रांची। झारखंड सरकार ने सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल की है। अब सेवा संबंधी विवादों के समाधान के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को छोटी-बड़ी शिकायतों के लिए सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने से राहत देना और मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना है। पहले शिकायत समिति, फिर ट्रिब्यूनल में अपील नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई शिकायत निवारण समिति करेगी। यदि कर्मचारी समिति के फैसले से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे ट्रिब्यूनल में अपील कर सकेंगे। हालांकि, जो मामले पहले से हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य न्यायाधिकरण में लंबित हैं, उनकी सुनवाई इस ट्रिब्यूनल में नहीं होगी। कौन करेगा ट्रिब्यूनल की अगुवाई? प्रस्तावित ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या ऐसे व्यक्ति करेंगे जो हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखते हों। इसके अलावा इसमें अनुभवी अधिवक्ता, झारखंड वित्तीय सेवा के संयुक्त सचिव स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारी और प्रशासनिक विशेषज्ञ सदस्य होंगे। किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। सभी सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। इन मामलों में कर सकेंगे अपील यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी को नौकरी से हटाया जाता है, सेवा समाप्त की जाती है, जबरन सेवानिवृत्त किया जाता है या पदावनत किया जाता है, तो वह ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे वेतन, नियुक्ति, प्रोन्नति और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों का जल्द समाधान होगा। आदेश नहीं मानने पर लगेगा जुर्माना फिलहाल झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों से जुड़े करीब 650 मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। इन्हें कम करने के उद्देश्य से ट्रिब्यूनल की व्यवस्था लागू की जा रही है। यदि कोई विश्वविद्यालय ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन नहीं करता है, तो पहली बार एक लाख रुपये तक और दोबारा उल्लंघन करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सेवा संबंधी विवादों का निपटारा तेज, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
रांची। CBSE BOARD 12वीं के री-इवैल्यूएशन रिजल्ट जारी होते ही रांची की अवनी ने कामयाबी का ऐसा परचम लहराया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेल टाउनशिप धुर्वा की कॉमर्स स्ट्रीम की छात्रा अवनी केजरीवाल ने अपनी मार्कशीट से 'परफेक्शन' की एक नई इबारत लिख दी है। अवनी ने परीक्षा में ऐसे ऐतिहासिक अंक हासिल किए हैं, जिसे देख हर कोई दंग है। 13 मई को जब मुख्य रिजल्ट आया, तो अवनी को अपनी उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले थे। लेकिन, अपने प्रदर्शन पर पूरा भरोसा होने के कारण उन्होंने मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई किया। 500 में हासिल किया शत-प्रतिशत अंक रांची की रहने वाली अवनी केजरीवाल DPS, सेल टाउनशिप धुर्वा की होनहार छात्रा हैं। अवनी एक साधारण और संस्कारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता मितेश केजरीवाल खाने के तेल एडिबल ऑयल का बिजनेस करते हैं, जबकि उनकी मां पूनम केजरीवाल एक कुशल हाउसवाइफ हैं। अवनी ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता से न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर फक्र से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है। बिजनेस मैनेजमेंट में बनाना है करियर अवनी की रुचि अपने पिता की तरह ही कॉर्पोरेट और बिजनेस वर्ल्ड में है। वह भविष्य में बिजनेस मैनेजमेंट सेक्टर में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। 12वीं के बाद उनका अगला लक्ष्य BBA करना है। इसके लिए उन्होंने CUET UG 2026 की परीक्षा भी दी है और वे देश के टॉप मैनेजमेंट कॉलेज में एडमिशन लेने की तैयारी कर रही हैं। इन्हें दिया सफलता का श्रेय अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय अवनी ने सबसे पहले अपने माता-पिता को दिया है, जिन्होंने हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया। इसके साथ ही उन्होंने अपने कोचिंग शिक्षक सचित सर का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। अवनी का कहना है कि पढ़ाई के दौरान जब भी उन्हें कोई उलझन होती थी, सचित सर ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और उनके कॉन्सेप्ट्स को क्लियर करने में मदद की। हर विषय में परफेक्ट अवनी की मार्कशीट को देखकर साफ पता चलता है कि उन्होंने हर एक विषय की बारीकी से पढ़ाई की थी। री-इवैल्यूएशन के बाद उनका स्कोर कार्ड किसी सपने जैसा नजर आता है। अंग्रेजी कोर: 100/100 (80 थ्योरी + 20 प्रैक्टिकल), अकाउंटेंसी: 100/100 (80 थ्योरी + 20 प्रैक्टिकल), बिजनेस स्टडीज: 100/100, इकोनॉमिक्स: 100/100, एप्लाइड मैथेमेटिक्स: 100/100, ग्राफिक्स: 99/100 (29 थ्योरी + 70 प्रैक्टिकल)
रांची। झारखंड के 25000 शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। खतरे में पड़ी, उनकी नौकरी अब बच सकती है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट नियमावली में जल्द बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसके अनुसार अब सेवा के दौरान प्रशिक्षण पाने वाले और बीएड-डीएलएड कर चुके शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे। इसे लेकर स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल यानी जैक को आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दे दिया है। नियमावली में बदलाव के साथ ही राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 25 हजार ट्रेनिंग प्राप्त शिक्षकों के लिए जेटेट में शामिल होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके बाद शिक्षकों को आवेदन जमा करने के लिए भी पर्याप्त समय मिलेगा। बताते चलें कि इससे संबंधित खबर आइडीटीवी इंद्रधनुष में 6 जून प्रसारित की गई थी। 20 जुलाई तक बढ़ेगी आवेदन की तारीख स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जैक को आवेदन जमा करने की तारीख भी 20 जुलाई तक बढ़ाने के लिए कहा है। वर्तमान में आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून तक निर्धारित है। 