Mallikarjun Kharge

Kharge Letter to PM Modi
परिसीमन विवाद पर खड़गे का प्रधानमंत्री मोदी को पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। खड़गे ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिसीमन जैसा महत्वपूर्ण विषय राष्ट्रीय सहमति से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।   क्या है खड़गे की मांग?   अपने पत्र में खड़गे ने कहा कि परिसीमन का असर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी राज्यों और राजनीतिक दलों की राय लेना आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने का आग्रह किया है।   दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का भी किया जिक्र   खड़गे ने पत्र में दक्षिण भारत के कई राज्यों द्वारा जताई गई आशंकाओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया संघीय ढांचे और राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जानी चाहिए।   मानसून सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल   संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आए इस पत्र को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल पहले से ही इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख की मांग कर रहे हैं। ऐसे में खड़गे की पहल के बाद परिसीमन का मुद्दा संसद और राजनीतिक गलियारों में प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है।   सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार   फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से खड़गे के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर क्या फैसला लेती है।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
Rahul Gandhi
विदेश से लौटते ही एक्शन में राहुल गांधी, पंजाब कांग्रेस विवाद पर खड़गे के साथ की अहम बैठक

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता राहुल गांधी विदेश दौरे से लौटते ही पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर अहम बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में पंजाब कांग्रेस में चल रहे विवाद और संगठन को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई।   पंजाब कांग्रेस की कलह पर हुई चर्चा   सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच चल रहे मतभेद और संगठनात्मक चुनौतियों पर मंथन किया गया। पार्टी नेतृत्व अब राज्य में गुटबाजी को कम करने और संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।   भूपेश बघेल देंगे स्थिति पर रिपोर्ट   बैठक के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब कांग्रेस की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगे संगठनात्मक बदलावों पर फैसला ले सकती है।   'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की भी तैयारी   राहुल गांधी की वापसी के बाद कांग्रेस उनके आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी सक्रिय है। उत्तराखंड के देहरादून में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज है। कार्यक्रम स्थल को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है।   कांग्रेस में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां   राहुल गांधी की वापसी के बाद पार्टी के भीतर बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व आने वाले समय में संगठन, राज्यों की राजनीति और जन मुद्दों को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses a large gathering at Melbourne's Marvel Stadium during the 'Melbourne Meets Modi' event, as organizers reject allegations that attendees were paid to participate.
मेलबर्न इवेंट के आयोजकों का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- भीड़ किराए की नहीं, अपनी इच्छा से पहुंचे थे 30 हजार लोग

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे दिए गए थे। आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने और आरोप वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं को भेजा पत्र कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया था। पत्र में कहा गया कि सिडनी से चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था सामुदायिक सहयोग से की गई थी और इसका खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने। क्या था कांग्रेस का आरोप? कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं, जिनमें पवन खेड़ा भी शामिल थे, ने आरोप लगाया था कि यह एक "मैनेज्ड इवेंट" था। उनका दावा था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया और उनके लिए विशेष चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया था। आयोजकों ने आरोपों को बताया निराधार कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल अमित करंथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार और निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपने यात्रा, रहने और अन्य खर्च स्वयं वहन किए। कुछ लोगों की यात्रा व्यवस्था स्थानीय भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों और सामुदायिक सहयोग से हुई थी। 30 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा आयोजकों के अनुसार, 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी लोगों को संबोधित किया। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों तथा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान का उत्सव था। माफी की मांग आयोजकों ने अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं से मांग की है कि वे भीड़ को "पैसे देकर जुटाई गई" बताने वाले आरोप वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों से कार्यक्रम में शामिल हजारों भारतीय मूल के लोगों और स्वयंसेवकों का अपमान हुआ है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
National Stakeholder Consultation
दिल्ली में मौजूद थे वित्त मंत्री, लेकिन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन से रहे गायब

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दिल्ली दौरे पर होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया। हालांकि वित्त मंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी और न ही इससे संबंधित कोई पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो दिनों से रांची से बाहर हैं, इसलिए कार्यक्रम की जानकारी भी उन्हें नहीं मिल सकी।   वहीं, सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस कोटे से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और डॉ. इरफान अंसारी शामिल हुए। दूसरी ओर, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में वरिष्ठ मंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।   कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाकात सरकारी कार्यक्रम से दूर रहने के बावजूद वित्त मंत्री ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान संगठन और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय, विकास योजनाओं की प्रगति तथा चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादों को लागू करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार और संगठन मिलकर विकास कार्यों को गति दे रहे हैं तथा जनहित से जुड़े वादों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।   विभागीय पत्राचार पर भी उठाया सवाल वित्त मंत्री ने हाल ही में सरकारी वाहन लौटाने को लेकर विभाग के संयुक्त सचिव पंकज सिंह द्वारा भेजे गए पत्र पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने इस संबंध में विभागीय सचिव से स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अब तक उन्हें कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में विभागीय स्तर पर समन्वय और संवाद को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Muzaffarpur BDO Suicide Case
मुजफ्फरपुर BDO सुसाइड केस: कथित प्रेम संबंध और मानसि प्रताड़ना के बीच पत्नी की मौत, जांच तेज

