नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में रात के खाने के बाद ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाना कई लोगों की पसंद होती है। कुछ लोग इसे दिनभर की थकान दूर करने का तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए यह डेजर्ट का अहम हिस्सा होती है। लेकिन क्या रोजाना डिनर के बाद आइसक्रीम खाना सेहत के लिए सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन अगर इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए तो इससे पाचन, वजन, ब्लड शुगर और नींद पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। डिनर के बाद आइसक्रीम खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? आइसक्रीम में शुगर, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। जब भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन किया जाता है, तो शरीर को एक साथ ज्यादा फैट और शुगर को पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म दिन की तुलना में थोड़ा धीमा हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर शरीर में जमा होने लगती है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन प्रक्रिया हो सकती है धीमी अगर आपने ऑयली या भारी भोजन किया है और उसके तुरंत बाद आइसक्रीम खा लेते हैं, तो इससे: पेट भारी लगना गैस बनना ब्लोटिंग एसिडिटी पेट दर्द सुस्ती महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैट और शुगर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन को पूरी तरह पचने में अधिक समय लग सकता है। ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर सामान्य आइसक्रीम में मौजूद अधिक शुगर ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए रात में मीठी आइसक्रीम का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। ब्लड शुगर अचानक बढ़ने और फिर गिरने की वजह से: देर रात भूख लगना थकान महसूस होना सुस्ती बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित रात में हाई-फैट और हाई-शुगर फूड खाने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पेट में गैस, एसिडिटी या भारीपन की वजह से नींद बार-बार टूट सकती है। कुछ लोगों में ठंडी चीजें खाने के बाद शरीर की अलर्टनेस भी बढ़ जाती है, जिससे आसानी से नींद नहीं आती। किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? रात में आइसक्रीम खाने से इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: लैक्टोज इनटॉलरेंस से पीड़ित लोग डायबिटीज के मरीज मोटापे से परेशान लोग एसिडिटी या गैस की समस्या वाले लोग कमजोर पाचन वाले लोग क्या पूरी तरह आइसक्रीम छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर के बाद कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन रोजाना और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन पाचन, वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको पहले से डायबिटीज, मोटापा या पाचन संबंधी समस्या है, तो रात में हाई-कैलोरी और अधिक मीठे डेजर्ट से दूरी बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
आज के दौर में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ी है। ऐसे में प्रोटीन को शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में गिना जाता है। मांसपेशियों की मजबूती से लेकर इम्यून सिस्टम, त्वचा, बाल और शरीर की मरम्मत तक, प्रोटीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, शाकाहारी और वीगन डाइट अपनाने वाले लोगों के सामने अक्सर यह चुनौती रहती है कि वे अपनी दैनिक प्रोटीन जरूरत को कैसे पूरा करें। अधिकतर लोग दाल, दूध, पनीर या सोया को ही प्रोटीन का मुख्य स्रोत मानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ फलों में भी प्रोटीन पाया जाता है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की क्लिनिकल डाइटीशियन फियोना संपत के अनुसार, कुछ फल ऐसे हैं जो विटामिन, मिनरल्स और फाइबर के साथ-साथ शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन भी प्रदान करते हैं। 1. अमरूद: विटामिन C के साथ प्रोटीन का भी खजाना अमरूद को आमतौर पर विटामिन C का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन इसमें प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। लगभग 150 ग्राम (एक कप) अमरूद में करीब 2 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है। नियमित सेवन से ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को भी लाभ मिल सकता है। 2. एवोकाडो: हेल्दी फैट और प्रोटीन का शानदार कॉम्बिनेशन एवोकाडो बाकी फलों की तुलना में थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन पोषण के मामले में बेहद समृद्ध माना जाता है। एक मीडियम एवोकाडो में लगभग 4 से 5 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसमें हेल्दी मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होते हैं। पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर यह फल लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। ब्लड प्रेशर और डाइजेशन को बेहतर रखने में मदद करता है। 3. कटहल: वीगन डाइट वालों की पसंद हाल के वर्षों में कटहल यानी जैकफ्रूट की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। एक कप कच्चे कटहल में लगभग 3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसमें पोटैशियम और फाइबर भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। यह शरीर को ऊर्जा देने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक माना जाता है। गट हेल्थ को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। 4. ब्लैकबेरी: छोटा फल, बड़े फायदे ब्लैकबेरी केवल स्वाद में ही नहीं, पोषण के मामले में भी काफी फायदेमंद है। 150 ग्राम ब्लैकबेरी में करीब 1.5 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें एंथोसायनिन्स नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यह सूजन कम करने, दिमागी कार्यक्षमता बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। विटामिन C की मौजूदगी त्वचा और इम्यूनिटी के लिए भी लाभकारी है। 