31 अगस्त 2028 तक JTET पास करना अनिवार्य इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन मौजूदा नियमों की बाधा के कारण कार्यरत शिक्षक जेटेट के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे। कोर्ट के आदेश के अनुसार तय समय सीमा तक जेटेट उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है। ऐसे में विभाग की पहल को शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जानिए नियमावली में क्या था पेच राज्य में वर्ष 1994 और वर्ष 1999 में अनट्रेंड शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इन शिक्षकों को एक वर्ष का सेवाकालीन प्रशिक्षण मिला था। वर्तमान नियमावली में इनके आवेदन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, वैसे पारा शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, जो डीइपी उत्तीर्ण हैं और छह माह के ब्रिज कोर्स का प्रशिक्षण पाया है। राज्य गठन के बाद बीएड सफल अभ्यर्थी, जो कक्षा एक से पांच में नियुक्त हैं और डीएलएड सफल अभ्यर्थी, जो कक्षा छह से आठ में नियुक्त हैं, उन्हें भी आवेदन जमा करने में परेशानी हो रही थी। वर्तमान नियमावली में ऐसे अभ्यर्थियों के लिए प्रावधान नहीं था। परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्र की भी बाध्यता थी। प्रावधान में यह होगा बदलाव विभाग ने जैक को कहा है कि सेवा के दौरान प्रशिक्षण पाने वाले शिक्षक, डीइपी उत्तीर्ण और छह माह का ब्रिज कोर्स करने वाले पारा शिक्षक और बीएड-डीएलएड करने वाले शिक्षकों के आवेदन जमा करने के लिए साफ्टवेयर में बदलाव किया जाएगा। अब 60 वर्ष तक के शिक्षक भी आवेदन जमा कर सकेंगे।
रांची। झारखंड में करीब 25 हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। इन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को अमान्य कर दिया गया है। यानी इनकी डिग्री अब फर्जी बताई जा रही है। इन शिक्षकों के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण डिग्री वर्तमान जेटेट नियमावली के अनुरूप नहीं माने जाने के कारण उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। इससे हजारों शिक्षक फंस गये हैं। 31 अगस्त 2028 तक JTET पास करना अनिवार्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के लगभग 70 हजार शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक जेटेट उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर शिक्षक जेटेट पास नहीं कर पाते हैं, तो उनकी सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया में आ रही बाधाओं ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी है। प्रशिक्षण प्रमाणपत्र विवाद से अटके आवेदन झारखंड के करीब 25 हजार शिक्षकों के जेटेट आवेदन स्वीकार नहीं हो रहे। प्रशिक्षण डिग्री और प्रमाणपत्र की मान्यता को लेकर विवाद बना हुआ है। जेटेट आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून निर्धारित की गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक जेटेट पास करना अनिवार्य है। समस्या का समाधान नहीं होने पर शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की मान्यता पर उलझा मामला जानकारी के अनुसार, फिलहाल पूरा विवाद शिक्षकों के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने जेटेट के लिए आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तिथि 20 जून तय की है। लेकिन, बड़ी संख्या में शिक्षकों के आवेदन तकनीकी कारणों और प्रमाणपत्र संबंधी विसंगतियों के कारण लंबित पड़े हुए हैं। तकनीकी त्रुटियां और स्पष्ट दिशा-निर्देश की कमी कई शिक्षकों के दस्तावेजों में तकनीकी त्रुटियां बताई जा रही हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रशिक्षण की मान्यता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वर्षों से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे जेटेट परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह सकते हैं। शिक्षकों और संबंधित संगठनों की मांग है कि सरकार, जैक और शिक्षा विभाग इस मामले में शीघ्र स्पष्ट निर्देश जारी करें, ताकि पात्र शिक्षकों के आवेदन स्वीकार किए जा सकें और उनके भविष्य पर मंडरा रहा संकट दूर हो सके।
रांची। रांची जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीसी मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, समग्र शिक्षा अभियान और मध्याह्न भोजन योजना की जिलास्तरीय समीक्षा बैठक हुई। डीसी ने निर्देश दिया कि जिन स्कूलों में मैट्रिक परीक्षा में 10% से अधिक छात्र फेल हुए हैं, वहां के सभी शिक्षकों को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाए। वहीं ई विद्यावाहिनी ऐप पर अटेंडेंस नहीं बनानेवाले शिक्षकों का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया। साथ ही, इंटरम साइंस में खराब परिणाम वाले स्कूलों से भी जवाब मांगा गया। केवल पास प्रतिशत नहीं बल्कि 75% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। 233 स्कूलों ने एक दिन भी दर्ज नहीं की उपस्थिति बैठक में ई-विद्या वाहिनी ऐप पर अटेंडेंस को लेकर सबसे ज्यादा सख्ती दिखाई गई। जिले के 233 विद्यालयों ने एक भी दिन बच्चों की उपस्थिति दर्ज नहीं की। ऐसे सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अगले आदेश तक वेतन रोकने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा 1461 विद्यालय ऐसे पाए गए, जहां छात्रों की उपस्थिति 10 दिनों से भी कम दर्ज की गई। इन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी नोटिस जारी किया जाएगा। रांची सदर क्षेत्र में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी आभा कुमारी का वेतन भी रोकने का निर्देश दिया गया। रांची के 215 शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं की। इन सभी का वेतन रोक दिया गया। जर्जर भवनों में पढ़ाई बंद होगी: डीसी ने जर्जर भवनों में पठन-पाठन तत्काल बंद करने का निर्देश दिया। साथ ही डीएमएफटी और अन्य निधियों से जर्जर भवनों के निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने को कहा। बैठक में उप विकास आयुक्त संजय भगत, जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार आदि मौजूद थे। ट्रेनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों का रूकेगा वेतन 1416 शिक्षक अब तक जे-गुरुजी ऐप पर सीपीडी प्रशिक्षण शुरू नहीं कर पाए हैं। डीसी ने सभी शिक्षकों को सात दिनों के भीतर प्रशिक्षण शुरू करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वालों का वेतन रोकने की चेतावनी दी गई। डीसी ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में नामांकन पूरा करने के लिए सात दिनों की समय सीमा तय की।