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Balendra Shah’s RSP Leads Nepal Elections 2026

नेपाल चुनाव 2026 में बालेन शाह की बड़ी बढ़त, RSP 90 से ज्यादा सीटों पर आगे; दिग्गज दल पीछे

surbhi मार्च 7, 2026 0
Balendra Shah’s Rastriya Swatantra Party leads Nepal 2026 elections, historic victory in sight
Balendra Shah RSP Leads Nepal 2026 Elections

Nepal General Election 2026 की मतगणना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। रैपर से नेता बने Balendra Shah की पार्टी Rastriya Swatantra Party ने चुनावी मुकाबले में जबरदस्त बढ़त बना ली है। ताजा रुझानों के अनुसार आरएसपी करीब 98 सीटों पर आगे चल रही है, जिससे पार्टी की ऐतिहासिक जीत की संभावना मजबूत हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह बढ़त बरकरार रहती है तो नेपाल की पारंपरिक राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 

झापा-5 सीट पर ओली से काफी आगे बालेन शाह

झापा-5 संसदीय क्षेत्र में बालेन शाह ने मजबूत बढ़त बना ली है। उन्हें अब तक लगभग 39,284 वोट मिल चुके हैं। वहीं चार बार प्रधानमंत्री रह चुके K. P. Sharma Oli को करीब 10,293 वोट मिले हैं।

इस सीट पर Samir Tamang (श्रम संस्कृति पार्टी) को 6,324 वोट प्राप्त हुए हैं। ओली का यह इलाका उनका मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, ऐसे में यहां उनकी बड़ी हार की संभावना को बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

 

संसद की 275 सीटों पर चुनाव

नेपाल की संसद के निचले सदन में कुल 275 सीटें हैं। इनमें से 165 सीटों पर First-Past-the-Post (FPTP) प्रणाली के तहत सीधे चुनाव होते हैं, जबकि 110 सीटें Proportional Representation (PR) के जरिए तय होती हैं।

सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 138 सीटों का आंकड़ा हासिल करना जरूरी होता है।

इस चुनाव में देशभर से कुल 68 राजनीतिक दल मैदान में हैं। लगभग 3,406 उम्मीदवार एफपीटीपी प्रणाली के तहत और 1,270 उम्मीदवार आनुपातिक प्रतिनिधित्व श्रेणी में चुनाव लड़ रहे हैं।

 

पारंपरिक पार्टियां पीछे

मतगणना के शुरुआती रुझानों में पारंपरिक राजनीतिक दल काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं।

  • Rastriya Swatantra Party – 93 सीटों पर बढ़त
  • Nepal Communist Party – 10 सीटों पर आगे
  • Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) – 10 सीटों पर बढ़त
  • Nepali Congress – 9 सीटों पर आगे

अन्य छोटी पार्टियां मिलकर करीब 6 सीटों पर आगे चल रही हैं।

 

युवाओं का समर्थन बना बड़ा फैक्टर

विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं और शहरी मतदाताओं का समर्थन बालेन शाह की पार्टी को बड़ी बढ़त दिला रहा है। पूर्व Kathmandu मेयर रहे शाह ने भ्रष्टाचार और पारंपरिक राजनीति के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।

यदि अंतिम नतीजे भी इसी तरह रहते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक नई ताकत उभर सकती है और देश को लंबे समय बाद स्थिर सरकार मिलने की उम्मीद भी बढ़ सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच वार्ता, ब्रह्मोस समेत कई रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर

जकार्ता, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच जकार्ता में प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, दूरसंचार, स्वास्थ्य और डिजिटल सहयोग सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े रक्षा समझौतों सहित कई अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।   रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती   बैठक में दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की खरीद और रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, जिससे दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।   व्यापार और तकनीकी सहयोग पर भी जोर   दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला, इस्पात, कृषि, डिजिटल प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। दोनों देशों ने मुक्त, समावेशी और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई।   भारत-इंडोनेशिया संबंधों में नया अध्याय   प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की व्यापक रणनीतिक साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है। वहीं राष्ट्रपति प्रबोवो ने दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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ईरान तनाव के बीच बहरीन पहुंचे एस. जयशंकर, शाह को दिया पीएम मोदी का संदेश; रणनीतिक साझेदारी पर हुई अहम चर्चा

