देश की सबसे बड़ी परिवहन संस्था Indian Railways ने आय के नए स्रोत तलाशते हुए एक अनोखी मिसाल पेश की है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे ने स्क्रैप यानी कबाड़ बेचकर ₹6,813.86 करोड़ की रिकॉर्ड कमाई की है। यह आंकड़ा न सिर्फ तय लक्ष्य ₹6,000 करोड़ से कहीं ज्यादा है, बल्कि अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे लगातार पारंपरिक आय के अलावा ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ और ‘इनोवेटिव फाइनेंशियल मॉडल’ पर ध्यान दे रहा है। यही वजह है कि बिना यात्रियों पर किराया बढ़ाए अतिरिक्त कमाई संभव हो पाई है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी रेलवे ने ₹6,641.78 करोड़ की कमाई की थी, लेकिन इस बार यह आंकड़ा और आगे निकल गया है, जो रेलवे की बेहतर योजना और संसाधन प्रबंधन को दर्शाता है। स्टेशनों पर दिखेगा नया बदलाव रेलवे अब यात्रियों के अनुभव को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। नई पॉलिसी के तहत देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर प्रीमियम ब्रांड्स के आउटलेट्स खोले जा रहे हैं। अब तक 22 बड़े ब्रांड्स को अनुमति दी जा चुकी है, जिससे यात्रियों को शॉपिंग और खान-पान के बेहतर विकल्प मिलेंगे। यात्रियों को क्या होगा फायदा? इस अतिरिक्त कमाई का सीधा लाभ यात्रियों को देने की योजना है– स्टेशनों और ट्रेनों में बेहतर साफ-सफाई हाई-स्पीड वाई-फाई और उन्नत डिजिटल सेवाएं आधुनिक और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर नई और बेहतर ट्रेनों की शुरुआत रेलवे का यह कदम न सिर्फ वित्तीय मजबूती का संकेत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे बेकार समझे जाने वाले संसाधनों से भी बड़े स्तर पर आय पैदा की जा सकती है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi मंगलवार को Delhi–Dehradun Expressway का उद्घाटन करेंगे। 213 किलोमीटर लंबा यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर ₹12,000 करोड़ से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह परियोजना Delhi, Uttar Pradesh और Uttarakhand से होकर गुजरती है। अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय वर्तमान छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे रह जाएगा। परियोजना में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज, चार प्रमुख पुल और 12 वे-साइड सुविधाओं का निर्माण शामिल है। साथ ही उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम होगी। प्रधानमंत्री उद्घाटन से पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में वन्यजीव गलियारे का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे देहरादून के पास स्थित Jai Maa Daat Kali Temple में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर जनसभा को संबोधित करेंगे। परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया के सबसे लंबे वन्यजीव गलियारों में शामिल है। इसके अलावा आठ पशु मार्ग, हाथियों के लिए 200 मीटर लंबे दो अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। सरकार का मानना है कि यह कॉरिडोर क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। साथ ही दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने से व्यापार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
नई दिल्ली: देश में तेजी से बन रहे हाईवे और एक्सप्रेस-वे के बीच सरकार ने निर्माण प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी नया नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट तब तक शुरू नहीं होगा, जब तक 100 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण और सभी जरूरी मंजूरियां पूरी नहीं हो जातीं। इस फैसले को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़ा सुधार माना जा रहा है। क्या है नया नियम? नए नियम के तहत अब ‘अपॉइंटेड डेट’ यानी निर्माण शुरू करने की आधिकारिक तारीख तभी तय होगी, जब जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और वन विभाग की अनुमति जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी। पहले यह सीमा 90 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण की थी, लेकिन इसके बावजूद कई प्रोजेक्ट बीच में अटक जाते थे। क्यों करना पड़ा बदलाव? सरकार के अनुसार हाईवे प्रोजेक्ट्स में सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण और मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाएं रही हैं। अधूरी जमीन या लंबित क्लीयरेंस के कारण प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाते थे, जिससे लागत बढ़ती थी और विवाद भी पैदा होते थे। यही वजह है कि अब 100 प्रतिशत तैयारी के बाद ही निर्माण शुरू करने का फैसला लिया गया है, ताकि देरी और कानूनी अड़चनों से बचा जा सके। नए नियम से क्या बदलेगा? इस फैसले के बाद हाईवे प्रोजेक्ट्स में देरी की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य बिना रुकावट के तेजी से पूरा हो सकेगा और विवादों में भी कमी आएगी। साथ ही परियोजनाओं की लागत नियंत्रण में रहेगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा। हाइवे एसेट्स से फंड जुटाने की योजना सरकार के पास करीब 15 लाख करोड़ रुपये के हाईवे एसेट्स हैं। इन्हें मॉनेटाइज कर नई परियोजनाओं के लिए फंड जुटाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को और गति मिलने की उम्मीद है। DPR की गुणवत्ता पर भी फोकस गडकरी ने यह भी कहा कि कई बार खराब क्वालिटी की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के कारण भी प्रोजेक्ट प्रभावित होते हैं। ऐसे में अनुभवी लोगों, खासकर रिटायर्ड अधिकारियों को शामिल कर बेहतर DPR तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि निर्माण की गुणवत्ता सुधारी जा सके। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है। इससे न केवल प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मार्च को गुजरात दौरे पर जाएंगे, जहां वे कई शहरी विकास (Urban Development) परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब गुजरात 2005 से शुरू हुई अपनी शहरी विकास यात्रा के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। 20 साल में बदला गुजरात का शहरी चेहरा राज्य सरकार के मुताबिक, पिछले दो दशकों में गुजरात में शहरीकरण और बुनियादी ढांचे में तेजी से विकास हुआ है। सड़कों, स्ट्रीट लाइट, पानी की पाइपलाइन और सीवरेज सिस्टम का विस्तार ग्रीन स्पेस और टाउन प्लानिंग योजनाओं का विकास गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग गुजरात में सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क को मजबूत किया गया है: अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में ओवरब्रिज और अंडरब्रिज द्वारका-बेट द्वारका को जोड़ने वाला सुदर्शन सेतु शुरू बड़े प्रोजेक्ट: जामनगर-भटिंडा हाईवे, वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 430 KM नमो शक्ति एक्सप्रेसवे और 680 KM सोमनाथ-द्वारका एक्सप्रेसवे प्रस्तावित मेट्रो, बुलेट ट्रेन और रेलवे का विस्तार अहमदाबाद मेट्रो फेज-2 पूरा, गांधीनगर से बेहतर कनेक्टिविटी सूरत मेट्रो के लिए 24 ट्रेनसेट तैयार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट प्रगति पर 89 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास, 18 तैयार एयरपोर्ट और उड़ान सेवाओं का विस्तार राजकोट में हिरासर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित सूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट तैयार UDAN योजना के तहत कई शहरों में फ्लाइट कनेक्टिविटी बढ़ी AMRUT और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत काम 630 करोड़ से अधिक के जल प्रोजेक्ट, 82 हजार से ज्यादा घरों को फायदा 575 करोड़ की सीवरेज योजनाएं 6 स्मार्ट सिटी में 359 प्रोजेक्ट, ज्यादातर पूरे PM आवास योजना से 9 लाख से ज्यादा घर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 9.19 लाख से अधिक घर राजकोट में Lighthouse प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक तकनीक से निर्माण PMAY 2.0 के तहत 1 लाख से ज्यादा नए घर मंजूर बजट और भविष्य की तैयारी 2026-27 बजट में शहरी विकास के लिए 33,504 करोड़ रुपये ‘स्वर्णिम जयंती शहरी विकास योजना’ के लिए 16,116 करोड़ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए 1,278 करोड़
बिहार के औद्योगिक विकास को मिला बड़ा बूस्ट बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने जा रही है। देश की दिग्गज कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने राज्य में अपनी नई निर्माण इकाई स्थापित करने का फैसला लिया है। यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। बांका के कटोरिया में बनेगा प्लांट यह फैक्ट्री बांका जिले के कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। करीब 59.47 एकड़ जमीन पर बनने वाला यह प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक नक्शे को बदलने की क्षमता रखता है। इस परियोजना को राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। 1200 करोड़ का निवेश, 1000 को सीधा रोजगार अल्ट्राटेक सीमेंट इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इस बड़े निवेश से करीब 1000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को काम मिलेगा। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, निर्माण और छोटे व्यवसायों को भी इस फैक्ट्री के जरिए नई रफ्तार मिलेगी। बांका बनेगा नया इंडस्ट्रियल हब कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में इस फैक्ट्री के लगने से बांका और आसपास के इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी। लंबे समय से निवेश की प्रतीक्षा कर रहे इस क्षेत्र के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमेंट उद्योग किसी भी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को कई गुना बढ़ाने का काम करता है। सरकार की नीतियों का असर दिखा उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई। वहीं उद्योग विभाग और बियाडा की ओर से दी जा रही सुविधाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन पर है, जिसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है। निवेश के लिए तैयार हो रहा बिहार राज्य में लगातार बेहतर होती नीतियां और निवेश के अनुकूल माहौल यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार अब उद्योगों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। अल्ट्राटेक सीमेंट का यह निवेश ‘औद्योगिक बिहार’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या होगा आम लोगों को फायदा? इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।