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आए चर्चित बीडीओ सुसाइड केस ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जाले प्रखंड के बीडीओ मनोज कुमार की पत्नी अमृता कुमारी की जहरीला पदार्थ खाने से मौत के मामले में पुलिस कथित प्रेम संबंध, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों की जांच कर रही है। मामले में बेगूसराय में तैनात महिला दारोगा अनु कुमारी का नाम भी सामने आया है। पुलिस दोनों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।   2020 में शुरू हुआ कथित संबंध, शादी के बाद बढ़ा विवाद पुलिस जांच के अनुसार, मनोज कुमार और अनु कुमारी की मुलाकात वर्ष 2020 में मुजफ्फरपुर की एक कोचिंग संस्था में हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच कथित रूप से नजदीकियां बढ़ीं। इसी दौरान मनोज कुमार ने दिसंबर 2022 में अमृता कुमारी से विवाह किया। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद अमृता को पति के कथित संबंधों की जानकारी मिली, जिसके बाद परिवार में लगातार तनाव बना रहा।   वीडियो कॉल और डिजिटल सबूत जांच के केंद्र में मृतका के परिजनों का आरोप है कि घटना वाले दिन बीडीओ और महिला दारोगा ने अमृता से वीडियो कॉल पर बात की और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोप है कि लगातार तनाव और अपमान के कारण अमृता ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।   परिजनों ने पुलिस को एक पेन ड्राइव भी सौंपी है, जिसमें कथित चैट, तस्वीरें और वीडियो कॉल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Salman Ali Khurshid
खामेनेई के अंतिम संस्कार में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करेंगे सलमान खुर्शीद, तेहरान जाएंगे वरिष्ठ नेता

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ईरान में आयोजित अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। गुरुवार को उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह कांग्रेस की ओर से तेहरान जाकर अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके बयान के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए अपना आधिकारिक प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है।   कई भारतीय नेताओं को मिला निमंत्रण मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह, इमरान अंसारी सहित कई प्रमुख शिया धर्मगुरुओं को भी आमंत्रित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं को भी निमंत्रण भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।   4 जुलाई से शुरू होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे। श्रद्धांजलि समारोह राजधानी तेहरान के अलावा कोम और मशहद जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में भी आयोजित किए जाएंगे। 7 जुलाई को कोम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जबकि 9 जुलाई को मशहद में अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासन ने इन कार्यक्रमों के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।   भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से अहम आयोजन सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भारत के शीर्ष नेतृत्व को भी इस राजकीय समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया था। इसे दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयातुल्ला अली खामेनेई ने करीब 36 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया। उनके निधन के बाद आयोजित होने वाला यह राजकीय अंतिम संस्कार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व रखता है, जिसमें विभिन्न देशों के राजनीतिक और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Mallikarjun Kharge
मल्लिकार्जुन खड़गे दूसरी बार राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त, पुनर्निर्वाचन के बाद मिली जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को राज्यसभा में दूसरी बार नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) के रूप में मान्यता दे दी गई है। कर्नाटक से राज्यसभा के लिए पुनर्निर्वाचित होने और सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद उन्हें फिर से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।   राज्यसभा सचिवालय ने जारी किया आदेश   राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि खड़गे का पिछला कार्यकाल 25 जून 2026 को समाप्त होने के कारण वे 26 जून से नेता प्रतिपक्ष के पद पर नहीं थे। लेकिन राज्यसभा के लिए दोबारा निर्वाचित होने के बाद, 26 जून 2026 से प्रभावी रूप से सभापति ने उन्हें पुनः नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान कर दी है। यह मान्यता Leader of Opposition in Parliament Act, 1977 के तहत दी गई है।   कर्नाटक से दोबारा बने राज्यसभा सांसद   मल्लिकार्जुन खड़गे हाल ही में कर्नाटक से दूसरी बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए है। सोमवार को उन्होंने संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने इसे अपने लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी बताया।   संसद में विपक्ष का नेतृत्व जारी रहेगा   खड़गे वर्ष 2021 से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। दोबारा नियुक्ति के साथ वे आगामी संसद सत्र में भी विपक्ष की ओर से सरकार को विभिन्न राष्ट्रीय और नीतिगत मुद्दों पर घेरने की रणनीति का नेतृत्व करेंगे।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Rahul Gandhi receives birthday wishes from PM Narendra Modi and Congress leaders on his 56th birthday.
PM Modi Wishes Rahul Gandhi on Birthday: पीएम मोदी ने राहुल गांधी को दी जन्मदिन की बधाई, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की

  नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार (19 जून, 2026) को 56 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने लिखा, "लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।" 56 साल के हुए राहुल गांधी राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र हैं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राहुल गांधी पिछले 22 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया प्रेरणास्रोत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने X पर पोस्ट कर राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि संविधान के आदर्शों के प्रति राहुल गांधी की अटूट निष्ठा और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। खरगे ने कहा कि समावेशिता, सामाजिक न्याय, सद्भाव और करुणा की कांग्रेस पार्टी की परंपरा राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच निरंतर संवाद और सत्ता के सामने निर्भीक होकर सच बोलने के कारण राहुल गांधी ने समाज के कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज को मजबूती से उठाया है। पवन खेड़ा ने राहुल गांधी के संघर्ष को सराहा कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बहुत कम नेताओं ने लंबे समय तक इतनी तीखी आलोचना और लगातार सार्वजनिक जांच-परख का सामना किया है। पवन खेड़ा ने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में अधिकांश लोग सार्वजनिक जीवन से पीछे हट जाते हैं, लेकिन राहुल गांधी को कमजोर करने का हर प्रयास उनके संकल्प को और मजबूत करता गया, उनकी राजनीति को और परिपक्व बनाता गया तथा जनता से उनके संबंध को और गहरा करता गया।" राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके लंबे एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Congress's Strategic Meeting
TMC में हलचल के बीच कांग्रेस की बड़ी रणनीतिक बैठक, विपक्षी एकजुटता पर हुआ मंथन

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय इंदिरा भवन में गुरुवार को कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने की। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, महासचिव Priyanka Gandhi Vadra, संगठन महासचिव K. C. Venugopal, जयराम रमेश समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य प्रभारी शामिल हुए।   आपात बैठक क्यों बुलाई गई? यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों, विपक्षी दलों में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित अंदरूनी खींचतान के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि बैठक में कुछ टीएमसी सांसदों के अलग रुख अपनाने और विपक्षी एकजुटता पर पड़ने वाले संभावित असर पर भी चर्चा हुई।   भाजपा के अभियान का जवाब देने की तैयारी बैठक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे प्रचार अभियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड से जुड़े राजनीतिक विमर्श का जवाब देने की रणनीति पर भी विचार किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने जनता के बीच अपनी राजनीतिक और वैचारिक बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया।   INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर फोकस बैठक में विपक्षी गठबंधन INDIA को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय दलों के साथ समन्वय बढ़ाने तथा दल-बदल की बढ़ती घटनाओं पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया। गौरतलब है कि हाल ही में INDIA गठबंधन की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि सभी सहयोगी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है। इसके अलावा विपक्ष ने मतदाता सूची, चुनावी अनियमितताओं, NEET और CBSE से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
INDIA alliance leaders meet in New Delhi to discuss opposition strategy and key national issues.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से चुनावी पारदर्शिता तक: केंद्र सरकार को घेरने के लिए INDIA गठबंधन की नई रणनीति

  नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बैठक में 23 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि गठबंधन पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करेगा और इन विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। NEET और CBSE विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बैठक में NEET-UG परीक्षा और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। INDIA गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल बैठक में चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इस संबंध में INDIA गठबंधन ने निर्णय लिया कि वह Surya Kant को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करेगा। बेरोजगारी और महंगाई पर सर्वदलीय बैठक की मांग विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। गठबंधन का कहना है कि इन मुद्दों का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है और इन पर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता है। मानसून सत्र के लिए विपक्ष की तैयारी बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी रणनीति बनाई गई। विपक्षी दलों ने तय किया कि सत्र के दौरान समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिदिन नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में बैठक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा गठबंधन की नियमित बैठकों का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है। निर्णय लिया गया कि INDIA गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता बैठक में कांग्रेस की ओर से Sonia Gandhi, Rahul Gandhi और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। इसके अलावा Mamata Banerjee, Akhilesh Yadav, Tejashwi Yadav, Supriya Sule और Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वहीं Omar Abdullah, Mehbooba Mufti, D Raja और Dipankar Bhattacharya ने भी बैठक में भाग लिया। DMK और AAP ने बनाई दूरी बैठक में Dravida Munnetra Kazhagam और Aam Aadmi Party शामिल नहीं हुईं। AAP पहले ही सार्वजनिक रूप से INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि DMK ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। भाजपा के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ विपक्षी एकता पर जोर बैठक के दौरान नेताओं ने देश में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और विपक्षी दलों के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी सहयोगी दलों से एकजुटता बनाए रखने और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा संघर्ष जारी रखने की अपील की। गठबंधन नेताओं का मानना है कि आगामी राजनीतिक और संसदीय चुनौतियों का सामना करने के लिए विपक्षी एकता को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Senior opposition leaders gather in New Delhi for INDIA alliance strategy meeting ahead of upcoming elections.
मोदी सरकार को घेरने की तैयारी, कल दिल्ली में जुटेंगे INDIA गठबंधन के 23 दल