5. खुबानी (Apricot): आंखों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद खुबानी पोषण से भरपूर फल है, जिसमें प्रोटीन के साथ कई जरूरी विटामिन भी मौजूद होते हैं। 150 ग्राम खुबानी में लगभग 1.5 ग्राम प्रोटीन मिलता है। इसमें विटामिन A, विटामिन C और पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह आंखों की सेहत, मांसपेशियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी माना जाता है। क्या फल प्रोटीन का पूरा विकल्प हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, फल कभी भी दाल, डेयरी उत्पाद, अंडे, मछली या लीन मीट जैसे मुख्य प्रोटीन स्रोतों का विकल्प नहीं बन सकते। लेकिन इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाने से शरीर को अतिरिक्त पोषण, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और थोड़ी मात्रा में प्रोटीन जरूर मिलता है। इसलिए अगर आप अपनी डाइट को और ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इन फलों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
हम अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या खाना है, लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ एक-दूसरे के साथ मिलकर ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट तभी शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं जब उन्हें सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। फैमिली फिजिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सिल्जा शेफर के मुताबिक, कोई एक सुपरफूड या फूड कॉम्बिनेशन खराब खानपान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन कुछ खास संयोजन शरीर को पोषक तत्वों का अधिक लाभ दिलाने में मदद करते हैं। 1. गाजर या कद्दू के साथ ऑलिव ऑयल गाजर और कद्दू में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में विटामिन A में बदलता है। यह पोषक तत्व वसा की मौजूदगी में बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। फायदा: आंखों, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी। 2. टमाटर के साथ एवोकाडो या अच्छा तेल टमाटर में मौजूद लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। इसे शरीर में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हेल्दी फैट की जरूरत होती है। फायदा: हृदय और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद। 3. सब्जियों पर नट्स और बीजों की टॉपिंग बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या कद्दू के बीज जैसी चीजें हेल्दी फैट और फाइबर प्रदान करती हैं। फायदा: फैट-सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में मदद और अतिरिक्त पोषण। 4. प्रोटीन और विटामिन C का संयोजन कोलेजन के निर्माण के लिए शरीर को प्रोटीन के साथ विटामिन C की भी आवश्यकता होती है। बेहतरीन उदाहरण: दही और बेरीज दाल और शिमला मिर्च मछली और नींबू फायदा: त्वचा, कनेक्टिव टिश्यू और घाव भरने की प्रक्रिया को समर्थन। 5. ओट्स के साथ बेरीज या सेब ओट्स में मौजूद प्लांट-बेस्ड आयरन विटामिन C के साथ ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित होता है। फायदा: आयरन की कमी से बचाव में मदद। 6. दाल या बीन्स के साथ टमाटर और शिमला मिर्च दालों में मौजूद नॉन-हीम आयरन को शरीर बेहतर तरीके से उपयोग कर सके, इसके लिए विटामिन C जरूरी है। फायदा: शाकाहारी लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी। 7. हल्दी के साथ काली मिर्च हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने आप में कम अवशोषित होता है, लेकिन काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन इसकी जैव उपलब्धता को कई गुना बढ़ा देता है। फायदा: सूजन और इंफ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं में मददगार। 8. प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स का साथ प्रीबायोटिक्स (फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ) अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं, जबकि प्रोबायोटिक्स सीधे फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करते हैं। बेहतरीन उदाहरण: दही या केफिर के साथ फल दलिया और योगर्ट फायदा: आंतों के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद। सिर्फ फूड कॉम्बिनेशन ही नहीं, संतुलित जीवनशैली भी जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि पोषक तत्वों का अवशोषण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। आंतों का स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ बीमारियां भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच चिया सीड्स और सब्जा के बीज (तुलसी के बीज) काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। दोनों ही फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे और उपयोग अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एसिडिटी, कब्ज, वजन घटाने या फिटनेस के लिए आखिर कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? चिया और सब्जा में क्या है अंतर? चिया सीड्स चिया सीड्स Salvia Hispanica पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में: ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रोटीन कैल्शियम मैग्नीशियम फाइबर पाया जाता है। ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। सब्जा सीड्स सब्जा या तुलसी के बीज पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे हैं। इनमें: भरपूर फाइबर एंटीऑक्सीडेंट कम कैलोरी पाई जाती है। इन्हें विशेष रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। एसिडिटी और कब्ज में कौन ज्यादा फायदेमंद? दोनों बीज पानी में भिगोने पर जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती है। सब्जा सीड्स एसिडिटी, पेट की जलन, गैस और कब्ज से राहत दिलाने के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं। चिया सीड्स गट हेल्थ सुधारने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अगर आपकी मुख्य समस्या एसिडिटी या कब्ज है, तो सब्जा के बीज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वजन घटाने में कौन मददगार? दोनों ही बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। चिया सीड्स में प्रोटीन और हेल्दी फैट अधिक होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। सब्जा सीड्स कम कैलोरी वाले होते हैं, इसलिए कैलोरी कंट्रोल करने वालों के लिए उपयोगी हैं। वजन घटाने के लिए दोनों अच्छे हैं, लेकिन कम कैलोरी डाइट में सब्जा और हाई-प्रोटीन डाइट में चिया अधिक फायदेमंद हो सकता है। शरीर को ठंडक पहुंचाने में कौन आगे? गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सब्जा के बीज लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। शरबत, नींबू पानी और फालूदा में सब्जा का उपयोग आम है। शरीर की गर्मी कम करने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सब्जा अधिक प्रभावी माना जाता है। फिटनेस और जिम करने वालों के लिए क्या बेहतर? अगर आपका लक्ष्य फिटनेस, मसल रिकवरी और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखना है, तो: चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक लाभदायक हैं। नियमित एक्सरसाइज करने वालों के लिए चिया बेहतर विकल्प माना जाता है। सेवन का सही तरीका सब्जा सीड्स 5 से 10 मिनट पानी में भिगोएं। शरबत, दूध, फालूदा या नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। चिया सीड्स कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोएं। स्मूदी, दही, ओट्स, सलाद या हेल्दी ड्रिंक्स में मिलाएं।
बेहतर पाचन और लंबी उम्र के लिए जापानी खानपान बना प्रेरणा दुनियाभर में जापान को लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ अच्छी आनुवंशिकता नहीं, बल्कि उनकी संतुलित जीवनशैली और पोषण से भरपूर खानपान भी बड़ी वजह है। जापान के लोग वर्षों से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते आ रहे हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स, प्रोबायोटिक्स और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये न केवल आंतों की सेहत को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 खास जापानी सुपरफूड्स के बारे में जो गट हेल्थ और माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। 1. फर्मेंटेड पत्ता गोभी (सॉकरक्राउट) जापानी भोजन में फर्मेंटेड फूड्स का महत्वपूर्ण स्थान है। फर्मेंटेड पत्ता गोभी, जिसे सॉकरक्राउट भी कहा जाता है, प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बढ़ावा देती है। साथ ही इसमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो इसे एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट बनाती है। इसे भोजन से पहले छोटी मात्रा में सलाद या साइड डिश के रूप में खाया जा सकता है। 2. कुजु (Kuzu) कुजु एक पारंपरिक जापानी आटा है जो कुडज़ू पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है। इसे प्राकृतिक थिकनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पाचन तंत्र को आराम पहुंचाने, रक्त शर्करा को संतुलित रखने और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। कुजु का उपयोग सूप, सॉस और हर्बल पेय बनाने में किया जाता है। 3. उमेबोशी पेस्ट उमेबोशी एक विशेष प्रकार के जापानी फल से तैयार किया गया फर्मेंटेड पेस्ट है। यह प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर माना जाता है। कम कैलोरी और कम वसा वाला यह खाद्य पदार्थ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। कई लोग इसे भोजन से पहले थोड़ी मात्रा में लेते हैं, जबकि कुछ इसे हर्बल ड्रिंक या चाय में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। 4. कुकिचा चाय जापान में लोकप्रिय कुकिचा चाय साधारण चाय की पत्तियों से नहीं, बल्कि पौधे की टहनियों और डंठलों से बनाई जाती है। इसमें कैफीन की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चाय पाचन में मदद करती है और शरीर के एसिड-बेस संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकती है। 5. मिसो सूप मिसो सूप जापान के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में से एक है। कई जापानी परिवार इसे नाश्ते में भी शामिल करते हैं। फर्मेंटेड सोयाबीन, समुद्री नमक और कोजी से तैयार मिसो प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन और कई आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। क्यों जरूरी है स्वस्थ माइक्रोबायोम? विशेषज्ञों के अनुसार, आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया केवल पाचन ही नहीं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को भी प्रभावित करते हैं। संतुलित माइक्रोबायोम सूजन को कम करने, पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण और शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। डाइट में धीरे-धीरे करें शामिल हालांकि ये सभी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं, लेकिन किसी भी नए फर्मेंटेड या विशेष खाद्य पदार्थ को डाइट में धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर होता है। जिन लोगों को विशेष स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें आहार में बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। जापानी खानपान से जुड़े ये सुपरफूड्स दिखाते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली केवल महंगे सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि सही और संतुलित भोजन से भी हासिल की जा सकती है।
