नई दिल्ली: रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में इस बार हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिलने वाला है। शो के नए प्रोमो में अभिनेत्री कंगना रनौत कंटेस्टेंट्स को उनकी परफॉर्मेंस और रवैये पर कड़ी फटकार लगाती नजर आ रही हैं। सबसे ज्यादा निशाने पर अभिनेता राम कपूर रहे, जिनसे कंगना ने तीखे सवाल पूछते हुए उनके व्यवहार पर नाराजगी जताई। प्रोमो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस एपिसोड को लेकर चर्चा तेज हो गई है और दर्शक पूरे एपिसोड का इंतजार कर रहे हैं। राम कपूर से कंगना का सीधा सवाल प्रोमो में कंगना रनौत, राम कपूर से कहती हैं कि अगर उन्हें लगता है कि वह इस शो से बड़े हैं और गेम को गंभीरता से नहीं लेना चाहते, तो फिर शो का हिस्सा बनने की जरूरत ही क्या थी। कंगना कहती हैं— "अगर आपको लगता है कि आप इस जेल के लिए बहुत बड़े हैं, तो फिर यहां आए क्यों? क्या सिर्फ अपना फूहड़पन दिखाने के लिए?" उनके इस सवाल के बाद माहौल और भी गर्म हो जाता है। राम कपूर ने क्या दिया जवाब? कंगना की बात का जवाब देते हुए राम कपूर कहते हैं— "जब सही समय आएगा, तब मैं भी अपना सच स्वीकार करूंगा और यहां मौजूद किसी भी व्यक्ति से बेहतर तरीके से करूंगा।" हालांकि, राम के इस जवाब से कंगना संतुष्ट नजर नहीं आतीं। कंगना ने दी नसीहत राम कपूर के जवाब के बाद कंगना उन्हें समझाते हुए कहती हैं— "अगर आप खुद में सुधार करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपना बचाव करना बंद कीजिए।" इस बातचीत ने प्रोमो को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। आकांक्षा चमोला और श्रेया कालरा के बीच भी बढ़ा विवाद प्रोमो में एक और बड़ा मोड़ तब आता है, जब शो के होस्ट रितेश देशमुख कंटेस्टेंट आकांक्षा चमोला को बताते हैं कि उनकी दो लाइफलाइन खत्म हो चुकी हैं। इसके बाद उन्हें दिखाया जाता है कि कंटेस्टेंट श्रेया कालरा ने बातचीत के दौरान आकांक्षा का एक निजी राज सार्वजनिक कर दिया, जिससे शो में नया विवाद खड़ा हो जाता है। पहले भी विवादों में रहे हैं राम कपूर 'लॉक अप 2' की शुरुआत से ही राम कपूर अपने बयानों और व्यवहार को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं। हाल ही के एक एपिसोड में उन्होंने शादी और रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि किसी रिश्ते में सच्चा प्यार हो, तो मुश्किल हालात में हुई गलतियों के बावजूद रिश्ता बचाया जा सकता है। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं। कई दर्शकों और कुछ कंटेस्टेंट्स ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा, शो के एक अन्य एपिसोड में होस्ट रितेश देशमुख के साथ उनकी बातचीत को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस देखने को मिली थी। क्या बढ़ेगी शो की टीआरपी? कंगना रनौत की एंट्री और उनके बेबाक अंदाज ने 'लॉक अप 2' को नई चर्चा दे दी है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि पूरे एपिसोड में राम कपूर और कंगना रनौत के बीच बातचीत किस मोड़ तक पहुंचती है और इसका शो की आगे की कहानी पर क्या असर पड़ता है।
बॉक्स ऑफिस पर इस हफ्ते कई फिल्मों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। जहां विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म 'हॉन्टेड 3डी: इकोज ऑफ द पास्ट' ने रिलीज के महज सात दिनों में अपना पूरा बजट निकाल लिया, वहीं इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' को शानदार वर्ड ऑफ माउथ का फायदा मिलता नजर आया। दूसरी ओर कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता' और मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर' पहले ही हफ्ते में बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करती दिखीं। 