Middle East conflict

Israeli and Lebanese flags with diplomatic officials after the announcement of a US-mediated peace framework aimed at restoring security along the Israel-Lebanon border.
इजरायल-लेबनान के बीच शांति की नई पहल, अमेरिका ने कराया समझौता; हिज्बुल्लाह ने दी गृहयुद्ध जैसी स्थिति की चेतावनी

  यरुशलम/बेरूत: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच एक महत्वपूर्ण फ्रेमवर्क समझौता तैयार किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बहाल करना है। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हिज्बुल्लाह ने इसका कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इसे लागू करने की कोशिश की गई तो लेबनान गृहयुद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है। अमेरिका ने किया समझौते का ऐलान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को इस फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह इजरायल और लेबनान के बीच स्थायी शांति की दिशा में पहला बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने पूरे समझौते में मध्यस्थ और सहयोगी की भूमिका निभाई है। इस समझौते पर लेबनान की राजदूत नादा हमादेह, इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। क्या हैं समझौते की प्रमुख शर्तें? समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में तत्काल युद्धविराम लागू करने और हिज्बुल्लाह द्वारा सभी तरह की सैन्य गतिविधियां एवं रॉकेट हमले रोकने की शर्त रखी गई है। इसके साथ ही संगठन को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटना होगा। जिन इलाकों से इजरायली सेना और हिज्बुल्लाह पीछे हटेंगे, वहां लेबनानी सेना की तैनाती की जाएगी ताकि सीमा क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की जा सके। अमेरिका करेगा निगरानी, लेबनान को मिलेगी आर्थिक सहायता मार्को रुबियो ने बताया कि समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी अमेरिका की अगुवाई में बनाए गए त्रिपक्षीय सैन्य समन्वय समूह द्वारा की जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने लेबनान के लिए तत्काल 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के लिए 3 करोड़ डॉलर से अधिक की अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। दक्षिणी लेबनान में बनाए जाएंगे दो पायलट जोन समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में दो पायलट सुरक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों से इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से पीछे हटेगी और उनकी जगह लेबनानी सेना तैनात होगी। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि सेना की पूरी वापसी तभी होगी जब हिज्बुल्लाह अपने हथियार छोड़ेगा और उसका सैन्य ढांचा पूरी तरह समाप्त होगा। लेबनान ने बताया संप्रभुता बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लेबनान की संप्रभुता मजबूत होगी, सीमा पर संघर्ष समाप्त होगा और विस्थापित नागरिक अपने घर लौट सकेंगे। उन्होंने इस पहल का श्रेय लेबनान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सशस्त्र बलों के सहयोग को दिया। नेतन्याहू बोले- हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर निर्भर करेगी आगे की कार्रवाई इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि लेबनानी सेना जल्द ही सीमावर्ती इलाकों का नियंत्रण संभालेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना की आगे की वापसी पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनानी सेना हिज्बुल्लाह को हथियार छोड़ने और उसके सैन्य ढांचे को खत्म करने में कितनी सफल रहती है। इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर ने भी इस समझौते को "परफॉर्मेंस आधारित" बताते हुए कहा कि इसकी सफलता पूरी तरह जमीनी स्तर पर लागू होने वाले कदमों पर निर्भर करेगी। हिज्बुल्लाह ने किया समझौते का विरोध समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हिज्बुल्लाह ने इसका कड़ा विरोध किया। संगठन के वरिष्ठ सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि यदि लेबनानी सरकार अमेरिकी समर्थन के साथ इस समझौते को लागू करने की कोशिश करती है तो देश गृहयुद्ध जैसी स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह किसी भी कीमत पर अपने हथियार नहीं छोड़ेगा और इस दिशा में किए जाने वाले हर प्रयास का विरोध करेगा। हजारों लोगों की जान ले चुका है संघर्ष इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच मौजूदा संघर्ष में अब तक भारी जनहानि हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सैन्य कार्रवाई में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। वहीं संघर्ष के दौरान 37 इजरायली सैनिकों के भी मारे जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, हालांकि हिज्बुल्लाह के विरोध के चलते इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Israeli military vehicles near the southern Lebanon border amid ongoing tensions despite ceasefire efforts.
अमेरिकी दावे से बढ़ी हलचल: दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों से पीछे हटा इज़राइल! लोगों में अब भी डर और अनिश्चितता

  Israel-Lebanon Conflict: दक्षिणी लेबनान में इज़राइल की सैन्य मौजूदगी को लेकर एक नया दावा सामने आने के बाद क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ कब्जे वाले इलाकों से अपनी सेना हटा ली है। लेबनान के अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि करने से इनकार किया है। ऐसे में सीमा पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं और विस्थापित नागरिक अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारी का दावा, लेबनान ने नहीं की पुष्टि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों से पीछे हट चुकी है और अब वहां सुरक्षा की जिम्मेदारी लेबनानी सेना को संभालनी चाहिए। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। लेबनान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दक्षिणी लेबनान में इज़राइल द्वारा बनाए गए तथाकथित "बफर जोन" से सेना हटने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। युद्धविराम के बावजूद सीमा पर तनाव कायम इज़राइल और हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच कई बार युद्धविराम की घोषणा की गई, लेकिन सीमा पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। हाल के महीनों में छिटपुट घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। फिलहाल अमेरिका की मध्यस्थता से क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। ईरान और हिज्बुल्लाह की स्पष्ट शर्त ईरान ने कहा है कि किसी भी व्यापक शांति समझौते में लेबनान की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और इज़राइल को दक्षिणी लेबनान से पूरी तरह सेना हटानी होगी। वहीं, हिज्बुल्लाह ने भी स्पष्ट किया है कि वह अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की इज़राइली सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा और कब्जे का विरोध जारी रखेगा। घर लौटने का इंतजार कर रहे हजारों विस्थापित दक्षिणी लेबनान के कई गांव युद्ध के दौरान भारी तबाही का शिकार हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे और अब भी सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं। दिब्बीन गांव की निवासी मिलिया अल-शेख ने बताया कि उनका घर अब भी बंद सैन्य क्षेत्र में है। गांव तक जाने वाले रास्तों पर कंटीले तार लगे हैं और आम नागरिकों की आवाजाही प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उन्हें अपने घर की मौजूदा स्थिति तक की जानकारी नहीं है। स्थायी शांति पर टिकी दुनिया की नजर दक्षिणी लेबनान में हालात को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है। एक ओर सेना हटने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन इसकी पुष्टि नहीं कर रहा। ऐसे में क्षेत्र के हजारों विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी और स्थायी शांति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
US President Donald Trump addresses questions about the Minab school missile strike during a media briefing.
150 बच्चों की मौत पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- 'सबूत नहीं कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हुआ हमला'

