Ram Navami 2026

Hazaribagh Ram Navami incident
रामनवमी जुलूस के दौरान हजारीबाग में दो हिंसक वारदात, एक की मौत, दूसरा घायल

हजारीबाग। रामनवमी जुलूस के दौरान शुक्रवार देर रात हजारीबाग जिले में दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हिंसा की गंभीर घटनाएं सामने आईं। एक मामले में एक व्यक्ति की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई, जबकि दूसरी घटना में एक समाजसेवी चाकूबाजी में घायल हो गए। दोनों घटनाओं के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।   पेलावल ओपी क्षेत्र में मुखिया के भाई की हत्या पहली और सबसे गंभीर घटना पेलावल ओपी थाना क्षेत्र के गदोखर गांव में हुई। यहां रामनवमी जुलूस के दौरान गांव के मुखिया के 40 वर्षीय भाई राम कुमार साव उर्फ रामा साव की भुजाली से हमला कर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस के दौरान दो युवक एक वाहन के बोनट पर चढ़कर नाच रहे थे। रामा साव ने उन्हें नीचे उतरने को कहा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद कुछ ही देर में हिंसक रूप ले बैठा और आरोप है कि दोनों युवकों ने रामा साव पर अचानक भुजाली से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से भी रंजिश थी, जिससे मामला और भड़क गया।   कोर्रा थाना क्षेत्र में चाकूबाजी, समाजसेवी घायल दूसरी घटना कोर्रा थाना क्षेत्र के दीपूगढा गोलंबर के पास हुई। यहां कोऑपरेटिव कॉलोनी निवासी और ब्रह्मर्षि समाज के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह पर चाकू से हमला किया गया। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत आरोग्यम अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।   पुलिस ने जांच तेज की दोनों मामलों में पुलिस ने संबंधित थाना क्षेत्रों में जांच तेज कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

Anjali Kumari मार्च 28, 2026 0
Ram Navami 2026
झारखंड में रामनवमी को लेकर हाई अलर्ट, 10 हजार अतिरिक्त पुलिस बल रहेगा तैनात

हजारीबाग। रामनवमी के मद्देनजर झारखंड प्रशासन ने राज्यभर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम पूरे कर लिए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 10 हजार अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। राज्य के सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस मुख्यालय और स्पेशल ब्रांच की ओर से पहले ही सभी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।   हजारीबाग और रांची पर विशेष फोकस प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा के लिहाज से हजारीबाग को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है। इसके अलावा रांची सहित कई अन्य जिलों में भी अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। रामनवमी जुलूस और शोभायात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारी खुद मॉनिटरिंग करेंगे। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि पर्व के दौरान शांति और सौहार्द का माहौल बना रहे।   सजावट और जुलूस मार्गों पर भी अलर्ट स्पेशल ब्रांच ने सड़क किनारे लगाए जाने वाले झंडे, बैनर, झालर और सजावटी सामग्री को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। आशंका जताई गई है कि कुछ असामाजिक तत्व धार्मिक आयोजनों के दौरान लगे सजावटी सामान से छेड़छाड़ कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इस वजह से जुलूस मार्गों पर सुरक्षा और निगरानी दोनों को मजबूत किया गया है।   रांची में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव राजधानी रांची में रामनवमी के अवसर पर ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रशासन ने तय किया है कि कुछ निश्चित समय तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। ऐसे सभी वाहन रिंग रोड के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। इसके अलावा छोटे मालवाहक वाहनों, ऑटो और टोटो के संचालन पर भी समयबद्ध प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि जुलूस मार्गों पर भीड़ और अव्यवस्था से बचा जा सके।   सोशल मीडिया पर सख्त नजर प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आम लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी भ्रामक या अपुष्ट सूचना पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है।

Anjali Kumari मार्च 26, 2026 0
Auspicious items like Shankh, Ram Darbar and Tulsi plant for Ram Navami celebration
Ram Navami 2026: इस पावन अवसर पर घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, बनी रहेगी सुख-समृद्धि और शांति

