Patna News

अनंत सिंह मीडिया से बातचीत करते हुए, विवादित बयान
“भगवान भी CM बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा”, अनंत सिंह के बयान से बिहार में बवाल

पटना/मोकामा, एजेंसियां। बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बयान राजनीतिक बहस का नया कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि “भगवान भी मुख्यमंत्री बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा।” इस बयान के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।   अपराध पर क्या बोले अनंत सिंह अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में हत्या की घटनाएं पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकतर अपराध आपसी रंजिश, निजी विवाद और दुश्मनी के कारण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर घर में पुलिस तैनात नहीं कर सकती, इसलिए हर घटना को रोकना संभव नहीं है।   पुराने बिहार से की तुलना अपने बयान में उन्होंने मौजूदा बिहार की तुलना पुराने दौर से भी की। उनका कहना था कि पहले राज्य में अपहरण और अपराध का डर ज्यादा था, जबकि अब हालात पहले से बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर अब कहीं किडनैपिंग की घटना होती भी है, तो पीड़ित को जल्दी छोड़ दिया जाता है, जो बदलाव का संकेत है।   CM चेहरे पर भी खुलकर बोले अनंत सिंह ने राजनीति पर भी बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि जेडीयू से निशांत कुमार और बीजेपी से सम्राट चौधरी अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके जैसा नेता दूसरा नहीं है और उनके काम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।   दंगल और परिवार की राजनीति उन्होंने अपने गांव नदमा में आयोजित होने वाले महा दंगल का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक पहलवानों के भाग लेने और लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। साथ ही संकेत दिए कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते और अपने बड़े बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं।   बयान से बढ़ी सियासी हलचल अनंत सिंह के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
Nitin Navin addressing supporters after resigning from Bankipur seat, expressing gratitude to public and party
20 साल बाद बांकीपुर से इस्तीफा: नितिन नवीन का भावुक संदेश, ‘जनता ही मेरा परिवार’

पटना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। करीब 20 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 20 साल का सफर, भावुक विदाई इस्तीफे से पहले नितिन नवीन ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दो दशक लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2006 में अपने पिता के निधन के बाद उपचुनाव के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उसी के बाद से जनता की सेवा में जुटे रहे। लगातार पांच बार विधायक चुने गए नितिन नवीन ने अपने पोस्ट में बांकीपुर की जनता को “परिवार” बताया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘जनता ने रास्ता दिखाया’ अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि जनता ने उन्हें सिर्फ समस्याएं ही नहीं बताईं, बल्कि उनके समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका सहयोग ही उनकी सफलता का आधार रहा है। उन्होंने बांकीपुर की जनता को “देवतुल्य” बताते हुए आभार जताया। नई जिम्मेदारी, लेकिन रिश्ता कायम नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि विधायक पद छोड़ने के बावजूद उनका जनता से रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें नई जिम्मेदारी दी है और वे उसी के माध्यम से बिहार और देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने के अनुभव को भी अहम बताया। बांकीपुर में बढ़ेगी सियासी हलचल उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में आने वाले समय में उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज होना तय है। नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नितिन नवीन का इस्तीफा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत है। माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो सकती है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Patna traffic constable performs CPR to save CISF जवान on Mithapur bypass, heroic act caught on video
पटना में ट्रैफिक कॉन्स्टेबल बना ‘रियल हीरो’: CPR देकर CISF जवान की बचाई जान, वीडियो हुआ वायरल

पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जहां एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की सूझबूझ और तत्परता ने एक जवान की जिंदगी बचा ली। बिहार पुलिस द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, और अब हर कोई इस पुलिसकर्मी की सराहना कर रहा है। क्या है पूरा मामला? घटना पटना के मीठापुर बाइपास की है, जहां से गुजर रहे एक CISF जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और वह सड़क पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। कुछ ही पलों में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कैसे बची जवान की जान? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जवान लगभग बेहोशी की हालत में था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल ने लगातार CPR देकर उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश की। कुछ ही देर में जवान को होश आ गया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कॉन्स्टेबल ने जवान को निर्देश दिया कि वह सिर नीचे रखे, पैर फैलाए और पानी पीकर खुद को सामान्य करे। उनकी सतर्कता और सही समय पर लिए गए फैसले ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। बिहार पुलिस का संदेश इस घटना का वीडियो साझा करते हुए बिहार पुलिस ने लिखा- “बिहार पुलिस सदैव आपके साथ। हर संकट में आपके साथ, हर परिस्थिति में आपके लिए समर्पित। आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर तारीफ वीडियो वायरल होते ही लोग ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सैल्यूट इस जज्बे को।” दूसरे ने कहा, “CPR की ट्रेनिंग हर स्कूल-कॉलेज में जरूरी होनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “वेलडन, बदलता हुआ बिहार।” क्यों खास है यह घटना? यह घटना सिर्फ एक जान बचाने की नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सही प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय की अहमियत को भी दर्शाती है। अगर हर नागरिक को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीक की जानकारी हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Controversial posters on Patna University walls sparking student protests and ideological clashes on campus
पटना यूनिवर्सिटी में ‘पोस्टर वॉर’: मनुस्मृति दहन के बाद कैंपस में भड़काऊ नारों से बढ़ा तनाव

