Pakistan Army

Pakistani Army MI-17 helicopter crash site in PoK amid rescue and recovery operations.
PoK में पाकिस्तानी सेना का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, 21 सुरक्षाकर्मियों की मौत की खबर

  मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुधवार को पाकिस्तानी सेना का एक MI-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार 21 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की आशंका है। पाकिस्तानी सेना ने अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है। उड़ान भरने के कुछ देर बाद हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, हेलिकॉप्टर ने मुजफ्फराबाद से उड़ान भरी थी और वह नीलम घाटी क्षेत्र की ओर जा रहा था। उड़ान के कुछ ही समय बाद हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी आने की सूचना मिली। पायलट ने आपातकालीन लैंडिंग का प्रयास किया, लेकिन विमान सुरक्षित नहीं उतर सका और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नीलम घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती थी प्रस्तावित स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नीलम घाटी क्षेत्र में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर चल रहे विवाद और विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे जा रहे थे। बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर में सवार सुरक्षाकर्मी इसी मिशन का हिस्सा थे। हादसे की जांच के आदेश पाकिस्तानी सेना ने दुर्घटना की वजहों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तकनीकी और परिचालन संबंधी सभी पहलुओं की जांच की जाएगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने जताया शोक पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दुर्घटना की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त की संवेदना पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari और प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि देश सुरक्षा बलों के योगदान और बलिदान को हमेशा याद रखेगा। क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान जारी हादसे के बाद सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है और दुर्घटनास्थल से मलबा हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Maulana Fazlur Rehman criticizes Pakistan’s military establishment and Army Chief Asim Munir during Karachi rally
पाकिस्तान में फिर गरमाई सियासत, मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर और सत्ता प्रतिष्ठान पर साधा निशाना

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख Maulana Fazlur Rehman ने कराची में आयोजित एक जनसभा में पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था और सेना पर तीखा हमला बोला। उनके बयान को सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir और सत्ता प्रतिष्ठान को चुनौती माना जा रहा है। “अगर मुझे कुछ हुआ तो जिम्मेदार एस्टैब्लिशमेंट होगी” कराची में समर्थकों को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल और पत्र मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पाकिस्तान की “एस्टैब्लिशमेंट” जिम्मेदार होगी। उन्होंने मंच से कहा कि देश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि “सिविल-मिलिट्री हाइब्रिड राज” चल रहा है। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारत, अफगानिस्तान और चीन के रिश्तों का भी किया जिक्र मौलाना ने पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण पाकिस्तान के भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध खराब हुए हैं, जबकि चीन का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की नीतियां पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर रही हैं और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। इमरान खान की तरह टकराव? पाकिस्तान में इससे पहले Imran Khan और उनकी पार्टी भी सेना पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा चुकी है। अब मौलाना फजलुर रहमान के तेवरों को उसी तरह की नई टकराव की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में लंबे समय से विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि देश की वास्तविक ताकत सेना के हाथ में है और सरकारें उसी के प्रभाव में काम करती हैं। देशव्यापी आंदोलन का ऐलान मौलाना फजलुर रहमान ने 22 मई से देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बढ़ती महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों को लेकर जनता से सड़क पर उतरने की अपील की। उन्होंने गाजा युद्ध का जिक्र करते हुए मुस्लिम देशों से इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की भी मांग की। मौलाना ने दावा किया कि क्षेत्र में इजरायल का प्रभाव बढ़ रहा है और भविष्य में पाकिस्तान भी खतरे का सामना कर सकता है। पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल मौलाना के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नया तनाव पैदा हो गया है। विपक्ष और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच टकराव की आशंका फिर बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पाकिस्तान की सियासत में बड़ा विवाद बन सकता है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Chand Mera Dil
Movie Review: चांद मेरा दिल: अनन्या पांडे-लक्ष्य की इमोशनल कहानी

