टेस्ट किया जाएगा। NASA के Artemis मिशन के लिए क्यों अहम है Starship? Starship सिर्फ SpaceX का प्रोजेक्ट नहीं है। NASA ने इसे अपने Artemis Program के Human Landing System के तौर पर चुना है। इसी सिस्टम के जरिए भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाया जाएगा। अगर Starship पूरी तरह सफल होता है, तो इससे Moon Base बनाने और मंगल मिशन की दिशा में बड़ी प्रगति मानी जाएगी। SpaceX का ‘Test, Fail, Fix, Repeat’ मॉडल SpaceX पारंपरिक स्पेस कंपनियों से अलग रणनीति अपनाता है। कंपनी लगातार टेस्टिंग कर हर गलती से सीखते हुए सिस्टम को बेहतर बनाती है। इसी वजह से Starship प्रोग्राम बेहद तेजी से विकसित हुआ है। हर लॉन्च से मिलने वाला डेटा इंजन परफॉर्मेंस, फ्लाइट स्टेबिलिटी, हीट कंट्रोल और लैंडिंग सिस्टम को बेहतर बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। पूरी दुनिया की नजर इस मिशन पर क्यों? अगर यह टेस्ट फ्लाइट सफल रहती है, तो SpaceX पूरी तरह रीयूजेबल रॉकेट सिस्टम के बेहद करीब पहुंच जाएगा। इससे भविष्य में: स्पेस मिशन सस्ते हो सकते हैं मंगल यात्रा आसान हो सकती है बड़े सैटेलाइट लॉन्च संभव होंगे हाई-स्पीड अर्थ ट्रैवल टेक्नोलॉजी विकसित हो सकती है इसी वजह से Starship की यह टेस्ट फ्लाइट सिर्फ एक लॉन्च नहीं, बल्कि भविष्य की स्पेस टेक्नोलॉजी की दिशा तय करने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है।
बीजिंग में शुरू हुई हाई-प्रोफाइल शिखर वार्ता Donald Trump और Xi Jinping के बीच गुरुवार को बीजिंग में दो दिवसीय अहम बैठक शुरू हुई। इस वार्ता में व्यापार समझौते, ईरान युद्ध और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ट्रंप ने इस बैठक को “अब तक की सबसे बड़ी समिट” बताया और शी जिनपिंग को महान नेता और अपना मित्र कहा। भव्य स्वागत के साथ हुई मुलाकात बैठक की शुरुआत बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई, जहां ट्रंप का भव्य स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने रेड कार्पेट पर हाथ मिलाया और गर्मजोशी से बातचीत की। चीनी सैनिकों की परेड और बच्चों द्वारा अमेरिकी-चीनी झंडे लहराने के बीच यह मुलाकात दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रही। व्यापार समझौता सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच पिछले कई महीनों से जारी व्यापार तनाव इस बैठक का सबसे अहम मुद्दा माना जा रहा है। पिछले साल दोनों देशों के बीच एक अस्थायी व्यापार समझौता हुआ था, जिसके तहत अमेरिका ने चीन पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला टाल दिया था। अब अमेरिका चाहता है कि चीन अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए ज्यादा खोले। ट्रंप के साथ इस दौरे पर कई बड़े कारोबारी भी पहुंचे हैं, जिनमें Elon Musk और Jensen Huang शामिल हैं। ईरान युद्ध पर भी चर्चा बैठक में मध्य पूर्व का तनाव भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव डाले ताकि युद्ध और तनाव कम किया जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ईरान के खिलाफ खुलकर कदम उठाने से बच सकता है, क्योंकि तेहरान को वह अमेरिका के खिलाफ रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है। ताइवान पर बढ़ सकता है तनाव Taiwan को अमेरिकी हथियारों की बिक्री भी बैठक में संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। चीन ने हाल ही में अमेरिका के प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के रक्षा पैकेज का विरोध किया है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। ट्रंप पर घरेलू दबाव इस यात्रा को ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। मध्य पूर्व युद्ध और बढ़ती महंगाई के कारण उनकी लोकप्रियता प्रभावित हुई है। ऐसे में चीन दौरे को उनकी बड़ी कूटनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन विशेषज्ञों का कहना है कि 2017 की तुलना में अब अमेरिका-चीन संबंधों का समीकरण काफी बदल चुका है। पहले जहां चीन अमेरिका को प्रभावित करने की कोशिश करता था, अब