सावरकरवाद- पटेलवाद के पोस्टरों से गरमाया माहौल, प्रशासन सतर्क; छात्र राजनीति में तेज हुई वैचारिक टकराहट पटना: बिहार की राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय इन दिनों एक नए विवाद के केंद्र में है। ‘मनुस्मृति’ जलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब पोस्टर पॉलिटिक्स में बदल गया है, जिससे पूरे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। रातोंरात लगे भड़काऊ पोस्टर रविवार सुबह जब छात्र कैंपस पहुंचे, तो विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर कई विवादित पोस्टर लगे मिले। इन पोस्टरों में ‘शरियाबाद’ और ‘मीमवाद’ के खिलाफ नारे लिखे गए थे, वहीं ‘अंबेडकरवाद’, ‘सावरकरवाद’ और ‘पटेलवाद’ के समर्थन में संदेश दिए गए थे। इन पोस्टरों ने छात्र-छात्राओं के बीच बहस को और तेज कर दिया है। मनुस्मृति दहन से शुरू हुआ विवाद दरअसल, कुछ दिन पहले मनुस्मृति जलाने की घटना ने पूरे विवाद को जन्म दिया। यह घटना एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव ने मंच से मनुस्मृति दहन किया और कुछ बयान दिए। इस घटना को लेकर कैंपस में दो धड़े बन गए-एक पक्ष इसे सामाजिक न्याय का प्रतीक मान रहा है, तो दूसरा इसे भारतीय परंपरा के खिलाफ बता रहा है। पोस्टर अभियान के पीछे छात्र संगठन सूत्रों के अनुसार, यह पोस्टर अभियान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा चलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह अभियान मनुस्मृति दहन के विरोध में शुरू किया गया। हालांकि, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। UGC मुद्दे ने और बढ़ाया तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच University Grants Commission (UGC) से जुड़े मुद्दों पर भी छात्र संगठनों का विरोध जारी है। हाल ही में मशाल जुलूस और प्रदर्शन हुए, जिससे पहले से ही माहौल गरम था। अब पोस्टर वॉर ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। प्रशासन और पुलिस अलर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए कैंपस में निगरानी बढ़ा दी गई है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Bihar Sports Conclave 2026 showcasing athletes, ministers and sports infrastructure development plans in Patna
खेलों में नई उड़ान: स्पोर्ट्स हब बनने की राह पर बिहार, गांव-गांव बनेंगे खेल मैदान

‘बिहार स्पोर्ट्स कॉनक्लेव 2026’ में बड़ा रोडमैप पेश, मनरेगा मॉडल अब देशभर में होगा लागू बिहार अब खेलों के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राजधानी पटना में आयोजित बिहार स्पोर्ट्स कॉनक्लेव 2026 में राज्य को ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने का महत्वाकांक्षी खाका पेश किया गया। केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में बिहार खेलों के जरिए विकास और पहचान का नया केंद्र बन सकता है। गांव-गांव खेल मैदान बनाने की योजना कॉनक्लेव में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के ‘विलेज स्पोर्ट्स मॉडल’ की रही। इस मॉडल के तहत मनरेगा के सहयोग से गांव-गांव में खेल मैदान और छोटे स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल की केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने सराहना करते हुए कहा कि बिहार का यह मॉडल अब पूरे देश में लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने का बड़ा मौका मिलेगा। खेल अब बनेगा रोजगार और पहचान का जरिया सरकार अब खेलों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे रोजगार, विकास और सामाजिक पहचान से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन के जरिए बिहार आने वाले समय में देश के स्पोर्ट्स मैप पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। ओलंपिक और कॉमनवेल्थ की मेजबानी की तैयारी खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलती है, तो बिहार को भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी का मौका दिया जाए। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ इवेंट्स बिहार में आयोजित किए जा सकते हैं, क्योंकि राज्य में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम और सुविधाएं विकसित हो रही हैं। खेल इतिहास से भी जुड़ा है बिहार बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक ने बताया कि राज्य का खेलों से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। एक समय इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन का मुख्यालय भी बिहार में था और इसके अध्यक्ष जमशेदजी टाटा जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे हैं। दिग्गज खिलाड़ियों ने बढ़ाया उत्साह कॉनक्लेव में अभिनव बिंद्रा और डोला बनर्जी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। उनके अनुभवों से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Elevated road construction of Digha to Koilwar corridor showing modern highway infrastructure in Patna
30 मिनट में पूरा होगा 36 किमी सफर: दीघा से कोईलवर तक बनेगा सुपरफास्ट कॉरिडोर