'हॉन्टेड 3डी' ने सात दिन में निकाली लागत करीब 15 करोड़ रुपये के बजट में बनी 'हॉन्टेड 3डी: इकोज ऑफ द पास्ट' ने पहले सप्ताह में 15.90 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है। मिमोह चक्रवर्ती और चेतना पांडे स्टारर इस हॉरर फिल्म को कम बजट का फायदा मिला और फिल्म अपनी लागत निकालने में सफल रही। पहले सप्ताह का कलेक्शन: ₹15.90 करोड़ 'मैं वापस आऊंगा' को मिला दर्शकों का प्यार इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी 'मैं वापस आऊंगा' को समीक्षकों और दर्शकों दोनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। वीकडेज में भी फिल्म की कमाई लगातार बढ़ती रही। सातवें दिन फिल्म ने 2.20 करोड़ रुपये की कमाई की, जो इसके ओपनिंग डे कलेक्शन से लगभग दोगुनी है। अब तक फिल्म का भारतीय नेट कलेक्शन 12.25 करोड़ रुपये और वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 21.85 करोड़ रुपये पहुंच चुका है। हालांकि फिल्म का बजट करीब 70 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, लेकिन मजबूत वर्ड ऑफ माउथ इसके लिए उम्मीदें बढ़ा रहा है। 'भारत भाग्य विधाता' को नहीं मिला दर्शकों का साथ कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। 60 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म पहले हफ्ते में सिर्फ 6.55 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर सकी। सातवें दिन फिल्म की कमाई मात्र 45 लाख रुपये रही, जिससे इसकी आगे की राह और मुश्किल होती नजर आ रही है। मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर' साबित हुई निराशाजनक मनोज बाजपेयी स्टारर 'गवर्नर' भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल नहीं रही। लगभग 25 करोड़ रुपये के बजट वाली इस फिल्म ने पहले सप्ताह में केवल 5.05 करोड़ रुपये का नेट कारोबार किया। सातवें दिन फिल्म ने महज 30 लाख रुपये कमाए, जिसके बाद इसे बॉक्स ऑफिस पर बड़ी असफलता माना जा रहा है। 'है जवानी तो इश्क होना है' की रफ्तार हुई धीमी वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर की रोमांटिक कॉमेडी 'है जवानी तो इश्क होना है' दूसरे सप्ताह में कमजोर पड़ती दिखाई दी। 14वें दिन फिल्म की कमाई पहली बार करोड़ों से गिरकर लाखों में पहुंच गई। फिल्म ने दो सप्ताह में भारत में 49.40 करोड़ रुपये का नेट और दुनियाभर में 72.67 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है। जबकि इसका बजट करीब 95 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। अब सबकी नजर 'कॉकटेल 2' पर 19 जून को रिलीज हुई शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर 'कॉकटेल 2' ने रिलीज से पहले शानदार एडवांस बुकिंग दर्ज की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने प्री-बुकिंग से ही 5.57 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है और पहले दिन 10 से 12 करोड़ रुपये की ओपनिंग की उम्मीद जताई जा रही है।
नेटफ्लिक्स पर दस्तक देने को तैयार 'लॉक अप 2' में इस बार कंगना रनौत की जगह फराह खान और रितेश देशमुख थामेंगे जेल की कमान। नई दिल्ली, एजेंसियां। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रियलिटी शो का क्रेज लगातार बढ़ रहा है और अब दर्शकों को एक नए और कड़े इम्तिहान का इंतजार है। 'लॉक अप' का दूसरा सीजन 27 जून, 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने वाला है। इस सीजन में न केवल मंच बदला है, बल्कि शो के फॉर्मेट में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं, जो इसे भारतीय रियलिटी शो के बाजार में एक अलग पहचान देने की कोशिश कर रहे हैं। इस सीजन की सबसे बड़ी चर्चा का विषय इसके नए 'जेलर' हैं। अब तक कंगना रनौत की कड़क आवाज से शो की लगाम संभाली जाती थी, लेकिन अब फराह खान और रितेश देशमुख दर्शकों को अपनी जुगलबंदी से लुभाते दिखेंगे। शो के प्रोमो में इन दोनों का नया अवतार काफी सख्त और चुनौतीपूर्ण लग रहा है, जिससे यह साफ होता है कि इस बार शो का मिजाज काफी अलग और इंटेंस होने वाला है। शो की थीम 'सच या सजा' रखी गई है, जो प्रतियोगियों के लिए मानसिक रूप से काफी दबाव वाली साबित हो सकती है। निर्माताओं ने इस बार 14 चर्चित हस्तियों को एक साथ लॉक करने का फैसला किया है। इनमें सुनीता आहूजा, शिवांगी जोशी, शिल्पा शिंदे, योगेश