Rajya Sabha

Ajay Maken reacts to AAP Rajya Sabha MPs merging with BJP amid Punjab political controversy
AAP सांसदों के BJP में विलय पर कांग्रेस का हमला, अजय माकन बोले- पंजाब के जनादेश का अपमान

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के विलय पर सियासी घमासान आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों, जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, के बीजेपी में विलय को मंजूरी मिलने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पंजाब के जनादेश का अनादर किया है और इससे राज्य में अलगाववादी ताकतों को बल मिल सकता है। "पंजाब में वही हुआ, जो अलगाववादी चाहते थे" अजय माकन ने कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील और सीमावर्ती राज्य में यह राजनीतिक बदलाव गंभीर चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, अलगाववादी ताकतें लंबे समय से यह प्रचार करती रही हैं कि पंजाब के लोगों की आवाज को दबाया जाता है। माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी का यह कदम उसी नैरेटिव को मजबूती देता है। 6 फीसदी वोट, लेकिन 86 फीसदी राज्यसभा सीटें कांग्रेस नेता ने कहा कि 2021 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी को केवल 6.6 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं। इसके बावजूद अब पंजाब से राज्यसभा की सात में से छह सीटों पर बीजेपी का प्रभाव हो गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जनादेश के साथ अन्याय बताया। AAP पर भी साधा निशाना अजय माकन ने आम आदमी पार्टी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि AAP अब आम आदमी की नहीं, बल्कि अरबपतियों की पार्टी बन चुकी है। माकन के अनुसार, बीजेपी में शामिल हुए सातों सांसदों की औसत घोषित संपत्ति 800 करोड़ रुपये से अधिक है। केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर धनाढ्य लोगों को राज्यसभा भेजा। उन्होंने यह भी कहा कि AAP को कांग्रेस का वोट काटने के लिए खड़ा किया गया था, लेकिन अब उसका "मुखौटा" उतर चुका है। INDIA गठबंधन पर भी उठे सवाल माकन ने स्वीकार किया कि कांग्रेस और AAP के बीच पहले भी वैचारिक मतभेद रहे हैं। हालांकि, गठबंधन की मजबूरियों के चलते दोनों दल साथ आए थे। अब इस घटनाक्रम के बाद INDIA गठबंधन के भीतर भी नई बहस शुरू होने की संभावना है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
AAP faces major setback as seven Rajya Sabha MPs quit, leaving only three members
AAP में बड़ी टूट: 7 राज्यसभा सांसदों के जाने के बाद सिर्फ 3 बचे, पार्टी संकट में

नई दिल्ली में AAP को बड़ा झटका, राज्यसभा में संख्या घटकर रह गई सिर्फ 3 आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। पार्टी के 10 में से 7 सांसदों ने संगठन से नाता तोड़ लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी के पास अब सिर्फ 3 राज्यसभा सांसद बचे हैं। कौन-कौन से सांसद पार्टी में रह गए? बड़े पैमाने पर हुए इस बदलाव के बाद जो तीन सांसद AAP के साथ बने हुए हैं, वे हैं: Balbir Singh Seechewal Sanjay Singh ND Gupta इन नेताओं के साथ पार्टी अब उच्च सदन में बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। 7 सांसदों ने छोड़ा AAP का साथ सूत्रों के मुताबिक, सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाने का फैसला किया है। यह फैसला AAP के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इनमें कई वरिष्ठ नाम शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। राघव चड्ढा का दावा: दो-तिहाई समर्थन मिला इस पूरे घटनाक्रम के बीच Raghav Chadha ने दावा किया कि उनके पास AAP के राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक समर्थन है, जो कानून के अनुसार किसी भी पार्टी में विलय के लिए जरूरी माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक मजबूरी नहीं बल्कि सिद्धांतों के आधार पर लिया गया है। “AAP अब अपनी मूल विचारधारा से भटक गई” चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को उन्होंने वर्षों तक मजबूत किया, वह अब अपने मूल आदर्शों से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी की दिशा और कार्यशैली बदल गई है। केजरीवाल की प्रतिक्रिया पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal ने इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पंजाब के लोगों के साथ “धोखा” है और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। राजनीतिक तनाव और बढ़ा इस घटनाक्रम के बाद AAP के भीतर तनाव और बढ़ गया है। पार्टी में नेतृत्व, नीतियों और अंदरूनी मतभेदों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव AAP के लिए राज्यसभा में बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Raghav Chadha speaking in Rajya Sabha after removal from deputy leader post
राज्यसभा में राघव चड्ढा का तंज: ‘हटाया गया हूं, फिर भी मौजूद हूं’–AAP नेतृत्व पर उठाए सवाल