भारत में आस्था और श्रद्धा के प्रमुख पर्वों में से एक राम नवमी इस वर्ष 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम का जन्म हुआ था, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं को घर लाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इन वस्तुओं से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, सुख-समृद्धि आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। 1. शंख राम नवमी के दिन शंख को घर लाना बेहद शुभ माना जाता है। इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता का वास होता है। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। 2. श्रीराम यंत्र इस पावन अवसर पर श्रीराम यंत्र की स्थापना घर में सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यह परिवार में प्रेम, एकता और सम्मान को बढ़ाता है और बुरी नजर से भी रक्षा करता है। 3. राम दरबार राम नवमी के दिन राम दरबार (राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा) घर लाना अत्यंत शुभ होता है। नियमित पूजा करने से घर में शांति, सौहार्द और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 4. चांदी की वस्तुएं इस दिन चांदी की वस्तुएं खरीदना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में मान-सम्मान और समृद्धि बढ़ती है और भगवान राम की कृपा बनी रहती है। 5. तुलसी का पौधा यदि घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो राम नवमी के दिन इसे अवश्य लगाएं। तुलसी को पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो वास्तु दोष दूर करने और आर्थिक समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Jharkhand weather: dark clouds, possibility of rain and strong winds, people walking with umbrellas
झारखंड में बदला मौसम का मिजाज: 25-26 मार्च को बादल, रामनवमी पर बारिश के आसार, कई जिलों में येलो अलर्ट

झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में 25 और 26 मार्च को आसमान में घने बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम का यह अस्थिर रुख जारी रहेगा, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ त्योहारों और खेती पर भी असर पड़ सकता है। रामनवमी पर बारिश की संभावना इस बार रामनवमी के अवसर पर मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहने वाला है। विभाग का अनुमान है कि इस दिन हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे भगवान श्रीराम का “प्राकृतिक जलाभिषेक” भी माना जा रहा है, लेकिन इससे जुलूस और आयोजन प्रभावित हो सकते हैं। 27-28 मार्च को येलो अलर्ट मौसम केंद्र ने 27 और 28 मार्च के लिए कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इन दिनों 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही मेघ गर्जन, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। लोगों को खुले स्थानों, खासकर पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। 29 को राहत, 30 को फिर बदलेगा मौसम 29 मार्च को मौसम कुछ हद तक राहत देगा। हालांकि बादल बने रहेंगे, लेकिन बारिश की संभावना कम है। वहीं 30 मार्च को एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है और कई जिलों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। तापमान में उतार-चढ़ाव राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री रहा। मेदिनीनगर और सरायकेला जैसे इलाकों में तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में तापमान 4 से 5 डिग्री तक बढ़ सकता है, जिसके बाद हल्की गिरावट दर्ज की जाएगी। जमशेदपुर में भी बारिश के संकेत जमशेदपुर में भी मौसम ने राहत दी है। 27, 28 और 30 मार्च को यहां बारिश के आसार हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से थोड़ा कम रहा। बेमौसम बारिश से किसानों को नुकसान साहिबगंज जिले में बेमौसम बारिश और तेज हवा ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। गेहूं, मक्का, सरसों, मटर, मसूर और चना जैसी फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गई हैं। स्थानीय किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है। छोटे और सीमांत किसान इस नुकसान से आर्थिक संकट में आ गए हैं। जिलों में तापमान का अनुमान उत्तर-पूर्वी जिलों में अधिकतम तापमान 33 से 36 डिग्री के बीच रहेगा, जबकि न्यूनतम 19 से 21 डिग्री तक रहने की संभावना है। रांची, हजारीबाग और बोकारो जैसे इलाकों में तापमान थोड़ा कम रहेगा। वहीं दक्षिणी जिलों में तापमान 37 डिग्री तक पहुंच सकता है। त्योहार और मौसम की चुनौती कुल मिलाकर, झारखंड में इस सप्ताह मौसम पूरी तरह अस्थिर बना रहेगा। रामनवमी जैसे बड़े त्योहार के दौरान बारिश और तेज हवाएं प्रशासन और आम लोगों के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Ram Navami with Lord Ram idol and Pooja during auspicious muhurat timing
राम नवमी 2026: 26 या 27 मार्च? जानें सही तारीख, मुहूर्त और ज्योतिषीय गणना

