झारखंड

रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफा मंजूर , डॉ डीके सिन्हा डॉ. बने नए प्रभारी

abhishek singh जून 26, 2026 0
Dr. Rajkumar
Dr. Rajkumar Resignation

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में CID जांच के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने विभागीय मंत्री इरफान अंसारी की मंजूरी के बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। साथ ही रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

 

सीआईडी की दो टीमों ने की थी जांच


24 जून को CID की दो अलग-अलग टीमें रिम्स पहुंची थीं। जांच का केंद्र वर्ष 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एमबीबीएस नामांकन और सफाई कार्य से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के आरोप थे। जांच के दौरान अधिकारियों ने रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन, चिकित्सा अधीक्षक सहित कई अधिकारियों से पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। CID टीम आवश्यक अभिलेखों और शिकायतों से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां भी अपने साथ ले गई।

 

इस्तीफे पर दिनभर बनी रही चर्चा


रिम्स में पूरे दिन डॉ. राजकुमार के इस्तीफे की चर्चा होती रही, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर मीडिया से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, रिम्स के प्रो. डी.आर. शिशिर कुमार ने कहा कि संस्थान में CID की कार्रवाई से वे आहत हैं। देर शाम स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. राजकुमार का इस्तीफा मिलने और उसे स्वीकार किए जाने की पुष्टि की।

 

पहले भी रद्द हो चुका है नामांकन


गौरतलब है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन के मामले में रिम्स प्रशासन पहले ही एमबीबीएस और बीडीएस की एक-एक छात्रा का दाखिला रद्द कर चुका है। जिला प्रशासन की जांच में दोनों के जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। अब CID की जांच के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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Hul Diwas 2026
हूल दिवस को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में भाजपा, 9 सदस्यीय समिति का गठन

रांची। झारखंड भाजपा ने 30 जून को मनाए जाने वाले हूल दिवस को भव्य और व्यापक रूप से आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस उद्देश्य से प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने नौ सदस्यीय आयोजन समिति का गठन किया है। समिति संथाल परगना के भोगनाडीह स्थित अमर शहीद स्थल पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों की जिम्मेदारी संभालेगी। पार्टी का उद्देश्य हूल क्रांति के महानायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाना है।   हूल दिवस का ऐतिहासिक महत्व प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने बताया कि 30 जून झारखंड और विशेषकर संथाल परगना के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। वर्ष 1855 में इसी दिन अमर शहीद सिदो-कान्हू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका गया था। इस आंदोलन में चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि शोषण और दमन के खिलाफ आदिवासी समाज का यह संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती और ऐतिहासिक अध्यायों में शामिल है।   भोगनाडीह में जुटेंगे भाजपा के नेता और कार्यकर्ता भाजपा के अनुसार, हूल दिवस के अवसर पर राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य आयोजन भोगनाडीह स्थित अमर शहीद स्थल पर होगा, जहां संथाल परगना सहित झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम के माध्यम से हूल क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।   इन नेताओं को मिली आयोजन की जिम्मेदारी भाजपा द्वारा गठित नौ सदस्यीय आयोजन समिति में पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम, पूर्व सांसद सुनील सोरेन, अमर शहीद परिवार के वंशज मंडल मुर्मू, पूर्व प्रदेश मंत्री दुर्गा मरांडी, वरिष्ठ नेता गणेश तिवारी, साहिबगंज जिला अध्यक्ष गौतम यादव, पाकुड़ जिला अध्यक्ष सरिता मुर्मू, महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनिता सोरेन और अनुसूचित जनजाति मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनिता मुर्मू को शामिल किया गया है।   महानायकों के सम्मान का संदेश भाजपा का कहना है कि हूल दिवस का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड के वीर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी गौरव को सम्मान देने का अवसर है। पार्टी ने इसे ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया है।

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प्रिंस खान के नाम पर हटिया के कारोबारी से मांगी पांच करोड़ की रंगदारी