  Washington: ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि स्कूल पर हमला अमेरिकी मिसाइल से किया गया था। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान कई पक्षों की ओर से लगातार मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान करना आसान नहीं है। 'हमारी मिसाइल थी, इसका कोई प्रमाण नहीं' हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि कुछ लोगों ने दावा किया कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ, लेकिन उनके पास इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, "युद्ध के दौरान हर दिशा से मिसाइलें दागी जा रही थीं। ऐसे में यह तय करना बेहद मुश्किल है कि किस मिसाइल ने हमला किया। मुझे ऐसा कोई सबूत नहीं दिखा जिससे यह कहा जा सके कि वह हमारी मिसाइल थी।" 28 फरवरी को हुआ था भीषण हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष के पहले दिन यानी 28 फरवरी को मिनाब स्थित एक स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्राएं शामिल थीं। घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और हमले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी। अमेरिका पर लगे थे गंभीर आरोप हमले के तुरंत बाद कई मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि इसके पीछे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हो सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी होने की बात कही है। ट्रंप ने जांच पर भी जताया संदेह डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इतने बड़े सैन्य संघर्ष के दौरान यह तय करना बेहद कठिन है कि किसी विशेष हमले के लिए कौन जिम्मेदार था। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि इस मामले की पूरी सच्चाई कभी सामने ही न आ सके। उनके मुताबिक, युद्ध क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और अलग-अलग पक्षों की सैन्य गतिविधियों के कारण जांच एजेंसियों के सामने भी बड़ी चुनौती है। दुनिया की नजर जांच रिपोर्ट पर मिनाब स्कूल पर हुआ हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष की सबसे दर्दनाक घटनाओं में गिना जा रहा है। बड़ी संख्या में बच्चों और नागरिकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान कर पाती हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Oil storage tanks and crude oil facilities symbolize global supply disruptions caused by the Middle East conflict and energy crisis.
ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

  नई दिल्ली/वर्साय: ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और मध्य-पूर्व में कई महीनों तक बनी अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। एनालिटिक्स फर्म केपलर (Kpler) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के लगभग चार महीनों के दौरान वैश्विक बाजार से करीब 115 करोड़ बैरल (1.15 बिलियन बैरल) तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में भारी बाधा आई, जिसके कारण दुनिया भर के रणनीतिक (Strategic) और वाणिज्यिक (Commercial) तेल भंडार तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक भंडार से करीब 19 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है। रणनीतिक तेल भंडार कई दशकों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) से जुड़े देशों के रणनीतिक तेल भंडार 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार भी कई दशकों के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्साय में आयोजित जी7 बैठक के दौरान कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता, तो अमेरिकी तेल भंडार पर गंभीर दबाव पड़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भंडार कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की स्थिति तक पहुंच सकते थे। युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में राहत अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के दोबारा खुलने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है। युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। सप्लाई चेन बहाली में लग सकते हैं कई महीने ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो सकती। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, टैंकरों की उपलब्धता, उत्पादन बढ़ाने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को फिर से पटरी पर लाने में कई महीने लग सकते हैं। RBC कैपिटल मार्केट्स की ऊर्जा विशेषज्ञ हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि बाजार जरूरत से ज्यादा आशावादी नजर आ रहा है। उनके अनुसार, संकट पूरी तरह समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी क्योंकि तेल आपूर्ति तंत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। OPEC उत्पादन बढ़ा सकता है इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे हैटफील्ड का मानना है कि आर्थिक दबाव का सामना कर रहे कई OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में हो सकते हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस रणनीतिकार विकास द्विवेदी का कहना है कि युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद था, जिससे बाजार पूरी तरह अस्थिर नहीं हुआ। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान गायब हुई 115 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति की भरपाई आसान नहीं होगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दुनिया मांग से प्रतिदिन 50 लाख बैरल अधिक तेल का उत्पादन भी करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक वर्ष लग सकता है। दुनिया में रोजाना 10.3 करोड़ बैरल तेल उत्पादन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा अकेले देता है। इसके बाद सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक का स्थान है। ये पांच देश मिलकर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रमुख उत्पादक देशों में किसी भी प्रकार का युद्ध, प्रतिबंध या उत्पादन संकट सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Oil tankers navigating near the Strait of Hormuz amid rising geopolitical tensions and supply disruptions.
LNG Crude Supply to India: होर्मुज संकट के बीच 'डार्क मोड' में चल रहे तेल टैंकर, भारत तक गुप्त रास्तों से पहुंच रही सप्लाई

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत समेत कई एशियाई देशों तक कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि अब यह अधिक गोपनीय तरीके से की जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध से पहले की तुलना में होर्मुज मार्ग से टैंकर ट्रैफिक 90 से 95 प्रतिशत तक घट चुका है। इसके चलते वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को ट्रैक करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। क्या है 'डार्क मोड' रणनीति? शिपिंग डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में संचालन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी में प्रवेश करते समय अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। पहले इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान से जुड़े जहाज करते थे, लेकिन अब सामान्य वाणिज्यिक जहाज भी सुरक्षा कारणों और परिचालन जोखिमों के चलते ऐसा कर रहे हैं। वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57 प्रतिशत जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे, जबकि मई में यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। भारत, चीन और पाकिस्तान तक जारी है सप्लाई मौजूदा संकट के बावजूद भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को तेल और LNG की आपूर्ति जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर और विशेष मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ने के कारण कई जहाज सुरक्षित मार्गों के जरिए अपनी खेप गंतव्य देशों तक पहुंचा रहे हैं। सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदें कमजोर शुरुआती अनुमान यह था कि युद्ध कुछ महीनों में समाप्त हो जाएगा और जून से होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने लगेंगी। लेकिन संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में किसी समझौते के बाद भी इस मार्ग को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकेगा, क्योंकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आ चुका है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बना रहेगा असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
US military aircraft and Iranian drone facilities amid escalating tensions in the Gulf region
ईरान के ड्रोन ठिकानों पर अमेरिकी हमला, जवाबी कार्रवाई में तेहरान ने भी साधा निशाना