पीरियड्स के दौरान या उससे पहले अचानक चॉकलेट, चिप्स, नमकीन स्नैक्स या मीठी चीजें खाने की इच्छा होना महिलाओं में बेहद सामान्य बात है। अक्सर इसे सिर्फ मूड स्विंग या भावनात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे शरीर की वास्तविक पोषण संबंधी जरूरतें और हार्मोनल परिवर्तन भी जिम्मेदार होते हैं। रेनबो हॉस्पिटल के रोजवॉक की सीनियर कंसल्टेंट-OBGY और इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. वैशाली शर्मा के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान होने वाली फूड क्रेविंग्स शरीर का एक प्राकृतिक संकेत हैं। ये हार्मोन, ब्रेन केमिस्ट्री, पोषण की जरूरतों और भावनात्मक बदलावों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम होती हैं। पीरियड्स के दौरान क्यों बढ़ती है क्रेविंग? मासिक धर्म चक्र के ल्यूटियल फेज में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में तेजी से बदलाव आता है। इसका असर मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन नामक केमिकल पर पड़ता है, जो मूड और मानसिक संतुलन को नियंत्रित करता है। जब सेरोटोनिन का स्तर कम होता है, तब शरीर शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग करता है। यही कारण है कि इस दौरान मीठा, चॉकलेट और कंफर्ट फूड्स खाने की इच्छा बढ़ जाती है। चॉकलेट की क्रेविंग का क्या मतलब है? चॉकलेट, विशेष रूप से डार्क चॉकलेट, मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होती है। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने, मूड को संतुलित रखने और थकान कम करने में मदद करता है। पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं में मैग्नीशियम का स्तर कम हो सकता है, जिससे चॉकलेट खाने की इच्छा बढ़ती है। इसके अलावा चॉकलेट खाने से डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे "फील-गुड" हार्मोन रिलीज होते हैं, जो तनाव, चिड़चिड़ापन और थकान को कम करने में मदद करते हैं। नमकीन चीजें खाने की इच्छा क्यों होती है? कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान चिप्स, अचार, फ्राइज या अन्य नमकीन स्नैक्स खाने का मन करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में फ्लूइड बैलेंस और इलेक्ट्रोलाइट्स के बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि अत्यधिक नमक का सेवन ब्लोटिंग और वॉटर रिटेंशन को बढ़ा सकता है। ऐसे में प्रोसेस्ड स्नैक्स की बजाय रोस्टेड नट्स, बीज और घर के बने हेल्दी स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। मीठा और कार्बोहाइड्रेट की क्रेविंग क्यों होती है? पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को केक, पेस्ट्री, ब्रेड, पास्ता या अन्य कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खाने का मन करता है। ये खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाकर अस्थायी रूप से ऊर्जा और बेहतर मूड का एहसास कराते हैं। लेकिन यह असर ज्यादा देर तक नहीं रहता और बाद में थकान व चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसलिए ओट्स, साबुत अनाज, फल और शकरकंद जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट बेहतर विकल्प माने जाते हैं। रेड मीट या आयरन युक्त भोजन की इच्छा क्यों होती है? जिन महिलाओं को ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उनमें आयरन की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में शरीर आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग कर सकता है। पालक, दालें, फलियां, खजूर, चुकंदर और लीन मीट जैसे खाद्य पदार्थ आयरन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। इमोशनल ईटिंग और वास्तविक जरूरत में फर्क समझना जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि हर क्रेविंग सिर्फ पोषण की कमी का संकेत नहीं होती। तनाव, चिंता, मूड स्विंग और भावनात्मक बदलाव भी खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है। अपनी पसंदीदा चीजें सीमित मात्रा में खाना गलत नहीं है, लेकिन अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। क्रेविंग कम करने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें। नियमित व्यायाम करें। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें। भोजन छोड़ने की आदत से बचें। अधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन कम करें। विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार होने वाली क्रेविंग सामान्य है। लेकिन यदि अत्यधिक खाने की इच्छा, गंभीर मूड स्विंग, अत्यधिक थकान, चक्कर या भारी ब्लीडिंग जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल लोग स्वाद के साथ-साथ हेल्दी खाने पर भी खास ध्यान देने लगे हैं। लेकिन कई बार स्वाद बढ़ाने के चक्कर में खाने में जरूरत से ज्यादा तेल इस्तेमाल हो जाता है। कई ऐसी सब्जियां और स्नैक्स हैं जो पकाते समय स्पंज की तरह तेल सोख लेते हैं। यही अतिरिक्त तेल वजन बढ़ने, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट डिजीज और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही कुकिंग तकनीक अपनाई जाए तो इन चीजों को भी हेल्दी तरीके से बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं कौन-कौन सी चीजें सबसे ज्यादा तेल सोखती हैं और उन्हें पकाने का सही तरीका क्या है। बैंगन: स्वादिष्ट लेकिन ऑयल एब्जॉर्ब करने में सबसे आगे बैंगन उन सब्जियों में शामिल है जो सबसे ज्यादा तेल सोखती हैं। खासकर बैंगन फ्राई या भरता बनाते समय इसमें काफी तेल लग जाता है। इसकी स्पंजी बनावट तेल को तेजी से अंदर खींच लेती है। अगर आप बैंगन को हेल्दी तरीके से खाना चाहते हैं तो नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करें और कम तेल में पकाने की कोशिश करें। आलू: फ्राइज और चिप्स में छिपा रहता है ढेर सारा तेल आलू से बनने वाले फ्रेंच फ्राइज, टिक्की और चिप्स बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन इनमें तेल की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है। आलू में मौजूद स्टार्च तेल को पकड़कर रखता है, जिससे ये डिशेस ज्यादा ऑयली हो जाती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आलू को डीप फ्राई करने की बजाय बेक या एयर फ्राई करके खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। पनीर और भिंडी भी कम नहीं पनीर