Iran Israel Conflict

HDFC Bank employees working in hybrid mode amid rising fuel prices and work from home trend
ईंधन संकट के बीच बढ़ा Work From Home का ट्रेंड, HDFC Bank ने दी हाइब्रिड वर्क की सुविधा

HDFC Bank ने अपने कुछ कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है और देश में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह व्यवस्था फिलहाल 30 दिनों के लिए लागू की गई है, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। बैंक ने यह सुविधा मुख्य रूप से बिजनेस एनेबलिंग और कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस से जुड़े कर्मचारियों को दी है। किन कर्मचारियों को मिलेगा Work From Home? HDFC Bank के अनुसार हाइब्रिड मॉडल में शामिल विभागों में: ट्रेजरी ऑपरेशंस क्रेडिट अंडरराइटिंग एंड रिस्क ट्रांजैक्शन बुकिंग डिजिटल बैंकिंग IT सर्विसेज जैसे बिजनेस एनेबलिंग फंक्शंस शामिल हैं। वहीं कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस में: ह्यूमन रिसोर्सेज फाइनेंस एंड अकाउंट्स लीगल एंड कंप्लायंस सेक्रेटेरियल और बोर्ड फंक्शंस को शामिल किया गया है। हालांकि बैंक ने साफ किया है कि उसकी सभी शाखाएं और कस्टमर फेसिंग सर्विसेज पहले की तरह सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ा Hybrid Work Model प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में कंपनियों और लोगों से ईंधन बचाने के लिए Work From Home को बढ़ावा देने की अपील की थी। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% तक तेजी आई है। इसका असर: भारत के आयात बिल चालू खाते के घाटे पेट्रोल-डीजल कीमतों और रुपये की स्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी वजह से कई कंपनियां अब हाइब्रिड वर्क मॉडल की तरफ लौट रही हैं। दूसरे बैंक भी अपना रहे Hybrid Model IndusInd Bank ने भी हाल ही में कुछ कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू किया है। वहीं Axis Bank में 2021 से ही नॉन-कस्टमर फेसिंग कर्मचारियों के लिए Hybrid Work Policy लागू है, जिसके तहत कर्मचारियों को सप्ताह में सिर्फ दो दिन ऑफिस आना पड़ता है। Zoho ने किया Work From Home से इनकार जहां कई कंपनियां WFH को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं Zoho Corporation के फाउंडर Sridhar Vembu ने साफ कहा है कि उनकी कंपनी फिलहाल Work From Home लागू नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि कंपनी ने हाल ही में अपनी WFH पॉलिसी की समीक्षा की थी और निष्कर्ष निकाला कि खासकर रिसर्च और एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में आमने-सामने बैठकर काम करने से बेहतर नतीजे मिलते हैं। हालांकि ईंधन बचाने के लिए Zoho: इलेक्ट्रिक बस इलेक्ट्रिक कुकिंग और सोलर एनर्जी जैसे विकल्पों पर काम कर रही है। बढ़ती तेल कीमतों का असर कंपनियों की रणनीति पर ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अब कंपनियों की वर्क पॉलिसी पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। जहां कुछ कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम की सुविधा देकर ट्रैवल कम करना चाहती हैं, वहीं कुछ कंपनियां ऑफिस कल्चर को ज्यादा प्रभावी मान रही हैं। आने वाले समय में तेल की कीमतों और आर्थिक हालात के आधार पर Work From Home और Hybrid Work Model को लेकर और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 20, 2026 0
Iraqi desert region amid reports of alleged secret Israeli military bases and mysterious shepherd killing investigation.
Litton Das और Mushfiqur Rahim ने पाकिस्तान को किया परेशान

सिलहट टेस्ट में बांग्लादेश की पकड़ मजबूत, बढ़त पहुंची 249 रन Litton Das और Mushfiqur Rahim की शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर Bangladesh national cricket team ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में मजबूत स्थिति बना ली है। सिलहट में खेले जा रहे मुकाबले के तीसरे दिन लंच तक बांग्लादेश ने दूसरी पारी में चार विकेट के नुकसान पर 203 रन बना लिए और कुल बढ़त 249 रन तक पहुंचा दी। टीम के अभी छह विकेट बाकी हैं, जिससे पाकिस्तान पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लिटन और मुशफिकुर की साझेदारी बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती लिटन दास 48 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि मुशफिकुर रहीम 39 रन पर टिके रहे। दोनों बल्लेबाज़ों ने पांचवें विकेट के लिए अब तक 88 रन की नाबाद साझेदारी की है। इस साझेदारी ने पाकिस्तान के गेंदबाज़ों को पूरी तरह थका दिया और मैच को बांग्लादेश की तरफ मोड़ दिया। पहली पारी में 126 रन की शानदार शतकीय पारी खेलने वाले लिटन एक बार फिर बेहतरीन लय में दिखे। उन्होंने खराब मौसम और धीमे आउटफील्ड के बावजूद संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। सुबह के सत्र में पाकिस्तान को मिली शुरुआती सफलता बादलों से घिरे मौसम और तेज़ हवा का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ Khurram Shahzad ने दिन की शुरुआत में शानदार गेंदबाज़ी की। उन्होंने बांग्लादेश के कप्तान Najmul Hossain Shanto को LBW आउट कर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। शांतो 46 गेंदों में सिर्फ 15 रन बना सके। खुर्रम लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद को मूव करा रहे थे और बल्लेबाज़ों को परेशान कर रहे थे। धीरे-धीरे संभली बांग्लादेश की पारी सुबह के शुरुआती आठ ओवर तक बांग्लादेश कोई बाउंड्री नहीं लगा सका, लेकिन इसके बाद लिटन दास ने कवर ड्राइव के जरिए शानदार चौका जड़कर दबाव कम किया। उन्होंने पुल शॉट पर भी बेहतरीन चौका लगाया। दूसरी ओर मुशफिकुर रहीम शुरुआत में सतर्क रहे, लेकिन बाद में उन्होंने स्पिनर Sajid Khan के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने लॉन्ग-ऑन के ऊपर शानदार छक्का लगाकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दीं। पाकिस्तान ने गंवाया बड़ा मौका लिटन दास को एक अहम जीवनदान भी मिला। 47वें ओवर में वह रन लेने के दौरान मिड-पिच पर फंस गए थे। मुशफिकुर ने उन्हें देर से वापस भेजा, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के पास रन आउट का आसान मौका था। हालांकि Babar Azam सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं लगा सके और लिटन बच गए। उस समय लिटन 38 रन पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे। यह मौका पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। पहले दिन से ही बांग्लादेश का पलड़ा रहा भारी इससे पहले दूसरे दिन बांग्लादेश ने पाकिस्तान को पहली पारी में 232 रन पर ऑल आउट कर 46 रन की बढ़त हासिल की थी। बांग्लादेश की ओर से Nahid Rana और Taijul Islam ने तीन-तीन विकेट झटके। वहीं Mehidy Hasan Miraz और Taskin Ahmed को दो-दो सफलताएं मिलीं। पाकिस्तान की ओर से बाबर आज़म ने 68 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली और Salman Agha के साथ 63 रन की साझेदारी की। महमुदुल हसन जॉय ने भी दिखाई दमदार बल्लेबाज़ी बांग्लादेश की दूसरी पारी में Mahmudul Hasan Joy ने तेज़ अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने Mominul Haque के साथ दूसरे विकेट के लिए 76 रन की अहम साझेदारी की। इस साझेदारी ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया और बांग्लादेश को बड़ी बढ़त की दिशा में पहुंचा दिया। पाकिस्तान के लिए बढ़ी मुश्किलें तीसरे दिन लंच तक मुकाबला पूरी तरह बांग्लादेश के नियंत्रण में नजर आया। अगर लिटन दास और मुशफिकुर रहीम की साझेदारी लंबे समय तक जारी रहती है, तो पाकिस्तान के लिए इस टेस्ट मैच में वापसी करना बेहद मुश्किल हो सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Iraqi desert region amid reports of alleged secret Israeli military bases and mysterious shepherd killing investigation.
चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाना: इराक में गुप्त कैंप के दावों से मचा हड़कंप

