Global Oil Crisis

Protesters block roads in Nairobi after sharp rise in petrol and diesel prices across Kenya.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से केन्या में हिंसक प्रदर्शन, 4 लोगों की मौत

Kenya में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी Nairobi समेत कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हिंसा और झड़पों में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब अफ्रीकी देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर केन्या में ईंधन संकट तेजी से गहराता जा रहा है। सड़कों पर उतरे लोग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप सोमवार सुबह नैरोबी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं। कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कारों और “बोड़ा-बोड़ा” मोटरसाइकिलों को भी रोकने की कोशिश की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राजधानी का सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप पड़ गया। स्कूल बंद रहे और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने पड़े। ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी केन्या सरकार ने हाल ही में वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार: पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है डीजल की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत तक उछाल आया है डीजल की कीमत बढ़ने के बाद परिवहन कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए। गृह मंत्री ने की मौतों की पुष्टि केन्या के गृह मंत्री Kipchumba Murkomen ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज की हिंसा में चार केन्याई नागरिकों की मौत हुई है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।” उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर सीधे केन्या जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा। सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान केन्या सरकार ने कहा है कि वह डीजल और मिट्टी तेल की बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए लगभग 3 करोड़ 85 लाख डॉलर खर्च कर रही है। इसके अलावा ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए गुणवत्ता मानकों में अस्थायी छूट भी दी गई है। महंगाई और गरीबी से बढ़ा दबाव पूर्वी अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद केन्या की बड़ी आबादी अब भी आर्थिक संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। अगर तेल संकट और महंगाई पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में केन्या में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।  

surbhi मई 19, 2026 0
RBI Governor Sanjay Malhotra warns fuel prices may rise amid ongoing Middle East oil crisis
मध्य पूर्व संकट जारी रहा तो बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, RBI गवर्नर की चेतावनी

वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।  

surbhi मई 14, 2026 0
Strait of Hormuz with oil tankers and naval presence amid rising Middle East tensions
ट्रम्प बोले- ईरान देगा यूरेनियम, ईरानी मीडिया ने नकारा; होर्मुज मुद्दे पर 40 देशों की अहम बैठक आज

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि Iran अपने संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है और दोनों देशों के बीच शांति समझौता बेहद करीब है। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने ट्रम्प के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति “हवाई किले बना रहे हैं” और जमीनी स्तर पर ऐसी कोई सहमति नहीं बनी है। ट्रम्प का दावा: तेल सप्लाई सामान्य होगी व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि अगर यह समझौता हो जाता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई फिर से सामान्य हो जाएगी मिडिल ईस्ट में तनाव कम होगा उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि समझौता Islamabad में होता है, तो वे खुद वहां जा सकते हैं। होर्मुज संकट पर आज 40 देशों की अहम बैठक Strait of Hormuz में बढ़ते संकट को देखते हुए आज करीब 40 देशों की वर्चुअल बैठक आयोजित होगी। अध्यक्षता: France और United Kingdom उद्देश्य: समुद्री मार्गों की सुरक्षा और तेल सप्लाई सुनिश्चित करना खास बात: इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं होगा क्या होता है यूरेनियम एनरिचमेंट? यूरेनियम एक ऐसा तत्व है जिसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा उत्पादन में और परमाणु हथियार बनाने में दोनों में किया जा सकता है। अंतर सिर्फ इसकी एनरिचमेंट (शुद्धता) में होता है: कम स्तर: ऊर्जा उत्पादन 90% तक एनरिचमेंट: परमाणु हथियार संभव रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान के पास 5–6 टन एनरिच्ड यूरेनियम है 120–130 किलोग्राम यूरेनियम करीब 60% तक एनरिच्ड है अमेरिका-इजराइल का दबाव अमेरिका और Israel लंबे समय से ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने का दबाव डालते रहे हैं। पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट्स 1. इजराइल-लेबनान सीजफायर अमेरिका की पहल पर 10 दिन का युद्धविराम लागू, लेकिन उल्लंघन के आरोप भी सामने आए। 2. सैन्य गतिविधियां तेज मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर, बातचीत फेल होने पर फिर युद्ध की चेतावनी। 3. ईरान-अमेरिका वार्ता ट्रम्प ने कहा–शांति समझौता “बेहद करीब”, जल्द आमने-सामने बातचीत संभव। 4. तेल बाजार पर असर सीजफायर की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 5. अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी G-7 देशों ने चेतावनी दी कि लंबा संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। ट्रम्प के दावे और ईरान के खंडन के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आज होने वाली अंतरराष्ट्रीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
US naval blockade near Strait of Hormuz with heightened tensions and Trump warning Iran of military action
US Naval Blockade: होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी, ट्रंप की धमकी–घेराबंदी तोड़ी तो ‘उड़ा देंगे जहाज’

