Nepal Politics

Balen Shah celebrating victory as RSP wins majority seats in Nepal parliamentary elections 2026
नेपाल चुनाव 2026: बालेन शाह की RSP की ऐतिहासिक जीत, PM मोदी ने फोन कर दी बधाई

  नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संसदीय चुनावों में नई राजनीतिक ताकत बनकर उभरी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतिनिधि सभा की अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार Balen Shah के नेतृत्व में RSP की इस जीत को नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को टेलीफोन पर Balen Shah और RSP अध्यक्ष Rabi Lamichhane से बातचीत कर उन्हें जीत की बधाई दी।   165 में से 125 सीटों पर जीत नेपाल के संसदीय चुनावों में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत 165 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। सोमवार शाम तक 163 सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे, जिनमें RSP ने 125 सीटें जीतकर करीब 76 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमा लिया। करीब साढ़े तीन साल पुरानी इस पार्टी ने देशभर में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक राजनीतिक दलों के कई दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ दिया।   ओली का गढ़ भी ढहा Balen Shah ने पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को झापा-5 सीट से 68,348 मतों के बड़े अंतर से हराया। यह अंतर नेपाल के संसदीय इतिहास में किसी भी उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा रहा है। झापा-5 को लंबे समय से ओली का मजबूत गढ़ माना जाता रहा था।   दो-तिहाई बहुमत की ओर RSP आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भी RSP करीब 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ आगे चल रही है। अगर यह रुझान कायम रहता है, तो 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी को लगभग 184 सीटें मिल सकती हैं, जो दो-तिहाई बहुमत के करीब होगा। 1991 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को इतना बड़ा जनादेश मिलने की संभावना बन रही है।   मोदी ने जताई सहयोग की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने Balen Shah और Rabi Lamichhane को चुनावी जीत की बधाई दी और भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा प्रयासों से आने वाले वर्षों में भारत और नेपाल के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। वहीं RSP अध्यक्ष Rabi Lamichhane ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी पार्टी आपसी सम्मान और साझा समृद्धि पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक पर्यटन, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी जताई।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Balen Shah linked RSP gains major lead in election
नेपाल चुनाव: वोटों की गिनती अंतिम चरण में, बालेन की पार्टी दो-तिहाई बहुमत की ओर

  नेपाल में संसदीय चुनावों की मतगणना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है और शुरुआती रुझानों में राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। राजधानी काठमांडू के मेयर Balen Shah से जुड़ी Rastriya Swatantra Party (RSP) इस चुनाव में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है और संसद में दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ताजा जानकारी के अनुसार Election Commission Nepal द्वारा जारी आंकड़ों में बताया गया है कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) श्रेणी के तहत RSP ने अब तक 124 सीटें जीत ली हैं और एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र में भी बढ़त बनाए हुए है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल Nepali Congress को अब तक 17 सीटें मिली हैं और वह एक अन्य सीट पर आगे चल रहा है। इसके अलावा Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) (CPN-UML) ने आठ सीटें जीती हैं और एक क्षेत्र में बढ़त बनाए हुए है, जबकि Communist Party of Nepal (Maoist Centre) को सात सीटें मिली हैं। Rastriya Prajatantra Party (RPP) ने एक सीट हासिल की है, जबकि श्रम संस्कृति पार्टी को तीन सीटों पर जीत मिली है। इस बीच प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र उम्मीदवार Mahabir Pun भी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए निर्वाचित हुए हैं। इसी के साथ प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) श्रेणी के वोटों की गिनती भी जारी है और यहां भी RSP को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। अब तक कुल 10.9 मिलियन वोटों में से लगभग 8.12 मिलियन वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। सुबह 9 बजे (NST) तक RSP को लगभग 39 लाख से अधिक वोट मिल चुके हैं, जो कुल गिने गए वोटों का लगभग 50 प्रतिशत है। इसके बाद नेपाली कांग्रेस को करीब 13 लाख और CPN-UML को लगभग 11 लाख वोट मिले हैं। नेपाल के चुनावी नियमों के अनुसार PR प्रणाली के तहत सीट पाने के लिए किसी भी पार्टी को कुल वोटों का कम से कम 3 प्रतिशत हासिल करना जरूरी होता है। मौजूदा रुझानों के आधार पर RSP, नेपाली कांग्रेस, CPN-UML, माओवादी सेंटर और RPP ही इस सीमा को पार करती दिखाई दे रही हैं। अगर अंतिम परिणाम तक यही स्थिति बनी रहती है, तो अनुमान है कि PR श्रेणी में RSP को लगभग 60 सीटें मिल सकती हैं, जबकि नेपाली कांग्रेस को लगभग 20 सीटें, CPN-UML को 17 सीटें, माओवादी सेंटर को करीब 8 सीटें और RPP को लगभग 5 सीटें मिल सकती हैं। नेपाल के 275 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को 184 सीटों की जरूरत होती है। मौजूदा रुझानों के आधार पर यदि RSP को PR श्रेणी की अनुमानित 60 सीटें मिलती हैं और FPTP की मौजूदा सीटें इसमें जोड़ दी जाती हैं, तो पार्टी का कुल आंकड़ा लगभग 185 सीटों तक पहुंच सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर यही रुझान अंतिम नतीजों तक जारी रहता है तो RSP नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सकती है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Balen Shah addressing supporters during Nepal election campaign amid rising popularity
रैपर से मेयर और अब पीएम की दौड़ में बालेन शाह, नेपाल चुनाव में नई राजनीति का उभरता चेहरा