मनामा: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को बहरीन की राजधानी मनामा में बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं एवं संदेश सौंपा। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान बहरीन भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आया था। शाह हमद से मुलाकात, भारतीय समुदाय का जताया आभार विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा और युवराज एवं प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं पहुंचाईं और बहरीन में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने के लिए शाह का आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने कहा कि भारत, बहरीन के नेतृत्व द्वारा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को दिए जा रहे निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन को अत्यंत महत्व देता है। बहरीन के विदेश मंत्री से भी हुई अहम बैठक जयशंकर ने बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। खाड़ी देशों के दौरे पर हैं जयशंकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के दौरे पर हैं। इस यात्रा में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, निवेश, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। कतर में भी हुई थी अहम बैठक बहरीन पहुंचने से पहले जयशंकर ने कतर का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। क्यों अहम है यह दौरा? जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हालिया संघर्ष के दौरान बहरीन पर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले भी हुए थे। इसके अलावा कतर और ओमान अमेरिका-ईरान के बीच संभावित अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में भारत का खाड़ी देशों के साथ लगातार उच्चस्तरीय संवाद क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे का कार्यक्रम खाड़ी देशों का दौरा पूरा करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, जहां वह 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14-15 जुलाई को वह ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे।  

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Indian-origin businessman Gaurav Srivastava faces fresh fraud allegations linked to alleged defence deals in Indonesia, according to an international investigative report.
CIA एजेंट बनकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को ठगने का आरोप, भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर 425 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का दावा

जकार्ता/वॉशिंगटन: अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। एक अंतरराष्ट्रीय खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीवास्तव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का विश्वास हासिल किया और रक्षा सौदों के नाम पर करीब 425 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया। OCCRP और टेम्पो की रिपोर्ट में बड़ा दावा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) और इंडोनेशियाई पत्रिका Tempo की संयुक्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित फर्जीवाड़ा वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुआ। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना को 36 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और आधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम उपलब्ध कराने का दावा किया था। फर्जी कंपनियों के जरिए लिया गया कर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के एक कथित "गोपनीय सरकारी कार्यक्रम" का हवाला दिया और रक्षा परियोजनाओं के नाम पर करीब 425 करोड़ रुपये का कथित फर्जी कर्ज मंजूर कराया। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इसी धन का इस्तेमाल लॉस एंजिलिस में लगभग 208 करोड़ रुपये की कीमत वाला एक आलीशान बंगला खरीदने के लिए किया गया। राष्ट्रपति का भरोसा जीतने का आरोप रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का इतना विश्वास जीत लिया था कि वे उन्हें "मिस्टर G" कहकर संबोधित करते थे। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी ऐसी जानकारियों का इस्तेमाल किया, जो केवल करीबी लोगों को ही मालूम थीं। इनमें यह जानकारी भी शामिल थी कि प्रबोवो अपने घर में मकड़ी के जालों को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं और उन्हें हटवाना पसंद नहीं करते। किए कई बड़े दावे रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने: वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में भूमिका निभाई। राष्ट्रपति प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इंडोनेशियाई सरकार का बयान इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत ने कहा कि जिन रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी रक्षा सौदे को अंतिम मंजूरी नहीं मिली थी, इसलिए सरकार को कोई प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। जांच जारी यह मामला सामने आने के बाद गौरव श्रीवास्तव की गतिविधियां एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई हैं। अमेरिकी और इंडोनेशियाई एजेंसियां रिपोर्ट में किए गए दावों की जांच कर रही हैं। फिलहाल इन आरोपों पर गौरव श्रीवास्तव की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

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