United States Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को कारोबार शुरू होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.85 तक पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान यह और गिरकर 96.93 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लगातार 13वें कारोबारी दिन रुपये में कमजोरी देखने के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई है। पिछले सप्ताह रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के पार गया था और अब गिरावट का सिलसिला जारी है। जानकारों का मानना है कि मजबूत डॉलर, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है। डॉलर इतना मजबूत क्यों हो रहा है? अमेरिका में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ रही है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.18% तक पहुंच गई है, जो 2007 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी करीब 4.66% तक पहुंच गई। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक निवेशक वहां निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इसका असर यह होता है कि उभरते बाजारों से पैसा निकलने लगता है और डॉलर मजबूत हो जाता है। इसी वजह से भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें भी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर डालती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ता है। महंगे तेल का असर सिर्फ करेंसी तक सीमित नहीं रहता। इससे: ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है RBI क्या कर रहा है? Reserve Bank of India रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट देने की कोशिश कर रहा है, ताकि गिरावट बहुत ज्यादा तेज न हो। हालांकि मौजूदा वैश्विक हालात भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बने हुए हैं। अगर: डॉलर मजबूत बना रहता है तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं वैश्विक तनाव बढ़ता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। इससे: विदेश यात्रा महंगी हो सकती है आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स के दाम बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है विदेशी शिक्षा और ऑनलाइन सेवाएं महंगी पड़ सकती हैं हालांकि निर्यात करने वाली कंपनियों को कमजोर रुपये से कुछ फायदा भी हो सकता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा कमाई होती है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार हरे निशान पर बंद होने में सफल रहा। पश्चिम एशिया संकट के बाद बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दिनभर के कारोबार के बाद हरे निशान पर बंद होने में सफल रहे। हालांकि, इस दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 49.74 (0.06%) अंकों की बढ़त के साथ 74,608.98 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 46.46 (0.20%) अंक मजबूत होकर 23,426.00 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 95.80 पर पहुंच गया।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सप्ताह के पहले दिन घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,312.91 अंक टूटकर 76,015.28 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360.30 अंक गिरकर 23,815.85 पर पहुंच गया। विश्लेषकों के मुताबिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में किफायत बरतने की अपील, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। रुपये में ऐतिहासिक गिरावट शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये पर भारी दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 85 पैसे टूटकर 95.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में यह कमजोरी आई है। निवेशकों की चिंता बढ़ी दलाल स्ट्रीट पर बैंकिंग, मेटल और ज्वैलरी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। बढ़ती महंगाई और ऊर्जा आयात लागत को लेकर भी निवेशकों में चिंता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां अभी मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में रुपये की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी हुई है।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटकर 76,400 के नीचे पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 हजार के अहम स्तर से फिसलकर 23,950 के नीचे कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए लोगों से किफायत बरतने की अपील, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 845 अंकों से अधिक गिरकर 76,482 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 238 अंक टूटकर 23,936 पर कारोबार करता दिखा। ज्वैलरी सेक्टर में भारी बिकवाली प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की सलाह के बाद ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। Senco Gold का शेयर करीब 9 प्रतिशत तक टूट गया। वहीं Kalyan Jewellers, Titan Company और PC Jeweller के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। रुपये में कमजोरी और महंगाई की चिंता डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और शुरुआती कारोबार में 94.90 के स्तर तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस्राइल-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन बढ़ती तेल कीमतें और विदेशी मुद्रा पर दबाव आने वाले समय में बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। भारत में हर साल सोने के आयात पर लाखों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। 2024-26 में यह आंकड़ा 4.89 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 6.40 लाख करोड़ रुपए रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग गहनों से भी ज्यादा है। भारतीय घरों में दुनिया के टॉप-10 बैंकों से ज्यादा सोना भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है। भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है।
