रांची। भोजपुरी-मगही विवाद झारखंड में गरमाता जा रहा है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नई भाषा नियमावली को लेकर जारी विवाद पर बनी पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में मंथन तो खूब हुआ, पर कोई नतीजा नहीं निकला। बैठक में अधिकारियों से कई अहम सवाल पूछे गए, लेकिन आवश्यक डेटा और स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण कमेटी कोई निर्णय नहीं ले सकी। अब अगली बैठक 22 मई को होगी। भोजपुरी-मगही बोलने वालों की संख्या अधिक वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में भोजपुरी और मगही बोलने वालों की संख्या ओड़िया और बांग्ला भाषियों से करीब चार गुना अधिक है। इस पर कमेटी के सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब इन भाषाओं का दायरा इतना बड़ा है, तो फिर इन्हें जेटेट परीक्षा से क्यों बाहर किया गया। सदस्यों ने यह भी पूछा कि वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने का आधार क्या था और 2025 की नई नियमावली में इन्हें किस आधार पर हटाया गया। कुरमाली को शामिल नहीं करने पर भी आपत्ति बैठक में नई नियमावली में संथाल परगना के जिलों में कुरमाली भाषा को शामिल नहीं करने पर भी आपत्ति जताई गई। सदस्यों ने दावा किया कि संथाल क्षेत्र में कुरमाली बोलने वालों की संख्या तीन लाख से अधिक है। इसके बावजूद भाषा को सूची से बाहर रखा गया है। कमेटी ने मांगी विस्तृत जानकारी कमेटी ने विभाग से अगली बैठक से पहले विस्तृत तथ्यात्मक और प्रशासनिक डाटा उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली भाषाओं, भाषाभाषियों की संख्या, विभिन्न भाषाओं के शिक्षकों और विद्यार्थियों की संख्या तथा पिछली जेटेट परीक्षाओं में विभिन्न भाषाओं के अभ्यर्थियों के आंकड़े शामिल हैं। बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव, कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो और शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे। कमेटी ने अगली बैठक में क्या-क्या जानकारी मांगी वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को जेटेट में शामिल करने का आधार क्या था और 2025 की नियमावली में इन्हें किस आधार पर हटाया गया। पूरे झारखंड में विभिन्न भाषाओं के कितने शिक्षक हैं। राज्य में किन-किन भाषाओं की पढ़ाई होती है। साथ ही इन भाषाओं को पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या कितनी है। राज्य के अलग-अलग जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वालों की संख्या कितनी है तथा पूर्व की जेटेट परीक्षाओं में इन भाषाओं में कितने अभ्यर्थी शामिल हुए थे। असुर और बिरहोर जैसी आदिम जनजातीय भाषाओं को नियमावली से हटाने का आधार क्या है और इन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या कितनी है। किस जिले में कौन-कौन सी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं तथा उनके भाषाभाषियों की संख्या कितनी है। मांगी गई जानकारी का ठोस उत्तर नहीं मिला बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अधिकारियों से मांगी गई जानकारी का ठोस उत्तर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भाषाओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े पूरे डेटा के बिना कमेटी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकती। उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कैबिनेट बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने की मांग रखी थी।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी में स्नातक और इंटरमीडिएट नामांकन प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं होने से लाखों छात्र-छात्राओं की चिंता बढ़ गई है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) तथा CBSE और ICSE बोर्ड के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद विद्यार्थी उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है। रांची विश्वविद्यालय राज्य का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय माना जाता है, जहां संबद्ध कॉलेजों में स्नातक स्तर पर करीब 45 हजार सीटें उपलब्ध हैं। हर वर्ष राज्यभर से हजारों छात्र यहां दाखिला लेते हैं। इस बार स्थिति अधिक गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि JAC के अनुसार मैट्रिक में 4 लाख से अधिक और इंटरमीडिएट में लगभग 3 लाख छात्र सफल हुए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति और क्लस्टर सिस्टम बना वजह विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) और क्लस्टर सिस्टम को लेकर राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से अंतिम दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। इसी कारण चांसलर पोर्टल अब तक सक्रिय नहीं किया जा सका है। नई शिक्षा नीति बहुविषयक और लचीली शिक्षा प्रणाली पर जोर देती है, जबकि क्लस्टर सिस्टम के तहत कॉलेजों को सीमित विषय आधारित ढांचे में व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है। इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बैठाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। देरी से छात्रों की बढ़ी परेशानी नामांकन में देरी के कारण छात्र लगातार विश्वविद्यालय और कॉलेजों के चक्कर लगा रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को आवास, दस्तावेज सत्यापन और कोर्स चयन को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि पहले से ही विश्वविद्यालय का सत्र लेट चल रहा है, ऐसे में एडमिशन में और देरी छात्रों के करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्रभावित कर सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया जाएगा तथा इस वर्ष भी ऑनलाइन आवेदन चांसलर पोर्टल के माध्यम से लिए जाने की संभावना है।