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ड्रोन कमांड और रडार ठिकानों पर हमला किया है। वाशिंगटन का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, क्योंकि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया था। अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने के बाद की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को निशाना बनाया था। इसके जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी हवाई सुरक्षा प्रणालियों, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो हमलावर ड्रोन को नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना ने कहा कि कार्रवाई के दौरान उसके किसी भी सैनिक या सैन्य उपकरण को नुकसान नहीं पहुंचा। वाशिंगटन ने इसे क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और सैन्य हितों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है। ईरान ने भी किया जवाबी हमला अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने उस एयरबेस को निशाना बनाया, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर सिरिक द्वीप पर एक दूरसंचार टावर पर अमेरिकी हमले के लिए किया गया था। ईरान ने यह नहीं बताया कि संबंधित एयरबेस कहां स्थित है और हमले में कितना नुकसान हुआ। पिछले सप्ताह भी हुई थी सैन्य कार्रवाई दोनों देशों के बीच यह टकराव नया नहीं है। पिछले सप्ताह भी अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संचालित एक ईरानी ड्रोन अभियान को निशाना बनाया था। इसके बाद ईरान ने भी अमेरिकी हितों से जुड़े एक ठिकाने पर हमला करने का दावा किया था। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाइयों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष टकराव का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। समझौते की बात, लेकिन जारी है तनाव दिलचस्प बात यह है कि एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में होने वाला कोई समझौता अमेरिका की सुरक्षा संबंधी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता है, तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है। ट्रंप ने समझौते के मसौदे में मांगे बदलाव मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते के मसौदे को संशोधन के लिए वापस भेज दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कई अहम बदलाव सुझाए हैं और समझौते को अंतिम रूप देने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तनाव साथ-साथ चलते दिखाई दे रहे हैं, जिससे पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।  

surbhi जून 1, 2026 0
RBI annual report highlights global risks to India’s economy amid rising oil and trade tensions
RBI की बड़ी चेतावनी: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा अब विदेशों से

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम संकेत दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश की आर्थिक स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक परिस्थितियों से पैदा हो सकता है। रिजर्व बैंक ने साफ कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बाधाएं भारत की विकास रफ्तार पर असर डाल सकती हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद बढ़ी चिंता आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत उपभोक्ता मांग, सरकारी निवेश और स्वस्थ बैंकिंग सिस्टम के सहारे आगे बढ़ रही है। कॉरपोरेट और बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और उनका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया का तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। आरबीआई के मुताबिक इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने वैश्विक विकास दर के अनुमान घटा दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है या लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता और अधिक गंभीर है क्योंकि देश कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है। महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई आरबीआई ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत में महंगाई को फिर से बढ़ा सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ता है। यानी पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। शिपिंग संकट से उद्योगों पर दबाव केंद्रीय बैंक ने वैश्विक शिपिंग रूट्स में आ रही बाधाओं को भी बड़ी चिंता बताया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि समुद्री व्यापार प्रभावित होता है तो भारत में कच्चे माल और जरूरी उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल और कई औद्योगिक उत्पाद विदेशों से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर करते हैं। ऐसे में शिपिंग लागत बढ़ने का असर उत्पादन और कीमतों दोनों पर पड़ सकता है। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का असर आरबीआई ने यह भी कहा कि दुनिया में बढ़ता संरक्षणवाद और बदलती व्यापार नीतियां भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती हैं। भारत इस समय खुद को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यदि वैश्विक व्यापार धीमा पड़ता है तो इंजीनियरिंग, फार्मा और आईटी सेवाओं जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। शेयर बाजार में बढ़ सकती है हलचल रिपोर्ट में शेयर बाजार को लेकर भी सावधानी जताई गई है। आरबीआई का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। खासतौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर के ऊंचे वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि आरबीआई ने किसी बड़े बाजार संकट की भविष्यवाणी नहीं की है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह जरूर दी है। फिर भी भारत की ग्रोथ पर भरोसा कायम इन सभी चुनौतियों के बावजूद आरबीआई ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताया है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश और नए व्यापार समझौते आने वाले वर्षों में विकास को समर्थन देंगे। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारत पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक घटनाओं से पहले से अधिक जुड़ चुकी है।  

surbhi मई 29, 2026 0
US Senator Lindsey Graham questions Pakistan’s stance on Israel and Abraham Accords
इजराइल को लेकर पाकिस्तान पर भड़के अमेरिकी सांसद, अब्राहम समझौते पर मांगा जवाब

अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने ईरान-इजराइल तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताता है, लेकिन उसका इजराइल के प्रति रवैया हमेशा विरोधी रहा है। ग्राहम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान से अब्राहम समझौते को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। ईरानी सैन्य विमानों को लेकर भी किया दावा लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान के पुराने बयान का किया जिक्र ग्राहम ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान कभी अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा क्योंकि उसे इजराइल पर भरोसा नहीं है। अमेरिकी सांसद ने कहा कि भले यह बयान पुराना हो, लेकिन पाकिस्तान की सोच आज भी वैसी ही दिखाई देती है। ट्रम्प की अपील का जवाब देने को कहा ग्राहम ने कहा कि अब पाकिस्तान को Donald Trump की उस अपील पर जवाब देना चाहिए, जिसमें मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान खुद को क्षेत्र में शांति का समर्थक बताता है, तो उसे अपने रुख को साफ करना चाहिए। क्या है अब्राहम समझौता? Abraham Accords के तहत कुछ अरब देशों ने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और इजराइल को आधिकारिक मान्यता दी थी। इस समझौते के जरिए मध्य पूर्व में नए राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की शुरुआत हुई थी। अमेरिका चाहता है कि और मुस्लिम देश भी इसमें शामिल हों। पाकिस्तान अब तक समझौते से दूर पाकिस्तान अब तक अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं बना है। पाकिस्तान लंबे समय से कहता आया है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान की आधिकारिक नीति यही रही है कि स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनने के बाद ही इजराइल के साथ संबंधों पर विचार किया जाएगा। मध्य पूर्व तनाव के बीच बढ़ी कूटनीतिक चर्चा ईरान-इजराइल तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 27, 2026 0
Israeli airstrike in Gaza as Israel claims Hamas military chief Mohammed Odeh was killed
इजरायल का दावा: हमास के नए सैन्य प्रमुख मोहम्मद ओदेह की एयरस्ट्राइक में मौत