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। United States ने Strait of Hormuz समेत Iran के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप की सीधी धमकी Truth Social पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा: “अगर कोई जहाज हमारी नाकेबंदी के पास भी आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा” “उसी तरीके से, जैसे हम समुद्र में ड्रग तस्करों की नावों को नष्ट करते हैं” यह बयान साफ तौर पर अमेरिका के आक्रामक रुख को दर्शाता है। ‘ईरान की नौसेना तबाह हो चुकी’ ट्रंप ने दावा किया: ईरान की नौसेना लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी है 158 जहाज तबाह कर दिए गए हैं बचे हुए जहाज छोटे “फास्ट अटैक क्राफ्ट” हैं, जिनसे अमेरिका को कोई खास खतरा नहीं नाकेबंदी कब और कैसे लागू हुई? United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक: नाकेबंदी सोमवार शाम 7:30 बजे (IST) से लागू हुई यह सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होगी जो भी पोत ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करेगा या बाहर निकलेगा, वह इस कार्रवाई के दायरे में आएगा किन जहाजों को मिली छूट? अमेरिका ने स्पष्ट किया: जो जहाज गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा कर रहे हैं उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी पृष्ठभूमि: फेल हुई वार्ता यह कदम उस समय उठाया गया जब Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया है। क्या हो सकता है आगे? विशेषज्ञों के मुताबिक: यह कदम वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित कर सकता है खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है बड़े देशों के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष का खतरा भी बन सकता है फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Iran इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कूटनीतिक रास्ता निकलेगा या हालात और बिगड़ेंगे।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
US Iran conflict
ईरान के खिलाफ अमेरिका का बड़ा एक्शन: बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी शुरू, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

वॉशिंगटन, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध अब युद्ध के मुहाने पर पहुंच गए हैं। इस्लामाबाद में परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता के पूरी तरह विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति के आदेश पर, 13 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकेबंदी (Blockade) लागू कर दी गई है। यह कार्रवाई भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 7:30 बजे से प्रभावी हो गई है, जिसका सीधा असर अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के व्यापारिक मार्गों पर पड़ेगा।   परमाणु वार्ता की विफलता और नाकेबंदी का निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से चल रही हाई-स्टेक बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हालांकि अन्य कई मोर्चों पर दोनों देशों के बीच प्रगति हुई थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 'परमाणु कार्यक्रम' था, जिस पर कोई समझौता नहीं हो पाया। ट्रंप ने बताया कि ईरान अपने परमाणु लक्ष्यों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जिसके कारण वाशिंगटन को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों को टारगेट किया जाएगा। यह नाकेबंदी बिना किसी भेदभाव के सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। हालांकि, सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अमेरिकी सेना द्वारा नहीं रोका जाएगा।   'प्रोटेक्शन फीस' और नौसैनिक माइंस पर तकरार इस नाकेबंदी के पीछे ईरान द्वारा जहाजों से वसूले जा रहे कथित 'अवैध टोल' को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट में 'वर्ल्ड एक्सटॉर्शन' (वैश्विक उगाही) करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान समुद्री माइंस बिछाने की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय जहाजों को डरा रहा है और उनसे सुरक्षा के नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि जो कोई भी इस गैर-कानूनी टोल का भुगतान करेगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने कुछ शिपिंग लेन को 'खतरनाक क्षेत्र' घोषित कर जहाजों को अपने जलक्षेत्र में प्रवेश के लिए मजबूर किया, जहां से सुरक्षा शुल्क वसूला गया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत इस तरह की वसूली को 'प्रोटेक्शन रैकेट' माना गया है। इसके जवाब में, अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक जहाज 'यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन' और 'यूएसएस माइकल मर्फी' ने होर्मुज स्ट्रेट में गश्त शुरू कर दी है ताकि समुद्री माइंस को हटाया जा सके और जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा सके।   ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयास दूसरी ओर, तेहरान ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए नाकेबंदी को अनुचित बताया है। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने शांति बहाली के लिए नेक नीयती से बातचीत की थी और वे समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके थे। अराघची ने अमेरिका पर 'अत्यधिक मांगों' का आरोप लगाते हुए कहा कि दुश्मनी का जवाब दुश्मनी से ही पैदा होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की नाकेबंदी से हालात और भी ज्यादा बिगड़ सकते हैं।   इस बीच, वैश्विक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से फोन पर चर्चा कर शांति प्रयासों में मदद की पेशकश की है। एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, अमेरिकी नौसेना जल्द ही सुरक्षित नेविगेशन रूट्स को नागरिक शिपिंग के लिए साझा करेगी। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हैं, क्योंकि इस नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति और बीमा दरों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0
Iran US ceasefire diplomacy meeting scene with flags ahead of Islamabad peace talks
ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद बातचीत शुरू, इस्लामाबाद में शुक्रवार को होगी अहम बैठक