  नई दिल्ली: विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की सोमवार को राजधानी दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। लोकसभा चुनाव के बाद यह गठबंधन की पहली बड़ी बैठक होगी, जिसमें 23 राजनीतिक दलों के शामिल होने की पुष्टि की गई है। बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और आगामी चुनावों के लिए विपक्षी एकजुटता को मजबूत करना बताया जा रहा है। बैठक नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने कहा कि विचारधारात्मक और क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सभी दल साझा राजनीतिक उद्देश्यों के साथ बैठक में भाग ले रहे हैं। कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना बैठक में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee, Abhishek Banerjee, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav, राजद नेता Tejashwi Yadav तथा शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। साझा रणनीति और चुनावी तैयारियों पर फोकस सूत्रों के मुताबिक बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा होगी। विपक्षी दल भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं। बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों सहित कई राष्ट्रीय विषयों को लेकर संयुक्त अभियान चलाने पर भी विचार हो सकता है। गठबंधन के भीतर मतभेद भी रहेंगे चर्चा में बैठक में विपक्षी दलों के बीच हाल के दिनों में उभरे मतभेदों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से कांग्रेस और वाम दलों के बीच कुछ राज्यों में चुनावी रणनीति को लेकर सामने आए विवादों पर बातचीत हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि सहयोगी दल चाहते हैं कि गठबंधन के भीतर संवाद बढ़े और सार्वजनिक स्तर पर होने वाले आरोप-प्रत्यारोप से बचा जाए। कुछ प्रमुख दल रह सकते हैं दूर रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सहयोगी दल इस बैठक में शामिल नहीं हो सकते। कांग्रेस का कहना है कि जो दल बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे, वे भी गठबंधन के व्यापक राजनीतिक उद्देश्यों के समर्थन में बने हुए हैं। बीजेपी ने उठाए विपक्षी एकता पर सवाल बैठक से पहले भाजपा ने INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं और साझा नेतृत्व को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। विपक्षी दलों का दावा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मुद्दों पर वे एकजुट हैं तथा बैठक का उद्देश्य इसी एकता को और मजबूत करना है। लोकसभा चुनाव के बाद पहली बड़ी राजनीतिक बैठक INDIA गठबंधन की पिछली प्रमुख बैठक लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण के मतदान से पहले हुई थी। इसके बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर विपक्षी दल एक मंच पर जुट रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि इससे आने वाले वर्षों में विपक्ष की रणनीति और दिशा का संकेत मिल सकता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Congress president Mallikarjun Kharge criticizes LPG price hike, questioning government over rising household expenses.
एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी पर खरगे का केंद्र पर हमला, बीजेपी नेताओं से पूछा- अब सिलेंडर लेकर सड़क पर क्यों नहीं बैठते?

  नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महंगाई के मुद्दे पर घेरा और कई सवाल उठाए। रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इसी बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। महंगाई पर बीजेपी की चुप्पी पर उठाए सवाल मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान महंगाई के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं। उन्होंने पूछा कि जो नेता पहले गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर बैठते थे, वे आज बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। खरगे ने कहा कि घरेलू एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है और इससे मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। प्रधानमंत्री के दावों पर उठाया सवाल कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें पश्चिम एशिया संकट के दौरान कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं, तो फिर घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि क्यों हो रही है। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उज्ज्वला योजना को लेकर भी घेरा खरगे ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लाभार्थी परिवार उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बावजूद नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों परिवार गैस सिलेंडर दोबारा भरवाने में सक्षम नहीं हैं, तो यह बढ़ती कीमतों और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का संकेत है। कांग्रेस ने उठाए तीन प्रमुख सवाल अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से तीन प्रमुख सवाल पूछे— पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति के दावों के बाद भी गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? बड़ी संख्या में उज्ज्वला लाभार्थी सिलेंडर रिफिल क्यों नहीं करा पा रहे हैं? महंगाई के मुद्दे पर पहले विरोध करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं? चार महीनों में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर एलपीजी कीमतों में यह वृद्धि पिछले चार महीनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। मार्च 2026 में भी घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। ताजा बढ़ोतरी के बाद चार महीनों के भीतर घरेलू सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बढ़ती गैस कीमतें आम लोगों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों का असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Domestic LPG cylinders stacked at a distribution center after latest cooking gas price hike in India.
घरेलू गैस सिलेंडर फिर महंगा, विपक्ष का केंद्र सरकार पर हमला; महंगाई को लेकर बढ़ी सियासी गर्मी

  नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। केंद्र सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 7 जून से लागू हो गई हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले मार्च 2026 में प्रति सिलेंडर 60 रुपये का इजाफा किया गया था। इस तरह चार महीनों के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने साधा निशाना कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लगातार बढ़ रही गैस की कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रही है और इसका सीधा असर मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त इंतजाम किए थे, तो घरेलू उपभोक्ताओं को बार-बार मूल्य वृद्धि का सामना क्यों करना पड़ रहा है। आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई और स्थिर आय के बीच घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि परिवारों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। शरद पवार ने भी जताई नाराजगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर सीधे आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। पवार ने दावा किया कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है और जनता चुनावों में अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है। भाजपा पर विपक्ष का दोहरा रवैया अपनाने का आरोप महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा महंगाई के मुद्दे पर सरकारों को घेरती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं। रसोई बजट पर असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस बढ़ोतरी को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और आयात लागत में बदलाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Mallikarjun Kharge files Rajya Sabha nomination in Bengaluru with Rahul Gandhi and Congress leaders
राज्यसभा चुनाव: मल्लिकार्जुन खरगे ने किया नामांकन, कांग्रेस की एकजुटता पर दिया जोर

  बेंगलुरु: आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले इस चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ पवन खेड़ा और मंसूर अली खान शामिल हैं। राहुल गांधी की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने कर्नाटक विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन विधानसभा सचिव एम.के. विशालाक्षी को सौंपा। ‘कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के लिए एकजुट रहें’ नामांकन के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों और नेताओं ने एकमत से उनके नाम का समर्थन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी पूरी तरह एकजुट रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव 18 जून को होना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत एकता के साथ मैदान में उतरना होगा। 25 जून को समाप्त हो रहा है खरगे का कार्यकाल मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। इसी कारण पार्टी ने उन्हें एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने घोषित किए तीन उम्मीदवार कांग्रेस ने कर्नाटक से राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारे हैं। खरगे के अलावा पार्टी ने पवन खेड़ा, जो कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख हैं, और मंसूर अली खान, जो राष्ट्रीय सचिव हैं, को भी उम्मीदवार बनाया है। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है। पवन खेड़ा और मंसूर अली खान अपने नामांकन बाद में दाखिल करेंगे।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Congress leaders announce seven Rajya Sabha candidates for elections across five Indian states.
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 7 उम्मीदवारों का किया ऐलान, खरगे और पवन खेड़ा को टिकट

  राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार (4 जून) को अपने सात उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। कर्नाटक से खरगे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान मैदान में कांग्रेस ने कर्नाटक से पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को एक बार फिर राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वे वर्तमान में भी कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य हैं और उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के मीडिया विभाग प्रमुख Pawan Khera को भी कर्नाटक से पहली बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। तीसरे उम्मीदवार के रूप में मंसूर अली खान को टिकट दिया गया है। मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन उम्मीदवार मध्य प्रदेश से कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। वह वर्तमान में पार्टी की तेलंगाना प्रभारी हैं। इस सीट पर दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन्होंने पहले ही राज्यसभा न जाने की इच्छा जताई थी। राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से भी नाम घोषित राजस्थान से मौजूदा राज्यसभा सदस्य नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है। तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती को टिकट मिला है, जो AICC के प्रोफेशनल कांग्रेस और डेटा विभाग के प्रमुख हैं। झारखंड से राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया गया है। 18 जून को होगा राज्यसभा चुनाव राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव 18 जून को होंगे। इन सीटों पर चुनाव 10 राज्यों में कराया जाएगा, जहां सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच समाप्त हो रहा है। नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Karnataka CM Siddaramaiah amid resignation buzz and Congress leadership talks in Delhi
कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक उलटफेर संभव, 28 मई को इस्तीफा दे सकते हैं सिद्धारमैया

कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की लंबी बैठक और उसके बाद राहुल गांधी व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अलग मुलाकात ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को नया बल दे दिया है। कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर किसी भी बदलाव से इनकार किया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई को बड़ा फैसला ले सकते हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, वे इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं। दिल्ली में हुई हाईलेवल बैठक से बढ़ी चर्चाएं मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ने राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, रणदीप सिंह सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे। बैठक के बाद राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच अलग से वन-टू-वन बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता हस्तांतरण के विकल्पों पर चर्चा की गई। सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने का भी विकल्प सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने पर विचार कर रहा है। इसके तहत उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा भेजे जाने का विकल्प भी चर्चा में है। अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अगले दौर की बातचीत के बाद ही कांग्रेस हाईकमान कोई स्पष्ट रोडमैप तय करेगा। 28 मई को हो सकता है बड़ा ऐलान मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई को अपने बेंगलुरु आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। इसी दौरान वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दे सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को संभालने के लिए कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को बेंगलुरु भेजा जा सकता है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि डीके शिवकुमार फिलहाल दिल्ली में हैं और जल्द बेंगलुरु लौट सकते हैं। डीके शिवकुमार की दावेदारी फिर चर्चा में कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से ही यह चर्चा रही कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर कोई समझौता हुआ था। पार्टी ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। अब सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद शिवकुमार समर्थक खुलकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार होंगे। कांग्रेस ने बदलाव की खबरों को बताया अफवाह इन तमाम अटकलों के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई बैठक सिर्फ राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी। वेणुगोपाल ने कहा, “कर्नाटक में सब ऑल इज वेल है। जो भी चर्चाएं चल रही हैं, वे केवल अटकलें हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों की घोषणा अन्य राज्यों के साथ की जाएगी। बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना कर्नाटक की राजनीतिक हलचल पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को घेरा है। बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अंदरूनी खींचतान में उलझी हुई है और राज्य में विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर कई दावेदार हैं और पार्टी नेतृत्व इस विवाद का समाधान निकालने में असफल साबित हो रहा है। कांग्रेस के लिए आसान नहीं फैसला राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए सिद्धारमैया को हटाने का फैसला आसान नहीं होगा। वे फिलहाल कांग्रेस शासित राज्यों में प्रमुख ओबीसी चेहरा माने जाते हैं और AHINDA सामाजिक समीकरण पर उनकी मजबूत पकड़ है। कांग्रेस नेतृत्व किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहता है, जिससे राज्य में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो। दिल्ली में डटे रहे मंत्री और विधायक दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान कर्नाटक के कई मंत्री, विधायक और सिद्धारमैया समर्थक लगातार सक्रिय रहे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने समर्थक नेताओं के साथ अलग बैठकें भी कीं। अब सभी की नजर 28 मई पर टिकी हुई है, जब सिद्धारमैया अपने अगले कदम को लेकर स्थिति साफ कर सकते हैं।  

surbhi मई 27, 2026 0
Karnataka leaders Siddaramaiah, DK Shivakumar and Congress leadership amid CM change speculation
कर्नाटक में सीएम बदलने की अटकलें तेज, वेणुगोपाल बोले- ‘ऑल इज वेल’

कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने साफ कहा है कि राज्य में “सब ऑल इज वेल” है और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान की बैठक केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर आयोजित की गई थी। मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चल रही बाकी चर्चाएं महज अटकलें हैं। खरगे और राहुल गांधी के साथ हुई अहम बैठक दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में कर्नाटक को लेकर अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कर्नाटक प्रभारी और केसी वेणुगोपाल शामिल हुए। बैठक के बाद वेणुगोपाल ने कहा कि पूरी चर्चा आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के उम्मीदवारों को लेकर केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की घोषणा अन्य राज्यों के साथ की जाएगी और बैठक में इसके अलावा कोई दूसरा मुद्दा नहीं उठाया गया। तीन घंटे चली बैठक, कई राजनीतिक संकेत कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में हुई यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली। माना जा रहा है कि बैठक में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों और विधान परिषद चुनावों को लेकर रणनीति बनाई गई। कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें कांग्रेस के पास तीन सीट जीतने की मजबूत स्थिति है, जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और उनके दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। डीके सुरेश को राज्यसभा भेज सकती है कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश को राज्यसभा भेज सकती है। इसके अलावा पार्टी किसी महिला उम्मीदवार या पिछड़े वर्ग के नेता को भी मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। विधान परिषद की सात रिक्त सीटों में से कांग्रेस को चार सीटें मिलने की संभावना मानी जा रही है। तीन साल पूरे होते ही फिर तेज हुई सीएम बदलने की चर्चा कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के 20 मई को तीन साल पूरे होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर कोई फार्मूला तय हुआ था। कांग्रेस नेतृत्व ने कभी सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी समझौते की पुष्टि नहीं की है। शिवकुमार समर्थक कर रहे नेतृत्व परिवर्तन की मांग डीके शिवकुमार के समर्थक लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि अब उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उनका दावा है कि चुनाव में पार्टी की जीत में शिवकुमार की बड़ी भूमिका रही थी। वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बार-बार यह कह चुके हैं कि वे अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है। शिवकुमार बोले- हाईकमान का फैसला मानेंगे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अब तक संयमित रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि वे कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का पालन करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समय आने पर सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा। कर्नाटक कांग्रेस में जारी इन चर्चाओं के बीच अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले और राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची पर टिकी हुई है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Karnataka CM Siddaramaiah and Deputy CM D.K. Shivakumar amid leadership change speculation in Congress
क्या बदलने वाला है कर्नाटक का सीएम? दिल्ली बुलावे के बाद तेज हुई अटकलें

