Karnataka में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने दोनों नेताओं के साथ अहम बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, खरगे ने सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ Thiruvananthapuram से Bengaluru लौटने के बाद राज्य के ऊर्जा मंत्री K. J. George के आवास पर चर्चा की। सत्ता संघर्ष की अटकलें फिर तेज कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता साझाकरण और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। पिछले साल नवंबर में कांग्रेस सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा रही है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर अंदरखाने खींचतान जारी है। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार, केरल में नई कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से लौटने के बाद नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक हुई। इस दौरान राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट रुख चाहते हैं। कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल मधुगिरी से कांग्रेस विधायक K. N. Rajanna ने भी संकेत दिया कि नेतृत्व के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा हुई होगी। उन्होंने कहा, “खरगे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और शिवकुमार सभी केरल में मौजूद थे, तो फिर वहीं चर्चा क्यों नहीं हुई?” राहुल गांधी ने भी मांगी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक Rahul Gandhi ने राज्य की राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों को लेकर वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.जे. जॉर्ज भी शामिल हैं, से फीडबैक मांगा था। कांग्रेस के अंदर अब पार्टी महासचिव K. C. Venugopal के अवकाश से लौटने का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली में भी अहम बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।
कांग्रेस अब भी नहीं तय कर पाई मुख्यमंत्री का नाम Kerala में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा एक बार फिर टाल दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी गुरुवार को अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। हालांकि बुधवार को संकेत मिले थे कि दिन में ही फैसला सामने आ सकता है, लेकिन देर रात तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। दिल्ली से होगा अंतिम फैसला केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा था कि मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और अंतिम घोषणा दिल्ली से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और नेता हाईकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत बनी देरी की वजह? रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को Sonia Gandhi का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में रूटीन हेल्थ चेकअप हुआ था। माना जा रहा है कि इसी कारण निर्णय प्रक्रिया में देरी हुई। बाद में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी कि सोनिया गांधी जांच के बाद घर लौट चुकी हैं। तीन नेताओं के बीच फंसा मामला मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल तीन बड़े नेताओं के बीच मानी जा रही है – KC Venugopal, VD Satheesan और Ramesh Chennithala। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान लगातार इन नेताओं के साथ बैठकें कर रहा है ताकि अंतिम नाम पर सहमति बन सके। राहुल गांधी और खड़गे की अहम बैठक Rahul Gandhi ने मंगलवार को इन तीनों नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद बुधवार को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ करीब 40 मिनट तक चर्चा की। इस बैठक को मुख्यमंत्री चयन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी के अंदर गुटबाजी भी चर्चा में सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। केरल के कई स्थानीय नेता वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थन में बताए जा रहे हैं, जबकि केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अधिकांश कांग्रेस विधायकों ने वेणुगोपाल के नाम का समर्थन किया है। IUML का झुकाव सतीशन की ओर यूडीएफ की सहयोगी पार्टी Indian Union Muslim League ने कथित तौर पर वीडी सतीशन का समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि सतीशन को जनता के बीच व्यापक समर्थन हासिल है। विधानसभा चुनाव में UDF की बड़ी जीत हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले United Democratic Front ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। इसके साथ ही Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार का दशकभर का शासन खत्म हो गया।