  पार्टी से पद से हटाए जाने के बाद संसद में बोले चड्ढा नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में अपनी ही पार्टी पर तंज कसते हुए राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। हाल ही में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने सदन में कहा कि उनकी पार्टी के नेता और नए डिप्टी लीडर दोनों ही उपस्थित नहीं हैं, जबकि वह खुद “हटाए जाने के बावजूद” सदन में मौजूद हैं। संसद में क्या बोले राघव चड्ढा? राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा: “जिस पार्टी से मैं आता हूं, उसके नेता सदन में मौजूद नहीं हैं। नए डिप्टी लीडर भी मौजूद नहीं हैं। मैं हाल ही में हटाया गया डिप्टी लीडर हूं, लेकिन मैं यहां मौजूद हूं।” उनका यह बयान सीधे तौर पर AAP नेतृत्व और नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल पर कटाक्ष माना जा रहा है। डिप्टी चेयरमैन को दी बधाई, रिश्ते को बताया ‘खट्टा-मीठा’ चड्ढा ने यह टिप्पणी उस दौरान की जब वे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार चुने जाने पर बधाई दे रहे थे। उन्होंने अपने और हरिवंश सिंह के रिश्ते को “खट्टा-मीठा” बताते हुए कहा कि जब वे विषय से भटकते हैं तो उन्हें डांट पड़ती है, लेकिन सही तरीके से बोलने पर उन्हें सराहना भी मिलती है। AAP में अंदरूनी खींचतान के संकेत हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया था। इस फैसले के पीछे पार्टी के अंदर मतभेदों की चर्चा भी सामने आई थी। पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि क्या संसद में जनता के मुद्दे उठाना कोई गलती है? चड्ढा ने उठाए थे ये सवाल चड्ढा ने कहा था कि उन्होंने संसद में हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया, लेकिन अब उनके बोलने पर रोक लगाने की बात कही जा रही है। उन्होंने पूछा, “क्या जनता की आवाज उठाना अपराध है?” राजनीतिक मायने क्या हैं? राघव चड्ढा का यह बयान AAP के अंदर चल रही संभावित खींचतान को उजागर करता है। संसद में दिया गया उनका तंज आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की राजनीति को और चर्चा में ला सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Harivansh Narayan Singh being elected Rajya Sabha Deputy Chairman
राज्यसभा के उपसभापति बने हरिवंश, पीएम मोदी और खरगे ने दी बधाई

राज्यसभा के मनोनीत सदस्य Harivansh Narayan Singh को शुक्रवार (17 अप्रैल) को निर्विरोध राज्यसभा का उपसभापति चुना गया। यह उनका इस पद पर तीसरा कार्यकाल है। खास बात यह है कि पहली बार किसी मनोनीत सदस्य को इस पद के लिए चुना गया है। तीसरी बार संभाली जिम्मेदारी हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था, जिसके बाद यह पद खाली था। इसके बाद राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उन्होंने 10 अप्रैल को सदस्य के रूप में शपथ ली और अब 17 अप्रैल को उपसभापति के रूप में निर्वाचित हुए। कैसे हुआ चुनाव केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता J. P. Nadda ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन S Phangnon Konyak ने किया। निर्विरोध चुनाव के बाद उन्हें आधिकारिक रूप से राज्यसभा का उपसभापति घोषित किया गया। पीएम मोदी और खरगे ने दी बधाई प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हरिवंश को बधाई देते हुए उनके अनुभव और कार्यशैली की सराहना की। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर हरिवंश का करियर पत्रकारिता से शुरू हुआ था और बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उनकी कार्यशैली और संसदीय अनुभव को देखते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार इस अहम पद की जिम्मेदारी दी गई है। हरिवंश का लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुना जाना उनके अनुभव और स्वीकार्यता को दर्शाता है। सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से मिली बधाई इस बात का संकेत है कि सदन में उनकी भूमिका संतुलित और प्रभावी मानी जाती है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Harivansh taking oath as Rajya Sabha member after nomination by President Droupadi Murmu.
हरिवंश फिर बने राज्यसभा सदस्य, राष्ट्रपति ने किया मनोनयन