इजरायल ने दावा किया है कि गाजा पट्टी में चलाए गए एक बड़े सैन्य अभियान में हमास के नए सैन्य प्रमुख मोहम्मद ओदेह को मार गिराया गया है। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के मुताबिक, गाजा के रिमाल इलाके में की गई एयरस्ट्राइक में ओदेह की मौत हुई। इजरायली सेना का कहना है कि मोहम्मद ओदेह 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले के प्रमुख योजनाकारों में शामिल था। एक हफ्ते पहले ही बना था हमास का नया सैन्य प्रमुख इजरायल के अनुसार, मोहम्मद ओदेह को करीब एक सप्ताह पहले ही हमास की सैन्य शाखा की कमान सौंपी गई थी। उसने एज्जेदीन अल-हद्दाद की जगह ली थी। इजरायल ने दावा किया था कि एज्जेदीन अल-हद्दाद की भी 15 मई को गाजा में किए गए एक हमले में मौत हो गई थी। नेतन्याहू बोले- सभी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचेंगे इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि 7 अक्टूबर हमले में शामिल हर व्यक्ति को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इजरायल हमले के सभी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचेगा और कार्रवाई जारी रहेगी। ओदेह पर हत्या और अपहरण की साजिश का आरोप इजरायली सेना ने मोहम्मद ओदेह पर कई इजरायली नागरिकों और सैनिकों की हत्या, अपहरण और हमलों की साजिश रचने का आरोप लगाया है। IDF के मुताबिक, 7 अक्टूबर हमले के दौरान वह हमास के इंटेलिजेंस स्टाफ का प्रमुख था और हमले की योजना तैयार करने में उसकी अहम भूमिका थी। दक्षिण लेबनान में भी बढ़े इजरायली हमले गाजा के साथ-साथ इजरायल ने दक्षिण लेबनान में भी अपने हवाई हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टायर और मरजायौन जिलों समेत कई इलाकों में लगातार एयरस्ट्राइक की गईं। बुर्ज रहाल, सरीफा, अस-सवाना और कबरिखा जैसे इलाकों को भी निशाना बनाया गया। अरबी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मंगलवार को हुए हमलों में 31 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। हिजबुल्लाह पर दबाव बढ़ा रहा इजरायल प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हाल ही में सेना को हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई और तेज करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि इजरायल हिजबुल्लाह के साथ युद्ध जैसी स्थिति में है और हाल के हफ्तों में उसके 600 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया गया है। इजरायल ने कहा- कार्रवाई और तेज होगी नेतन्याहू ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई धीमी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सेना को और अधिक तेज और सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी के बाद इजरायल ने अपनी सैन्य रणनीति और ज्यादा आक्रामक कर दी है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Donald Trump at the White House amid rising tensions and reports of possible US action against Iran
छुट्टी कैंसल, बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगे ट्रंप! क्या ईरान पर दोबारा हमले की तैयारी कर रहा है अमेरिका?

Donald Trump प्रशासन एक बार फिर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य कदम की तैयारी में जुटा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस, पेंटागन और खुफिया एजेंसियों में हाई अलर्ट जैसी स्थिति बना दी गई है। इसी बीच ट्रंप ने अपने निजी कार्यक्रम और छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगे ट्रंप अमेरिका में 25 मई को मेमोरियल डे के चलते लंबा वीकेंड है। ट्रंप पहले न्यू जर्सी स्थित अपने गोल्फ क्लब में समय बिताने वाले थे, लेकिन उन्होंने अचानक कार्यक्रम बदल दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और बेटिना एंडरसन की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने इसकी वजह “सरकारी परिस्थितियां” बताई। इसके बाद उनका काफिला वॉशिंगटन डीसी में तेजी से व्हाइट हाउस लौटता देखा गया। अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों के कई अधिकारियों ने भी अपनी छुट्टियां रद्द कर दी हैं। विदेशों में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए “रिकॉल रोस्टर” अपडेट किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मध्य पूर्व में मौजूद कुछ अमेरिकी सैनिकों को संवेदनशील इलाकों से हटाया भी जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका संभावित जवाबी हमले की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। ईरान के IRGC की बड़ी चेतावनी Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने अमेरिका और इजरायल को खुली चेतावनी दी है। IRGC ने कहा कि अगर ईरान पर फिर हमला हुआ तो जवाब सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने अपने पश्चिमी हवाई क्षेत्र में NOTAM जारी कर सोमवार तक उड़ानों पर रोक लगा दी है। इसे संभावित सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका ने दिया “फाइनल ऑफर” रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को एक “अंतिम प्रस्ताव” दिया है। कहा जा रहा है कि अगर तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो अगले 24 घंटे में सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि “ईरान समझौता करना चाहता है” और अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है। असली विवाद क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट पूरी तरह बंद करे ईरान इस मांग को मानने को तैयार नहीं है तेहरान अपने विदेशी फ्रीज एसेट्स जारी करने और युद्ध नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर टोल व्यवस्था की भी बात कर रहा है विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ यही मुद्दे हैं। पाकिस्तान और कतर निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका रिपोर्ट्स के अनुसार Asim Munir इस समय तेहरान में मौजूद हैं। वहीं कतर का प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंचा हुआ है। दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख की मुलाकात IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों से हो सकती है। फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों में जवाबी कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। 8 अप्रैल को सीजफायर पर सहमति बनी, लेकिन उसके बाद भी धमकियों, प्रतिबंधों और सैन्य तैयारियों का सिलसिला जारी है। अब ट्रंप प्रशासन की गतिविधियों से यह आशंका बढ़ गई है कि हालात फिर से बड़े टकराव की ओर बढ़ सकते हैं।  

surbhi मई 23, 2026 0
Donald Trump and Iran leadership amid rising tensions over nuclear talks and possible military action
समझौता होगा या हमला? ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस, ईरान ने कहा- बातचीत के रास्ते खुले

ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच युद्ध टालने को लेकर बातचीत तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी अटकलें जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने इस संकट को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “निर्णायक मोड़” पर पहुंच चुकी है और अगले कुछ दिन बेहद अहम होंगे। ईरान ने कहा- बातचीत के विकल्प खुले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि तेहरान की ओर से बातचीत के सभी रास्ते अब भी खुले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान ने हमेशा अपने वादों का सम्मान किया है और युद्ध टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दबाव बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक, समस्या का समाधान केवल सम्मानजनक बातचीत से ही निकल सकता है। परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत और प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बन पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपने प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी शर्तें रखीं, जिन्हें तेहरान ने खारिज कर दिया। इसके बाद ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को 14 बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव भेजा। वॉशिंगटन इस प्रस्ताव से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव और अनिश्चितता अभी बनी हुई है। ट्रंप ने टाला सैन्य हमला ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। उनके अनुसार सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने बातचीत को मौका देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को उम्मीद है कि जल्द कोई समझौता हो सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि किसी भी समझौते की स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। “जरूरत पड़ी तो बड़ा हमला करेंगे” अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका “एक और बड़ा हमला” करने के लिए तैयार है। ट्रंप के मुताबिक, सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला अगले कुछ दिनों में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले सप्ताह की शुरुआत तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है। वहीं कई अरब देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर हालात को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।  

surbhi मई 21, 2026 0
Chinese and Iranian foreign ministers meeting in Beijing to discuss Middle East ceasefire and regional tensions
युद्ध के बाद पहली बार चीन-ईरान की बड़ी बैठक, युद्धविराम पर हुई अहम चर्चा

Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच चीन और ईरान के विदेश मंत्रियों की पहली अहम मुलाकात हुई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग पहुंचकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति, युद्धविराम और शांति प्रक्रिया को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. वांग यी ने कहा- व्यापक युद्धविराम जरूरी बीजिंग में हुई बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दो महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष को अब रोका जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए व्यापक युद्धविराम बेहद जरूरी है. वांग यी ने कहा कि दुश्मनी का दोबारा शुरू होना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और सभी पक्षों को बातचीत और कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए. युद्ध शुरू होने के बाद पहली उच्चस्तरीय मुलाकात 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब ईरान और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने बातचीत हुई है. चीन लंबे समय से ईरान का महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक साझेदार रहा है. ऐसे में इस मुलाकात को मिडिल ईस्ट संकट के बीच बेहद अहम माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाये रखने और तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिये हैं. चीन ने शांति वार्ता पर दिया जोर न्यूज एजेंसी AP के अनुसार, बैठक के दौरान चीनी पक्ष ने स्पष्ट कहा कि बातचीत और समझौते के जरिए ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है. चीन ने कहा कि युद्धविराम को मजबूत करना और सभी पक्षों को संवाद की प्रक्रिया में शामिल रखना बेहद जरूरी है, ताकि मिडिल ईस्ट में बड़ा युद्ध टाला जा सके. अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते की चर्चा इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गयी हैं. सूत्रों के मुताबिक, दोनों देश 14 सूत्रीय समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को लंबे समय तक रोकने की मांग की है. अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान कम से कम 20 वर्षों तक परमाणु संवर्धन गतिविधियों को बंद रखे. वहीं ईरान कथित तौर पर पांच वर्षों तक कार्यक्रम सीमित रखने के प्रस्ताव पर सहमत होने की बात कर रहा है. हालांकि अब तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. वैश्विक शक्तियां लगातार युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रही हैं, क्योंकि इस संघर्ष का असर तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Donald Trump warning Iran amid rising tensions over Hormuz Strait and global oil supply concerns
“धरती से मिटा देंगे…” डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव का केंद्र

Iran–US Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा बयान देकर हालात को और गरमा दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे “धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। क्या है पूरा मामला? अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों को निशाना बनाया। ये जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड के “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत सुरक्षित मार्ग से गुजर रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि हमलों में एक दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज भी शामिल था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने सात छोटी नौकाओं को निशाना बनाने की कार्रवाई की बात कही है। ट्रंप का शक्ति प्रदर्शन ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिकी सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास अत्याधुनिक हथियार, व्यापक सैन्य अड्डे और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “हम जरूरत पड़ने पर अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे।” साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया जैसे देशों से इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से यह मार्ग प्रभावी रूप से बाधित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत समेत कई देशों में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। तेल बाजार पर असर युद्ध से पहले जहां कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह 100 डॉलर के पार पहुंच गई है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद रहता है, तो ऊर्जा संकट और गंभीर हो सकता है। शिपिंग कंपनियों को भी चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने शिपिंग कंपनियों को भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कंपनी ने होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया, तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईरान की ओर से जहाजों से टोल वसूलने की कोशिश को अमेरिका ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीजफायर के बावजूद जारी टकराव हालांकि 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच सीमित सीजफायर लागू है, लेकिन तनाव कम होने के बजाय बयानबाजी और रणनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि मध्य पूर्व में शांति अभी दूर है और किसी भी समय हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। क्या बढ़ेगा खतरा? ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अगर होर्मुज स्ट्रेट में टकराव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव आगे किस दिशा में जाता है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Donald Trump announcement influences Israel Lebanon ceasefire decision amid ongoing regional tensions
लेबनान युद्धविराम के बीच ट्रंप ने फिर मोड़ा नेतन्याहू का रुख, इज़राइल पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