6500 करोड़ की मेगा परियोजना से पटना के जाम से मिलेगी राहत, बिहार की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव पटना: बिहार की राजधानी पटना में ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जेपी गंगा पथ के विस्तार कार्य की शुरुआत हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दीघा से कोईलवर तक का 36 किलोमीटर का सफर महज 30 मिनट में तय किया जा सकेगा। 36 किलोमीटर लंबा मेगा प्रोजेक्ट यह फोरलेन सड़क दीघा जेपी सेतु से शुरू होकर शेरपुर-बिहटा होते हुए कोईलवर पुल तक जाएगी। कुल 36 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में 18 किमी एलिवेटेड (ऊपर) और 18 किमी जमीन पर सड़क बनाई जाएगी। पथ निर्माण विभाग के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत लगभग 6500 करोड़ रुपये है, जो इसे बिहार की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल करता है। जाम से मिलेगी बड़ी राहत फिलहाल पटना से कोईलवर जाने के लिए लोगों को मनेर या खगौल-बिहटा रोड से होकर गुजरना पड़ता है, जहां अक्सर भारी जाम लगता है और सफर में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग जाता है। नई सड़क बनने के बाद यह दूरी आधे घंटे में पूरी हो सकेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। पहली बार अपनाया गया हाइब्रिड मॉडल इस परियोजना में ‘हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल’ का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बिहार में इस स्तर पर पहली बार लागू हो रहा है। इस मॉडल के तहत सड़क बनाने वाली एजेंसी को ही अगले 15 वर्षों तक इसका रखरखाव भी करना होगा, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी। बिहार के लिए बनेगा नया कनेक्टिविटी कॉरिडोर यह सड़क शेरपुर के पास प्रस्तावित छह लेन पुल से भी जुड़ेगी, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार होगा। इसका फायदा सारण, वैशाली, आरा और बक्सर जैसे इलाकों को सीधे मिलेगा। साथ ही, दानापुर और बिहटा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम होगा। तय समय में पूरा करने का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य हैदराबाद की कंपनी विश्व समुद्रा द्वारा किया जा रहा है और अधिकांश हिस्सों में जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा हो चुका है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Nawada Road Accident Akhilesh Kumar Death
नवादा में दर्दनाक हादसा: JDU विधायक विभा देवी के छोटे बेटे की मौत, पटना में इलाज के दौरान तोड़ा दम