दक्षिण भारत की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा Indian National Congress के अंदर चल रही मुख्यमंत्री पद की दौड़ को लेकर है। Kerala में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिलने के बावजूद अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। चुनाव परिणाम आए एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक लगातार बैठकों और मंथन का दौर जारी है। दिल्ली में होगी अहम बैठक कांग्रेस हाईकमान ने मंगलवार (12 मई) को केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया है। पूर्व KPCC अध्यक्ष K. Muraleedharan और V. M. Sudheeran को भी आलाकमान की ओर से बुलावा भेजा गया है। सुधीरन ने कहा कि उन्हें AICC से अचानक कॉल आना थोड़ा हैरान करने वाला था, लेकिन उन्होंने तुरंत दिल्ली जाने की तैयारी कर ली। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व उनसे राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात, संभावित नेतृत्व और संगठनात्मक संतुलन को लेकर राय ले सकता है। 140 में से 102 सीटें जीतकर सत्ता में लौटा UDF 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज की। यह जीत केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। हालांकि भारी बहुमत के बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पाई है। खरगे आवास पर हुई थी बड़ी बैठक शनिवार (9 मई) को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के आवास पर एक अहम बैठक हुई थी। इसमें Rahul Gandhi, केरल प्रभारी Deepa Dasmunsi, KPCC अध्यक्ष Sunny Joseph, संगठन महासचिव K. C. Venugopal, वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala और V. D. Satheesan शामिल हुए थे। बैठक में सरकार गठन, कैबिनेट संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों पर चर्चा हुई, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। सीएम पद की दौड़ में कौन-कौन? चुनाव नतीजों के बाद से कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है। फिलहाल तीन बड़े नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं— V. D. Satheesan Ramesh Chennithala K. C. Venugopal सूत्रों के मुताबिक, तीनों खेमे दिल्ली में अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। पार्टी नेतृत्व जातीय और क्षेत्रीय संतुलन, संगठन पर पकड़ और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहता है। क्या है कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती? कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मुख्यमंत्री ऐसा चुना जाए जो सरकार और संगठन दोनों को साथ लेकर चल सके। पार्टी हाईकमान नहीं चाहता कि नेतृत्व चयन को लेकर किसी तरह की अंदरूनी नाराजगी सामने आए, क्योंकि इससे नई सरकार की शुरुआत प्रभावित हो सकती है। अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी है, जहां से केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर तस्वीर साफ हो सकती है।
केरल विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा. गुरुवार (7 मई) को कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक के बाद यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला अब दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान करेगा. खरगे को मिला सीएम चुनने का अधिकार पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस विधायक दल ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को अगले मुख्यमंत्री के चयन का अधिकार दिया गया. यह प्रस्ताव केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने रखा, जबकि मौजूदा सीएलपी नेता V. D. Satheesan ने इसका समर्थन किया. इसके बाद एआईसीसी पर्यवेक्षक Mukul Wasnik और Ajay Maken ने नवनिर्वाचित विधायकों और सहयोगी दलों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर उनकी राय जानी. कौन-कौन हैं मुख्यमंत्री पद की दौड़ में? फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए तीन बड़े नाम चर्चा में हैं: V. D. Satheesan Ramesh Chennithala K. C. Venugopal इन नेताओं के नामों पर पार्टी के भीतर मंथन जारी है. कांग्रेस नेतृत्व सभी विधायकों और सहयोगी दलों की राय लेकर संतुलित फैसला करना चाहता है. बंद कमरे में हुई अहम बैठक बैठक में कांग्रेस की केरल प्रभारी Deepa Dasmunsi, राज्य के वरिष्ठ नेता और नवनिर्वाचित विधायक मौजूद रहे. बाद में पर्यवेक्षकों ने यूडीएफ के सहयोगी दलों, जिनमें Indian Union Muslim League और Kerala Congress शामिल हैं, के नेताओं से भी चर्चा की. दिल्ली में होगी अंतिम मुहर बैठक के बाद मुकुल वासनिक ने कहा कि केरल में कांग्रेस की जीत ऐतिहासिक है और विधायकों ने पूरी प्रक्रिया नेतृत्व पर छोड़ दी है. वहीं अजय माकन ने बताया कि सभी विधायकों से व्यक्तिगत बातचीत कर रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे दिल्ली में पार्टी नेतृत्व को सौंपा जाएगा. केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी कहा कि पर्यवेक्षक अब दिल्ली जाकर आलाकमान को पूरी जानकारी देंगे, जिसके बाद मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी. जल्द हो सकता है नाम का ऐलान राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि अगले 24 से 48 घंटे के भीतर कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला ले सकता है. ऐसे में अब सबकी नजर दिल्ली पर टिक गई है, जहां केरल की नई सरकार का चेहरा तय होगा.
चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को प्रधानमंत्री Narendra Modi पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि यह बयान आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन प्रतीत होता है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, खरगे ने तमिलनाडु चुनाव प्रचार के अंतिम दिन चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी को “आतंकवादी” कह दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और मामले ने तूल पकड़ लिया। चुनाव आयोग ने क्या कहा? Election Commission of India ने अपने नोटिस में कहा कि प्रथम दृष्टया खरगे का बयान आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। आयोग ने उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग एकतरफा कार्रवाई कर सकता है। खरगे की सफाई विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय पीएम को “आतंकवादी” कहना नहीं था, बल्कि वह यह कहना चाहते थे कि प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक व्यवस्था को “डराने-धमकाने” का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को निशाना बना रही है। बीजेपी ने की सख्त कार्रवाई की मांग इस मुद्दे पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju, Nirmala Sitharaman और Arjun Ram Meghwal के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर खरगे के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की। बीजेपी ने इस बयान को “अत्यंत आपत्तिजनक” बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। कांग्रेस का पलटवार वहीं कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि आयोग विपक्ष की शिकायतों पर धीमी कार्रवाई करता है, जबकि बीजेपी से जुड़े मामलों में तेजी दिखाता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आयोग के रवैये को “संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ” बताया। चुनावी माहौल में बढ़ा विवाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच यह विवाद और गहरा गया है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरमा गया है।
पहले चरण में मतदान जारी, कई जगह EVM ने रोकी रफ्तार West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में गुरुवार सुबह मतदान शुरू होते ही कई इलाकों से Electronic Voting Machine में खराबी की खबरें सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद, नंदीग्राम, कूचबिहार, मालदा और सिलीगुड़ी समेत कई स्थानों पर ईवीएम में तकनीकी दिक्कत के कारण मतदान प्रभावित हुआ और कुछ बूथों पर देरी भी हुई। पहले चरण में 18.76% वोटिंग, मिदनापुर सबसे आगे Election Commission of India के आंकड़ों के अनुसार सुबह 9 बजे तक पहले चरण में 18.76% मतदान दर्ज किया गया। पश्चिम मिदनापुर में सबसे ज्यादा 20.51% मतदान हुआ, जबकि मालदा में सबसे कम 16.96% वोटिंग दर्ज की गई। मुर्शिदाबाद में बमबाजी, कई घायल मतदान के बीच Murshidabad के नवदा इलाके में अज्ञात लोगों द्वारा देसी बम फेंके जाने की घटना सामने आई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। 152 सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है। चुनाव आयोग ने करीब 2.5 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती की है ताकि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जा सके। कुछ जगहों पर मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें भी देखी गईं, जबकि कई जगह “पिंक बूथ” भी बनाए गए हैं, जिन्हें पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित किया जा रहा है। दिग्गज नेताओं की अपील, सियासी बयानबाजी तेज बीजेपी नेता Suvendu Adhikari और अन्य नेताओं ने शांतिपूर्ण मतदान की अपील की है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। 2 चरणों में हो रहे चुनाव, 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी, जिसके बाद राज्य की नई सरकार का फैसला होगा।
चुनाव प्रचार थमा, अब मतदान की बारी Election Commission of India के निर्देशानुसार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान समाप्त हो चुका है। दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल काफी गर्म है और सभी दल अंतिम रणनीति में जुटे हुए हैं। खड़गे के बयान से मचा सियासी तूफान कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने तमिलनाडु की एक रैली में प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “आतंकी” कह दिया। इस बयान के सामने आते ही देशभर में विवाद छिड़ गया और राजनीतिक माहौल और गरमा गया। हालांकि, बाद में खड़गे ने सफाई दी कि उनका आशय शाब्दिक रूप से यह नहीं था, बल्कि उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष और संस्थाओं पर दबाव बनाते हैं। अमित शाह का पलटवार, कांग्रेस पर साधा निशाना केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने खड़गे के बयान को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा से कांग्रेस ने राजनीतिक मर्यादाओं को पार कर दिया है और यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। शाह ने यह भी कहा कि इस तरह के बयान प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण में लगभग 3.60 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनजर 2,450 केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात की गई हैं, जबकि 8,000 से अधिक बूथों को संवेदनशील घोषित किया गया है। ED की छापेमारी से बढ़ा चुनावी तापमान चुनाव से पहले Enforcement Directorate (ED) की पश्चिम बंगाल में एक दर्जन से अधिक छापेमारी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई चल रही जांच के तहत की गई है, जबकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास बताया है। तमिलनाडु में NDA बनाम DMK गठबंधन की टक्कर तमिलनाडु में मुकाबला काफी दिलचस्प है, जहां National Democratic Alliance (NDA) विपक्षी गढ़ में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं DMK गठबंधन अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इन नतीजों से तय होगा कि किस दल को जनता ने शासन की जिम्मेदारी सौंपी है।