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चांद पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। एजेंसी ने करीब 20 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी “मून बेस” योजना पेश की है, जिसका उद्देश्य चांद पर ऐसा स्थायी ठिकाना बनाना है जहां वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर रिसर्च कर सकें। NASA ने इस मिशन के लिए विस्तृत रोडमैप जारी करते हुए रोवर, लैंडर और ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए अरबों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट भी दिए हैं। आर्टेमिस मिशन के बाद नई तैयारी NASA का यह कदम आर्टेमिस-II मिशन की सफलता के बाद सामने आया है। अप्रैल 2026 में आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा की थी। यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद पहला मानव मिशन था जिसने लो अर्थ ऑर्बिट से आगे यात्रा की। अब NASA का लक्ष्य 2028 तक आर्टेमिस-III मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद की सतह पर उतारना है। NASA ने जारी किया मून बेस का ब्लूप्रिंट वॉशिंगटन डीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में NASA प्रमुख Jared Isaacman ने कहा कि चांद पर बनने वाला यह बेस मानवता का दूसरे खगोलीय पिंड पर पहला स्थायी ठिकाना होगा। उन्होंने बताया कि मून बेस में लूनर रोवर, ड्रोन, वैज्ञानिक उपकरण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा ताकि इंसान चांद जैसे कठिन वातावरण में लंबे समय तक रहना सीख सकें। 2026 में शुरू होंगे तीन बड़े मिशन NASA ने 2026 के लिए तीन शुरुआती “मून बेस मिशन” घोषित किए हैं। इनका उद्देश्य इंसानों के पहुंचने से पहले तकनीक का परीक्षण करना और जोखिम कम करना है। Moon Base-I मिशन क्या करेगा? पहले मिशन “Moon Base-I” के तहत Blue Origin के “Blue Moon Mark-1 Endurance” लैंडर का उपयोग किया जाएगा। यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित Shackleton Connecting Ridge इलाके में उतरेगा। यहां वैज्ञानिक उपकरण भेजे जाएंगे, जिनमें स्टीरियो कैमरे और लेजर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिस्टम शामिल होंगे। NASA के मुताबिक: स्टीरियो कैमरे यह जांचेंगे कि रॉकेट थ्रस्टर चांद की सतह को कैसे प्रभावित करते हैं। लेजर सिस्टम अंतरिक्ष यानों को सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करेगा। Moon Base-II में भेजा जाएगा भारी सामान दूसरे मिशन “Moon Base-II” में चांद पर 1100 पाउंड से ज्यादा सामान पहुंचाया जाएगा। यह मिशन Astrobotic Technology के “Griffin Lander” के जरिए भेजा जाएगा। इस मिशन में Astrolab का FLIP रोवर भी शामिल होगा। इसका उद्देश्य चांद की सतह पर भारी सामान ले जाने और मूवमेंट तकनीक विकसित करना है। Moon Base-III करेगा रहस्यमयी ‘लूनर स्वर्ल्स’ की जांच तीसरा मिशन “Moon Base-III” चांद की सतह पर दिखने वाले रहस्यमयी चमकीले पैटर्न “Lunar Swirls” का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चांद के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है। इस मिशन में यूरोपियन और कोरियन स्पेस एजेंसियों के उपकरण भी शामिल होंगे। तीन चरणों में बनेगा चांद का बेस NASA ने पूरे कार्यक्रम को तीन चरणों में बांटा है। पहला चरण (2026-2028) नई तकनीकों का परीक्षण चांद की सतह पर ऑपरेशन की तैयारी लूनर वाहन और रोवर की तैनाती दूसरा चरण (2029-2032) स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पावर ग्रिड और सपोर्ट सिस्टम बनाना रहने योग्य मॉड्यूल विकसित करना तीसरा चरण (2032 के बाद) चांद पर लगातार मानव मौजूदगी नियमित क्रू रोटेशन स्थायी वैज्ञानिक रिसर्च करोड़ों डॉलर में बनेंगे चंद्र रोवर NASA ने Astrolab और Lunar Outpost को चांद पर चलने वाले रोवर बनाने की जिम्मेदारी दी है। Astrolab को करीब 219 मिलियन डॉलर Lunar Outpost को करीब 220 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। इन रोवरों को तीन तरीकों से संचालित किया जा सकेगा: अंतरिक्ष यात्री खुद चलाएंगे पृथ्वी से रिमोट कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त संचालन NASA का लक्ष्य है कि ये रोवर चांद पर करीब एक साल तक सक्रिय रह सकें। ब्लू ओरिजिन को मिली बड़ी जिम्मेदारी Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin को इन रोवरों को चांद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को इसके लिए 188 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 280 मिलियन डॉलर तक दिए जा सकते हैं। 2028 में भेजे जाएंगे उड़ने वाले ड्रोन NASA 2028 में चांद पर चार छोटे “हॉपिंग ड्रोन” भी भेजेगा। इनका काम उन इलाकों की तस्वीरें लेना होगा जहां रोवर पहुंचना मुश्किल होगा। इन ड्रोन को ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट Firefly Aerospace तैयार करेगी। “अब चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाने का समय” NASA के मून बेस प्रोग्राम अधिकारी कार्लोस गार्सिया-गालान ने कहा कि आने वाले वर्षों में ऐसी स्थिति बनाई जाएगी जहां इंसान लगातार चांद पर मौजूद रह सकें। NASA प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि यह मिशन सिर्फ अमेरिका का नहीं बल्कि पूरी मानवता का भविष्य बदलने वाला कदम साबित होगा।
रांची। झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बुधवार दोपहर बाद मौसम बदलने के संकेत हैं। विभाग के अनुसार कई जिलों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिमी जिलों गढ़वा, पलामू और चतरा में हीट वेव का असर अभी भी बना रहेगा। तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी मौसम विभाग ने राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में गरज के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं Simdega, Gumla, कोडरमा और हजारीबाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। कई जिलों में 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा उत्तर-पश्चिमी झारखंड के गढ़वा, पलामू और चतरा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र बना रहेगा। वहीं देवघर, धनबाद और पाकुड़ में अधिकतम तापमान 41 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तथा न्यूनतम 26 डिग्री रहने का अनुमान है। बोकारो, रामगढ़, खूंटी और हजारीबाग में भी तापमान 39 से 42 डिग्री के बीच रह सकता है। बारिश से मिल सकती है राहत मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। लगातार बादल और हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल उमस और गर्म हवाओं से परेशानी बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