  अमेरिकी राष्ट्रपति के ऐलान के बाद इज़राइल को युद्ध रोकने पर मजबूर होना पड़ा लेबनान में जारी संघर्ष के बीच अब एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक युद्धविराम की घोषणा कर दी, जिसके बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अपनी सैन्य रणनीति बदलनी पड़ी। रिपोर्टों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस संघर्ष में सीधे हस्तक्षेप करते हुए इज़राइल के फैसलों को प्रभावित किया है। ट्रंप की घोषणा से पहले ही तय हो गया युद्धविराम जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने पहले ही यह संकेत दे दिया था कि इज़राइल और लेबनान के बीच युद्धविराम जल्द लागू होगा। इसके कुछ ही घंटों बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा कर दी कि संघर्ष रोक दिया गया है और दोनों पक्षों को सैन्य कार्रवाई बंद करनी होगी। इसके बाद इज़राइल सरकार के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे और उसे युद्धविराम को स्वीकार करना पड़ा। नेतन्याहू की सैन्य योजना पर फिर पड़ा असर इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हाल ही में हिज़बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कर रहे थे। इज़राइली सेना भी नए हमलों की योजना तैयार कर रही थी। लेकिन अमेरिकी दबाव के बाद स्थिति बदल गई और सरकार को युद्ध रोकने का निर्णय लेना पड़ा। देश को जानकारी ट्रंप के पोस्ट से मिली सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इज़राइल के नागरिकों और कई नेताओं को युद्धविराम की जानकारी अपने प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट से मिली। इससे इज़राइली राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप बनते जा रहे हैं निर्णायक शक्ति विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में ट्रंप ने कई अंतरराष्ट्रीय मामलों में सीधे हस्तक्षेप किया है, जिनमें गाजा, ईरान और अब लेबनान शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई मौकों पर उन्होंने: युद्धविराम लागू कराया सैन्य कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया और क्षेत्रीय नेताओं से सीधे बातचीत को प्रभावित किया गाजा और ईरान संघर्ष पर भी असर इससे पहले गाजा और ईरान से जुड़े संघर्षों में भी अमेरिका ने इज़राइल की रणनीति पर प्रभाव डाला था। कई मामलों में इज़राइल को अपने सैन्य अभियान सीमित करने पड़े, जिससे उसे निर्णायक जीत हासिल नहीं हो सकी। हिज़बुल्लाह अभी भी बड़ा खतरा युद्धविराम के बावजूद लेबनान में हिज़बुल्लाह की स्थिति मजबूत बनी हुई है। संगठन ड्रोन और रॉकेट हमलों की क्षमता रखता है, जिससे इज़राइल की सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। नेतन्याहू का बयान: शांति और युद्ध दोनों तैयार युद्धविराम के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल ने अमेरिका के अनुरोध पर समझौता किया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सेना फिर से कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने कहा: “हमारे एक हाथ में हथियार है, और दूसरा हाथ शांति के लिए बढ़ा हुआ है।” स्थिति अभी भी नाजुक हालांकि युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी है और क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में हालात फिर बदल सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Returning civilians at Iran border regions as life resumes amid ceasefire, with ongoing fear and uncertainty about future conflict
सीमा इलाकों में लौटती ज़िंदगी, लेकिन लोगों के मन में अभी भी युद्ध और भविष्य को लेकर गहरी चिंता

नाज़ुक युद्धविराम के बीच ईरान में आम लोगों की ज़िंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटती दिख रही है, लेकिन दिलों में डर और अनिश्चितता अब भी कायम है। उत्तर-पश्चिमी इलाकों में जहां बादाम के पेड़ फूलों से लद गए हैं, वहीं सड़कों पर बढ़ती आवाजाही इस बात का संकेत दे रही है कि लोग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। तुर्की सीमा के पास एक अस्थायी वेटिंग रूम में मिले एक बुज़ुर्ग बैंकर ने बताया कि वे अपने बेटे के साथ एक महीने तक तुर्की में शरण लिए हुए थे। उन्होंने कहा कि उनके शहर में हुए हवाई हमले मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों तक सीमित थे और आम नागरिक ढांचे को कम नुकसान पहुंचा। हालांकि, हर कोई इतना आश्वस्त नहीं है। हिजाब पहने एक बुज़ुर्ग महिला ने डर जाहिर करते हुए कहा कि हालात अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने उन लोगों की पीड़ा का जिक्र किया जो घनी आबादी वाले इलाकों में बमबारी और अर्धसैनिक बलों के दबाव के बीच जी रहे हैं। एक युवा महिला ने युद्धविराम को लेकर संदेह जताते हुए कहा कि यह शांति ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है। उनका मानना है कि ईरान रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कभी नहीं छोड़ेगा। सीमा पार कर ईरान में दाखिल होने के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने अमेरिका को लेकर गहरा अविश्वास व्यक्त किया। उनका कहना था कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump कभी भी ईरान को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने नहीं देंगे और उनका उद्देश्य देश पर दबाव बनाए रखना है। इन तमाम प्रतिक्रियाओं से साफ है कि भले ही ज़मीन पर युद्धविराम लागू हो गया हो, लेकिन आम ईरानी नागरिकों के मन में शांति को लेकर भरोसा अभी भी बहुत कमजोर है। अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर भी लोगों में उम्मीद से ज्यादा शंका और डर देखने को मिल रहा है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Israeli Prime Minister speaking at Holocaust Remembrance Day comparing Iran nuclear sites to Nazi camps
Holocaust Memorial Day: नेतन्याहू का बड़ा बयान–ईरानी परमाणु ठिकानों की नाजी कैंपों से तुलना

