Oil Prices

डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन और ईरान युद्ध के दृश्य
ईरान पर जीत या सियासी जुमला? ट्रंप के दावों की खुली पोल

वाशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 34वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम लगभग 20 मिनट का संबोधन दिया। इस भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका युद्ध में बढ़त बना चुका है और ईरान की सैन्य, राजनीतिक और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, कई विश्लेषकों और हालिया घटनाक्रमों के आधार पर ट्रंप के इन दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।   ईरानी सेना और युद्ध क्षमता पर दावे ट्रंप ने कहा कि ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि हकीकत यह है कि ईरान अब भी सक्रिय सैन्य जवाब दे रहा है। इजरायल पर हालिया मिसाइल और ड्रोन हमले इस बात का संकेत हैं कि उसकी हमला करने की क्षमता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभाव भी बरकरार बताया जा रहा है।   सत्ता परिवर्तन और कट्टर नेतृत्व का मुद्दा ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व कम कट्टर है। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा नेतृत्व पहले से अधिक आक्रामक माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की अपेक्षाओं के उलट, ईरान की रणनीति और कठोर हो सकती है।   परमाणु क्षमता खत्म होने का दावा संदिग्ध ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट हो चुकी है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल हवाई हमलों से किसी देश के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना बेहद कठिन है, खासकर तब जब संवर्धित यूरेनियम और गुप्त सुविधाओं का सवाल हो। इस दावे के समर्थन में अब तक कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।   तेल, होर्मुज और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता ईरान के तेल ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमले की चेतावनी ने वैश्विक बाज़ारों को चिंतित कर दिया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।   अमेरिकी अर्थव्यवस्था और युद्ध की समयसीमा पर सवाल ट्रंप ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत और महंगाई को नियंत्रित बताया, लेकिन युद्ध के कारण शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, “दो से तीन हफ्तों में युद्ध खत्म” करने का ट्रंप का दावा भी संदेह के घेरे में है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Stock market screen showing sharp decline after Donald Trump statement on Iran tensions and rising oil prices.
ट्रम्प के बयान से बाजार में घबराहट, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद वैश्विक तनाव बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर “बेहद कड़ा हमला” कर सकता है, जिससे युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा है। सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2% की गिरावट कारोबार के दौरान: Nifty 50 1.95% गिरकर 22,236.80 पर पहुंच गया BSE Sensex 1.95% टूटकर 71,710.72 पर आ गया एशियाई बाजारों में भी लगभग 2% की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर पड़ा। तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता ट्रम्प के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर Strait of Hormuz में संभावित बाधा को लेकर चिंता बढ़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल आपूर्ति में बाधा आती है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ब्रोकरेज ने घटाया भरोसा ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura ने भारतीय इक्विटी पर अपनी रेटिंग “ओवरवेट” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दी है। कारण: ऊंची क्रूड कीमतों से कमाई और वैल्यूएशन पर दबाव सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में बिकवाली का असर हर सेक्टर पर दिखा: बैंक और फाइनेंशियल शेयर करीब 2.5% गिरे PSU बैंक इंडेक्स 3.1% तक लुढ़का मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में करीब 3% की गिरावट RBI के नियमों का भी असर Reserve Bank of India (RBI) के नए फॉरेक्स डेरिवेटिव नियमों ने भी बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बैंकों को अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है। फार्मा शेयरों पर भी दबाव फार्मा सेक्टर में करीब 3.75% की गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर असर पड़ सकता है।

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
US-Iran tensions escalate: Donald Trump and Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi statements
अमेरिका पर भरोसा खत्म: ईरान; ट्रम्प बोले- 2-3 हफ्तों में खत्म हो सकता है युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बयान एक-दूसरे के खिलाफ सख्त होते जा रहे हैं। ईरान ने साफ कहा है कि अब उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि यह युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव खराब रहे हैं, इसलिए अब किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी इस डील से पीछे हट चुका है। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। ट्रम्प का दावा- जल्द खत्म होगी जंग वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और ऑपरेशन अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारा मकसद था, जो अब पूरा हो चुका है। समझौता होने पर युद्ध और जल्दी खत्म हो सकता है।” जमीनी हमले पर ईरान की चेतावनी अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जमीनी हमला किया गया तो ईरान पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम उनका इंतजार कर रहे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान जमीनी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी स्थिति का जवाब देने में सक्षम है। मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था पर असर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध का असर पूरे मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अनुमान है कि: क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है करीब 18 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई है कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है 16 लाख से 36 लाख नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और कड़े बयानों से साफ है कि हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका युद्ध के जल्द खत्म होने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान का सख्त रुख संकेत देता है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Strategic Bab el Mandeb Strait connecting Red Sea and Gulf of Aden used for global oil transport
ईरान की नई चेतावनी: बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट बंद करने की धमकी, वैश्विक तेल संकट और गहरा सकता है

