Health Tips

Summer fruits like mangoes, watermelon and litchis displayed with healthy eating concept
आम, तरबूज और लीची खाने वालों के लिए जरूरी खबर! डॉक्टर ने बताया कितना फल खाना हो सकता है नुकसानदायक

गर्मियों में ज्यादा फल खाना भी बन सकता है परेशानी गर्मी का मौसम आते ही बाजार आम, तरबूज, लीची और पपीते जैसे फलों से भर जाते हैं। लोग इन्हें हेल्दी मानकर बिना सोचे-समझे खूब खाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फल खाना शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, खासकर डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिए। विशेषज्ञों के मुताबिक फलों में प्राकृतिक शुगर यानी फ्रक्टोज होता है। सीमित मात्रा में यह फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेवन करने पर यह लिवर पर दबाव बढ़ा सकता है और ब्लड शुगर भी बढ़ा सकता है। आम खाते समय रखें मात्रा का ध्यान आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल माना जाता है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग एक दिन में आधा मध्यम आकार का आम ही खाएं। सामान्य लोग एक छोटा या मध्यम आकार का आम खा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम को भोजन के तुरंत बाद खाने के बजाय स्नैक की तरह खाएं। इसके साथ दही, पनीर, भुना चना या ड्राई फ्रूट्स लेने से शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। मैंगो शेक, आमरस और पैकेज्ड जूस से बचने की सलाह दी गई है। तरबूज ज्यादा खाने से भी बढ़ सकती है शुगर तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए लोग इसे बड़ी मात्रा में खा लेते हैं। हालांकि यह हल्का फल माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए 100-150 ग्राम तरबूज पर्याप्त माना गया है। अन्य लोग करीब 200 ग्राम तक खा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज का जूस पीने से बचना चाहिए, क्योंकि उसमें फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है। लीची खाते समय बरतें सावधानी लीची स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन इसमें फ्रक्टोज की मात्रा काफी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग 3-4 लीची तक सीमित रहें। सामान्य लोग 7-8 लीची खा सकते हैं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कच्ची लीची खाली पेट खाना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। बिहार में पहले भी इससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। पपीता और आड़ू बेहतर विकल्प पपीता अपेक्षाकृत हल्का और सुरक्षित फल माना जाता है। डायबिटीज मरीज 100 ग्राम तक पपीता खा सकते हैं। अन्य लोग 150-200 ग्राम तक सेवन कर सकते हैं। वहीं आड़ू और आलूबुखारा जैसे फल भी सीमित मात्रा में अच्छे विकल्प माने जाते हैं। फ्रूट प्लेटर भी बन सकता है खतरा डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग एक साथ आम, तरबूज, लीची, खरबूजा और पपीता मिलाकर बड़ा फ्रूट बाउल खा लेते हैं। देखने में यह हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: अलग-अलग फल खाने पर भी कुल मात्रा नियंत्रित रखें। डायबिटीज वाले लोग कुल मिलाकर करीब 100 ग्राम फल ही लें। सामान्य लोग 200 ग्राम तक फल खा सकते हैं। कब खाना चाहिए फल? डॉक्टरों के मुताबिक फल खाने का सही समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। फलों को भोजन के बीच में खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है। रात में भारी मात्रा में फल खाने से बचना चाहिए। सुबह या दिन में फल खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है। जूस नहीं, साबुत फल खाएं विशेषज्ञों का कहना है कि ताजे और साबुत फल हमेशा जूस से बेहतर होते हैं। जूस में फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकती है।  

surbhi मई 11, 2026 0
B12 Deficiency Symptoms
विटामिन B-12 की कमी को न करें नजरअंदाज, शरीर में दिखने लगते हैं ये गंभीर संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर थकान और कमजोरी को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यह शरीर में विटामिन B-12 की कमी का संकेत हो सकता है। यह विटामिन शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनाने, नसों को स्वस्थ रखने और दिमाग को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई तरह की समस्याओं का शिकार होने लगता है।   हाथ-पैरों में झुनझुनी और चक्कर आने की समस्या विटामिन B-12 की कमी होने पर हाथ और पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या जलन जैसी समस्या महसूस हो सकती है। कई लोगों को बार-बार चक्कर आते हैं और सिरदर्द की शिकायत भी बनी रहती है। अगर बिना ज्यादा मेहनत किए शरीर थका हुआ महसूस हो रहा है, तो यह भी इस कमी का शुरुआती संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक इस विटामिन की कमी रहने पर याददाश्त कमजोर होने लगती है और चीजों पर फोकस करने में दिक्कत हो सकती है। कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव और उदासी जैसे मानसिक लक्षण भी दिखाई देते हैं।   स्किन और मूड पर भी पड़ता है असर शरीर में विटामिन B-12 की कमी का असर त्वचा पर भी दिखने लगता है। कई बार स्किन पीली पड़ जाती है और चेहरा बेजान दिखने लगता है। इसके अलावा मूड स्विंग, घबराहट और हमेशा उदास महसूस करना भी इसके संकेत हो सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते इसकी पहचान और इलाज बेहद जरूरी है, वरना समस्या गंभीर रूप ले सकती है।   किन चीजों को डाइट में करें शामिल? विटामिन B-12 की कमी को दूर करने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। अंडा, मछली, चिकन और अन्य नॉनवेज फूड्स इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं। वहीं शाकाहारी लोगों के लिए दूध, दही, पनीर और चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स फायदेमंद हो सकते हैं। इसके अलावा फोर्टिफाइड सीरियल्स और ग्रेन्स का सेवन भी शरीर में विटामिन B-12 की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकता है। अगर लगातार थकान, कमजोरी या झुनझुनी जैसी समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच जरूर करानी चाहिए।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
Assortment of cooling foods like coconut water, cucumber, watermelon and buttermilk for summer heat relief
Heatwave Alert: गर्मी और थकान से बचाएंगे ये 8 ‘कूलिंग फूड्स’, एक्सपर्ट्स ने बताया सही तरीका

