वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी सैन्य तनाव के बीच राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे के खिलाफ सभी सैन्य हमले रोकने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब हाल के दिनों में सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। अमेरिकी मीडिया कंपनी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष अब संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार (30 जून) को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम बैठक होगी। फिलहाल रुकी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने अस्थायी रूप से सभी सैन्य (काइनेटिक) गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह कदम उस अंतरिम समझौते को बचाने की कोशिश माना जा रहा है, जिसकी घोषणा दोनों देशों ने करीब 11 दिन पहले लंबे तनाव को कम करने के उद्देश्य से की थी। समझौते के बाद भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की थी, जिससे युद्धविराम पर सवाल उठने लगे थे। अब दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है। दोहा में होगी अहम बैठक अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक चर्चा के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद इसका स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े विवादों और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा होगी। समुद्री व्यापार रहेगा सामान्य अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बातचीत शुरू होने तक दोनों देश सैन्य कार्रवाई से परहेज करेंगे। एक अधिकारी ने कहा कि सभी सैन्य गतिविधियों को फिलहाल रोकने पर सहमति बन गई है। दूसरे अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए पीछे हटेंगे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर तत्काल असर पड़ने की आशंका कम हो गई है। होर्मुज विवाद रहेगा वार्ता का केंद्र दोहा में होने वाली बैठक का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों का समाधान होगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोहा वार्ता सकारात्मक रहती है, तो मध्य पूर्व में हालिया सैन्य तनाव कम करने और व्यापक कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और विदेशी शक्तियां होर्मुज के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती रहीं, तो इस जलडमरूमध्य को खुला रखना संभव नहीं होगा। रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल ईरान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य देश ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। होर्मुज पर विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि ऐसा हुआ तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग अराघची ने कहा कि समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह युद्धविराम लागू कराए तथा इजरायली हमलों को रोके। अमेरिका पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी अमेरिका के खिलाफ तीखा बयान दिया। संगठन के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है और वह बार-बार अपने वादों से पीछे हटता है। उन्होंने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा, "जैसा हमने पहले भी कहा था, दुश्मन धोखेबाज है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह किसी भी समय अपने वादे तोड़ सकता है।" 'हमले का मिलेगा और कड़ा जवाब' आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों की ओर से कोई नया सैन्य हमला किया गया तो ईरान पहले से अधिक ताकत के साथ जवाब देगा। मोहेबी ने कहा कि यदि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि ईरान इस मार्ग को बंद करने की दिशा में कदम उठाता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
US-Iran Attack Hormuz Strait: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के आरोप के बाद अमेरिका ने ईरान के मिसाइल, ड्रोन भंडारण ठिकानों और तटीय रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ताजा घटनाक्रम के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही एक बार फिर बाधित हो गई है। ड्रोन हमले के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि उसकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार यह कार्रवाई 25 जून को M/V Ever Lovely नामक सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई। CENTCOM ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और अमेरिकी बल लगातार समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं। कार्रवाई के बाद अमेरिकी सेना ने हमलों का 37 सेकंड का वीडियो भी जारी किया। अमेरिका ने ईरान पर लगाया युद्धविराम उल्लंघन का आरोप अमेरिका का दावा है कि मालवाहक जहाज ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर ड्रोन हमला किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया। CENTCOM ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। हमलों की जगह का खुलासा नहीं अमेरिका ने यह नहीं बताया कि ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। उधर ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के ताहेरोयेह घाट के पास देर रात विस्फोटों की आवाज सुनी गई। सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया कि क्षेत्र में किसी प्रोजेक्टाइल के गिरने से धमाके हुए। ट्रंप बोले- युद्धविराम का 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित ड्रोन हमले को युद्धविराम समझौते का "मूर्खतापूर्ण उल्लंघन" बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि एक ड्रोन ने बेहद महंगे मालवाहक जहाज को सीधे निशाना बनाया, जबकि तीन अन्य ड्रोन को मार गिराया गया। ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि युद्धविराम का मतलब पूरी तरह गोलीबारी बंद होना नहीं, बल्कि हिंसा में कमी आना है। ताजा घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। जेडी वेंस ने दी सख्त चेतावनी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि ईरान की ओर से दोबारा हमला किया गया तो अमेरिका उसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि ईरान को समझौते के किसी पहलू पर आपत्ति है तो बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। IRGC ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने फिर किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने शांति समझौते के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन किया है। ईरान का कहना है कि जिस मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति निर्धारित मार्ग से अलग रास्ता अपनाया था। फिर ठप हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यहां समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया था। बाद में युद्धविराम के बाद सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई थी। अब ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद एक बार फिर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल से लागू है युद्धविराम अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है। इसके बावजूद बीच-बीच में समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच 17 जून को 14 सूत्रीय शांति समझौते पर सहमति बनी थी, जिसमें सैन्य गतिविधियां रोकने और 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया गया था। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पहली दौर की वार्ता भी हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 और 29 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है, जहां स्थायी शांति समझौते के अगले चरण पर चर्चा की जाएगी।
तेहरान: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद भले ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा व्यापारिक गतिविधियों के लिए खोल दिया गया हो, लेकिन अब यहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए अनिवार्य शर्तें लागू कर दी गई हैं। नए नियमों के तहत किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश से कम से कम 48 घंटे पहले अपनी यात्रा की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा जहाजों को अग्रिम पंजीकरण, सरकारी अनुमति और पर्याप्त बीमा (इंश्योरेंस) का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इन शर्तों का पालन किए बिना किसी भी जहाज को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दुनिया की 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है इस मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में ईरान के नए नियमों का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग पर लागू नई व्यवस्था से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। नई अथॉरिटी करेगी निगरानी इन नियमों को लागू करने और समुद्री गतिविधियों की निगरानी के लिए ईरान ने एक नई संस्था 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) का गठन किया है। यह संस्था अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका उद्देश्य तीन महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और नियंत्रित व्यापारिक गतिविधियों को फिर से बहाल करना है। PGSA ने कहा है कि 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर और संबंधित विभागों से निर्देश मिलने के बाद इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य अथॉरिटी ने जहाज संचालकों के लिए एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल भी जारी किया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के इच्छुक सभी जहाजों को इस पोर्टल पर अपनी यात्रा, कार्गो और बीमा संबंधी जानकारी पहले से दर्ज करनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, समुद्री यातायात को व्यवस्थित करना और क्षेत्र में किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम को कम करना है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर लागू नए नियमों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। चूंकि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए नियमों के सख्त अनुपालन और अतिरिक्त प्रक्रियाओं का असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। ईरान का कहना है कि ये कदम सुरक्षा कारणों से उठाए गए हैं और इनका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब किसी भी समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), में समुद्री यातायात को बाधित करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की यह क्षमता केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए भी बड़ा जोखिम बन सकती है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कुछ खुफिया सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि होर्मुज पर ईरान का प्रभाव अमेरिका के लिए परमाणु हथियारों से भी बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री रास्ते से होता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में मिसाइलें, ड्रोन, मिसाइल लॉन्चर और तेज गति वाली नौकाएं मौजूद हैं, जिनकी मदद से वह इस समुद्री क्षेत्र में दबाव बनाने की क्षमता रखता है। अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी नजरें अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि समझौते के प्रमुख बिंदुओं में ईरान का परमाणु हथियार नहीं रखने का वादा और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना शामिल है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में समझौते का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक कर सकते हैं। अभी तक इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों की चिंता बरकरार भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ रही हो, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की रणनीतिक पकड़ भविष्य में भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अनिश्चितता का बड़ा कारण बनी रह सकती है।
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से भेजे गए कई ड्रोन को मार गिराया, जिसके बाद ईरानी तटीय निगरानी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई। होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे ड्रोन: अमेरिकी सेना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कम से कम चार एकतरफा हमलावर ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में बढ़ रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये ड्रोन क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों या अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन सकते थे। सेंटकॉम ने कहा कि समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्रोन को नष्ट करना आवश्यक था। ड्रोन हमले के बाद रडार ठिकानों पर कार्रवाई अमेरिकी सेना के मुताबिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने के बाद ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष ने इसे आत्मरक्षा और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कदम बताया है। सेंटकॉम ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बल किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने चेतावनी फायरिंग का दावा किया दूसरी ओर, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने दावा किया कि ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट समुद्री क्षेत्र में चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। रिपोर्ट के अनुसार यह गतिविधि लारक द्वीप के आसपास हुई, जो बंदर अब्बास बंदरगाह के निकट स्थित है। हईरान की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संघर्ष विराम के बावजूद जारी है तनाव हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और कूटनीतिक वार्ताओं की कोशिशें हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा। वॉशिंगटन और तेहरान लगातार एक-दूसरे पर समझौतों के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता और चल रही वार्ताओं को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम है होर्मुज होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों, तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के कई ड्रोन निर्माण केंद्र, लॉन्चिंग सुविधाएं और मिसाइल उत्पादन से जुड़े अहम ठिकाने नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के पास अब भी कुछ मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है। वार्ता जारी, लेकिन मतभेद बरकरार तनाव के बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब भी गतिरोध बना हुआ है। तेहरान ने अमेरिका पर अपने कुछ वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया है, जिनमें ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग भी शामिल है। फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी व्यापक समझौते की संभावना पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित और सामान्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं के बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वे होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने में सहयोग करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश रॉयल नेवी ने जिब्राल्टर में तैनात अपने युद्धपोत RFA Lyme Bay को इस मिशन के लिए तैयार रखा है। इस जहाज पर ब्रिटेन और फ्रांस के सैनिक मौजूद हैं। साथ ही माइंस को निष्क्रिय करने वाले विशेष समुद्री ड्रोन और सैन्य उपकरण भी तैनात किए गए हैं। शांति समझौते के बाद शुरू हो सकता है ऑपरेशन ब्रिटेन ने साफ किया है कि वह सीधे ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा। हालांकि, यदि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौता हो जाता है और हालात सामान्य होते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से माइंस हटाने का अभियान शुरू किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ समझौते को लेकर “व्यापक सहमति” बन चुकी है, हालांकि अंतिम रूप अभी बाकी है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हालिया तनाव के दौरान यहां बड़ी संख्या में समुद्री माइंस बिछाई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जहाजों को केवल निर्धारित रूट से गुजरने के निर्देश भी दिए थे। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। ट्रंप ने NATO देशों की आलोचना की थी ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका चाहता था कि NATO सहयोगी देश होर्मुज को सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। लेकिन कई यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया था कि वे सीधे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। ब्रिटेन और फ्रांस ने अब संकेत दिया है कि शांति बहाल होने के बाद वे माइंस हटाने और समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने में मदद करेंगे। ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने किया युद्धपोत का दौरा ब्रिटेन के रक्षा मंत्री John Healey (कुछ रिपोर्टों में रक्षा अधिकारियों का हवाला) ने जिब्राल्टर में मौजूद RFA Lyme Bay का दौरा किया। यह एक amphibious warship है, जिसे समुद्री सुरक्षा और माइंस हटाने के विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ईरान ने इजरायली ड्रोन गिराने का दावा किया इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुजगान प्रांत के ऊपर उड़ रहे एक इजरायली टोही ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, नौसेना ने ड्रोन का मलबा भी बरामद कर लिया है। इजरायल की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो उस पर पहले से ज्यादा तीव्र और ताकतवर बमबारी की जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यदि ईरान तय शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को समाप्त कर दिया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को ईरान सहित सभी देशों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. ट्रंप बोले- नहीं माने तो बरसेंगे बम ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ज्यादा आक्रामक होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देगा. उन्होंने लिखा कि “अगर ईरान सहमत नहीं होता, तो बमबारी पहले से कहीं अधिक ताकतवर होगी.” ट्रंप के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने भी दी चेतावनी ट्रंप का यह बयान ईरानी संसद अध्यक्ष एमबी गालिबफ की टिप्पणी के बाद आया है. गालिबफ ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर “नया समीकरण” तैयार हो रहा है और अमेरिका की नाकाबंदी नीति उसके लिए भारी साबित होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने युद्धविराम का उल्लंघन कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है. ईरान ने आरोप लगाया कि नाकाबंदी की वजह से जहाजों, तेल और गैस आपूर्ति की सुरक्षा प्रभावित हुई है. प्रोजेक्ट फ्रीडम अस्थायी रूप से रोका गया इस बीच ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए शुरू किये गये “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच “पूर्ण और अंतिम समझौते” को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध और कूटनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह फैसला लिया गया. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री नाकाबंदी अभी भी जारी रहेगी. पाकिस्तान ने ट्रंप को कहा धन्यवाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रंप का यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा. शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा कूटनीति और संवाद के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा. होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है.