Iraq के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में एक चरवाहे की रहस्यमयी मौत ने कथित तौर पर Israel के गुप्त सैन्य अड्डों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 29 वर्षीय अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी से सामान लेने निकला था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी गोलियों से छलनी और जली हुई गाड़ी रेगिस्तान में मिली। स्थानीय लोगों का दावा है कि एक हेलिकॉप्टर उसका पीछा कर रहा था और लगातार फायरिंग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि अवाद गलती से इजराइल के एक कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था, जहां उसने हेलिकॉप्टर, सैनिक और अस्थायी हवाई पट्टी देखी थी। परिवार का दावा- सेना को फोन करने के बाद हुई हत्या परिजनों के मुताबिक अवाद ने कथित सैन्य गतिविधियों की सूचना तुरंत इराकी सेना के क्षेत्रीय कमांड को दी थी। परिवार का मानना है कि इसी के बाद उसे निशाना बनाया गया। Israel Defense Forces (IDF) ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में दो गुप्त सैन्य अड्डों का दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल पिछले एक साल से अधिक समय से इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो गुप्त सैन्य अड्डे चला रहा था। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल Iran के खिलाफ सैन्य अभियानों के समर्थन के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ठिकाना वही था जिसे अवाद ने कथित तौर पर देख लिया था। अमेरिका पर भी उठे सवाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम एक कथित अड्डे की जानकारी United States को पहले से थी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका ने इराक से यह जानकारी छिपाई कि उसकी जमीन पर एक विदेशी सेना सक्रिय थी। इराकी सांसद Waad al-Qaddo ने इसे इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इराकी सेना को पहले से था शक इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट कमांडर Ali al-Hamdani ने कहा कि स्थानीय बेदुइन समुदाय कई हफ्तों से रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दे रहा था। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और अस्थायी ढांचे देखे थे। उन्होंने कहा कि सेना को शक था कि वहां विदेशी सैन्य गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई करने के बजाय निगरानी का फैसला लिया गया। जांच के लिए पहुंची सेना पर भी हमला अवाद की सूचना के बाद इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी थी। मेजर जनरल हमदानी के अनुसार, सैनिक जैसे ही इलाके के करीब पहुंचे उन पर हमला हुआ। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए। सेना की गाड़ियों पर भी बमबारी की गई, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा। सरकार की चुप्पी पर सवाल रिपोर्ट के मुताबिक इराकी सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इजराइली अड्डों की मौजूदगी स्वीकार नहीं की है। United States Central Command (CENTCOM) ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से इराक के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या उसकी सुरक्षा एजेंसियों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता  यदि इराक में इजराइल की गुप्त मौजूदगी के दावे सही साबित होते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।इससे Iran समर्थित समूहों को इराक में और सक्रिय होने का बहाना मिल सकता है, जबकि Iraq के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखना और कठिन हो जाएगा।  

surbhi मई 18, 2026 0
Iranian Revolutionary Guard personnel at a blast site in Zanjan after a deadly explosion during bomb disposal operations
सीजफायर के बाद भी ईरान में बड़ा हादसा: जंजान में भीषण विस्फोट, IRGC के 14 जवानों की मौत