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। Iran और United States के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनने के बाद अब दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होने जा रही है। यह अहम बातचीत Islamabad में शुक्रवार को आयोजित होगी, जिसकी मेजबानी Pakistan करेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, यह बातचीत तेहरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर होगी। इस प्रस्ताव में सबसे अहम मांग Strait of Hormuz पर नियंत्रण और सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की है। सीजफायर के बाद शुरू हुई कूटनीतिक प्रक्रिया यह घटनाक्रम तब सामने आया जब Donald Trump ने ईरान पर हमले अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया। इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने दो हफ्ते के भीतर स्थायी समझौते की दिशा में काम करने की बात कही है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बना मुख्य मुद्दा दुनिया के लगभग 20% तेल सप्लाई का रास्ता Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा आंशिक नाकेबंदी के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई थी, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ीं और कई देशों में सप्लाई प्रभावित हुई। अब अमेरिका ने इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलने की शर्त रखी है, जबकि ईरान इसके बदले आर्थिक प्रतिबंध हटाने और क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से बढ़ी उम्मीदें Shehbaz Sharif ने दोनों देशों के बीच सीजफायर की पुष्टि करते हुए इस्लामाबाद में बातचीत के लिए आमंत्रण दिया है। उन्होंने इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया है। प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल? ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव में शामिल प्रमुख मांगें: हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण मध्य-पूर्व से अमेरिकी सैनिकों की वापसी युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना विदेशी बैंकों में जमा ईरानी संपत्तियों की रिहाई हालांकि, ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका पर “पूरी तरह भरोसा नहीं करता” और किसी भी गलती पर कड़ी प्रतिक्रिया देगा। इजरायल की चुप्पी बरकरार इस पूरे घटनाक्रम पर Israel की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि वह इस संघर्ष का अहम पक्ष रहा है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Strategic Bab el Mandeb Strait connecting Red Sea and Gulf of Aden used for global oil transport
ईरान की नई चेतावनी: बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट बंद करने की धमकी, वैश्विक तेल संकट और गहरा सकता है

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा संकेत दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट गहराया हुआ है, और अब ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी बंद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो दुनिया के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट और गंभीर रूप ले सकता है। युद्ध के 26वें दिन बढ़ी टकराव की आशंका ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के 26वें दिन हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने न केवल शांति प्रस्ताव को ठुकराया है, बल्कि साफ संकेत दिया है कि वह युद्ध को नए क्षेत्रों तक फैलाने के लिए तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि अगर उस पर दबाव या हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट? बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे जाकर अरब सागर तथा हिंद महासागर से मिलता है। इस मार्ग से रोजाना लगभग 60 से 70 लाख बैरल तेल का परिवहन होता है यूरोप और एशिया के बीच व्यापारिक जहाजों का प्रमुख रास्ता वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। दोहरे संकट की आशंका पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव है। ऐसे में यदि बाब-अल-मंदेब भी प्रभावित होता है, तो यह “डबल चोकपॉइंट” स्थिति बन सकती है, जिससे: तेल की कीमतों में तेज उछाल सप्लाई चेन बाधित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर वैश्विक बाजार पर संभावित असर विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों अहम समुद्री मार्गों पर संकट गहराने से ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है। खासतौर पर एशिया और यूरोप जैसे बड़े उपभोक्ता क्षेत्रों को इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Fuel pump showing petrol prices as global crude oil rises amid Middle East tensions
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद राहत, सरकार का संकेत-फिलहाल नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने की कोई योजना नहीं है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 99.75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार गई। हालांकि शाम तक कीमतें कुछ नरम पड़ीं और यह लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थीं। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।   महंगाई पर फिलहाल बड़ा असर नहीं लोकसभा में इस मुद्दे पर बोलते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत की महंगाई दर पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि Reserve Bank of India की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें आधार स्तर से 10 प्रतिशत बढ़ती हैं और उसका पूरा असर घरेलू बाजार में आता है, तो महंगाई दर में केवल लगभग 30 बेसिस पॉइंट यानी करीब 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम अवधि में महंगाई पर असर कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें रुपये की विनिमय दर, वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति और समग्र आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं।   सरकारी तेल कंपनियों की मजबूत स्थिति सरकारी अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां-Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited-वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में हैं। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में इन तीनों कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 192 प्रतिशत बढ़कर 57,810 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 19,768 करोड़ रुपये था। मजबूत वित्तीय स्थिति के कारण ये कंपनियां फिलहाल खुदरा स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और नहीं बढ़ता तथा ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले नहीं होते, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसके बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है।   भारत में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतें जून 2022 में जब ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर से ऊपर पहुंच गया था, तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर थी। इसके बाद मार्च 2024 में कीमतों में 2 रुपये की कटौती की गई, जिससे पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। 30 अक्टूबर 2024 को मार्केटिंग कॉस्ट एडजस्टमेंट के कारण केवल 5 पैसे की बढ़ोतरी हुई और वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है।   टैक्स नीति से मिलती है राहत विशेषज्ञों के अनुसार सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए समय-समय पर उत्पाद शुल्क में बदलाव करती रहती है। 8 अप्रैल 2025 को सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिससे सालाना लगभग 34,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। वर्तमान में पेट्रोल पर SAED 13 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर है। इससे पहले नवंबर 2021 और मई 2022 में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर पेट्रोल की कीमत में 13 रुपये और डीजल में 16 रुपये प्रति लीटर की राहत दी थी।   वैश्विक ऊर्जा बाजार पर युद्ध का असर ऊर्जा विशेषज्ञ Jim Burkhard (S&P Global Energy) का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है और Strait of Hormuz के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट बन सकता है। हाल के दिनों में सऊदी अरब और कतर के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े और देश में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0