चैत्र नवरात्रि के समापन के साथ मनाई जाने वाली राम नवमी को लेकर इस वर्ष श्रद्धालुओं के बीच तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रश्न यह है कि वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च को मनाई जाए या 27 मार्च को। पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इसका स्पष्ट उत्तर समझना आवश्यक है। तिथि और समय का गणित हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर हो रहा है और इसका समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर होगा। इस आधार पर: 27 मार्च को नवमी की उदयातिथि (सूर्योदय के समय नवमी) प्राप्त हो रही है जबकि 26 मार्च को दोपहर (मध्याह्न) में नवमी तिथि विद्यमान है, जिसे भगवान राम के जन्म का समय माना जाता है धार्मिक मान्यता क्या कहती है? धार्मिक ग्रंथों और व्रत परंपराओं के अनुसार, राम नवमी का पर्व “मध्याह्न व्यापिनी नवमी तिथि” में मनाना अधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी समय भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। ग्रह-नक्षत्र की स्थिति 26 मार्च (गुरुवार): दोपहर में नवमी तिथि, आर्द्रा नक्षत्र शाम 4:19 बजे तक, चंद्रमा मिथुन राशि में 27 मार्च (शुक्रवार): उदयातिथि के साथ नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र दोपहर 3:24 बजे तक, चंद्रमा कर्क राशि में कब मनाएं राम नवमी? जो श्रद्धालु उदयातिथि (सूर्योदय तिथि) के आधार पर व्रत रखते हैं, वे 27 मार्च को राम नवमी मनाएं जो लोग भगवान राम के जन्म मुहूर्त (मध्याह्न) को महत्व देते हैं, उनके लिए 26 मार्च अधिक उपयुक्त है शुभ मुहूर्त दोनों ही दिनों में राम नवमी पूजा के लिए शुभ समय: सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक मध्याह्न क्षण: 12:27 बजे यह कुल 2 घंटे 28 मिनट का शुभ समय पूजा और राम जन्मोत्सव के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है। महत्वपूर्ण सलाह ध्यान दें कि ये समय दिल्ली के आधार पर हैं। अपने क्षेत्र के अनुसार सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Chitahi Dham in Dhanbad decorated for Ram Navami with devotees gathering for Ram Raj Mandir celebration
धनबाद का चिटाही धाम बना आस्था का केंद्र: 100 साल से रामनवमी पर सजता रामराज मंदिर, हजारों श्रद्धालु जुटते हैं