पकौड़ा, शाही पनीर या फ्राई पनीर जैसी डिशेज भी काफी तेल सोखती हैं। खासकर तेज आंच पर फ्राई करने से पनीर ज्यादा ऑयली हो जाता है। इसे हल्का ग्रिल या कम तेल में पकाना ज्यादा हेल्दी माना जाता है। वहीं भिंडी पकाते समय भी लोग बार-बार तेल डालते रहते हैं क्योंकि यह जल्दी चिपचिपी होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार भिंडी को पकाने से पहले अच्छी तरह सुखाना चाहिए और धीमी आंच पर कम तेल में पकाना चाहिए। पकौड़ों को ऐसे बनाएं थोड़ा हेल्दी बारिश के मौसम में बेसन और ब्रेड के पकौड़े लगभग हर घर में बनते हैं। लेकिन बेसन तलते समय काफी तेल सोख लेता है। इसलिए पकौड़ों को तलने के बाद टिश्यू पेपर पर जरूर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। हेल्दी रहने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स अगर आप स्वाद के साथ सेहत भी बनाए रखना चाहते हैं तो डीप फ्राई की जगह ग्रिल, बेक या एयर फ्राई तकनीक अपनाएं। साथ ही नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करें और खाने में तेल की मात्रा सीमित रखें। छोटी-छोटी सावधानियां आपकी डाइट को स्वादिष्ट और हेल्दी दोनों बना सकती हैं
देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी लोगों की सेहत पर असर डाल रही है। कई इलाकों में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, जिसके कारण हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी हो जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट Nmami Agarwal ने बताया कि तेज गर्मी में शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती जाए तो डिहाइड्रेशन, चक्कर और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। क्यों बिगड़ने लगती है शरीर की हालत? विशेषज्ञों के अनुसार शरीर सामान्य रूप से पसीने और ब्लड फ्लो के जरिए खुद को ठंडा रखता है। लेकिन अत्यधिक गर्मी में शरीर तेजी से पानी, सोडियम और पोटैशियम खोने लगता है। इससे ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और शरीर का कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने लगता है। हीट स्ट्रोक से बचने के 5 आसान तरीके 1. सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी लें विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में केवल पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर में खोए मिनरल्स की भरपाई करना भी जरूरी है। इसके लिए नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे ड्रिंक्स बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखते हैं और कमजोरी से बचाते हैं। 2. पानी से भरपूर चीजें खाएं गर्मियों में ऐसे फूड्स खाने चाहिए जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो। तरबूज, खरबूजा, खीरा, लौकी और दही जैसी चीजें शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ हाइड्रेटेड रखने में मदद करती हैं। 3. दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे ज्यादा तेज होती है। इस दौरान बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो पहले पर्याप्त पानी पिएं और सिर व शरीर को अच्छी तरह ढककर रखें। 4. ज्यादा मसालेदार खाना कम करें तेज मसालेदार और गर्म तासीर वाला खाना शरीर का तापमान बढ़ा सकता है। ऐसे भोजन से शरीर में गर्मी ज्यादा बनती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्मियों में हल्का और संतुलित भोजन बेहतर माना जाता है। 5. लंबे समय तक खाली पेट न रहें विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक बिना खाना खाए रहने से शरीर की ऊर्जा कम हो सकती है। बार-बार हल्का और पौष्टिक भोजन करने से ब्लड शुगर और इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलित रहते हैं, जिससे शरीर गर्मी को बेहतर तरीके से झेल पाता है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज अगर तेज गर्मी में चक्कर आना, कमजोरी, सिर दर्द, ज्यादा पसीना या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत सावधान हो जाएं। यह हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान, पर्याप्त पानी और थोड़ी सावधानी अपनाकर गर्मियों में खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को खानपान को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। गर्मियों में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में गलत खानपान शरीर की गर्मी बढ़ाकर डिहाइड्रेशन, एसिडिटी, बेचैनी और थकान जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों की तासीर गर्म होती है, जिनका अधिक सेवन गर्म मौसम में नुकसानदायक साबित हो सकता है। इन चीजों से करें परहेज विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों में अदरक और लहसुन का अत्यधिक सेवन कम करना चाहिए। इनकी तासीर गर्म होती है, जिससे पेट में जलन और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसी तरह अजवाइन भी शरीर में गर्मी बढ़ा सकती है और ज्यादा सेवन से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा बाजरे का आटा भी गर्म तासीर वाला माना जाता है। सर्दियों में यह फायदेमंद होता है, लेकिन गर्मियों में इसका ज्यादा सेवन शरीर में भारीपन और अतिरिक्त गर्मी पैदा कर सकता है। तले-भुने और मसालेदार खाने से भी बचने की सलाह दी गई है। ठंडी तासीर वाले फूड्स अपनाएं गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ और जीरे को फायदेमंद माना गया है। ये प्राकृतिक कूलिंग एजेंट की तरह काम करते हैं और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इलायची भी शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ एसिडिटी कम करने में सहायक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्वार और जौ जैसे अनाज गर्मियों के लिए बेहतर विकल्प हैं। ये हल्के होते हैं, शरीर को ऊर्जा देते हैं और गर्मी के प्रभाव को संतुलित रखने में मदद करते हैं। हाइड्रेशन है सबसे जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। इसके साथ नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और