नवादा/पटना: बिहार के नवादा जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। JDU विधायक विभा देवी के छोटे बेटे अखिलेश कुमार की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें पटना ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना से परिवार और पूरे इलाके में शोक का माहौल है। तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराई मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश कुमार गुरुवार शाम अपने घर से कार लेकर निकले थे। इसी दौरान उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। हादसा इतना जबरदस्त था कि वे गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पटना में इलाज के दौरान हुई मौत घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया गया। लेकिन हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल उनका पार्थिव शरीर पटना से नवादा स्थित पैतृक आवास लाया जा रहा है। परिवार में पसरा मातम इस हादसे के बाद विधायक विभा देवी और उनके पति राजवल्लभ प्रसाद यादव समेत पूरा परिवार गहरे सदमे में है। घटना की खबर मिलते ही नवादा जिले में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। राजनीति से दूर, मिलनसार स्वभाव के थे अखिलेश अखिलेश कुमार सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन उनका व्यवहार काफी मिलनसार बताया जाता है। वे अक्सर सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होते थे और लोगों से सहजता से घुलमिल जाते थे। स्थानीय लोग उन्हें एक सरल और विनम्र व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं। हाल ही में विधायक बनी थीं विभा देवी विभा देवी ने हाल ही में विधानसभा चुनाव जीतकर नवादा सीट से प्रतिनिधित्व किया है। वे राजवल्लभ प्रसाद यादव की पत्नी हैं, जो पूर्व में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इस दर्दनाक हादसे ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है। पूरे इलाके में शोक की लहर अखिलेश कुमार की असमय मौत से नवादा और आसपास के क्षेत्रों में दुख का माहौल है। लोग लगातार उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Devotees gathered at Mahavir Mandir Patna
रामनवमी 2026: पटना के महावीर मंदिर में रात 2 बजे खुलेंगे पट, 15 काउंटरों से मिलेगा नैवेद्यम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम बिहार की राजधानी पटना में रामनवमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस साल 27 मार्च को पड़ने वाले इस पावन पर्व पर महावीर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। रात 2 बजे खुलेंगे मंदिर के पट, होगी विशेष आरती रामनवमी के अवसर पर 27 मार्च को महावीर मंदिर के पट रात 2 बजे ही खोल दिए जाएंगे। इसके बाद करीब 15 मिनट तक भगवान बजरंगबली की विशेष आरती होगी। आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और प्रसाद चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि देर रात तक भक्तों का आना-जाना जारी रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुविधा देने के लिए प्रशासन ने कई इंतजाम किए हैं: लंबी कतारों के लिए बैरिकेडिंग धूप से बचाव के लिए छावनी पेयजल और शर्बत की व्यवस्था मोबाइल शौचालय मेडिकल कैंप एलईडी स्क्रीन के जरिए लाइव पूजा प्रसारण महिला-पुरुष के लिए अलग लाइन, बाहर लगेंगे काउंटर भारी भीड़ को देखते हुए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग लाइन बनाई जाएगी। ये कतार वीर कुंवर सिंह पार्क से लेकर महावीर मंदिर तक जाएगी। मंदिर परिसर के बाहर से लेकर पार्क तक 15 नैवेद्यम लड्डू काउंटर लगाए जाएंगे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर के अंदर कोई काउंटर नहीं रखा जाएगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रामनवमी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रहेगी। पुलिस बल के साथ-साथ करीब 100 से 120 प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात किए जाएंगे। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीति तैयार की है। 24 हजार किलो नैवेद्यम लड्डू का लक्ष्य महावीर मंदिर के प्रसिद्ध नैवेद्यम लड्डू की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है। शुरुआत में 18 हजार किलो लड्डू तैयार रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर 6 हजार किलो अतिरिक्त लड्डू बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 24 हजार किलो नैवेद्यम लड्डू की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। आस्था और व्यवस्था का संगम पटना में रामनवमी का पर्व हर साल विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार भी प्रशासन और मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तैयारियों में जुटे हैं, ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे शांतिपूर्ण माहौल में पूजा-अर्चना कर सकें।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
LPG cylinders stacked at bottling plant as supply improves amid gas shortage in Bihar.
बिहार में रसोई गैस संकट से राहत: बॉटलिंग प्लांटों में रिफिलिंग बढ़ी, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई

  एक हफ्ते की परेशानी के बाद सुधरने लगी स्थिति बिहार में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की कमी को लेकर पैदा हुई परेशानी अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। राज्य के कई जिलों में LPG सिलिंडरों की आपूर्ति में रविवार से सुधार दर्ज किया गया है। तेल कंपनियों ने बॉटलिंग प्लांटों में रिफिलिंग बढ़ा दी है, जिससे वितरकों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने लगी है।   तेल कंपनियों ने बढ़ाई रिफिलिंग क्षमता राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां - Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum - मिलकर कुल नौ बॉटलिंग प्लांट संचालित करती हैं। सामान्य हालात में इन प्लांटों से रोजाना छह लाख से अधिक LPG सिलिंडरों की रिफिलिंग और आपूर्ति की जाती है। हाल के दिनों में संकट गहराने के बाद कंपनियों ने रिफिलिंग और सप्लाई में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक कटौती कर दी थी। इसके कारण कई जिलों में गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई और उपभोक्ताओं को सिलिंडर मिलने में परेशानी होने लगी। अब रिफिलिंग बढ़ने के बाद आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है।   कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई भी बहाल सरकार ने कुल उत्पादन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा कॉमर्शियल सिलिंडरों के लिए निर्धारित किया है। इसके तहत अस्पतालों, रेलवे, शिक्षण संस्थानों, कैटरिंग सेवाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी गैस की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। शनिवार देर रात बक्सर, कोइलवर और पटना जैसे इलाकों में कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई की गई, जिससे इन संस्थानों को राहत मिली है।   कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी गैस संकट के दौरान कालाबाजारी की शिकायतों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। Dr. Thyagarajan SM ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सिलिंडरों की अवैध बिक्री या जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार दोषी पाए जाने पर सीधे प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। साथ ही लापरवाही करने वाले वितरकों पर Essential Services Maintenance Act (ESMA) के तहत भी कार्रवाई की तैयारी है, ताकि गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।   पटना में लाखों उपभोक्ताओं का दबाव राजधानी पटना में गैस वितरण व्यवस्था पर काफी दबाव है। यहां करीब 145 गैस वितरकों के जरिए लगभग 16.96 लाख सक्रिय उपभोक्ताओं को LPG सिलिंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक अकेले इंडियन ऑयल के पास करीब 9.88 लाख उपभोक्ता हैं। औसतन एक गैस एजेंसी पर 11 से 12 हजार उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है। ऐसे में आपूर्ति में थोड़ी भी कमी होने पर पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है।   प्रशासन की निगरानी से मिलने लगी राहत तेल कंपनियों द्वारा रिफिलिंग क्षमता बढ़ाने और प्रशासन की सख्त निगरानी के बाद राज्य में LPG आपूर्ति व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौटती दिख रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में गैस की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Lt Gen (Retd) Syed Ata Hasnain arriving in Patna ahead of Bihar Governor oath ceremony.
बिहार को मिला नया राज्यपाल: लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन आज लेंगे शपथ, पटना के लोकभवन में होगा समारोह

  सुबह 11 बजे लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह बिहार को शनिवार से नया राज्यपाल मिल जाएगा। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल Syed Ata Hasnain आज सुबह 11 बजे बिहार के राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह Lok Bhavan में आयोजित होगा। उन्हें Sangam Kumar Sahu, मुख्य न्यायाधीश, Patna High Court द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।   कई वरिष्ठ नेता रहेंगे कार्यक्रम में शामिल शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री Nitish Kumar, उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha और Samrat Choudhary शामिल होंगे। इसके अलावा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष Prem Kumar और विधान परिषद के सभापति Awadhesh Narayan Singh सहित कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।   पटना पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन गुरुवार को ही Patna पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।   40 वर्षों तक सेना में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा देने के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। खास तौर पर Jammu and Kashmir में आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कई रणनीतिक और सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया, जिसके कारण उन्हें सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।   पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का रहा उल्लेखनीय कार्यकाल इससे पहले बिहार के राज्यपाल Arif Mohammad Khan रहे, जिनका कार्यकाल करीब 428 दिनों का रहा। उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद काफी सक्रिय और विवादों से दूर माना गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी और राजभवन को एक सक्रिय संवाद मंच बनाने की कोशिश की। वे अक्सर छात्रों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद करते नजर आते थे।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Dozens of dead crows found in a garden in Sampatchak near Patna, raising bird flu fears
पटना के संपतचक में 100 से अधिक कौवों की रहस्यमयी मौत, बर्ड फ्लू की आशंका से इलाके में दहशत