तेज गर्मी के बीच शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है–पसीना ज्यादा आता है, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम होते हैं और थकान महसूस होती है। ऐसे में सही खानपान बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ खास ‘कूलिंग फूड्स’ शरीर के तापमान को संतुलित रखने, हाइड्रेशन बनाए रखने और पाचन सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं। कूलिंग फूड्स क्यों हैं जरूरी? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के दौरान शरीर में थर्मोरेगुलेशन (तापमान नियंत्रण) की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। ऐसे में पानी, पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्वों से भरपूर फूड्स शरीर को ठंडा रखने के साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं।   ये 8 फूड्स गर्मी में देंगे राहत 1. Coconut Water नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, जो तुरंत हाइड्रेशन देता है और थकान कम करता है। 2. Buttermilk (छाछ) पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ठंडा रखता है और ब्लोटिंग कम करता है। 3. Cucumber (खीरा) हाई वॉटर कंटेंट के कारण शरीर को हाइड्रेट रखता है और स्किन को भी फायदा देता है। 4. Black Raisins (भिगोए हुए किशमिश) ऊर्जा बढ़ाते हैं, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। 5. Chia Seeds / Sabja Seeds शरीर में लंबे समय तक पानी बनाए रखते हैं और एसिडिटी कम करते हैं। 6. Fennel Tea (सौंफ की चाय) पाचन सुधारती है और शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करती है। 7. Gulkand पारंपरिक ठंडा फूड, जो एसिडिटी और हीट को बैलेंस करता है। 8. Watermelon और Muskmelon हाई वॉटर कंटेंट वाले ये फल शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा देते हैं। क्या न करें? एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि बहुत ज्यादा ठंडे पेय या आइसक्रीम तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन पाचन को बिगाड़ सकते हैं। असली कूलिंग फूड्स वो होते हैं जो शरीर को अंदर से संतुलित करें। ध्यान रखें हर व्यक्ति का पाचन अलग होता है, इसलिए फूड्स का चयन अपनी बॉडी के अनुसार करें। जरूरत हो तो हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लें।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Healthy morning habits like hydration, exercise and planning help reduce stress and boost daily energy
सुबह की ये 5 आदतें बदल सकती हैं आपका दिन, कम होगा स्ट्रेस और बढ़ेगी एनर्जी

भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई चाहता है कि उसका दिन आसान, संतुलित और तनाव मुक्त बीते। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दिन की शुरुआत जिस तरह होती है, वही पूरे दिन के मूड और प्रोडक्टिविटी को तय करती है। अगर सुबह सही आदतों के साथ शुरू हो, तो न सिर्फ काम आसान हो जाते हैं, बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बनी रहती है। यहां जानिए ऐसी 5 आसान सुबह की आदतें, जो आपकी दिनचर्या को पूरी तरह बदल सकती हैं। 1. दिन की शुरुआत पॉजिटिव सोच से करें सुबह उठते ही कुछ पल शांति से बिताएं और सकारात्मक विचारों के साथ दिन की शुरुआत करें। भगवान का स्मरण या कृतज्ञता व्यक्त करना मन को स्थिर करता है इससे दिनभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है 2. खाली पेट एक गिलास पानी जरूर पिएं रातभर सोने के बाद शरीर को हाइड्रेशन की जरूरत होती है। सुबह गुनगुना या सामान्य पानी पीना शरीर को डिटॉक्स करता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है शरीर में ताजगी लाता है 3. ताजी हवा और हल्की धूप लें सुबह उठकर कुछ समय खुले वातावरण में बिताना बेहद फायदेमंद होता है। खिड़की खोलकर या बाहर जाकर फ्रेश एयर लें हल्की धूप शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देती है दिमाग फ्रेश रहता है और आलस दूर होता है 4. हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें सुबह शरीर को एक्टिव करना जरूरी है। लाइट स्ट्रेचिंग या 10–15 मिनट की वॉक करें इससे शरीर की जकड़न दूर होती है पूरे दिन के लिए एनर्जी मिलती है 5. दिन की प्लानिंग करें सुबह का समय दिमाग के लिए सबसे शांत और साफ होता है। दिनभर के कामों की प्राथमिकता तय करें जरूरी मीटिंग्स और टास्क पहले प्लान करें इससे भागदौड़ कम होती है और स्ट्रेस घटता है

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Magnesium rich healthy foods like nuts, seeds, leafy greens
Magnesium-Rich Foods: क्यों जरूरी है यह मिनरल और किन 13 फूड्स से पूरी होगी आपकी कमी

  आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पोषण की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है, और इन्हीं में से एक है मैग्नीशियम की कमी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह जरूरी मिनरल हमारे शरीर में 300 से अधिक बायोकेमिकल प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है–जिसमें मसल और नर्व फंक्शन, ब्लड प्रेशर कंट्रोल, एनर्जी प्रोडक्शन, मेटाबॉलिज्म और हड्डियों का विकास शामिल है। पोषण विशेषज्ञ सामंथा डिएरास के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत वयस्क रोजाना आवश्यक 320 से 420 मिलीग्राम मैग्नीशियम की मात्रा पूरी नहीं कर पाते। इसकी कमी से मूड स्विंग, मसल क्रैम्प्स, थकान और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, सही डाइट अपनाकर इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। ये हैं 13 मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स 1. कीवी (Kiwi) छोटा सा फल लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर। इसमें विटामिन C, E, K, फाइबर और लगभग 31 mg मैग्नीशियम पाया जाता है। 2. खीरा (Cucumber) 95% पानी से भरपूर खीरा भी मैग्नीशियम (लगभग 16 mg) और अन्य जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत है। 3. स्क्वैश (Squash) बटरनट और एकॉर्न स्क्वैश में 60-65 mg तक मैग्नीशियम होता है, साथ ही फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी। 4. डार्क चॉकलेट (Dark Chocolate) स्वाद के साथ सेहत भी–यह मैग्नीशियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद है। 5. एवोकाडो (Avocado) हेल्दी फैट, फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर यह फल ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है। 6. नट्स (Nuts) बादाम, काजू जैसे नट्स मैग्नीशियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। 7. दालें (Legumes) चना, राजमा, ब्लैक बीन्स जैसी दालों में मैग्नीशियम के साथ आयरन और विटामिन B भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। 8. बादाम (Almonds) एक सर्विंग बादाम से लगभग 20% दैनिक मैग्नीशियम की जरूरत पूरी हो सकती है। 9. हरी पत्तेदार सब्जियां (Leafy Greens) पालक, केल जैसी सब्जियां मैग्नीशियम के साथ फाइबर और ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करती हैं। 10. बीज (Seeds) चिया, फ्लैक्स और कद्दू के बीज मैग्नीशियम के पावरहाउस हैं, जो हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हैं। 11. साबुत अनाज (Whole Grains) ये फाइबर और मिनरल्स से भरपूर होते हैं और डायबिटीज व हार्ट डिजीज के खतरे को कम करते हैं। 12. केला (Banana) मैग्नीशियम के साथ-साथ पोटैशियम से भरपूर, जो ब्लड प्रेशर कंट्रोल में सहायक है। 13. सैल्मन (Salmon) 100 ग्राम सैल्मन में लगभग 30 mg मैग्नीशियम होता है और यह सूजन कम करने में मदद करता है।   क्या हैं इसके नुकसान? विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक फूड्स से मिलने वाला मैग्नीशियम आमतौर पर सुरक्षित होता है। लेकिन सप्लीमेंट्स का अधिक सेवन डायरिया और पाचन समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।   कैसे करें मैग्नीशियम ट्रैक? एक वयस्क को रोजाना 310 से 420 mg मैग्नीशियम की जरूरत होती है, जो उम्र, लिंग और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करती है। अगर आपको थकान, सिरदर्द या मसल क्रैम्प्स जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Fresh green betel leaves used in Ayurveda for headache, digestion, immunity and natural home remedies
Betel Leaves: सिरदर्द से एलर्जी तक, पान के पत्ते के देसी नुस्खे से पाएं राहत

भारतीय परंपरा में पान के पत्तों का खास महत्व रहा है, लेकिन अब यह सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं। आयुर्वेद के अनुसार, पान के पत्ते प्राकृतिक औषधि की तरह काम करते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। इनमें कैल्शियम, विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने और कई छोटी-बड़ी समस्याओं में राहत देने में मदद करते हैं। पान के पत्तों के बड़े फायदे 1. यूरिक एसिड कंट्रोल में मदद आजकल बढ़ता यूरिक एसिड कई लोगों की परेशानी बन चुका है। पान के पत्ते शरीर में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं। 2. पाचन तंत्र को बनाएं मजबूत गैस, कब्ज और एसिडिटी में राहत पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है खाना खाने के बाद पान का पत्ता चबाना फायदेमंद हो सकता है। 3. दांत और मसूड़ों के लिए लाभकारी मसूड़ों की सूजन और दर्द कम करता है दांतों को मजबूत बनाने में मदद ध्यान रखें: पान बिना तंबाकू और सुपारी के ही खाएं। 4. सूजन और दर्द में राहत पान के पत्तों में मौजूद तत्व: सूजन कम करते हैं हल्के दर्द में आराम देते हैं पत्ते को हल्का गर्म करके प्रभावित जगह पर लगाने से राहत मिल सकती है। 5. सर्दी-खांसी और एलर्जी में उपयोगी शहद के साथ सेवन करने से खांसी में राहत इम्युनिटी मजबूत करता है 6. सिरदर्द और छोटे घाव में कारगर सिरदर्द में पत्ते का लेप लगाने से आराम छोटे घाव भरने में मददगार उपयोग करते समय रखें ध्यान तंबाकू और सुपारी के साथ पान का सेवन नुकसानदायक हो सकता है सीमित मात्रा में ही उपयोग करें किसी गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूर लें

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
ABC juice glass and ABC achar jar made with apple beetroot carrot displayed side by side
ABC Juice vs ABC Achar: क्या है ज्यादा हेल्दी?