गिरिडीह। गिरिडीह के DAV Public School CCL गिरिडीह के छात्र Avi Goyal ने सीबीएसई 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कॉमर्स स्ट्रीम में राज्य टॉप किया है। अवि ने 99.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय और पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल है। अवि गोयल ने अकाउंटेंसी, अर्थशास्त्र और चित्रकला में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। वहीं बिजनेस स्टडीज में 99, अंग्रेजी में 98 और एप्लाइड मैथ्स में 97 अंक प्राप्त किए। स्कूल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कॉमर्स स्ट्रीम में कुल 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। साइंस स्ट्रीम में भी छात्रों का शानदार प्रदर्शन स्कूल के साइंस स्ट्रीम में भी छात्रों ने बेहतरीन सफलता हासिल की। Swati Bhadani और Adnan Alam ने 92.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया। साइंस स्ट्रीम में भी 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। मेहनत और शिक्षकों के सहयोग का मिला फल अवि गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, विद्यालय के शैक्षणिक माहौल और परिवार के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल का वातावरण हमेशा पढ़ाई और सीखने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षकों का व्यवहार बेहद सहयोगात्मक और दोस्ताना है, जिससे छात्र बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर पाते हैं। पिता बोले- यह दोहरी खुशी का पल अवि के पिता Omprakash Goyal इसी विद्यालय के प्राचार्य हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए दोहरी खुशी लेकर आई है। स्कूल प्रबंधन ने मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति देने की भी घोषणा की है। वहीं सीसीएल के जीएम Girish Kumar Rathore ने विद्यालय और छात्रों को बधाई दी है।
रांची। JAC ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी करने के साथ ही टॉपर्स की पूरी लिस्ट भी घोषित कर दी है। इस साल आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस तीनों स्ट्रीम में छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आर्ट्स स्ट्रीम में ये रहे टॉपर्स आर्ट्स स्ट्रीम में छोटी कुमारी ने 478 अंक लाकर पहला स्थान हासिल किया। अंकित कुमार 474 अंकों के साथ दूसरे और अंशु कुमारी 473 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। कॉमर्स स्ट्रीम के टॉपर्स कॉमर्स में स्वेता प्रसाद ने 478 अंक प्राप्त कर टॉप किया। कृष कुमार बर्नवाल 472 अंकों के साथ दूसरे और प्रियंशी खत्री 471 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। साइंस स्ट्रीम में शानदार प्रदर्शन साइंस स्ट्रीम में राशिदा नाज ने 489 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। एमडी फैजान आलम 483 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि आकांक्षा कुमारी और सना आफरीन ने 481 अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया। ऐसे चेक करें रिजल्ट छात्र jacresults.com वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर और रोल कोड दर्ज कर रिजल्ट देख सकते हैं। इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से डिजिटल मार्कशीट भी डाउनलोड की जा सकती है।
रांची। राज्य के सरकारी शिक्षकों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। झारखंड में 80 हजार से अधिक शिक्षकों का मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन अब तक लंबित है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और अब मामला आंदोलन की ओर बढ़ता दिख रहा है। शिक्षक संघ का सरकार को अल्टीमेटम झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) ने सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर वेतन भुगतान नहीं हुआ, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। 