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा संकेत दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट गहराया हुआ है, और अब ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी बंद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो दुनिया के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट और गंभीर रूप ले सकता है। युद्ध के 26वें दिन बढ़ी टकराव की आशंका ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के 26वें दिन हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने न केवल शांति प्रस्ताव को ठुकराया है, बल्कि साफ संकेत दिया है कि वह युद्ध को नए क्षेत्रों तक फैलाने के लिए तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि अगर उस पर दबाव या हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट? बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे जाकर अरब सागर तथा हिंद महासागर से मिलता है। इस मार्ग से रोजाना लगभग 60 से 70 लाख बैरल तेल का परिवहन होता है यूरोप और एशिया के बीच व्यापारिक जहाजों का प्रमुख रास्ता वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। दोहरे संकट की आशंका पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव है। ऐसे में यदि बाब-अल-मंदेब भी प्रभावित होता है, तो यह “डबल चोकपॉइंट” स्थिति बन सकती है, जिससे: तेल की कीमतों में तेज उछाल सप्लाई चेन बाधित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर वैश्विक बाजार पर संभावित असर विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों अहम समुद्री मार्गों पर संकट गहराने से ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है। खासतौर पर एशिया और यूरोप जैसे बड़े उपभोक्ता क्षेत्रों को इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Asian stock market screens showing decline amid Iran war tensions and rising oil prices warning
ईरान युद्ध का असर: एशियाई शेयर बाजार में गिरावट का खतरा, Morgan Stanley ने दी ‘बेचने’ की सलाह

बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों के लिए चेतावनी वैश्विक निवेश बैंक Morgan Stanley ने एशियाई शेयर बाजार को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। बैंक ने निवेशकों को मौजूदा तेजी में मुनाफा बुक करने और शेयर बेचने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान युद्ध और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एशियाई बाजारों में आगे बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। तेल कीमतों में उछाल से एशिया पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी है और यह 120-130 डॉलर तक जा सकती है। एशिया के अधिकांश देश ऊर्जा के आयात पर निर्भर हैं, इसलिए बढ़ती कीमतों का सीधा असर उनकी अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ रहा है। LNG सप्लाई पर भी संकट का खतरा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कतर के एक बड़े LNG प्लांट पर हमले से एशिया को मिलने वाली गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है, जिसका असर उद्योग और उत्पादन पर पड़ेगा। 15-20% तक गिर सकते हैं एशियाई बाजार Morgan Stanley के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े, तो एशियाई शेयर बाजार अपने मौजूदा स्तर से 15% से 20% तक गिर सकते हैं। यानी निवेशकों को आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। AI सेक्टर के चलते आई थी हालिया तेजी हाल ही में एशियाई बाजारों में तीन दिन की तेजी देखी गई थी। इसकी वजह Nvidia Corp. के CEO जेनसन हुआंग द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को लेकर दिए गए सकारात्मक बयान थे। लेकिन अब बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। अमेरिकी बाजार मजबूत, एशिया कमजोर दिलचस्प बात यह है कि जहां एशियाई बाजार दबाव में हैं, वहीं अमेरिकी बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। S&P 500 Index मार्च में केवल 3.7% गिरा है, जबकि एशियाई बाजार में 7.6% की गिरावट दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका ऊर्जा का निर्यातक देश है, जबकि एशिया आयात पर निर्भर है। अन्य सेक्टर भी प्रभावित ऊर्जा के अलावा अमोनिया, यूरिया, हीलियम और सल्फर जैसे जरूरी कच्चे माल की सप्लाई में भी बाधा का खतरा है। इससे कृषि और औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। फेडरल रिजर्व के संकेत भी बने चिंता का कारण फेडरल रिजर्व के संकेतों से भी बाजार पर दबाव है। माना जा रहा है कि महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि (स्टैगफ्लेशन) के डर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ रही है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Asian stock market board showing rising indices as investors watch Iran war developments and oil prices.
ईरान युद्ध खत्म होने के संकेतों का इंतजार, एशियाई शेयर बाजारों में तेजी

  एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशक Iran के साथ जारी युद्ध के खत्म होने के संभावित संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहे, जबकि तेल की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। जापान का प्रमुख सूचकांक Nikkei 225 2.1% बढ़कर 55,387.75 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का Kospi 3.5% की मजबूत बढ़त के साथ 5,724.30 पर बंद हुआ।   अन्य बाजारों का हाल: Hang Seng Index (हांगकांग) 0.3% बढ़कर 26,039.23 Shanghai Composite 0.1% बढ़कर 4,127.34 S&P/ASX 200 (ऑस्ट्रेलिया) 0.5% चढ़कर 8,738.50 ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 3.9% ऊपर रहा।   अमेरिकी बाजारों का हाल अमेरिका में भी बाजार में हल्की कमजोरी रही: S&P 500 0.2% गिरकर 6,781.48 Dow Jones Industrial Average 34 अंक यानी 0.1% गिरकर 47,706.51 Nasdaq Composite लगभग सपाट बढ़त के साथ 22,697.10 पर रहा।   तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह तेल की कीमतें हैं। Brent Crude का दाम लगभग $85.36 प्रति बैरल रहा। WTI Crude Oil करीब $83.81 प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि सोमवार को तेल की कीमतें लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था।   युद्ध का बाजार पर असर तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह United States, Israel और Iran के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, जिससे उम्मीद जगी कि मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है।   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव दुनिया के तेल व्यापार के लिए अहम Strait of Hormuz पर भी तनाव बना हुआ है। इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन होता है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान इस रास्ते से तेल की आपूर्ति रोकता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।   वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने Stagflation का खतरा पैदा हो सकता है, जिसमें आर्थिक विकास धीमा पड़ जाता है और महंगाई लगातार ऊंची बनी रहती है।   करेंसी मार्केट डॉलर बढ़कर 158.26 जापानी येन पर पहुंच गया। यूरो $1.1625 पर ट्रेड करता दिखा।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0