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री Siddaramaiah और डिप्टी सीएम D. K. Shivakumar को दिल्ली बुलाया है, जिसके बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। हालांकि कांग्रेस ने इसे सामान्य राजनीतिक बैठक बताया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का दावा है कि अंदरखाने सत्ता परिवर्तन को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है। कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि यह बैठक आगामी राज्यसभा चुनाव और विधान परिषद चुनाव को लेकर रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई है। लेकिन दोनों बड़े नेताओं के अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी हाईकमान अब मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान को खत्म करना चाहता है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के सामने एक नया फॉर्मूला रख सकता है। सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने की चर्चा पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार, कांग्रेस सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का प्रस्ताव दे सकती है। इसके बदले उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को राज्य कैबिनेट में जगह देने पर भी विचार हो सकता है। इस पूरे मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। खरगे, वेणुगोपाल और सुरजेवाला की क्या भूमिका? सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, संगठन महासचिव K. C. Venugopal और कर्नाटक प्रभारी Randeep Singh Surjewala नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों को संतुलित करना जरूरी है। क्या डीके शिवकुमार बनेंगे अगले सीएम? 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। माना जाता है कि सत्ता गठन के समय ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर सहमति बनी थी, जिसके तहत बाद में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता था। शिवकुमार को कांग्रेस का मजबूत संगठनकर्ता और संकटमोचक माना जाता है। चुनावी रणनीति से लेकर पार्टी फंडिंग और विधायकों को एकजुट रखने तक उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में अब यह चर्चा तेज है कि पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंप सकती है। राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है पूरा गणित जून में कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सीट भी शामिल है। कांग्रेस को इनमें से तीन सीटें जीतने की उम्मीद है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व सत्ता और संगठन दोनों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों और कांग्रेस हाईकमान के अगले फैसले पर टिकी हुई है। अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।  

surbhi मई 26, 2026 0
Congress leaders Siddaramaiah, D K Shivakumar and Mallikarjun Kharge during meeting over Karnataka leadership issue
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा फिर तेज, खरगे ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ की बैठक

Karnataka में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने दोनों नेताओं के साथ अहम बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, खरगे ने सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ Thiruvananthapuram से Bengaluru लौटने के बाद राज्य के ऊर्जा मंत्री K. J. George के आवास पर चर्चा की। सत्ता संघर्ष की अटकलें फिर तेज कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता साझाकरण और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। पिछले साल नवंबर में कांग्रेस सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा रही है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर अंदरखाने खींचतान जारी है। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार, केरल में नई कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से लौटने के बाद नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक हुई। इस दौरान राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट रुख चाहते हैं। कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल मधुगिरी से कांग्रेस विधायक K. N. Rajanna ने भी संकेत दिया कि नेतृत्व के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा हुई होगी। उन्होंने कहा, “खरगे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और शिवकुमार सभी केरल में मौजूद थे, तो फिर वहीं चर्चा क्यों नहीं हुई?” राहुल गांधी ने भी मांगी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक Rahul Gandhi ने राज्य की राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों को लेकर वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.जे. जॉर्ज भी शामिल हैं, से फीडबैक मांगा था। कांग्रेस के अंदर अब पार्टी महासचिव K. C. Venugopal के अवकाश से लौटने का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली में भी अहम बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Congress leaders meet in Delhi as suspense continues over Kerala chief minister candidate
केरल में मुख्यमंत्री चेहरे पर सस्पेंस बरकरार, कांग्रेस ने फिर टाला ऐलान