24 जिलों में वेतन भुगतान पर असर संघ के अनुसार राज्य के सभी 24 जिलों में जिला कोषागार स्तर पर वेतन निकासी में अनियमितताओं की जांच चल रही है। इसी जांच के नाम पर सभी श्रेणी के शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। इसके अलावा फरवरी महीने का वेतन भी आयकर कटौती के कारण आंशिक रूप से ही मिल पाया, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। शिक्षकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव संघ का कहना है कि लगातार दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर वे शिक्षक जो अपने गृह क्षेत्र से दूर तैनात हैं, उन्हें रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसका असर उनके कार्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जांच और वेतन को अलग रखने की मांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू का कहना है कि अनियमितताओं की जांच जरूरी है, लेकिन इसका वेतन भुगतान से सीधा संबंध नहीं होना चाहिए। निर्दोष शिक्षकों का वेतन रोकना अनुचित है। वहीं महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने भी कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी शिक्षकों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। समाधान के लिए सुझाव JPSS ने मांग की है कि शिक्षकों से स्व-घोषणा पत्र लेकर एक सप्ताह के भीतर लंबित वेतन जारी किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट मानक प्रक्रिया (SOP) लागू की जाए। समाधान की ओर देख रही निगाहें अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो राज्य में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
रांची। झारखंड के करीब 38 हजार पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि ‘आकलन परीक्षा’ को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के समतुल्य मान्यता नहीं दी जाएगी। सरकार ने इस फैसले के पीछे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला दिया है, जिसमें शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य बताया गया है। सरकार और संघ के बीच अहम बैठक राजधानी रांची में हुई इस बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और डॉ. इरफान अंसारी मौजूद रहे। शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने साफ किया कि बिना कानूनी अनुमति के आकलन परीक्षा को JTET के बराबर मानना संभव नहीं है। हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि इस मामले में अगले सप्ताह तक अंतिम कानूनी राय आने के बाद पुनर्विचार किया जा सकता है। कुछ मुद्दों पर मिली आंशिक राहत बैठक में पारा शिक्षकों के कुछ मुद्दों पर सकारात्मक पहल भी देखने को मिली। मृत शिक्षकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट को भेजा जाएगा। उम्र सीमा और सेवा बहाली पर बनी रही असहमति हालांकि, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया गया। वहीं, 967 बर्खास्त पारा शिक्षकों की सेवा बहाली पर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने संघ से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सके।इसके अलावा, वर्ष 2024 में मानदेय बढ़ोतरी के मुद्दे को भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया गया है।
धनबाद। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। Jharkhand Education Tribunal Act 2017 के तहत अब सभी निजी विद्यालयों को फीस, किताब और ड्रेस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। फीस और री-एडमिशन पर स्पष्ट नियम प्रशासन ने निर्देश दिया है कि स्कूल अपनी वार्षिक फीस का पूरा ब्योरा वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें। अभिभावकों पर एकमुश्त फीस जमा करने का दबाव नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें तिमाही आधार पर भुगतान की सुविधा दी जाएगी। साथ ही री-एडमिशन के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और डेवलपमेंट फीस का उद्देश्य स्पष्ट करना होगा। किताब और ड्रेस को लेकर सख्ती नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को नवंबर तक अगले सत्र की किताबों और ड्रेस की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। स्कूल ड्रेस पांच साल से पहले नहीं बदली जा सकेगी और निर्धारित किताबों में भी बार-बार बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल परिसर में किताब और ड्रेस बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे अभिभावकों को बाजार से सस्ती दर पर सामग्री खरीदने का विकल्प मिलेगा। उल्लंघन पर जुर्माना और जांच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन एक सप्ताह के भीतर करना होगा। इसके बाद पांच सदस्यीय टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर इसके साथ ही बीपीएल श्रेणी के छात्रों के लिए 25% सीट आरक्षित रखने, स्कूल बसों में GPS और CCTV अनिवार्य करने तथा चालकों का पुलिस सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन कदमों से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
