नई दिल्ली, एजेंसियां। टी20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद इंडियन क्रिकेट टीम आज (26 जून) से आयरलैंड दौरे की शुरुआत करेगी। दोनों टीमों के बीच दो मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बेलफास्ट के स्टॉर्मॉन्ट (Civil Service Cricket Club) में आज खेला जाएगा। इस मैच के साथ भारतीय टी20 टीम अपने नए कप्तान Shreyas Iyer के नेतृत्व में नए सफर की शुरुआत करेगी।
इस मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज बेबी बॉस Vaibhav Suryavanshi हैं। माना जा रहा है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका आज मिल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
टी20 टीम की कप्तानी संभालने के बाद यह श्रेयस अय्यर का पहला मुकाबला होगा। चयनकर्ताओं ने इस दौरे पर कई युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है, जिससे टीम भविष्य की तैयारियों को मजबूत करना चाहती है। विश्व चैंपियन बनने के बाद भारत इस सीरीज में भी जीत के साथ शुरुआत करने के इरादे से उतरेगा।
हालांकि कागजों पर भारत मजबूत दिखाई देता है, लेकिन घरेलू परिस्थितियों में आयरलैंड चुनौती पेश कर सकता है। कप्तान Lorcan Tucker की अगुवाई में मेजबान टीम उलटफेर की कोशिश करेगी।
बेलफास्ट के मौसम को देखते हुए मैच पर बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार मुकाबले के दौरान हल्की बारिश और बादल छाए रहने की संभावना है, जिससे खेल प्रभावित हो सकता है।
भारत और आयरलैंड के बीच पहला टी20 मुकाबला आज शाम 6:00 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू होगा। क्रिकेट प्रेमी इसका सीधा प्रसारण टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका ने इतिहास रचते हुए पहली बार टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में जगह बना ली है। ग्रुप ए के अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर राउंड ऑफ 32 का टिकट हासिल किया। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका 1998, 2002 और 2010 के विश्व कप में हिस्सा ले चुका था, लेकिन कभी नॉकआउट दौर तक नहीं पहुंच पाया था। मासेको के गोल ने दिलाई ऐतिहासिक जीत मैच का पहला हाफ गोलरहित रहा, जहां दोनों टीमों ने कई अवसर बनाए लेकिन कोई भी टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी। दूसरे हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने आक्रामक खेल दिखाया और 63वें मिनट में थापेलो मासेको ने शानदार गोल कर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। यही गोल अंत तक निर्णायक साबित हुआ और दक्षिण अफ्रीका ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली। 22 वर्ष 225 दिन की उम्र में मासेको फीफा विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के लिए गोल करने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी चुना गया। ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहा दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अफ्रीका ने ग्रुप चरण में एक जीत, एक ड्रॉ और एक हार के साथ कुल चार अंक हासिल किए और ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट में प्रवेश किया। वहीं, दक्षिण कोरिया की आगे बढ़ने की उम्मीदें अब अन्य ग्रुपों के परिणामों पर निर्भर हैं। अब कनाडा से होगी भिड़ंत मैच के बाद थापेलो मासेको ने कहा कि यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी है। उन्होंने टीम पर भरोसा जताने वाले प्रशंसकों का धन्यवाद किया और कहा कि कठिन समय के बावजूद टीम ने अपनी क्षमता साबित की है। अब दक्षिण अफ्रीका का सामना राउंड ऑफ 32 में ग्रुप बी की उपविजेता कनाडा से होगा। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 29 जून को भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे लॉस एंजिल्स में खेला जाएगा। ऐतिहासिक जीत के बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम का आत्मविश्वास ऊंचा है और वह नॉकआउट में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद के साथ उतरेगी।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शनों के दम पर वैभव ने बेहद कम उम्र में भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में प्लेइंग इलेवन में मौका मिलेगा या फिर उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ेगा? भारत और Ireland cricket team के बीच टी20 सीरीज की शुरुआत होने वाली है और टीम चयन को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच उत्सुकता चरम पर है। वैभव ने अपने प्रदर्शन से मचाया तहलका वैभव सूर्यवंशी ने पिछले कुछ महीनों में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। आईपीएल 2026 में उन्होंने 237.30 के शानदार स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की थी। इसके बाद इंडिया ए के लिए त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में केवल 29 गेंदों पर 94 रन की तूफानी पारी खेलकर उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट में भारत की ओर से सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड भी बनाया। इन्हीं प्रदर्शनों के दम पर उन्हें सीनियर टीम में जगह मिली और अब फैंस उनकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एंट्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मुश्किल है प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना वैभव की सबसे बड़ी चुनौती उनकी प्रतिभा नहीं, बल्कि टीम में पहले से मौजूद मजबूत प्रतिस्पर्धा है। भारतीय टीम में पहले से ही तीन स्थापित ओपनर मौजूद हैं: Sanju Samson Abhishek Sharma Ishan Kishan इन तीनों बल्लेबाजों ने हाल के समय में शानदार प्रदर्शन किया है और टीम प्रबंधन भी उन्हें लगातार मौके दे रहा है। ऐसे में चौथे ओपनर के रूप में वैभव की एंट्री चयनकर्ताओं के लिए आसान फैसला नहीं होगी। क्या किसी सीनियर खिलाड़ी की जगह बदलेगी? वैभव मूल रूप से ओपनिंग बल्लेबाज हैं। ऐसे में उन्हें टीम में शामिल करने के लिए किसी स्थापित बल्लेबाज की भूमिका बदलनी पड़ सकती है। हालांकि आयरलैंड सीरीज के बाद भारत को इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले खेलने हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन अपने प्रमुख बल्लेबाजों की लय और आत्मविश्वास के साथ कोई बड़ा प्रयोग करने से बच सकता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डेब्यू कराने के लिए किसी इन-फॉर्म खिलाड़ी को बाहर बैठाना टीम संतुलन के लिहाज से सही फैसला नहीं होगा। क्या बेंच पर बैठना पड़ेगा? मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संभावना यही नजर आती है कि वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती मैचों में प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना पड़ सकता है। हालांकि इसे नकारात्मक रूप में नहीं देखा जा सकता। सीनियर टीम के साथ समय बिताना, अंतरराष्ट्रीय माहौल को समझना और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उनके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कई महान खिलाड़ियों ने भी अपने करियर की शुरुआत में कुछ समय बेंच पर बैठकर ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का माहौल सीखा था। बीसीसीआई ने किया खास इंतजाम इस दौरे की एक खास बात यह भी है कि महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के साथ उनके माता-पिता भी आयरलैंड और इंग्लैंड जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Board of Control for Cricket in India ने उनके माता-पिता के यात्रा और ठहरने का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है, ताकि युवा खिलाड़ी पर अतिरिक्त मानसिक दबाव न पड़े और वह अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सके। भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले के लिए भारत की संभावित टीम: अभिषेक शर्मा संजू सैमसन (विकेटकीपर) ईशान किशन Shreyas Iyer (कप्तान) Tilak Varma Shivam Dube Axar Patel Washington Sundar Arshdeep Singh Harshit Rana Ravi Bishnoi क्या होगा सही फैसला? वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जा रहे हैं, लेकिन टीम प्रबंधन उनके करियर को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से तैयार करना चाहता है। यदि उन्हें तुरंत मौका नहीं भी मिलता है, तो यह उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए और बेहतर बनाने का अवसर होगा। अब सभी की नजरें टीम मैनेजमेंट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या युवा सनसनी को डेब्यू कैप मिलेगी या फिर उन्हें अपनी बारी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान भारतीय क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान और शानदार उपलब्धियों के लिए दिया गया। राष्ट्रपति भवन में हुआ सम्मान समारोह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। खेल जगत से रोहित शर्मा को भारतीय क्रिकेट में उनके उत्कृष्ट योगदान और देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करने के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा का योगदान रोहित शर्मा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए हैं। वह एकदिवसीय क्रिकेट में 264 रन की विश्व रिकॉर्ड व्यक्तिगत पारी खेलने वाले दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने टी-20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब भी अपने नाम किया, जिससे भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बीसीसीआई ने दी बधाई भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सोशल मीडिया पर रोहित शर्मा को पद्मश्री मिलने पर बधाई दी। बोर्ड ने इसे भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताया। समारोह की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। क्रिकेट जगत ने जताई खुशी रोहित शर्मा को पद्मश्री मिलने के बाद कई पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हुए इसे भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। करियर में जुड़ा एक और बड़ा सम्मान पद्मश्री सम्मान मिलने के साथ ही रोहित शर्मा के शानदार क्रिकेट करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। मैदान पर अपने रिकॉर्ड, शानदार बल्लेबाजी और सफल कप्तानी से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीतने वाले रोहित शर्मा अब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक के प्राप्तकर्ता भी बन गए हैं।