कांग्रेस अब भी नहीं तय कर पाई मुख्यमंत्री का नाम Kerala में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा एक बार फिर टाल दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी गुरुवार को अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। हालांकि बुधवार को संकेत मिले थे कि दिन में ही फैसला सामने आ सकता है, लेकिन देर रात तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। दिल्ली से होगा अंतिम फैसला केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा था कि मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और अंतिम घोषणा दिल्ली से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और नेता हाईकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत बनी देरी की वजह? रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को Sonia Gandhi का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में रूटीन हेल्थ चेकअप हुआ था। माना जा रहा है कि इसी कारण निर्णय प्रक्रिया में देरी हुई। बाद में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी कि सोनिया गांधी जांच के बाद घर लौट चुकी हैं। तीन नेताओं के बीच फंसा मामला मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल तीन बड़े नेताओं के बीच मानी जा रही है – KC Venugopal, VD Satheesan और Ramesh Chennithala। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान लगातार इन नेताओं के साथ बैठकें कर रहा है ताकि अंतिम नाम पर सहमति बन सके। राहुल गांधी और खड़गे की अहम बैठक Rahul Gandhi ने मंगलवार को इन तीनों नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद बुधवार को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ करीब 40 मिनट तक चर्चा की। इस बैठक को मुख्यमंत्री चयन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी के अंदर गुटबाजी भी चर्चा में सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। केरल के कई स्थानीय नेता वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थन में बताए जा रहे हैं, जबकि केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अधिकांश कांग्रेस विधायकों ने वेणुगोपाल के नाम का समर्थन किया है। IUML का झुकाव सतीशन की ओर यूडीएफ की सहयोगी पार्टी Indian Union Muslim League ने कथित तौर पर वीडी सतीशन का समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि सतीशन को जनता के बीच व्यापक समर्थन हासिल है। विधानसभा चुनाव में UDF की बड़ी जीत हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले United Democratic Front ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। इसके साथ ही Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार का दशकभर का शासन खत्म हो गया।  

surbhi मई 14, 2026 0
Congress leaders discussing Kerala chief minister selection after UDF’s massive assembly election victory in Kerala.
किसे मिलेगी कुर्सी? केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन तेज

दक्षिण भारत की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा Indian National Congress के अंदर चल रही मुख्यमंत्री पद की दौड़ को लेकर है। Kerala में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिलने के बावजूद अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। चुनाव परिणाम आए एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। दिल्ली में होगी अहम बैठक कांग्रेस हाईकमान ने मंगलवार (12 मई) को केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया है। पूर्व KPCC अध्यक्ष K. Muraleedharan और V. M. Sudheeran को भी आलाकमान की ओर से बुलावा भेजा गया है। सुधीरन ने कहा कि उन्हें AICC से अचानक कॉल आना थोड़ा हैरान करने वाला था, लेकिन उन्होंने तुरंत दिल्ली जाने की तैयारी कर ली। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व उनसे राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात, संभावित नेतृत्व और संगठनात्मक संतुलन को लेकर राय ले सकता है। 140 में से 102 सीटें जीतकर सत्ता में लौटा UDF 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज की। यह जीत केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। हालांकि भारी बहुमत के बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पाई है। खरगे आवास पर हुई थी बड़ी बैठक शनिवार (9 मई) को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के आवास पर एक अहम बैठक हुई थी। इसमें Rahul Gandhi, केरल प्रभारी Deepa Dasmunsi, KPCC अध्यक्ष Sunny Joseph, संगठन महासचिव K. C. Venugopal, वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala और V. D. Satheesan शामिल हुए थे। बैठक में सरकार गठन, कैबिनेट संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों पर चर्चा हुई, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। सीएम पद की दौड़ में कौन-कौन? चुनाव नतीजों के बाद से कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है। फिलहाल तीन बड़े नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं— V. D. Satheesan Ramesh Chennithala K. C. Venugopal सूत्रों के मुताबिक, तीनों खेमे दिल्ली में अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। पार्टी नेतृत्व जातीय और क्षेत्रीय संतुलन, संगठन पर पकड़ और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहता है। क्या है कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती? कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मुख्यमंत्री ऐसा चुना जाए जो सरकार और संगठन दोनों को साथ लेकर चल सके। पार्टी हाईकमान नहीं चाहता कि नेतृत्व चयन को लेकर किसी तरह की अंदरूनी नाराजगी सामने आए, क्योंकि इससे नई सरकार की शुरुआत प्रभावित हो सकती है। अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी है, जहां से केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर तस्वीर साफ हो सकती है।  

surbhi मई 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0