Healthy Eating

Dark chocolate pieces kept beside a bedside lamp symbolizing better sleep and stress relief at night
रात में डार्क चॉकलेट खाना फायदेमंद? बेहतर नींद और तनाव कम करने में मिल सकती है मदद

सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu with yellow flowers and lamps on Apara Ekadashi 2026
अपरा एकादशी 2026 आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा अपार पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और जरूरी नियम

आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Summer fruits like mangoes, watermelon and litchis displayed with healthy eating concept
आम, तरबूज और लीची खाने वालों के लिए जरूरी खबर! डॉक्टर ने बताया कितना फल खाना हो सकता है नुकसानदायक

गर्मियों में ज्यादा फल खाना भी बन सकता है परेशानी गर्मी का मौसम आते ही बाजार आम, तरबूज, लीची और पपीते जैसे फलों से भर जाते हैं। लोग इन्हें हेल्दी मानकर बिना सोचे-समझे खूब खाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फल खाना शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, खासकर डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिए। विशेषज्ञों के मुताबिक फलों में प्राकृतिक शुगर यानी फ्रक्टोज होता है। सीमित मात्रा में यह फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेवन करने पर यह लिवर पर दबाव बढ़ा सकता है और ब्लड शुगर भी बढ़ा सकता है। आम खाते समय रखें मात्रा का ध्यान आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल माना जाता है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग एक दिन में आधा मध्यम आकार का आम ही खाएं। सामान्य लोग एक छोटा या मध्यम आकार का आम खा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम को भोजन के तुरंत बाद खाने के बजाय स्नैक की तरह खाएं। इसके साथ दही, पनीर, भुना चना या ड्राई फ्रूट्स लेने से शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। मैंगो शेक, आमरस और पैकेज्ड जूस से बचने की सलाह दी गई है। तरबूज ज्यादा खाने से भी बढ़ सकती है शुगर तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए लोग इसे बड़ी मात्रा में खा लेते हैं। हालांकि यह हल्का फल माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए 100-150 ग्राम तरबूज पर्याप्त माना गया है। अन्य लोग करीब 200 ग्राम तक खा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज का जूस पीने से बचना चाहिए, क्योंकि उसमें फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है। लीची खाते समय बरतें सावधानी लीची स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन इसमें फ्रक्टोज की मात्रा काफी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग 3-4 लीची तक सीमित रहें। सामान्य लोग 7-8 लीची खा सकते हैं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कच्ची लीची खाली पेट खाना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। बिहार में पहले भी इससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। पपीता और आड़ू बेहतर विकल्प पपीता अपेक्षाकृत हल्का और सुरक्षित फल माना जाता है। डायबिटीज मरीज 100 ग्राम तक पपीता खा सकते हैं। अन्य लोग 150-200 ग्राम तक सेवन कर सकते हैं। वहीं आड़ू और आलूबुखारा जैसे फल भी सीमित मात्रा में अच्छे विकल्प माने जाते हैं। फ्रूट प्लेटर भी बन सकता है खतरा डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग एक साथ आम, तरबूज, लीची, खरबूजा और पपीता मिलाकर बड़ा फ्रूट बाउल खा लेते हैं। देखने में यह हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: अलग-अलग फल खाने पर भी कुल मात्रा नियंत्रित रखें। डायबिटीज वाले लोग कुल मिलाकर करीब 100 ग्राम फल ही लें। सामान्य लोग 200 ग्राम तक फल खा सकते हैं। कब खाना चाहिए फल? डॉक्टरों के मुताबिक फल खाने का सही समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। फलों को भोजन के बीच में खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है। रात में भारी मात्रा में फल खाने से बचना चाहिए। सुबह या दिन में फल खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है। जूस नहीं, साबुत फल खाएं विशेषज्ञों का कहना है कि ताजे और साबुत फल हमेशा जूस से बेहतर होते हैं। जूस में फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकती है।  

surbhi मई 11, 2026 0
Papaya Benefits
सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत और खूबसूरती का भी खजाना है पपीता