रांची। झारखंड में जेटेट (J-TET) परीक्षा से कई क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को हटाए जाने के बाद राज्य में नया भाषा विवाद खड़ा हो गया है। जहां मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को हटाने पर राजनीतिक दलों और मंत्रियों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है, वहीं असुर, बिरहोर, भूमिज और माल्तो जैसी जनजातीय भाषाओं को सूची से बाहर किए जाने पर लगभग सन्नाटा पसरा हुआ है। इस मुद्दे ने अब राजनीति और वोट बैंक की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय भाषाओं को हटाने पर राजनीतिक हलचल राज्य सरकार द्वारा जेटेट की संशोधित भाषा सूची जारी होने के बाद सबसे अधिक विरोध मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका को हटाने को लेकर हुआ। कांग्रेस कोटे के मंत्रियों समेत कई विधायकों ने इसे गलत फैसला बताते हुए कैबिनेट बैठक में भी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पांच मंत्रियों की एक कमेटी का गठन किया, जिसमें कांग्रेस, झामुमो और राजद के मंत्री शामिल हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद में जनजातीय भाषाओं के मुद्दे को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने समय-समय पर इस विषय को उठाया, लेकिन व्यापक राजनीतिक समर्थन अब तक नहीं दिखा। जनजातीय भाषाओं पर क्यों चुप्पी? असुर, बिरहोर, भूमिज और माल्तो जैसी भाषाएं झारखंड की सांस्कृतिक और आदिवासी पहचान का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। इन भाषाओं को भी 2026 में जेटेट की सूची से बाहर कर दिया गया, लेकिन इनके समर्थन में न तो बड़े आंदोलन हुए और न ही व्यापक राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह चुप्पी वोट बैंक की राजनीति से जुड़ी हो सकती है। क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े समुदायों की संख्या अधिक होने के कारण राजनीतिक दल उनके पक्ष में खुलकर सामने आए, जबकि सीमित जनसंख्या वाले आदिवासी समुदायों की भाषाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। किन जिलों में हटाई गईं भाषाएं? राज्य के कई जिलों में अलग-अलग भाषाओं को सूची से हटाया गया है। लोहरदगा और लातेहार में असुर और बिरहोर भाषा हटाई गई, जबकि दुमका, पाकुड़ और साहिबगंज से माल्तो और अंगिका को बाहर किया गया। पलामू और गढ़वा में मगही व भोजपुरी हटाई गईं। वहीं पश्चिम सिंहभूम से भूमिज भाषा को भी सूची से बाहर कर दिया गया। एक दशक पहले शामिल थीं ये भाषाएं जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में इन सभी भाषाओं को क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा सूची में शामिल किया गया था। लेकिन 2026 में संशोधन के दौरान इन्हें हटाए जाने से अभ्यर्थियों और भाषा प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है। कई लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही तो कुछ इसे जानबूझकर की गई राजनीतिक छेड़छाड़ मान रहे हैं। कमेटी में जनजातीय प्रतिनिधित्व नहीं भाषा विवाद को सुलझाने के लिए बनाई गई मंत्रियों की कमेटी में किसी भी जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया है। झामुमो मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आदिवासी भाषाओं से जुड़े लोगों की भागीदारी जरूरी थी। अब सभी मंत्रियों की अनुशंसाएं मुख्यमंत्री को भेज दी गई हैं और उम्मीद की जा रही है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस संवेदनशील मसले पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, यह विवाद सिर्फ भाषा का नहीं बल्कि पहचान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्राथमिकताओं का मुद्दा बनता जा रहा है।
रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्थाएं, आधारभूत संरचनाओं तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों से जुड़ी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से पारदर्शिता के साथ अध्यनरत छात्र-छात्राओं तक ससमय पहुंचाना सुनिश्चित करें। झारखंडी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार झारखंड के बच्चों को बेहतर एवं क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। सभी सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ पठन-पाठन की नवीनतम एवं आधुनिक तकनीक से संबंधित संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम में निरंतर सुधार हो रहा है, बच्चों का रिजल्ट और ज्यादा अच्छा हो इस निमित्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्य सहित सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को गति दें। शिक्षकों के शत प्रतिशत पदों को भरना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षकों को समय पर वेतन मिले मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हजारों की संख्या शिक्षकों की बहाली हुई है, नियुक्ति प्रक्रिया निरंतर जारी रखते हुए रिक्त पदों को भरा जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नव नियुक्त शिक्षकों को ससमय वेतन मिले इस निमित्त सभी वेरिफिकेशन कार्य इस माह के अंत तक पूर्ण करना सुनिश्चित की जाए। ड्रॉप आउट मामलों में निरंतर सुधार मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की आधारशिला होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो तथा प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाय। बैठक में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या में कमी आई है। ड्रॉप आउट के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से अच्छा है। शिक्षा विभाग द्वारा अभियान चलाकर ड्रॉप आउट बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा रहा है। श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर वैसे बच्चों का चिन्हित किया जा रहा है, जो बच्चे मजदूरी या कोई अन्य कार्य से जुड़े हैं और स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। किताब, पठन-पाठन सामग्री एवं साइकिल वितरण कार्य भी समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है। अब बच्चे मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ उतीर्ण हो रहे हैं, जिन विद्यालयों में बच्चों का रिजल्ट ठीक नहीं रहा है, वैसे विद्यालयों को चिन्हित कर सभी सुविधा, व्यवस्था एवं शिक्षकों की उपलब्धता सहित प्रत्येक बिंदुओं पर सुधार हेतु विभाग विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। सभी स्कूलों में हो इंटरनेट कनेक्शन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाए एवं आईसीटी लैब की सुविधा दुरुस्त करें। 