EVM Security

Mamata Banerjee and Firhad Hakim amid West Bengal election 2026 political buzz
कोलकाता में मेयर फिरहाद हकीम का दावा: 6 मई को शपथ लेंगी ममता बनर्जी, दुर्गापुर में ‘गुड़-बतासा’ और ‘पाचन’ वाली सियासत तेज

कोलकाता/दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले सियासी बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। एग्जिट पोल के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी खेमे में उत्साह है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी आत्मविश्वास भरे दावे करने शुरू कर दिए हैं। 6 मई को शपथ का दावा कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ममता बनर्जी 6 मई को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। कोलकाता नगर निगम के अधिवेशन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस 202 से 225 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज किया। दुर्गापुर में ‘गुड़-बतासा’ और पहरा दूसरी ओर, दुर्गापुर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए अनोखा तरीका अपनाया है। दुर्गापुर गवर्नमेंट कॉलेज के पास बनाए गए पहरा केंद्र में कार्यकर्ता दिन-रात डटे हुए हैं। गर्मी से बचने के लिए कार्यकर्ता ‘गुड़-बतासा’ खा रहे हैं और राहगीरों को भी बांट रहे हैं। साथ ही, ‘पाचन’ (डंडा) शब्द का इस्तेमाल कर विरोधियों को चेतावनी देने की बात भी सामने आई है, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया है। EVM सुरक्षा को लेकर आशंका टीएमसी के स्थानीय युवा नेता अजय देबनाथ का कहना है कि उन्हें EVM से छेड़छाड़ की आशंका है। इसी वजह से कार्यकर्ता लगातार निगरानी कर रहे हैं और किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। उन्होंने अणुव्रत मंडल के ‘मॉडल’ का हवाला देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो ‘पाचन’ का इस्तेमाल भी किया जाएगा। भाजपा का तीखा पलटवार टीएमसी की इस सक्रियता पर भाजपा ने कड़ा हमला बोला है। भाजपा जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने तंज कसते हुए कहा कि अणुव्रत मंडल खुद केंद्रीय एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मामलों में उलझे हुए हैं, लेकिन उनके समर्थक अब भी पुरानी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ‘पाचन’ की राजनीति करनी है तो बंगाल नहीं, कहीं और जाना चाहिए। भाजपा का दावा है कि 4 मई के बाद तृणमूल नेताओं को सत्ता से बाहर होना पड़ेगा। बढ़ता सियासी तापमान नतीजों से पहले ही पश्चिम बंगाल में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा बदलाव की बात कर रही है। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों और उसके बाद की सियासी तस्वीर पर टिकी हैं।  

surbhi मई 1, 2026 0
Kolkata strong room visit
कोलकाता के स्ट्रांगरूम पहुंचीं ममता बनर्जी, EVM गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

कोलकाता, एजेंसियां । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर कड़ा बयान देते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी पर “जीने-मरने की लड़ाई” लड़ने की चेतावनी दी है। उन्होंने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रांगरूम का दौरा किया, जहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम और चुनाव सामग्री सुरक्षित रखी गई है।   ममता बनर्जी ने कहा   करीब तीन घंटे तक स्ट्रांगरूम में निरीक्षण करने के बाद बाहर निकलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यदि कोई ईवीएम मशीन चुराने या मतगणना प्रक्रिया में छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा, तो उनकी पार्टी पूरी ताकत से इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि वह पूरी जिंदगी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेंगी। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगा रही है। पार्टी ने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया है कि स्ट्रांगरूम के आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं। ममता बनर्जी ने बताया कि उन्होंने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया।   केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी उठाया सवाल उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें स्ट्रांगरूम में प्रवेश से रोका गया। हालांकि, उम्मीदवार होने के अधिकार का हवाला देने के बाद उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के एक प्रतिनिधि को गिरफ्तार किया गया है और प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है।टीएमसी ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि अधिकृत प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में मतपेटियों को खोलना चुनाव नियमों का गंभीर उल्लंघन है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है।

Anjali Kumari मई 1, 2026 0
Election officials checking EVM machines at polling booth before voting in India
EVM से छेड़छाड़ पर सख्त हुआ चुनाव आयोग: परफ्यूम, स्याही या गोंद लगाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

  चुनाव से पहले सख्ती बढ़ी Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि मशीन के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परफ्यूम, इंक और गोंद को माना जाएगा छेड़छाड़ चुनाव आयोग के अनुसार, यदि EVM पर इत्र, स्याही, गोंद या किसी भी प्रकार का केमिकल लगाया जाता है, तो इसे सीधा छेड़छाड़ की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उम्मीदवार बटन साफ और स्पष्ट रखना जरूरी आयोग ने सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि EVM के सभी उम्मीदवार बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दें। किसी भी बटन को टेप, गोंद या अन्य सामग्री से ढकना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा, मतों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए भी मशीन के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ को गंभीर अपराध माना जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर तुरंत सूचना देना अनिवार्य निर्देशों के अनुसार, अगर किसी बूथ पर EVM में कोई भी असामान्यता या छेड़छाड़ नजर आती है, तो पीठासीन अधिकारी तुरंत सेक्टर अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी को इसकी जानकारी देंगे। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि EVM के साथ किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप एक चुनावी अपराध है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्मतदान (री-पोल) का आदेश भी दिया जा सकता है। 23 अप्रैल को मतदान, पहले ही जारी हुई चेतावनी गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है। मतदान से ठीक पहले आयोग ने यह निर्देश जारी कर सभी अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में सभी पोलिंग बूथों के प्रीसाइडिंग अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे EVM पर उम्मीदवारों के बटन पूरी तरह साफ और बिना किसी रुकावट के दिखाई देने की पुष्टि करें।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Election Commission directs DM and SP for violence-free West Bengal elections 2026 with strict security measures
बंगाल चुनाव 2026: हिंसा और डर बर्दाश्त नहीं, DM-SP को चुनाव आयोग का सख्त निर्देश

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चुनाव आयोग (ECI) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव “हिंसा-मुक्त” और “भय-मुक्त” माहौल में कराए जाएंगे। सोमवार को निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DM/DEO), पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस आयुक्तों (CP) के साथ हाई-लेवल ऑनलाइन समीक्षा बैठक की। CEC का साफ संदेश: डर और प्रलोभन की कोई जगह नहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दोहराया कि आयोग का लक्ष्य है कि हर मतदाता बिना किसी डर के मतदान कर सके। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील इलाकों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बैठक में दिए गए अहम निर्देश चुनाव आयोग ने अधिकारियों को कई सख्त निर्देश दिए- संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान: जहां मतदाताओं को डराया-धमकाया जा सकता है खर्च पर नजर: काले धन और अवैध शराब के इस्तेमाल पर रोक आचार संहिता (MCC): सख्ती से पालन सुनिश्चित करना EVM सुरक्षा: मशीनों के सुरक्षित संचालन और रखरखाव पर फोकस ट्रेनिंग: राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर्स द्वारा अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण 25 मार्च को होगी ROs की विशेष ट्रेनिंग चुनाव तैयारियों के अगले चरण में 25 मार्च 2026 को सभी रिटर्निंग ऑफिसर्स (ROs) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया और कानूनी पहलुओं को और मजबूत बनाना है। मतदान केंद्रों पर सुविधाओं का ध्यान चुनाव आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी बूथों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों- पेयजल बिजली रैंप (दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए)

surbhi मार्च 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0