HDFC Bank ने अपने कुछ कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है और देश में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह व्यवस्था फिलहाल 30 दिनों के लिए लागू की गई है, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। बैंक ने यह सुविधा मुख्य रूप से बिजनेस एनेबलिंग और कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस से जुड़े कर्मचारियों को दी है। किन कर्मचारियों को मिलेगा Work From Home? HDFC Bank के अनुसार हाइब्रिड मॉडल में शामिल विभागों में: ट्रेजरी ऑपरेशंस क्रेडिट अंडरराइटिंग एंड रिस्क ट्रांजैक्शन बुकिंग डिजिटल बैंकिंग IT सर्विसेज जैसे बिजनेस एनेबलिंग फंक्शंस शामिल हैं। वहीं कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस में: ह्यूमन रिसोर्सेज फाइनेंस एंड अकाउंट्स लीगल एंड कंप्लायंस सेक्रेटेरियल और बोर्ड फंक्शंस को शामिल किया गया है। हालांकि बैंक ने साफ किया है कि उसकी सभी शाखाएं और कस्टमर फेसिंग सर्विसेज पहले की तरह सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ा Hybrid Work Model प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में कंपनियों और लोगों से ईंधन बचाने के लिए Work From Home को बढ़ावा देने की अपील की थी। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% तक तेजी आई है। इसका असर: भारत के आयात बिल चालू खाते के घाटे पेट्रोल-डीजल कीमतों और रुपये की स्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी वजह से कई कंपनियां अब हाइब्रिड वर्क मॉडल की तरफ लौट रही हैं। दूसरे बैंक भी अपना रहे Hybrid Model IndusInd Bank ने भी हाल ही में कुछ कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू किया है। वहीं Axis Bank में 2021 से ही नॉन-कस्टमर फेसिंग कर्मचारियों के लिए Hybrid Work Policy लागू है, जिसके तहत कर्मचारियों को सप्ताह में सिर्फ दो दिन ऑफिस आना पड़ता है। Zoho ने किया Work From Home से इनकार जहां कई कंपनियां WFH को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं Zoho Corporation के फाउंडर Sridhar Vembu ने साफ कहा है कि उनकी कंपनी फिलहाल Work From Home लागू नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि कंपनी ने हाल ही में अपनी WFH पॉलिसी की समीक्षा की थी और निष्कर्ष निकाला कि खासकर रिसर्च और एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में आमने-सामने बैठकर काम करने से बेहतर नतीजे मिलते हैं। हालांकि ईंधन बचाने के लिए Zoho: इलेक्ट्रिक बस इलेक्ट्रिक कुकिंग और सोलर एनर्जी जैसे विकल्पों पर काम कर रही है। बढ़ती तेल कीमतों का असर कंपनियों की रणनीति पर ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अब कंपनियों की वर्क पॉलिसी पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। जहां कुछ कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम की सुविधा देकर ट्रैवल कम करना चाहती हैं, वहीं कुछ कंपनियां ऑफिस कल्चर को ज्यादा प्रभावी मान रही हैं। आने वाले समय में तेल की कीमतों और आर्थिक हालात के आधार पर Work From Home और Hybrid Work Model को लेकर और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
Rajkot में एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब ₹2500 करोड़ के इस घोटाले में निजी बैंकों के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। फर्जी खातों के जरिए होता था खेल पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर कई बैंक खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था, जिससे करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत जांच में सामने आया है कि Yes Bank, Axis Bank और HDFC Bank के कुछ अधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में मदद की। आरोप है कि इन अधिकारियों ने: संदिग्ध खातों को खोलने और सक्रिय रखने में सहयोग किया बैंक के अलर्ट सिस्टम को नजरअंदाज किया बड़े ट्रांजैक्शन को छिपाने में मदद की 85 खाते चिन्हित, 535 शिकायतें दर्ज पुलिस के अनुसार, अब तक इस रैकेट से जुड़े 85 बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। वहीं, साइबर क्राइम पोर्टल पर 535 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। हवाला नेटवर्क से जुड़ाव जांच में यह भी सामने आया है कि खातों से निकाली गई रकम को हवाला चैनलों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे इस घोटाले का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर LKP Research ने सकारात्मक रुख अपनाया है। 21 अप्रैल 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ब्रोकरेज हाउस ने बैंक की रेटिंग को अपग्रेड करते हुए ‘BUY’ कर दिया है और ₹1002 का टारगेट प्राइस तय किया है। मजबूत तिमाही प्रदर्शन ने बढ़ाया भरोसा रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC Bank ने हालिया तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक की ग्रोथ रिटेल, SME और कॉरपोरेट सेगमेंट में मजबूत एडवांस (loans) बढ़ने के कारण हुई। मार्जिन स्थिर रहे, लेकिन मुनाफे (bottom line) में सुधार मुख्य रूप से प्राविजन खर्च में 18.3% की सालाना गिरावट के चलते देखने को मिला। इसके साथ ही ऑपरेटिंग एफिशिएंसी भी स्थिर बनी रही। एसेट क्वालिटी में मल्टी-ईयर बेस्ट वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद बैंक ने अपनी एसेट क्वालिटी को कई वर्षों के सर्वोत्तम स्तर पर बनाए रखा है। LKP Research का मानना है कि बैंक विभिन्न सेक्टर्स पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि ग्रोथ लाभदायक और टिकाऊ बनी रहे। डिपॉजिट ग्रोथ से घट रही चिंता बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ 14.4% YoY रही, जो क्रेडिट ग्रोथ से तेज है। इससे लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) को लेकर चिंताएं कम होती दिख रही हैं, जो पहले निवेशकों के लिए एक अहम मुद्दा था। आगे की ग्रोथ को लेकर उम्मीद ब्रोकरेज के अनुसार, HDFC Bank FY28 तक: RoA (Return on Assets): 2.1% RoE (Return on Equity): 15.6% हासिल कर सकता है। यह बैंक की मजबूत फ्रेंचाइजी, स्थिर ग्रोथ और सामान्य होते क्रेडिट कॉस्ट के कारण संभव माना जा रहा है। वैल्यूएशन और टारगेट LKP Research ने Sum-of-the-Parts (SOTP) वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर ₹1002 का टारगेट दिया है और मौजूदा स्तरों पर स्टॉक को आकर्षक बताया है।
मुंबई: हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही, जहां बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में तेज गिरावट देखने को मिली। Bank Nifty इंडेक्स सोमवार को करीब 2.5% तक टूट गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार जाना रहा। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई (Inflation) के बढ़ने और सख्त मौद्रिक नीति (Tighter Monetary Policy) की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ गया। PSU बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट इस गिरावट की अगुवाई पब्लिक सेक्टर बैंकों ने की, जहां कई शेयरों में 4% तक की कमजोरी दर्ज की गई। प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे: Union Bank of India Bank of India Bank of Maharashtra Punjab National Bank इन बैंकों पर दबाव का कारण यह है कि बढ़ती महंगाई से ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिससे लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी प्रभावित होती है। प्राइवेट बैंकों में भी कमजोरी सिर्फ PSU बैंक ही नहीं, बल्कि प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। State Bank of India करीब 2.5% तक गिरा HDFC Bank में 2.47% तक कमजोरी IndusInd Bank लगभग 1.85% नीचे Axis Bank और Kotak Mahindra Bank भी दबाव में रहे इंडेक्स का प्रदर्शन कैसा रहा? Bank Nifty इंट्राडे में 1,556 अंक टूटकर 54,356 के स्तर तक पहुंच गया Nifty PSU Bank इंडेक्स 2.24% गिरा Nifty Private Bank इंडेक्स 1.37% नीचे रहा यह दिन बैंकिंग सेक्टर के लिए सबसे कमजोर सत्रों में से एक रहा। गिरावट की असली वजह क्या है? कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है क्योंकि भारत आयात पर निर्भर है। इसके प्रमुख प्रभाव: महंगाई बढ़ने का खतरा RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लोन डिमांड और बैंकिंग ग्रोथ पर असर इन्हीं कारणों से निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी। आगे क्या रह सकता है रुख? (एक्सपर्ट व्यू) Religare Broking के रिसर्च हेड अजीत मिश्रा के अनुसार: Bank Nifty पहले करीब 8.5% की तेजी दिखा चुका है अब यह 56,700 (200 DEMA) के स्तर को फिर टेस्ट कर सकता है इसके बाद 57,800 तक की रिकवरी संभव है सपोर्ट लेवल: पहला सपोर्ट: 54,300 अगला मजबूत सपोर्ट: 53,000 निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो? मौजूदा हालात में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: जल्दबाजी में खरीदारी से बचें प्रमुख सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखें लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में चुनिंदा शेयरों पर नजर रख सकते हैं कच्चे तेल की कीमत और RBI के रुख पर खास ध्यान दें
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank इन दिनों नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर चर्चा में है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच, बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, इन सभी घटनाओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा को लेकर हो रही है, जिन्हें अब संगठन में और बड़ी भूमिका मिलने के संकेत दिए गए हैं। तीन दशक का अनुभव, गहरी पकड़ कैजाद भरूचा का HDFC बैंक के साथ जुड़ाव करीब 30 साल पुराना है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1986 में SBI कमर्शियल एंड इंटरनेशनल बैंक से की थी और 1995 में HDFC बैंक से जुड़े। तब से लेकर आज तक उन्होंने बैंक के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। फिलहाल भरूचा बैंक के एसेट बिजनेस को संभाल रहे हैं, जिसमें लोन और अन्य क्रेडिट गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड और मैनेजमेंट दोनों स्तरों पर उनकी मजबूत पकड़ और अनुभव उन्हें बैंक के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल करता है। RBI की मंजूरी, तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2026 में Reserve Bank of India (RBI) ने कैजाद भरूचा की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी थी। अप्रैल 2026 से वे अगले तीन वर्षों तक पूर्णकालिक निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। यह कदम बैंक के नेतृत्व में स्थिरता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। लगातार बढ़ता कद पिछले एक दशक में कैजाद भरूचा का कद लगातार बढ़ा है। 2014 में उन्हें एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया होलसेल और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग की जिम्मेदारी दी गई 2023 में उन्हें डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (DMD) बनाया गया यह पद पिछले पांच वर्षों से खाली था, जिसे भरूचा को सौंपना बैंक के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव का संकेत माना गया। DMD बनने के बाद उन्हें रिटेल बैंकिंग की जिम्मेदारी भी दी गई, जिससे उनका दायरा और व्यापक हो गया। संकट के दौर में भरोसे का चेहरा बैंक के शीर्ष स्तर पर हुए बदलावों के बीच, केकी मिस्त्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा की जा रही है और कैजाद भरूचा को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वे इस चुनौतीपूर्ण दौर में बैंक के लिए “संकटमोचक” की भूमिका निभा सकते हैं।