नई दिल्ली, एजेंसियां। पपीता एक ऐसा फल है जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स नियमित रूप से इसे खाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसमें विटामिन-ए, विटामिन-सी, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई जरूरी एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पपीता शरीर को अंदर से मजबूत बनाने के साथ-साथ स्किन और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में भी मदद करता है। रोजाना इसका सेवन कई छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिला सकता है।   पाचन तंत्र को रखता है दुरुस्त अगर किसी को कब्ज, गैस या अपच जैसी समस्याएं रहती हैं तो पपीता काफी लाभदायक साबित हो सकता है। इसमें मौजूद फाइबर और पपेन नामक एंजाइम भोजन को पचाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से पपीता खाने से पेट साफ रहता है और डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। यही वजह है कि इसे पेट के लिए सबसे फायदेमंद फलों में गिना जाता है।   हड्डियों को बनाता है मजबूत पपीते में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन-के जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ती उम्र के लोगों के लिए इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। बच्चों के लिए भी यह फल काफी फायदेमंद है, क्योंकि यह शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है।   स्किन पर लाता है नेचुरल ग्लो पपीते का सेवन स्किन के लिए किसी प्राकृतिक ब्यूटी ट्रीटमेंट से कम नहीं है। इसमें मौजूद विटामिन-सी और एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को चमकदार और हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से डेड स्किन सेल्स हटते हैं और त्वचा साफ, मुलायम और ग्लोइंग नजर आती है।   बालों को बनाता है हेल्दी और मजबूत अगर बाल झड़ने, रूखेपन या बेजान होने की समस्या है तो पपीता मददगार हो सकता है। इसमें मौजूद विटामिन-ए और अन्य पोषक तत्व स्कैल्प को पोषण देते हैं। इससे बाल मजबूत, मुलायम और चमकदार बनते हैं। कई लोग पपीते का इस्तेमाल हेयर मास्क के रूप में भी करते हैं।   इम्यूनिटी बढ़ाने में भी कारगर पपीते में मौजूद विटामिन-सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। मौसम बदलने पर बार-बार बीमार पड़ने वाले लोगों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है। नियमित रूप से पपीता खाने से शरीर संक्रमण और कई बीमारियों से लड़ने में मजबूत बनता है।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
Assortment of cooling foods like coconut water, cucumber, watermelon and buttermilk for summer heat relief
Heatwave Alert: गर्मी और थकान से बचाएंगे ये 8 ‘कूलिंग फूड्स’, एक्सपर्ट्स ने बताया सही तरीका

तेज गर्मी के बीच शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है–पसीना ज्यादा आता है, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम होते हैं और थकान महसूस होती है। ऐसे में सही खानपान बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ खास ‘कूलिंग फूड्स’ शरीर के तापमान को संतुलित रखने, हाइड्रेशन बनाए रखने और पाचन सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं। कूलिंग फूड्स क्यों हैं जरूरी? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के दौरान शरीर में थर्मोरेगुलेशन (तापमान नियंत्रण) की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। ऐसे में पानी, पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्वों से भरपूर फूड्स शरीर को ठंडा रखने के साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं।   ये 8 फूड्स गर्मी में देंगे राहत 1. Coconut Water नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, जो तुरंत हाइड्रेशन देता है और थकान कम करता है। 2. Buttermilk (छाछ) पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ठंडा रखता है और ब्लोटिंग कम करता है। 3. Cucumber (खीरा) हाई वॉटर कंटेंट के कारण शरीर को हाइड्रेट रखता है और स्किन को भी फायदा देता है। 4. Black Raisins (भिगोए हुए किशमिश) ऊर्जा बढ़ाते हैं, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। 5. Chia Seeds / Sabja Seeds शरीर में लंबे समय तक पानी बनाए रखते हैं और एसिडिटी कम करते हैं। 6. Fennel Tea (सौंफ की चाय) पाचन सुधारती है और शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करती है। 7. Gulkand पारंपरिक ठंडा फूड, जो एसिडिटी और हीट को बैलेंस करता है। 8. Watermelon और Muskmelon हाई वॉटर कंटेंट वाले ये फल शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा देते हैं। क्या न करें? एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि बहुत ज्यादा ठंडे पेय या आइसक्रीम तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन पाचन को बिगाड़ सकते हैं। असली कूलिंग फूड्स वो होते हैं जो शरीर को अंदर से संतुलित करें। ध्यान रखें हर व्यक्ति का पाचन अलग होता है, इसलिए फूड्स का चयन अपनी बॉडी के अनुसार करें। जरूरत हो तो हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लें।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Fresh iron-rich green leafy vegetables including curry leaves, spinach, fenugreek, moringa, amaranth and mustard greens arranged in bowls on a wooden kitchen table
आयरन की कमी से बचने के लिए खाएं ये 6 हरी चीजें