5000 सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के भीतर सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5 हजार किए जाने की कार्य योजना पर तेजी से कार्य करें, ताकि प्रत्येक पंचायत तक स्कूलों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को क्वालिटी एजुकेशन पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले 6 से 8 महीने के भीतर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी विद्यालय सिंगल टीचर के भरोसे न चले। विद्यालय प्रबंध समितियों से समन्वय स्थापित कर स्थानीय पढ़े-लिखे अहर्ता रखने वाले इच्छुक युवाओं को शिक्षक के रूप में जोड़ें। विशेष कर छात्राओं को भी मौका दें, ताकि शिक्षकों की कमी से किसी भी विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो। प्रत्येक पंचायत में अच्छे स्कूल हो मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक पंचायतों में अच्छे स्कूल होंगे, तभी बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य उज्ज्वल करेंगे। सभी सरकारी विद्यालयों के पठन-पाठन कार्य में एकरूपता लाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत परिवहन सुविधा का संचालन करें, ताकि छात्र-छात्राओं को समय के अनुसार घर से स्कूल एवं स्कूल से घर तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी विद्यालयों के परिसरों व्यापक रूप से वृक्षारोपण का अभियान शुरू कराएं। अभिवंचित बच्चों को आवासीय सुविधा और क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर संचालित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत अभिवंचित वर्ग के बच्चे-बच्चियों को आवासीय सुविधा सहित क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करें। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य के भीतर नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों की कुल संख्या 26 है। इन स्कूलों में लगभग 4 हजार विभिन्न प्रकार के अभिवंचित बच्चों को रहने-खाने की पूरी सुविधा के साथ निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के भवनों के रख-रखाव सहित सभी कार्यों को सुदृढ़ किया गया है। खेलकूद को दें बढ़ावा सीएम ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बीच शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दें। वैसे बच्चे-बच्चियों को चिन्हित करें, जो खेल प्रतिस्पर्धा में बहुत अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे हैं ताकि उन्हें खेल के क्षेत्र में और आगे बढ़ाया जा सके। राज्य के भीतर खेल के क्षेत्र में हमारे कई बच्चों ने झारखंड का नाम भी रोशन किया है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विद्यालयों में बच्चों को स्पोर्ट्स किट्स उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता के तहत झारखंड के बच्चों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। शारीरिक शिक्षा के शिक्षक खेल गतिविधियों की बेहतरी के लिए कार्य कर रहे हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय का डीपीआर जल्द बने बैठक में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के समक्ष अधिकारियों ने जगुआर कैंपस रांची में बनाए जाने वाले प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय की स्थापना हेतु चिन्हित भूमि का पीपीटी प्रजेंटेशन रखा। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जगुआर कैंपस रांची में ही 6 एकड़ भूमि विद्यालय निर्माण हेतु विभाग द्वारा चिन्हित किया गया है। मुख्यमंत्री को विद्यालय स्थापना की कार्य योजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को इस प्रस्ताव से संबंधित डीपीआर समर्पित करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय शहीद पुलिस कर्मियों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी विद्यालय की ऑनलाइन जानकारी ली मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ऑनलाइन माध्यम से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बुंडू के स्कूल प्रबंधन के साथ जुड़े एवं स्कूल में स्थापित सभी सुविधाओं की जानकारी ली। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजेश प्रसाद, निदेशक प्राथमिक शिक्षा मनोज कुमार रंजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रांची। झारखंड के टीजीटी अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में टीजीटी शिक्षकों के खाली रह गये 2034 पदों पर नियुक्ति जल्द की जायेगी। हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी को प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों के 2034 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया फिर शुरू करने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अब तीन जुलाई को अगली सुनवाई होगी। 156 अभ्यर्थियों ने दायर की थी अवमानना याचिका मो. ताल्हा समेत 156 अभ्यर्थियों ने यह अवमानना याचिका दायर की है। इसमें मीना कुमारी प्रकरण में 1 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने का आग्रह किया गया है। इस मामले में कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था। जेएसएससी ने लेटर पेटेंट अपील दाखिल की थी अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि इस आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया। 2034 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जेएसएससी ने 26 सितंबर 2025 को लेटर पेटेंट अपील दाखिल की थी। लेकिन किसी कारणवश उस पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है।
रांची। सिविल कोर्ट ने गुरुवार को डीएवी स्कूल, कडरू के प्रिंसिपल एमके सिन्हा को दोषी करार दिया है। उन्हें कल शुक्रवार को सजा सुनाई जायेगी। मामले में अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया। नर्स ने लगाए थे गंभीर आरोप मामला मई 2022 का है, जिसमें स्कूल की एक महिला स्टाफ नर्स ने एमके सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का आरोप था कि प्रिंसिपल बीपी चेक करने के बहाने उन्हें अपने कमरे में बुलाते थे और अश्लील हरकत करते थे। साथ ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव भी बनाते थे। इन आरोपों के आधार पर पीड़िता ने अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एमके सिन्हा फरार हो गए थे। करीब चार दिनों तक फरार रहने के बाद पुलिस ने उन्हें जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हाईकोर्ट से मिली जमानत हुई रद्द बाद में 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। फिर पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत रद्द करने की मांग की। मामले पर सुनवाई करते हुए 20 जून 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली बेल सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और एक सप्ताह के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। आदेश के बाद उन्होंने सिविल कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद से वह जेल में बंद हैं।