मौसमी फलों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। सही डाइट और पर्याप्त पानी गर्मी से होने वाली समस्याओं से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर देर रात खाना खाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डिनर का समय हमारी मेटाबॉलिक हेल्थ, नींद और लंबी उम्र पर बड़ा असर डाल सकता है। हाल ही में longevity और regenerative medicine विशेषज्ञ Dr Saranya Wyles ने बताया कि शाम को जल्दी खाना खाना शरीर की प्राकृतिक circadian rhythm के साथ बेहतर तालमेल बनाता है और इससे overall health को फायदा मिल सकता है। शाम 6 बजे से पहले डिनर को माना बेहतर Mayo Clinic में cellular ageing और regenerative medicine विशेषज्ञ डॉ. सारन्या वायल्स का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ नियमित समय पर डिनर करने को प्राथमिकता देती हैं। उनके अनुसार, आदर्श रूप से शाम का खाना 6 बजे से पहले खा लेना चाहिए। वहीं रविवार को उनके घर में डिनर का समय और जल्दी, यानी करीब 4:30 बजे रखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी खाना खाने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी circadian rhythm सही तरीके से काम करती है, जिससे digestion और metabolic health बेहतर बनी रहती है। क्या है Circadian Rhythm? Circadian rhythm शरीर की 24 घंटे चलने वाली जैविक प्रक्रिया है, जो सूरज की रोशनी और दिन-रात के चक्र से प्रभावित होती है। यही प्रक्रिया तय करती है कि शरीर में कौन-से हार्मोन कब रिलीज होंगे, नींद कैसी होगी और ऊर्जा का स्तर कैसा रहेगा। Nutritionist और hormone विशेषज्ञ Hannah Alderson के अनुसार cortisol hormone, जिसे stress hormone भी कहा जाता है, सुबह सबसे अधिक सक्रिय होता है और दिनभर धीरे-धीरे कम होता जाता है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करना शरीर को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि उस समय शरीर आराम की तैयारी कर रहा होता है, न कि digestion की। देर रात खाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक? विशेषज्ञों के मुताबिक: देर रात भारी भोजन करने से digestion प्रभावित हो सकता है नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है इंसुलिन sensitivity कम हो सकती है शरीर का metabolic balance बिगड़ सकता है हालांकि बहुत ज्यादा भूखे पेट सोना भी नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है। हेल्दी डिनर के लिए अपनाती हैं ‘Modular Dinner’ तरीका डॉ. सारन्या वायल्स ने अपने व्यस्त शेड्यूल में healthy eating बनाए रखने के लिए “Modular Dinner” strategy अपनाई हुई है। इसका मतलब है कि सप्ताहांत में खाने की बेसिक तैयारी कर ली जाए और फिर सप्ताह के दिनों में कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार किया जा सके। इसके तहत वह पहले से तैयार रखती हैं: कटे हुए गाजर, खीरा, टमाटर और सेलरी स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे फल चिकन या टोफू जैसे प्रोटीन स्रोत क्विनोआ जैसे whole grains उनका कहना है कि slow cooker का इस्तेमाल समय बचाने में काफी मदद करता है। रंग-बिरंगे भोजन को देती हैं प्राथमिकता एक dermatologist और longevity expert होने के नाते डॉ. वायल्स खाने में रंगों की विविधता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार अलग-अलग रंगों वाली सब्जियां और फल शरीर को phytonutrients प्रदान करते हैं, जो कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद करते हैं। वह खास तौर पर इन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने की सलाह देती हैं: बैंगनी शकरकंद ब्रोकली कद्दू हरी पत्तेदार सब्जियां Gut Health पर भी ध्यान जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी metabolic health के लिए gut health भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए डॉ. वायल्स प्रोबायोटिक और fermented foods को डाइट में शामिल करती हैं, जैसे: दही Kimchi Sauerkraut इसके अलावा Omega-3 से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे: Salmon Sardines Avocado और olive oil, turmeric, salt और pepper जैसे मसालों और healthy dressings को भी वह जरूरी मानती हैं। क्या कहती है यह रिसर्च? विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सख्त नियमों से ज्यादा जरूरी है consistency यानी नियमितता। समय पर भोजन करना, संतुलित डाइट लेना और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार जीवनशैली अपनाना metabolic health को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम समस्या है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में तरबूज और खरबूजा दोनों ही शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाले बेहतरीन फल माने जाते हैं। हालांकि, दोनों के पोषण और गुणों में बड़ा अंतर होता है। तरबूज: शरीर को जल्दी ठंडक और पानी तरबूज को गर्मियों का “हाइड्रेशन किंग” कहा जाता है। इसमें लगभग 91 प्रतिशत पानी होता है, जो शरीर को तेजी से हाइड्रेट करने में मदद करता है। 100 ग्राम तरबूज में करीब 30 कैलोरी होती है, इसलिए यह हल्का और ताजगी देने वाला फल माना जाता है। तरबूज में लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें एल-सिट्रुलिन तत्व भी मौजूद होता है, जो एक्सरसाइज के बाद मांसपेशियों के दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है। गर्मी, लू और शरीर में पानी की कमी से बचाव के लिए तरबूज बेहद लाभकारी है। खरबूजा: पोषण और इम्यूनिटी का खजाना खरबूजे में पानी की मात्रा तरबूज से थोड़ी कम होती है, लेकिन इसमें पोषक तत्व ज्यादा पाए जाते हैं। 100 ग्राम खरबूजे में करीब 34 कैलोरी होती है। इसमें विटामिन A, विटामिन C, पोटैशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में मिलते हैं। खरबूजा आंखों की रोशनी, त्वचा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है। इसका फाइबर पाचन सुधारने और कब्ज से राहत दिलाने में भी फायदेमंद माना जाता है। कौन है बेहतर विकल्प? अगर आपका लक्ष्य शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना है, तो तरबूज बेहतर विकल्प है। वहीं बेहतर पोषण, पाचन और इम्यूनिटी के लिए खरबूजा ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। दोनों फलों को संतुलित मात्रा में खाने से गर्मियों में शरीर स्वस्थ और तरोताजा बना रह सकता है।