रावत, आकांक्षा चौधरी, प्रियंका शर्मा, विकास गुप्ता, रश्मि देसाई, पुनीत सुपरस्टार, अर्चना गौतम, उर्वशी ढोलकिया, प्रणीत मोरे, आसिम रियाज, कुशा कपिला और हर्षद चोपड़ा जैसे नाम शामिल हैं। यह शो केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि एक 'सर्वाइवल गेम' है। कंटेस्टेंट्स को न केवल टास्क जीतने होंगे, बल्कि कैमरे के सामने अपने जीवन के उन अंधेरे पहलुओं और गहरे रहस्यों को भी साझा करना होगा जिन्हें वे अब तक छुपाते आए हैं। उदाहरण के तौर पर, शिल्पा शिंदे जैसे सितारों का जुड़ना पहले ही शो को सुर्खियों में ला चुका है, जो उनके पिछले विवादों को देखते हुए एक बड़ा कार्ड माना जा रहा है। रियलिटी शो के जानकारों का मानना है कि 'सच या सजा' का यह नया फॉर्मेट दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ाएगा। लोग अब केवल नाच-गाने या झगड़ों को नहीं, बल्कि हस्तियों की सच्चाई और उनके असली व्यक्तित्व को करीब से देखना चाहते हैं। फराह खान और रितेश देशमुख की जोड़ी के साथ यह शो डिजिटल ओटीटी स्पेस में कितना बड़ा धमाका करता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म के पहले ही दिन दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर चर्चा तेज है और कई दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और कंगना रनौत के अभिनय की जमकर तारीफ की है। ‘दिल छू लेने वाली कहानी’ बता रहे दर्शक फिल्म देखने के बाद कई दर्शकों ने इसे एक प्रेरणादायक और भावनात्मक कहानी बताया है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म आम लोगों के संघर्ष, जिम्मेदारी और साहस को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर पेश करती है। कुछ दर्शकों ने इसे ऐसी कहानी बताया है जो लंबे समय तक दिल और दिमाग में बनी रहती है। कंगना के अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल कंगना रनौत के अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उन्हें ‘एक्टिंग क्वीन’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी और गहराई के साथ निभाया है। दर्शकों का मानना है कि कंगना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को प्रभावशाली तरीके से निभाने में माहिर हैं। ‘हीरो हमेशा वर्दी में नहीं होते’ फिल्म का निर्देशन और लेखन मनोज तापड़िया ने किया है। फिल्म में कंगना के साथ गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, आशा शेलार, प्रिया अर्जुन बेर्डे, जाहिद खान और सुहिता थट्टे भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि फिल्म यह संदेश देती है कि असली नायक हमेशा वर्दी में नहीं होते, बल्कि समाज में अपनी जिम्मेदारियां निभाने वाले साधारण लोग भी असाधारण काम कर सकते हैं। क्या यह कंगना की दमदार वापसी है? कंगना की पिछली फिल्म ‘इमरजेंसी’ को समीक्षकों की सराहना तो मिली थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। ऐसे में ‘भारत भाग्य विधाता’ को मिल रही शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया को कंगना के लिए एक मजबूत वापसी के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर टिकी हैं।
Kangana Ranaut एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म, बयान या राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनका एक वायरल वीडियो है। वीडियो में कंगना हरी चूड़ियां और मंगलसूत्र पहने नजर आ रही हैं, जिसके बाद इंटरनेट पर उनकी शादी को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। वायरल वीडियो में कंगना एक घर से बाहर निकलती दिखाई दे रही हैं। उनके साथ सिक्योरिटी टीम भी मौजूद थी। अभिनेत्री ने हल्के गुलाबी रंग का सलवार सूट पहन रखा था और बिना मीडिया से बात किए सीधे अपनी कार की ओर बढ़ गईं। हालांकि लोगों की नजर सबसे ज्यादा उनके गले में दिख रहे मंगलसूत्र और हाथों में पहनी हरी चूड़ियों पर गई। सोशल मीडिया पर उठे सवाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई फैंस कंगना के इस लुक को उनकी निजी जिंदगी