Apple, Beetroot और Carrot का कॉम्बिनेशन यानी ABC आजकल हेल्थ ट्रेंड बन चुका है। लेकिन सवाल वही है - जूस बेहतर या अचार? आइए आसान भाषा में समझते हैं  1. ABC Juice क्या है? ABC Juice ताजे सेब, चुकंदर और गाजर को ब्लेंड करके बनाया जाता है। फायदे: विटामिन A, B, C से भरपूर बॉडी को हाइड्रेट करता है स्किन ग्लो बढ़ाता है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद सुबह खाली पेट पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है ध्यान दें: इसमें नैचुरल शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज वालों को सीमित मात्रा में लेना चाहिए 2. ABC Achar क्या है? ABC Achar वही तीन चीजों से बनता है, लेकिन इसमें नमक, तेल, मसाले और सिरका मिलाकर तैयार किया जाता है। फायदे: प्रोबायोटिक्स (अच्छे बैक्टीरिया) मिलते हैं डाइजेशन बेहतर करता है खाने का स्वाद बढ़ाता है नुकसान: ज्यादा नमक और तेल → BP और पानी रुकने की समस्या ज्यादा खाने से हेल्थ पर असर 3. मुख्य अंतर पहलू ABC Juice ABC Achar पोषण विटामिन और मिनरल्स ज्यादा प्रोबायोटिक्स ज्यादा असर डिटॉक्स और एनर्जी डाइजेशन सुधार सेवन समय सुबह खाली पेट खाने के साथ रिस्क शुगर कंट्रोल जरूरी नमक-तेल कंट्रोल जरूरी 4. कैसे और कब लें? ABC Juice: सुबह खाली पेट (1 ग्लास) ABC Achar: लंच/डिनर के साथ (1 छोटा चम्मच) दोनों का ओवरयूज नुकसानदायक हो सकता है 5. कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आपका लक्ष्य है: डिटॉक्स, ग्लोइंग स्किन, ब्लड हेल्थ तो ABC Juice बेहतर अगर आप चाहते हैं: अच्छा डाइजेशन और गट हेल्थ तो ABC Achar बेहतर  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Healthy Indian Breakfast Poha vs Paratha comparison
पोहा या परांठा, जानें कौन-सा नाश्ता ज्यादा हेल्दी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा और सेहत की बुनियाद माना जाता है। भारतीय घरों में पोहा और परांठा दो ऐसे नाश्ते हैं जो सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और अलग-अलग स्वाद के अनुसार तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात हेल्थ की आती है, तो सवाल उठता है पोहा ज्यादा हेल्दी है या परांठा? जवाब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जरूरत क्या है और आप उसे किस तरीके से बना रहे हैं।   परांठा: पेट भरने वाला और एनर्जी देने वाला नाश्ता परांठा आमतौर पर गेहूं के आटे से बनता है, जो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। इसका मतलब है कि यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। अगर परांठा साबुत आटे से बनाया गया हो, तो इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है।   अगर इसमें पनीर, दाल, आलू, गोभी, पालक या मेथी जैसी स्टफिंग डाली जाए, तो यह और ज्यादा पौष्टिक बन सकता है। खासकर पनीर या दाल वाला परांठा प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, परांठा तभी हेल्दी माना जाएगा जब इसे कम तेल या कम घी में बनाया जाए। मक्खन, अचार या ज्यादा तेल के साथ खाने पर इसकी कैलोरी काफी बढ़ सकती है।   पोहा: हल्का, कम फैट और पचने में आसान दूसरी ओर, पोहा हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। यह चपटे चावल से बनता है और कम समय में तैयार हो जाता है। पोहा खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो सुबह हल्का खाना पसंद करते हैं या वजन कंट्रोल करना चाहते हैं। इसमें कैलोरी और फैट अपेक्षाकृत कम होते हैं, इसलिए यह पेट पर भारी नहीं पड़ता। अगर पोहा में मटर, गाजर, प्याज, टमाटर, मूंगफली, करी पत्ता और नींबू डाला जाए, तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। इसे लोहे की कढ़ाही में बनाने पर इसमें आयरन की मात्रा भी बढ़ सकती है। पोहा शरीर को जरूरी कार्बोहाइड्रेट देता है, लेकिन परांठे की तुलना में यह हल्का महसूस होता है।   आखिर कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आप हल्का, लो-फैट और जल्दी पचने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो पोहा बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आपको ज्यादा देर तक पेट भरा रखना है, ज्यादा ऊर्जा चाहिए या शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है, तो परांठा बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, दोनों ही हेल्दी हो सकते हैं—बस फर्क इस बात का है कि आप उन्हें किस सामग्री और किस मात्रा में खा रहे हैं।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
गर्मियों में खीरा खाने के फायदे और नुकसान सेहत टिप्स
गर्मियों में खीरा खाते हैं? पहले जान लें इसे खाने का सही तरीका

नई दिल्ली,एजेंसियां। गर्मी का मौसम आते ही लोग अपनी डाइट में ठंडी, हल्की और पानी से भरपूर चीजों को शामिल करना शुरू कर देते हैं। इन्हीं में खीरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। खीरा शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन सुधारने, वजन कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोग इसे ऐसे तरीके से खा लेते हैं, जिससे इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे का गलत सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खासकर कुछ लोग इसे सुबह खाली पेट या रात में ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, जिससे दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।   खाली पेट या रात में खाने से हो सकती है परेशानी सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में खीरा खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट दर्द, गैस या जलन जैसी शिकायत हो सकती है। खीरे में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो हर किसी के पाचन तंत्र को सूट नहीं करती। वहीं, रात में खीरा खाना भी कई लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। रात के समय पाचन तंत्र थोड़ा धीमा काम करता है, ऐसे में खीरा ठीक से पच नहीं पाता और ब्लोटिंग, अपच और गैस की समस्या हो सकती है।   बिना धोए या बहुत ठंडा खीरा खाना भी सही नहीं खीरे को बिना धोए खाना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बाजार में मिलने वाली सब्जियों पर अक्सर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया और कीटनाशकों के अंश लगे हो सकते हैं। ऐसे में बिना साफ किए खाया गया खीरा पेट के संक्रमण या अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फ्रिज से निकला बहुत ठंडा खीरा तुरंत खाना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे कुछ लोगों को गले में खराश, सर्दी-जुकाम या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए खीरे को कुछ देर सामान्य तापमान पर रखने के बाद खाना बेहतर माना जाता है।   सही तरीका क्या है? खीरे को खाने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है। चाहें तो इसे हल्के नमक वाले पानी से भी साफ किया जा सकता है। अगर छिलका सख्त या कड़वा लगे तो उसे हटाकर खाना बेहतर होता है। खीरे में हल्का नमक, काली मिर्च या नींबू मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और पाचन भी बेहतर हो सकता है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Person feeling fatigue and weakness despite normal medical reports showing early illness warning signs
Early Signs before Serious Illness: रिपोर्ट नॉर्मल, फिर भी थकान? जानें असली वजह