मस्कट/तेहरान, 4 मई: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल Strait of Hormuz में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी United Kingdom Maritime Trade Operations ने जानकारी दी है कि ईरान के सिरिक तट के पास एक मालवाहक जहाज पर कई छोटी नौकाओं के जरिए हमला किया गया। कैसे हुआ हमला? रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने छोटी-छोटी तेज गति वाली नौकाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्गो शिप को निशाना बनाया। इस तरह के हमले आमतौर पर ‘स्वार्म टैक्टिक्स’ के रूप में देखे जाते हैं, जिसमें कई नावें एक साथ हमला कर जहाज को घेर लेती हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन था और इसका मकसद क्या था। चालक दल सुरक्षित, लेकिन खतरा बरकरार सबसे राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं। United Kingdom Maritime Trade Operations ने क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और सावधानीपूर्वक मार्ग तय करने की सलाह दी है। ईरान का दावा– ‘हमारा नियंत्रण कायम’ घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि Strait of Hormuz पर उनका नियंत्रण पूरी तरह बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जो जहाज अमेरिका या इजराइल से जुड़े नहीं हैं, वे निर्धारित शुल्क देकर सुरक्षित तरीके से इस मार्ग से गुजर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका-ईरान टकराव की पृष्ठभूमि Donald Trump प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी गई है। अमेरिकी नौसेना इस इलाके में सक्रिय है और हर आने-जाने वाले जहाज पर नजर रख रही है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें 30 दिनों के भीतर विवाद सुलझाने की बात कही गई है। हालांकि Donald Trump ने इस प्रस्ताव को लेकर संदेह जताया है और किसी ठोस समझौते की संभावना को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। क्यों बेहद अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है खाड़ी देशों से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा चिंता पिछले कुछ समय में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले, जब्ती और सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा कमजोर हो रही है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। OPEC+ ने कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जो ऐसे समय आया है जब सप्लाई चेन पहले से दबाव में है। खास बात यह है कि यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात के संगठन से अलग होने के तुरंत बाद लिया गया है, जिससे बाजार में नई रणनीतिक हलचल शुरू हो गई है। उत्पादन बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया? हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में सऊदी अरब और रूस समेत सात प्रमुख देशों–इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान–ने मिलकर यह तय किया कि जून 2026 से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त कच्चे तेल का उत्पादन किया जाएगा। यह फैसला पहले से लागू स्वैच्छिक कटौती (Voluntary Cuts) में ढील देने का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2023 में हुई थी। अब इन देशों का लक्ष्य है कि वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी को कम किया जाए और कीमतों को स्थिर रखा जा सके। ईरान संघर्ष और सप्लाई संकट का असर 28 फरवरी से जारी ईरान से जुड़े संघर्ष ने तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज–जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है–के प्रभावित होने से सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। ऐसे में OPEC+ देशों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाकर बाजार में संतुलन बनाया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि परिस्थितियों के अनुसार इस फैसले की समीक्षा की जाती रहेगी। क्या यह कदम कीमतों को काबू में रख पाएगा? विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन बढ़ाने का यह कदम वैश्विक बाजार में राहत ला सकता है, लेकिन इसका असर पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि भू-राजनीतिक हालात कितनी तेजी से बदलते हैं। इसके अलावा, जनवरी 2024 के बाद जिन देशों ने तय सीमा से अधिक उत्पादन किया है, उनके लिए यह मौका है कि वे अपनी अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई कर सकें और Declaration of Cooperation के नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकें। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी Joint Ministerial Monitoring Committee द्वारा की जाएगी। आगे क्या है रणनीति? OPEC+ देशों की अगली महत्वपूर्ण बैठक 7 जून 2026 को प्रस्तावित है। अब से संगठन हर महीने बैठक करेगा, ताकि बाजार की स्थिति–खासतौर पर कीमतों और सप्लाई–पर नजर रखी जा सके। फिलहाल संगठन “वेट एंड वॉच” की रणनीति पर काम कर रहा है, क्योंकि युद्ध और वैश्विक तनाव के चलते हालात तेजी से बदल सकते हैं।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया है और इसमें दो चरणों में तनाव कम करने की रणनीति सामने रखी गई है। क्या है ईरान का नया प्रस्ताव? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सबसे पहले दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को खोलने की बात कही है। इसके बाद दूसरे चरण में परमाणु मुद्दे पर बातचीत करने का प्रस्ताव रखा गया है। ईरान का मानना है कि पहले समुद्री व्यापार सामान्य होना चाहिए और क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होना जरूरी है, तभी परमाणु वार्ता सार्थक हो सकती है। ट्रंप का सख्त रुख दूसरी ओर Donald Trump ने साफ कर दिया है कि अगर तेहरान बातचीत करना चाहता है, तो उसे सीधे वॉशिंगटन से संपर्क करना होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 10 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने मौजूदा स्टॉक को देश से बाहर भेजे। पाकिस्तान की भूमिका और कूटनीतिक हलचल इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में इस्लामाबाद के कई दौरों पर रहे हैं, जहां उन्होंने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की। इसके साथ ही वे जल्द ही रूस के दौरे पर भी जाएंगे और राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात करेंगे, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। क्या बन सकती है डील? कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि एक संभावित फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसमें न सिर्फ अमेरिका और ईरान, बल्कि खाड़ी देश भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। Strait of Hormuz से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है, ऐसे में इसका खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने एक नई कूटनीतिक पहल करते हुए Pakistan के जरिए United States को दो चरणों वाला शांति प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को दोबारा खोलना है। क्या है टू-स्टेज प्लान? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि बातचीत दो चरणों में आगे बढ़े— पहले चरण में समुद्री संकट को खत्म करने, अमेरिकी नेवल नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर जोर दिया गया है। दूसरे चरण में परमाणु मुद्दों और अन्य रणनीतिक विषयों पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई है। ईरान का मानना है कि जब तक समुद्री रास्ते सामान्य नहीं होते, तब तक किसी बड़े समझौते की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल है। अमेरिका की शर्तें और रुख अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वाशिंगटन चाहता है कि ईरान कम से कम 10 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन रोक दे और अपना न्यूक्लियर स्टॉक विदेश भेजे। हालांकि, ईरान के भीतर इन शर्तों को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है, जिससे बातचीत में गतिरोध बना हुआ है। कूटनीतिक हलचल तेज ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi फिलहाल पाकिस्तान और ओमान के दौरे पर हैं और जल्द ही Russia में राष्ट्रपति Vladimir Putin से मुलाकात करने वाले हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने अपने प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी है, जिससे दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी कायम है। क्यों अहम है होर्मुज? Strait of Hormuz दुनिया का एक अहम तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक सप्लाई का लगभग 20% तेल गुजरता है। इस मार्ग पर तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ता है। अब आगे क्या? हालांकि व्हाइट हाउस को यह प्रस्ताव मिल चुका है, लेकिन अमेरिका इस पर आगे बढ़ेगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर मतभेद गहरे हैं, जिससे समझौते की राह आसान नहीं दिखती।
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में खुली धमकी देते हुए कहा है कि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी जहाजों को “पहली मिसाइल” में ही डुबो दिया जाएगा। नाकेबंदी के बाद भड़का ईरान अमेरिका ने हाल ही में ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर सख्त रोक लगा दी है। अमेरिकी सेना ने साफ चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर बल प्रयोग किया जाएगा। हजारों सैनिक और युद्धपोत तैनात कई जहाजों को वापस लौटाया गया होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी निगरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नाकेबंदी शांति वार्ता फेल होने के बाद लागू की गई। ईरान की खुली चेतावनी ईरान के सैन्य नेतृत्व ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दबाव बनाया, तो जवाब सैन्य होगा। अमेरिकी जहाज मिसाइलों के निशाने पर नाकेबंदी को “उकसावे की कार्रवाई” बताया युद्धविराम टूटने की चेतावनी ईरान ने यह भी कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो पूरे क्षेत्र में व्यापार और शिपिंग बाधित हो सकती है। ट्रंप का सख्त रुख, बढ़ी सैन्य तैनाती डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में हजारों अतिरिक्त सैनिक भेजे गए कई एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात रणनीति: ईरान को समझौते के लिए मजबूर करना वैश्विक असर, तेल बाजार पर दबाव होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। सप्लाई बाधित होने का खतरा तेल कीमतों में उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर शांति वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। पहले दौर की वार्ता फेल दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी सीजफायर भी खतरे में आगे क्या? अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की धमकी ने हालात को विस्फोटक बना दिया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव: बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा सकता है पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान के अगले कदम और संभावित शांति वार्ता पर टिकी हुई है।
वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ईरानी तेल ले जा रहे चीनी जहाजों को रोका जाएगा। यह कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के सबसे अहम रास्ते Strait of Hormuz पर लागू की जा रही है। 10,000 सैनिक और नेवल शिप्स तैनात अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी को लागू करने के लिए: 10,000 से ज्यादा सैनिक करीब 12 नौसैनिक जहाज (Naval Ships) तैनात किए हैं। सेना के अनुसार, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में एक भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार नहीं कर पाया। 6 व्यापारिक जहाजों को वापस लौटने का आदेश दिया गया हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 4 जहाजों के गुजरने का दावा भी किया गया हर देश के जहाजों पर लागू नियम अमेरिका की यह कार्रवाई: ईरान के बंदरगाहों में जाने या निकलने वाले सभी जहाजों पर लागू जहाज किसी भी देश का हो, नियम समान रहेगा बातचीत की कोशिश भी जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं: वॉशिंगटन में लेबनान-इजराइल सीजफायर पर पहले दौर की बातचीत हुई इसे सकारात्मक बताया गया, अगली बैठक की तैयारी जारी 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. छूट खत्म होने की चेतावनी अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा कि ईरानी तेल बिक्री पर दी गई अस्थायी छूट जल्द खत्म होगी। 2. यूरोप का अलग मिशन यूरोपीय देश होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए नया अंतरराष्ट्रीय मिशन बना रहे हैं–खास बात, इसमें अमेरिका शामिल नहीं है। 3. कनाडा की मदद Canada ने Lebanon के लिए 40 मिलियन डॉलर की सहायता का ऐलान किया। 4. हिजबुल्लाह के हमले Hezbollah ने दावा किया कि उसने 24 घंटे में 34 हमले किए, जिनमें Israel के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। 5. ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अगले 2 दिनों में फिर शुरू हो सकती है। होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी ने वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार को सीधे प्रभावित किया है। जहां एक ओर सैन्य दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं–आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच JD Vance के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार को Islamabad पहुंच गया, जहां United States और Iran के बीच अहम शांति वार्ता होने जा रही है। यह बातचीत छह सप्ताह से जारी संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों के तहत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसने न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। वार्ता से पहले ही सख्त रुख, ईरान की नई शर्तें औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिए हैं कि बातचीत आसान नहीं होगी। ईरानी संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब United States लेबनान में स्थिति और ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करने जैसे मुद्दों पर ठोस आश्वासन देगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका “ईमानदार समझौता” पेश करता है, तो ईरान बातचीत के लिए तैयार है। ट्रंप का सख्त संदेश, वेंस का संतुलित बयान वार्ता से पहले Donald Trump ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के पास “कोई पत्ते नहीं हैं” और वह सिर्फ बातचीत के जरिए ही स्थिति संभाल सकता है। दूसरी ओर, जेडी वेंस ने उम्मीद जताई कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जा सकती है, लेकिन चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने चाल चलने की कोशिश की तो अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा। भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल और कड़ी सुरक्षा इस वार्ता की गंभीरता का अंदाजा दोनों पक्षों के बड़े प्रतिनिधिमंडलों से लगाया जा सकता है। ईरान की ओर से करीब 70 सदस्यीय टीम पहुंची है, जबकि अमेरिका की ओर से पहले से ही लगभग 100 अधिकारियों की टीम Islamabad में मौजूद है। पाकिस्तान सरकार ने राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की है, जिसमें हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार हाल ही में घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। Strait of Hormuz में अब भी पाबंदियां बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं Lebanon में Hezbollah और Israel के बीच झड़पें जारी हैं, जिससे शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर टिकी नजरें इस संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर गहरा असर डाला है। ईरान जहां प्रतिबंध हटाने और Strait of Hormuz पर नियंत्रण की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका इस पर सख्त रुख बनाए हुए है। ऐसे में यह वार्ता न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है। अनिश्चित भविष्य, समझौता या टकराव? दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर अब भी गहरी खाई बनी हुई है। पाकिस्तान के सूत्रों के मुताबिक, वार्ताकारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं - या तो ठोस समझौता करें या बातचीत छोड़ दें। ऐसे में आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह वार्ता शांति की ओर बढ़ेगी या फिर क्षेत्र एक बार फिर संघर्ष की ओर लौटेगा।