अमेरिका खुद चीन की वैश्विक ताकत को खुलकर स्वीकार करता दिख रहा है। दोनों नेताओं के बीच आने वाले दिनों में कई दौर की बातचीत और औपचारिक कार्यक्रम होने हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के आगामी चीन दौरे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है, वह है Elon Musk की मौजूदगी। कुछ महीने पहले तक दोनों के बीच तीखी बयानबाजी चल रही थी, लेकिन अब मस्क का ट्रंप के साथ चीन जाने वाले हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन में शामिल होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि दोनों के रिश्तों में बर्फ पिघल चुकी है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के साथ चीन जाने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में Tim Cook, Larry Fink समेत कुल 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी शामिल होंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी, चिप्स और व्यापार को लेकर तनाव चरम पर है। क्यों अहम है एलन मस्क की मौजूदगी? Tesla का चीन में बड़ा कारोबार है। शंघाई स्थित टेस्ला की गीगाफैक्ट्री कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण फैक्ट्रियों में गिनी जाती है। ऐसे में मस्क की मौजूदगी सिर्फ कारोबारी नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप चीन को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका की सबसे ताकतवर टेक कंपनियां और उद्योगपति उनके साथ खड़े हैं। वहीं मस्क के लिए भी चीन के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना बेहद जरूरी है। ट्रंप क्या संदेश देना चाहते हैं? इस डेलिगेशन में कई बड़े अमेरिकी कॉर्पोरेट चेहरे शामिल हैं, जिनमें: Dina Powell McCormick Kelly Ortberg Ryan McInerney David Solomon जैसे नाम शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि Jensen Huang का नाम इस सूची में नहीं है, जबकि उन्होंने इस यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसे अमेरिका-चीन चिप युद्ध के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। माइक्रोन CEO को साथ ले जाने का क्या मतलब? Sanjay Mehrotra की मौजूदगी खास मानी जा रही है। चीन ने 2023 में Micron Technology के कुछ चिप्स पर सुरक्षा कारणों का हवाला देकर प्रतिबंध लगाया था। अब ट्रंप का उन्हें अपने साथ ले जाना बीजिंग के लिए एक राजनीतिक और आर्थिक संदेश माना जा रहा है कि अमेरिका अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा करेगा। ट्रंप और मस्क में विवाद क्यों हुआ था? 2025 में ट्रंप के टैक्स और सरकारी खर्च से जुड़े एक बड़े बिल को लेकर मस्क और ट्रंप आमने-सामने आ गए थे। मस्क ने उस बिल को “जनता के पैसे की बर्बादी” बताया था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई तीखी पोस्ट की थीं। विवाद इतना बढ़ गया था कि मस्क ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की मांग तक कर दी थी। बाद में मस्क ने माना कि मामला जरूरत से ज्यादा बढ़ गया और उन्होंने अपने कुछ पोस्ट पर खेद भी जताया। क्या अब पूरी तरह खत्म हो गया विवाद? फिलहाल दोनों के बीच रिश्ते सामान्य होते दिख रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दोस्ती पूरी तरह राजनीतिक और कारोबारी हितों पर आधारित है। चीन दौरा दोनों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है: ट्रंप के लिए: अमेरिकी व्यापारिक ताकत का प्रदर्शन मस्क के लिए: चीन में कारोबारी हित सुरक्षित रखना अमेरिका के लिए: टेक और व्यापारिक दबदबा दिखाना यानी यह सिर्फ एक विदेश दौरा नहीं, बल्कि अमेरिका-चीन व्यापार और टेक्नोलॉजी युद्ध के बीच शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Reliance Industries अब सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में बड़ा कदम रखने जा रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलहाल Elon Musk की कंपनी Starlink का दबदबा है। लेकिन अब रिलायंस इस गेम को बदलने की तैयारी में है–और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कमान