राज्यसभा के मनोनीत सदस्य Harivansh Narayan Singh को शुक्रवार (17 अप्रैल) को निर्विरोध राज्यसभा का उपसभापति चुना गया। यह उनका इस पद पर तीसरा कार्यकाल है। खास बात यह है कि पहली बार किसी मनोनीत सदस्य को इस पद के लिए चुना गया है। तीसरी बार संभाली जिम्मेदारी हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था, जिसके बाद यह पद खाली था। इसके बाद राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उन्होंने 10 अप्रैल को सदस्य के रूप में शपथ ली और अब 17 अप्रैल को उपसभापति के रूप में निर्वाचित हुए। कैसे हुआ चुनाव केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता J. P. Nadda ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन S Phangnon Konyak ने किया। निर्विरोध चुनाव के बाद उन्हें आधिकारिक रूप से राज्यसभा का उपसभापति घोषित किया गया। पीएम मोदी और खरगे ने दी बधाई प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हरिवंश को बधाई देते हुए उनके अनुभव और कार्यशैली की सराहना की। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर हरिवंश का करियर पत्रकारिता से शुरू हुआ था और बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उनकी कार्यशैली और संसदीय अनुभव को देखते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार इस अहम पद की जिम्मेदारी दी गई है। हरिवंश का लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुना जाना उनके अनुभव और स्वीकार्यता को दर्शाता है। सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से मिली बधाई इस बात का संकेत है कि सदन में उनकी भूमिका संतुलित और प्रभावी मानी जाती है।
नई दिल्ली: आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है, जिसमें केंद्र सरकार बड़े संवैधानिक बदलावों से जुड़े अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इस सत्र के दौरान महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है। संसद के बुलेटिन के अनुसार, सरकार गुरुवार को लोकसभा में तीन प्रमुख विधेयक पेश करेगी— संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 परिसीमन विधेयक, 2026 केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 इनमें से पहले दो विधेयक कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, जबकि तीसरा विधेयक गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सदन में रखा जाएगा। इन विधेयकों पर चर्चा के लिए लोकसभा में कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जो शुक्रवार तक जारी रह सकती है। महिला आरक्षण पर सरकार का नया कदम केंद्र सरकार ने पहले 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का फैसला किया था। हालांकि, उस समय इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की बात कही गई थी। अब सरकार इस प्रक्रिया को पहले लागू करने के लिए नया संशोधन प्रस्ताव लेकर आई है। परिसीमन विधेयक पर बढ़ा विवाद परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने इस विधेयक के खिलाफ लोकसभा में नोटिस दिया है। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस विधेयक की प्रति विरोध दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि यह कानून दक्षिण भारतीय राज्यों, खासकर तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। विपक्ष की रणनीति बैठक संसद के विशेष सत्र के दौरान विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक होगी, जिसमें सरकार के प्रस्तावों के खिलाफ रणनीति तैयार की जाएगी। 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा सत्र यह विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा। सरकार का उद्देश्य इस दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन को मंजूरी दिलाना है, जबकि विपक्ष इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बता रहा है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। Narendra Modi, Mallikarjun Kharge और Kiren Rijiju के बीच चिट्ठियों का दौर इस बहस को और गर्म कर रहा है। आखिर खरगे ने PM मोदी को क्यों लिखा पत्र? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में सरकार पर कई आरोप लगाए: सरकार जल्दबाजी में संशोधन लागू करना चाहती है चुनाव से पहले इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्ष से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया खरगे का कहना है कि इतने अहम कानून पर व्यापक चर्चा जरूरी है, न कि जल्दबाजी में फैसला। रिजिजू का जवाब–“अभी सही समय है” इन आरोपों पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा: 16 मार्च 2026 से ही सभी दलों से बातचीत शुरू हो चुकी थी कई पार्टियों–जैसे Samajwadi Party, DMK, Trinamool Congress–से चर्चा की गई कई दलों ने समर्थन भी जताया रिजिजू ने जोर देकर कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता है। संसद सत्र क्यों बुलाया गया? सरकार ने 16–18 अप्रैल 2026 तक संसद सत्र बुलाया है, ताकि इस कानून में जरूरी संशोधन कर उसे लागू किया जा सके। सरकार इसे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। मुद्दा क्या है? नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) पहले ही 2023 में संसद से पास हो चुका है। अब सरकार चाहती है कि इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया तेज की जाए, जबकि विपक्ष टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने पहले चरण के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय नेता शामिल हैं, जो राज्य में व्यापक चुनाव प्रचार करेंगे। चेहरे जो करेंगे प्रचार कांग्रेस की स्टार लिस्ट में शामिल प्रमुख नाम: सोनिया गांधी राहुल गांधी प्रियंका गांधी वाड्रा मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष) सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल CM) इसके अलावा कई दिग्गज नेता भी मैदान में उतरेंगे: के.