Harivansh Nomination: राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को एक बार फिर उच्च सदन का सदस्य बनाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें मनोनीत किया है। क्यों हुआ मनोनयन? हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था उन्हें उस सीट पर नामित किया गया है, जो पूर्व CJI रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद खाली हुई थी संवैधानिक प्रावधान यह मनोनयन संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत किया गया राष्ट्रपति को राज्यसभा में नॉमिनेटेड सदस्य नियुक्त करने का अधिकार होता है हरिवंश का प्रोफाइल बिहार से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके राज्यसभा के उपसभापति के रूप में भी कार्य कर चुके संसदीय कार्यों में लंबा अनुभव

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Sharad Pawar arrives in wheelchair at Rajya Sabha oath ceremony with newly elected MPs taking oath
राज्यसभा में 19 नए सदस्यों ने ली शपथ, व्हीलचेयर पर पहुंचे शरद पवार

राज्यसभा में सोमवार को 19 नए सदस्यों ने सांसद के रूप में शपथ ली। इस दौरान एनसीपी-एससीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार व्हीलचेयर पर सदन पहुंचे, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। शपथ ग्रहण समारोह राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में संपन्न हुआ। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ शपथ ग्रहण इस मौके पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर भी मौजूद रहे। समारोह का माहौल गरिमामय रहा और नए सदस्यों ने अपने-अपने पद की शपथ ली। महाराष्ट्र से 5 सदस्यों ने ली शपथ महाराष्ट्र से कुल 5 सदस्यों ने शपथ ली। सबसे पहले बीजेपी की माया चिंतामन इवनाते ने शपथ ली इसके बाद शरद पवार ने शपथ ग्रहण किया रामराव सखाराम वडकुटे (BJP) ज्योति नागनाथ वाघमारे (शिवसेना) रामदास अठावले (RPI-A) तमिलनाडु से 6 नए सांसद तमिलनाडु से 6 सदस्यों ने राज्यसभा में प्रवेश किया: कॉन्स्टैंटाइन रविंद्रन (DMK), क्रिस्टोफर मणिकम (कांग्रेस), एलके सुधीश (DMDK), एम थंबीदुरई (AIADMK), तिरुचि शिवा (DMK) और अंबुमणि रामदास (PMK)। पश्चिम बंगाल से 5 सदस्य पश्चिम बंगाल से शपथ लेने वाले सदस्यों में शामिल हैं: बाबुल सुप्रियो (AITC), बिस्वजीत सिन्हा (BJP), मेनका गुरुस्वामी (AITC), राजीव कुमार (AITC) और रुक्मिणी मलिक (AITC)। ओडिशा से 3 सदस्य ओडिशा से मनमोहन सामल (BJP), संरूपत मिश्रा (BJD) और दिलीप कुमार राय (निर्दलीय) ने शपथ ली। क्षेत्रीय भाषाओं में ली शपथ अधिकांश सांसदों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में शपथ ली, जो भारत की भाषाई विविधता को दर्शाता है। गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ समारोह शपथ ग्रहण कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। नए सदस्यों के शामिल होने से राज्यसभा की कार्यवाही को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Raghav Chadha speaking in a video message after removal from AAP leadership role
“मेरी खामोशी को हार मत समझना” - राघव चड्ढा का AAP पर सीधा हमला, एक्शन के बाद पहली प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व को लेकर तीखा संदेश दिया है। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी खामोशी को कमजोरी या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Aam Aadmi Party के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें जानबूझकर खामोश करने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर उठाए गए मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों के कारण उन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। “जनता की आवाज उठाना क्या अपराध है?” अपने बयान में चड्ढा ने सीधे सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दों को उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि वह लगातार आम लोगों से जुड़े विषयों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर रखते रहे हैं, लेकिन इसके चलते उन्हें राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने सिद्धांतों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और भविष्य में भी जनता की आवाज बुलंद करते रहेंगे। राजनीतिक संकेत और संभावित असर राघव चड्ढा का यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात की ओर इशारा करता है। उनके शब्दों से यह साफ झलकता है कि AAP के भीतर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और रणनीति पर असर डाल सकता है। आगे क्या? हालांकि, पार्टी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन चड्ढा का यह खुला संदेश सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे संभालता है और इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Political leaders reacting to Nishikant Dubey’s controversial statement on Biju Patnaik sparking protests in Odisha
निशिकांत दुबे के बयान पर सियासी बवाल: बीजू पटनायक को लेकर टिप्पणी से ओडिशा में मचा घमासान

