Oil Prices

Protesters block roads in Nairobi after sharp rise in petrol and diesel prices across Kenya.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से केन्या में हिंसक प्रदर्शन, 4 लोगों की मौत

Kenya में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी Nairobi समेत कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हिंसा और झड़पों में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब अफ्रीकी देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर केन्या में ईंधन संकट तेजी से गहराता जा रहा है। सड़कों पर उतरे लोग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप सोमवार सुबह नैरोबी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं। कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कारों और “बोड़ा-बोड़ा” मोटरसाइकिलों को भी रोकने की कोशिश की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राजधानी का सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप पड़ गया। स्कूल बंद रहे और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने पड़े। ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी केन्या सरकार ने हाल ही में वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार: पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है डीजल की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत तक उछाल आया है डीजल की कीमत बढ़ने के बाद परिवहन कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए। गृह मंत्री ने की मौतों की पुष्टि केन्या के गृह मंत्री Kipchumba Murkomen ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज की हिंसा में चार केन्याई नागरिकों की मौत हुई है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।” उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर सीधे केन्या जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा। सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान केन्या सरकार ने कहा है कि वह डीजल और मिट्टी तेल की बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए लगभग 3 करोड़ 85 लाख डॉलर खर्च कर रही है। इसके अलावा ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए गुणवत्ता मानकों में अस्थायी छूट भी दी गई है। महंगाई और गरीबी से बढ़ा दबाव पूर्वी अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद केन्या की बड़ी आबादी अब भी आर्थिक संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। अगर तेल संकट और महंगाई पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में केन्या में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Donald Trump speaking to media amid rising US-Iran tensions and military conflict debate
“ये अमेरिकी कायर हैं...”, ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, आलोचकों पर साधा निशाना

Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य ताकत पर सवाल उठाने वालों पर तीखा हमला बोला है। चीन दौरे पर रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अमेरिका के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, वे “देशद्रोही” मानसिकता दिखा रहे हैं। ट्रंप ने कहा: “ये अमेरिकी कायर हैं जो हमारे देश के खिलाफ हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान ईरान को “झूठी उम्मीद” देते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। “ईरान की नेवी और एयर फोर्स खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक: ईरान के 159 नौसैनिक जहाज अब नष्ट हो चुके हैं ईरानी एयर फोर्स लगभग खत्म हो गई है सैन्य तकनीक और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि ईरान अब आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केवल “लूजर और एहसान फरामोश लोग” ही अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान को घरेलू आलोचकों और विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी किया बचाव इस बीच Pete Hegseth ने भी ट्रंप प्रशासन की सैन्य रणनीति का बचाव किया। सीनेट एप्रोप्रिएशन सबकमेटी के सामने पेश होते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद अमेरिका के पास अभी भी “सभी कार्ड” मौजूद हैं। इंडो-पैसिफिक सहयोगियों को संदेश पीट हेगसेथ ने Dan Caine के साथ सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप का प्रस्तावित चीन दौरा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बढ़ते तनाव से वैश्विक चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों, तेल कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Pentagon building and military operations imagery amid rising US-Iran conflict spending concerns
ईरान युद्ध पर अमेरिका का बढ़ता खर्च चिंता का कारण, पेंटागन के आंकड़ों ने बढ़ाई बहस