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड में प्रेम कहानियां हमेशा फेवरेट रही हैं, लेकिन ज्यादातर फिल्मों में प्यार का सफर वहीं खत्म हो जाता है जहां हीरो-हीरोइन एक हो जाते हैं। शादी के बाद क्या होता है, जिम्मेदारियां रिश्ते को कैसे बदल देती हैं और प्यार कब थकने लगता है, इन सवालों से हिंदी सिनेमा अक्सर बचता रहा है। ‘चांद मेरा दिल’ इसी मुश्किल हिस्से को पकड़ने की कोशिश करती है। डायरेक्टर विवेक सोनी की यह फिल्म प्यार को सिर्फ खूबसूरत एहसास की तरह नहीं दिखाती, बल्कि उसके साथ आने वाली उलझनों, गुस्से, टूटन और दोबारा जुड़ने की कोशिशों को भी सामने लाती है। फिल्म कई जगह आपको अपने आसपास के रिश्तों की याद दिलाती है। हालांकि इसकी रफ्तार कुछ हिस्सों में धीमी पड़ती है, लेकिन इमोशनल पकड़ बनी रहती है। कहानी कॉलेज के प्यार से शादी तक और फिर रिश्ते की असली परीक्षाः हैदराबाद के बैकड्रॉप में बनी यह कहानी इंजीनियरिंग स्टूडेंट चांदनी (अनन्या पांडे) और आरव (लक्ष्य) के इर्द-गिर्द घूमती है। आरव पहली नजर में चांदनी पर दिल हार बैठता है। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदलती है और दोनों एक-दूसरे की दुनिया बन जाते हैं। कॉलेज रोमांस, लंबी बाइक राइड्स, देर रात की बातें और भविष्य के सपनों के बीच दोनों शादी का फैसला कर लेते हैं। लेकिन, असली कहानी शादी के बाद शुरू होती है। करियर का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, परिवार का हस्तक्षेप और रिश्ते में बढ़ती गलतफहमियां दोनों को बदलने लगती हैं। एक ऐसा पल आता है जब आरव का गुस्सा रिश्ते में ऐसी दरार पैदा कर देता है, जहां प्यार से ज्यादा आत्मसम्मान बड़ा सवाल बन जाता है। रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है। क्या दोनों अपने रिश्ते को दूसरा मौका देंगे या प्यार जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाएगा, यही फिल्म का मूल संघर्ष है। अभिनय अनन्या पांडे ने किया सरप्राइज, लक्ष्य ने दिखाया नया रंगः अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत किसी चीज को कहा जाए, तो वह इसकी एक्टिंग है। अनन्या पांडे ने अपने करियर की अब तक की सबसे संतुलित परफॉर्मेंस दी है। उन्होंने चांदनी के किरदार को सिर्फ एक रोमांटिक लड़की बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि उसकी उलझन, दर्द, असुरक्षा और मजबूती को अच्छे से दिखाया है। कई इमोशनल सीन्स में वह काफी प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं लक्ष्य इस फिल्म का बड़ा सरप्राइज हैं। ‘किल’ जैसी एक्शन फिल्म के बाद यहां उनका बेहद संवेदनशील और टूटा हुआ रूप देखने को मिलता है। गुस्से, पछतावे और प्यार के बीच फंसे एक लड़के की बेचैनी उन्होंने अच्छे ढंग से निभाई है। कई जगह उनकी बॉडी लैंग्वेज और इमोशनल सीन आपको बांधे रखते हैं। दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा बनकर सामने आती है। कम स्क्रीन टाइम में परेश पाहुजा भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। निर्देशन और तकनीक रिश्तों की बारीकियों को समझती फिल्म डायरेक्टर विवेक सोनी ने कहानी को जरूरत से ज्यादा फिल्मी बनाने की बजाय उसे जमीन से जोड़े रखने की कोशिश की है। अच्छी बात यह है कि यहां गुस्से को हीरोइज्म की तरह नहीं दिखाया गया। रिश्तों में छोटी गलतियां किस तरह बड़ी दूरी में बदल जाती हैं, फिल्म इसे संवेदनशील तरीके से दिखाती है। कैमरा वर्क खासकर इमोशनल सीक्वेंस में अच्छा लगता है। कुछ सीन की फ्रेमिंग और लाइटिंग कहानी की बेचैनी को और असरदार बनाती है। एडिटिंग पहले हाफ में अच्छी है, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होने लगती है। फिल्म की कमियां  दूसरे हाफ में ढीली पड़ती रफ्तार फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसकी लंबाई है। 2 घंटे 26 मिनट का रनटाइम कुछ जगह भारी महसूस होता है। सेकेंड हाफ में कुछ सीन जरूरत से ज्यादा खिंचे लगते हैं और कहानी थोड़ी दोहराव वाली महसूस होती है। हालांकि ये बातें फिल्म के इमोशनल असर को पूरी तरह कमजोर नहीं करतीं। संगीत फिल्म का टाइटल ट्रैक असरदारः सचिन-जिगर का संगीत फिल्म की जान है। गाने कहानी पर बोझ नहीं लगते, बल्कि उसे आगे बढ़ाने का काम करते हैं। टाइटल ट्रैक लंबे समय तक याद रहता है। बैकग्राउंड स्कोर कई इमोशनल पलों को और मजबूत बनाता है और रिश्ते की बेचैनी को महसूस कराता है। फिल्म देखें या नहीं? ‘चांद मेरा दिल’ ऐसी प्रेम कहानी है, जो सिर्फ प्यार में पड़ने की नहीं, प्यार को बचाने की जद्दोजहद दिखाती है। फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है और दूसरे हाफ में थोड़ा खिंचती भी है, लेकिन इसकी ईमानदार कहानी, मजबूत एक्टिंग और रिश्तों की सच्चाई इसे देखने लायक बनाती है। अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो प्यार की चमक के साथ उसकी थकान भी दिखाएं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है। रेटिंग: 3/5 स्टार अवधि: 2 घंटे 26 मिनट कास्ट- अनन्या पांडे, लक्ष्य ललवानी डायरेक्टर- विवेक सोनी