युद्धविराम के बावजूद ईरान में खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। उत्तर-पश्चिमी जंजान में शुक्रवार को हुए एक भीषण विस्फोट ने यह साफ कर दिया कि युद्ध के अवशेष कितने घातक हो सकते हैं। इस हादसे में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 जवानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बम निष्क्रिय करने के दौरान हुआ हादसा ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह विस्फोट उस समय हुआ जब IRGC की एक विशेष बम निरोधक टीम इलाके में सफाई अभियान चला रही थी। यह टीम हालिया हवाई हमलों के बाद बचे हुए गोला-बारूद को खोजकर निष्क्रिय कर रही थी अचानक एक अज्ञात विस्फोटक सक्रिय हो गया धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई जवान मौके पर ही मारे गए मारे गए जवान “अंसार अल-महदी” यूनिट के अनुभवी सदस्य थे, जिन्हें ऐसे जोखिम भरे अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। बिना फटे बम बने सबसे बड़ा खतरा प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि विस्फोट का कारण क्लस्टर बम या बारूदी सुरंग हो सकता है, जो हवाई हमलों के दौरान गिराए गए थे लेकिन फटे नहीं थे। ऐसे बम जमीन में छिपे रहते हैं और लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं इन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन और खतरनाक होता है जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है युद्ध खत्म होने के बाद भी ये ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) वर्षों तक खतरा बने रहते हैं। सीजफायर के बाद सबसे बड़ी सैन्य क्षति 8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद यह IRGC के लिए अब तक की सबसे बड़ी जनहानि बताई जा रही है। यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि युद्ध के प्रभाव सिर्फ लड़ाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उसके बाद भी जानलेवा खतरे बने रहते हैं। IRGC के मुताबिक: अब तक 15,000 से ज्यादा बिना फटे गोला-बारूद की पहचान की जा चुकी है इनको निष्क्रिय करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है कई इलाके अभी भी ‘हाई रिस्क जोन’ बने हुए हैं आम नागरिक और खेती भी खतरे में अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह खतरा सिर्फ सैन्य बलों तक सीमित नहीं है। कई बम रिहायशी इलाकों और गांवों के पास पड़े हैं कृषि भूमि में भी भारी मात्रा में विस्फोटक मौजूद हैं फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, लगभग 1,200 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र अभी भी जोखिम में है, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है और खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। युद्ध की पृष्ठभूमि और बढ़ता वैश्विक तनाव इस हादसे की पृष्ठभूमि हालिया संघर्ष से जुड़ी है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे। जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए इस संघर्ष में 4000 से अधिक लोगों की जान गई वैश्विक दबाव और बढ़ते नुकसान के बाद 8 अप्रैल को सीजफायर लागू हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला सीजफायर के बाद भी इस क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। अमेरिका-ईरान वार्ता में जारी गतिरोध इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव “पर्याप्त नहीं” है परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों में मतभेद बरकरार हैं बातचीत जारी है, लेकिन ठोस समाधान अभी दूर नजर आ रहा है ईरान ने युद्ध समाप्त करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखती है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Iranian parliament speaker Mohammad Bagher Ghalibaf carrying blood-stained school bags before US-Iran peace talks in Islamabad.
खून से सने बैगों के साथ वार्ता में पहुंचे ईरानी नेता, मीनाब के जख्मों ने फिर बढ़ाया तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से ठीक पहले एक भावनात्मक और तनावपूर्ण दृश्य सामने आया, जिसने पूरे कूटनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया। ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf जब इस्लामाबाद पहुंचे, तो वे केवल वार्ता के एजेंडे के साथ नहीं, बल्कि मीनाब हमले में मारे गए मासूम बच्चों की यादों को भी अपने साथ लेकर आए। मीनाब हमले का दर्द फिर आया सामने फरवरी में ईरान के मीनाब शहर के एक गर्ल्स स्कूल पर हुए भीषण हमले में 165 से अधिक बच्चियों की मौत हो गई थी। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब, जब शांति वार्ता की कोशिशें तेज हुई हैं, ईरान ने इस दर्दनाक घटना को फिर से दुनिया के सामने रखा है। इस्लामाबाद की यात्रा के दौरान गालिबाफ अपने साथ उन बच्चों की तस्वीरें, खून से सने स्कूल बैग और जूते लेकर पहुंचे। विमान में इन सामानों को सीटों पर रखकर वे उन्हें लगातार निहारते रहे। यह दृश्य न केवल व्यक्तिगत शोक का प्रतीक था, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी था कि ईरान इस त्रासदी को भूला नहीं है। वार्ता से पहले भावनात्मक संदेश या रणनीतिक संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल संवेदनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी हो सकता है। ईरान यह दिखाना चाहता है कि शांति वार्ता सिर्फ राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि उन जख्मों को भी संबोधित करने की प्रक्रिया है, जो युद्ध ने छोड़े हैं। ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि अमेरिका की ओर से इस दावे को खारिज करते हुए कहा गया कि निशाना सैन्य ठिकाने थे, न कि स्कूल। क्या आसान होगी शांति की राह? इस बीच, Donald Trump प्रशासन की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि ईरान जल्द से जल्द समझौते की दिशा में आगे बढ़े। लेकिन गालिबाफ की यह पहल साफ संकेत देती है कि तेहरान बिना ठोस आश्वासन और न्याय के किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा। क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर ईरान-अमेरिका के बीच जारी यह टकराव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ रहा है। ऐसे में इस्लामाबाद में हो रही वार्ता बेहद अहम मानी जा रही है। हालांकि, मीनाब हमले की यादें और उससे जुड़ा दर्द यह साफ कर रहा है कि शांति की राह आसान नहीं होगी। यह वार्ता केवल कूटनीति नहीं, बल्कि भावनाओं, विश्वास और न्याय के बीच संतुलन की परीक्षा भी है।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Iran-Israel ceasefire impact on global markets with rising Nifty and falling oil prices.
ईरान-इजराइल सीजफायर: बाजार को राहत मिली या अभी भी खतरा? निवेशक क्या करें?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran और Israel के बीच अचानक हुए दो हफ्ते के सीजफायर ने वैश्विक बाजारों को राहत की सांस दी है। 8 अप्रैल को आखिरी समय में हुए इस समझौते ने तेल से लेकर शेयर बाजार तक तेज हलचल पैदा कर दी। अमेरिकी मध्यस्थता में हुए इस समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, वहीं भारतीय बाजार में Nifty 50 ने जोरदार उछाल दिखाया और रुपया भी मजबूत हुआ। कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो वैश्विक अनिश्चितता थम गई हो। लेकिन क्या यह राहत स्थायी है? विशेषज्ञों का साफ कहना है - यह सिर्फ एक “pause” है, समाधान नहीं। स्थिति क्या कहती है? सीजफायर के बावजूद जमीन पर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ईरान के शीर्ष नेताओं ने पहले ही समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है, वहीं Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या भी सामान्य से काफी कम बनी हुई है। अब बाजार की नजर दो अहम तारीखों पर टिकी है -  11 अप्रैल: अमेरिका-ईरान वार्ता की फिर से शुरुआत 22 अप्रैल: सीजफायर की समाप्ति इन तारीखों के बीच हर खबर बाजार की दिशा तय कर सकती है। निवेशकों के लिए रणनीति 1. शॉर्ट वोलैटिलिटी (सिर्फ स्थिर माहौल में) सीजफायर के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव (IV) कम हुआ है। अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो बाजार सीमित दायरे में रह सकता है। Iron Condor या Iron Fly जैसी रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं लेकिन नियम स्पष्ट है: कोई भी नकारात्मक खबर आते ही तुरंत बाहर निकलें 2. सीमित जोखिम के साथ तेजी का फायदा उठाएं अगर Nifty 50 मजबूत सपोर्ट के ऊपर बना रहता है, तो कुछ सेक्टर्स में तेजी देखी जा सकती है - खासतौर पर वे जो इस तनाव से प्रभावित हुए थे। Bull Call Spread या हेज के साथ पुट बेचने की रणनीति अपनाएं उद्देश्य: सीमित जोखिम के साथ लाभ कमाना 3. हर हाल में हेजिंग जरूरी यह बाजार “event-driven” है - यानि एक खबर पूरी दिशा बदल सकती है। हर 2 bullish पोजिशन के साथ 1 bearish हेज रखें बिना हेज के ट्रेड करना जोखिम भरा हो सकता है