कई लोग दिनभर थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस करते हैं, जबकि मेडिकल चेकअप में सब कुछ नॉर्मल आता है। ऐसे में अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकते हैं। KIMS अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, शरीर अचानक बीमार नहीं होता, बल्कि पहले से ही छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर देता है। इन्हें समय रहते समझना बेहद जरूरी है। ये लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज न करें हर समय थकान और सुस्ती रहना चक्कर आना नींद पूरी न होना बिना कारण शरीर में दर्द ध्यान और सोचने की क्षमता में कमी ये सभी संकेत किसी अंदरूनी समस्या की शुरुआत हो सकते हैं। रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी क्यों होती है परेशानी? ज्यादातर टेस्ट बड़ी बीमारियों को पकड़ने के लिए होते हैं शुरुआती बदलाव जैसे: मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी थायरॉइड असंतुलन इंसुलिन रेजिस्टेंस पाचन संबंधी समस्या ये शुरुआती स्टेज पर टेस्ट में साफ नहीं दिखते ICMR और NIH के अनुसार, कई बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होती हैं। छिपी हुई आम समस्याएं विटामिन B12 और D की कमी डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) नींद की खराब गुणवत्ता थायरॉइड में हल्के बदलाव  ये छोटी दिखने वाली समस्याएं शरीर की ऊर्जा और मूड पर बड़ा असर डालती हैं। क्या करें? बार-बार टेस्ट नहीं, लाइफस्टाइल सुधारें डॉक्टरों के अनुसार, बार-बार टेस्ट कराने से ज्यादा जरूरी है: पर्याप्त और अच्छी नींद संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम तनाव कम करना साथ ही अपने शरीर के संकेतों को समझें-कब, क्यों और कितनी देर तक लक्षण रहते हैं। कब डॉक्टर से मिलें? अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बढ़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Indian adult checking blood report highlighting Vitamin B12 deficiency symptoms
Vitamin B12 Deficiency: उत्तर भारत के 47% लोग शिकार, लगातार थकान को न करें नजरअंदाज

Vitamin B12 Deficiency Symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, कमजोरी और फोकस की कमी आम हो गई है। लेकिन अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। Indian Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, उत्तर भारत के करीब 47% लोग विटामिन B12 की कमी से जूझ रहे हैं। इसे ‘साइलेंट’ समस्या इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। क्यों जरूरी है Vitamin B12? विटामिन B12 शरीर के कई जरूरी कामों के लिए अहम है: रेड ब्लड सेल्स (RBC) बनाने में मदद नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखना खाने को ऊर्जा में बदलना दिमाग और याददाश्त को सपोर्ट करना इसकी कमी होने पर शरीर अंदर ही अंदर कमजोर होने लगता है। किन लोगों को ज्यादा खतरा? शाकाहारी (Vegetarians) बुजुर्ग लोग लंबे समय तक कुछ दवाएं लेने वाले जिनका शरीर B12 सही से अब्जॉर्ब नहीं कर पाता ICMR के अनुसार, शाकाहारियों में इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है, क्योंकि B12 मुख्य रूप से एनिमल-बेस्ड फूड में पाया जाता है। B12 की कमी के शुरुआती और गंभीर लक्षण शुरुआती लक्षण: हमेशा थकान और कमजोरी ध्यान न लगना (Brain Fog) हल्की सांस फूलना गंभीर लक्षण: हाथ-पैरों में झुनझुनी याददाश्त कमजोर होना चलने-फिरने में बैलेंस बिगड़ना अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह न्यूरोलॉजिकल डैमेज तक पहुंच सकता है। किन चीजों में मिलता है Vitamin B12? नॉन-वेज सोर्स: अंडा मछली चिकन दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स वेज ऑप्शन: दूध, दही, पनीर फोर्टिफाइड सीरियल्स प्लांट-बेस्ड मिल्क ध्यान दें: सामान्य शाकाहारी खाने में B12 बहुत कम होता है। कैसे करें बचाव? संतुलित और पोषक आहार लें जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लें नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराते रहें लंबे समय तक थकान को नजरअंदाज न करें

surbhi मार्च 30, 2026 0
Himalayan berries, highlighting fitness and health benefits
हिमालय का सुपरफ्रूट अब आपके जिम तक: जानिए Sea Buckthorn जूस के जबरदस्त फायदे

आजकल फिटनेस और हेल्थ के प्रति जागरूक लोगों के बीच एक नया सुपरफ्रूट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है-सी बकथॉर्न (Sea Buckthorn)। हिमालय के ऊंचे और कठिन इलाकों, खासकर लद्दाख में पाए जाने वाले इस फल से बना जूस अब जिम जाने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है। यह सिर्फ एक हेल्थ ड्रिंक नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर ऐसा प्राकृतिक स्रोत है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। क्या है Sea Buckthorn और क्यों है खास? Sea Buckthorn एक जंगली बेरी है, जो हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है। इसमें कई दुर्लभ पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो इसे एक “सुपरफ्रूट” बनाते हैं। इसमें ओमेगा फैटी एसिड (3, 6, 7, 9) भरपूर मात्रा में होते हैं विटामिन C, A और E से भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स से लैस, जो शरीर को अंदर से सुरक्षित रखते हैं कई कंपनियां जैसे WellWith Life इसे कोल्ड-प्रेस तकनीक से तैयार करती हैं, जिससे इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। जिम करने वालों के लिए क्यों है बेस्ट ड्रिंक? जो लोग नियमित वर्कआउट, वेट ट्रेनिंग या कार्डियो करते हैं, उनके लिए यह जूस बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। 1. मसल्स और जोड़ों के लिए फायदेमंद ओमेगा फैटी एसिड सूजन कम करते हैं और मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करते हैं। 2. इम्युनिटी और पाचन में सुधार कड़ी एक्सरसाइज से इम्युन सिस्टम कमजोर हो सकता है, लेकिन Sea Buckthorn जूस इसे मजबूत बनाता है और पाचन बेहतर करता है। 3. त्वचा को बनाता है चमकदार इसमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाते हैं, जिससे आपकी फिटनेस बाहर से भी नजर आती है।   आसान और इंस्टेंट हेल्थ ड्रिंक दूसरे सप्लीमेंट्स की तरह इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता। बस पानी की बोतल में मिलाएं शेक करें और पी लें यह प्री-वर्कआउट या पोस्ट-वर्कआउट ड्रिंक के रूप में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। प्राकृतिक “एनर्जी और स्टैमिना बूस्टर” Sea Buckthorn को पारंपरिक रूप से एक प्राकृतिक “अफ्रोडिज़िएक” (यौन शक्ति बढ़ाने वाला) भी माना जाता है। यह ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है हार्मोन बैलेंस बनाए रखता है शरीर की स्टैमिना और एनर्जी बढ़ाता है पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन सपोर्ट और महिलाओं में हार्मोन संतुलन में भी मददगार माना जाता है। रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे शामिल करें? आप इसे अपने डेली रूटीन में आसानी से जोड़ सकते हैं: सुबह: एक गिलास पानी में एक चम्मच मिलाकर वर्कआउट से पहले: 15–30 मिनट पहले बोतल में मिलाकर वर्कआउट के बाद: शेक या जूस में मिलाकर शाम को: आराम के समय सेवन कर सकते हैं

