Energy Security

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और डोनाल्ड ट्रंप
होर्मुज पर नाटो की ‘ना’ से भड़के ट्रंप, यूक्रेन पर उतार सकते हैं गुस्सा

वाशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाते हुए संकेत दिया है कि यदि नाटो देश होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए अमेरिका का साथ नहीं देते, तो यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस बयान ने न सिर्फ यूरोप में बेचैनी बढ़ा दी है, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समीकरणों को भी नया मोड़ दे दिया है।   होर्मुज स्ट्रेट इस समय वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इस जलमार्ग पर प्रभावी दबाव बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ गया है। ट्रंप चाहते हैं कि नाटो देश अमेरिका के नेतृत्व में एक सैन्य या नौसैनिक अभियान का हिस्सा बनें, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इसे “हमारा युद्ध नहीं” कहकर दूरी बना ली है।   यूक्रेन बन सकता है दबाव की राजनीति का शिकार यूरोपीय देशों की इस हिचकिचाहट से नाराज ट्रंप अब यूक्रेन को दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। यूक्रेन फरवरी 2022 से रूस के खिलाफ लगातार युद्ध लड़ रहा है और उसकी सैन्य क्षमता काफी हद तक पश्चिमी हथियारों और वित्तीय सहायता पर निर्भर रही है। यदि अमेरिका हथियारों की आपूर्ति या समर्थन कम करता है, तो इसका सीधा असर यूक्रेन की युद्ध क्षमता पर पड़ेगा।   ऐसी स्थिति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है। पश्चिमी मोर्चे पर कमजोरी आने का मतलब यह होगा कि रूस को सैन्य और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर फायदा मिल सकता है।   नाटो के भीतर बढ़ी बेचैनी रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप की चेतावनी के बाद नाटो के भीतर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों के साथ एक संयुक्त बयान जारी करने की कोशिश की है, ताकि होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही के समर्थन का संकेत दिया जा सके। माना जा रहा है कि यह कदम ट्रंप को शांत करने और यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।   ट्रंप पहले भी नाटो को लेकर तीखी टिप्पणी कर चुके हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका सहयोगियों की सुरक्षा करता है, लेकिन बदले में समान प्रतिबद्धता नहीं मिलती। हालांकि अमेरिका का नाटो से बाहर निकलना आसान नहीं है, लेकिन यूक्रेन की मदद रोकना ट्रंप के हाथ में एक प्रभावी राजनीतिक हथियार जरूर बन सकता है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Oil tankers passing through Strait of Hormuz amid rising Middle East tensions
युद्ध के बीच ईरान का बड़ा फैसला: भारत समेत ‘मित्र देशों’ को ही मिलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति

मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान ने एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल “मित्र देशों” को ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति देगा। इस फैसले में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस और इराक जैसे देशों को शामिल किया गया है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास द्वारा साझा बयान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद इन देशों के जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दी गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र की चिंता और अपील संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो यह वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित करेगा। खासकर खेती के मौसम में इसका असर और भी गहरा हो सकता है। गुटेरेस ने साफ तौर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान से अपील की कि वे तुरंत युद्ध को समाप्त करें। उन्होंने कहा कि बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और वैश्विक आर्थिक संकट को रोकने का एकमात्र तरीका यही है। पश्चिमी देशों के लिए बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि उनके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है। यदि यहां कोई बड़ा अवरोध आता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ेगा। बढ़ता तनाव और संभावित खतरे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने इस जलमार्ग को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ईरान द्वारा संभावित जवाबी कार्रवाई और समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण की कोशिशों ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Ultra-high-voltage power lines in China as part of supergrid energy strategy
होर्मुज संकट के बीच चीन की बड़ी रणनीति: तेल निर्भरता घटाने के लिए ‘सुपरग्रिड’ पर दांव