रांची। भोजपुरी-मगही विवाद झारखंड में गरमाता जा रहा है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नई भाषा नियमावली को लेकर जारी विवाद पर बनी पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में मंथन तो खूब हुआ, पर कोई नतीजा नहीं निकला। बैठक में अधिकारियों से कई अहम सवाल पूछे गए, लेकिन आवश्यक डेटा और स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण कमेटी कोई निर्णय नहीं ले सकी। अब अगली बैठक 22 मई को होगी। भोजपुरी-मगही बोलने वालों की संख्या अधिक वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड में भोजपुरी और मगही बोलने वालों की संख्या ओड़िया और बांग्ला भाषियों से करीब चार गुना अधिक है। इस पर कमेटी के सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब इन भाषाओं का दायरा इतना बड़ा है, तो फिर इन्हें जेटेट परीक्षा से क्यों बाहर किया गया। सदस्यों ने यह भी पूछा कि वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने का आधार क्या था और 2025 की नई नियमावली में इन्हें किस आधार पर हटाया गया। कुरमाली को शामिल नहीं करने पर भी आपत्ति बैठक में नई नियमावली में संथाल परगना के जिलों में कुरमाली भाषा को शामिल नहीं करने पर भी आपत्ति जताई गई। सदस्यों ने दावा किया कि संथाल क्षेत्र में कुरमाली बोलने वालों की संख्या तीन लाख से अधिक है। इसके बावजूद भाषा को सूची से बाहर रखा गया है। कमेटी ने मांगी विस्तृत जानकारी कमेटी ने विभाग से अगली बैठक से पहले विस्तृत तथ्यात्मक और प्रशासनिक डाटा उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली भाषाओं, भाषाभाषियों की संख्या, विभिन्न भाषाओं के शिक्षकों और विद्यार्थियों की संख्या तथा पिछली जेटेट परीक्षाओं में विभिन्न भाषाओं के अभ्यर्थियों के आंकड़े शामिल हैं। बैठक में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव, कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो और शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे। कमेटी ने अगली बैठक में क्या-क्या जानकारी मांगी वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को जेटेट में शामिल करने का आधार क्या था और 2025 की नियमावली में इन्हें किस आधार पर हटाया गया। पूरे झारखंड में विभिन्न भाषाओं के कितने शिक्षक हैं। राज्य में किन-किन भाषाओं की पढ़ाई होती है। साथ ही इन भाषाओं को पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या कितनी है। राज्य के अलग-अलग जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वालों की संख्या कितनी है तथा पूर्व की जेटेट परीक्षाओं में इन भाषाओं में कितने अभ्यर्थी शामिल हुए थे। असुर और बिरहोर जैसी आदिम जनजातीय भाषाओं को नियमावली से हटाने का आधार क्या है और इन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या कितनी है। किस जिले में कौन-कौन सी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं तथा उनके भाषाभाषियों की संख्या कितनी है। मांगी गई जानकारी का ठोस उत्तर नहीं मिला बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अधिकारियों से मांगी गई जानकारी का ठोस उत्तर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भाषाओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े पूरे डेटा के बिना कमेटी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकती। उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कैबिनेट बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने की मांग रखी थी।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी में स्नातक और इंटरमीडिएट नामांकन प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं होने से लाखों छात्र-छात्राओं की चिंता बढ़ गई है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) तथा CBSE और ICSE बोर्ड के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद विद्यार्थी उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है। रांची विश्वविद्यालय राज्य का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय माना जाता है, जहां संबद्ध कॉलेजों में स्नातक स्तर पर करीब 45 हजार सीटें उपलब्ध हैं। हर वर्ष राज्यभर से हजारों छात्र यहां दाखिला लेते हैं। इस बार स्थिति अधिक गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि JAC के अनुसार मैट्रिक में 4 लाख से अधिक और इंटरमीडिएट में लगभग 3 लाख छात्र सफल हुए हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति और क्लस्टर सिस्टम बना वजह विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) और क्लस्टर सिस्टम को लेकर राज्य सरकार और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से अंतिम दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। इसी कारण चांसलर पोर्टल अब तक सक्रिय नहीं किया जा सका है। नई शिक्षा नीति बहुविषयक और लचीली शिक्षा प्रणाली पर जोर देती है, जबकि क्लस्टर सिस्टम के तहत कॉलेजों को सीमित विषय आधारित ढांचे में व्यवस्थित करने की तैयारी चल रही है। इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बैठाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। देरी से छात्रों की बढ़ी परेशानी नामांकन में देरी के कारण छात्र लगातार विश्वविद्यालय और कॉलेजों के चक्कर लगा रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को आवास, दस्तावेज सत्यापन और कोर्स चयन को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि पहले से ही विश्वविद्यालय का सत्र लेट चल रहा है, ऐसे में एडमिशन में और देरी छात्रों के करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्रभावित कर सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया जाएगा तथा इस वर्ष भी ऑनलाइन आवेदन चांसलर पोर्टल के माध्यम से लिए जाने की संभावना है।
गिरिडीह। गिरिडीह के DAV Public School CCL गिरिडीह के छात्र Avi Goyal ने सीबीएसई 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कॉमर्स स्ट्रीम में राज्य टॉप किया है। अवि ने 99.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय और पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्कूल और परिवार में खुशी का माहौल है। अवि गोयल ने अकाउंटेंसी, अर्थशास्त्र और चित्रकला में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। वहीं बिजनेस स्टडीज में 99, अंग्रेजी में 98 और एप्लाइड मैथ्स में 97 अंक प्राप्त किए। स्कूल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कॉमर्स स्ट्रीम में कुल 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। साइंस स्ट्रीम में भी छात्रों का शानदार प्रदर्शन स्कूल के साइंस स्ट्रीम में भी छात्रों ने बेहतरीन सफलता हासिल की। Swati Bhadani और Adnan Alam ने 92.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया। साइंस स्ट्रीम में भी 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। मेहनत और शिक्षकों के सहयोग का मिला फल अवि गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, विद्यालय के शैक्षणिक माहौल और परिवार के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल का वातावरण हमेशा पढ़ाई और सीखने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षकों का व्यवहार बेहद सहयोगात्मक और दोस्ताना है, जिससे छात्र बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर पाते हैं। पिता बोले- यह दोहरी खुशी का पल अवि के पिता Omprakash Goyal इसी विद्यालय के प्राचार्य हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए दोहरी खुशी लेकर आई है। स्कूल प्रबंधन ने मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति देने की भी घोषणा की है। वहीं सीसीएल के जीएम Girish Kumar Rathore ने विद्यालय और छात्रों को बधाई दी है।