  नेपाल की राजनीति में इस समय एक नया नाम तेजी से चर्चा में है। रैपर से नेता बने Balen Shah आम चुनाव के शुरुआती रुझानों में बड़ी बढ़त के साथ उभरते दिख रहे हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि वह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। जनवरी तक राजधानी Kathmandu के मेयर रहे 35 वर्षीय बालेन शाह का मुकाबला इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं से था। इनमें KP Sharma Oli और Gagan Thapa जैसे बड़े नाम शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार बालेन शाह की पार्टी Rastriya Swatantra Party (आरएसपी) 165 प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में से दो-तिहाई से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक आरएसपी ने अब तक 24 सीटें जीत ली हैं और 93 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं Nepali Congress दूसरे स्थान पर है, जिसने एक सीट जीती है और 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। जबकि Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) (यूएमएल) एक सीट जीतकर 10 सीटों पर आगे चल रही है। नेपाल में पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मतगणना धीमी रहती है। दूरदराज इलाकों से मतपेटियां लाने के लिए हेलिकॉप्टर का सहारा लेना पड़ता है, इसलिए अंतिम परिणाम आने में कई दिन लग सकते हैं।   कौन हैं बालेन शाह? 35 वर्षीय बालेन शाह पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं और कई वर्षों तक नेपाल के हिप-हॉप संगीत जगत “नेफहॉप” से जुड़े रहे हैं। उनका जन्म 1990 में काठमांडू में हुआ था। उनके पिता राम नारायण शाह आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और उनकी मां ध्रुवदेवी शाह हैं। संगीत के साथ-साथ बालेन शाह को एक रैपर, म्यूजिक प्रोड्यूसर, गीतकार और कवि के रूप में भी जाना जाता है। साल 2022 में जब उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता, तो यह नेपाल की राजनीति के लिए बड़ा आश्चर्य था। इसके बाद युवा मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।   केपी ओली के गढ़ में बढ़त बालेन शाह झापा-5 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसे पारंपरिक रूप से केपी शर्मा ओली का मजबूत क्षेत्र माना जाता है। शुरुआती मतगणना में शाह यहां करीब 10,000 वोटों से आगे बताए जा रहे हैं। इस चुनाव को नेपाल में पुराने और नए नेतृत्व के बीच मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है। देश के करीब 8 लाख युवा मतदाता पहली बार वोट कर रहे हैं, जिससे चुनाव का रुख बदलता दिख रहा है। अगर बालेन शाह जीतते हैं, तो यह नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत होगा, क्योंकि पिछले कई दशकों से देश में पारंपरिक दलों का ही दबदबा रहा है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
Balendra Shah’s Rastriya Swatantra Party leads Nepal 2026 elections, historic victory in sight
नेपाल चुनाव 2026 में बालेन शाह की बड़ी बढ़त, RSP 90 से ज्यादा सीटों पर आगे; दिग्गज दल पीछे

Nepal General Election 2026 की मतगणना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। रैपर से नेता बने Balendra Shah की पार्टी Rastriya Swatantra Party ने चुनावी मुकाबले में जबरदस्त बढ़त बना ली है। ताजा रुझानों के अनुसार आरएसपी करीब 98 सीटों पर आगे चल रही है, जिससे पार्टी की ऐतिहासिक जीत की संभावना मजबूत हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह बढ़त बरकरार रहती है तो नेपाल की पारंपरिक राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।   झापा-5 सीट पर ओली से काफी आगे बालेन शाह झापा-5 संसदीय क्षेत्र में बालेन शाह ने मजबूत बढ़त बना ली है। उन्हें अब तक लगभग 39,284 वोट मिल चुके हैं। वहीं चार बार प्रधानमंत्री रह चुके K. P. Sharma Oli को करीब 10,293 वोट मिले हैं। इस सीट पर Samir Tamang (श्रम संस्कृति पार्टी) को 6,324 वोट प्राप्त हुए हैं। ओली का यह इलाका उनका मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, ऐसे में यहां उनकी बड़ी हार की संभावना को बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।   संसद की 275 सीटों पर चुनाव नेपाल की संसद के निचले सदन में कुल 275 सीटें हैं। इनमें से 165 सीटों पर First-Past-the-Post (FPTP) प्रणाली के तहत सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 110 सीटें Proportional Representation (PR) के जरिए तय होती हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 138 सीटों का आंकड़ा हासिल करना जरूरी होता है। इस चुनाव में देशभर से कुल 68 राजनीतिक दल मैदान में हैं। लगभग 3,406 उम्मीदवार एफपीटीपी प्रणाली के तहत और 1,270 उम्मीदवार आनुपातिक प्रतिनिधित्व श्रेणी में चुनाव लड़ रहे हैं।   पारंपरिक पार्टियां पीछे मतगणना के शुरुआती रुझानों में पारंपरिक राजनीतिक दल काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। Rastriya Swatantra Party – 93 सीटों पर बढ़त Nepal Communist Party – 10 सीटों पर आगे Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) – 10 सीटों पर बढ़त Nepali Congress – 9 सीटों पर आगे अन्य छोटी पार्टियां मिलकर करीब 6 सीटों पर आगे चल रही हैं।   युवाओं का समर्थन बना बड़ा फैक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं और शहरी मतदाताओं का समर्थन बालेन शाह की पार्टी को बड़ी बढ़त दिला रहा है। पूर्व Kathmandu मेयर रहे शाह ने भ्रष्टाचार और पारंपरिक राजनीति के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। यदि अंतिम नतीजे भी इसी तरह रहते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक नई ताकत उभर सकती है और देश को लंबे समय बाद स्थिर सरकार मिलने की उम्मीद भी बढ़ सकती है।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
Nepal voters casting ballots as protests erupt against KP Sharma Oli amid high-stakes national elections
नेपाल में निर्णायक मतदान: युवा आक्रोश के बाद सियासत का बड़ा इम्तिहान, 1.89 करोड़ मतदाता करेंगे सत्ता का फैसला

