रांची। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और 'कैप्टन कूल' के नाम से मशहूर महेंद्र सिंह धोनी के 45वें जन्मदिन पर मंगलवार को उनकी जन्मस्थली रांची में जश्न का माहौल देखने को मिला। राजधानी के रिंग रोड स्थित सिमलिया में बने धोनी के फार्महाउस के बाहर बड़ी संख्या में प्रशंसक जुटे और केक काटकर अपने चहेते क्रिकेटर का जन्मदिन मनाया। इस दौरान पूरे परिसर में 'हैप्पी बर्थडे माही' और 'धोनी-धोनी' के नारों की गूंज सुनाई दी। जन्मदिन समारोह में शामिल फैंस हाथों में धोनी की तस्वीरें, पोस्टर और भारतीय टीम की जर्सी लेकर पहुंचे थे। प्रशंसकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और महेंद्र सिंह धोनी के स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना की। कई युवा क्रिकेट प्रेमियों ने उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता को अपने जीवन की प्रेरणा बताया। धोनी के जबरा फैन सुबोध क्रिकेट अकादमी के खिलाड़ियों धोनी के जबरा फैन सुबोध अपने दोस्तों और क्रिकेट अकादमी के खिलाड़ियों के साथ विशेष रूप से इस आयोजन में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि वह कई वर्षों से लगातार माही का जन्मदिन इसी तरह मनाते आ रहे हैं। उनके अनुसार, यह दिन किसी त्योहार से कम नहीं होता। सुबोध ने कहा कि रांची के बेटे महेंद्र सिंह धोनी ने अपने खेल, सादगी और शांत नेतृत्व से पूरी दुनिया में भारत और झारखंड का नाम रोशन किया है। धोनी के फार्महाउस के बाहर फैंस का तांता फार्महाउस के बाहर मौजूद प्रशंसकों ने धोनी के क्रिकेट करियर की यादगार उपलब्धियों को भी याद किया। किसी ने 2007 टी-20 विश्व कप में भारत को दिलाई ऐतिहासिक जीत का जिक्र किया तो किसी ने 2011 वनडे विश्व कप फाइनल में लगाया गया उनका विजयी छक्का याद किया। फैंस का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी धोनी के प्रति लोगों का प्यार और सम्मान आज भी पहले जैसा ही कायम है। हालांकि, इस बार महेंद्र सिंह धोनी अपने रांची स्थित फार्महाउस में मौजूद नहीं थे, फिर भी उनके प्रशंसकों का उत्साह कम नहीं हुआ। रांचीवासियों के लिए धोनी सिर्फ एक महान क्रिकेटर नहीं, बल्कि शहर की पहचान और करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। यही वजह है कि हर साल उनका जन्मदिन पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाया जाता है।
रांची। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी मंगलवार यानी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। 7 जुलाई 1981 को झारखंड की राजधानी रांची में जन्मे धोनी का सफर भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर (Ticket Collector) की नौकरी से शुरू होकर विश्व क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल होने तक पहुंचा। शांत स्वभाव, बेहतरीन नेतृत्व क्षमता और दबाव में मैच फिनिश करने की कला के कारण उन्हें दुनिया भर में 'कैप्टन कूल' के नाम से जाना जाता है। उनके जन्मदिन पर देश-विदेश से फैंस, पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों ने शुभकामनाएं दीं। सीएसके ने खास अंदाज में दी बधाई धोनी की आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फ्रेंचाइजी ने लिखा कि धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत हैं जो हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। कप्तानी में भारत ने रचा इतिहास धोनी विश्व क्रिकेट के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने भारत को 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाया। उनकी कप्तानी में भारत दिसंबर 2009 में पहली बार टेस्ट क्रिकेट की नंबर-1 टीम भी बना। 2007 में युवा टीम के साथ टी20 विश्व कप जीतकर उन्होंने भारतीय क्रिकेट में नए युग की शुरुआत की, जबकि 2011 विश्व कप फाइनल में उनकी विजयी पारी आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार लम्हों में गिनी जाती है। टिकट कलेक्टर से 'कैप्टन कूल' बनने तक का सफर धोनी ने वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। शुरुआती दौर में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने पहचान दिलाई, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशरों में स्थापित किया। विकेटकीपर के रूप में उनकी तेज स्टंपिंग, सटीक निर्णय और शांत नेतृत्व शैली ने उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंचा दिया। 15 अगस्त 2020 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन आईपीएल में उनका प्रभाव आज भी कायम है। आईपीएल और कारोबार में भी सफलता धोनी की कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल खिताब जीता। आईपीएल में उन्होंने 278 से अधिक मैच खेलकर 5,400 से ज्यादा रन बनाए हैं। क्रिकेट के अलावा वे कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड एंबेसडर हैं और कई स्टार्टअप्स में निवेश भी कर चुके हैं। उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। रांची में उनका आलीशान फार्महाउस, होटल और लग्जरी कारों व बाइकों का शानदार कलेक्शन भी चर्चा में रहता है। आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा महेंद्र सिंह धोनी केवल एक सफल क्रिकेटर नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य, नेतृत्व और सादगी की मिसाल हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने की उनकी कहानी आज भी लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देती है। उनके नाम दर्ज उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेंगी।
तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। केरल में वर्ष 2026 का पहला निपाह वायरस संक्रमण का मामला सामने आया है। कोझिकोड जिले के 43 वर्षीय व्यक्ति की रिपोर्ट निपाह वायरस से संक्रमित पाई गई है। मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। मामले की पुष्टि होते ही राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की सतर्कता कार्रवाई जानकारी के अनुसार, मरीज को पहले हल्के बुखार की शिकायत के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे कोझिकोड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी है। अस्पताल के स्टाफ और अन्य संभावित संपर्कों को एहतियात के तौर पर क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमण का स्रोत चमगादड़ होने की आशंका प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और उसकी सफाई स्वयं की थी। अधिकारियों को आशंका है कि इसी दौरान वह संक्रमित हुआ। निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) के जरिए फैलता है और संक्रमित जानवरों या व्यक्तियों के संपर्क से भी फैल सकता है। संपर्क में आए लोगों पर निगरानी स्वास्थ्य विभाग मरीज का विस्तृत रूट मैप तैयार कर रहा है। उसके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान कर निगरानी में रखा जा रहा है। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। 2018 के बाद छठी बार फैला संक्रमण केरल में वर्ष 2018 के बाद यह छठी बार है जब निपाह वायरस का मामला सामने आया है। इससे पहले 2024 में भी दो संक्रमित मरीज मिले थे, जिनमें से एक की मौत हो गई थी। भारत में निपाह वायरस का पहला मामला 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दर्ज किया गया था। क्या है निपाह वायरस? निपाह वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद घातक संक्रमण है, जो मस्तिष्क और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसकी मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है।
रांची। झारखंड के लोहरदगा जिले में क्रिकेट को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। जिले के पूर्व रणजी क्रिकेटर आशीष कुमार ने अजयनाथ शाहदेव से मुलाकात कर जिले में क्रिकेट के विकास और युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक को लोहरदगा के क्रिकेट भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों को मिलेगा बेहतर मंच बैठक के दौरान लोहरदगा के ऐतिहासिक बलदेव साहू क्रिकेट टूर्नामेंट को और भव्य स्वरूप देने पर विचार-विमर्श किया गया। यह टूर्नामेंट हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है और जिले के क्रिकेट प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताओं का स्तर और सुविधाएं बेहतर बनाई जाएं। लोहरदगा प्रीमियर लीग को मिलेगा नया स्वरूप आशीष कुमार ने बताया कि आगामी लोहरदगा प्रीमियर लीग (LPL) को खास बनाने की तैयारी चल रही है। आयोजन समिति का उद्देश्य जिले के युवा खिलाड़ियों को ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें और बड़े स्तर तक पहुंचने का अवसर प्राप्त कर सकें। महेंद्र सिंह धोनी को दिया गया निमंत्रण इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि भारत के पूर्व कप्तान और विश्व क्रिकेट के दिग्गज Mahendra Singh Dhoni को लोहरदगा प्रीमियर लीग में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। यदि धोनी इस आयोजन में शामिल होते हैं, तो यह जिले के क्रिकेट इतिहास का यादगार पल साबित हो सकता है। उनकी मौजूदगी युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने के साथ-साथ टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा भी बढ़ाएगी। क्रिकेट को मिलेगी नई पहचान स्थानीय क्रिकेट जगत का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से लोहरदगा के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलेगा। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्रिकेट के विकास के लिए ऐसी पहल लगातार जारी रही तो लोहरदगा भविष्य में झारखंड के प्रमुख क्रिकेट केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
Mahendra Singh Dhoni को लेकर एक बार फिर संन्यास की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच Chennai Super Kings ने IPL 2026 में अपने घरेलू मैदान पर आखिरी मुकाबला खेला, जिसके बाद चेपॉक स्टेडियम का माहौल बेहद भावुक नजर आया। सीजन के 63वें मुकाबले में Sunrisers Hyderabad ने चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हराया। इस हार के बाद CSK की प्लेऑफ की राह बेहद मुश्किल हो गई है, लेकिन मैच के बाद जो दृश्य देखने को मिला, उसने फैंस को भावुक कर दिया। टीम के साथ मैदान का चक्कर लगाते दिखे धोनी मैच खत्म होने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स की पूरी टीम ने चेपॉक स्टेडियम में “लैप ऑफ ऑनर” लिया। खिलाड़ी मैदान के चारों ओर घूमते हुए फैंस का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को पहले ही मैच के बाद रुकने की जानकारी दे दी गई थी। ऐसे में कई फैंस को उम्मीद थी कि धोनी अपने भविष्य को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, धोनी का टीम के साथ मैदान का चक्कर लगाना और फैंस का जोरदार समर्थन इस पल को बेहद खास बना गया। चेपॉक में दिखा इमोशनल माहौल लैप ऑफ ऑनर के दौरान पूरा M. A. Chidambaram Stadium “धोनी-धोनी” के नारों से गूंज उठा। फैंस लगातार अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। धोनी इस सीजन चोट की वजह से मैदान पर एक भी मुकाबला नहीं खेल पाए हैं। जुलाई में वह 45 साल के हो जाएंगे, ऐसे में उनके अगले सीजन खेलने को लेकर अब भी संशय बना हुआ है। सुरेश रैना से गले मिले धोनी मैच के बाद एक और खास पल देखने को मिला जब धोनी ने अपने पुराने साथी Suresh Raina को गले लगाया। रैना लंबे समय तक CSK का अहम हिस्सा रहे हैं और इस मुकाबले में कमेंट्री की भूमिका निभा रहे थे। दोनों दिग्गज खिलाड़ियों की यह मुलाकात सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई। पीली जर्सी में दिखे धोनी, गूंज उठा स्टेडियम इससे पहले चेन्नई सुपर किंग्स की पारी खत्म होने के बाद टीम का फोटोशूट हुआ। इस दौरान महेंद्र सिंह धोनी पीली CSK जर्सी पहनकर मैदान पर पहुंचे। धोनी को देखते ही पूरा स्टेडियम अपनी सीटों से खड़ा हो गया और जोरदार तालियों व नारों से उनका स्वागत किया गया। दिलचस्प बात यह रही कि इस सीजन मैच डे पर धोनी पहली बार स्टेडियम में नजर आए। वह अब तक टीम के मुकाबलों के दौरान मैदान में नहीं दिखे थे। क्या यह धोनी का आखिरी IPL सीजन है? फिलहाल महेंद्र सिंह धोनी ने अपने IPL भविष्य को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन चेपॉक में उनके सम्मान में उमड़ा भावनाओं का सैलाब इस बात का संकेत जरूर दे रहा है कि फैंस हर पल को खास बनाकर जीना चाहते हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या धोनी अगले सीजन भी पीली जर्सी में नजर आएंगे या यह चेपॉक में उनका आखिरी भावुक पल था।
आईपीएल 2026 में Chennai Super Kings की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। लगातार तीन हार के बाद टीम प्वाइंट्स टेबल में 10वें स्थान पर पहुंच गई है। इस खराब शुरुआत ने प्लेऑफ की राह मुश्किल जरूर कर दी है, लेकिन अभी उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। शुरुआती झटकों से दबाव में CSK सीएसके को इस सीजन में क्रमशः Rajasthan Royals, Punjab Kings और Royal Challengers Bangalore के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। लगातार हार ने टीम के आत्मविश्वास और रणनीति दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्लेऑफ में पहुंचने का गणित आईपीएल में आमतौर पर प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए 16 से 18 अंकों की जरूरत होती है। CSK ने 3 मैच खेल लिए हैं और सभी हारे हैं अब टीम के पास 11 मैच बचे हैं सीधे क्वालिफाई करने के लिए कम से कम 8 मैच जीतना अनिवार्य होगा यानी अब हर मैच “करो या मरो” जैसा बन गया है। नेट रन रेट भी बनेगा निर्णायक CSK का मौजूदा नेट रन रेट (NRR) -2.517 है, जो काफी खराब स्थिति में है। सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़ी जीत भी जरूरी होगी अन्य टीमों जैसे Kolkata Knight Riders, Gujarat Titans और Lucknow Super Giants से बेहतर NRR बनाना होगा आगे का शेड्यूल: मुश्किल लेकिन मौका भी CSK का अगला मुकाबला Delhi Capitals के खिलाफ 11 अप्रैल को होगा, इसके बाद 14 अप्रैल को KKR से भिड़ंत होगी। यह मुकाबले टीम के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकते हैं। क्या इतिहास दोहराएगी CSK? CSK IPL इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक रही है और कई बार मुश्किल परिस्थितियों से वापसी कर चुकी है। लेकिन इस बार चुनौती पहले से कहीं ज्यादा कठिन नजर आ रही है। अगर टीम अपनी रणनीति, बल्लेबाजी और गेंदबाजी में सुधार करती है, तो प्लेऑफ की उम्मीदें अभी भी जिंदा रह सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।