से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या अभिनेत्री ने गुपचुप शादी कर ली है। एक यूजर ने कमेंट किया, “मंगलसूत्र देखकर तो लग रहा है शादी हो गई है।” वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, “शायद किसी फिल्म की शूटिंग का लुक होगा।” एक अन्य फैन ने मजाकिया अंदाज में कहा, “जो भी खुशकिस्मत इंसान है, भगवान दोनों को खुश रखे।” क्या नए प्रोजेक्ट का हिस्सा है यह लुक? हालांकि सोशल मीडिया पर शादी की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन कई लोग इसे कंगना के आने वाले प्रोजेक्ट से भी जोड़ रहे हैं। फैंस का मानना है कि अभिनेत्री इन दिनों अपनी चर्चित फिल्म Queen के सीक्वल की शूटिंग में व्यस्त हो सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म को फिलहाल “Queen Forever” नाम से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मंगलसूत्र और हरी चूड़ियों वाला यह लुक फिल्म के किसी किरदार का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल कंगना रनौत या उनकी टीम की ओर से शादी की खबरों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में फैंस अभी भी इस वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई जानने का इंतजार कर रहे हैं।
अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर लगभग 90 मिनट तक ऐसा आक्रामक और रणनीतिक भाषण दिया, जिसने पूरे सदन का माहौल बदल दिया। उनका यह संबोधन केवल एक राजनीतिक जवाब नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित सियासी हमला था, जिसमें उन्होंने आंकड़ों, इतिहास और तर्कों के जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की। खामोशी से शुरुआत, रणनीति की तैयारी भाषण देने से करीब दो घंटे पहले ही अमित शाह सदन में मौजूद थे। वे शांत बैठकर हर वक्ता की बात ध्यान से सुन रहे थे और अहम बिंदुओं को नोट कर रहे थे। इस दौरान विपक्ष की बेंच काफी हद तक खाली दिखीं- Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और Dimple Yadav जैसे बड़े चेहरे मौजूद नहीं थे। बहस के बीच भावनात्मक मोड़ बीजेपी सांसद Nishikant Dubey ने अपने परिवार की निजी त्रासदी का जिक्र किया, जिसमें उनके दादा की नक्सलियों द्वारा हत्या की बात सामने आई। इससे बहस का माहौल भावनात्मक हो गया। वहीं अभिनेत्री और सांसद Kangana Ranaut ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, जिससे सदन में हंगामा भी हुआ। 6:04 बजे शुरू हुआ ‘मुख्य प्रहार’ शाम 6:04 बजे अमित शाह बोलने के लिए खड़े हुए और सीधे इतिहास से शुरुआत की। उन्होंने Indira Gandhi पर नक्सल विचारधारा को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया, जिस पर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। ‘गरीबी नहीं, नक्सलवाद से फैली गरीबी’ अपने भाषण के दौरान शाह ने विपक्ष के तर्क को पलटते हुए कहा: “नक्सलवाद गरीबी की वजह से नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद की वजह से गरीबी फैली।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नक्सल हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी- “जो हथियार उठाएंगे, उन्हें समझाया जाएगा, नहीं मानेंगे तो बल का इस्तेमाल होगा।” तारीख, डेटा और रणनीतिक रोडमैप अमित शाह ने अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए कई अहम तारीखें पेश कीं: 20 अगस्त 2019: पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की नीति की शुरुआत 24 अगस्त 2024: भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य उन्होंने दावा किया कि सरकार की रणनीति और लगातार कार्रवाई से देश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। 90 मिनट में बदला पूरा माहौल करीब 7:25 बजे जब उनका भाषण खत्म हुआ, तब तक सदन में कई बार हंगामा और नारेबाजी हो चुकी थी। लेकिन यह साफ था कि अमित शाह ने बहस की दिशा तय कर दी थी। उनका यह भाषण एक राजनीतिक प्रदर्शन जैसा था-जो खामोशी से शुरू हुआ और आक्रामक अंदाज में खत्म हुआ।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।