  बिहार की राजधानी पटना के करीब स्थित संपतचक इलाके में एक साथ बड़ी संख्या में कौवों की मौत से लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। प्रखंड की चिपुरा पंचायत के बरुणा लक्ष्मीचक स्थित एक बगीचे में मंगलवार सुबह 100 से अधिक कौवे मृत पाए गए। इस घटना के बाद स्थानीय लोग इसे बर्ड फ्लू से जोड़कर देख रहे हैं और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।   आसमान से गिरने लगे पक्षी, लोगों में फैला डर स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सुबह अचानक आसमान से कौवे एक-एक कर जमीन पर गिरने लगे। देखते ही देखते बगीचे में बड़ी संख्या में मृत पक्षियों का ढेर लग गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस तरह एक साथ इतने पक्षियों की मौत नहीं देखी थी। घटना की सूचना तुरंत प्रशासन और पशुपालन विभाग को दी गई, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे।   तड़पते हुए दम तोड़ते दिखे कई कौवे प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई कौवे जमीन पर गिरने के बाद बुरी तरह तड़प रहे थे। उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। उस समय बगीचे में खेल रहे बच्चे और आसपास के लोग यह दृश्य देखकर घबरा गए। लोगों ने तुरंत बच्चों को वहां से दूर किया और प्रशासन को सूचना दी।   जांच के लिए भेजे गए नमूने प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि मामला किसी गंभीर संक्रमण से जुड़ा हो सकता है। टीम ने मृत कौवों के विसरा और खून के नमूने एकत्र कर लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए पटना स्थित विशेष प्रयोगशाला में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन पक्षियों की मौत का असली कारण क्या है।   प्रशासन ने जारी किया अलर्ट पशुपालन विभाग ने एहतियात के तौर पर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति मृत पक्षियों को हाथ न लगाए और उनसे दूरी बनाए रखे। यदि किसी के घर या आसपास कोई पक्षी मृत मिलता है, तो उसे खुद हटाने के बजाय तुरंत विभाग को सूचना दें।   जहर या संक्रमण की भी जांच प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि कहीं पक्षियों ने खेतों में डाले गए जहरीले दाने तो नहीं खा लिए थे। इस कारण भी सामूहिक मौत की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों के बीच बर्ड फ्लू को लेकर डर बना हुआ है, क्योंकि इससे पहले भी बिहार के कुछ इलाकों में पक्षियों की संदिग्ध मौत के मामले सामने आ चुके हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Vehicles parked on a busy Bihar city road
बिहार में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली पर सख्ती: राह चलते वाहनों से शुल्क लेने पर रोक, डिप्टी सीएम का आदेश

  बिहार के शहरों में पार्किंग के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पर अब सख्त कार्रवाई होगी। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नगर निकाय क्षेत्रों में राह चलते या अस्थायी रूप से खड़े वाहनों से पार्किंग शुल्क की वसूली नहीं की जाएगी। इस संबंध में सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) को पत्र भेजकर नियमों का कड़ाई से पालन कराने को कहा गया है।   सड़कों पर जबरन वसूली पर लगेगी रोक सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई शहरों में बिना निर्धारित पार्किंग स्थल के भी वाहन चालकों से जबरन पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। कई जगहों पर ठेकेदार सड़कों पर चलते वाहनों को रोककर पर्ची थमा देते हैं और पैसे की मांग करते हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि राह चलते वाहनों से पार्किंग शुल्क लेना पूरी तरह गैर-कानूनी है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।   केवल चिन्हित पार्किंग स्थलों पर ही वसूला जाएगा शुल्क नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर आयुक्तों और नगर कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि केवल स्वीकृत और चिन्हित पार्किंग स्थलों पर ही पार्किंग शुल्क लिया जाएगा। इसके साथ ही हर पार्किंग स्थल पर पार्किंग शुल्क की दर तालिका लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि वाहन चालकों को पहले से ही निर्धारित शुल्क की जानकारी मिल सके और मनमानी वसूली पर रोक लगाई जा सके।   नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर चलते वाहनों या अस्थायी रूप से खड़ी गाड़ियों से शुल्क लेने की शिकायत मिलने पर संबंधित नगर निकायों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को ऐसे मामलों की निगरानी करने और नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।   शव वाहनों से शुल्क वसूली को बताया अमानवीय उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि शव वाहनों से पार्किंग शुल्क लेना न केवल अवैध है, बल्कि पूरी तरह अमानवीय भी है। उन्होंने ऐसे मामलों पर तुरंत रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।   13 मार्च को होगी समीक्षा बैठक राज्य में चल रहे विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए 13 मार्च को पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में बैठक आयोजित की जाएगी। दोपहर दो बजे होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा करेंगे, जिसमें विभिन्न जिलों के अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Poster outside BJP office in Patna demanding Chirag Paswan as Bihar Chief Minister
“बिहार का CM सिर्फ चिराग हो” – पटना में BJP कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर से तेज हुई सियासी हलचल