खुद मुकेश अंबानी ने संभाल रखी है। क्या है रिलायंस का प्लान? सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस सैटकॉम सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। यह प्रोजेक्ट Jio Platforms के तहत संचालित होगा, जो कंपनी के टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस को संभालती है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कंपनी ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो इन क्षेत्रों पर काम कर रही हैं: सैटेलाइट डिजाइन लॉन्च सिस्टम पेलोड यूजर टर्मिनल नेटवर्क इंटीग्रेशन लो अर्थ ऑर्बिट पर फोकस रिलायंस की नजर खासतौर पर Low Earth Orbit (LEO) सेगमेंट पर है, जहां कम ऊंचाई पर सैटेलाइट तैनात कर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं दी जाती हैं। यही वह क्षेत्र है जहां स्टारलिंक और अन्य वैश्विक कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं। सरकार और ग्लोबल रेस भारत सरकार भी चाहती है कि देश सैटकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर बने, ताकि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो सके। इसी के तहत रिलायंस International Telecommunication Union (ITU) में ऑर्बिटल स्लॉट और रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में जुटी है। मुकाबले में कौन-कौन? इस सेक्टर में पहले से कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं: Starlink (एलन मस्क) Amazon Kuiper (अमेजन) Eutelsat OneWeb AST SpaceMobile Sateliot भारत की तरफ से Sunil Mittal के भारती ग्रुप की भी Eutelsat में बड़ी हिस्सेदारी है। पार्टनरशिप और रणनीति रिलायंस पहले ही मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट कंपनी SES के साथ साझेदारी कर चुकी है। इसके अलावा कंपनी इनऑर्गेनिक ग्रोथ–यानी किसी मौजूदा सैटेलाइट कंपनी के अधिग्रहण–पर भी विचार कर रही है, ताकि तेजी से इस सेक्टर में प्रवेश किया जा सके। भारत के लिए क्या मायने? अगर रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो: भारत को अपना स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क मिल सकता है ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बेहतर होगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से विदेशी निर्भरता कम होगी क्या संकेत देता है यह कदम? यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टेलीकॉम की लड़ाई अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। रिलायंस का यह कदम न सिर्फ बिजनेस, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।
दुनिया के सबसे अमीर लोगों की पारंपरिक सूची से अलग एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। Forbes ने अपनी नई ‘True Net Worth’ लिस्ट जारी कर यह दिखाने की कोशिश की है कि अगर बड़े अरबपतियों ने अपनी संपत्ति दान न की होती, तो आज उनकी असल दौलत कितनी होती और रैंकिंग किस तरह बदल जाती। यह सूची केवल धन की गणना नहीं, बल्कि अरबपतियों की दरियादिली और सामाजिक योगदान की भी झलक देती है। इलॉन मस्क: नंबर-1 बरकरार, दान में काफी पीछे Elon Musk इस लिस्ट में भी शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का बेहद छोटा हिस्सा–करीब 0.06%–ही दान किया है। यानी उनकी अधिकांश संपत्ति अब भी उनके पास सुरक्षित है, जिससे उनकी रैंकिंग पर कोई खास असर नहीं पड़ा। बिल गेट्स: दान ने बदली रैंकिंग की तस्वीर Bill Gates इस लिस्ट के सबसे चौंकाने वाले नामों में शामिल हैं। वर्तमान में वे दुनिया के 19वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं, लेकिन अगर उन्होंने दान न किया होता तो वे सीधे दूसरे स्थान पर होते। उन्होंने Microsoft के 73 करोड़ से ज्यादा शेयर दान किए हैं। अगर ये शेयर उनके पास होते, तो उनकी कुल संपत्ति करीब चार गुना अधिक होती। वॉरेन बफेट और मैकेंजी स्कॉट: दान से बदली स्थिति Warren Buffett का भी इस लिस्ट में बड़ा असर दिखता है। अभी वे 9वें स्थान पर हैं, लेकिन अगर उन्होंने दान न किया होता, तो वे तीसरे स्थान पर पहुंच सकते थे। 