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Missile strikes and military tension visuals representing US-Iran conflict escalation in Middle East.
US-Iran War: ट्रंप का अल्टीमेटम खत्म होने के करीब, मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिया गया अल्टीमेटम खत्म होने में अब कुछ ही घंटे बाकी हैं, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका तेज हो गई है। 12 घंटे बाद खत्म होगा अल्टीमेटम डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (स्थानीय समय) तक का समय दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने समझौता नहीं किया और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका “एक ही रात में ईरान को तबाह” करने की क्षमता रखता है और वह पुल, पावर प्लांट और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री का भी सख्त बयान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं। उनका बयान संकेत देता है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान ने ठुकराया 45 दिन का युद्धविराम वहीं ईरान ने अमेरिका के 45 दिन के सीजफायर प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि इस संघर्ष का स्थायी समाधान चाहता है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, जब तक भविष्य में हमले न होने की पक्की गारंटी नहीं मिलती, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। इजराइल का बड़ा हमला, ईरान को झटका इस बीच इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर बड़ा हमला किया है। यह क्षेत्र ईरान के लगभग 50% पेट्रो-केमिकल उत्पादन से जुड़ा है। इस हमले को ईरान की ऊर्जा क्षमता पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। हमलों में कई लोगों की मौत अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में 25 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में भारी तबाही देखी गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खादेमी भी हमलों में मारे गए हैं। ईरान का पलटवार हमलों के जवाब में ईरान ने भी जोरदार कार्रवाई की है। खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं इजराइल के हाइफा शहर पर हमला रिहायशी इलाकों को भी नुकसान, कई लोगों की मौत बढ़ते खतरे को देखते हुए कुवैत, UAE और सऊदी अरब ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए हैं। 39 दिन से जारी है जंग इस संघर्ष को 39 दिन (करीब 936 घंटे) हो चुके हैं। इस दौरान पूरे क्षेत्र में लगातार हमले, मिसाइलें और तबाही देखने को मिल रही है। मिडिल ईस्ट अब दुनिया का सबसे बड़ा युद्ध क्षेत्र बनता जा रहा है।

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Destroyed apartment building in Haifa after Iranian missile strike with rescue teams searching debris
हाइफा पर ईरान का मिसाइल हमला, अपार्टमेंट ढहा; 2 की मौत, 2 लापता

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा हमला सामने आया है। ईरान ने इजरायल के उत्तरी शहर हाइफा पर मिसाइल दागी, जिसमें एक रिहायशी अपार्टमेंट ब्लॉक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को ईरान की ओर से इजरायल पर कुल चार मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक भारी मिसाइल सीधे हाइफा स्थित एक अपार्टमेंट पर गिरी, जिससे इमारत का आधा हिस्सा ढह गया। बचा हुआ हिस्सा भी असंतुलित हो गया, जिससे उसके कभी भी गिरने का खतरा बना रहा और राहत-बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। पूरी रात चला रेस्क्यू ऑपरेशन हमले के बाद राहत और बचाव दलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरी रात मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी रखा। सोमवार सुबह तक चले अभियान में दो लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि दो अन्य लोगों की तलाश अब भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का काम सावधानी से किया जा रहा है, ताकि और नुकसान न हो। लगातार बजते रहे सायरन, बढ़ा खतरा ईरान के नए हमलों के बाद पूरे मध्य इजरायल में हवाई हमले के सायरन लगातार गूंजते रहे, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। इजरायली सेना ने ईरान की ओर से दागी गई अन्य मिसाइलों का भी पता लगाया, जिसके बाद कई इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया। सोमवार सुबह भी ईरान की ओर से तीन और मिसाइलें दागे जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद मध्य इजरायल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। हालांकि, इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, जबकि कुछ मिसाइलें खाली क्षेत्रों में जाकर गिरीं। रणनीतिक रूप से अहम है हाइफा हाइफा इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसका सामरिक महत्व काफी ज्यादा है। यह शहर भूमध्य सागर के तट पर और माउंट कार्मेल की ढलानों पर स्थित है। यही वजह है कि यह अक्सर दुश्मन देशों के निशाने पर रहता है। इसके अलावा, हाइफा लेबनान सीमा के काफी करीब है, जहां से हिज़्बुल्लाह के रॉकेट भी इस क्षेत्र को निशाना बना सकते हैं। इस कारण यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील बना हुआ है। हमले के बीच फिर जारी हुआ अलर्ट हाइफा में अपार्टमेंट पर मिसाइल गिरने के बाद जब राहत-बचाव कार्य चल रहा था, तभी एक और संभावित मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गई। इससे बचाव कार्य में लगे दलों और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई। हालांकि, कुछ समय बाद इस अलर्ट को वापस ले लिया गया। लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव के बीच इजरायल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। वहीं, हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Massive explosion over Isfahan after alleged bunker-buster bomb strike shared by Donald Trump
ईरान के इस्फहान पर बड़ा हमला? ‘बंकर-बस्टर बम’ के इस्तेमाल के दावे, ट्रंप ने शेयर किया वीडियो

पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, United States और Israel ने Iran के प्रमुख शहर Isfahan में एक बड़े हथियार गोदाम को निशाना बनाते हुए कथित तौर पर संयुक्त हमला किया है। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें भीषण विस्फोट और आसमान में नारंगी रोशनी दिखाई देती है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ‘बंकर-बस्टर बम’ के इस्तेमाल का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 2000 पाउंड के ‘बंकर-बस्टर बम’ का इस्तेमाल किया गया। ये ऐसे विशेष बम होते हैं, जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों, जैसे बंकर, सुरंग या हथियार भंडार, को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इन बमों की खासियत यह होती है कि ये पहले जमीन या कंक्रीट को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं, जिससे अंदर मौजूद संरचनाओं को भारी नुकसान होता है। इस्फहान क्यों है अहम? इस्फहान ईरान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और सैन्य केंद्र है, जहां कई रणनीतिक ठिकाने मौजूद हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यहां भूमिगत ठिकानों में संवर्धित यूरेनियम का भंडार हो सकता है, जो इसे और अधिक संवेदनशील बनाता है। हालांकि, इस हमले के बाद हुए नुकसान को लेकर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बढ़ता तनाव और वैश्विक असर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। हाल के दिनों में बार-बार चेतावनियां और सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Israel Plans Lebanon Buffer Zone Amid Tensions
लेबनान के 10% हिस्से पर कब्जे की तैयारी? इजरायली रक्षा मंत्री काट्ज का बड़ा बयान, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच इजरायल ने लेबनान को लेकर बड़ा दावा किया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के करीब 10% हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करेगी। लिटानी नदी तक बनेगा ‘बफर ज़ोन’ काट्ज के मुताबिक, इजरायली सेना लिटानी नदी तक इलाके को नियंत्रित करेगी और वहां एक मजबूत रक्षात्मक बफर ज़ोन तैयार किया जाएगा। यह नदी इजरायल की सीमा से लगभग 30 किलोमीटर अंदर है और यह क्षेत्र लेबनान के कुल भूभाग का करीब एक-दसवां हिस्सा माना जाता है। उन्होंने कहा, “सेना लिटानी नदी तक बचे हुए पुलों और सुरक्षा क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेगी।” काट्ज ने यह भी दावा किया कि जिन इलाकों में “आतंकवाद” मौजूद है, वहां नागरिकों को रहने की अनुमति नहीं होगी। ‘सुरक्षा सुनिश्चित होने तक वापसी नहीं’ इजरायल ने साफ किया है कि जब तक उसकी उत्तरी सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक सेना पीछे नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री के अनुसार, दक्षिणी लेबनान से लाखों लोग पहले ही उत्तर की ओर पलायन कर चुके हैं और उनकी वापसी सुरक्षा हालात सुधरने पर ही संभव होगी। क्यों लिया गया फैसला? इजरायल का कहना है कि यह कदम हिजबुल्लाह के खतरे को खत्म करने और अपनी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इजरायली सेना पहले ही लिटानी नदी के आसपास कई पुलों को निशाना बना चुकी है, ताकि हिजबुल्लाह के लड़ाके और हथियार दक्षिणी इलाकों में न पहुंच सकें। काट्ज ने इसे “फॉरवर्ड डिफेंस लाइन” बताया। हिजबुल्लाह की चेतावनी हिजबुल्लाह ने इजरायल के इस प्लान को लेबनान के लिए “अस्तित्व का खतरा” बताया है और कहा है कि किसी भी कब्जे की कोशिश का जोरदार विरोध किया जाएगा। जंग में नया मोड़ यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिजबुल्लाह लगातार इजरायल के शहरों-हाइफा और नाहारिया-पर रॉकेट हमले कर रहा है। वहीं ईरान की ओर से भी ड्रोन हमले जारी हैं। इसके अलावा, बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं। कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं। इजरायल का यह बयान मिडिल ईस्ट संघर्ष को और गंभीर मोड़ दे सकता है। अगर दक्षिणी लेबनान में बफर ज़ोन बनाने की योजना आगे बढ़ती है, तो इससे क्षेत्र में जंग और लंबी तथा व्यापक हो सकती है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Iran President Pezeshkian addressing global tensions mentioning Pakistan and Middle East countries amid conflict
ईरान-इसराइल तनाव के बीच राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का बड़ा बयान, पाकिस्तान समेत कई देशों का किया ज़िक्र