US–Iran–Israel War Update: इजरायल के लेबनान पर हमले जारी रहने के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई का अहम बयान सामने आया है। उन्होंने साफ किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे भी नहीं हटेगा। क्या बोले खामेनेई? “हमने युद्ध नहीं चाहा और हम इसे नहीं चाहते…” “लेकिन किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकार नहीं छोड़ेंगे” “इस संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को हम एक ही मानते हैं” उनके इस बयान को सीधे तौर पर लेबनान में इजरायल के हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है। इजरायल का रुख अब भी सख्त इजरायली पीएम पहले ही कह चुके हैं: “लेबनान में कोई सीजफायर लागू नहीं” हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी होर्मुज स्ट्रेट पर चेतावनी खामेनेई ने बड़ा संकेत देते हुए कहा: ईरान होर्मुज स्ट्रेट को संभालने का तरीका बदल सकता है जनता से अपील: सड़कों पर आकर अपनी आवाज उठाएं इसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। बैकग्राउंड क्या है? 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के दिन ही अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसके बाद मुज्तबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए, सिर्फ लिखित संदेशों के जरिए संवाद हेल्थ को लेकर भी अटकलें कुछ रिपोर्ट्स में दावा: खामेनेई कोमा जैसी स्थिति में है ईरान के कोम शहर में इलाज जारी हालांकि, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है
करीब 39 दिनों तक चले तनाव और हमलों के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों के अस्थायी सीजफायर का ऐलान किया, जिस पर ईरान ने भी सहमति जताई है। इस फैसले से पूरे मिडिल ईस्ट और वैश्विक स्तर पर राहत की सांस ली जा रही है। होर्मुज खोलने पर बनी सहमति सीजफायर की सबसे अहम शर्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर रही। ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति दे दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है। ट्रंप का बयान डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए कहा: अमेरिका दो हफ्तों के लिए सैन्य कार्रवाई रोक रहा है अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं अब दोनों देश स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे ट्रंप के अनुसार यह फैसला शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद लिया गया। ईरान का रुख ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया: अगर अमेरिका हमले रोकता है, तो ईरान भी पलटवार नहीं करेगा 14 दिनों तक होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जारी रहेगी आगे की बातचीत साझा प्रस्तावों के आधार पर होगी 14 दिन क्यों अहम? यह संघर्षविराम सिर्फ अस्थायी है, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण: इस दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश होगी वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति स्थिर रह सकती है आगे की राह सीजफायर के बाद अब नजरें आने वाले 14 दिनों पर टिकी हैं। अगर बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता मिडिल ईस्ट में लंबे समय की शांति का रास्ता खोल सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक राजनीति और कूटनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र में इस अहम समुद्री मार्ग को खोलने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया, जबकि हैरानी की बात यह रही कि नाटो सदस्य फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया। क्या था UN में प्रस्ताव? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन ने एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इस प्रस्ताव में जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने का भी प्रावधान शामिल था, ताकि तेल सप्लाई बहाल की जा सके। रूस-चीन ने क्यों लगाया वीटो? रूस और चीन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। चीन का कहना है कि सैन्य हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ सकते हैं रूस ने ईरान का समर्थन करते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया दोनों देशों का मानना है कि यह प्रस्ताव अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका की सैन्य रणनीति को समर्थन देता है। फ्रांस का विरोध क्यों चौंकाने वाला? सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया। फ्रांस, नाटो का सदस्य होने के बावजूद अमेरिका के रुख से अलग नजर आया। इससे यह संकेत मिला कि पश्चिमी देशों के बीच भी इस मुद्दे पर एकजुटता नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं ट्रंप की रणनीति पर असर? डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित करना चाहता है। लेकिन UN में वीटो और सहयोगी देशों के मतभेद से: अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है वैश्विक समर्थन कमजोर होता दिख रहा है कूटनीतिक समाधान और मुश्किल हो सकता है आगे क्या? प्रस्ताव के पास होने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है तेल बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है बड़े देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब अमेरिका-ईरान संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर UAE ने बड़ा ऐलान किया है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए गठबंधन की पहल UAE के राजनयिकों ने अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और एशिया की सैन्य शक्तियों से अपील की है कि वे मिलकर एक वैश्विक गठबंधन बनाएं, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सके। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। जंग में कूदने को तैयार UAE रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई में भी हिस्सा ले सकता है। अगर ऐसा होता है, तो UAE फारस की खाड़ी का पहला देश होगा जो सीधे इस युद्ध में शामिल होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सहयोगी देशों से अधिक समर्थन की मांग की थी और कहा था कि तेल आपूर्ति की सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव की तैयारी UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को रूस और चीन जैसे देश वीटो कर सकते हैं, जिससे इसकी राह मुश्किल हो सकती है। प्रस्ताव न पास होने पर भी मदद रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर UNSC में प्रस्ताव पास नहीं होता है, तब भी UAE सैन्य सहयोग देने को तैयार है। इसमें समुद्री माइंस हटाने (माइन क्लीयरेंस) और अन्य रणनीतिक सहायता शामिल हो सकती है। रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण का सुझाव UAE ने अमेरिका को यह भी सुझाव दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट के रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण करे, जिनमें अबू मूसा द्वीप भी शामिल है। इस द्वीप पर पिछले करीब 50 वर्षों से ईरान का कब्जा है, जबकि UAE भी इस पर दावा करता है। वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने को लेकर सहमति बन रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रस्तावों का हवाला देते हुए ईरान की कार्रवाइयों की आलोचना की। बढ़ सकता है तनाव UAE के इस रुख से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। अगर खाड़ी देश सीधे युद्ध में शामिल होते हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने साफ किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है और भारत समेत पांच “मित्र देशों” के जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में यह जानकारी दी। किन देशों को मिली राहत? ईरान के अनुसार, जिन देशों को सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) दिया जा रहा है, उनमें शामिल हैं: भारत रूस चीन पाकिस्तान इराक ईरान ने बताया कि इन देशों के जहाजों ने संपर्क कर सुरक्षित मार्ग की मांग की थी, जिसके बाद उनकी नौसेना ने उन्हें सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया। ‘दुश्मन देशों’ के लिए रास्ता बंद ईरान ने स्पष्ट किया कि: अमेरिका इज़राइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अराघची ने कहा कि मौजूदा हालात “युद्ध जैसे” हैं, इसलिए दुश्मन देशों के जहाजों को अनुमति देने का कोई कारण नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की बाधा: तेल की कीमतों में उछाल सप्लाई चेन में संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव जैसे असर पैदा कर सकती है। ईरान का दावा: ‘हमने दिखाया नियंत्रण’ ईरान ने दावा किया कि उसने दशकों बाद इस रणनीतिक मार्ग पर अपना प्रभाव दिखाया है। साथ ही यह भी कहा कि कई देशों ने इस रास्ते को खुलवाने के लिए कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। भारत के लिए क्या मायने? भारत के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। होर्मुज के आंशिक रूप से खुले रहने से तेल और गैस सप्लाई पर तत्काल बड़ा संकट टल सकता है।
मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान ने एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल “मित्र देशों” को ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति देगा। इस फैसले में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस और इराक जैसे देशों को शामिल किया गया है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास द्वारा साझा बयान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद इन देशों के जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दी गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र की चिंता और अपील संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो यह वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित करेगा। खासकर खेती के मौसम में इसका असर और भी गहरा हो सकता है। गुटेरेस ने साफ तौर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान से अपील की कि वे तुरंत युद्ध को समाप्त करें। उन्होंने कहा कि बढ़ती हिंसा, नागरिकों की मौत और वैश्विक आर्थिक संकट को रोकने का एकमात्र तरीका यही है। पश्चिमी देशों के लिए बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि उनके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है। यदि यहां कोई बड़ा अवरोध आता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ेगा। बढ़ता तनाव और संभावित खतरे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने इस जलमार्ग को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ईरान द्वारा संभावित जवाबी कार्रवाई और समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण की कोशिशों ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।