Kuzhi Paniyaram को लेकर फिर बढ़ी चर्चा दक्षिण भारतीय पारंपरिक नाश्ता Kuzhi Paniyaram एक बार फिर चर्चा में है। अभिनेता R. Madhavan ने हाल ही में खुलासा किया कि यह उनकी पसंदीदा ब्रेकफास्ट डिश में से एक है। इसके बाद सेहत विशेषज्ञों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ने भी इस डिश को हेल्दी मॉर्निंग मील बताया है। उनका कहना है कि यह पारंपरिक फर्मेंटेड डिश पाचन सुधारने, गट हेल्थ बेहतर रखने और वजन नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। क्या है Kuzhi Paniyaram? Kuzhi Paniyaram चावल और उड़द दाल के फर्मेंटेड बैटर से बनाया जाता है। इसे खास तरह के पैन में पकाया जाता है, जिससे इसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा और अंदर से नरम रहता है। यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है। फर्मेंटेशन कैसे करता है गट हेल्थ बेहतर? विशेषज्ञों के अनुसार इस डिश का सबसे बड़ा फायदा इसका फर्मेंटेशन प्रोसेस है। डॉक्टरों का कहना है कि फर्मेंटेशन जटिल कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को आंशिक रूप से तोड़ देता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है। यह शरीर में अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा उड़द दाल में मौजूद फाइबर कब्ज और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। वजन घटाने में भी मिल सकती है मदद विशेषज्ञों के मुताबिक Kuzhi Paniyaram वजन नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकता है, खासकर जब इसे कम तेल में बनाया जाए। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से भी रोकने में मदद करता है। पैकेज्ड फूड से बेहतर माने जाते हैं पारंपरिक नाश्ते डॉक्टरों का कहना है कि पारंपरिक भारतीय नाश्ते पैकेज्ड और प्रोसेस्ड ब्रेकफास्ट फूड की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होते हैं। जहां पैकेज्ड फूड में अधिक चीनी, मैदा और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, वहीं पारंपरिक व्यंजन प्राकृतिक सामग्री और घरेलू तरीके से बनाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे नाश्ते ऊर्जा बनाए रखने के साथ पाचन तंत्र पर भी कम दबाव डालते हैं। इन हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्पों को भी माना गया फायदेमंद विशेषज्ञों ने कुछ अन्य पारंपरिक और गट-फ्रेंडली नाश्तों की भी सलाह दी है, जिनमें शामिल हैं: Idli और सांभर Dosa Moong Dal Cheela Besan Chilla Ragi Dosa वेजिटेबल उपमा दही, फल और नट्स Dhokla खानपान में संतुलन जरूरी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि एसिडिटी, IBS, ब्लोटिंग या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपने शरीर के अनुसार भोजन चुनना चाहिए और बहुत ज्यादा तेल वाला या भारी नाश्ता करने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक सामग्री और फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल करना लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।
आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।
आजकल सोशल मीडिया पर “प्रोफी” यानी प्रोटीन कॉफी का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। फिटनेस और हेल्थ को लेकर सजग लोग इसे अपने मॉर्निंग रूटीन में शामिल कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह आसान ड्रिंक आपके रोजाना के प्रोटीन लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकती है। लेकिन सवाल यह है–क्या यह सच में फायदेमंद है या सिर्फ एक ट्रेंड? क्या है प्रोटीन कॉफी? प्रोटीन कॉफी यानी “प्रोफी” दरअसल आपकी सामान्य कॉफी में प्रोटीन पाउडर मिलाकर बनाई जाती है। इसे तैयार करने के लिए दूध या प्लांट-बेस्ड मिल्क में प्रोटीन पाउडर मिलाकर कॉफी के साथ ब्लेंड किया जाता है। कई लोग इसे गर्म कॉफी के रूप में पीते हैं, तो कुछ इसे आइस्ड कॉफी के रूप में पसंद करते हैं। क्यों बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना अपने वजन के अनुसार 0.8 से 1.5 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। लेकिन अधिकतर लोग अपनी जरूरत से कम प्रोटीन लेते हैं। ऐसे में प्रोटीन कॉफी एक आसान विकल्प बनकर उभर रही है, जो बिना ज्यादा मेहनत के सुबह-सुबह अच्छी मात्रा में प्रोटीन दे सकती है। उदाहरण के तौर पर, सामान्य नाश्ते में 2 अंडों से लगभग 14 ग्राम प्रोटीन मिलता है, जबकि प्रोटीन कॉफी के जरिए यह मात्रा 30 ग्राम से अधिक तक पहुंच सकती है। इससे दिन की शुरुआत में ही शरीर को जरूरी पोषण मिल जाता है। क्या हैं इसके फायदे? प्रोटीन कॉफी के कई संभावित फायदे बताए जा रहे हैं– मेटाबॉलिज्म बेहतर करने में मदद मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में सहायक लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद वर्कआउट के बाद रिकवरी बेहतर क्रेविंग्स को कम करने में सहायक क्या हैं सावधानियां? हालांकि विशेषज्ञ इस ट्रेंड को पूरी तरह से सही नहीं मानते। उनका कहना है कि प्रोटीन पाउडर एक प्रोसेस्ड फूड है, इसलिए इसे नियमित भोजन का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। डायटिशियन सलाह देते हैं कि प्रोटीन का मुख्य स्रोत अंडे, दालें, मांस, मछली और टोफू जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ही होने चाहिए। प्रोटीन कॉफी को केवल सप्लीमेंट या सहायक विकल्प के रूप में ही लेना बेहतर माना जाता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में “परफेक्ट हेल्थ” पाने की चाहत लोगों को तेजी से सप्लीमेंट्स की ओर धकेल रही है। Ashwagandha, Magnesium और Vitamin D जैसे सप्लीमेंट्स इन दिनों खासा ट्रेंड में हैं। लेकिन सवाल यह है–क्या वास्तव में हर किसी को इनकी जरूरत है? सप्लीमेंट्स का बढ़ता चलन अमेरिका के आंकड़ों के मुताबिक, आधे से ज्यादा वयस्क किसी न किसी प्रकार का सप्लीमेंट लेते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। बाजार में करीब 1 लाख से ज्यादा तरह के सप्लीमेंट्स मौजूद हैं–विटामिन्स से लेकर “डिटॉक्स” और “सुपरफूड” तक। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर सप्लीमेंट्स किसी सख्त मेडिकल अप्रूवल प्रक्रिया से नहीं गुजरते, जिससे इनके प्रभाव और सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। क्या सच में जरूरी हैं ये सप्लीमेंट्स? विशेषज्ञों के अनुसार, सप्लीमेंट्स का काम केवल “पूरक” होना है, यानी जो पोषण आपकी डाइट से नहीं मिल पा रहा, उसे पूरा करना। यदि किसी व्यक्ति में किसी विटामिन या मिनरल की कमी पाई जाती है, तो सप्लीमेंट्स फायदेमंद हो सकते हैं लेकिन बिना जरूरत या बिना जांच के इन्हें लेना जरूरी नहीं है किन सप्लीमेंट्स पर सबसे ज्यादा भरोसा? कुछ डॉक्टरों के अनुसार, कुछ सप्लीमेंट्स पर अपेक्षाकृत ज्यादा भरोसा किया जा सकता है: Vitamin D: खासकर उन लोगों के लिए जो धूप कम लेते हैं Magnesium: नींद और मानसिक स्वास्थ्य में मदद कर सकता है Omega-3: दिल की सेहत के लिए (हालांकि इसके नतीजे मिश्रित हैं) हालांकि, इनकी डोज हर व्यक्ति के लिए अलग होती है और बिना डॉक्टर की सलाह के लेना सही नहीं माना जाता। Ashwagandha और ट्रेंडिंग सप्लीमेंट्स का सच Ashwagandha जैसे हर्बल सप्लीमेंट्स को तनाव कम करने और ऊर्जा बढ़ाने के लिए खूब प्रमोट किया जा रहा है, खासकर सोशल मीडिया पर। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सोशल मीडिया पर मिली जानकारी अक्सर अधूरी या भ्रामक हो सकती है। साइड इफेक्ट्स भी हैं बड़ा खतरा एक अध्ययन के अनुसार, हर साल हजारों लोग सप्लीमेंट्स के साइड इफेक्ट्स के कारण अस्पताल पहुंचते हैं। वेट लॉस सप्लीमेंट्स सबसे ज्यादा खतरनाक पाए गए “डिटॉक्स” और “स्लीप” सप्लीमेंट्स भी जोखिम बढ़ा सकते हैं डॉक्टर क्या सलाह देते हैं? विशेषज्ञों का साफ कहना है: पहले अपनी डाइट सुधारें पर्याप्त नींद लें नियमित व्यायाम करें जरूरत हो तभी सप्लीमेंट्स लें क्योंकि कोई भी गोली अच्छी जीवनशैली की जगह नहीं ले सकती।
पपीता एक ऐसा फल है जिसे लोग स्वाद और वजन घटाने के लिए खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पपीते के बीज भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं? जी हां, जिन बीजों को हम अक्सर फेंक देते हैं, वे असल में पोषक तत्वों का खजाना हैं। इनमें विटामिन, जिंक, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पपीते के बीज खाने के जबरदस्त फायदे डायबिटीज कंट्रोल में मददगार पपीते के बीज में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनॉयड्स ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। डायबिटीज मरीज इन्हें सीमित मात्रा में डाइट में शामिल कर सकते हैं। कब्ज से राहत दिलाते हैं ये बीज पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इनमें मौजूद एंजाइम्स आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं, जिससे कब्ज की समस्या कम होती है। कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक पपीते के बीज में ओलिक एसिड पाया जाता है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है और दिल को स्वस्थ रखता है। किडनी को डिटॉक्स करते हैं ये बीज शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करते हैं, जिससे किडनी स्वस्थ रहती है और संक्रमण या सूजन का खतरा कम होता है। ध्यान रखने वाली बातें ज्यादा मात्रा में सेवन न करें (दिन में 5–7 बीज पर्याप्त हैं) गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह से ही लें कड़वे स्वाद के कारण इन्हें शहद या पानी के साथ ले सकते हैं
अक्सर डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि फलों का जूस पीने के बजाय पूरा फल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। कई शोधों में भी यह बात सामने आई है कि पूरे फल शरीर को ज्यादा संतुलित और बेहतर पोषण देते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह फलों में मौजूद फाइबर (रेशा) होता है। फाइबर की वजह से ज्यादा फायदा जब हम पूरा फल खाते हैं तो उसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह आंतों की गतिविधि को बेहतर करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। लेकिन जब फल का जूस बनाया जाता है, तो उसमें मौजूद ज्यादातर फाइबर निकल जाता है और केवल मीठा तरल बच जाता है। इससे शरीर को वही लाभ नहीं मिल पाता जो पूरे फल से मिलता है। ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जूस पीने से खून में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। Harvard School of Public Health की एक स्टडी, जो The BMJ में 2013 में प्रकाशित हुई थी, उसके अनुसार रोजाना एक सर्विंग फ्रूट जूस पीने से Type 2 Diabetes का खतरा लगभग 21 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होने के कारण उसमें मौजूद शुगर जल्दी खून में पहुंचती है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है और फिर अचानक गिर भी सकती है। छिलके और गूदे में छिपे होते हैं पोषक तत्व रिसर्च बताती है कि कई फलों के छिलके और गूदे में जरूरी पोषक तत्व होते हैं। उदाहरण के लिए Apple और Pear के छिलकों में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। लेकिन जूस बनाते समय अक्सर छिलका और गूदा अलग कर दिया जाता है, जिससे कई पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इसलिए फल खाना बेहतर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पूरा फल खाने से शरीर को फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट बेहतर तरीके से मिलते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर जूस के बजाय फल खाने की सलाह देते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।