भुवनेश्वर, 31 मार्च 2026: ओडिशा की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। विवाद की वजह बना है Nishikant Dubey का एक बयान, जिसमें उन्होंने दिग्गज नेता Biju Patnaik को लेकर टिप्पणी की। इस बयान के बाद न सिर्फ विपक्ष, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी नाराजगी जताई है। क्या कहा था निशिकांत दुबे ने? बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन के साथ युद्ध के दौरान बीजू पटनायक, पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru और अमेरिकी खुफिया एजेंसी के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे बीजू पटनायक की छवि पर सवाल उठाने वाला माना गया। नवीन पटनायक का तीखा हमला बीजू पटनायक के बेटे और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल अपमानजनक है, बल्कि तथ्यों से परे भी है। नवीन पटनायक ने यहां तक कह दिया कि ऐसा बयान देने वाले को “मानसिक जांच” की जरूरत है। सफाई में क्या बोले निशिकांत दुबे? विवाद बढ़ता देख निशिकांत दुबे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा बीजू पटनायक की ओर नहीं, बल्कि नेहरू-गांधी परिवार की ओर था। उन्होंने कहा कि बीजू पटनायक उनके लिए भी सम्माननीय हैं और उनके योगदान पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने ओडिशा की जनता से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप न दिया जाए। बीजेपी ने बनाई दूरी इस विवाद के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने भी दुबे के बयान से खुद को अलग कर लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता Baijayant Panda ने बीजू पटनायक को महान देशभक्त बताते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। बीजेडी का विरोध और प्रदर्शन Biju Janata Dal ने इस मुद्दे को लेकर विरोध तेज कर दिया है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया और निशिकांत दुबे से बिना शर्त माफी की मांग की। राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया गया, जिससे यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। क्यों बढ़ा विवाद? बीजू पटनायक ओडिशा ही नहीं, बल्कि देश के एक सम्मानित और प्रभावशाली नेता रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ किसी भी विवादित टिप्पणी को जनता और राजनीतिक दल गंभीरता से लेते हैं। यही वजह है कि यह मामला तेजी से तूल पकड़ गया और अब तक शांत नहीं हुआ है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Digvijaya Singh addressing media after Rajya Sabha tenure ends, hinting at continued political role
दिग्विजय सिंह : राज्यसभा से विदाई, लेकिन सियासत में ‘नई भूमिका’ पर टिकी निगाहें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राज्यसभा से विदाई ले रहे हैं, लेकिन यह विदाई उनके राजनीतिक करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। 79 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय और मुखर बने रहने वाले दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दिया है कि वे न तो “टायर्ड” हैं और न ही “रिटायर्ड”। मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में रणनीतिकार और अहम सिपहसालार की भूमिका निभाते रहे हैं। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि उनकी अगली राजनीतिक भूमिका क्या होगी। क्या खत्म होगी सक्रिय राजनीति? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के लिए सक्रिय राजनीति के विकल्प भले सीमित नजर आ रहे हों, लेकिन उनकी उपयोगिता अभी भी खत्म नहीं हुई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके बेटे जयवर्द्धन सिंह पहले से सक्रिय हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर उनकी भूमिका कम हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें एक रणनीतिक सलाहकार या विचारधारा के प्रतिनिधि के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘सनातन’ पर स्पष्ट रुख दिग्विजय सिंह की पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जो ‘हिंदुत्व’ की राजनीति का विरोध करते हुए खुद को सनातन परंपरा का समर्थक बताते हैं। वे कई बार भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को ‘सच्चे हिंदुत्व’ पर खुली बहस की चुनौती दे चुके हैं। उनका मानना है कि ‘सर्वधर्म समभाव’ ही सनातन धर्म की मूल भावना है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा से सियासी संदेश 2017-18 की उनकी प्रसिद्ध नर्मदा परिक्रमा को उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जाता है। करीब 3,300 किलोमीटर की इस पदयात्रा ने न केवल उन्हें जनता से जोड़ा, बल्कि 2018 के मध्य प्रदेश चुनावों में कांग्रेस की वापसी का आधार भी बनी। कांग्रेस में अब भी मजबूत पकड़ कांग्रेस के भीतर दिग्विजय सिंह को आज भी एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि वे साधु-संतों और धार्मिक वर्गों से संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं-जो कांग्रेस के लिए एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में उनका नाम सामने आना भी उनकी प्रासंगिकता को दर्शाता है, हालांकि अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी मिली। आगे क्या? राज्यसभा से विदाई के बावजूद दिग्विजय सिंह की सक्रियता कम होने के संकेत नहीं हैं। उनके अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और वैचारिक स्पष्टता को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में कांग्रेस की रणनीति और वैचारिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Mallikarjun Kharge delivering emotional farewell speech in Rajya Sabha with smiling members
राज्यसभा में खड़गे का विदाई भाषण: भावुकता, अनुभव और हल्के-फुल्के अंदाज़ ने बांधा समां