रांची। JAC ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी करने के साथ ही टॉपर्स की पूरी लिस्ट भी घोषित कर दी है। इस साल आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस तीनों स्ट्रीम में छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आर्ट्स स्ट्रीम में ये रहे टॉपर्स आर्ट्स स्ट्रीम में छोटी कुमारी ने 478 अंक लाकर पहला स्थान हासिल किया। अंकित कुमार 474 अंकों के साथ दूसरे और अंशु कुमारी 473 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। कॉमर्स स्ट्रीम के टॉपर्स कॉमर्स में स्वेता प्रसाद ने 478 अंक प्राप्त कर टॉप किया। कृष कुमार बर्नवाल 472 अंकों के साथ दूसरे और प्रियंशी खत्री 471 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। साइंस स्ट्रीम में शानदार प्रदर्शन साइंस स्ट्रीम में राशिदा नाज ने 489 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। एमडी फैजान आलम 483 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि आकांक्षा कुमारी और सना आफरीन ने 481 अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया। ऐसे चेक करें रिजल्ट छात्र jacresults.com वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर और रोल कोड दर्ज कर रिजल्ट देख सकते हैं। इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से डिजिटल मार्कशीट भी डाउनलोड की जा सकती है।
रांची। राज्य के सरकारी शिक्षकों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। झारखंड में 80 हजार से अधिक शिक्षकों का मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन अब तक लंबित है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और अब मामला आंदोलन की ओर बढ़ता दिख रहा है। शिक्षक संघ का सरकार को अल्टीमेटम झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) ने सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर वेतन भुगतान नहीं हुआ, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। 24 जिलों में वेतन भुगतान पर असर संघ के अनुसार राज्य के सभी 24 जिलों में जिला कोषागार स्तर पर वेतन निकासी में अनियमितताओं की जांच चल रही है। इसी जांच के नाम पर सभी श्रेणी के शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। इसके अलावा फरवरी महीने का वेतन भी आयकर कटौती के कारण आंशिक रूप से ही मिल पाया, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। शिक्षकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव संघ का कहना है कि लगातार दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर वे शिक्षक जो अपने गृह क्षेत्र से दूर तैनात हैं, उन्हें रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसका असर उनके कार्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जांच और वेतन को अलग रखने की मांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू का कहना है कि अनियमितताओं की जांच जरूरी है, लेकिन इसका वेतन भुगतान से सीधा संबंध नहीं होना चाहिए। निर्दोष शिक्षकों का वेतन रोकना अनुचित है। वहीं महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने भी कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी शिक्षकों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। समाधान के लिए सुझाव JPSS ने मांग की है कि शिक्षकों से स्व-घोषणा पत्र लेकर एक सप्ताह के भीतर लंबित वेतन जारी किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट मानक प्रक्रिया (SOP) लागू की जाए। समाधान की ओर देख रही निगाहें अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो राज्य में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
रांची। झारखंड के करीब 38 हजार पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि ‘आकलन परीक्षा’ को झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के समतुल्य मान्यता नहीं दी जाएगी। सरकार ने इस फैसले के पीछे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला दिया है, जिसमें शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य बताया गया है। सरकार और संघ के बीच अहम बैठक राजधानी रांची में हुई इस बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और डॉ. इरफान अंसारी मौजूद रहे। शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने साफ किया कि बिना कानूनी अनुमति के आकलन परीक्षा को JTET के बराबर मानना संभव नहीं है। हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि इस मामले में अगले सप्ताह तक अंतिम कानूनी राय आने के बाद पुनर्विचार किया जा सकता है। कुछ मुद्दों पर मिली आंशिक राहत बैठक में पारा शिक्षकों के कुछ मुद्दों पर सकारात्मक पहल भी देखने को मिली। मृत शिक्षकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट को भेजा जाएगा। उम्र सीमा और सेवा बहाली पर बनी रही असहमति हालांकि, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया गया। वहीं, 967 बर्खास्त पारा शिक्षकों की सेवा बहाली पर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने संघ से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सके।इसके अलावा, वर्ष 2024 में मानदेय बढ़ोतरी के मुद्दे को भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया गया है।
धनबाद। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। Jharkhand Education Tribunal Act 2017 के तहत अब सभी निजी विद्यालयों को फीस, किताब और ड्रेस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। फीस और री-एडमिशन पर स्पष्ट नियम प्रशासन ने निर्देश दिया है कि स्कूल अपनी वार्षिक फीस का पूरा ब्योरा वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें। अभिभावकों पर एकमुश्त फीस जमा करने का दबाव नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें तिमाही आधार पर भुगतान की सुविधा दी जाएगी। साथ ही री-एडमिशन के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और डेवलपमेंट फीस का उद्देश्य स्पष्ट करना होगा। किताब और ड्रेस को लेकर सख्ती नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को नवंबर तक अगले सत्र की किताबों और ड्रेस की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। स्कूल ड्रेस पांच साल से पहले नहीं बदली जा सकेगी और निर्धारित किताबों में भी बार-बार बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल परिसर में किताब और ड्रेस बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे अभिभावकों को बाजार से सस्ती दर पर सामग्री खरीदने का विकल्प मिलेगा। उल्लंघन पर जुर्माना और जांच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन एक सप्ताह के भीतर करना होगा। इसके बाद पांच सदस्यीय टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर इसके साथ ही बीपीएल श्रेणी के छात्रों के लिए 25% सीट आरक्षित रखने, स्कूल बसों में GPS और CCTV अनिवार्य करने तथा चालकों का पुलिस सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन कदमों से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