United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका आर्थिक दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। United States Department of Defense (पेंटागन) ने हाल ही में इस संघर्ष की लागत 29 अरब डॉलर बताई है। खास बात यह है कि दो हफ्ते पहले यही अनुमान 25 अरब डॉलर था। यानी केवल 14 दिनों में खर्च का अनुमान 4 अरब डॉलर बढ़ गया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार नए आंकड़ों में हथियारों की मरम्मत, पुराने उपकरणों को बदलने और सैन्य ऑपरेशन की लागत को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ बोले- असली खर्च कहीं ज्यादा हो सकता है हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़े वास्तविक लागत से काफी कम हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले जारी किए गए 25 अरब डॉलर के अनुमान में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान और उनकी मरम्मत का खर्च पूरी तरह शामिल नहीं था। इसी वजह से अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिकी प्रशासन जनता के सामने युद्ध की वास्तविक आर्थिक तस्वीर नहीं रख रहा। हार्वर्ड विशेषज्ञ ने जताई 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च की आशंका Harvard Kennedy School की सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ Linda Bilmes ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर का बोझ डाल सकता है। उनके मुताबिक इतिहास बताता है कि युद्धों की वास्तविक लागत शुरुआती अनुमानों से कई गुना ज्यादा होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इराक युद्ध को शुरू में सस्ता बताया गया था, लेकिन बाद में उसकी लागत 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच गई। क्यों तेजी से बढ़ रहा है सैन्य खर्च? विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध की लागत कई स्तरों पर बढ़ती है। अल्पकालिक खर्च मिसाइल और बम इंटरसेप्टर सिस्टम लड़ाकू विमानों का रखरखाव सैनिकों का वेतन और तैनाती सबसे महंगी चीज- हथियारों की रिप्लेसमेंट कॉस्ट उदाहरण के तौर पर, सेना के स्टॉक में मौजूद Tomahawk missile की पुरानी लागत करीब 20 लाख डॉलर थी, लेकिन अब उसी मिसाइल को दोबारा बनाने या खरीदने में 35 लाख डॉलर तक खर्च हो रहा है। दीर्घकालिक खर्च सैन्य ठिकानों की मरम्मत नई रक्षा तकनीकों की खरीद मध्य पूर्व में तैनात लगभग 55,000 अमेरिकी सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाएं पूर्व सैनिक कल्याण (Veterans Care) विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी इसका आर्थिक बोझ कई वर्षों तक बना रहता है। आम अमेरिकी नागरिक पर भी पड़ रहा असर युद्ध का असर अब अमेरिकी आम जनता की जिंदगी में भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Rising US-Iran tensions could disrupt global food supply, fuel prices, fertilizers and shipping routes worldwide
अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ तो सिर्फ तेल नहीं, खाने पर भी पड़ेगा असर

अमेरिका और Iran के बीच बढ़ता तनाव अगर खुले युद्ध में बदलता है, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया की खाद्य सप्लाई, खेती-किसानी और आम लोगों की थाली तक पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा साबित हो सकता है, क्योंकि इस बार मामला दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा सप्लाई रूट्स में से एक Strait of Hormuz से जुड़ा है। दुनिया का बड़ा हिस्सा यहीं से तेल और गैस प्राप्त करता है। कैसे बढ़ेगा खाद्य संकट? आधुनिक खेती पूरी तरह तीन चीजों पर निर्भर है: ईंधन (डीजल, पेट्रोल) उर्वरक (फर्टिलाइजर) ट्रांसपोर्ट सप्लाई चेन अगर युद्ध के कारण तेल सप्लाई बाधित होती है, तो: ट्रैक्टर और सिंचाई की लागत बढ़ेगी खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों की लागत कई गुना बढ़ जाएगी माल ढुलाई महंगी होगी खेत से मंडी तक अनाज पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा यानी खेती से लेकर खाने की प्लेट तक हर चरण प्रभावित होगा। खाद का संकट क्यों सबसे खतरनाक? Saudi Aramco के CEO Amin Nasser ने चेतावनी दी है कि दुनिया पहले से ही “एनर्जी सप्लाई शॉक” का सामना कर रही है। अगर हालात बिगड़े, तो असर कई साल तक रह सकता है। फर्टिलाइजर उद्योग प्राकृतिक गैस और तेल पर काफी निर्भर करता है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने का मतलब है: यूरिया और अन्य खाद की कीमतों में भारी उछाल गरीब देशों में खाद की कमी अगली फसलों की पैदावार में गिरावट यही वजह है कि विशेषज्ञ 2027 तक असर बने रहने की आशंका जता रहे हैं। गरीब देशों पर सबसे ज्यादा असर United Nations Office for Project Services ने भी चेतावनी दी है कि अगर तनाव लंबा चला, तो करोड़ों लोग खाद्य संकट की चपेट में आ सकते हैं। जो देश खाद्यान्न आयात पर निर्भर हैं, वहां हालात सबसे खराब हो सकते हैं, क्योंकि: युद्ध के समय देश अनाज निर्यात रोक सकते हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं-चावल की कमी हो सकती है शिपिंग और बीमा खर्च कई गुना बढ़ जाएगा ऐसी स्थिति में अफ्रीका, दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के गरीब देशों में भुखमरी का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। हॉर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम? Strait of Hormuz दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट्स में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का मतलब: तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होना शिपिंग कंपनियों का जोखिम बढ़ना वैश्विक सप्लाई चेन टूटना अगर यह रास्ता असुरक्षित होता है, तो सिर्फ तेल ही नहीं, खाद्यान्न और जरूरी सामान की वैश्विक ढुलाई भी प्रभावित होगी। आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? अगर युद्ध लंबा चला, तो दुनिया भर में: पेट्रोल-डीजल महंगा LPG और गैस सिलेंडर महंगे सब्जियां और अनाज महंगे दूध, अंडे और खाने की चीजों की कमी ट्रांसपोर्ट और बिजली खर्च में बढ़ोतरी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। क्या दुनिया तैयार है? विशेषज्ञ मानते हैं कि कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक सप्लाई चेन पहले ही कमजोर हो चुकी है। ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक और बड़े झटके में धकेल सकता है। सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर खाद और ईंधन की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित हुई, तो इसका असर सिर्फ कुछ महीनों का नहीं बल्कि कई सालों तक दिखाई दे सकता है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Strait of Hormuz with commercial ships navigating amid geopolitical tension and Iranian naval monitoring
हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन ईरानी गार्ड ने लगाए नए नियम – अमेरिका और तेल बाजार पर असर