रांची। झारखंड में भोजपुरी और मगही को लेकर भाषा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। इसके कारण जेटेट नियमावली भी फंस गई है। बता दें कि जेटेट परीक्षा का इंतजार वर्षों से लाखों छात्र कर रहे हैं। वहीं जल्द लेने को लेकर सरकार पर झारखंड हाईकोर्ट का भी दबाव सरकार पर बना हुआ है। 2 मंत्रियों के विरोध से फंसा मामला झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट की नियमावली को बीते बुधवार को कैबिनेट से पारित नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार बैठक में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने नियमावली में वर्ष 2012 के अनुरूप भाषाओं को शामिल करने की मांग की। पलामू में भोजपुरी व मगही और संताल परगना में अंगिका भाषा को शामिल करने की मांग की गई। दोनों मंत्री ने कैबिनेट में नियमावली में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग रखी। इसके बाद नियमावली पर फैसला टाल दिया गया। अब इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। अब जानिये क्या है पूरा मामला दरअसल, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली तैयार की गई है। नियमावली में जिलावार जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा का प्रावधान है। अभ्यर्थी के लिए इसमें से एक भाषा का चयन करना और परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। परीक्षा की प्रक्रिया शुरू इधर, राज्य में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कैबिनेट की स्वीकृति के उम्मीद में झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा परीक्षा के लिए विज्ञापन भी जारी किया गया है। परीक्षा के लिए 28 अप्रैल से आवेदन जमा लिया जाना है। 10 साल से नहीं हुई परीक्षा बताते चलें कि राज्य में 10 वर्षों से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं हुई है। राज्य में लगभग चार लाख से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अगर 28 अप्रैल से पहले नियमावली को स्वीकृति नहीं मिली तो आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी।
रांची। रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ नेशन अवॉर्ड्स’ के तहत बीआईटी मेसरा को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। यह सम्मान संस्थान को छात्र विकास, सामुदायिक सहभागिता, नेतृत्व क्षमता निर्माण और कक्षा के बाहर मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से न सिर्फ संस्थान, बल्कि पूरे झारखंड की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई पहचान मिली है। कई शीर्ष शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से मिला सम्मान यह पुरस्कार वेटरन्स इंडिया द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें कई राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं का सहयोग रहा। इनमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA), भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) और शिक्षा प्रोत्साहन सोसाइटी ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। वेटरन्स इंडिया, जो पूर्व सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व में काम करती है, उन संस्थानों को सम्मानित करती है जो युवाओं के सर्वांगीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। 1955 से तकनीकी शिक्षा में अग्रणी 1955 में स्थापित बीआईटी मेसरा देश के प्रमुख तकनीकी और शोध संस्थानों में गिना जाता है। संस्थान ने शुरुआत से ही इनोवेशन, रिसर्च और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खास बात यह है कि स्पेस इंजीनियरिंग और रॉकेट्री जैसे उन्नत कार्यक्रमों की शुरुआत में भी इस संस्थान की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि बीआईटी मेसरा को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान माना जाता है। एलुमनाई नेटवर्क भी बना ताकत संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. राजेश जैन के अनुसार, बीआईटी मेसरा का एलुमनाई नेटवर्क आज दुनिया भर में प्रभावशाली पदों पर कार्यरत है। संस्थान के पूर्व छात्र रोहित प्रसाद (अमेजन एलेक्सा एआई), वी. वैद्यनाथन (आईडीएफसी फर्स्ट बैंक), अमित चौधरी (लेंसकार्ट) और करण बजाज (व्हाइटहैट जूनियर) जैसे बड़े नामों में शामिल हैं। यह उपलब्धि बीआईटी मेसरा की शैक्षणिक गुणवत्ता और उसके व्यापक प्रभाव को साबित करती है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 1457 प्रारंभिक विद्यालयों को अब तक स्कूल डेवलपमेंट फंड नहीं मिला है, जिससे नए सत्र से पहले जरूरी तैयारियां प्रभावित हो गई हैं। नामांकन और उपस्थिति पर संकट फंड की कमी के कारण स्कूलों में एडमिशन रजिस्टर और अटेंडेंस रजिस्टर की खरीदारी नहीं हो सकी है। ऐसे में 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले शिक्षकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि बच्चों का नामांकन और उपस्थिति कैसे दर्ज की जाएगी। एक लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर इस स्थिति का असर जिले के करीब एक लाख छात्रों पर पड़ सकता है। रजिस्टर के अभाव में न सिर्फ पढ़ाई की प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बाधित हो रही है। अन्य व्यवस्थाएं भी प्रभावित फंड नहीं मिलने से स्कूलों में स्वच्छता, स्टेशनरी और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इससे स्कूलों के संचालन में दिक्कतें बढ़ गई हैं। शिक्षकों में बढ़ी चिंता नया सत्र शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं होने से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर जल्द राशि नहीं मिली, तो नए सत्र की शुरुआत में भारी अव्यवस्था देखने को मिल सकती है। फिलहाल, स्कूल प्रबंधन और शिक्षक विभाग से जल्द फंड जारी करने की मांग कर रहे हैं, ताकि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा सकें।