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट के बीच जहां पूरी दुनिया ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंतित है, वहीं चीन ने इस चुनौती से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। यह रणनीति केवल मौजूदा संकट से बचने का उपाय नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। होर्मुज पर निर्भरता कम करने की तैयारी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाज प्रभावित हुए हैं। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र है, जिससे भारत सहित कई देश प्रभावित होते हैं। ऐसे में चीन ने इस तरह के “चोकपॉइंट्स” पर अपनी निर्भरता कम करने का लक्ष्य तय किया है। ‘सुपरग्रिड’ से बदलने की तैयारी चीन की रणनीति का केंद्र है—देशभर में एक विशाल बिजली सुपरग्रिड का निर्माण। यह परियोजना State Grid Corporation of China और China Southern Power Grid जैसी सरकारी कंपनियों के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। इस सुपरग्रिड के तहत: अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज (UHV) ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क बनाया जा रहा है हजारों किलोमीटर दूर तक कम नुकसान के साथ बिजली पहुंचाई जा सकेगी पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों की सौर और पवन ऊर्जा को पूर्वी औद्योगिक इलाकों तक पहुंचाया जाएगा यह मॉडल चीन को आयातित तेल और गैस पर निर्भरता घटाने में मदद करेगा। भारी निवेश और लंबी योजना विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 से 2030 के बीच चीन इस परियोजना पर लगभग 4 ट्रिलियन युआन (करीब 574 अरब डॉलर) खर्च करने की योजना बना रहा है। इसके लिए सरकारी कंपनियां बड़े पैमाने पर बॉन्ड जारी कर रही हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रही हैं। ऊर्जा सुरक्षा की नई परिभाषा यह सुपरग्रिड केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव है। इसके जरिए चीन: रिन्यूएबल एनर्जी (सौर, पवन) का अधिक उपयोग करेगा इलेक्ट्रिक वाहनों और इंडस्ट्री की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करेगा वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव से खुद को सुरक्षित करेगा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह योजना सफल होती है, तो चीन न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा भी बदल सकता है। वैश्विक प्रभाव भी संभव होर्मुज जैसे संवेदनशील मार्गों पर निर्भरता कम होने से चीन का आर्थिक जोखिम घटेगा। साथ ही, यह मॉडल अन्य देशों को भी ऊर्जा सुरक्षा के नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित कर सकता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Indian Navy warships deployed in Gulf of Oman escorting oil tankers amid Hormuz Strait crisis
होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: ओमान की खाड़ी में बढ़ेगी नौसेना की ताकत, सुरक्षित निकाले जाएंगे भारतीय जहाज

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन माने जाने वाले Strait of Hormuz में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने ऊर्जा और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने Indian Navy की तैनाती बढ़ाते हुए Gulf of Oman में अतिरिक्त युद्धपोत भेजने का फैसला किया है, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। 6 से 7 युद्धपोतों की तैनाती, सुरक्षा पर फोकस खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी को मजबूत करते हुए अब कुल युद्धपोतों की संख्या 6 से बढ़ाकर 7 की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चा तेल और LPG लेकर आने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। यह वही मार्ग है, जहां से Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar जैसे देशों से भारत को ऊर्जा आपूर्ति होती है। 22 भारतीय जहाज फंसे, बढ़ी चिंता हालिया तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग ठप हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 भारतीय झंडाधारी जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20% आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। नेवी की एस्कॉर्ट रणनीति, जहाजों को सुरक्षित निकाला जा रहा भारतीय नौसेना अब सक्रिय रूप से जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है। हाल ही में एक भारतीय युद्धपोत ने यूएई के फुजैरा पोर्ट से निकले एक तेल टैंकर को सुरक्षित भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचाया। इसके अलावा, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे LPG कैरियर भी करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं-जो मौजूदा संकट के बीच बड़ी राहत मानी जा रही है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत कार्रवाई यह पूरी तैनाती Operation Sankalp के तहत की जा रही है, जिसकी शुरुआत 2019 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर भरोसा बनाए रखना है। अदन की खाड़ी में भी लगातार मिशन भारतीय नौसेना सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। Gulf of Aden में भी 2008 से एंटी-पायरेसी मिशन चलाया जा रहा है, जहां हर समय एक युद्धपोत तैनात रहता है। यह मिशन समुद्री डकैती पर नजर रखने और भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभाता है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में भारत की यह रणनीतिक तैनाती बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Kharg Island in the Persian Gulf, Iran’s heavily guarded oil export hub with strategic military installations.
ट्रंप-नेतन्याहू के लिए आसान नहीं ईरान का खर्ग द्वीप, कड़ी सुरक्षा में छिपी है तेल अर्थव्यवस्था की ‘लाइफलाइन’