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-इसराइल के साथ टकराव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने वैश्विक प्रतिक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अन्य अरब देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों के लोग अमेरिका और इसराइल की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा, “आज हम दुनिया के कई देशों के लोगों को जागते हुए देख रहे हैं। पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अरब देशों के लोग अमेरिका, इसराइल और उनके अपराधों के प्रति अपनी नाराज़गी को मुखरता से व्यक्त कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के स्वतंत्र लोग “ज़ायनिस्टों” के साथ नहीं हैं और क्षेत्र में स्थिरता केवल आपसी सहयोग और देशों की संप्रभुता के सम्मान से ही संभव है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने इस तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है। 15 सूत्रीय योजना की चर्चा इस बीच अमेरिकी और इसराइली मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने समझौते के लिए पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है। हालांकि, इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक नजर मध्य-पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। लगातार हो रहे हमलों और बयानों के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी तेज़ हो गई हैं, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Missile launches and drones over Middle East conflict map highlighting Iran Israel escalating military tensions
ईरान का साफ संदेश: “पछतावा नहीं, तो जंग जारी” - इजरायल पर मिसाइल-ड्रोन हमले तेज

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने “हमलों पर पछतावा” नहीं जताते, तब तक जंग जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आखिरी दम तक करेगा। उन्होंने तेहरान के सिविल और डिफेंस ठिकानों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की असली वजह बताया। IRGC का पलटवार: इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। खैबर शिकन, इमाद और सज्जील जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कामिकाज़े ड्रोन से हमले तेल अवीव, रामत गन और नेगेव के सैन्य केंद्र टारगेट बीरशेबा में लॉजिस्टिक और कमांड हेडक्वार्टर पर सीधा प्रहार ईरान का दावा है कि इन हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया। ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में बदलाव, जल्द होगी डील” इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक: ईरान में “नई लीडरशिप” आ चुकी है पुरानी व्यवस्था और खामेनेई अब सीन से बाहर अमेरिका की बातचीत “सही लोगों” से जारी ईरान ने तेल-गैस से जुड़ा बड़ा “तोहफा” दिया ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर ईरान का हमला अराघची ने पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि: यूक्रेन और गाजा के मामलों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है हालांकि, उन्होंने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमीयर की सराहना की, जिन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस की चेतावनी: न्यूक्लियर खतरा बढ़ा रूस ने भी इस तनाव पर चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों को बेहद खतरनाक बताया। रूस के मुताबिक: न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान हुआ तो बड़ा पर्यावरणीय संकट हो सकता है यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा

surbhi मार्च 25, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addressing Lok Sabha on Middle East crisis and evacuation of Indian citizens
लोकसभा में प्रधानमंत्री का बयान: मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की रणनीति, 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटे

नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पर देश का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था से लेकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा तक महसूस किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें ईरान, अमेरिका और इजरायल शामिल हैं। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत में भी गैस आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है। भारत के सामने बहुआयामी चुनौतियां प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि यह संकट भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और मानवीय-तीनों स्तरों पर गंभीर चुनौतियां लेकर आया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के व्यापारिक और ऊर्जा संबंध गहरे हैं, और कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देते हुए अब तक लगभग 3.75 लाख भारतीयों को खाड़ी देशों से सुरक्षित वापस लाने में सफलता हासिल की है। इसे सरकार की बड़ी मानवीय और कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा संकट से निपटने की रणनीति प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत पहले से ही 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है और मौजूदा संकट के बाद वैकल्पिक स्रोतों की खोज को और तेज किया गया है। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने LPG और अन्य ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका, रूस और नाइजीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ाया है। बावजूद इसके, कुछ क्षेत्रों में गैस की कमी की आशंका बनी हुई है, हालांकि सरकार का दावा है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। वैश्विक शांति की अपील प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के देश इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है। भारत भी कूटनीतिक स्तर पर शांति और स्थिरता के पक्ष में लगातार प्रयास कर रहा है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
PM Modi meeting with officials discussing Middle East crisis impact on oil supply and economy strategy
मिडिल ईस्ट संकट पर मोदी सरकार का एक्शन प्लान: तेल-गैस सप्लाई से लेकर महंगाई नियंत्रण तक 3-स्तरीय रणनीति तैयार