सदियों पुरानी आस्था, हर साल भव्य आयोजन धनबाद: भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी को लेकर पूरे देश में उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन धनबाद के चिटाही धाम स्थित रामराज मंदिर की अलग ही पहचान है। यहां बीते करीब 100 वर्षों से रामनवमी का पर्व बेहद भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है। यह मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ पूजा का स्थल नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक बन चुका है। पेड़ के नीचे शुरू हुआ था मंदिर, आज बन गया भव्य धाम चिटाही धाम के रामराज मंदिर का इतिहास काफी पुराना और रोचक है। शुरुआत में यहां एक पेड़ के नीचे भगवान राम की पूजा की जाती थी। धीरे-धीरे लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई और यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया। बाद में बाघमारा क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधि ढुल्लू महतो के प्रयासों से मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा वर्ष 2019 में हुई, जिसके बाद इसकी प्रसिद्धि और अधिक बढ़ गई। रामनवमी पर होता है खास शृंगार और पूजा-अर्चना रामनवमी के दिन मंदिर में भगवान श्रीराम और माता सीता का विशेष शृंगार किया जाता है। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक तरीके से सजाया जाता है, जिससे माहौल भक्तिमय हो उठता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। दूर-दराज से आने वाले भक्त भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। ध्वज परिवर्तन और महाभंडारा है खास परंपरा इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा ध्वज परिवर्तन है। जहां अन्य जगहों पर रामनवमी के दिन जुलूस या अखाड़ा निकाला जाता है, वहीं यहां विशाल राम ध्वज को बदला जाता है, जो आस्था का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में भव्य महाभंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं और सेवा भाव से जुड़ते हैं। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से बढ़ती है भव्यता रामनवमी के इस आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी विशेष भागीदारी होती है। धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो मुख्य यजमान के रूप में शामिल होते हैं। उनकी उपस्थिति में पूजा-अर्चना संपन्न होती है, जिससे आयोजन को और अधिक भव्य स्वरूप मिलता है। हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या चिटाही धाम का रामराज मंदिर अब धनबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर साल रामनवमी के मौके पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बढ़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि मंदिर की धार्मिक महत्ता और लोगों की आस्था दिन-ब-दिन मजबूत होती जा रही है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Street play performance promoting drug-free Ram Navami in Hazaribagh with Tarang Group spreading social awareness
हजारीबाग में नशामुक्त रामनवमी की मुहिम: तरंग ग्रुप के नुक्कड़ नाटक ने जगाई सामाजिक चेतना

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग में इस बार रामनवमी का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी प्रतीक बनता दिख रहा है। शहर के हर कोने में भक्ति का माहौल है, लेकिन इसी बीच तरंग ग्रुप की एक पहल ने इस उत्सव को नई दिशा दे दी है। युवाओं द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान लोगों को नशामुक्त और मर्यादित तरीके से रामनवमी मनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। नुक्कड़ नाटक से लोगों तक पहुंचा संदेश तरंग ग्रुप ने 19 मार्च से शहर के विभिन्न इलाकों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान शुरू किया है। कलाकारों की टोली मोहल्लों में जाकर लोगों के बीच प्रस्तुति दे रही है और उन्हें त्योहार की गरिमा बनाए रखने की सीख दे रही है। नाटकों में प्रभावशाली संवाद और गीतों का इस्तेमाल कर लोगों को नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है। “राम का नाम बदनाम न करो” जैसे संदेश दर्शकों के बीच खासा प्रभाव छोड़ रहे हैं। परंपरा और अनुशासन पर दिया जोर तरंग ग्रुप के निर्देशक अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि इस अभियान का मकसद लोगों को यह समझाना है कि रामनवमी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि अनुशासन, मर्यादा और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब जुलूस शांति और सौहार्द के साथ निकाले जाते हैं, तभी इस पर्व की असली पहचान सामने आती है। नशा और अशोभनीय व्यवहार इस परंपरा को नुकसान पहुंचाते हैं। नाटक में दिखी सामाजिक सच्चाई नुक्कड़ नाटक के जरिए कलाकारों ने यह दिखाया कि नशा और फूहड़ता किस तरह त्योहारों की पवित्रता को प्रभावित करते हैं। साथ ही उन्होंने भाईचारे और अनुशासन के महत्व को भी रेखांकित किया। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया और समाज में सकारात्मक बदलाव की जरूरत को उजागर किया। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया। कलाकारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी त्योहार की सफलता तभी है, जब महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। समाज के हर वर्ग से इस दिशा में जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई। लोगों ने की पहल की सराहना स्थानीय लोगों ने तरंग ग्रुप की इस पहल की खुलकर तारीफ की है। उनका मानना है कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बेहद जरूरी हैं। खासकर युवाओं के बीच इस अभियान का प्रभाव साफ देखा जा रहा है, जो इसे और सफल बना रहा है। कलाकारों की मेहनत बनी अभियान की ताकत इस जागरूकता अभियान में कई कलाकार सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिन्होंने अपने अभिनय के जरिए लोगों तक मजबूत संदेश पहुंचाने का काम किया। उनकी भावना और समर्पण ने इस पहल को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। युवाओं के लिए बना प्रेरणा स्रोत तरंग ग्रुप का यह अभियान केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने की कोशिश है। यह खासतौर पर युवा पीढ़ी को जिम्मेदारी का एहसास करा रहा है कि त्योहारों को सही तरीके से मनाना भी एक सामाजिक कर्तव्य है। अगर ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Patna streets adorned with Ram Dhwaj and vibrant Ram Navami procession preparations.
पटना में रामनवमी की भव्य तैयारियां: 52 झांकियां बनेंगी मुख्य आकर्षण, डाकबंगला चौराहे के नाम बदलने पर बढ़ी चर्चा