  ईरान के बयान से बढ़ी उलझन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्धविराम अवधि के दौरान यह समुद्री रास्ता सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” रहेगा। लेकिन इसी घोषणा के बाद स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सख्त शर्तें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ किया है कि इस मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को पहले उनकी अनुमति लेनी होगी। साथ ही तय मार्ग का ही उपयोग करना होगा। सैन्य जहाजों के प्रवेश पर अब भी रोक जारी है। इसे गार्ड ने “नई व्यवस्था” बताया है। ईरान के अंदर ही बयान पर असहमति ईरान के ही कुछ सरकारी मीडिया संस्थानों ने विदेश मंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं। तस्नीम न्यूज ने इसे “अधूरा और भ्रम पैदा करने वाला” बताया, जबकि मेहर न्यूज ने कहा कि रणनीतिक हालात को देखते हुए यह मार्ग पूरी तरह बंद रहना चाहिए। अमेरिका और ट्रंप का दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल चुका है और उन्होंने ईरान को धन्यवाद भी दिया। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक समझौता पूरा नहीं हो जाता। तेल बाजार पर असर इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल कीमतें करीब 10 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के अलग-अलग बयानों और सैन्य शर्तों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर आने वाले दिनों में भी असर देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन और ईरान युद्ध के दृश्य
ईरान पर जीत या सियासी जुमला? ट्रंप के दावों की खुली पोल

वाशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 34वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम लगभग 20 मिनट का संबोधन दिया। इस भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका युद्ध में बढ़त बना चुका है और ईरान की सैन्य, राजनीतिक और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, कई विश्लेषकों और हालिया घटनाक्रमों के आधार पर ट्रंप के इन दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।   ईरानी सेना और युद्ध क्षमता पर दावे ट्रंप ने कहा कि ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि हकीकत यह है कि ईरान अब भी सक्रिय सैन्य जवाब दे रहा है। इजरायल पर हालिया मिसाइल और ड्रोन हमले इस बात का संकेत हैं कि उसकी हमला करने की क्षमता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभाव भी बरकरार बताया जा रहा है।   सत्ता परिवर्तन और कट्टर नेतृत्व का मुद्दा ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व कम कट्टर है। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा नेतृत्व पहले से अधिक आक्रामक माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की अपेक्षाओं के उलट, ईरान की रणनीति और कठोर हो सकती है।   परमाणु क्षमता खत्म होने का दावा संदिग्ध ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट हो चुकी है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल हवाई हमलों से किसी देश के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना बेहद कठिन है, खासकर तब जब संवर्धित यूरेनियम और गुप्त सुविधाओं का सवाल हो। इस दावे के समर्थन में अब तक कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।   तेल, होर्मुज और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता ईरान के तेल ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमले की चेतावनी ने वैश्विक बाज़ारों को चिंतित कर दिया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।   अमेरिकी अर्थव्यवस्था और युद्ध की समयसीमा पर सवाल ट्रंप ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत और महंगाई को नियंत्रित बताया, लेकिन युद्ध के कारण शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, “दो से तीन हफ्तों में युद्ध खत्म” करने का ट्रंप का दावा भी संदेह के घेरे में है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Stock market screen showing sharp decline after Donald Trump statement on Iran tensions and rising oil prices.
ट्रम्प के बयान से बाजार में घबराहट, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद वैश्विक तनाव बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर “बेहद कड़ा हमला” कर सकता है, जिससे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है। सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2% की गिरावट कारोबार के दौरान: Nifty 50 1.95% गिरकर 22,236.80 पर पहुंच गया BSE Sensex 1.95% टूटकर 71,710.72 पर आ गया एशियाई बाजारों में भी लगभग 2% की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा। तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता ट्रम्प के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर Strait of Hormuz में संभावित बाधा को लेकर चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल आपूर्ति में बाधा आती है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रोकरेज ने घटाया भरोसा ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने भारतीय इक्विटी पर अपनी रेटिंग “ओवरवेट” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दी है। कारण: ऊंची क्रूड कीमतों से कमाई और वैल्यूएशन पर दबाव सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में बिकवाली का असर हर सेक्टर पर दिखा: बैंक और फाइनेंशियल शेयर करीब 2.5% गिरे PSU बैंक इंडेक्स 3.1% तक लुढ़का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करीब 3% की गिरावट RBI के नियमों का भी असर Reserve Bank of India (RBI) के नए फॉरेक्स डेरिवेटिव नियमों ने भी बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बैंकों को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है। फार्मा शेयरों पर भी दबाव फार्मा सेक्टर में करीब 3.75% की गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर असर पड़ सकता है।