surbhi मार्च 18, 2026 0
Kriti Sanon demonstrating her high-protein fitness routine and workout for a strong body.
कृति सेनन का ‘हाई-प्रोटीन फिटनेस फॉर्मूला’: ऐसे पाएं मसल्स और फिट बॉडी

बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने अपनी फिटनेस और ट्रांसफॉर्मेशन से एक बार फिर लोगों को प्रेरित किया है। उनका “हाई-प्रोटीन, हाई-एक्शन” फिटनेस प्लान आज युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, खासकर उन लोगों के लिए जो हेल्दी तरीके से वजन बढ़ाकर मसल्स बनाना चाहते हैं।   डाइट नहीं, बैलेंस है असली मंत्र कृति सेनन का मानना है कि फिट रहने के लिए सख्त डाइट की जरूरत नहीं, बल्कि संतुलित खानपान जरूरी है। वह “सब खाओ, लेकिन सही खाओ और जमकर वर्कआउट करो” के सिद्धांत पर चलती हैं। उनके अनुसार, शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें, यही सबसे अहम है।   ‘मिमी’ के लिए किया जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन मिमी फिल्म के लिए कृति ने वजन बढ़ाने का चैलेंज लिया था। इसके लिए उन्होंने खास डाइट प्लान और वर्कआउट रूटीन अपनाया, जिससे उनका फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन काफी चर्चा में रहा।   एक्शन रोल के लिए खास तैयारी अपनी आगामी फिल्म गणपथ के लिए कृति ने हाई-प्रोटीन डाइट, संतुलित कार्ब्स और हेल्दी फैट्स पर फोकस किया। यह डाइट उन्हें स्टैमिना, स्ट्रेंथ और एक्शन सीन के लिए जरूरी एनर्जी देती है।   शरीर को मानती हैं ‘लैब’ कृति अपनी बॉडी को एक ‘एक्सपेरिमेंट’ की तरह देखती हैं। वह अलग-अलग डाइट और न्यूट्रिशन प्लान ट्राय करके समझती हैं कि उनके शरीर पर क्या सबसे अच्छा काम करता है।   दिनभर का डाइट प्लान कैसा होता है? सुबह (ब्रेकफास्ट): अंडे और ओट्स ताजे फल (विटामिन C के लिए) दोपहर (लंच): ग्रिल्ड चिकन या मछली ब्राउन राइस हरी और रंग-बिरंगी सब्जियां शाम/रात (डिनर): हल्का खाना जैसे सूप, सलाद या ग्रिल्ड वेजिटेबल आसान पाचन और बेहतर नींद के लिए   वर्कआउट और डाइट का सही तालमेल कृति का मानना है कि सिर्फ डाइट या सिर्फ वर्कआउट से काम नहीं चलता। दोनों का संतुलन जरूरी है। वह नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करती हैं।   हाइड्रेशन पर खास ध्यान दिनभर भरपूर पानी पीना उनकी फिटनेस का अहम हिस्सा है। इससे शरीर एक्टिव रहता है और स्किन भी हेल्दी बनी रहती है।   फिटनेस का असली मंत्र कृति सेनन का फिटनेस फॉर्मूला साफ है- संतुलित डाइट + नियमित वर्कआउट + निरंतरता = फिट और स्ट्रॉन्ग बॉडी  

surbhi मार्च 17, 2026 0
वजन के अनुसार रोज कितना प्रोटीन लेना चाहिए, हेल्थ और फिटनेस गाइड
जाने आपके वजन के हिसाब से कितना प्रोटीन हैं  जरूरी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। प्रोटीन हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण के साथ-साथ बाल और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि उन्हें रोजाना कितनी मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा व्यक्ति के शरीर के वजन, उम्र और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है।   वजन के अनुसार कितनी होनी चाहिए प्रोटीन की मात्रा पोषण विशेषज्ञों और कई शोधों के अनुसार एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन अपने शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो उसे रोजाना लगभग 48 से 60 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। हालांकि यह मात्रा सभी लोगों के लिए एक समान नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय है या नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसे सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है।   एक्सरसाइज करने वालों को ज्यादा प्रोटीन की जरूरत पोषण संबंधी कई अध्ययनों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से जिम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों के लिए प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.2 से 1.7 ग्राम प्रोटीन की जरूरत बताई जाती है।वहीं एथलीट या अत्यधिक शारीरिक गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए यह मात्रा 2 ग्राम प्रति किलोग्राम तक हो सकती है, जिससे शरीर के ऊतकों की मरम्मत तेजी से हो सके।   उम्र और विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाती है जरूरत बढ़ती उम्र के बच्चों और किशोरों को शरीर के विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मांसपेशियों की कमी होने लगती है, इसलिए उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है।गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सामान्य लोगों की तुलना में प्रतिदिन लगभग 20 से 25 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है।   प्रोटीन की कमी और ज्यादा सेवन दोनों नुकसानदायक विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन की कमी होने पर बाल झड़ना, नाखून कमजोर होना, थकान और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, खासकर सप्लीमेंट्स के रूप में लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है।   संतुलित आहार है सबसे बेहतर उपाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका है। दालें, पनीर, अंडे, दूध, सोयाबीन और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 14, 2026 0
Doctor advises eating whole fruits instead of fruit juice
जूस की जगह फल खाने की सलाह क्यों देते हैं डॉक्टर? जानिए इसके पीछे की वजह