इजरायल के वार्षिक Holocaust Remembrance Day के मौके पर प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने Iran के परमाणु ठिकानों की तुलना नाजी मृत्यु शिविरों से करते हुए कहा कि इजरायल ने “दूसरा होलोकॉस्ट” होने से रोक दिया। ‘अगर हमने कार्रवाई नहीं की होती…’ अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा: “अगर हमने कार्रवाई नहीं की होती, तो Natanz, Fordow, Isfahan और Parchin के नाम भी कुख्यात हो जाते” “जैसे Auschwitz, Treblinka, Majdanek और Sobibor इतिहास में बदनामी के साथ दर्ज हैं” ईरान को सीधी चेतावनी नेतन्याहू ने कहा: इजरायल अपने दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है “हमने वादा किया था कि दूसरा होलोकॉस्ट नहीं होने देंगे–और हमने इसे पूरा किया” यूरोप पर भी निशाना प्रधानमंत्री ने Europe पर भी तीखा हमला बोला: यूरोप अपनी पहचान और मूल्यों की रक्षा में कमजोर पड़ रहा है “होलोकॉस्ट के बाद बहुत कुछ भूल चुका है” इजरायल न सिर्फ अपनी, बल्कि यूरोप की भी रक्षा कर रहा है अमेरिका के साथ गठबंधन नेतन्याहू ने कहा कि: Israel, United States के साथ मिलकर आगे खड़ा है दोनों देशों ने पिछले एक साल में संयुक्त अभियानों में ईरान को “करारा झटका” दिया है होलोकॉस्ट का संदर्भ Holocaust मानव इतिहास की सबसे भयावह त्रासदियों में से एक है। 1941–1945 के बीच नाजी जर्मनी और उसके सहयोगियों ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या की बढ़ सकता है तनाव नेतन्याहू के इस बयान से: Israel और Iran के बीच तनाव और बढ़ सकता है मिडिल ईस्ट में पहले से जारी संकट और गहरा सकता है फिलहाल, इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
JD Vance commenting on Iran-US tensions and Strait of Hormuz security concerns during interview
Iran–US Tension: वेंस का आरोप–ईरान कर रहा ‘आर्थिक आतंकवाद’, होर्मुज को लेकर सख्त चेतावनी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने Iran पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर “आर्थिक आतंकवाद” कर रहा है। ‘आर्थिक आतंकवाद’ का आरोप Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा: ईरान जहाजों की आवाजाही रोककर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा है “अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा, तो अमेरिका भी सख्त जवाब देगा” उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ऐसी स्थिति में ईरानी जहाजों की आवाजाही भी रोक सकता है। ट्रंप की नीति का हवाला वेंस ने कहा कि Donald Trump ने यह दिखा दिया है कि: “यह खेल दोनों तरफ से खेला जा सकता है” अमेरिका जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है यहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है न्यूक्लियर मुद्दे पर भी सख्ती वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी कड़ा रुख अपनाया: ईरान को यूरेनियम संवर्धन पर नियंत्रण देना होगा एक मजबूत जांच प्रणाली लागू होनी चाहिए ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके इस्लामाबाद वार्ता का जिक्र Islamabad में हुई हालिया वार्ता का जिक्र करते हुए वेंस ने कहा: बातचीत में “काफी प्रगति” हुई लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका “अब गेंद ईरान के पाले में है” बढ़ता टकराव इस बयान के बाद साफ है कि: अमेरिका और Iran के बीच तनाव और बढ़ सकता है कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन सैन्य और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है दुनिया की नजर अब इस पर है कि क्या दोनों देश समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और गहरा होता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Hormuz Strait tensions
ईरान-अमेरिका वार्ता में संपत्ति मुद्दा सुलझा, होर्मुज पर तनाव कायम

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिका ने ईरान की उन संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमति जताई है, जो कतर और अन्य विदेशी बैंकों में 'फ्रीज' (जब्त) की गई थीं। हालांकि, वाशिंगटन ने इस राहत के बदले एक कड़ी शर्त रख दी है, जिसके केंद्र में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान इस समुद्री मार्ग को स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं बनाता, तब तक उसकी संपत्तियों पर लगी रोक नहीं हटेगी।   अमेरिकी शर्तों का कड़ा रुख और होर्मुज की सुरक्षा रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय मांगों की एक लंबी सूची रखी है। इसमें सबसे प्रमुख शर्त वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और स्थायी रूप से खोलना है। अमेरिका चाहता है कि इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाए। इसके साथ ही, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अपनी सभी कोशिशों को पूरी तरह और सत्यापन योग्य तरीके से बंद करना होगा।   वाशिंगटन की शर्तों में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल विकास कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को दी जाने वाली फंडिंग व हथियारों की आपूर्ति पर रोक भी शामिल है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने मांग की है कि ईरान की जेलों में बंद सभी अमेरिकी नागरिकों को तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाए। इन शर्तों को पूरा किए बिना अमेरिका जब्त संपत्तियों को पूरी तरह से हस्तांतरित करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।   ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव और 'टोल टैक्स' की मांग दूसरी ओर, तेहरान ने भी वार्ता की मेज पर अपना 10 सूत्रीय प्लान रखा है, जो काफी कड़ा माना जा रहा है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि अमेरिका को सबसे पहले उन सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना चाहिए जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। ईरान की सबसे विवादित मांग होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण संप्रभुता और नियंत्रण की है। ईरान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय होर्मुज पर उसके एकाधिकार को स्वीकार करे और वहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से 'टोल टैक्स' वसूलने के उसके अधिकार को मान्यता दे। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि टोल टैक्स की यह मांग अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौपरिवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) के वैश्विक सिद्धांतों के खिलाफ है।   इस्लामाबाद वार्ता और वैश्विक तेल बाजार पर असर इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक वैश्विक राजनीति और तेल बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है और होर्मुज का संकट गहराता है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। फिलहाल, अमेरिका की ओर से संपत्ति रिलीज करने की हामी को एक 'सॉफ्ट सिग्नल' के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और लंबी-चौड़ी शर्तों की सूची ने इस पूरी डील को अधर में लटका दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस्लामाबाद की चर्चाओं पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मध्य पूर्व में युद्ध के बादल छंटेंगे या तनाव की एक नई लहर शुरू होगी।

Unknown अप्रैल 11, 2026 0
US and Iran diplomatic meeting illustration showing peace talks tension over Middle East geopolitical conflict
US-Iran Peace Talks: क्या बनेगी ऐतिहासिक डील या भड़क सकती है नई जंग?