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने विदाई भाषण में जहां 54 वर्षों के लंबे संसदीय अनुभव को साझा किया, वहीं माहौल को हल्का बनाने वाला एक बयान भी दे दिया, जिस पर सदन में मुस्कान छा गई-यहां तक कि नरेंद्र मोदी भी हंसी नहीं रोक सके। खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत भावुक अंदाज़ में करते हुए कहा कि विदाई का पल हमेशा कठिन होता है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति वास्तव में “रिटायर” नहीं होता। उन्होंने माना कि दशकों के अनुभव के बाद भी सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। हल्के अंदाज़ में सियासी टिप्पणी अपने भाषण के दौरान खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र करते हुए चुटकी ली- “देवगौड़ा जी ने मोहब्बत हमसे की और शादी मोदी जी के साथ कर ली।” उनकी इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे और माहौल कुछ देर के लिए हल्का हो गया। साथियों के योगदान का जिक्र खड़गे ने कई वरिष्ठ सांसदों के योगदान को याद किया। उन्होंने रामदास अठावले की खास शैली और कविताओं का उल्लेख किया, वहीं शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी जैसे साथियों की तैयारी और सक्रियता की सराहना की। संसदीय मर्यादा पर जोर अपने भाषण के अंत में खड़गे ने सदन में सहयोग और शालीनता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी समझ ही संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, जबकि दूरी और टकराव से गलतफहमियां बढ़ती हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा के 37 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस मौके पर खड़गे ने उम्मीद जताई कि जाने वाले सदस्य आगे भी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान देते रहेंगे।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Nitish Kumar Rajya Sabha speculation.
नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा से जेडीयू में हलचल, पटना में कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की अटकलें सामने आईं। इन खबरों के बाद उनकी पार्टी Janata Dal (United) के भीतर असंतोष की स्थिति दिखने लगी है। गुरुवार सुबह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि नेतृत्व में बदलाव करना है तो जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव कराया जाए। उनका दावा है कि जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था, इसलिए वे अपना कार्यकाल पूरा करें। मंत्री पर हमला, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के पास माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच राज्य के मंत्री Surendra Mehta जब आवास परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तब उन पर कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई। मौके पर आईजी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि राज्य के डीजीपी भी मुख्यमंत्री आवास में मौजूद बताए गए। कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी जेडीयू नेता Rajiv Ranjan Patel के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए नामांकन भरने जाते हैं तो वे उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है और वे चाहते हैं कि वे ही राज्य की कमान संभाले रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राजनीतिक फैसला लिया जाता है तो उसमें कार्यकर्ताओं की राय भी ली जानी चाहिए। उनका सुझाव था कि नीतीश कुमार की जगह किसी और को भेजना हो तो उनके बेटे Nishant Kumar को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर बदलाव नहीं होना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का अलग रुख वहीं जेडीयू के एक अन्य नेता Sanjay Singh ने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार हैं और यदि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है तो कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राज्य की बड़ी आबादी चाहती है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहें। बेटे की राजनीति में एंट्री की चर्चा इसी बीच यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं और पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। इस संभावना ने भी जेडीयू के अंदर राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से वे राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0