  अक्सर डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि फलों का जूस पीने के बजाय पूरा फल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। कई शोधों में भी यह बात सामने आई है कि पूरे फल शरीर को ज्यादा संतुलित और बेहतर पोषण देते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह फलों में मौजूद फाइबर (रेशा) होता है।   फाइबर की वजह से ज्यादा फायदा जब हम पूरा फल खाते हैं तो उसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह आंतों की गतिविधि को बेहतर करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। लेकिन जब फल का जूस बनाया जाता है, तो उसमें मौजूद ज्यादातर फाइबर निकल जाता है और केवल मीठा तरल बच जाता है। इससे शरीर को वही लाभ नहीं मिल पाता जो पूरे फल से मिलता है।   ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जूस पीने से खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। Harvard School of Public Health की एक स्टडी, जो The BMJ में 2013 में प्रकाशित हुई थी, उसके अनुसार रोजाना एक सर्विंग फ्रूट जूस पीने से Type 2 Diabetes का खतरा लगभग 21 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होने के कारण उसमें मौजूद शुगर जल्दी खून में पहुंचती है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है और फिर अचानक गिर भी सकती है।   छिलके और गूदे में छिपे होते हैं पोषक तत्व रिसर्च बताती है कि कई फलों के छिलके और गूदे में जरूरी पोषक तत्व होते हैं। उदाहरण के लिए Apple और Pear के छिलकों में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन जूस बनाते समय अक्सर छिलका और गूदा अलग कर दिया जाता है, जिससे कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं।   इसलिए फल खाना बेहतर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पूरा फल खाने से शरीर को फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट बेहतर तरीके से मिलते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर जूस के बजाय फल खाने की सलाह देते हैं।

surbhi मार्च 13, 2026 0
Yellowing eyes and eyelids indicating possible liver disease or early liver cancer symptoms
Liver Cancer Symptoms: आंखों में दिखें ये संकेत तो हो जाएं सावधान, लिवर की बीमारी का हो सकता है संकेत

  हमारी आंखें सिर्फ देखने का माध्यम ही नहीं हैं, बल्कि कई बार शरीर में होने वाली बीमारियों के संकेत भी देती हैं। खासकर Liver Cancer और अन्य लिवर से जुड़ी बीमारियों के कुछ लक्षण आंखों में भी दिखाई दे सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सकता है।   शरीर में लिवर की अहम भूमिका लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को प्रोसेस करने का काम करता है। लेकिन लंबे समय तक शराब का सेवन, Hepatitis B या Hepatitis C संक्रमण, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी समस्याएं लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि लिवर लंबे समय तक खराब रहता है तो यह स्थिति Cirrhosis में बदल सकती है, जो आगे चलकर लिवर फेलियर या लिवर कैंसर का कारण बन सकती है।   आंखों में दिखने वाले लिवर की बीमारी के लक्षण 1. आंखों का पीला पड़ना (पीलिया) लिवर की गंभीर बीमारी का सबसे आम लक्षण आंखों का पीला पड़ना है, जिसे Jaundice कहा जाता है। यह तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ जाता है और लिवर उसे बाहर नहीं निकाल पाता। 2. आंखों में सूखापन लिवर की समस्या के कारण शरीर में विटामिन A की कमी हो सकती है, जिससे आंखों में सूखापन और जलन की समस्या होने लगती है। 3. रात में देखने में परेशानी विटामिन A की कमी के कारण कई लोगों को रात में साफ दिखाई देने में दिक्कत होने लगती है। 4. पलकों के आसपास पीले दाग या गांठ कुछ मामलों में पलकों के आसपास पीले रंग की छोटी गांठें दिखाई देती हैं, जिन्हें Xanthelasma कहा जाता है। यह शरीर में फैट और लिवर से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है।   कब बढ़ जाता है खतरा? एक्सपर्ट्स के अनुसार जब लिवर में ट्यूमर बढ़ने लगता है, तो वह बाइल डक्ट पर दबाव डाल सकता है। इससे शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण आंखें और त्वचा पीली पड़ सकती हैं। इसके साथ ही गहरा पेशाब, खुजली, थकान और भूख कम लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।   समय पर जांच है जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि अगर आंखों में इस तरह के लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में बीमारी का पता चलने पर इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से लिवर को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Woman checking weight on a scale, highlighting fitness and body composition awareness.
क्या वजन मशीन सच बताती है? फिटनेस की असली सच्चाई जानिए