रांची। झारखंड में भोजपुरी और मगही को लेकर भाषा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। इसके कारण जेटेट नियमावली भी फंस गई है। बता दें कि जेटेट परीक्षा का इंतजार वर्षों से लाखों छात्र कर रहे हैं। वहीं जल्द लेने को लेकर सरकार पर झारखंड हाईकोर्ट का भी दबाव सरकार पर बना हुआ है। 2 मंत्रियों के विरोध से फंसा मामला झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट की नियमावली को बीते बुधवार को कैबिनेट से पारित नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार बैठक में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने नियमावली में वर्ष 2012 के अनुरूप भाषाओं को शामिल करने की मांग की। पलामू में भोजपुरी व मगही और संताल परगना में अंगिका भाषा को शामिल करने की मांग की गई। दोनों मंत्री ने कैबिनेट में नियमावली में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग रखी। इसके बाद नियमावली पर फैसला टाल दिया गया। अब इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। अब जानिये क्या है पूरा मामला दरअसल, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली तैयार की गई है। नियमावली में जिलावार जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा का प्रावधान है। अभ्यर्थी के लिए इसमें से एक भाषा का चयन करना और परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है। परीक्षा की प्रक्रिया शुरू इधर, राज्य में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कैबिनेट की स्वीकृति के उम्मीद में झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा परीक्षा के लिए विज्ञापन भी जारी किया गया है। परीक्षा के लिए 28 अप्रैल से आवेदन जमा लिया जाना है। 10 साल से नहीं हुई परीक्षा बताते चलें कि राज्य में 10 वर्षों से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं हुई है। राज्य में लगभग चार लाख से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अगर 28 अप्रैल से पहले नियमावली को स्वीकृति नहीं मिली तो आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी।
रांची। रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ नेशन अवॉर्ड्स’ के तहत बीआईटी मेसरा को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। यह सम्मान संस्थान को छात्र विकास, सामुदायिक सहभागिता, नेतृत्व क्षमता निर्माण और कक्षा के बाहर मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से न सिर्फ संस्थान, बल्कि पूरे झारखंड की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई पहचान मिली है। कई शीर्ष शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से मिला सम्मान यह पुरस्कार वेटरन्स इंडिया द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें कई राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं का सहयोग रहा। इनमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA), भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) और शिक्षा प्रोत्साहन सोसाइटी ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। वेटरन्स इंडिया, जो पूर्व सैन्य अधिकारियों के नेतृत्व में काम करती है, उन संस्थानों को सम्मानित करती है जो युवाओं के सर्वांगीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। 1955 से तकनीकी शिक्षा में अग्रणी 1955 में स्थापित बीआईटी मेसरा देश के प्रमुख तकनीकी और शोध संस्थानों में गिना जाता है। संस्थान ने शुरुआत से ही इनोवेशन, रिसर्च और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खास बात यह है कि स्पेस इंजीनियरिंग और रॉकेट्री जैसे उन्नत कार्यक्रमों की शुरुआत में भी इस संस्थान की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि बीआईटी मेसरा को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान माना जाता है। एलुमनाई नेटवर्क भी बना ताकत संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. राजेश जैन के अनुसार, बीआईटी मेसरा का एलुमनाई नेटवर्क आज दुनिया भर में प्रभावशाली पदों पर कार्यरत है। संस्थान के पूर्व छात्र रोहित प्रसाद (अमेजन एलेक्सा एआई), वी. वैद्यनाथन (आईडीएफसी फर्स्ट बैंक), अमित चौधरी (लेंसकार्ट) और करण बजाज (व्हाइटहैट जूनियर) जैसे बड़े नामों में शामिल हैं। यह उपलब्धि बीआईटी मेसरा की शैक्षणिक गुणवत्ता और उसके व्यापक प्रभाव को साबित करती है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 1457 प्रारंभिक विद्यालयों को अब तक स्कूल डेवलपमेंट फंड नहीं मिला है, जिससे नए सत्र से पहले जरूरी तैयारियां प्रभावित हो गई हैं। नामांकन और उपस्थिति पर संकट फंड की कमी के कारण स्कूलों में एडमिशन रजिस्टर और अटेंडेंस रजिस्टर की खरीदारी नहीं हो सकी है। ऐसे में 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले शिक्षकों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि बच्चों का नामांकन और उपस्थिति कैसे दर्ज की जाएगी। एक लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर इस स्थिति का असर जिले के करीब एक लाख छात्रों पर पड़ सकता है। रजिस्टर के अभाव में न सिर्फ पढ़ाई की प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बाधित हो रही है। अन्य व्यवस्थाएं भी प्रभावित फंड नहीं मिलने से स्कूलों में स्वच्छता, स्टेशनरी और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इससे स्कूलों के संचालन में दिक्कतें बढ़ गई हैं। शिक्षकों में बढ़ी चिंता नया सत्र शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं होने से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर जल्द राशि नहीं मिली, तो नए सत्र की शुरुआत में भारी अव्यवस्था देखने को मिल सकती है। फिलहाल, स्कूल प्रबंधन और शिक्षक विभाग से जल्द फंड जारी करने की मांग कर रहे हैं, ताकि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा सकें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।