Unknown मई 22, 2026 0
Imran Khan and Pakistan Army Chief Asim Munir amid debate over political and geopolitical developments
इमरान खान के पतन से आसिम मुनीर के उभार तक: क्या पाकिस्तान में चला बड़ा भू-राजनीतिक खेल?

Pakistan की राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan की सत्ता से विदाई और सेना प्रमुख Asim Munir के तेजी से उभार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था, जिसमें United States की भूमिका भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन की पटकथा काफी पहले लिखी जा चुकी थी और घटनाएं धीरे-धीरे उसी दिशा में बढ़ती गईं। ‘साइफर केस’ से शुरू हुआ विवाद अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म Drop Site News की रिपोर्ट में दावा किया गया कि पूरा विवाद एक गोपनीय राजनयिक संदेश यानी “साइफर” से शुरू हुआ। मार्च 2022 में पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिका स्थित राजदूत Asad Majeed Khan ने इस्लामाबाद को एक संदेश भेजा था। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें अमेरिकी अधिकारी Donald Lu का कथित बयान शामिल था कि यदि इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है, तो “वॉशिंगटन सब कुछ माफ कर देगा।” इमरान खान ने इसे विदेशी साजिश का प्रमाण बताया था और कई रैलियों में इसे “लंदन प्लान” कहा। अमेरिका से क्यों बिगड़े इमरान के रिश्ते? प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान ने धीरे-धीरे अमेरिका से दूरी बनाने वाली विदेश नीति अपनाई। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने अमेरिका को सैन्य ठिकाने देने से साफ इनकार कर दिया था। अमेरिकी मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था — “Absolutely Not।” सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब 24 फरवरी 2022 को, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के दिन, इमरान खान ने Vladimir Putin से मॉस्को में मुलाकात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात से वॉशिंगटन बेहद नाराज हुआ। सेना और इमरान खान के बीच बढ़ा टकराव रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान की सेना को लगने लगा था कि इमरान खान की नीतियां देश को अमेरिका से दूर कर सकती हैं, जिससे रणनीतिक नुकसान हो सकता है। यहीं से सेना और इमरान खान के बीच तनाव बढ़ने लगा। आसिम मुनीर का उभार कैसे हुआ? रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में इमरान खान के ईरान दौरे के दौरान आसिम मुनीर, जो उस समय ISI प्रमुख थे, ने ईरानी अधिकारियों के साथ बेहद सख्त रुख अपनाया था। रिपोर्ट में इसे अमेरिकी रणनीतिक सोच के करीब माना गया, क्योंकि उस समय अमेरिका पाकिस्तान-ईरान संबंधों को मजबूत होते नहीं देखना चाहता था। कुछ समय बाद इमरान खान ने खुद आसिम मुनीर को ISI प्रमुख पद से हटा दिया था। CIA प्रमुख से मिलने से इनकार रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इमरान खान ने 2021 में William J. Burns से मिलने से इनकार कर दिया था। वह सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden से बात करना चाहते थे। हालांकि बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से संपर्क नहीं किया। अविश्वास प्रस्ताव और सत्ता से बाहर होना अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिर गई। तकनीकी रूप से यह संवैधानिक प्रक्रिया थी, लेकिन उनके समर्थकों ने इसे सेना और अमेरिका के बीच समझौते का परिणाम बताया। सरकार गिरने के बाद Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) पर कार्रवाई शुरू हुई। इमरान खान और उनकी पत्नी Bushra Bibi को जेल भेज दिया गया। यूक्रेन युद्ध के बाद बदला पाकिस्तान का रुख रिपोर्ट में दावा किया गया कि इमरान खान के हटने के बाद पाकिस्तान धीरे-धीरे अमेरिका के करीब आने लगा। इस दौरान पाकिस्तान ने अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराए। साथ ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को International Monetary Fund से राहत पैकेज भी मिला। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद और मजबूत हुए मुनीर आसिम मुनीर नवंबर 2022 में पाकिस्तान के सेना प्रमुख बने। बाद में उनका कार्यकाल 2027 तक बढ़ा दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में भारत के कथित “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पाकिस्तान में उनकी स्थिति और मजबूत हो गई। इसके बाद उन्हें फील्ड मार्शल बनाया गया और नए बनाए गए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। अमेरिका, सऊदी अरब और पाकिस्तान की नई रणनीति? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब Saudi Arabia के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है और आसिम मुनीर विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों के दौरों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की संभावनाओं में भी चर्चा में है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने पाकिस्तान की राजनीति, सेना और वैश्विक शक्तियों के संबंधों पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Pakistani security forces conduct anti-terror operation in Balochistan targeting militant hideouts and armed groups.
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का बड़ा ऑपरेशन, 35 आतंकवादी ढेर