  आजकल आयरन की कमी (Iron Deficiency) एक आम समस्या बन गई है, खासकर महिलाओं में। लेकिन सही डाइट अपनाकर इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं 6 ऐसी हरी चीजों के बारे में जो आपके शरीर में आयरन की कमी नहीं होने देंगी  1. करी पत्ता (Curry Leaves) — आयरन का पावरहाउस करी पत्ता सिर्फ तड़के के लिए नहीं, बल्कि आयरन और फोलिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। फोलिक एसिड आयरन को शरीर में अच्छे से अवशोषित करने में मदद करता है। इसे चटनी बनाकर या सीधे खाएं, फेंकें नहीं। 2. पालक (Spinach) — सबसे मशहूर आयरन सोर्स पालक आयरन से भरपूर होता है और रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। हल्का उबालकर या पकाकर खाएं नींबू या टमाटर के साथ लेने से आयरन जल्दी अवशोषित होता है 3. मेथी के पत्ते (Fenugreek Leaves) — खून बढ़ाने वाली सब्जी मेथी में आयरन के साथ-साथ फाइबर और विटामिन K भी होता है। खासकर महिलाओं के लिए फायदेमंद पराठा, सब्जी या दाल में शामिल करें 4. सहजन के पत्ते (Moringa) — ‘मिरेकल फूड’ मोरिंगा के पत्तों में पालक से भी ज्यादा आयरन होता है। इसमें विटामिन C भी होता है, जो आयरन को आसानी से शरीर में पहुंचाता है पाउडर, सूप या सांभर में इस्तेमाल करें 5. चौलाई (Amaranth Leaves) — आयरन + कैल्शियम का खजाना चौलाई के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये खून को मजबूत बनाते हैं स्टर-फ्राई या सब्जी के रूप में खाएं 6. सरसों का साग (Mustard Greens) — सर्दियों की ताकत सरसों का साग आयरन के साथ विटामिन A, C और K से भरपूर होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और खून साफ करता है सर्दियों में इसे जरूर डाइट में शामिल करें जरूरी टिप्स आयरन के साथ विटामिन C लेना जरूरी है (नींबू, आंवला) चाय/कॉफी खाने के तुरंत बाद न लें (आयरन अवशोषण कम होता है) संतुलित मात्रा में सेवन करें

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
गर्मियों में खीरा खाने के फायदे और नुकसान सेहत टिप्स
गर्मियों में खीरा खाते हैं? पहले जान लें इसे खाने का सही तरीका

नई दिल्ली,एजेंसियां। गर्मी का मौसम आते ही लोग अपनी डाइट में ठंडी, हल्की और पानी से भरपूर चीजों को शामिल करना शुरू कर देते हैं। इन्हीं में खीरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। खीरा शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन सुधारने, वजन कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोग इसे ऐसे तरीके से खा लेते हैं, जिससे इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे का गलत सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खासकर कुछ लोग इसे सुबह खाली पेट या रात में ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, जिससे दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।   खाली पेट या रात में खाने से हो सकती है परेशानी सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में खीरा खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट दर्द, गैस या जलन जैसी शिकायत हो सकती है। खीरे में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो हर किसी के पाचन तंत्र को सूट नहीं करती। वहीं, रात में खीरा खाना भी कई लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। रात के समय पाचन तंत्र थोड़ा धीमा काम करता है, ऐसे में खीरा ठीक से पच नहीं पाता और ब्लोटिंग, अपच और गैस की समस्या हो सकती है।   बिना धोए या बहुत ठंडा खीरा खाना भी सही नहीं खीरे को बिना धोए खाना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बाजार में मिलने वाली सब्जियों पर अक्सर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया और कीटनाशकों के अंश लगे हो सकते हैं। ऐसे में बिना साफ किए खाया गया खीरा पेट के संक्रमण या अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फ्रिज से निकला बहुत ठंडा खीरा तुरंत खाना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे कुछ लोगों को गले में खराश, सर्दी-जुकाम या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए खीरे को कुछ देर सामान्य तापमान पर रखने के बाद खाना बेहतर माना जाता है।   सही तरीका क्या है? खीरे को खाने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है। चाहें तो इसे हल्के नमक वाले पानी से भी साफ किया जा सकता है। अगर छिलका सख्त या कड़वा लगे तो उसे हटाकर खाना बेहतर होता है। खीरे में हल्का नमक, काली मिर्च या नींबू मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और पाचन भी बेहतर हो सकता है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Simple calorie deficit formula for effective weight loss.
वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं? इस सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट का आसान फॉर्मूला सच में करता है काम