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और Iran-Israel conflict के बीच भारत सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में एक व्यापक रणनीति तैयार की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य है-देश में तेल, गैस, खाद और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी हालत में बाधित न हो। सरकार का साफ संदेश: सप्लाई नहीं रुकेगी बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि: पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई जारी रहेगी देश में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है, इसलिए बिजली संकट की आशंका नहीं महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी भारत अपनी जरूरत का लगभग: 85% कच्चा तेल 50% प्राकृतिक गैस 60% LPG आयात करता है, ऐसे में मिडिल ईस्ट संकट से आपूर्ति प्रभावित होना बड़ी चुनौती है। 11 अहम सेक्टरों पर फोकस सरकार ने 11 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी है: कृषि उर्वरक खाद्य सुरक्षा पेट्रोलियम बिजली MSME निर्यात शिपिंग व्यापार वित्त सप्लाई चेन इन सभी सेक्टरों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए ठोस कदम उठाने की योजना बनाई गई है। तीन-स्तरीय रणनीति: Short, Medium और Long Term प्लान 1. अल्पकालिक रणनीति (Short-term) जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखना मौजूदा स्टॉक की लगातार समीक्षा 2. मध्यम अवधि रणनीति (Medium-term) तेल, गैस और खाद के लिए वैकल्पिक देशों से आयात बफर स्टॉक को मजबूत करना सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना 3. दीर्घकालिक रणनीति (Long-term) आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर MSME और कृषि उत्पादन को मजबूत करना रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देकर ऊर्जा निर्भरता कम करना किसानों और खाद सुरक्षा पर विशेष ध्यान सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए खाद की उपलब्धता को प्राथमिकता दी है। वैकल्पिक आयात स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में किसानों को परेशानी न हो। इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट के लिए भी प्लान केमिकल, फार्मा और पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए नए आयात स्रोत भारतीय उत्पादों के लिए नए एक्सपोर्ट मार्केट विकसित करने की योजना सरकार का यह एक्शन प्लान साफ संकेत देता है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए तैयार है। तेल-गैस सप्लाई, खाद सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण जैसे अहम मुद्दों पर फोकस से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Israeli Prime Minister Netanyahu addressing media on Iran strikes amid escalating Middle East conflict
ईरान पर भारी हमले का दावा: युद्ध जल्द खत्म हो सकता है – बेंजामिन नेतन्याहू

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह युद्ध उम्मीद से कहीं जल्दी समाप्त हो सकता है। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) करने की स्थिति में है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने अपने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। “ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई” नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान के तहत ईरान के उन कारखानों को निशाना बनाया गया है, जहां मिसाइल और परमाणु हथियारों के पुर्जे तैयार किए जाते थे। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन क्षमता “तेजी से नष्ट” की जा रही है   सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है   अभियान “तेजी से लक्ष्य हासिल कर रहा है”   उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अमेरिका की भूमिका पर क्या कहा? नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध में खींचा है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं और अमेरिका-इजरायल के बीच गहरा तालमेल है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। गैस ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला नेतन्याहू ने यह भी बताया कि अमेरिका के अनुरोध पर इजरायल ने ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्रों पर आगे हमले फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पहले किए गए हमले इजरायल ने “स्वतंत्र रूप से” किए थे। युद्ध का विस्तार संभव, जमीनी कार्रवाई के संकेत अब तक यह संघर्ष मुख्य रूप से हवाई हमलों तक सीमित रहा है, लेकिन नेतन्याहू ने संकेत दिए कि जमीनी कार्रवाई (Ground Operation) भी संभव है। उन्होंने कहा कि इसके कई विकल्प मौजूद हैं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। ईरान के अंदर अस्थिरता का दावा नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व में अंदरूनी तनाव और अस्थिरता के संकेत भी दिए। उनका कहना है कि वहां सत्ता के भीतर खींचतान बढ़ रही है और स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह स्थिति किसी बड़े जनविद्रोह में बदलेगी या नहीं। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा सैन्य बढ़त के चलते यह युद्ध उम्मीद से जल्दी समाप्त हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत, क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक दबाव इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
South Pars gas field flames after attack amid rising Iran-Israel conflict tensions
ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से बढ़ा तनाव: डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख, इजरायल पर डाला जिम्मा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Iran के सबसे बड़े गैस भंडार South Pars Gas Field पर हुए हमले ने वैश्विक तनाव को और बढ़ा दिया है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुद को इस हमले से अलग बताया और इसके लिए सीधे Israel को जिम्मेदार ठहराया। “हमारा कोई हाथ नहीं”-ट्रंप की सफाई डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया कि अमेरिका को इस हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह हमला इजरायल की ओर से किया गया कदम था और इसमें Qatar की भी कोई भूमिका नहीं थी। ट्रंप के मुताबिक, इस हमले में साउथ पार्स गैस फील्ड का एक सीमित हिस्सा प्रभावित हुआ है, लेकिन इसके प्रभाव व्यापक हो सकते हैं क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस स्रोतों में से एक है। ईरान की चेतावनी-ऊर्जा ठिकानों पर हमला बर्दाश्त नहीं ईरान ने इस हमले को गंभीर उकसावे की कार्रवाई बताते हुए साफ कहा है कि अगर उसके ऊर्जा क्षेत्र को दोबारा निशाना बनाया गया, तो वह “कड़ा जवाब” देगा। ईरान का यह भी आरोप है कि हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कतर पर हमले को लेकर ट्रंप की कड़ी चेतावनी स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब ईरानी मिसाइलों ने जवाबी कार्रवाई में कतर के LNG प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इस पर ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर Qatar की गैस सुविधाओं पर दोबारा हमला हुआ, तो अमेरिका “किसी भी हद तक जाकर जवाब देगा” और पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को नष्ट करने से भी पीछे नहीं हटेगा। “हिंसा नहीं चाहता, लेकिन जवाब देंगे” ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इस स्तर की हिंसा और विनाश को अधिकृत नहीं करना चाहते, क्योंकि इसका दीर्घकालिक असर ईरान के भविष्य पर पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह साफ कर दिया कि अगर हालात और बिगड़े, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करने में हिचकेगा नहीं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल इस हमले और बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। गैस और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर साउथ पार्स जैसे बड़े गैस फील्ड पर खतरा बना रहा, तो यह पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Iranian security chief Ali Larijani killed in Israeli strike amid escalating Iran Israel conflict
ईरान-इजरायल संघर्ष: सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की मौत से ईरान को बड़ा रणनीतिक झटका, क्यों यह नुकसान सुप्रीम लीडर से भी ज्यादा भारी माना जा रहा है