Pakistan के अशांत Balochistan प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हुए 35 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता Shahid Rind ने रविवार रात क्वेटा में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन मंगला जरघून क्षेत्र में 13 मई से चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आतंकियों के बेस कैंप भी नष्ट कर दिए। TTP और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता के मुताबिक यह अभियान प्रतिबंधित संगठन Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूचिस्तान में सक्रिय उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ चलाया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों कमांडर “हाई-प्रोफाइल” और संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। रिंद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कई आतंकी ठिकाने तबाह सुरक्षा बलों ने मंगला जरघून इलाके में आतंकवादियों के कई ठिकानों और बेस कैंपों को भी नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने बताया कि प्रांत के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। इन अभियानों का मकसद आतंकवादी नेटवर्क के संचालकों, वित्तीय समर्थकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है। पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान हालांकि, Pakistan Army ने अब तक इस ताजा अभियान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले 12 मई को बलूचिस्तान के बरखान जिले में एक अन्य सैन्य अभियान के दौरान एक मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए थे। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों को और तेज कर दिया है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir addressing military event in Rawalpindi on Operation Sindoor anniversary
ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर फिर गरजे आसिम मुनीर, भारत को दी चेतावनी

पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने एक बार फिर भारत को लेकर आक्रामक बयान दिया है। 2025 में हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की पहली बरसी पर रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान के खिलाफ कोई “गलत कदम” उठाया गया, तो उसका जवाब “बेहद बड़ा, दर्दनाक और दूरगामी” होगा। रावलपिंडी में दिया बयान डॉन अखबार के अनुसार, यह बयान पाकिस्तान सेना मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जहां Asim Munir मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। कार्यक्रम में पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख Zaheer Ahmad Babar Sidhu और नौसेना प्रमुख Naveed Ashraf भी शामिल हुए। अपने संबोधन में मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब सीमित नहीं रहेगा और उसका असर “दूर तक महसूस किया जाएगा।” “यह सिर्फ युद्ध नहीं, विचारधाराओं की लड़ाई थी” पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने 6-7 मई और 10 मई 2025 की घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि भारत ने पाकिस्तान की सीमाओं और संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की थी, लेकिन पाकिस्तान ने एकजुट होकर उसका जवाब दिया। उन्होंने कहा: “यह सिर्फ दो देशों या दो सेनाओं के बीच पारंपरिक युद्ध नहीं था, बल्कि दो विचारधाराओं की लड़ाई थी।” मुनीर ने दावा किया कि इस संघर्ष में “सच की जीत” हुई और पाकिस्तान को नैतिक बढ़त मिली। पहले भी दे चुके हैं धमकी यह पहला मौका नहीं है जब Asim Munir ने भारत को लेकर सख्त बयान दिया हो। इससे पहले दिसंबर 2025 में, जब उन्हें पाकिस्तान का Chief of Defence Forces (CDF) बनाया गया था, तब भी उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान किसी भी कार्रवाई का “और ज्यादा कड़ा जवाब” देने के लिए तैयार है। उन्होंने उस समय सिंधु नदी क्षेत्र में भारतीय ढांचे और बांधों को निशाना बनाने जैसी चेतावनी भी दी थी। भारत-पाक रिश्तों में फिर बढ़ा तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं। खासकर सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के संबंध लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि भारत की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 11, 2026 0
Pakistan ISPR chief Ahmed Sharif Chaudhry faces backlash after remarks targeting Indian Army press briefing
भारतीय सेना पर तंज कसना पड़ा भारी, पाकिस्तान में ही घिरे ISPR प्रमुख; लोगों ने कहा- उर्दू सिर्फ जनता को बहकाने के लिए

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0