पटना: बिहार की राजधानी पटना में इस बार रामनवमी को लेकर जोरदार तैयारियां की जा रही हैं। 27 मार्च को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा को लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में उत्साह चरम पर है। इस बार 52 आकर्षक झांकियां शोभायात्रा का मुख्य केंद्र होंगी, जिनमें भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को दर्शाया जाएगा।   52 झांकियों से सजेगी भव्य शोभायात्रा रामनवमी के अवसर पर पटना में निकलने वाली शोभायात्रा हर साल की तरह इस बार भी भव्य होगी। विभिन्न मोहल्लों से निकलने वाली 52 झांकियां धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देंगी। देश के अलग-अलग हिस्सों से कलाकार भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिससे आयोजन का स्वरूप और भव्य हो गया है।   देशभर की सांस्कृतिक झलक दिखेगी आयोजन को खास बनाने के लिए मुंबई की बैंड पार्टी, झारखंड की नृत्य मंडली, काशी से गंगा आरती की टीम और सिख समुदाय के निहंग भी शामिल होंगे। इससे यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनता जा रहा है।   डाकबंगला चौराहे के नाम बदलने की मांग तेज इस बीच पटना के प्रमुख स्थल डाकबंगला चौराहा का नाम बदलकर ‘श्री राम चौक’ करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। भाजपा नेता नितिन नवीन ने कहा कि यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने की कोशिश की जाएगी।   दो लाख राम ध्वज से सजेगा शहर रामनवमी शोभायात्रा अभिनंदन समिति के अध्यक्ष सरदार जगजीवन सिंह बबलू के अनुसार, इस बार पूरे शहर को खास तरीके से सजाया जाएगा। प्रमुख चौक-चौराहों पर करीब दो लाख राम ध्वज लगाए जाएंगे, वहीं एक लाख विक्रम संवत कैलेंडर भी वितरित किए जाएंगे।   आकर्षक लाइटिंग और महिलाओं की भागीदारी डाकबंगला क्षेत्र को बंगाल के चंदन नगर की प्रसिद्ध लाइटिंग से सजाया जाएगा, जो इस आयोजन को और भव्य बनाएगा। साथ ही इस बार शोभायात्रा में महिलाओं की भागीदारी भी बड़ी संख्या में देखने को मिलेगी।   पटना की नई पहचान बनाने की कोशिश नितिन नवीन ने कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र की पहचान गणेश उत्सव और पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा से जुड़ी है, उसी तरह पटना की पहचान भी रामनवमी महोत्सव से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।   सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का संदेश पटना में होने वाला यह आयोजन अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह सांस्कृतिक समरसता और एकता का प्रतीक बनता जा रहा है। हर साल बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि रामनवमी महोत्सव पटना की पहचान बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
idol of Goddess Durga.
Chaitra Navratri 2026: कब है महाअष्टमी और राम नवमी? जानें सही तारीख और पूजा से जुड़े जरूरी नियम