Reserve Bank of India ने बैंकों को बड़ी राहत देते हुए पूंजी गणना से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है। अब बैंक बिना किसी जटिल शर्त के अपनी तिमाही कमाई को मुख्य पूंजी यानी CET1 (Common Equity Tier 1) में शामिल कर सकेंगे। आरबीआई के इस फैसले से बैंकों के लिए अपनी पूंजीगत स्थिति मजबूत दिखाना और कैपिटल मैनेजमेंट करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। क्या था पुराना नियम? अब तक बैंकों को अपनी तिमाही कमाई को CET1 पूंजी में शामिल करने के लिए एक अहम शर्त पूरी करनी होती थी। नियम के अनुसार, एनपीए (Non-Performing Assets) यानी फंसे हुए कर्ज के लिए की गई प्रोविजनिंग में पिछले चार तिमाहियों के औसत के मुकाबले 25 प्रतिशत से ज्यादा का बदलाव नहीं होना चाहिए था। अगर यह सीमा पार हो जाती थी, तो बैंक अपनी तिमाही कमाई को पूंजी में शामिल नहीं कर पाते थे। अब Reserve Bank of India ने इस 25% वाली शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया है। बैंकों को क्या होगा फायदा? इस बदलाव से बैंकों के लिए अपना Capital to Risk Weighted Assets Ratio (CRAR) बनाए रखना आसान होगा। CRAR यह बताता है कि किसी बैंक के पास संभावित नुकसान झेलने के लिए कितनी मजबूत पूंजी मौजूद है। अब बैंक हर तिमाही के मुनाफे को बिना किसी NPA-लिंक्ड बाधा के अपनी कोर कैपिटल में जोड़ सकेंगे। इससे उनकी बैलेंस शीट मजबूत दिखेगी और फंड मैनेजमेंट में भी आसानी होगी। किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम? Reserve Bank of India ने इस संबंध में तीन अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और पेमेंट बैंकों पर लागू होंगे। आरबीआई ने बताया कि यह फैसला 8 अप्रैल 2026 को जारी ड्राफ्ट प्रस्तावों और उस पर मिले सुझावों के बाद लिया गया है। आम लोगों और बैंकिंग सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर? विशेषज्ञों के मुताबिक इस कदम से बैंकिंग सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगा। जब बैंकों के लिए पूंजी की गणना आसान होती है, तो उन्हें लोन देने, बिजनेस विस्तार और जोखिम प्रबंधन में बेहतर स्पष्टता मिलती है। इससे बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
US Iran War and Insider Trading in Share Market: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब शेयर और कमोडिटी बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या कुछ लोगों को युद्ध और संभावित समझौते से जुड़ी अंदरूनी जानकारी पहले से थी, जिसके आधार पर करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमाया गया. 70 मिनट में हुआ बड़ा खेल रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 मई की सुबह अमेरिकी समयानुसार करीब 3:40 बजे अचानक भारी मात्रा में क्रूड ऑयल “शॉर्ट” कॉन्ट्रैक्ट खरीदे गये. “शॉर्ट” ट्रेडिंग का मतलब होता है कि निवेशक यह दांव लगाता है कि किसी वस्तु की कीमत गिरने वाली है. बताया जा रहा है कि करीब 10,000 क्रूड ऑयल शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट खरीदे गये, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 920 मिलियन डॉलर यानी हजारों करोड़ रुपये थी. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी ट्रेडिंग सामान्य परिस्थितियों में बेहद असामान्य मानी जाती है. 70 मिनट बाद आयी बड़ी खबर इन सौदों के लगभग 70 मिनट बाद अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म Axios की रिपोर्ट सामने आयी, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए 14 सूत्रीय समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आयी. सुबह 7 बजे तक क्रूड ऑयल की कीमतें 12 प्रतिशत से ज्यादा नीचे चली गयीं. रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों ने पहले से शॉर्ट पोजिशन ली थी, उन्हें इस गिरावट से लगभग 125 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. फिर अचानक पलटा बाजार हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. कुछ ही समय बाद ईरान ने “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” से जुड़ा बड़ा कदम उठाया, जिसके बाद तेल की कीमतों में फिर उछाल आ गया. तेल की कीमतें अचानक लगभग 8 प्रतिशत तक चढ़ गयीं. इस तेज उतार-चढ़ाव ने बाजार में और ज्यादा संदेह पैदा कर दिया. इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप क्यों लग रहे? सोशल मीडिया और वित्तीय जगत में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ ट्रेडर्स को संभावित डील की जानकारी पहले से थी? क्योंकि जिस समय इतनी बड़ी शॉर्ट ट्रेडिंग की गयी, उस समय तक सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई खबर सामने नहीं आयी थी जो तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का संकेत देती. मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि अगर किसी को गोपनीय कूटनीतिक बातचीत या संभावित समझौते की जानकारी पहले से थी और उसी आधार पर ट्रेडिंग की गयी, तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आ सकता है. कोबेसी लेटर ने उठाये सवाल ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म “कोबेसी लेटर” ने इस पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक किया. उनके अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अचानक की गयी ट्रेडिंग ने बाजार में गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. हालांकि अब तक अमेरिकी प्रशासन या नियामक एजेंसियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की गयी है. युद्ध और बाजार का खतरनाक रिश्ता विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति अक्सर वैश्विक बाजारों को प्रभावित करती है. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कुछ निवेशक भारी मुनाफा कमाते हैं, लेकिन अगर इसमें अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल हो, तो यह गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है.