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
US-Iran tensions escalate: Donald Trump and Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi statements
अमेरिका पर भरोसा खत्म: ईरान; ट्रम्प बोले- 2-3 हफ्तों में खत्म हो सकता है युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बयान एक-दूसरे के खिलाफ सख्त होते जा रहे हैं। ईरान ने साफ कहा है कि अब उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि यह युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव खराब रहे हैं, इसलिए अब किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी इस डील से पीछे हट चुका है। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। ट्रम्प का दावा- जल्द खत्म होगी जंग वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और ऑपरेशन अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारा मकसद था, जो अब पूरा हो चुका है। समझौता होने पर युद्ध और जल्दी खत्म हो सकता है।” जमीनी हमले पर ईरान की चेतावनी अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जमीनी हमला किया गया तो ईरान पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम उनका इंतजार कर रहे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान जमीनी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी स्थिति का जवाब देने में सक्षम है। मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था पर असर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध का असर पूरे मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अनुमान है कि: क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है करीब 18 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई है कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है 16 लाख से 36 लाख नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और कड़े बयानों से साफ है कि हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका युद्ध के जल्द खत्म होने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान का सख्त रुख संकेत देता है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Strategic Bab el Mandeb Strait connecting Red Sea and Gulf of Aden used for global oil transport
ईरान की नई चेतावनी: बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट बंद करने की धमकी, वैश्विक तेल संकट और गहरा सकता है

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा संकेत दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट गहराया हुआ है, और अब ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी बंद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो दुनिया के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट और गंभीर रूप ले सकता है। युद्ध के 26वें दिन बढ़ी टकराव की आशंका ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के 26वें दिन हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने न केवल शांति प्रस्ताव को ठुकराया है, बल्कि साफ संकेत दिया है कि वह युद्ध को नए क्षेत्रों तक फैलाने के लिए तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि अगर उस पर दबाव या हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट? बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे जाकर अरब सागर तथा हिंद महासागर से मिलता है। इस मार्ग से रोजाना लगभग 60 से 70 लाख बैरल तेल का परिवहन होता है यूरोप और एशिया के बीच व्यापारिक जहाजों का प्रमुख रास्ता वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। दोहरे संकट की आशंका पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव है। ऐसे में यदि बाब-अल-मंदेब भी प्रभावित होता है, तो यह “डबल चोकपॉइंट” स्थिति बन सकती है, जिससे: तेल की कीमतों में तेज उछाल सप्लाई चेन बाधित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर वैश्विक बाजार पर संभावित असर विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों अहम समुद्री मार्गों पर संकट गहराने से ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है। खासतौर पर एशिया और यूरोप जैसे बड़े उपभोक्ता क्षेत्रों को इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Asian stock market screens showing decline amid Iran war tensions and rising oil prices warning
ईरान युद्ध का असर: एशियाई शेयर बाजार में गिरावट का खतरा, Morgan Stanley ने दी ‘बेचने’ की सलाह

बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों के लिए चेतावनी वैश्विक निवेश बैंक Morgan Stanley ने एशियाई शेयर बाजार को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। बैंक ने निवेशकों को मौजूदा तेजी में मुनाफा बुक करने और शेयर बेचने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान युद्ध और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एशियाई बाजारों में आगे बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। तेल कीमतों में उछाल से एशिया पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी है और यह 120-130 डॉलर तक जा सकती है। एशिया के अधिकांश देश ऊर्जा के आयात पर निर्भर हैं, इसलिए बढ़ती कीमतों का सीधा असर उनकी अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ रहा है। LNG सप्लाई पर भी संकट का खतरा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कतर के एक बड़े LNG प्लांट पर हमले से एशिया को मिलने वाली गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है, जिसका असर उद्योग और उत्पादन पर पड़ेगा। 15-20% तक गिर सकते हैं एशियाई बाजार Morgan Stanley के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े, तो एशियाई शेयर बाजार अपने मौजूदा स्तर से 15% से 20% तक गिर सकते हैं। यानी निवेशकों को आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। AI सेक्टर के चलते आई थी हालिया तेजी हाल ही में एशियाई बाजारों में तीन दिन की तेजी देखी गई थी। इसकी वजह Nvidia Corp. के CEO जेनसन हुआंग द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को लेकर दिए गए सकारात्मक बयान थे। लेकिन अब बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। अमेरिकी बाजार मजबूत, एशिया कमजोर दिलचस्प बात यह है कि जहां एशियाई बाजार दबाव में हैं, वहीं अमेरिकी बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। S&P 500 Index मार्च में केवल 3.7% गिरा है, जबकि एशियाई बाजार में 7.6% की गिरावट दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका ऊर्जा का निर्यातक देश है, जबकि एशिया आयात पर निर्भर है। अन्य सेक्टर भी प्रभावित ऊर्जा के अलावा अमोनिया, यूरिया, हीलियम और सल्फर जैसे जरूरी कच्चे माल की सप्लाई में भी बाधा का खतरा है। इससे कृषि और औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। फेडरल रिजर्व के संकेत भी बने चिंता का कारण फेडरल रिजर्व के संकेतों से भी बाजार पर दबाव है। माना जा रहा है कि महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि (स्टैगफ्लेशन) के डर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ रही है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Asian stock market board showing rising indices as investors watch Iran war developments and oil prices.
ईरान युद्ध खत्म होने के संकेतों का इंतजार, एशियाई शेयर बाजारों में तेजी

  एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशक Iran के साथ जारी युद्ध के खत्म होने के संभावित संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहे, जबकि तेल की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। जापान का प्रमुख सूचकांक Nikkei 225 2.1% बढ़कर 55,387.75 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का Kospi 3.5% की मजबूत बढ़त के साथ 5,724.30 पर बंद हुआ।   अन्य बाजारों का हाल: Hang Seng Index (हांगकांग) 0.3% बढ़कर 26,039.23 Shanghai Composite 0.1% बढ़कर 4,127.34 S&P/ASX 200 (ऑस्ट्रेलिया) 0.5% चढ़कर 8,738.50 ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 3.9% ऊपर रहा।   अमेरिकी बाजारों का हाल अमेरिका में भी बाजार में हल्की कमजोरी रही: S&P 500 0.2% गिरकर 6,781.48 Dow Jones Industrial Average 34 अंक यानी 0.1% गिरकर 47,706.51 Nasdaq Composite लगभग सपाट बढ़त के साथ 22,697.10 पर रहा।   तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह तेल की कीमतें हैं। Brent Crude का दाम लगभग $85.36 प्रति बैरल रहा। WTI Crude Oil करीब $83.81 प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि सोमवार को तेल की कीमतें लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था।   युद्ध का बाजार पर असर तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह United States, Israel और Iran के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, जिससे उम्मीद जगी कि मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है।   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव दुनिया के तेल व्यापार के लिए अहम Strait of Hormuz पर भी तनाव बना हुआ है। इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन होता है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान इस रास्ते से तेल की आपूर्ति रोकता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।   वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने Stagflation का खतरा पैदा हो सकता है, जिसमें आर्थिक विकास धीमा पड़ जाता है और महंगाई लगातार ऊंची बनी रहती है।   करेंसी मार्केट डॉलर बढ़कर 158.26 जापानी येन पर पहुंच गया। यूरो $1.1625 पर ट्रेड करता दिखा।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0