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Kharg Island एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस द्वीप को निशाना बनाते हैं, तो यह कदम आसान नहीं होगा। इसकी वजह यहां की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी अहम भूमिका है।   ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। अनुमान के मुताबिक ईरान के अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। द्वीप पर विशाल तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और बड़े ऑयल टैंकरों के लिए गहरे पानी के टर्मिनल मौजूद हैं, जिससे यह देश की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख आधार बन गया है।   भारी सैन्य सुरक्षा में घिरा इलाका खर्ग द्वीप को ईरान ने कड़ी सैन्य सुरक्षा से घेर रखा है। यहां एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और मिसाइल सुरक्षा तैनात है। साथ ही Islamic Revolutionary Guard Corps और ईरानी नौसेना की इकाइयां आसपास के समुद्री क्षेत्र में लगातार गश्त करती हैं। यही वजह है कि किसी भी बाहरी सैन्य कार्रवाई को यहां अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।   मुख्य भूमि के करीब होने से रणनीतिक बढ़त खर्ग द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से करीब 25 से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में अगर यहां किसी तरह का हमला होता है तो ईरान अपनी मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक ताकत के जरिए तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र मानते हैं।   वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यदि खर्ग द्वीप पर हमला होता है या यहां की तेल सुविधाएं बाधित होती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका रहती है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।   रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकाना छोटे आकार के बावजूद खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य रणनीति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि किसी भी संभावित संघर्ष में यह द्वीप निर्णायक भूमिका निभा सकता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Oil tanker Shenlong safely arrives at Mumbai Port amid Strait of Hormuz tensions.
जयशंकर की कूटनीति रंग लाई: हॉर्मुज पार कर मुंबई पहुंचा भारत के लिए तेल लेकर आया टैंकर

  नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत की कूटनीति ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के बावजूद सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आया टैंकर शेनलोंग सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। इस घटनाक्रम को भारत की प्रभावी कूटनीतिक पहल का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस सफलता के पीछे भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई महत्वपूर्ण बातचीत की अहम भूमिका रही। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी।   युद्ध के बीच सुरक्षित पहुंचा जहाज दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण Strait of Hormuz युद्ध का संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। हाल के दिनों में कई तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई थी। इसी माहौल में लाइबेरियाई झंडे वाला तेल टैंकर शेनलोंग सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर रवाना हुआ था। जोखिम भरे समुद्री रास्ते को पार करते हुए यह जहाज सुरक्षित रूप से Mumbai Port पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि वह अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं देगा। ऐसे में भारत के लिए तेल लेकर आए जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत की संतुलित विदेश नीति और कूटनीतिक संवाद का परिणाम माना जा रहा है।   जयशंकर-अराघची की बातचीत से बना रास्ता सूत्रों के अनुसार जब ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही सीमित करने का संकेत दिया, तब भारत ने सक्रिय कूटनीतिक पहल की। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर विस्तृत बातचीत की और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी जानकारी दी कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात और समुद्री सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया तथा संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देते हुए भारतीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पहल की। इसके साथ ही जयशंकर ने उसी दिन जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत कर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को साझा किया।   मुंबई में उतारा जा रहा कच्चा तेल यह विशाल तेल टैंकर बुधवार दोपहर लगभग 1 बजे Mumbai Port पहुंचा। बाद में शाम करीब 6 बजे इसे ‘जवाहर द्वीप’ टर्मिनल पर बर्थ किया गया। जहाज में लगभग 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है, जिसे मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा। जहाज पर भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के कुल 29 क्रू सदस्य सवार हैं। मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के डिप्टी कंजर्वेटर प्रवीण सिंह के मुताबिक जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसे पूरा होने में लगभग 36 घंटे लग सकते हैं।   संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हालांकि शेनलोंग का सुरक्षित पहुंचना राहत भरी खबर है, लेकिन समुद्री क्षेत्र में खतरा पूरी तरह टला नहीं है। शिपिंग महानिदेशालय के अनुसार करीब 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अब भी युद्ध क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। भारत ने अब तक अपनी कूटनीतिक पहल और समन्वय के जरिए देश महिमा, स्वर्ण कमल और विश्व प्रेरणा समेत सात जहाजों को सुरक्षित अरब सागर के जलक्षेत्र में पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय कूटनीति ही ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रही है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Donald Trump announcing $300 billion Texas oil refinery project with Reliance partnership strengthening India-US energy cooperation
भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी मजबूत: टेक्सास में 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी डील, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को कहा ‘धन्यवाद’