मुंबई: आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Wipro के शेयर को लेकर ICICI Securities ने सतर्क रुख अपनाया है। ब्रोकरेज ने 17 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में Wipro पर ‘HOLD’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹200 का टारगेट प्राइस तय किया है। कमजोर गाइडेंस से चिंता बरकरार रिपोर्ट के अनुसार, Wipro की टॉप-लाइन पर दबाव जारी है। Q1FY27 के लिए कंपनी ने -1.8% QoQ (कॉन्स्टेंट करेंसी) का कमजोर ऑर्गेनिक गाइडेंस दिया है। यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में राजस्व वृद्धि में सुधार की संभावना सीमित है। विश्लेषकों का मानना है कि डील बुकिंग में वृद्धि और वास्तविक राजस्व के बीच अंतर AI-आधारित लागत में गिरावट (deflation) और संभावित मार्केट शेयर लॉस के कारण हो सकता है। क्लाइंट ग्रोथ में मिला-जुला प्रदर्शन हालांकि, कंपनी के टॉप 10 क्लाइंट्स से राजस्व में 1.8% सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि FY26 में कुल रेवेन्यू में 0.3% की गिरावट देखी गई। यह दर्शाता है कि बड़े क्लाइंट्स से स्थिरता बनी हुई है, लेकिन समग्र प्रदर्शन अभी भी दबाव में है। मार्जिन पर बढ़ेगा दबाव Q4FY26 में मार्जिन मजबूत रहे, लेकिन FY27 में कुछ प्रमुख कारणों से दबाव बढ़ सकता है: बड़े डील्स में निवेश AI प्लेटफॉर्म बिजनेस का विस्तार दो महीने की अतिरिक्त वेतन वृद्धि इन फैक्टर्स के चलते कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका है। वैल्यूएशन और अनुमान ICICI Securities ने FY27 और FY28 के EPS अनुमान में 2% की हल्की बढ़ोतरी की है, जिसमें बायबैक और करेंसी डिप्रिसिएशन का सकारात्मक असर शामिल है। ब्रोकरेज ने FY28 के अनुमानित EPS ₹14 पर 14x का वैल्यूएशन मल्टीपल लागू करते हुए ₹200 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि Q2FY27 तक रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार नहीं होता है, तो वैल्यूएशन मल्टीपल में गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
मुंबई: ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने HDFC Asset Management Company (HDFC AMC) के शेयर पर अपनी सकारात्मक राय दोहराते हुए ‘BUY’ रेटिंग बनाए रखी है। 16 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने इस स्टॉक के लिए ₹3000 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। तिमाही प्रदर्शन रहा थोड़ा कमजोर रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC AMC की Q4FY26 तिमाही अपेक्षा से थोड़ी नरम रही। कंपनी की कोर इनकम ₹8.4 बिलियन रही, जो अनुमान से 2.3% कम है। इसका मुख्य कारण राजस्व में कमी बताया गया है। मैनेजमेंट के अनुसार, चौथी तिमाही में कम दिनों (90 दिन) की वजह से आय पर असर पड़ा, जबकि पिछली तिमाही Q3FY26 में 92 दिन थे। GST और नए TER नियमों का असर कंपनी ने संकेत दिया है कि नए TER (Total Expense Ratio) दिशानिर्देशों के तहत GST का असर लगभग 3-4 बेसिस पॉइंट (bps) तक हो सकता है। हालांकि, इस अतिरिक्त लागत को डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पास किया जा सकता है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। मजबूत इक्विटी प्रदर्शन से बढ़त HDFC AMC का इक्विटी सेगमेंट में प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। FY26 में नेट फ्लो में कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी 15% रही, जो उद्योग में दूसरी सबसे बड़ी है। Q4FY26 में इक्विटी मार्केट शेयर 6 bps बढ़कर 13% हो गया। आगे की रणनीति और अनुमान ब्रोकरेज का मानना है कि HDFC AMC अपने मजबूत ब्रांड और ट्रैक रिकॉर्ड के चलते नए नियमों के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल सकती है। रिपोर्ट में FY26 से FY28 के बीच इक्विटी यील्ड में हर साल 1 bps की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। इसके बावजूद, कंपनी के मजबूत फंडामेंटल को देखते हुए वैल्यूएशन मल्टीपल को 36x (मार्च 2028 के अनुमानित EPS पर) रखा गया है और ₹3000 का टारगेट कायम रखा गया है।
नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देश में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। New Labour Codes के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले कई महत्वपूर्ण अधिकारों को आसान और तेज बनाया गया है। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर ग्रेच्युटी (Gratuity) और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) पर पड़ा है। 1 साल में ही मिलेगा ग्रेच्युटी का लाभ अब तक किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक लगातार नौकरी करना जरूरी होता था। लेकिन नए नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में यह अवधि घटाकर 1 साल कर दी गई है। इस बदलाव से खासतौर पर उन कर्मचारियों को फायदा होगा जो कम अवधि के लिए नौकरी करते हैं या बार-बार जॉब बदलते हैं। 2 दिन में करना होगा F&F सेटलमेंट Code on Wages, 2019 के तहत अब कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने के बाद सिर्फ 2 कार्यदिवस के भीतर उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा। इसमें शामिल होंगे: बकाया वेतन लीव इनकैशमेंट अन्य सभी भुगतान पहले कंपनियों को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए 45 से 90 दिन तक का समय मिल जाता था। सभी परिस्थितियों में लागू होगा नियम यह नया नियम हर स्थिति में लागू होगा: कर्मचारी का इस्तीफा रिटायरमेंट छंटनी (Layoff) अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती, तो यह कानूनी उल्लंघन माना जाएगा। कर्मचारी इसके खिलाफ श्रम विभाग में शिकायत कर सकता है और देरी से भुगतान पर ब्याज का दावा भी कर सकता है। 30 दिनों में मिलेगा ग्रेच्युटी भुगतान ग्रेच्युटी के लिए पात्र बनने के बाद कंपनी को 30 दिनों के भीतर इसका भुगतान करना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के बाद आर्थिक राहत जल्दी मिलेगी। कर्मचारियों के लिए क्या मायने हैं ये बदलाव? इन नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा, पारदर्शिता और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है। ग्रेच्युटी अब ज्यादा लोगों के लिए सुलभ होगी नौकरी छोड़ने के बाद पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (18 मार्च 2026) को भी तेजी का सिलसिला जारी रहा। लगातार तीसरे दिन बाजार हरे निशान में खुला, जिससे निवेशकों में उत्साह देखा गया। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में मजबूत बढ़त सुबह 9:16 बजे के आसपास: Nifty 50 23,683 के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब 102 अंकों (0.43%) की बढ़त है BSE Sensex 76,389 के स्तर पर रहा, जिसमें 319 अंकों (0.42%) की तेजी दर्ज की गई इससे पहले मंगलवार को भी बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ था। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा बाजार की इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय संकेतों का बड़ा योगदान रहा: अमेरिकी बाजारों में बढ़त, खासकर ट्रैवल सेक्टर में खरीदारी एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख कच्चे तेल की कीमतों में नरमी विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब वैश्विक तनाव के बावजूद स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? वी के विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, Geojit Investments Limited के अनुसार: बाजार में अनिश्चितता के बावजूद रिकवरी देखने को मिल रही है कच्चा तेल $120 के पार नहीं गया, इससे राहत मिली आगे बाजार अच्छे और बुरे खबरों पर सीमित प्रतिक्रिया देगा सेक्टर में बदल रहा निवेश का रुख रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक अब कुछ सेक्टरों में अपनी रणनीति बदल रहे हैं: IT और महंगे FMCG से पैसा निकल रहा है टेलीकॉम, फार्मा, डिफेंस और फाइनेंशियल सेक्टर में निवेश बढ़ रहा है इससे टेलीकॉम जैसे सेक्टर में मजबूती देखी जा रही है। FII-DII का अलग-अलग रुख मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार: विदेशी निवेशक (FII) ने ₹4,741 करोड़ की बिकवाली की घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने ₹5,225 करोड़ की खरीदारी की यानी घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया। तेल और सोने का हाल कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट अमेरिका में क्रूड स्टॉक बढ़ने के संकेत सोने की कीमतें स्थिर, निवेशक सतर्क आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि: बाजार में फिलहाल हल्की सकारात्मक धारणा बनी रह सकती है वैश्विक घटनाओं और फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर रहेगी निवेशक सतर्क रहकर ही निवेश कर रहे हैं
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।