  Chaitra Navratri हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। नवरात्र के करीब आते ही भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि महाअष्टमी और राम नवमी किस दिन पड़ेंगी।   कब है महाअष्टमी 2026? इस साल महाअष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां के आठवें स्वरूप Mahagauri को समर्पित होता है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सुबह कन्याओं को भोजन कराने और उनका आशीर्वाद लेने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।   कब है राम नवमी 2026? राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन Rama के जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं और नवरात्र व्रत का पारण करते हैं।   अष्टमी-नवमी पर क्या करें अष्टमी के दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें, क्योंकि उन्हें देवी का स्वरूप माना जाता है।   अष्टमी के अंत और नवमी के आरंभ के बीच के संधि काल में दीपक जलाकर मां Chamunda का ध्यान करना शुभ माना जाता है।   नवमी के दिन घर में छोटा हवन करना शुभ माना जाता है, इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।   इन बातों का रखें ध्यान अष्टमी और नवमी के दिन घर में झगड़ा या किसी का अपमान करने से बचें।   इन दिनों तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा से दूर रहें और सात्विक भोजन करें।   राम नवमी की पूजा में तुलसी चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नवरात्र के दौरान मां दुर्गा को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।   इन दिनों ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।

surbhi मार्च 14, 2026 0
Devotees carrying saffron flags during Ram Navami Manglawari procession with Lord Ram tableaux and devotional music
रामनवमी 2026: पर्व से पहले निकलेंगे तीन मंगलवारी जुलूस, शहर में गूंजेंगे जय श्रीराम के जयकारे

  27 मार्च को मनाई जाएगी रामनवमी इस वर्ष रामनवमी का पावन पर्व 27 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस मौके पर शहर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राम भक्तों के लिए इस बार खास बात यह है कि रामनवमी से पहले लगातार तीन मंगलवारी जुलूस निकाले जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर भगवान राम के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना देंगे। इन जुलूसों के दौरान ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और झांकियों के साथ पूरा शहर भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा।   10, 17 और 24 मार्च को निकलेंगे मंगलवारी जुलूस रामनवमी से पहले हर साल परंपरागत रूप से मंगलवार को मंगलवारी जुलूस निकाले जाते हैं। इस बार भी तीन अलग-अलग मंगलवार को यह जुलूस आयोजित होंगे। पहला मंगलवारी जुलूस – 10 मार्च दूसरा मंगलवारी जुलूस – 17 मार्च तीसरा मंगलवारी जुलूस – 24 मार्च इन जुलूसों में राम भक्त बड़ी संख्या में शामिल होकर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान की झांकियों के साथ शहर में शोभायात्रा निकालते हैं। भक्त हाथों में भगवा झंडे लेकर भक्ति गीतों और जयकारों के साथ आगे बढ़ते हैं। जुलूस के रास्ते में कई जगहों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, शरबत और जलपान की व्यवस्था भी की जाती है, जिससे पूरे शहर में धार्मिक और उत्सवी माहौल बन जाता है।   26 मार्च को महाअष्टमी पर निकलेगी भव्य झांकी रामनवमी से एक दिन पहले 26 मार्च को महाअष्टमी के अवसर पर भव्य झांकी निकाली जाएगी। इस दिन मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और आकर्षक सजावट से मंदिरों की सुंदरता देखते ही बनेगी। झांकी के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। महाअष्टमी की झांकी देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों से निकलकर इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं।   27 मार्च को दोपहर तक रहेगी नवमी तिथि पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, वाराणसी पंचांग के मुताबिक इस बार नवमी तिथि 27 मार्च को सुबह 5:56 बजे से शुरू होकर शाम 5:12 बजे तक रहेगी। हालांकि भगवान राम के जन्म का मध्याह्न काल दोपहर 12:02 बजे तक माना जाता है। इसी समय को सबसे शुभ माना जाता है और इसी दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए जाएंगे।   पुनर्वसु नक्षत्र से बढ़ेगा पर्व का महत्व इस वर्ष रामनवमी पर पुनर्वसु नक्षत्र का भी विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम का जन्म भी पुनर्वसु नक्षत्र में ही हुआ था। जब नवमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का ऐसा संयोग बनता है, तो रामनवमी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इसी वजह से मंदिरों में हवन, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर भगवान राम का आशीर्वाद लेंगे और पूरे उत्साह तथा श्रद्धा के साथ रामनवमी का पर्व मनाएंगे।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0