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान को अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक झटका लगा है। इजरायली हमले में ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के प्रमुख अली लारिजानी की मौत की पुष्टि खुद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने की है। इस हमले में उनके बेटे और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह नुकसान केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि ईरान की सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति के केंद्र को झटका है। क्यों थे अली लारिजानी इतने अहम? अली लारिजानी ईरान की सत्ता संरचना के उन दुर्लभ चेहरों में थे, जिनका प्रभाव राजनीति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति-तीनों स्तरों पर फैला हुआ था। उन्होंने वर्षों तक ईरान के सरकारी मीडिया तंत्र को नियंत्रित किया   बाद में वे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के करीबी सुरक्षा सलाहकार बने   2005 में उन्हें देश का शीर्ष परमाणु वार्ताकार नियुक्त किया गया   वे रूस, चीन जैसे देशों में भी मजबूत कूटनीतिक नेटवर्क रखते थे   लारिजानी की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वे अलग-अलग सत्ता केंद्रों के बीच संतुलन बनाकर फैसले लागू कराने की क्षमता रखते थे। क्यों उनकी मौत को “सुप्रीम लीडर से भी बड़ा झटका” कहा जा रहा है? सवाल यही है कि एक सिक्योरिटी चीफ की मौत को इतना बड़ा नुकसान क्यों माना जा रहा है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं: 1. रणनीतिक दिमाग का नुकसान लारिजानी केवल पद पर बैठे अधिकारी नहीं थे, बल्कि ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति के प्रमुख रणनीतिकार थे। उनकी अनुपस्थिति में तत्काल निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। 2. अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का टूटना उनके रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ स्थापित रिश्ते किसी और के पास उसी स्तर पर नहीं हैं। इससे युद्ध के बाद संभावित बातचीत और सीजफायर प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। 3. सत्ता के भीतर संतुलन बिगड़ना ईरान की राजनीति कई धड़ों में बंटी हुई है। लारिजानी उन कुछ नेताओं में थे जो इन धड़ों के बीच संतुलन बनाए रखते थे। उनके जाने से आंतरिक अस्थिरता बढ़ सकती है। 4. युद्ध के बीच नेतृत्व में खालीपन 18 दिनों से जारी इस संघर्ष के बीच ऐसे समय पर शीर्ष सुरक्षा नेतृत्व का खत्म होना युद्ध संचालन पर सीधा असर डाल सकता है।   क्या यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि रणनीतिक निशाना था? विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान की भविष्य की रणनीति को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लग रहे हैं कि वे संभावित सीजफायर और अमेरिका-ईरान वार्ता के रास्ते को रोकना चाहते हैं-और लारिजानी उस प्रक्रिया के अहम सूत्रधार हो सकते थे। पिछले बड़े झटकों से तुलना विशेषज्ञ इस घटना की तुलना 2020 में बगदाद में हुए उस हमले से कर रहे हैं, जिसमें ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हुई थी। माना जा रहा है कि उसके बाद यह ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका है। लारिजानी की मौत से न केवल युद्ध की दिशा प्रभावित हो सकती है, बल्कि मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन भी बदल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ईरान इस नुकसान की भरपाई कैसे करता है और क्या यह घटना संघर्ष को और भड़का देगी या कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को और कमजोर कर देगी।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Iran Israel conflict escalation with reported airstrike targeting Ali Larijani amid rising Middle East tensions
ईरान-इजरायल टकराव तेज: अली लारिजानी पर एयरस्ट्राइक का दावा, क्षेत्र में बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेता अली लारिजानी को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि इस हमले में लारिजानी की स्थिति- मृत्यु या घायल होने- को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और ईरान की ओर से भी चुप्पी बनी हुई है।   IDF का बड़ा ऑपरेशन, शीर्ष नेतृत्व निशाने पर रिपोर्ट्स के अनुसार, Israel Defense Forces ने इस एयरस्ट्राइक में न सिर्फ लारिजानी, बल्कि बासिज बल के एक वरिष्ठ कमांडर को भी निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है।   हमले से पहले लारिजानी का तीखा बयान एयरस्ट्राइक से ठीक एक दिन पहले अली लारिजानी ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने वैश्विक मुस्लिम समुदाय और इस्लामी देशों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि: ईरान को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला   अधिकांश मुस्लिम देशों ने केवल बयानबाजी की, ठोस समर्थन नहीं दिया   अमेरिका-इजरायल पर गंभीर आरोप अपने पत्र में लारिजानी ने: अमेरिका को “बड़ा शैतान” और   इजरायल को “छोटा शैतान” बताया   उन्होंने आरोप लगाया कि: ईरान पर हमलों में नागरिकों और सैन्य अधिकारियों की मौत हुई   इसके बावजूद ईरान ने “दृढ़ इच्छाशक्ति” के साथ जवाब दिया   इस्लामी देशों पर उठाए सवाल लारिजानी ने मुस्लिम देशों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा: क्या वे निष्पक्ष रहेंगे या किसी पक्ष का समर्थन करेंगे?   जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, वहां से ईरान पर हमले हो रहे हैं उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ईरान चुप बैठा रहे, जबकि उसके खिलाफ हमले जारी हैं।   एकता की अपील और क्षेत्रीय संदेश अपने पत्र के अंत में लारिजानी ने इस्लामी देशों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि: अमेरिका भरोसेमंद नहीं है   इजरायल क्षेत्र का दुश्मन है   यदि मुस्लिम देश एकजुट हों, तो सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है क्या बढ़ेगा टकराव? इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीर्ष नेताओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ती हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Rising violence in West Bank as Palestinians face attacks amid Iran-Israel conflict in the region.
ईरान से युद्ध के बीच वेस्ट बैंक में तेज हुए हमले, फिलिस्तीनियों की मौतों से उठा सवाल

  मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Israel और Iran के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब West Bank में भी साफ दिखाई देने लगा है। इजरायली कब्जे वाले इस क्षेत्र में फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसक घटनाओं में तेजी आई है, जिससे स्थानीय आबादी में दहशत का माहौल है। रामल्लाह स्थित Palestinian Ministry of Health के अनुसार, इस महीने की शुरुआत से अब तक वेस्ट बैंक में छह फिलिस्तीनियों को गोली मारकर हत्या कर दी गई है। लगातार बढ़ती इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है।   युद्ध के बीच बढ़ी हमलों की घटनाएं विश्लेषकों का मानना है कि ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद वेस्ट बैंक में बसने वाले इजरायली समूहों के हमलों में वृद्धि हुई है। मानवाधिकार संगठन B'Tselem का कहना है कि मौजूदा हालात में हिंसा की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि युद्ध की स्थिति का फायदा उठाकर फिलिस्तीनियों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी OCHA के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने से लेकर हालिया संघर्ष तक 28 महीनों में बसने वालों की हिंसा में कम से कम 24 फिलिस्तीनियों की मौत हुई है।   वेस्ट बैंक में बढ़ता तनाव वेस्ट बैंक में लगभग 30 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं, जबकि करीब पांच लाख इजरायली भी विभिन्न बस्तियों और चौकियों में बसे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इन बस्तियों को अवैध माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहां लगातार विस्तार और झड़पों की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्थानीय निवासी Ibrahim Hamayel ने बताया कि हाल ही में बसने वालों के एक समूह ने गांव के पास हमला किया, जहां कुछ लोग नकाब पहने हुए थे और उनके पास हथियार भी थे। झड़प के बाद इलाके में एक व्यक्ति की मौत हो गई और वहां अस्थायी स्मारक बनाए गए, जिन पर फिलिस्तीनी झंडे लगाए गए हैं।   सेना ने तीन मौतों की पुष्टि की इजरायली सेना ने बसने वालों की हिंसा की निंदा करते हुए तीन फिलिस्तीनियों की मौत की पुष्टि की है। इनमें से एक व्यक्ति की मौत दम घुटने से हुई बताई गई, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह आंसू गैस के कारण हुआ या किसी अन्य वजह से।   बढ़ रहा विस्थापन संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक करीब 180 फिलिस्तीनियों को वेस्ट बैंक से बेदखल किया जा चुका है। वहीं 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 1,500 लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। यूरोपीय संघ ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा और संपत्तियों के नुकसान की घटनाएं अस्वीकार्य हैं। लगातार बढ़ रहे हमलों के कारण कई फिलिस्तीनी समुदायों की रोजी-रोटी और सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Families in Gaya village worried as relatives working in Middle East remain amid rising Iran–Israel tensions
मध्य-पूर्व तनाव की गूंज गया तक: बहेरा गांव के कई लोग विदेश में फंसे, ईद से पहले परिवारों की बढ़ी चिंता

  मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब बिहार तक महसूस किया जा रहा है। Gaya जिले के बहेरा गांव में इन दिनों डर और बेचैनी का माहौल है। गांव के एक दर्जन से अधिक लोग काम के सिलसिले में विदेश गए हुए हैं और क्षेत्र में जारी Iran–Israel युद्ध के कारण उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।   मुस्लिम टोला में चिंता और दुआओं का माहौल डोभी प्रखंड के बहेरा गांव के मुस्लिम टोला में इन दिनों रमजान और आने वाली ईद के बीच खुशी की जगह चिंता का माहौल है। गांव के कई लोग रोज़गार की तलाश में खाड़ी देशों और अन्य देशों में काम करते हैं, लेकिन युद्ध जैसे हालात की खबरों से परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। हर घर में बस एक ही दुआ की जा रही है कि विदेश में गए लोग सुरक्षित रहें और जल्द घर लौट आएं।   अलग-अलग देशों में फंसे गांव के लोग गांव के करीब 12 से अधिक लोग Saudi Arabia, Dubai, Qatar और Russia में काम कर रहे हैं। सऊदी अरब में: ताहिर हुसैन, सजमा खातुन, शाहिद अंसारी और अशरफ दुबई में: कमर इकबाल, एकलाख, नौशाद और दानिश कतर में: शालुक और शाहरुख रूस में: एनाम, शेरु, अदनान और जिशान परिजनों का कहना है कि जब भी फोन नहीं लगता या नेटवर्क की समस्या होती है, तो परिवार के लोगों की चिंता और बढ़ जाती है।   एक कॉल न आए तो बढ़ जाती है बेचैनी गांव के लोगों के अनुसार, अगर एक दिन भी विदेश में काम कर रहे परिजनों से फोन पर बात नहीं हो पाती है तो घरों में डर का माहौल बन जाता है। कई बार नेटवर्क समस्या या फोन बंद होने से परिवार के लोग घबरा जाते हैं और तरह-तरह की आशंकाएं होने लगती हैं।   ईद की खुशियां फीकी रमजान के अंतिम दिनों में जहां आमतौर पर गांव में ईद की तैयारियां होती हैं, वहीं इस बार बहेरा गांव में माहौल अलग है। परिवारों का कहना है कि जब तक उनके अपने सुरक्षित नहीं लौटते, तब तक ईद की खुशी अधूरी ही रहेगी। गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और विदेश में फंसे उनके परिजन सुरक्षित अपने घर लौट सकें।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Military drones flying near air defense systems highlighting modern warfare shift toward low-cost drone threats
सस्ते ड्रोन बनाम महंगे मिसाइल सिस्टम: पश्चिम एशिया के युद्ध से सबक लेते हुए भारत ने बदली रणनीति

  पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को लेकर दुनिया भर की सेनाओं को नया सबक दिया है। Iran, Israel और United States के बीच बढ़े तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब युद्ध केवल अत्याधुनिक और महंगे हथियारों के दम पर नहीं जीते जा सकते। सस्ते लेकिन प्रभावी ड्रोन और मिसाइलों ने पारंपरिक सैन्य रणनीतियों को चुनौती दी है। इन घटनाओं से सीख लेते हुए भारत भी अपनी वायु रक्षा रणनीति को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गया है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने रूस से कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि सस्ते ड्रोन और कम ऊंचाई वाले खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।   युद्ध ने बदला आधुनिक रक्षा रणनीति का गणित विशेषज्ञों के मुताबिक हाल के संघर्षों में Iran ने अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल कर शक्तिशाली सैन्य प्रणालियों को चुनौती दी। दूसरी ओर United States और Israel को इन ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अत्यंत महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल और उन्नत रक्षा प्रणालियों का उपयोग करना पड़ा। इस स्थिति ने युद्ध की अर्थव्यवस्था को भी एक अहम कारक बना दिया है-जहां कम लागत के हथियार महंगे डिफेंस सिस्टम पर भारी पड़ते दिखाई दिए।   महंगे सिस्टम से सस्ते ड्रोन गिराना क्यों पड़ता है भारी उदाहरण के तौर पर रूस का अत्याधुनिक वायु रक्षा सिस्टम S-400 air defense system लंबी दूरी के खतरों को खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह 400 किलोमीटर तक की दूरी से आने वाले फाइटर जेट, बैलिस्टिक मिसाइल और अवाक्स जैसे बड़े सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। लेकिन इसकी एक मिसाइल दागने की लागत कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में यदि इसी सिस्टम का इस्तेमाल छोटे और सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए किया जाए तो यह सैन्य दृष्टि से आर्थिक रूप से बेहद महंगा पड़ सकता है।   रूस से कम दूरी के सिस्टम की खरीद की तैयारी इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने रूस के Pantsir-S1 air defense system को खरीदने का निर्णय लिया है। यह एक शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत ऐसे 13 सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। इनकी खरीद पर करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इन्हें आपातकालीन खरीद नीति के तहत हासिल किया जाएगा, जिससे डिलीवरी प्रक्रिया तेज हो सके।   S-400 और Pantsir-S1 में मुख्य अंतर लागत: S-400 से मिसाइल दागने की लागत कई करोड़ रुपये तक हो सकती है।   Pantsir-S1 से इंटरसेप्शन की लागत लगभग 90 लाख से 1.3 करोड़ रुपये के बीच मानी जाती है।   रेंज: S-400 की मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर तक है।   Pantsir-S1 की प्रभावी रेंज लगभग 20 किलोमीटर है।   टार्गेट: S-400: बैलिस्टिक मिसाइल, फाइटर जेट और बड़े हवाई खतरे।   Pantsir-S1: ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई वाले हवाई लक्ष्य।   विशेषज्ञों का मानना है कि Pantsir-S1 जैसे सिस्टम का मुख्य उद्देश्य S-400 जैसे लंबी दूरी के रक्षा सिस्टम को सुरक्षा कवच देना और छोटे खतरों को पहले ही निष्क्रिय कर देना होता है।   युद्धों से मिल रही रणनीतिक सीख Russia-Ukraine War में भी सस्ते ड्रोन ने बड़े सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाकर युद्ध की रणनीति बदल दी थी। इसी तरह पश्चिम एशिया के हालिया संघर्ष ने भी दिखाया है कि भविष्य के युद्धों में लो-कॉस्ट ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग निर्णायक भूमिका निभा सकता है। भारत अब बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जिसमें लंबी दूरी के सिस्टम के साथ-साथ कम दूरी के एंटी-ड्रोन सिस्टम भी शामिल होंगे।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0