नई दिल्ली/इस्लामाबाद: वैश्विक कूटनीति के बेहद अहम मोड़ पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने जा रही है, जिसकी मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह बातचीत उम्मीद की किरण भी है और आशंकाओं से भरी भी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन सख्त चेतावनी भी दी है कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसे में यह वार्ता विश्वास और अविश्वास के बीच संतुलन साधने की चुनौती बन गई है। लेबनान बना सबसे बड़ा शुरुआती विवाद इस वार्ता की शुरुआत से पहले ही लेबनान का मुद्दा सबसे बड़ी अड़चन बनकर सामने आया है। ईरान चाहता है कि लेबनान में पूर्ण युद्धविराम लागू हो, जबकि इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को रोकने के मूड में नहीं है। इस टकराव ने वार्ता की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इसमें तीसरे पक्ष की भूमिका भी बेहद अहम है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। ईरान इसे अपना संप्रभु क्षेत्र बताते हुए नए ट्रांजिट नियम और टोल लागू करना चाहता है, जबकि अमेरिका ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह मुद्दा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बन चुका है। परमाणु कार्यक्रम पर आमने-सामने ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस वार्ता का सबसे संवेदनशील और जटिल पहलू है। डोनाल्ड ट्रंप का स्पष्ट रुख है कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा, जबकि ईरान परमाणु अप्रसार संधि का हवाला देते हुए शांतिपूर्ण उपयोग के लिए इसे अपना अधिकार बता रहा है। यही मतभेद इस मुद्दे को सबसे कठिन बना देता है। ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ पर टकराव मध्य पूर्व में ईरान का प्रभाव उसके “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” नेटवर्क के जरिए मजबूत होता है, जिसमें लेबनान, यमन और गाजा के संगठन शामिल हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताता है। सीरिया में हालिया घटनाओं के बावजूद ईरान इस नेटवर्क को छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। $120 अरब की मांग ने बढ़ाई मुश्किल वार्ता से पहले ही ईरान ने अपनी जमी हुई लगभग 120 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंध हटाने की मांग रख दी है। अमेरिका ने इस पर अभी तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं दी है, जिससे यह आशंका बनी हुई है कि यह मांग वार्ता को पटरी से उतार सकती है। क्या होगा नतीजा? इन सभी जटिल मुद्दों के बीच यह साफ है कि यह वार्ता या तो इतिहास रच सकती है या फिर तनाव को और गहरा कर सकती है। अगर दोनों पक्ष लचीलापन दिखाते हैं, तो मध्य पूर्व में शांति की नई शुरुआत हो सकती है, लेकिन अगर मतभेद कायम रहे, तो यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Iran, Israel, and US tensions amid ongoing ceasefire and Hezbollah strikes.
Iran–US–Israel War: सीजफायर के बीच भी तनाव बरकरार

Middle East Conflict Update: अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन का सीजफायर लागू होने के बावजूद हालात सामान्य नहीं हुए हैं। इजरायल लगातार लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमले कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। ईरान का बड़ा बयान ईरान ने खाड़ी देशों पर हमलों से साफ इनकार किया कहा: ये हमले इजरायल या अमेरिका का काम हो सकते हैं रिवोल्यूशनरी गार्ड ने आधिकारिक बयान में अपनी भूमिका नकार दी इजरायल का एक्शन जारी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले IDF चीफ ने बिन्त जबील इलाके का दौरा किया सैनिकों को निर्देश: “उत्तर के नागरिकों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित करें” पाकिस्तान में अहम बातचीत अमेरिका–ईरान के बीच फाइनल सीजफायर पर बातचीत पाकिस्तान में प्रस्तावित पाकिस्तान इसे अपनी डिप्लोमैटिक अग्निपरीक्षा मान रहा है लेकिन पाक रक्षा मंत्री के इजरायल पर विवादित बयान से माहौल तनावपूर्ण है अमेरिकी ड्रोन हुआ गायब US Navy का MQ-4C Triton surveillance drone फारस की खाड़ी में उड़ान के दौरान अचानक संपर्क टूटा आखिरी बार ईरान की दिशा में मुड़ते देखा गया तेल बाजार पर असर सऊदी अरब के मुताबिक: कई तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले East-West pipeline प्रभावित उत्पादन क्षमता में 7 लाख बैरल/दिन की कमी कुल मिलाकर सीजफायर सिर्फ अस्थायी राहत है जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण है कूटनीति और युद्ध दोनों साथ-साथ चल रहे हैं आने वाले दिनों में पाकिस्तान में होने वाली बातचीत इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकती है।  

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Iran claims downing two US fighter jets, rescue helicopters targeted amid escalating US-Iran conflict
अमेरिका को बड़ा झटका? ईरान ने दो फाइटर जेट गिराने का किया दावा, रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी निशाने पर

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे में दो अमेरिकी फाइटर जेट मार गिराए हैं और बचाव अभियान में लगे हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया। दो अमेरिकी विमानों को मार गिराने का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान ने F-15E स्ट्राइक ईगल को निशाना बनाया इसके अलावा A-10 वारथॉग पर भी हमला किया गया हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि सीमित है। एक पायलट सुरक्षित, दूसरा लापता F-15E में दो क्रू मेंबर सवार थे इनमें से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है दूसरा अब भी लापता बताया जा रहा है अमेरिकी विशेष बल उसकी तलाश में जुटे हैं। रेस्क्यू मिशन पर भी हमला लापता पायलट की तलाश में गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमला हुआ हालांकि, दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे पायलट पर इनाम ईरान ने अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर इनाम का ऐलान किया है स्थानीय मीडिया के जरिए लोगों से जिंदा पकड़ने या सूचना देने की अपील की गई ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा: “यह युद्ध है… इससे बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” यानी सैन्य टकराव के बावजूद कूटनीतिक बातचीत जारी रह सकती है बढ़ता तनाव लगातार एयर स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई पायलट की तलाश और इनाम रेस्क्यू ऑपरेशन पर हमला ये सभी घटनाएं संकेत देती हैं कि संघर्ष अब और गंभीर और अनिश्चित होता जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0