  वजन कम करना कई लोगों के लिए आसान नहीं होता। डाइट प्लान, एक्सरसाइज, इंटरमिटेंट फास्टिंग और अलग-अलग सलाह के बीच लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। लेकिन सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट Dr. Siddhant Bhargava के मुताबिक वजन घटाने का सबसे आसान और वैज्ञानिक तरीका है कैलोरी डेफिसिट बनाना। डॉ. सिद्धांत भार्गव बॉलीवुड सितारों जैसे Alia Bhatt, Ananya Panday और Sara Ali Khan के साथ काम कर चुके हैं। वे हेल्दी मील सर्विस प्लेटफॉर्म Food Darzee के सह-संस्थापक भी हैं।   वजन घटाने का असली नियम: कैलोरी डेफिसिट डॉ. सिद्धांत के अनुसार, वजन घटाने का मूल सिद्धांत बेहद सरल है- शरीर जितनी कैलोरी लेता है उससे ज्यादा कैलोरी खर्च करे। इसे ही कैलोरी डेफिसिट कहा जाता है। उदाहरण के लिए: अगर आपका शरीर रोज 2000 कैलोरी खर्च करता है और आप सिर्फ 1600–1700 कैलोरी लेते हैं तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा के लिए स्टोर फैट को जलाना शुरू कर देता है, जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है।   डाइट फॉलो करने से ज्यादा जरूरी है यह समझना डॉ. सिद्धांत बताते हैं कि लोग अक्सर अलग-अलग डाइट ट्रेंड्स के पीछे भागते हैं, जैसे: इंटरमिटेंट फास्टिंग लो-कार्ब डाइट क्रैश डाइट लेकिन असल में इन सभी का उद्देश्य सिर्फ कैलोरी कम करना ही होता है।   कैलोरी डेफिसिट बनाने के दो आसान तरीके 1. कम खाना (Portion Control) खाने की मात्रा थोड़ा कम कर दें और जंक फूड से बचें। 2️. ज्यादा एक्टिव रहना वर्कआउट, वॉकिंग, रनिंग या जिम से ज्यादा कैलोरी बर्न करें। इन दोनों तरीकों में से कोई भी अपनाया जा सकता है, बस शरीर को कम कैलोरी मिलनी चाहिए जितनी वह खर्च करता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Doctor advises eating whole fruits instead of fruit juice
जूस की जगह फल खाने की सलाह क्यों देते हैं डॉक्टर? जानिए इसके पीछे की वजह

  अक्सर डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि फलों का जूस पीने के बजाय पूरा फल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। कई शोधों में भी यह बात सामने आई है कि पूरे फल शरीर को ज्यादा संतुलित और बेहतर पोषण देते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह फलों में मौजूद फाइबर (रेशा) होता है।   फाइबर की वजह से ज्यादा फायदा जब हम पूरा फल खाते हैं तो उसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह आंतों की गतिविधि को बेहतर करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। लेकिन जब फल का जूस बनाया जाता है, तो उसमें मौजूद ज्यादातर फाइबर निकल जाता है और केवल मीठा तरल बच जाता है। इससे शरीर को वही लाभ नहीं मिल पाता जो पूरे फल से मिलता है।   ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जूस पीने से खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। Harvard School of Public Health की एक स्टडी, जो The BMJ में 2013 में प्रकाशित हुई थी, उसके अनुसार रोजाना एक सर्विंग फ्रूट जूस पीने से Type 2 Diabetes का खतरा लगभग 21 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होने के कारण उसमें मौजूद शुगर जल्दी खून में पहुंचती है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है और फिर अचानक गिर भी सकती है।   छिलके और गूदे में छिपे होते हैं पोषक तत्व रिसर्च बताती है कि कई फलों के छिलके और गूदे में जरूरी पोषक तत्व होते हैं। उदाहरण के लिए Apple और Pear के छिलकों में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन जूस बनाते समय अक्सर छिलका और गूदा अलग कर दिया जाता है, जिससे कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं।   इसलिए फल खाना बेहतर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पूरा फल खाने से शरीर को फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट बेहतर तरीके से मिलते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर जूस के बजाय फल खाने की सलाह देते हैं।

surbhi मार्च 13, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0