2006 से अब तक उन्होंने जो शेयर दान किए, उनकी कीमत में करीब 700% तक बढ़ोतरी हुई है–जिससे उनकी संभावित संपत्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं MacKenzie Scott भी अपनी उदारता के कारण वर्तमान रैंकिंग में काफी नीचे हैं, लेकिन बिना दान के वे 58 पायदान ऊपर चढ़कर 26वें स्थान पर पहुंच सकती थीं। जेफ बेजोस: टॉप-5 से हो जाते बाहर Jeff Bezos के मामले में यह लिस्ट एक अलग कहानी बताती है। अगर सभी अरबपतियों की ‘ट्रू नेट वर्थ’ के आधार पर रैंकिंग बनाई जाए, तो वे दुनिया के टॉप-5 अमीरों की सूची से बाहर हो सकते थे। अमीरी का नया पैमाना: सिर्फ संपत्ति नहीं, योगदान भी इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ‘अमीरी’ केवल संपत्ति के आंकड़ों से नहीं मापी जा सकती। Bill Gates और Warren Buffett जैसे दिग्गज भले ही मौजूदा रैंकिंग में नीचे दिखाई देते हों, लेकिन उनकी ‘ट्रू नेट वर्थ’ यह साबित करती है कि उन्होंने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज के लिए समर्पित किया है। यह लिस्ट हमें याद दिलाती है कि असली संपन्नता सिर्फ कमाने में नहीं, बल्कि वापस देने में भी है।
दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल Elon Musk एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनकी स्पेस कंपनी SpaceX, जो इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो SpaceX दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो जाएगी और Tesla को भी पीछे छोड़ सकती है। इस उपलब्धि के साथ ही मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के बेहद करीब पहुंच सकते हैं। फिलहाल उनकी अनुमानित नेटवर्थ 636 अरब डॉलर से अधिक बताई जा रही है। संघर्ष भरा शुरुआती सफर 28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में जन्मे मस्क का जीवन शुरुआत से आसान नहीं रहा। कम उम्र में ही उन्होंने तकनीक के प्रति अपनी रुचि दिखा दी थी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने Blastar नाम का वीडियो गेम बनाया और उसका कोड 500 डॉलर में बेच दिया। 17 साल की उम्र में वह कनाडा पहुंचे, जहां उन्होंने एक लंबर मिल में बॉयलर रूम क्लीनर की नौकरी की। इस काम के दौरान उन्हें हर घंटे 18 डॉलर मिलते थे, लेकिन काम बेहद जोखिम भरा था-हाइपरथर्मिया से बचने के लिए हर 15 मिनट में पोजीशन बदलनी पड़ती थी। इसके बाद मस्क उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, जहां से उनकी असली उद्यमी यात्रा शुरू हुई। बिजनेस की दुनिया में बड़ा मुकाम मस्क ने साल 1999 में X.com की स्थापना की, जो बाद में PayPal का हिस्सा बनी। 2002 में eBay ने PayPal को 1.5 अरब डॉलर में खरीद लिया। उसी साल उन्होंने SpaceX की स्थापना की, जिसने 2008 में इतिहास रचते हुए पहली निजी कंपनी के तौर पर सैटेलाइट को कक्षा में भेजा। इसके अलावा मस्क Tesla, Neuralink और X (formerly Twitter) जैसी कंपनियों का संचालन कर रहे हैं। स्पेसएक्स IPO: क्या बदल जाएगा खेल? अगर SpaceX का IPO 2 ट्रिलियन डॉलर वैल्यूएशन पर सफल होता है, तो यह वैश्विक बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है। कंपनी सीधे तौर पर Apple, Microsoft, Amazon, Alphabet और NVIDIA जैसी दिग्गज कंपनियों की लीग में शामिल हो जाएगी। मस्क की SpaceX में करीब 43% हिस्सेदारी है, जिससे उनकी संपत्ति में जबरदस्त उछाल आ सकता है। मंगल मिशन का सपना मस्क का सबसे बड़ा लक्ष्य इंसानों को मंगल ग्रह पर बसाना है। SpaceX इसी मिशन पर तेजी से काम कर रही है और लगातार नए-नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रही है। करियर टाइमलाइन (संक्षेप में) 1971: प्रिटोरिया, दक्षिण अफ्रीका में जन्म 1983: Blastar गेम बनाया 1999: X.com की स्थापना 2002: PayPal की बिक्री, SpaceX की शुरुआत 2008: SpaceX ने पहला सैटेलाइट लॉन्च किया 2010: Tesla शेयर बाजार में लिस्ट 2022: Twitter का अधिग्रहण (अब X) 2024: Neuralink का पहला मानव ब्रेन इम्प्लांट
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।