  आज के समय में फिटनेस को अक्सर एक ही चीज़ से मापा जाता है-वजन मशीन पर दिखने वाला नंबर। कई बार एक सप्ताह की छुट्टी, एक भारी भोजन या दिनचर्या में थोड़ा बदलाव भी उस नंबर को बदल देता है और लोगों को लगता है कि उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई। यही कारण है कि वजन मशीन का आंकड़ा कई लोगों के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति को प्रभावित करने लगता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस और स्वास्थ्य को केवल वजन से नहीं आंका जा सकता। असल में शरीर की सेहत कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है, जिन्हें समझना अधिक जरूरी है।   वजन ही फिटनेस का सही पैमाना नहीं हमारे शरीर का कुल वजन कई चीजों से मिलकर बना होता है। इसमें हड्डियों का वजन, मांसपेशियां, शरीर में मौजूद वसा, अंग, कोशिकाएं और अन्य ऊतक शामिल होते हैं। इसी वजह से दो अलग-अलग व्यक्ति का वजन समान हो सकता है, लेकिन उनका शरीर पूरी तरह अलग दिख सकता है। उदाहरण के तौर पर एक व्यक्ति के शरीर में मांसपेशियों की मात्रा ज्यादा और वसा कम हो सकती है, जबकि दूसरे व्यक्ति में वसा अधिक और मांसपेशियां कम हो सकती हैं। ऐसे में दोनों का वजन भले ही एक जैसा हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से पहला व्यक्ति ज्यादा फिट माना जाएगा।   मसल्स और बॉडी कंपोजिशन का महत्व जो लोग नियमित व्यायाम करते हैं, उनके शरीर में मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हड्डियों की घनत्व भी बेहतर होता है। इससे शरीर कई बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी बॉडी कंपोजिशन-यानी कम फैट और ज्यादा मसल्स-डायबिटीज, थायरॉयड और हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियों के खतरे को कम कर सकती है। साथ ही इससे शरीर की फुर्ती, संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता भी बेहतर रहती है।   डॉक्टर जब वजन कम करने को कहते हैं, तो उसका मतलब क्या होता है? अक्सर डॉक्टर जब वजन कम करने की सलाह देते हैं, तो उनका मतलब केवल शरीर का कुल वजन कम करना नहीं होता। असल में उनका उद्देश्य शरीर में मौजूद अतिरिक्त वसा को कम करना होता है। इसे फैट लॉस कहा जाता है, जिसे केवल साधारण वजन मशीन से सही तरीके से मापा नहीं जा सकता।   बॉडी कंपोजिशन जांच के विकल्प शरीर की सही संरचना जानने के लिए DEXA (Dual-Energy X-Ray Absorptiometry) स्कैन जैसे टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे हड्डियों की घनत्व और शरीर में फैट व मसल्स की मात्रा का सही अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि यह जांच काफी महंगी होती है। इसके अलावा कई फिटनेस सेंटर भी बॉडी कंपोजिशन रिपोर्ट देते हैं, लेकिन ये कई बार बाहरी कारकों पर निर्भर होने के कारण पूरी तरह सटीक नहीं होती।   फिटनेस की असली पहचान क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार असली फिटनेस केवल वजन से नहीं बल्कि शरीर की कार्यक्षमता से पहचानी जाती है। यदि आपका शरीर आसानी से सांस लेता है, आप बिना थकान के चल-फिर सकते हैं, व्यायाम के बाद जल्दी रिकवरी हो जाती है और दिल की धड़कन सामान्य रहती है-तो यह स्वस्थ शरीर की निशानी है। इसलिए फिटनेस जर्नी में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है निरंतरता, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Tamannaah Bhatia trainer warning about foods to avoid before gym
वर्कआउट से पहले भूलकर भी न खाएं ये 3 चीजें! एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया के ट्रेनर ने दी अहम सलाह

  जिम में बेहतर प्रदर्शन और सही फिटनेस रिजल्ट पाने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि वर्कआउट से पहले क्या खाया जा रहा है यह भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। मशहूर अभिनेत्री Tamannaah Bhatia के फिटनेस ट्रेनर Siddhartha Singh ने हाल ही में बताया है कि जिम जाने से पहले कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि ये आपकी ऊर्जा और परफॉर्मेंस पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। ट्रेनर ने अपने विचार Instagram पर साझा करते हुए कहा कि कई लोग अनजाने में ऐसी चीजें खा लेते हैं जो पाचन को धीमा कर देती हैं, पेट फूलने की समस्या पैदा करती हैं या वर्कआउट के दौरान ऊर्जा अचानक गिरा देती हैं।   1. तली हुई चीजें (Fried Foods) ट्रेनर के अनुसार तली हुई चीजों में फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और शरीर भारी महसूस करता है। इससे जिम में सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है। वर्कआउट से पहले French fries, Chicken nuggets, Donuts और Samosa जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखना बेहतर माना जाता है।   2. ज्यादा फाइबर वाले फूड सामान्य तौर पर फाइबर युक्त भोजन सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन जिम जाने से ठीक पहले इन्हें खाना सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा फाइबर वाले भोजन से पेट फूलने और गैस की समस्या हो सकती है, जिससे वर्कआउट के दौरान असहजता महसूस हो सकती है।   3. ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ ट्रेनर का कहना है कि बहुत ज्यादा शुगर वाले खाद्य पदार्थ शुरुआत में तेजी से ऊर्जा देते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद अचानक ऊर्जा गिरने लगती है। इस वजह से वर्कआउट के बीच में थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।   वर्कआउट से पहले क्या खाना चाहिए? फिटनेस एक्सपर्ट के अनुसार जिम जाने से पहले ऐसा भोजन लेना चाहिए जिसमें: हाई कार्बोहाइड्रेट कम फैट कम फाइबर मध्यम मात्रा में प्रोटीन हो। इससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है और वर्कआउट बेहतर तरीके से किया जा सकता है। ट्रेनर का कहना है कि सही प्री-वर्कआउट डाइट न सिर्फ जिम में प्रदर्शन सुधारती है, बल्कि बेहतर रिकवरी और फिटनेस परिणाम भी देती है।   

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0