  नीतीश कुमार के नामांकन के बाद बदला राजनीतिक माहौल मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच एनडीए खेमे के भीतर से एक नई मांग सामने आई है, जिसने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।   चिराग पासवान को CM बनाने की मांग लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई है। राजधानी Patna में Bharatiya Janata Party के कार्यालय के बाहर इस मांग को लेकर कई पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा का दौर तेज हो गया है।   पोस्टर में लिखे गए नारे बने चर्चा का विषय पोस्टरों में लिखा गया है- “ना दंगा हो, ना फसाद हो, बिहार का CM सिर्फ चिराग हो।” इसके साथ ही एक अन्य पंक्ति में लिखा गया है- “सजाओ इनके सर पर ताज, तभी आएगा बिहार में स्वर्ण काल।” इन नारों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि यदि बिहार में एनडीए की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री पद के लिए चिराग पासवान को आगे किया जाना चाहिए।   ‘मोदी के हनुमान’ वाला संदेश भी शामिल पोस्टर में आगे लिखा गया है- “मोदी जी का मिला अपने हनुमान को आशीर्वाद, चिराग होंगे बिहार के नए सरताज।” इसके अलावा यह भी लिखा गया है कि “बिहार मांग रहा है चिराग, अब समय आ गया है युवा मुख्यमंत्री बनाने का। NDA की होगी सरकार, CM होगा सिर्फ चिराग।”   LJP (रामविलास) नेताओं की पहल जानकारी के अनुसार, ये पोस्टर Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के पटना जिला अध्यक्ष इमाम गजाली की ओर से लगवाए गए हैं। पोस्टर लगने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में एनडीए गठबंधन चिराग पासवान को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में आगे बढ़ा सकता है।   राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा हालांकि इस मांग पर अभी तक NDA के शीर्ष नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पोस्टर के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Nand Kishore Yadav meets CM Nitish Kumar at Patna residence after Nagaland Governor appointment
नागालैंड के राज्यपाल बनने के बाद नंद किशोर यादव ने सीएम नीतीश कुमार से की मुलाकात

  बिहार की राजनीति के अनुभवी नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को हाल ही में नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। लंबे समय तक बिहार में सक्रिय रहने वाले यादव ने राज्य सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, जिसमें मंत्री पद भी शामिल है। राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक समझ के कारण उन्हें यह नई जिम्मेदारी दी गई है।   पटना में मुख्यमंत्री से हुई सम्मानजनक भेंट नंद किशोर यादव ने शनिवार को पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास में नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग 15 मिनट तक चली, जिसमें दोनों नेताओं ने cordial बातचीत की। मुख्यमंत्री ने यादव के लंबे राजनीतिक करियर की सराहना की और उन्हें नई भूमिका निभाने के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर दोनों ने राजनीतिक अनुभव, राज्यपाल पद की जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की।   राष्ट्रपति द्वारा कई राज्यों में की गई नियुक्तियां 5 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल और उपराज्यपाल पदों पर बड़े फेरबदल की मंजूरी दी। इसी निर्णय के तहत सैयद अता हसनैन, जो भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं, को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनके पास सुरक्षा और रणनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव है, और माना जा रहा है कि वे जल्द ही राज्यपाल के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
Nitish Kumar Rajya Sabha speculation.
नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा से जेडीयू में हलचल, पटना में कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की अटकलें सामने आईं। इन खबरों के बाद उनकी पार्टी Janata Dal (United) के भीतर असंतोष की स्थिति दिखने लगी है। गुरुवार सुबह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि नेतृत्व में बदलाव करना है तो जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव कराया जाए। उनका दावा है कि जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था, इसलिए वे अपना कार्यकाल पूरा करें। मंत्री पर हमला, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के पास माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच राज्य के मंत्री Surendra Mehta जब आवास परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तब उन पर कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई। मौके पर आईजी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि राज्य के डीजीपी भी मुख्यमंत्री आवास में मौजूद बताए गए। कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी जेडीयू नेता Rajiv Ranjan Patel के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए नामांकन भरने जाते हैं तो वे उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है और वे चाहते हैं कि वे ही राज्य की कमान संभाले रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राजनीतिक फैसला लिया जाता है तो उसमें कार्यकर्ताओं की राय भी ली जानी चाहिए। उनका सुझाव था कि नीतीश कुमार की जगह किसी और को भेजना हो तो उनके बेटे Nishant Kumar को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर बदलाव नहीं होना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का अलग रुख वहीं जेडीयू के एक अन्य नेता Sanjay Singh ने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार हैं और यदि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है तो कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राज्य की बड़ी आबादी चाहती है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहें। बेटे की राजनीति में एंट्री की चर्चा इसी बीच यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं और पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। इस संभावना ने भी जेडीयू के अंदर राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से वे राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0