रांची। झारखंड में होने जा रही जेटेट परीक्षा में अब सिर्फ बीएससी गणित के छात्र ही मैथ विषय की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। सोमवार को झारखंड विधानसभा में बजट सत्र पर चर्चा के दौरान बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव इससे संबंधित सवाल उठाया। इस पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में स्पष्ट किया कि गणित विषय से BA करने वाले छात्र मैथ विषय के लिए JTET परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते। नियमावली में किया गया संशोधन सही है। उन्होंने कहा कि केवल BSc गणित की परीक्षा पास करने वाले छात्र ही गणित विषय के लिए JTET परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे। कला संकाय के छात्रों को विषयगत योग्यता नहीः मंत्री का कहना था कि कला संकाय से गणित पढ़ने वाले छात्रों में उतनी विषयगत योग्यता नहीं होती, इसलिए नियमावली में प्रावधान किया गया है कि केवल BSc गणित से उत्तीर्ण छात्र ही JTET में गणित विषय के लिए पात्र होंगे।
झारखंड सरकार माओवादी घटनाओं में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के बच्चों की शिक्षा के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार राजधानी Ranchi में शहीद जवानों के आश्रित बच्चों के लिए एक विशेष आवासीय विद्यालय खोलेगी। इस स्कूल में बच्चों को मुफ्त शिक्षा, रहने और खाने की सुविधा दी जाएगी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि शहीद जवानों के बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। मुफ्त शिक्षा के साथ आवास और भोजन की सुविधा सरकार की इस पहल के तहत आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां पढ़ाई के साथ रहने, खाने और अन्य जरूरी सुविधाएं पूरी तरह नि:शुल्क होंगी। इस विद्यालय में बच्चों को 12वीं कक्षा तक शिक्षा दी जाएगी और उन्हें वैल्यू बेस्ड लर्निंग के साथ आधुनिक शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी। माओवादी हिंसा में 555 जवान हुए शहीद जानकारी के अनुसार झारखंड गठन के बाद से अब तक माओवादियों के खिलाफ अभियान में कुल 555 जवान शहीद हुए हैं। इनमें 408 राज्य पुलिस बल के जवान और 147 केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी व जवान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि शहीद जवानों के परिवारों को बेहतर सहायता और उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय की तर्ज पर होगा संचालन यह नया विद्यालय Netaji Subhash Chandra Bose Residential School की तर्ज पर संचालित किया जाएगा। वर्तमान में झारखंड के 20 जिलों में ऐसे 26 आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में मानव तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चों, माओवादी घटनाओं से प्रभावित परिवारों के बच्चों और अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। पांच नए बालिका आवासीय विद्यालय भी खुलेंगे राज्य सरकार पांच प्रखंडों में नए झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय भी खोलने की योजना बना रही है। यह स्कूल Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya की तर्ज पर संचालित किए जाएंगे। फिलहाल राज्य में 53 झारखंड आवासीय विद्यालय संचालित हैं और जिन प्रखंडों में ऐसे विद्यालय नहीं हैं, वहां नए स्कूल खोले जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि दूर-दराज क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा के अवसर मिल सकें।
झारखंड विधानसभा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जमशेदपुर पूर्वी की विधायक Purnima Sahu ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्षों से परीक्षा नहीं होने के कारण राज्य के युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। 2016 के बाद से नहीं हुई JTET परीक्षा विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान Jharkhand Teacher Eligibility Test का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक पूर्णिमा साहू ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि वर्ष 2016 के बाद से अब तक JTET परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि 2016 के बाद से राज्य में अब तक JTET का आयोजन नहीं हो सका है। इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने कहा कि यह राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। हाईकोर्ट की डेडलाइन पर भी उठाए सवाल विधायक पूर्णिमा साहू ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या शिक्षा विभाग ने Jharkhand High Court में 31 मार्च 2026 तक JTET परीक्षा आयोजित कराने का शपथ पत्र दिया है। सरकार ने जवाब में बताया कि हरिकेश महतो बनाम राज्य सरकार मामले में हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2026 तक परीक्षा कराने का आदेश दिया है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि नई नियमावली का प्रारूप तैयार है, लेकिन उसे मंजूरी मिलने की प्रक्रिया अभी जारी है। 