रांची। रांची में गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला हटिया के चांदनी चौक स्थित एक शराब दुकान के संचालक उमाशंकर सिंह से जुड़ा है। उन्हें व्हाट्सएप कॉल, मैसेज और ऑडियो संदेश के जरिए पांच करोड़ रुपये की रंगदारी देने की धमकी दी गई है। रंगदारी नहीं देने पर कारोबारी और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है।   परिवार को जान से मारने की धमकी शिकायत के अनुसार, धमकी देने वाले ने खुद को गैंगस्टर प्रिंस खान बताया और कारोबारी की निजी जानकारी भी साझा की। संदेश में उनकी गाड़ी का नंबर, कारोबार की जगह और मंदिर जाने के समय का जिक्र किया गया। साथ ही उनकी पत्नी, दोनों बेटों और भतीजे की हत्या कराने की धमकी दी गई। धमकी मिलने के बाद कारोबारी ने जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है।   दुबई नंबर से आया कॉल पुलिस के अनुसार, धमकी दुबई के मोबाइल नंबर (+971545920432) से दी गई। हटिया डीएसपी नीरज कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और तकनीकी टीम की मदद से कॉल और मैसेज की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि धमकी वास्तव में विदेश से दी गई है या इंटरनेट कॉलिंग के जरिए किसी अन्य स्थान से।   एक जैसा है धमकी देने का तरीका पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हाल के दिनों में कारोबारियों को धमकी देने का तरीका लगभग एक जैसा है। पहले देर रात करीब 12 बजे व्हाट्सएप पर धमकी भरा संदेश भेजा जाता है। इसके बाद ऑडियो मैसेज और फिर व्हाट्सएप कॉल कर रंगदारी की मांग की जाती है। कॉल करने वाला हर बार खुद को प्रिंस खान बताता है और इसी दुबई नंबर का इस्तेमाल करता है।   क्या है मामला ? गौरतलब है कि इससे पहले 8 जून को रांची के पॉल ज्वेलर्स के संचालक सुमन पॉल से भी इसी नंबर से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राजधानी के कारोबारी वर्ग में चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की तकनीकी और साइबर स्तर पर जांच जारी है तथा दोषियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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राज्यसभा चुनाव में हार के बाद क्या महागठबंधन दलों में सब ठीक है?

रांची। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की अप्रत्याशित हार के बाद महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच पैदा हुई कड़वाहट अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और सीपीआई (माले) पर हार का ठीकरा फोड़ते हुए उनके विधायकों पर धोखा देने का आरोप लगाया था। हालांकि अब गठबंधन के नेता पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कर रहे हैं।   पुराने विवाद भुलाने की कोशिश झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी केशव महतो कमलेश ने राज्यसभा चुनाव विवाद को समाप्त अध्याय बताते हुए कहा कि चुनाव खत्म हो चुका है, निर्वाचित सांसदों ने शपथ भी ले ली है और अब इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं राजद की प्रदेश उपाध्यक्ष अनिता यादव ने भी "रात गई, बात गई" कहते हुए कांग्रेस के साथ रिश्तों में आई खटास को खत्म करने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए सभी सहयोगी दलों को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।   झामुमो ने निभाई संतुलन की भूमिका राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी अपने रुख में संतुलन दिखाया। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कांग्रेस को देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी बताते हुए उसके जनसंघर्षों की सराहना की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महागठबंधन में शामिल छोटे दलों की भी अपनी अस्मिता और सम्मान है, जिसका सभी सहयोगियों को ध्यान रखना चाहिए।   राजनीतिक मजबूरी बनी एकजुटता की वजह राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन के दलों के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन भाजपा के खिलाफ मजबूत राजनीतिक मुकाबले के लिए एकजुट रहना उनकी रणनीतिक मजबूरी है। वरिष्ठ पत्रकार मधुकर का कहना है कि चाहे बिहार और असम विधानसभा चुनाव को लेकर मतभेद रहे हों या राज्यसभा चुनाव के बाद आरोप-प्रत्यारोप हुए हों, लेकिन झारखंड की राजनीतिक परिस्थितियां महागठबंधन को साथ रहने के लिए मजबूर करती हैं। उनका मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' गठबंधन की एकता बनाए रखने के लिए भी सहयोगी दलों के शीर्ष नेतृत्व ने नेताओं को विवादित बयानबाजी से बचने के निर्देश दिए हैं।

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