सुबह खुलते ही बाजार में मचा हड़कंप गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 50 2.24% टूटकर 23,245 के स्तर पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 2.33% गिरकर 74,906 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। HDFC Bank में भारी गिरावट, बाजार पर पड़ा असर इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह HDFC Bank के शेयर में आई तेज गिरावट रही। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद शेयर में करीब 8.6% तक की गिरावट दर्ज की गई, जो दो साल में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि “गवर्नेंस और पारदर्शिता” को लेकर उठे सवालों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है, जिससे बैंकिंग सेक्टर पर सीधा असर पड़ा। तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। फेडरल रिजर्व के ‘हॉकिश’ रुख का असर फेडरल रिजर्व ने भले ही ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन उसका सख्त (हॉकिश) रुख बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों (जैसे भारत) से कम हो सकता है। सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली- बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में करीब 3% की गिरावट मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 2% की कमजोरी कुल 16 के 16 सेक्टर लाल निशान में बंद ग्लोबल संकेत भी रहे कमजोर एशियाई बाजारों में भी करीब 2.3% की गिरावट आई, जो अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी का असर है। वैश्विक स्तर पर निवेशक बढ़ती तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से चिंतित हैं। L&T समेत कई शेयर दबाव में मिडिल ईस्ट में कारोबार रखने वाली लार्सन एंड टुब्रो के शेयर में भी करीब 3.5% की गिरावट आई, क्योंकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से इसके बिजनेस पर असर पड़ने की आशंका है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सख्ती निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा रही है।
देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में अचानक हुए शीर्ष स्तर के बदलाव ने निवेशकों और बाजार को चौंका दिया है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन Atanu Chakraborty ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद बैंक के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। बाजार में तुरंत असर, 5% से ज्यादा टूटा शेयर इस्तीफे की खबर सामने आते ही शेयर बाजार में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। सुबह कारोबार के दौरान HDFC Bank के शेयरों में भारी बिकवाली हुई और यह 5% से ज्यादा गिरकर करीब ₹800.90 तक पहुंच गया। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक इस घटनाक्रम को लेकर असहज हैं और बैंक की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इस्तीफे की वजह ने बढ़ाई चिंता Atanu Chakraborty ने अपने इस्तीफे में जो कारण बताया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के कामकाज और उनकी व्यक्तिगत “values और ethics” के बीच सामंजस्य नहीं बन पा रहा था। हालांकि उन्होंने किसी विशेष घटना या प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया, लेकिन इस तरह का बयान कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर संकेत देता है और यही वजह है कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। तय कार्यकाल से पहले छोड़ा पद गौरतलब है कि Atanu Chakraborty को मई 2021 में पहली बार तीन साल के लिए नियुक्त किया गया था। इसके बाद 2024 में उन्हें दूसरा कार्यकाल दिया गया, जो 2027 तक चलना था। लेकिन बीच कार्यकाल में इस्तीफा देना इस फैसले को और असामान्य बनाता है। केकी मिस्त्री को मिली अंतरिम जिम्मेदारी इस्तीफे के तुरंत बाद बैंक ने नेतृत्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठाया है। Reserve Bank of India ने Keki Mistry को तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। 19 मार्च से प्रभावी इस नियुक्ति के साथ अब मिस्त्री बैंक की कमान संभालेंगे और इस संक्रमण काल में स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएंगे। बैंक की साख पर क्या असर? HDFC Bank देश का सबसे बड़ा निजी बैंक है और मार्केट कैप के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भी है। ऐसे में चेयरमैन का “एथिक्स” का हवाला देकर इस्तीफा देना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि बैंक की छवि और भरोसे पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल निवेशक और बाजार दोनों इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि बैंक की ओर से इस मुद्दे पर और क्या जानकारी सामने आती है। आने वाले समय में यह घटनाक्रम बैंकिंग सेक्टर के लिए भी अहम संकेत साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।