20 दिन में परीक्षा कैसे संभव? इस पर विधायक पूर्णिमा साहू ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब परीक्षा कराने के लिए केवल 20 दिन का समय बचा है, तो इतने कम समय में नियमावली को मंजूरी और परीक्षा का आयोजन कैसे संभव होगा। उन्होंने इसे सरकार का चिंताजनक और शर्मनाक रवैया बताते हुए कहा कि वर्ष 2024 में भी नई नियमावली के नाम पर आवेदन लेकर परीक्षा टाल दी गई थी। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप पूर्णिमा साहू ने आरोप लगाया कि जो सरकार दो वर्षों में नियमावली को मंजूरी नहीं दिला सकी, वह 31 मार्च तक परीक्षा आयोजित कराने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने सरकार पर हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने और राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया।
झारखंड की राजधानी Ranchi को जल्द ही एक बड़ी शैक्षणिक सौगात मिलने वाली है। शहर के मोराबादी क्षेत्र में करीब 68 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक 6 मंजिला लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है। इस लाइब्रेरी में एक समय में लगभग 1800 छात्र एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे। इस परियोजना का निरीक्षण केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री Sanjay Seth ने किया। उन्होंने निर्माण कार्य का जायजा लिया और इंजीनियरों से गुणवत्ता और सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि रांची में आधुनिक लाइब्रेरी बनाना उनका लंबे समय से सपना रहा है। आधुनिक लाइब्रेरी का सपना संजय सेठ ने बताया कि अपने छात्र जीवन में रांची में पढ़ाई के लिए बहुत सीमित सुविधाएं थीं। उस समय क्लब रोड स्थित ब्रिटिश लाइब्रेरी ही छात्रों के लिए पढ़ाई का प्रमुख स्थान हुआ करती थी। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने रांची में एक बड़ी और आधुनिक लाइब्रेरी बनाने का प्रस्ताव रखा। CSR फंड से हो रहा निर्माण उन्होंने बताया कि इस लाइब्रेरी का निर्माण Coal India Limited और Central Coalfields Limited के CSR फंड से कराया जा रहा है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 67 से 68 करोड़ रुपये है। छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाएं इस लाइब्रेरी में बेसमेंट समेत कुल छह मंजिलें होंगी। यहां छात्रों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें बड़ा रीडिंग रूम, डिस्कशन रूम, कैफेटेरिया, फोटोकॉपी सेंटर और करीब 1000 लॉकर की व्यवस्था शामिल होगी। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही यह लाइब्रेरी छात्रों के लिए खोल दी जाएगी। यह लाइब्रेरी रांची ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र साबित होगी और उन्हें बेहतर अध्ययन का वातावरण उपलब्ध कराएगी।
झारखंड के Hazaribagh जिले में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत चालू सत्र 2026-27 के लिए गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिले के 23 निजी स्कूलों में कुल 279 बच्चों का मुफ्त एडमिशन लिया जाएगा। इसके लिए अभिभावक 14 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने नामांकन की तैयारी पूरी कर ली है। आवेदन करने के लिए अभिभावकों को आधिकारिक वेबसाइट rtehazaribagh.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। यह प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू हो चुकी है। सबसे ज्यादा 20-20 सीटों पर नामांकन बरकट्ठा के डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो, चौपारण के सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा, शहरी क्षेत्र के नेशनल पब्लिक स्कूल और इचाक के चैंपियन बेसिक अकैडमी में होगा। वहीं सबसे कम नामांकन डाडी प्रखंड के डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी में सिर्फ 5 सीटों पर किया जाएगा। RTE के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत निजी स्कूलों को अपनी प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है। एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज नामांकन के लिए अभिभावकों को बच्चे के पते के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या बिजली बिल देना होगा। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और दिव्यांग बच्चों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट भी जरूरी होगा। उम्र सीमा तय नर्सरी और एलकेजी: न्यूनतम उम्र 3 वर्ष 6 माह और अधिकतम 4 वर्ष 6 माह कक्षा 1: उम्र 5 वर्ष 6 माह से अधिक और 7 वर्ष से कम उम्र की गणना 31 मार्च 2026 के आधार पर की जाएगी। नियमों का सख्ती से पालन जिला शिक्षा अधीक्षक Akash Kumar ने कहा कि जिले में RTE नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया में लापरवाही करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने अलग से टीम गठित की है, जो आवेदन की जांच और चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।