Public Transport

Jamshedpur Auto Fare Hike
जमशेदपुर में ऑटो का किराया बढ़ेगा

जमशेदपुर। जमशेदपुर में ऑटो का सफर महंगा हो सकता है। शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक-संचालक संघ ने विभिन्न रूटों पर ऑटो किराए में 5 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। हालांकि, इस बढ़ी हुई दर पर अंतिम निर्णय प्रशासन की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा। डीसी को सौंपा पत्र संघ ने इस संबंध में उपायुक्त को पत्र सौंपकर संशोधित किराया लागू करने की जानकारी दी है। संघ के अध्यक्ष श्याम किनकर झा ने बताया कि डीजल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि, वाहन रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन खर्च बढ़ने के कारण किराया बढ़ाना आवश्यक हो गया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद यह पहली बार है जब किराए में संशोधन किया गया है। महीने में करीब 300 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा किराए में वृद्धि से शहर के हजारों दैनिक यात्रियों, छात्रों और कर्मचारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। नई दरें लागू होने पर यदि कोई यात्री रोजाना आने-जाने के लिए दो बार ऑटो का उपयोग करता है, तो उसे प्रतिदिन लगभग 10 रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इस हिसाब से महीने में करीब 300 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath announces expansion of electric bus services across 18 cities.
यूपी कैबिनेट की बड़ी मंजूरी, 18 शहरों में दौड़ेंगी 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें

  मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। शहरी परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार, जीसीसी मॉडल पर चलेगी योजना सरकार ने बसों के संचालन के लिए ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल को मंजूरी दी है। इसके तहत निजी कंपनियां बसों की खरीद, संचालन, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी संभालेंगी। आगरा से वाराणसी तक 18 शहर होंगे योजना का हिस्सा योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा-जेवर में इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। यात्रियों को मिलेगी एसी, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा सुविधा नई बसों के संचालन से यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य यात्रा को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और समयनिष्ठ बनाना है। निजी कंपनियां करेंगी संचालन, 12 साल का होगा अनुबंध जीसीसी मॉडल के तहत चयनित ऑपरेटरों को बसों के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी। वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से अनुबंध की अवधि 12 वर्ष तय की गई है। ई-बस खरीद पर सरकार देगी करोड़ों का अनुदान योजना के तहत 12 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर बस पर 35 लाख रुपये प्रति वाहन की दर से अनुदान दिया जाएगा। नगर निगम मुफ्त देंगे डिपो की जमीन बस डिपो और चार्जिंग सुविधाओं के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदूषण घटाने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। सरकारी खजाने पर कम पड़ेगा बोझ, निजी निवेश से होगा विकास इस परियोजना में निजी निवेश को शामिल करने से सरकार पर वित्तीय दबाव कम होगा, जबकि आधुनिक परिवहन सुविधाओं का तेजी से विस्तार संभव हो सकेगा। पहले से चल रहीं 743 ई-बसें, अब होगा बड़ा विस्तार वर्तमान में प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। नई योजना के लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े शहरी इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Vehicles refueling at a CNG station in Delhi after the latest gas price hike
दिल्ली में फिर महंगी हुई CNG, 11 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम

राष्ट्रीय राजधानी Delhi में सीएनजी उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। मंगलवार (26 मई) को CNG की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी गई। नई कीमतें सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं। अब दिल्ली में CNG की कीमत बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। बताया जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। 11 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम पिछले कुछ दिनों में CNG की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। इससे पहले: 15 मई को 2 रुपये प्रति किलो बढ़ोतरी हुई थी 23 मई को 1 रुपये प्रति किलो दाम बढ़ाए गए थे अब 26 मई को फिर 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है इस तरह 15 मई से अब तक दिल्ली में CNG कुल 5 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है। आम लोगों पर बढ़ेगा बोझ लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन चालकों पर पड़ेगा। CNG महंगी होने से सार्वजनिक परिवहन का किराया बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। खासकर रोजाना सफर करने वाले लोगों की जेब पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ऊर्जा बाजार में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों और सप्लाई लागत में इजाफे को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह माना जा रहा है।  

surbhi मई 26, 2026 0
Water Metro ferry operating on urban waterways as India plans expansion to 18 cities.
देश के 18 शहरों में शुरू होगी वाटर मेट्रो सेवा, सरकार ने तैयार किया मास्टर प्लान