सी. वेणुगोपाल शशि थरूर अशोक गहलोत सलमान खुर्शीद रणदीप सुरजेवाला कन्हैया कुमार मोहम्मद अजहरुद्दीन बंगाल के स्थानीय नेताओं को भी अहम भूमिका राज्य कांग्रेस के नेता भी प्रचार में सक्रिय रहेंगे: अधीर रंजन चौधरी दीपा दासमुंशी प्रदीप भट्टाचार्य शुभंकर सरकार (प्रदेश अध्यक्ष) ईशा खान चौधरी चुनाव की तारीखें पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई कुल सीटें: 294 कांग्रेस की रणनीति कांग्रेस नेता के मुताबिक: इस बार पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ रही है लक्ष्य है कि पहले चरण में सभी सीटों पर सीधे मतदाताओं तक पहुंच बनाई जाए राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी से पार्टी मजबूत मुकाबले की कोशिश में है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। केरल में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके बयान पर बीजेपी ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे “अपमानजनक” बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। क्या कहा था खड़गे ने? दरअसल, 5 अप्रैल को केरल में एक रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि केरल के लोग “समझदार और शिक्षित” हैं, इसलिए उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “गुजरात या अन्य जगहों के अशिक्षित लोगों को मूर्ख बना सकते हैं”, लेकिन केरल के लोगों को नहीं। उनके इस बयान को बीजेपी ने गुजरात और उत्तर भारत के लोगों का अपमान बताया है। बीजेपी का तीखा पलटवार बीजेपी ने खड़गे के बयान को लेकर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। पार्टी के नेताओं ने इसे “फूट डालो और राज करो” की राजनीति का उदाहरण बताया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने पर जनता का अपमान करने लगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के अन्य नेता भी इस तरह की टिप्पणी से सहमत हैं। वहीं, बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केरल के लोग सच में शिक्षित और समझदार हैं, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों ने उनके साथ न्याय नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में जनता कांग्रेस को करारा जवाब देगी। “विभाजनकारी राजनीति” का आरोप बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस पर क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पार्टी लंबे समय से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच विभाजन की राजनीति करती रही है। चुनावी माहौल में बढ़ा विवाद केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में खड़गे के बयान ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। चुनाव से ठीक पहले इस तरह के बयान से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं खड़गे के इस बयान के बाद कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी पहले से ही अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने विदाई भाषण में जहां 54 वर्षों के लंबे संसदीय अनुभव को साझा किया, वहीं माहौल को हल्का बनाने वाला एक बयान भी दे दिया, जिस पर सदन में मुस्कान छा गई-यहां तक कि नरेंद्र मोदी भी हंसी नहीं रोक सके। खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत भावुक अंदाज़ में करते हुए कहा कि विदाई का पल हमेशा कठिन होता है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति वास्तव में “रिटायर” नहीं होता। उन्होंने माना कि दशकों के अनुभव के बाद भी सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। हल्के अंदाज़ में सियासी टिप्पणी अपने भाषण के दौरान खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र करते हुए चुटकी ली- “देवगौड़ा जी ने मोहब्बत हमसे की और शादी मोदी जी के साथ कर ली।” उनकी इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे और माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया। साथियों के योगदान का जिक्र खड़गे ने कई वरिष्ठ सांसदों के योगदान को याद किया। उन्होंने रामदास अठावले की खास शैली और कविताओं का उल्लेख किया, वहीं शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी जैसे साथियों की तैयारी और सक्रियता की सराहना की। संसदीय मर्यादा पर जोर अपने भाषण के अंत में खड़गे ने सदन में सहयोग और शालीनता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी समझ ही संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, जबकि दूरी और टकराव से गलतफहमियां बढ़ती हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा के 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस मौके पर खड़गे ने उम्मीद जताई कि जाने वाले सदस्य आगे भी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान देते रहेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।