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास में लगभग 300 अरब डॉलर की विशाल तेल रिफाइनरी परियोजना की घोषणा करते हुए भारत और भारतीय कंपनी रिलायंस का आभार जताया है। ट्रंप ने कहा कि यह निवेश अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम है और करीब 50 वर्षों में देश में स्थापित होने वाली पहली नई तेल रिफाइनरी होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउनस्विल (Brownsville) में स्थापित की जाएगी। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा देगी।   भारत और रिलायंस को दिया धन्यवाद परियोजना की घोषणा करते हुए ट्रंप ने भारत और उसकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निवेश में भारत के सहयोग से अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। ट्रंप ने लिखा, “भारत में हमारे साझेदारों और उनकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस को इस जबरदस्त निवेश के लिए धन्यवाद। यह अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के लोगों के लिए बड़ी जीत है।” हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रिफाइनरी भारत के साथ किसी व्यापक आर्थिक समझौते का हिस्सा है या नहीं, लेकिन इस घोषणा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।   50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी रिफाइनरी ट्रंप ने इस परियोजना को अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, यह रिफाइनरी पिछले पांच दशकों में अमेरिका में बनने वाली पहली नई बड़ी तेल रिफाइनरी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बार फिर ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप के शब्दों में, “अमेरिका ‘रियल एनर्जी सेक्टर’ में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित कर रहा है। टेक्सास के ब्राउनस्विल में बनने वाली यह रिफाइनरी अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक होगी।”   ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का असर ट्रंप ने इस निवेश को अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, परमिट प्रक्रिया को सरल बनाने और करों में कटौती से जुड़ा परिणाम बताया। उनके मुताबिक इन नीतियों के कारण ही अरबों डॉलर का निवेश अमेरिका की ओर आकर्षित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राउनस्विल पोर्ट पर बनने वाली यह नई रिफाइनरी न केवल अमेरिकी बाजार को ऊर्जा उपलब्ध कराएगी, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।   रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा ट्रंप के अनुसार यह परियोजना दक्षिण टेक्सास के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह दुनिया की सबसे आधुनिक और स्वच्छ रिफाइनरियों में से एक होगी, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा निर्यात को भी बढ़ावा देगी।   वैश्विक परिस्थितियों के बीच अहम घोषणा यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में अमेरिका में नई रिफाइनरी की स्थापना को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी भी और मजबूत हो सकती है।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
America praises India for continuing Russian oil imports amid global sanctions
रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत की सराहना की, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा– जिम्मेदार भागीदार

  रूस पर लगे प्रतिबंधों और ईरान युद्ध के बीच भी भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले को लेकर अमेरिका की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद भागीदार बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित और जिम्मेदार रवैया अपनाया है। अमेरिका का मानना है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को समझते हुए अपने फैसले लिए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई पश्चिमी देशों ने Russia के तेल पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना जारी रखा, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना बेहद जरूरी है। इसलिए भारत के फैसलों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। वैश्विक स्तर पर चल रहे Iran–Israel Conflict और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे में भारत द्वारा विभिन्न देशों से तेल आयात कर आपूर्ति संतुलित रखना अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय वैश्विक नियमों और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखा है, जिसकी वजह से अमेरिका ने भी भारत की नीति की सराहना की है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0