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देशभर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू करने की योजना तैयार की है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल वाटर मेट्रो पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस ड्राफ्ट को विभिन्न मंत्रालयों के पास चर्चा और सुझावों के लिए भेजा गया है, ताकि जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को देशभर में लागू किया जा सके। दो चरणों में लागू होगी योजना सरकार इस परियोजना को दो चरणों में लागू करेगी। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज के अलावा बिहार की राजधानी पटना और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी है। दूसरे चरण में असम के तेजपुर और डिब्रूगढ़ जैसे शहरों को इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा अन्य संभावित शहरों का भी सर्वे किया जा रहा है। कोच्चि मॉडल से मिली प्रेरणा अधिकारियों के मुताबिक, केरल की कोच्चि वाटर मेट्रो की सफलता के बाद सरकार अब इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना चाहती है। कोच्चि में इस परियोजना को लोगों का अच्छा समर्थन मिला है और इसे ट्रैफिक कम करने के प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उन शहरों में जलमार्ग आधारित सार्वजनिक परिवहन विकसित करना है, जहां नदियां, झीलें या नहरें मौजूद हैं। क्या बोले केंद्रीय मंत्री? केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने इस परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि वाटर मेट्रो सिस्टम कम लागत वाला और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम है। उन्होंने बताया कि इसमें पहले से मौजूद जलमार्गों का उपयोग किया जाता है, जिससे बड़े निर्माण कार्यों की जरूरत कम पड़ती है। साथ ही, यह परियोजना कम समय में पूरी की जा सकती है और जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता भी बेहद कम होती है। मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड ईंधन से चलने वाली नावों के इस्तेमाल से प्रदूषण में कमी आएगी और शहरों में सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी। आम लोगों और पर्यटन को मिलेगा फायदा सरकार का मानना है कि वाटर मेट्रो सेवा आम यात्रियों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगी। इससे यात्रा अधिक आरामदायक, सस्ती और तेज होगी। सरकार ने इसके लिए कुछ मानक भी तय किए हैं। प्राथमिकता उन शहरों को दी जाएगी जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है। हालांकि, बाढ़ प्रभावित और दूर-दराज के इलाकों में नियमों में छूट दी जा सकती है। 18 शहरों का सर्वे पूरा भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने इस परियोजना की व्यवहार्यता जांच के लिए Kochi Metro Rail Limited की मदद ली है। अब तक 18 शहरों का सर्वे पूरा किया जा चुका है और 17 शहरों की रिपोर्ट भी मंत्रालय को मिल चुकी है। केवल लक्षद्वीप की रिपोर्ट आना बाकी है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath addressing officials on fuel saving and work from home policy measures.
पीएम की अपील पर एक्शन में योगी सरकार: मंत्रियों के काफिले आधे, हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की तैयारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद प्रदेश में ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि प्रदेशवासी ईंधन की खपत कम करें और अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचें, ताकि देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कई अहम निर्देश जारी किए। सरकार स्तर पर सबसे बड़ा फैसला मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने का लिया गया है। अनावश्यक गाड़ियों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा, दो दिन घर से काम की सलाह सीएम योगी ने कहा कि अब वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि ईंधन और खर्च दोनों की बचत हो सके। औद्योगिक विकास विभाग और आईआईडीसी को निर्देश दिए गए हैं कि बड़े औद्योगिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को वर्क फ्रॉम होम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। राज्य सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी कर ऐसे संस्थानों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की सिफारिश की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। मंत्री-सांसद सप्ताह में एक दिन करेंगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और आम लोगों को भी जोड़ा जाए। स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। ऑनलाइन होंगी बैठकें और वर्कशॉप सीएम योगी ने निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग की बैठकों, सेमिनार और वर्कशॉप को ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाए। सचिवालय और निदेशालय स्तर की करीब आधी बैठकों को भी वर्चुअल तरीके से करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बड़ी बचत होगी। साथ ही दफ्तरों के समय को अलग-अलग शिफ्ट में बांटने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि पीक ऑवर में ट्रैफिक और भीड़ कम हो सके। मेट्रो, बस, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर मुख्यमंत्री ने लोगों से मेट्रो, रोडवेज बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक उपयोग करने की अपील की है। जिन शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध है, वहां उसके इस्तेमाल को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा कार पूलिंग, साइक्लिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है। भीड़भाड़ वाले रूट्स पर अतिरिक्त बसें चलाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। बिजली बचाने की भी अपील सीएम योगी ने कहा कि सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि बिजली की बचत भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों, सरकारी दफ्तरों और निजी संस्थानों में अनावश्यक बिजली का उपयोग न करें। साथ ही रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का कम से कम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों से बड़े स्तर पर संसाधनों की बचत संभव है और इससे आर्थिक मजबूती के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।  

surbhi मई 13, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0