महीनों पहले जनआंदोलन से गिरी थी सरकार, अब चुनावी मैदान में आमने-सामने दिग्गज और नई पीढ़ी नेपाल में गुरुवार को ऐतिहासिक आम चुनाव की शुरुआत हो गई। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब कुछ महीने पहले युवाओं के उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli की सरकार गिर गई थी। इस बार का मतदान सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि पुरानी राजनीतिक व्यवस्था और नई जनरेशन के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। देशभर में 1.89 करोड़ से अधिक मतदाता 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं। चुनाव को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि पिछली बार सड़कों पर उतरी जेनरेशन-ज़ेड की भूमिका ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया था। 10,967 बूथों पर मतदान, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक चलेगा। पूरे देश में 10,967 मतदान बूथ और 23,112 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, मतपेटियों को सुरक्षित रखने के बाद तुरंत मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पहले चरण यानी फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के नतीजे 24 घंटे के भीतर आने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। करीब 3 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। दुर्गम इलाकों से मतपेटियों को हेलीकॉप्टर के जरिए लाया जाएगा। गृह मंत्री ओम प्रकाश अर्याल ने मतदाताओं से निर्भीक होकर मतदान करने की अपील की है। मतदान को सुचारू बनाने के लिए सरकार ने तीन दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। 275 सीटों पर मुकाबला, 65 पार्टियां मैदान में प्रतिनिधि सभा की 275 सीटों में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव (फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट) से फैसला होगा, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भरी जाएंगी। सीधे चुनाव वाली 165 सीटों पर 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि 110 आनुपातिक सीटों के लिए 3,135 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कुल 65 राजनीतिक दल इस चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। सड़कों से संसद तक: कैसे बदला सियासी माहौल राजनीतिक उथल-पुथल की शुरुआत 8 और 9 सितंबर 2025 को हुई थी, जब हजारों युवा काठमांडू समेत कई शहरों में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र की कमी के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। हिंसक झड़पों में 75 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया। बढ़ते दबाव के बीच KP Sharma Oli ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राष्ट्रपति Ramchandra Paudel ने प्रतिनिधि सभा भंग कर दी और पूर्व मुख्य न्यायाधीश Sushila Karki को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया। पुराना अनुभव बनाम नई सोच यह चुनाव अब पारंपरिक दलों और उभरते राजनीतिक विकल्पों के बीच सीधी टक्कर में बदल गया है। 75 वर्षीय ओली एक बार फिर अपनी पार्टी Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) (सीपीएन-यूएमएल) के चेहरे के रूप में स्थिरता का दावा कर रहे हैं। वहीं Nepali Congress ने 49 वर्षीय गगन थापा को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर युवा नेतृत्व की झलक देने की कोशिश की है। दूसरी ओर, Rastriya Swotantra Party (आरएसपी) खुद को जनआंदोलन की असली आवाज बता रही है। पार्टी के नेता Rabi Lamichhane और काठमांडू के मेयर Balendra Shah युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं। 35 वर्षीय बालेन्द्र शाह झापा-5 सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उनका मुकाबला सीधे ओली से है। यह सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित सीटों में गिनी जा रही है, क्योंकि ओली यहां से छह बार जीत चुके हैं। क्या बदलेगा नेपाल का राजनीतिक भविष्य? इस चुनाव को नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की परीक्षा माना जा रहा है। क्या युवा आंदोलन की ऊर्जा सत्ता में तब्दील होगी, या अनुभवी नेतृत्व फिर से भरोसा जीत लेगा-इसका जवाब आने वाले नतीजों में छिपा है। नेपाल की जनता आज सिर्फ सांसद नहीं चुन रही, बल्कि देश की भावी दिशा भी तय कर रही है।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0